एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड ने शुक्रवार को इलेक्ट्रिक ट्रक वर्ग में विस्तार करने की पहल के तहत 6×4 हेवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक टिपर का सफलतापूर्वक ट्रायल शुरू कर दिया है। इलेक्ट्रिक बस निर्माण में अग्रणी और मार्केट लीडर, ओलेक्ट्रा ने अब ट्रक निर्माण में प्रवेश किया है और इसे प्रोटोटाइप हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक टिपर प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। ओलेक्ट्रा टिपर भारत में अपनी तरह का पहला ट्रक है जो एक बार चार्ज होने पर 220 किलोमीटर तक की यात्रा तय कर सकता है। इस ट्रक को भारी बोगी सस्पेंशन ट्रिपर के साथ बनाया गया है जो 25 प्रतिशत से ज्यादा ऊंचाई या ढलान वाली सड़कों पर चलने में सक्षम है। कंपनी की ओर बताया गया है कि इस ट्रक का निर्माण बहुत जल्द हैदराबाद के बाहरी इलाकों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किया जाएगा। इस खास मौके पर ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड (ओलेक्ट्रा) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक केवी प्रदीप ने कहा, भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में अग्रणी होने के नाते, ओलेक्ट्रा ने अब हैवी-ड्यूटी टिपर ट्रायल शुरू किया है। यह भारत में अपनी तरह का पहला ट्रक है। मुझे ये बताते हुए बहुत खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। जैसा कि हम सभी देख रहे हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में हमारी कंपनी की ओर से तैयार किया गया इलेक्ट्रिक ट्रक गेम-चेंजर साबित होगा। अपनी तरह के इस पहले टिपर में कई तरह की विशेषताएं हैं। जैसा कि बाजार में लोग कम दामों में अच्छा प्रोडक्ट तलाशते हैं। उसी उद्देश्य से ओलेक्ट्रा ने उनके सपने को साकार करने की कोशिश की है। ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड की स्थापना 2000 में की गई। ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड (सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनी) – एमईआईएल समूह का एक हिस्सा है। ओलेक्ट्रा ने 2015 में भारत में इलेक्ट्रिक बसें लॉन्च की थीं। ओलेक्ट्रा विद्युत पारेषण और वितरण नेटवर्क के लिए सिलिकॉन रबर/ कंपोझिट इंसुलेटर का भारत का सबसे बड़ा निर्माता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। साइबर अपराधियों ने सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को अपना निशाना बनाया है। कंपनी के असम स्थित हेडक्वार्टर पर साइबर हमला हुआ। साइबर हमलावरों ने कंपनी के सिस्टम और कंप्यूटर्स पर वायरस भेजकर कब्जा कर लिया और इसे छोड़ने के लिए 75 लाख डॉलर (करीब 57 करोड़ रुपए) की मांग की गई। साइबर अपराधियों ने यह रकम बिटक्वाइन के रूप में अदा करने की शर्त रखी। कंपनी ने बताया कि वैसे तो यह हमला 10 अप्रैल को जियोलॉजिकल और रिजरवायर डिपार्टमेंट पर किया गया लेकिन इसकी सूचना आईटी विभाग ने मंगलवार को दी। कंपनी और सरकार के खजाने को भारी नुकसान : OIL के मैनेजर (सिक्योरिटी) सचिन कुमार ने मामले में दायर पुलिस शिकायत में कहा कि रैंसमवेयर और साइबर हमले की वजह से कंपनी और सरकार के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। आईटी सिस्टम पर वायरस के हमले की वजह से कारोबार को काफी नुकसान हुआ और इसे ठीक करने में भी काफी समय लग गया। हालांकि, कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि साइबर हमले के बावजूद ड्रिलिंग और उत्पादन का काम बखूबी चल रहा है लेकिन आईटी से जुड़े काम प्रभावित हुए जिसमें लेनदेन और डाटा का संग्रह जैसा महत्वपूर्ण काम शामिल है। हमला चार दिन पहले जियोलॉजिकल और रिजरवॉयर डिपॉर्टमेंट पर किया गया था। नेटवर्क की समस्या से जूझी कंपनी : सचिन कुमार ने बताया कि साइबर अटैक के बाद शुरुआती जांच में पाया गया कि इसकी वजह से कंपनी के नेटवर्क, सर्वर और क्लाइंट के कंप्यूटर को भी नुकसान पहुंचा है। इसे दोबारा पूरी तरह ठीक किया जा रहा है। इस मामले में असम के दुलियाजान पुलिस स्टेशन पर शिकायत की गई है और पुलिस इसकी जांच भी कर रही है। डाटा को नुकसान नहीं : कंपनी के प्रवक्ता त्रिदिव हजारिका ने बताया कि साइबर हमले की वजह से कंपनी के डाटा संग्रह पर कोई असर नहीं पड़ा है। सावधानी बरतने के लिए हमने तत्काल अपने सभी सिस्टम को बंद कर दिया था और डाटा को सुरक्षित रखने का काम शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि 1889 में स्थापित हुई OIL देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल एवं गैस कंपनी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में महंगाई के मोर्चे पर जनता को राहत मिलती नहीं दिख रही है। जहां एक ओर बीते नौ दिनों से पेट्रेल-डीजल की कीमतें स्थिर होने से लोगों ने राहत की सांस ली है, तो दूसरी ओर सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार को सीएनजी 2.5 रुपए और महंगी हो गई, जबकि बुधवार रात को आईजीएल ने पीएनजी की कीमतों में फिर से बड़ा इजाफा किया। यहां पहुंची पीएनजी की कीमत : बीते कुछ दिनों से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने पीएनजी और सीएनजी के दाम में तेजी का जो सिलसिला शुरू किया, वो थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को गैस कंपनी की ओर से जारी किए गए संदेश के अनुसार, पीएनजी की कीमत में 4.25 रुपए की बढ़ी बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद एनसीआर में पीएनजी का दाम 45.96 रुपए प्रति एमसीएम पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि इससे पहले पिछले दिनों गैस कंपनी ने पीएनजी के दाम में छह रुपए की बढ़ोतरी की थी। सीएनजी के भाव में लगी आग : सीएनजी 2.5 रुपए महंगी हो गई है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में इसकी नई कीमत 71.61 रुपए प्रति किलो हो गई। दिल्ली के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी उपभोक्ताओं को आज से सीएनजी के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ेगी। यहां प्रति किलो सीएनजी के लिए ग्राहकों को 74.17 रुपए चुकाने होंगे जबकि गुरुग्राम में आज से सीएनजी के दाम 79.94 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। सीएनजी की कीमत में इस महीने यह चौथी बढ़ोतरी है। चार किस्तों में इसकी कीमत 10.80 रुपए बढ़ चुकी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। फ्यूचरिस्टिक डिजाइन और हाई ड्राइविंग रेंज के साथ टाटा की नयी Curvv EV आ रही है। नयी इलेक्ट्रिक कार 400-500 किमी तक रेंज देती है और इसमें लगी बैटरी को तेजी से और कम बिजली में चार्ज किया जा सकेगा। यह कार एसी और डीसी दोनों चार्जिंग पॉइंट से चार्ज की जा सकेगी। टाटा मोटर्स ने भारत में अपनी नयी इलेक्ट्रिक कार टाटा कर्व ईवी से पर्दा हटा दिया है। इस इलेक्ट्रिक कार का कॉन्सेप्ट मॉडल दिखने में बहुत खूबसूरत है और केबिन के मामले में भी ईवी को शानदार बनाया गया है। नयी इलेक्ट्रिक कार कूपे स्टाइल पर तैयार की गई है और मौजूदा SUV लाइनअप की ये सबसे एडवांस्ड कार बन सकती है। दो साल के भीतर लॉन्चिंग : टाटा मोटर्स वाहन कंपनी अगले दो साल के भीतर बाजार में नयी इलेक्ट्रिक एसयूवी कर्व उतारेगी। मुंबई स्थित कंपनी ने इलेक्ट्रिक एसयूवी से हाल ही में पर्दा उठाया। कंपनी का कहना है कि इस एसयूवी का मकसद उन उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करना है, जो नये उत्पाद के साथ कुछ अलग डिजाइन और फीचर चाहते हैं। 500 किमी तक रेंज : नयी इलेक्ट्रिक कार 400-500 किमी तक रेंज देती है और इसमें लगी बैटरी को तेजी से और कम बिजली में चार्ज किया जा सकेगा। यह कार एसी और डीसी दोनों चार्जिंग पॉइंट से चार्ज की जा सकेगी। टाटा कर्व एक मिडसाइज SUV है, जो नेक्सॉन SUV के ठीक ऊपर की जगह लेगी। टाटा का कहना है कि नयी इलेक्ट्रिक कार के साथ नयी तकनीक वाला पावरट्रेन दिया जाएगा, जो काफी दमदार भी होगा। टाटा मोटर्स की योजना पहले कूप स्टाइल वाले एसयूवी के इलेक्ट्रॉनिक संस्करण को पेश करने की है और फिर इसे इंटरनल कम्बशन इंजन ट्रिम्स के साथ बाजार में उतारा जाएगा। टाटा मोटर्स पैसेंजर वेहिकल्स के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्र ने कहा कि एसयूवी खंड तेजी से विभिन्न उप-खंडों में विभाजित हो रहा है, जिसमें अलग-अलग उत्पादों की स्पष्ट मांग है। उन्होंने कहा कि कंपनी का जोर ऐसे प्रोडक्ट्स की पेशकश पर है, जिनमें आधुनिक कार्यक्षमता और डिजाइन का सही मेल हो।
एबीएन बिजनेस डेस्क। मार्च महीने में पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का असर खुदरा महंगाई के आंकड़े पर नजर आने लगा है। खुदरा महंगाई दर में जबरदस्त बढ़ोतरी आई है। मार्च महीने में खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी रहा, जबकि फरवरी 2022 में 6.07 फीसदी रहा था। राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग ने महंगाई दर को लेकर ये आंकड़ा जारी किया है। यह लगातार तीसरा महीना है जब महंगाई दर RBI की 6% की ऊपरी लिमिट के पार रही है। फरवरी 2022 में रिटेल महंगाई दर 6.07% और जनवरी में 6.01% दर्ज की गई थी। एक साल पहले मार्च 2021 में रिटेल महंगाई दर 5.52% थी। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष की अपनी पहली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद महंगाई के अनुमान को बढ़ाते हुए पहली तिमाही में 6.3%, दूसरी में 5%, तीसरी में 5.4% और चौथी में 5.1% कर दिया था। मार्च में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल के चलते पेट्रोल डीजल के दामों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। 22 मार्च 2022 के बाद पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने का सिलसिला शुरू हुआ था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का वित्तीय प्रदर्शन बीते वित्त वर्ष में काफी अच्छा रहा है। मार्च, 2022 को समाप्त चौथी तिमाही में कंपनी की आय पहली बार 50,000 करोड़ रुपये को पार कर गई। टीसीएस ने कहा कि उसका शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जनवरी-मार्च, 2021 के मुकाबले 7.4 फीसदी बढ़कर 9,926 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान टीसीएस की आय 15.8 फीसदी वृद्घि के साथ 50,591 करोड़ रुपये रही। कई विश्लेषक उम्मीद कर रहे थे कि टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टीसीएस का शुद्ध लाभ 10,000 करोड़ रुपये और आय 50,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी। 46 देशों में 5,92,000 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी ने कहा कि उसकी सालाना आय पहली बार 25 अरब डॉलर से ज्यादा रही। कंपनी की कुल सालाना आय 16.8 फीसदी बढ़कर 25.7 अरब डॉलर (1,91,754 करोड़ रुपये) रही। पूरे वित्त वर्ष के दौरान टीसीएस का शुद्घ मुनाफा 14.8 फीसदी बढ़कर 38,327 करोड़ रुपये रहा। टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक राजेश गोपीनाथन ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी की आय में रिकॉर्ड इजाफा हुआ और इस दौरान उसकी आॅर्डर बुक 11.3 अरब डॉलर की रही। पूरे साल के लिए आॅर्डर बुक 34.6 अरब डॉलर रही। गोपीनाथन ने कहा कि वे उद्योग में सबसे अधिक 25.3 फीसदी का परिचालन मार्जिन बरकरार रख सकते हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही से 180 आधार अंक कम है। हालांकि शुद्घ मार्जिन 19.6 फीसदी रहा। उन्होंने कहा, वित्त वर्ष 2022 अच्छे प्रदर्शन के साथ समाप्त हुआ है और इस दौरान राजस्व में अब तक का अधिकतम इजाफा हुआ है। हमारे ग्राहकों की भागीदारी और वृद्घि का असर आॅर्डर बुक में भी दिखा, जो सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया और आगे मजबूत तथा सतत वृद्घि की बुनियाद तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि नई क्षमताओं के विकास पर लगातार निवेश से कंपनी उद्योग में सबसे बेहतर मार्जिन और मजबूत वृद्धि हासिल करने में सफल रही। कंपनी ने इस दौरान 10 करोड़ डॉलर से अधिक के 10 बड़े ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा। इसके साथ ही 5 करोड़ डॉलर के 19, 2 करोड़ डॉलर के 40 और 1 करोड़ डॉलर से अधिक के 52 ग्राहकों को वह अपने साथ जोड़ने में सफल रही। टीसीएस निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी नियोक्ता है। पिछले साल उसने 1,03,546 कर्मचारियों की शुद्घ नियुक्ति की, जिससे कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 5,92,195 हो गई। टीसीएस के कुल कर्मचारियों में 35.6 फीसदी महिलाएं हैं। टीसीएस ने कहा कि 1,03,546 कर्मचारियों में से 35,209 कर्मचारी चौथी तिमाही में नियुक्त किए गए, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नियुक्त करने के बावजूद कर्मचारियों की कंपनी छोड़ने की दर भी काफी ज्यादा 17.4 फीसदी रही। टीसीएस के पास 39,181 करोड़ रुपये का मुक्त नकदी प्रवाह है, जो शुद्घ मुनाफे का 111.3 फीसदी है। कंपनी ने शेयर पुनर्खरीद और लाभांश के जरिये शेयरधारकों को 31,424 करोड़ रुपये की नकदी वापस की है। कंपनी ने 22 रुपये प्रति शेयर का लाभांश देने की घोषणा की है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य वित्तीय अधिकारी समीर सेकसरिया ने कहा, कंपनी तमाम चुनौतियों को पार करते हुए एक बार फिर उद्योग में सबसे बेहतर परिचालन मार्जिन हासिल करने में सफल रही। पांच साल में चौथी शेयर पुनर्खरीद को सफलतापूर्वक पूरा करना भी एक कीर्तिमान रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से यूक्रेन की अर्थव्यवस्था में इस साल अनुमानित रूप से 45.1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। गिरावट का वॉल्यूम युद्ध की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगा। यह बात वर्ल्ड बैंक के हाल ही में जारी लेटेस्ट आर्थिक अपडेट में कही गई है। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध और रूस पर प्रतिबंध दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं। यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र में उभरते बाजार और विकासशील देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि रूस के हमले ने यूक्रेन में व्यवसायों को बंद होने, निर्यात को घटाने और उत्पादक क्षमता को नष्ट करने के लिए मजबूर किया है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से प्रभावित, रूस की अर्थव्यवस्था पहले ही एक गहरी मंदी की चपेट में आ गई है। 2022 में इसके उत्पादन में 11.2 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। 30.7% गिर सकती है पूर्वी यूरोप क्षेत्र की जीडीपी : वर्ल्ड बैंक के पूर्वी यूरोप क्षेत्र, जिसमें यूक्रेन, बेलारूस और मोल्दोवा शामिल हैं, इस साल युद्ध के झटके और व्यापार में व्यवधान के कारण जीडीपी में 30.7 प्रतिशत की गिरावट देख सकते हैं। यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इस साल 4.1 प्रतिशत गिरने का अनुमान है। युद्ध के पूर्व इसमें 3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान था। युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट भयावह : यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र के लिए वर्ल्ड बैंक वाइस प्रेसिडेंट अन्ना बजरडे ने कहा, युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट की भयावहता चौंका देने वाली है। रूसी हमला यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दे रहा है और इसने इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है। यूक्रेन को तुरंत बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता की आवश्यकता है क्योंकि यह अपनी अर्थव्यवस्था को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार यूक्रेनी नागरिकों का समर्थन करने के लिए संघर्षरत है जो पीड़ित हैं और एक बेहद मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे हैं। यूरोप और मध्य एशिया के लिए वर्ल्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, यूक्रेन युद्ध और महामारी ने एक बार फिर दिखाया है कि संकट व्यापक आर्थिक क्षति का कारण बन सकते हैं और प्रति व्यक्ति आय और विकास लाभ के वर्षों को पीछे छोड़ सकते हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने भी कड़ी चुनौती : वर्ल्ड बैंक की ओर से कहा गया कि युद्ध ने एक तेज वैश्विक मंदी, बढ़ती मुद्रास्फीति व कर्ज, और गरीबी के स्तर में वृद्धि की बढ़ती चिंताओं में और इजाफा कर दिया है। युद्ध, यूरोप और मध्य एशिया की उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने भी कड़ी चुनौती पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो पहले से ही इस साल महामारी के प्रभावों से आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रहा था। रूस और यूक्रेन के अलावा, बेलारूस, मोल्दोवा और ताजिकिस्तान के भी इस साल मंदी की चपेट में आने का अनुमान है। युद्ध की वजह से और यूरो क्षेत्र, कमोडिटी, ट्रेड में उम्मीद से कम ग्रोथ और फाइनेंसिंग झटकों के कारण सभी अर्थव्यवस्थाओं में विकास अनुमानों को घटाया गया है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नए वित्त वर्ष 2022-23 की पहली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी अभी भी रेपो रेट चार फीसदी ही रहेगा। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी रखा गया है। गौरतलब है कि ये लगातार 11वीं बार है, जबकि आरबीआई ने रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गौरतलब है कि आरबीआई ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव किया था। आरबीआई गवर्नर ने बताए नतीजे : तीन दिवसीय आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी बैठक के नतीजों की घोषणा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों की सहमति से इस बार भी रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि सप्लाई चेन को लेकर ग्लोबल मार्केट दबाव में है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 7.2 फीसदी किया जा रहा है। पहले यह अनुमान 7.8 फीसदी जताया गया था। दास बोले- हमारे सामने दोहरी चुनौती : आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्रोथ अनुमान 16.2 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.2 फीसदी और तीसरी तिमाही में 4.1 फीसदी, जबकि चौथी तिमाही में चार फीसदी रखा गया है। इसके साथ ही कच्चे तेल का अनुमान 100 डॉलर प्रति बैरल रखा गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बड़ी चिंता का विषय है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में महंगाई का औसत अनुमान 5.7 फीसदी जताते हुए कहा कि देश में महंगाई बढ़ रही है और ग्रोथ रेट कम हो रहा है। ऐसे में हमारे सामने दोहरी चुनौती है।
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