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Published / 2021-12-12 15:01:41
मोटी कमाई के पीछे भागते वक्त निवेशक सावधान रहें : शक्तिकांत

एबीएन डेस्क। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रविवार को निवेशकों को आगाह किया कि वे मोटी कमाई के पीछे भागते वक्त सावधान रहें, क्योंकि उसमें बड़ी जोखिम रहती है। गर्वनर दास ने कहा कि निवेशकों या जमाकर्ताओं को स्वयं भी बहुत समझदार होने की आवश्यकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उच्च रिटर्न या उच्च ब्याज दरों से अक्सर उच्च जोखिम जुड़ी होती है। सिर्फ इसलिए कि एक बैंक ज्यादा ब्याज की पेशकश कर रहा है तो उसका पीछा करते हुए उसमें पैसा लगाने से पहले बहुत सावधान रहना चाहिए। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने यह भी कहा कि ऐसे संस्थान भी हैं, जो उच्च रिटर्न दे रहे हैं और वे आर्थिक रूप से सक्षम भी हैं, लेकिन जमाकर्ताओं को हमेशा बहुत सतर्क रहना चाहिए। दिल्ली में आयोजित डिपॉजिटर्स फर्स्ट कार्यक्रम में गवर्नर दास ने कहा कि रिजर्व बैंक इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि बैंकिंग तंत्र मजबूत और लचीला बना रहना चाहिए, लेकिन यह साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हर हितधारक चाहे वह बैंकों का प्रबंधन हो, चाहे वह बैंकों का बोर्ड हो, चाहे वह बैंकों की विभिन्न समितियां हों, लेखा परीक्षा समिति, जोखिम प्रबंधन समिति या कोई अन्य नियामक प्राधिकरण हो, हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है। जमा बीमा राशि अंतिम विकल्प होना चाहिए : बैंकों या वित्तीय संस्थान के डूबने की दशा में जमाकर्ताओं को उनकी जमा के एवज में दी जाने वाली बीमा राशि को लेकर गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह राशि अंतिम विकल्प होना चाहिए। रिजर्व बैंक बैंकों नियामक दिशानिर्देशों को मजबूत कर निगरानी के तरीकों को सशक्त बना रहा है, ताकि बैंकों का कामकाज बहुत लचीले तरीके से आगे बढ़ सके। रिजर्व बैंक ने आम बजट की घोषणा के अनुसार किसी बैंक या वित्त संस्थान के संकटग्रस्त होने की दशा में बैंकों में जमा राशि का अधिकतम पांच लाख रुपये तक का भुगतान करने के लिए जमा बीमा नीति लागू की है। इसमें खाते में जमा राशि या अधिकतम पांच लाख रुपये की राशि बैंक के जमाकर्ता को लौटाने का प्रावधान है।

Published / 2021-12-12 12:28:57
सालों से फंसी जमाकर्ताओं की 1300 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि वापस मिली : मोदी

एबीएन बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को डिपॉजिट फर्स्ट 5 लाख रुपए तक के समयबद्ध जमा राशि बीमा भुगतान की गारंटी विषय पर आधारित एक समारोह को संबोधित किया है। पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में कहा कि आज देश के लिए बैंकिंग सेक्टर के लिए और देश के करोड़ों बैंक अकाउंट होल्डर्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि आज के आयोजन का जो नाम दिया गया है उसमें डिपॉजिटर्स फर्स्ट की भावना को सबसे पहले रखना, इसे और सटीक बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ दिनों में एक लाख से ज्यादा जमाकर्ताओं को बरसों से फंसा हुआ उनका पैसा वापस मिला है। मोदी ने कहा कि ये राशि 1300 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। मोदी ने आगे कहा कि दशकों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का कैसे समाधान निकाला गया है, आज का दिन उसका साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश समस्याओं का समय पर समाधान करके ही उन्हें विकराल होने से बचा सकता है लेकिन सालों तक एक प्रवृत्ति रही कि समस्याओं को टाल दो। भारत समस्याओं को टालता नहीं : पीएम मोदी ने कहा कि आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर लगाता है, आज भारत समस्याओं को टालता नहीं है। उन्होंने कहा कि यानी अगर बैंक डूबा, तो डिपॉजिटर्स को, जमाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपए तक ही मिलने का प्रावधान था। ये पैसे भी कब मिलेंगे, इसकी कोई समय सीमा नहीं तय थी। मोदी ने कहा कि गरीब की चिंता को समझते हुए, मध्यम वर्ग की चिंता को समझते हुए उन्होंने इस राशि को बढ़ाकर फिर 5 लाख रुपए कर दिया। मोदी ने कहा कि हमारे देश में बैंक डिपॉजिटर्स के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था 60 के दशक में बनाई गई थी। पहले बैंक में जमा रकम में से सिर्फ 50 हजार रुपए तक की राशि पर ही गारंटी थी। फिर इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन करके एक और समस्या का समाधान करने की कोशिश की है। मोदी ने आगे कहा कि पहले जहां पैसा वापसी की कोई समयसीमा नहीं थी, अब हमारी सरकार ने इसे 90 दिन यानी 3 महीने के भीतर अनिवार्य किया है यानी बैंक डूबने की स्थिति में भी, 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिल जाएगा।

Published / 2021-12-11 03:04:16
अमेजन पर लगा 9750 करोड़ रुपए का जुर्माना

एबीएन डेस्क। ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन पर इटली में 1.13 अरब डॉलर (करीब 9750 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगा है। कंपनी पर यूरोप में अपने बाजार प्रभुत्व का दुरुपयोग कर छोटे विक्रेताओं या प्रतिद्वंदियों को दबाने का आरोप है। जुर्माना इटली की एंटीट्रस्ट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने लगाया है। अथॉरिटी ने गुरुवार को कहा कि छोटे प्रतिस्पर्धियों को परेशान करने के लिए अमेजन ने थर्ड पार्टी सेलर्स को लाभ पहुंचाया। उन्हें अपनी लॉजिस्टिक सेवाओं और डिलीवरी सिस्टम का उपयोग करने दिया, ताकि वे प्रतिद्वंद्वियों के प्रॉडक्ट की बिक्री और डिलीवरी को प्रभावित करें। इटली में यह अथॉरिटी किसी भी कंपनी पर उसके कुल राजस्व का 10% तक जुर्माना लगा सकती है। अमेजन ने हाई कोर्ट में अपील करने की बात कही है। इटली में अथॉरिटी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की कानूनी व्यवस्था है। कोर्ट जुर्माने की राशि को कम या ज्यादा करने पर फैसला ले सकती है। रेगुलेटरी अथॉरिटी ने दो साल तक चली जांच में पाया कि सााल 2019 में अमेजन का ऑनलाइन बाजार में मार्केट शेयर उसके करीबी प्रतिद्वंद्वियों से 5 गुना ज्यादा था, जो पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा था। इटली में 2019 में थर्ड पार्टी सेलर्स की ऑनलाइन जितनी भी प्रॉडक्ट बिक्री हुई थी, उसमें 70 फीसदी सिर्फ अमेजन पर हुई थी।

Published / 2021-12-11 02:58:22
सुधारों के लिए समय एवं सहमति का भी ध्यान रखना जरूरीः रंगराजन

एबीएन डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने शुक्रवार को कहा कि व्यवस्था की उत्पादकता एवं प्रभाव बढ़ाने के लिए सुधार करने जरूरी हैं लेकिन इसी के साथ सुधारों पर अमल करने का समय भी काफी अहम है। रंगराजन ने आईसीएफएआई बिज़नेस स्कूल में एक व्याख्यान देते हुए कहा कि सुधार किए जाने पर आलोचना का सामना करना ही पड़ता है और यह कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1991 के आर्थिक सुधार भी संकट की छाया में लागू किए गए थे। उन्होंने कहा, वर्ष 1991 में आर्थिक सुधार होने पर भी आलोचक सामने आए थे। उस समय संसद में बैठे कुछ लोगों को लग रहा था कि हमने खुद को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के हाथों बेच दिया है। 1991 में लागू हुए कई सुधार भी संकट की छाया में ही लागू किए जा सके थे हालांकि रंगराजन कहा कि अब ऐसा नहीं किया जा सकता है लिहाजा सुधारों के पहले अधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, में सहमति बनाने की जरूरत है। हम सुधारों की दिशा में जितना भी आगे बढ़ेंगे, हमें हितधारकों के साथ उतनी ही ज्यादा सहमति बनाने की जरूरत होगी। लिहाजा सुधारों का समय और उसका क्रम भी अहम है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व प्रमुख ने कहा कि श्रम सुधारों को लागू करने का सबसे अच्छा समय तब है जब अर्थव्यवस्था में उछाल का दौर हो। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्यों को एक साथ मिलकर सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उन्होंने कृषि विपणन समेत सभी क्षेत्रों में सुधार किए जाने को जरूरी बताते हुए कहा कि सरकार को इन्हें लाने के पहले सहमति बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उनका यह बयान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन के संदर्भ में खासा अहम है। इसकी वजह से सरकार को ये तीनों सुधार वापस भी लेने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए अगले पांच वर्षों तक सालाना नौ फीसदी की दर से वृद्धि करने की जरूरत है।

Published / 2021-12-09 02:53:40
डिजिटल मुद्रा के साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी मुख्य चुनौतियां: RBI

एबीएन डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि डिजिटल मुद्रा के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी मुख्य चुनौतियां हैं। आरबीआई के केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीटी) की ओर कदम बढ़ाए जाने के साथ उन्होंने यह बात कही। मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाता सम्मेलन में दास ने कहा, नई व्यवस्था के मामले में साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी मुख्य चुनौतियां हैं। हमें इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले नकली मुद्रा को लेकर चिंता रहती थी। इस प्रकार की चीजें सीबीडीसी के मामले में हो सकती है। इससे निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचे के साथ अन्य जरूरी उपाय करने की जरूरत होगी। डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा कि दो प्रकार के सीबीडीसी होंगे। पहला थोक और दूसरा खुदरा होगा। थोक डिजिटल मुद्रा के मामले में काफी काम हुआ है, जबकि खुदरा मामला थोड़ा जटिल है और इसमें कुछ समय लगेगा। उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि उसने दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के अनुरूप सरकारी मुद्रा के रूप में सीबीडीसी पर काम शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई इस मामले में अगले साल की शुरुआत में पायलट कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रहा है। शंकर ने साफ किया सीबीडीटी मौजूदा कागजी मुद्रा का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर जोखिम को लेकर बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा, थोक खाता आधारित मामले में काफी काम हुआ है। खुदरा मामला जटिल है और इसमें समय लगेगा। जो भी पहले तैयार होगा, उसे पायलट आधार पर जारी किया जाएगा।

Published / 2021-12-06 15:36:11
एक जनवरी से 2.5% तक महंगे होंगे टाटा मोटर्स के वाहन

एबीएन डेस्क, रांची। घरेलू वाहन कंपनी टाटा मोटर्स अपने वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में एक जनवरी से 2.5 प्रतिशत तक वृद्धि करने जा रही है। कंपनी ने कहा है कि जिंसों के दाम बढ़ने और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी की वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ रहा है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजारों को बताया कि वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का यह फैसला सभी श्रेणियों पर लागू होगा। मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहन, मध्यवर्ती एवं हल्के वाणिज्यिक वाहन, छोटे वाणिज्यिक वाहन और बसों के दाम भी बढ़ेंगे। टाटा मोटर्स ने कहा, इस्पात, एल्युमिनियम और अन्य बहुमूल्य धातुओं के दामों में हुई वृद्धि के साथ दूसरे कच्चे माल की भी लागत बढ़ने से वाणिज्यिक वाहनों के दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है। कंपनी ने कहा कि इस लागत वृद्धि का एक बड़ा बोझ वह खुद उठा रही है लेकिन वाहनों की कीमतों में थोड़ी वृद्धि कर इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर भी डालना पड़ रहा है। इसके पहले मारुति सुजुकी, मर्सिडीज बेंज और आॅडी ने भी अगले महीने से अपने वाहनों के दाम बढ़ाने की घोषणा की है।

Published / 2021-12-05 13:58:47
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर काफी अटकलें चल रही हैं, जो ठीक बात नहीं हैं: सीतारमण

एबीएन बिजनेस डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर कई तरह की अटकलें चल रही हैं और ये अटकलें अच्छी बात नहीं हैं। सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी के विनिमयन की तैयारियों के बीच उनका यह बयान आया है। सीतारमण ने एचटी लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छी तरह से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया विधेयक मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद निश्चित रूप से संसद में आने जा रहा है। एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, बहुत सारी अटकलें चल रही हैं ये बिल्कुल ठीक बात नहीं हैं। क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा का नियमन विधेयक, 2021 को लोकसभा के बुलेटिन-भाग दो में शामिल किया गया है। इसे शीतकालीन सत्र में ही पेश किया जाएगा। बुलेटिन में कहा गया है कि यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के लिए एक सुविधाजनक रूपरेखा तैयार करने से संबंधित है। इसमें देश में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध का प्रावधान भी है। हालांकि, यह क्रिप्टोकरेंसी में अंतर्निहित तकनीक को बढ़ावा देने और उसके इस्तेमाल के लिए कुछ अपवादों की अनुमति देता है। इस सप्ताह की शुरुआत में राज्यसभा में सीतारमण ने कहा था कि नए विधेयक में वर्चुअल मुद्रा के क्षेत्र में आ रहे बदलावों का ध्यान रखा जाएगा और इसमें पुराने विधेयक की उन चीजों को भी शामिल किया जाएगा जिन्हें पहले नहीं लिया जा सका था। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार का मीडिया में भ्रामक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, उन्होंने कहा कि भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के दिशानिर्देशों का अध्ययन किया जा रहा है और उनके नियमनों पर भी गौर किया जा रहा है, ताकि हम जरूरत पड़ने पर किसी तरह का रुख अपना सकें या कोई फैसला ले सकें। उन्होंने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक लोगों को क्रिप्टोकरेंसी से आगाह कर रहे हैं। यह काफी ऊंचे जोखिम वाला क्षेत्र है। आर्थिक मोर्चे पर सीतारमण ने कहा कि इस साल देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का आंकड़ा काफी उत्साहजनक रहेगा। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। खाद्य मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ की वजह से आपूर्ति में अड़चनें आ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनवरी में उन उत्पादों के दाम नीचे आएंगे जिनकी आपूर्ति अभी कम है। खाद्य तेल के बारे में सीतारमण ने कहा कि और आयात की अनुमति दी गई जिससे कीमतों को नीचे लाने में मदद मिलेगी।

Published / 2021-12-04 13:21:56
बजट में विदेशी बैंकों को मिल सकती है राहत, 15% तक घटा सकती है टैक्स

एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार भारतीय विदेशी बैंकों की स्थानीय शाखाओं को बैंकों के समान कर की पेशकश के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जिससे उनके लिए कर की दर लगभग 15 फीसदी अंक घटकर 22 फीसदी रह जाएगी। लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, दो सरकारी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा, हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। आगामी बजट में इससे संबंधित एक घोषणा हो सकती है। वित्त मंत्रालय कुछ विदेशी लेंडर्स द्वारा दिए गए एक प्रस्तुतीकरण पर विचार कर रहा है। विदेशी बैंक, घरेलू लेंडर्स की तुलना में खासा ज्यादा कर देते हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट टैक्स की दर में की गई कटौती उन पर लागू नहीं होती है। भले ही, यदि वे अपने आॅपरेशन को सब्सिडियरीज में बदल दें तो उन पर कम कर लग सकता है लेकिन इससे जुड़ी जटिलताओं और नियामकीय चुनौतियों को देखते हुए कुछ ने ही यह विकल्प चुना है। बैंकों ने सरकार से उनके साथ भारतीय बैंकों के समान व्यवहार करने के लिए कहा है, क्योंकि उन पर समान नियम और मानदंड लागू होते हैं। साथ ही वे लाभ और कर योग्य आय की गणना के लिए समान तरीका ही उपयोग करते हैं। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, भले ही घरेलू बैंकों ने कर कानूनों के तहत 22 फीसदी (सरचार्ज और सेस अतिरिक्त) के कम दर वाले विकल्प को चुना है, लेकिन विदेशी कंपनियों को यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। इससे खासी असमानता की स्थिति पैदा हो गई है। विदेशी बैंकों की शाखाओं पर कर की 40 प्रतिशत की मूल दर के अलावा सरचार्ज और सेस भी लिया जाता है।

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