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Published / 2022-03-26 17:26:24
अनुमान : इस साल चीनी निर्यात 7% बढ़कर 75 लाख टन होगा

एबीएन बिजनेस डेस्क। सितंबर को समाप्त होने वाले चीनी विपणन वर्ष 2021-22 में भारत का चीनी निर्यात 7 प्रतिशत बढ़कर 75 लाख टन होने का अनुमान है। सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021-22 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी निर्यात 75 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष यह निर्यात 70 लाख टन का हुआ था। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में देश से चीनी के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने हाल ही में कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी की मांग बढ़ने और उच्च उत्पादन के कारण इस साल अक्टूबर 2021 और फरवरी के बीच चीनी निर्यात दो गुना बढ़कर 47 लाख टन हो गया है। इस्मा के मुताबिक, अब तक लगभग 64-65 लाख टन चीनी निर्यात का अनुबंध किया गया है। इसमें से चालू चीनी सत्र में फरवरी 2022 के अंत तक भारत से लगभग 47 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में लगभग 17.75 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। इस्मा का अनुमान है कि चीनी उद्योग को वर्ष 2021-22 के विपणन वर्ष में रिकॉर्ड 75 लाख टन चीनी का निर्यात करने में सफल होना चाहिए। इस्मा ने चीनी की घरेलू खपत 272 लाख टन और उत्पादन 333 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है।

Published / 2022-03-26 12:40:39
आर्थिक सुधार : 400 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर है भारत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में महामारी के बाद हुए आर्थिक सुधार ने भारत को 400 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मदद की है। किसी वित्तीय वर्ष में निर्यात का इतना बड़ा लक्ष्य भारत ने पहली बार हासिल किया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जुटाए गए प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक भारत ने 1 अप्रैल, 2021 से 21 मार्च, 2022 तक अमेरिका को 73 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात किया जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 47 फीसदी अधिक है। कुल निर्यातों की तुलना में अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात की हिस्सेदारी 18.2 फीसदी है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के साथ साथ सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य भी है। सोमवार को सरकार ने कहा था कि भारत ने निर्धारित समय से पहले ही 400 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात लक्ष्य को हासिल कर लिया। यह पिछले वित्त वर्ष में हुए निर्यात से 37 फीसदी अधिक है। सरकार 31 मार्च तक 410 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुंचने को लेकर आश्वस्त है। इसकी वजह यह है कि भारत रोजाना मोटे तौर पर 1.3 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात कर रहा है। हालांकि, चीन में कोविड-19 की ताजा लहर आने से उत्पन्न बाधाओं के कारण इस पड़ोसी देश को किए जाने वाले निर्यात में अपेक्षाकृत धीमी गति से वृद्घि हुई है। चीन में कई जगहों पर लॉकडाउन तक लगाया गया है। वित्त वर्ष के पहले 11 महीने में चीन को किया जाना वाला निर्यात केवल 7 फीसदी बढ़ा और इसका मूल्य 19.8 अरब डॉलर था। यह चीन को साल भर में 22 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात लक्ष्य का 90 फीसदी है। लक्ष्य इस महीने के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। निर्यातकों को इस बात का भय है कि इस साल चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा। कोविड-19 से उत्पन्न बाधाओं के बाद पश्चिमी बाजारों में सुधार के अलावा उच्च निर्यात के लिए अन्य कारक भी जिम्मेदार हैं जिसमें पिछले साल से जिंस कीमतों में आई तेजी के साथ साथ घरेलू मुद्रा में मामूली गिरावट शामिल है। जहां तक जिंसों की बात है तो वित्त वर्ष 2022 में निर्यात वृद्धि इंजीनियरिंग सामानों, पेट्रोलियम उत्पादों, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों तथा कपड़ों के दम पर हासिल हुई है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने जिन आंकड़ों का अवलोकन किया है उसके मुताबिक भारत ने 1 अप्रैल, 2021 से 21 मार्च, 2022 तक 107.8 अरब डॉलर मूल्य के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात किया जो कि सालाना आधार पर 46.5 फीसदी अधिक है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात का पूरे वर्ष के लिए रखा गया लक्ष्य भी हासिल हो गया और सामानों के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक चौथाई से अधिक रही। इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात के लिए शीर्ष पांच गंतव्य अमेरिका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, इटली और जर्मनी है। कुल निर्यातों में 15 फीसदी की हिस्सेदारी वाले पेट्रोलियम उत्पाद लक्ष्य के 110 फीसदी पर पहुंच गए। 21 मार्च तक 59.6 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया गया जो कि सालाना आधार पर 141 फीसदी अधिक है। आंकड़ों से पता चलता है कि कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद, सूती धागा/कपड़े/तैयार सामान, हथकरघा उत्पाद, कोयला और अन्य अयस्क, इंजीनियरिंग सामान और प्लास्टिक तथा लिनोलियम ऐसे जिंस रहे जिनका निर्यात 21 मार्च तक लक्ष्य से अधिक हुआ। आधिकारिक बयान के मुताबिक, इंजीनियरिंग सामानों, परिधान और वस्त्रों आदि के निर्यात से संकेत मिलते हैं कि भारत प्राथमिक जिंसो का बड़ा निर्यातक है, यह भ्रम धीरे धीरे दूर हो रहा है।

Published / 2022-03-25 17:43:20
एक महीने में RIL ने दिया 14% रिटर्न, जानें ताजा हाल...

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले एक महीने में 14 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान बेंचमार्क सेंसेक्स में मात्र तीन फीसदी तेजी आई है। रिलायंस का शेयर अपने ऑल टाइम हाई की तरफ बढ़ रहा है। इस शेयर का ऑल टाइम हाई 2750 रुपए है और अभी यह इससे पांच फीसदी दूर है। रिलायंस का शेयर बीएसई पर दोपहर बाद 12.30 बजे 0.77% तेजी के साथ 2597.80 रुपए पर ट्रेड कर रहा था जबकि इस दौरान सेंसेक्स 275.54 यानी 0.48% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। टेक्निकली इस शेयर ने 2250 रुपए पर स्टॉन्ग बेस बनाया है। शॉर्ट टर्म में यह 2,700 से 2,750 रुपए तक जा सकता है जबकि लॉन्ग टर्म में 3,000 रुपए का आंकड़ा छू सकता है। रिलायंस अभी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी है। क्यों बढ़ रहा है शेयर : जानकारों का कहना है कि रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी के कारण कंपनी के शेयरों में तेजी दिख रही है। तेल और गैस की कीमत में तेजी से कंपनी का सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) ऑल टाइम हाई पर है। इतना ही नहीं कंपनी का टेलिकॉम बिजनस भी जियोपॉलिटकल तनाव और महंगाई में तेजी से बेअसर रहा है। साथ ही कंपनी रिटेल बिजनस में भी अपनी संभावनाएं बढ़ा रही हैं। कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी बिजनस को लगातार बढ़ा रही है और इसके लिए उसने कई कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है। रिलायंस रिटेल वेंचर्स ने हाल में Purple Panda Fashions Pvt. Ltd में 89 फीसदी हिस्सेदारी 950 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके पास महिलाओं के इनरवियर और लॉन्ज वियर ब्रांड Clovia का मालिकाना हक है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रिलायंस का पेट्रोकेमिकल बिजनस में फायदा मिलेगा। कंपनी के एवरेज रेवेन्यू पर यूजर में भी तेजी की उम्मीद है जो रिलायंस के शेयरों के लिए अच्छी खबर है।

Published / 2022-03-24 14:43:36
एयरटेल ने 5जी पर इमर्सिव वीडियो एंटरटेनमेंट के रोमांचक भविष्य का किया प्रदर्शन

टीम एबीएन, रांची। भारत की प्रमुख कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर, भारती एयरटेल (एयरटेल) ने आज वीडियो मनोरंजन के भविष्य को बदलने और उपयोगकर्ता अनुभव को अगले स्तर तक ले जाने का काम किया है। पलक झपकते ही मिलने वाली 5जी की उच्च गति क्षमताओं का प्रदर्शन किया। अपने हाई स्पीड 5G टेस्ट नेटवर्क पर अत्याधुनिक इमर्सिव वीडियो तकनीकों का उपयोग करते हुए, एयरटेल ने 1983 क्रिकेट विश्व कप के दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ कपिल देव की प्रसिद्ध 175 नॉट आउट पारी को स्टेडियम के अनुभव के साथ रिक्रिएट किया। 4K मोड में विशेष रूप से तैयार किए गए 175 रिप्लेड वीडियो के माध्यम से मैच के महत्वपूर्ण क्षणों को जीवंत किया गया। अब तक 1983 क्रिकेट वर्ल्ड के दौरान इस दिन टीवी टेकनीशियनों की हड़ताल की वजह से कपिल देव की इस महान पारी का कोई वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं था। भारत की पहली 5G संचालित होलोग्राम बातचीत में कपिल देव के साथ संवाद ने इस सत्र को और भी रोमांचक बना दिया। इस दौरान महान क्रिकेटर कपिल देव एयरटेल 5जी पावर्ड वर्चुअल अवतार के माध्यम से वास्तविक समय में प्रशंसकों के साथ बातचीत करने और उन्हें अपनी पारी के महत्वपूर्ण क्षणों के बारे में बताने के लिए भी मंच पर दिखाई दिए। भारती एयरटेल के सीटीओ रणदीप सेखों ने कहा, 5जी की गीगाबिट स्पीड और मिलीसेकंड लेटेंसी हमारे मनोरंजन का उपभोग करने के तरीके को बदल देगी। आज के प्रदर्शन के साथ, हमने केवल 5G की अनंत संभावनाओं और डिजिटल दुनिया में अत्यधिक व्यक्तिगत इमर्सिव अनुभवों की सतह को उजागर किया है। 5G आधारित होलोग्राम के साथ, हम वर्चुअल अवतारों को किसी भी स्थान पर ले जाने में सक्षम होंगे। यह बैठकों और सम्मेलनों, लाइव समाचारों और अन्य कई मामलों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। एयरटेल इस उभरती डिजिटल दुनिया में 5जी के लिए पूरी तरह से तैयार है और भारत के लिए नए और अभिनव प्रयोग तैयार कर रहा है जो प्रक्रिया में है। हम इस अवसर पर दूरसंचार विभाग को धन्यवाद देते हैं कि उसने हमें ट्रायल स्पेक्ट्रम दिया, ताकि ऐसे प्रयोगों के माध्यम से हमारी तकनीक का मूल्यांकन किया जा सके। अपने अनुभव के बारे में बताते हुए, कपिल देव ने कहा- मैं 5G तकनीक की शक्ति और क्षमता से चकित हूं और अपने डिजिटल अवतार को अपने प्रशंसकों के साथ बातचीत करते हुए देख अपने को वास्तव में उस जगह पर मौजूद महसूस कर रहा था। इस शानदार प्रयास और मेरे करियर की सबसे महत्वपूर्ण पारियों में से एक को जीवंत करने के लिए एयरटेल को धन्यवाद। एयरटेल भारत में 5जी की अगुवाई कर रही है। इस वर्ष की शुरुआत में एयरटेल ने लाइव 4जी नेटवर्क पर भारत के पहले 5जी अनुभव का प्रदर्शन किया। भारत के पहले ग्रामीण 5G परीक्षण के साथ-साथ 5G पर पहले क्लाउड गेमिंग अनुभव का भी प्रदर्शन किया गया। 5GforBusiness के हिस्से के रूप में, Airtel ने 5G आधारित समाधानों का परीक्षण करने के लिए अग्रणी वैश्विक और ब्रांडों के साथ साझेदारी की है।

Published / 2022-03-22 08:16:00
एलपीजी सिलेंडर 50 रुपये हुआ महंगा, जाने नई दरें...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में आज (मंगलवार से) से अचानक 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गयी है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के अनुरूप 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई। राष्ट्रीय राजधानी में 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 949.50 रुपये होगी। अक्टूबर की शुरुआत के बाद एलपीजी दरों में यह पहली वृद्धि है। सूत्रों ने कहा कि 5 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 349 रुपये होगी, जबकि 10 किलो की मिश्रित बोतल की कीमत 669 रुपये होगी। वहीं, 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 2003.50 रुपये होगा। राष्ट्रीय राजधानी में 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 949.50 रुपये होगी। एलपीजी दरों को पिछली बार 6 अक्टूबर को संशोधित किया गया था। पेट्रोल डीजल की कीमतों में इजाफा, जानें कितने रुपये बढ़े दाम : आज (मंगलवार से) से लखनऊ में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 938 रुपये से बढ़कर 987.5 रुपये हो गई है। इसी तरह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 949.5 रुपये हो गई है। पहले इसकी कीमत 899.50 रुपये थी। वहीं, कोलकाता में 6 अक्टूबर 2021 को 14.2 किलो वाला गैर-सब्सिडी सिलेंडर की कीमत 926 रुपये थी, लेकिन अब यह आज से 976 रुपये हो गई है। वहीं, अगर बात करें बिहार की तो पटना में यह 998 रुपये से बढ़कर 1048 रुपये हो गई है। गौरतलब है कि पिछले साल 6 अक्टूबर को इसकी दरों में बढ़ोतरी की गयी थी। उस समय प्रति सिलेंडर 15 रुपये की बढ़ोतरी की गयी थी जिससे दिल्ली में एक घरेलू सिलेडर की कीमत 899.5 रुपये हो गयी थी।

Published / 2022-03-21 15:02:06
देश में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या 76.5 करोड़ पहुंची

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या पिछले पांच साल में दोगुना से अधिक होकर 76.5 करोड़ पर पहुंच गई। नोकिया की तरफ से मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 4जी डेटा ट्रैफिक 6.5 गुना बढ़ गया। नोकिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और भारत प्रमुख संजय मलिक ने वार्षिक नोकिया एमबीआईटी रिपोर्ट का विवरण साझा करते कहा कि देश की कुल डेटा खपत में 4जी इंटरनेट सेवाओं का हिस्सा 99 प्रतिशत है। 5जी इंटरनेट के कुछ समय बाद आने पर इसमें अगले कुछ वर्षों तक वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2021 तक मोबाइल डेटा उपयोग की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई। उन्होंने बताया, इस दौरान उपयोगकर्ताओं द्वारा हर महीने इस्तेमाल किया जाने वाला औसत डेटा तीन गुना बढ़कर 17 जीबी प्रति माह हो गया है। पिछले पांच सालों में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या 2.2 गुना बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नयी पीढ़ी के युवा अब प्रतिदिन लगभग आठ घंटे समय ऑनलाइन बिता रहे हैं।

Published / 2022-03-19 15:22:02
गूगल और फोन पे को टक्कर देने को टाटा ग्रुप जल्द लॉन्च करेगा UPI ऐप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। टाटा ग्रुप बहुत जल्द अपना यूपीआई ऐप लॉन्च करने वाला है। फोन पे और गूगल पे की तरह टाटा ग्रुप के यूपीआई को भी आसानी से मोबाइल से इस्तेमाल किया जा सकेगा। टाटा ग्रुप ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। बहुत जल्द इसका आधिकारिक ऐलान हो सकता है। माना जा रहा है कि टाटा ग्रुप की इस तैयारी और लॉन्चिंग से फोन पे, गूगल पे, अमेजॉन पे और पेटीएम को कड़ी टक्कर मिल सकती है। टाटा की इस तैयारी के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या NPCI से क्लीरेंस मिलने के इंतजार में है। एनपीसीआई से क्लीरेंस मिलते ही टाटा ग्रुप थर्ड पार्टी पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर यूपीआई की सेवा शुरू कर देगा। इकोनॉमिक टाइम्स ने सबसे पहले इसकी रिपोर्ट जाहिर की है। यूपीआई ऐप लॉन्च करने का जिम्मा टाटा डिजिटल के पास है जो कंपनी का डिजिटल कॉमर्स यूनिट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा डिजिटल यूपीआई ऐप चलाने के लिए आईसीआईसीआई समेत अन्य प्राइवेट बैंकों के साथ संपर्क में है। इन बैंकों की मदद से टाटा ग्रुप यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बाजार में लॉन्च करेगा। टाटा ग्रुप इसके अलावा एक और बड़ी पहल पर काम कर रहा है। एक अप्रैल को टाटा नियू लॉन्च होने वाला है जिसे सुपर ऐप का नाम दिया जा रहा है। इस ऐप के जरिये टाटा ग्रुप देर से ही सही, लेकिन अब ई-कॉमर्स के क्षेत्र में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। टाटा नियू के बाद यूपीआई ऐप को भी लाया जाएगा ताकि ग्राहक को सामान की खरीदारी के साथ ही पेमेंट करने में भी आसानी हो। टाटा ग्रुप का सुपर ऐप नियू मार्केट में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला करेगा जिनमें अमेजॉन और फ्लिपकार्ट के साथ ही स्विगी और ब्लिंकिट के नाम हैं।

Published / 2022-03-19 15:09:46
ईरान से मिला तेल-गैस सप्लाई का ऑफर स्थिर रखेगा पेट्रोल-डीजल की कीमत!

एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। ईरान ने भारत को ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद और तेल एवं गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू करने की पेशकश की है। भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने यह पेशकश करते हुए कहा कि अगर दोनों देश रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू करते हैं, तो द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ईरान कभी भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर था लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद नई दिल्ली को वहां से आयात रोकना पड़ा था। एमवीआईआरडीसी विश्व व्यापार केंद्र ने यहां जारी एक बयान में चेगेनी के हवाले से कहा, ईरान तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार शुरू करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा, रुपया-रियाल व्यापार तंत्र दोनों देशों की कंपनियों को एक दूसरे के साथ सीधे सौदा करने और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता लागत से बचने में मदद कर सकता है। गौरतलब है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच व्यापार निपटान के लिए एक विनिमय तंत्र था, जिसमें भारतीय तेल आयातक एक स्थानीय ईरानी बैंक को रुपए में भुगतान कर रहे थे और इस धन का उपयोग करते हुए तेहरान, भारत से आयात कर रहा था। इससे ईरान भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया था लेकिन ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इसमें काफी गिरावट आई। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल और जनवरी के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दो अरब डॉलर से भी कम रहा। ईरानी राजदूत ने साथ ही कहा कि उनका देश ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन के लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

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