एबीएन डेस्क। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकारी फर्मों का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 2018-19 में भी बड़ी संख्या में जारी रहने की उम्मीद है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सबसे पहले रेल कंपनियों आरआईटीईएस और आईआरएफसी लिमिटेड के आईपीओ मई तक आम लोगों के लिए आ सकते हैं। इसके अलावा दो और रेल पीएसयू आईआरसीओएन और आरवीएनएल के आईपीओ भी बाद में इसी साल आने वाले हैं। बहरहाल, आईआरसीटीसी का आईपीओ लाने की योजना अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। न तो रेल मंत्रालय और न ही निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग इसे सार्वजनिक करने के पक्ष में है। 2018-19 का संयुक्त विनिवेश लक्ष्य 800 अरब रुपये है। इस वित्त वर्ष में आने वाले अन्य आईपीओ में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स के आईपीओ शामिल हैं। इनके अलावा 3 जनरल इंश्योरेंस पीएसटी का विलय कर एकल इकाई बनाई जोगी और उसके बाद उसे सूचीबद्ध कराए जाने की योजना है। इनमें नैशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं। दो शिपबिल्डरों का आईपीओ आगामी वित्त वर्ष की पहली छमाही में आने की उम्मीद है। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों के मुताबिक आरआईटीईएस और आईआरएफसी की सूचीबद्धता मई के आखिर के पहले तक होगी और पहले आरआईटीईएस को सूचीबद्ध कराया जाएगा। आरआईटीईएस के आईपीओ में 12 प्रतिशत केंद्र की हिस्सेदारी हो सकती है जबकि आईआरएफसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी कम की जाएगी। आरवीएनएल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की योजना बनाई गई है। इसके पहले आईआरएफसी की सूचीबद्धता को लेकर संदेह था। इसकी वजह अलग कर देनदारी का मसला था। बहरहाल, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने अब कंपनी को 63.92 अरब रुपये संचित विलंबित कर देयता से मुक्त कर दिया है, जिसे कंपनी के नेटवर्थ में जोड़ा जाएगा। आईआरसीटीसी के आईपीओ की योजना को ठंडे बस्ते मेंं डाले जाने की कई वजहें हैं। आईआरसीटीसी का आईपीओ न लाए जाने की वजहों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, कंपनी की आमदनी का बड़ा स्रोत टिकट की बुकिंग पर सेवा शुल्क व अन्य सेवाएं हैं। सरकार ने सेवा शुल्क वापस ले लिया है। ऐसे में निवेशकों की इसमें दिलचस्पी रहने की उम्मीद कम है। नोटबंदी की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की थी। इसमें से आईआरसीटीसी द्वारा लिया जाने वाला सेवा शुल्क खत्म करना शामिल था। इस कदम से आईआरसीटीसी का 500 करोड़ रुपये राजस्व खत्म हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि वित्त मंत्रालय इस घाटे की भरपाई करेगा, लेकिन सिर्फ 800 करोड़ रुपये दिए गए। एसबीआई कैपिटल मार्केट, आईडीबीआई कैपिटल मार्केट ऐंड सिक्योरिटी, इलारा सिक्योरिटीज इंडिया और आईडीएफसी बैंक आरआईटीईएस के सलाहकार हैं, जबकि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एसबीआई कैप्स, आईडीएफसी और एचएसबीसी आईआरएफसी के बोली प्रबंधक हैं। 2017-18 में कंपनियों के रिकॉर्ड 7 आईपीओ आए। इससे 240 अरब रुपये से ज्यादा एकत्र हुए, जो साल भर के पुनरीक्षित विनिवेश लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये का एक चौथाई है। इन कंपनियों में न्यू इंडिया एश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्प, एचएएल, भारत डायनॉमिक्स, कोचीन शिपयॉर्ड और हुडको शामिल हैं।
एबीएन डेस्क। देश में कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रॉन के मामले बढ़ने के बीच रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों की मांग में जोरदार उछाल आया है। पिछले दो सप्ताह के दौरान एफएमसीजी कंपनियों की मांग काफी तेजी से बढ़ी है। इन कंपनियों ने आपूर्ति के किसी तरह के संकट से बचने के लिए स्टॉकिस्टों को अधिक माल भेजना शुरू कर दिया है। पारले प्रोडक्ट्स, डाबर इंडिया और आईटीसी जैसी कंपनियां महामारी की नई लहर के कारण आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए कच्चे माल का अतिरिक्त स्टॉक रख रही हैं। पूर्व में हुए अनुभव के मद्देनजर इन कंपनियों ने यह कदम उठाया है। हालांकि, ये कंपनियां विनिर्माण सामग्री की मुद्रास्फीति से प्रभावित हैं। एफएमसीजी कंपनियों का मानना है कि कोविड के मामलों में अचानक वृद्धि और कुछ राज्यों में स्थानीय स्तर पर लगाए अंकुशों से उनकी आउट ऑफ होम चैनल उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, घरेलू उपभोग के उत्पादों और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सामान की मांग तेज होगी। कंपनियों को उम्मीद है कि डिजिटलीकरण में तेजी के साथ ई-कॉमर्स और प्रौद्योगिकी मंच पर मौजूदगी एफएमसीजी उत्पादों की सतत आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा, ‘‘पिछले दो हफ्तों में हमने बाजार में मांग में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी है। हम इस बात को समझ रहे हैं कि अब उपभोक्ता बाहर निकलकर सामान नहीं खरीदना चाहेंगे।’’ बिस्कुट क्षेत्र की कंपनी ने ताजा परिस्थितियों के मद्देनजर पहले से बफर स्टॉक रखा है। डाबर ने भी बढ़ाई अपने उत्पादों की आपूर्ति, बाजार की निगरानी कर रही है आईटीसी
एबीएन डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के विनिवेश की दिशा में अब तक हुई प्रगति की शुक्रवार को समीक्षा की। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा कि सीतारमण ने एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे और वित्त मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। सरकार की इस वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च 2021 तक एलआईसी का आईपीओ लाने की योजना है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के तय विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने में एलआईसी का आईपीओ काफी अहम भूमिका निभा सकता है। अभी तक सरकार कई सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री से सिर्फ 9,330 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। एलआईसी के विनिवेश प्रबंधन के लिए सरकार ने सितंबर 2021 में दस मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति की थी जिनमें गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप और नोमुरा भी शामिल हैं। वहीं सिरिल अमरचंद मंगलदास को आईपीओ के लिए विधि सलाहकार नियुक्त किया गया है। सरकार इस आईपीओ में बिक्री के लिए रखी जाने वाली हिस्सेदारी का अनुपात तय करने में लगी हुई है। इसके अलावा एलआईसी में विदेशी निवेशकों को हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी देने के बारे में भी गौर कर रही है। सेबी नियमों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक किसी आईपीओ में शेयर खरीद सकते हैं लेकिन एलआईसी अधिनियम में विदेशी निवेश का कोई प्रावधान न होने से इसके लिए जरूरी संशोधन करने पड़ सकते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने गत जुलाई में एलआईसी के विनिवेश प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। इसे विनिवेश प्रक्रिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
एबीएन डेस्क। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 में 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि एक साल पहले इसमें 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमान में यह कहा गया है। एनएसओ ने कहा, वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2021-22 में 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जबकि एक साल पहले 2020-21 में इसमें 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। आधार मूल्य पर वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2021-22 में 135.22 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में 124.53 लाख करोड़ रुपये था। यह 8.6 प्रतिशत वृद्धि को बताता है।
एबीएन डेस्क। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण के लिए बृहस्पतिवार को 12,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। इसका इस्तेमाल सात राज्यों में ग्रिड एकीकरण और करीब 20,000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के पारेषण में किया जाएगा। इस योजना के तहत 10,750 सर्किट किलोमीटर की बिजली पारेषण लाइन बिछाने और बिजली उपकेंद्रों के करीब 27,500 मेगा वोल्ट-एम्पीयर अंतरण का लक्ष्य रखा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण का क्रियान्वयन वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 के दौरान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना में किए जाने वाले कुल निवेश का 33 फीसदी केंद्रीय मदद के रूप में है। ठाकुर ने कहा कि इस योजना के पहले चरण का करीब 80 फीसदी कार्य पूरा किया जा चुका है। पहले चरण के लिए 10,142 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
एबीएन डेस्क। दिग्गज टेक कंपनी एपल ने सभी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। सोमवार को कंपनी की मार्केट वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई जो कि अब तक की सबसे अधिक वैल्यू है। एपल सोमवार दोपहर को तीन फीसदी की वृद्धि के साथ 182.88 डॉलर पर कारोबार कर रही थी। अक्तूबर के बाद से कंपनी ने अब तक अपने बाजार पूंजीकरण में लगभग 700 बिलियन डॉलर जोड़े हैं। कोरोना महामारी के बावजूद IPhone निर्माता कंपनी के शेयर की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है। कंपनी को मुनाफा का सबसे बड़ा फायदा लॉकडाउन के दौरान ही हुआ क्योंकि काम, शिक्षा, मनोरंजन से जुड़े रहने के लिए प्रौद्योगिकी की मांग बढ़ गई थी। महज 16 महीने में एक ट्रिलियन मार्केट वैल्यू की बढ़ोतरी : द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1976 में शुरू हुई एपल ने अगस्त 2018 में एक ट्रिलियन डॉलर का जादुई आंकड़ा छुआ था। उसे यह उपलब्धि हासिल करने में 42 साल का लंबा सफर तय करना पड़ा। लेकिन इसके बाद दो साल में ही कंपनी की मार्केट वैल्यू दो ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई। जबकि अगले ट्रिलियन यानी तीन ट्रिलियन मार्केट वैल्यू होने में कंपनी को सिर्फ 16 महीने और 15 दिन लगे।
एबीएन डेस्क। सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सऐप ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में कहा कि उसने नवंबर 2021 में 17.5 लाख से अधिक भारतीय खातों को बंद किया, जबकि इस दौरान उसे 602 शिकायतें मिलीं। अपनी ताजा रिपोर्ट में मैसेजिंग मंच ने कहा कि इस दौरान व्हाट्सऐप पर 17,59,000 भारतीय खातों को बंद किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खातों की पहचान +91 फोन नंबर के जरिए की जाती है। व्हाट्सऐप के एक प्रवक्ता ने कहा, आईटी नियम 2021 के अनुसार हमने नवंबर महीने के लिए अपनी छठी मासिक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस उपयोगकर्ता-सुरक्षा रिपोर्ट में उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का ब्यौरा और व्हाट्सऐप द्वारा की गई संबंधित कार्रवाई के साथ ही व्हाट्सऐप द्वारा खुद की गई कार्रवाइयां भी शामिल हैं। प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सऐप ने नवंबर में 17.5 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगा दिया। फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी ने इससे पहले कहा था कि 95 प्रतिशत से अधिक प्रतिबंध स्वचालित या बल्क मैसेजिंग के अनधिकृत उपयोग के कारण हैं।
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