बिजनेस

View All
Published / 2022-06-24 17:00:58
केंद्र ने बफर स्टॉक के लिए मई तक 52,460 टन प्याज खरीदा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र ने बफर स्टॉक बनाए रखने के लिए इस साल मई महीने के अंत तक 52,460 टन प्याज की खरीद की है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सरकार पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन की कमी वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति से निपटने के लिए प्याज का बफर स्टॉक बनाए हुए है। प्याज की खरीद नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) के जरिए की जा रही है। वर्ष 2022-23 के लिए 2.50 लाख टन रबी 2022 के मौसम के प्याज की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारी ने कहा, नेफेड ने इस साल 31 मई तक 52,460.34 टन प्याज की खरीद की है। अधिकारी ने कहा कि चालू वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य को अगले महीने तक हासिल कर लिया जाएगा। वर्ष 2021-22 में, प्याज कीमतों को नरम बनाने के लिए सुनियोजित और लक्षित रूप से जारी करने के लिए कुल 2.08 लाख टन रबी (सर्दियों) प्याज की खरीद की गई थी। कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में देश का कुल प्याज उत्पादन 16.81 प्रतिशत बढ़कर तीन करोड़ 11.2 लाख टन होने का अनुमान है, जो कि फसल वर्ष 2021-22 में दो करोड़ 66.4 लाख टन था।

Published / 2022-06-23 17:06:51
बेहतर कृषि उत्पादन से मिलेगी विकास को गति, 7-7.8% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा से सुधर रही है। बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7-7.8 प्रतिशत रह सकती है। अर्थशास्त्रियों ने यह अनुमान जताया है। उनका मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा समय में जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से अधिकतर बाहरी स्रोतों से उत्पन्न हुई है। जाने-माने अर्थशास्त्री और बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कुलपति एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक कारणों से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम पैदा हुआ है। लेकिन अगर हम घरेलू हालात देखें तो भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। भानुमूर्ति ने कहा कि बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से भारत को चालू वित्त वर्ष में वैश्विक बाधाओं के बावजूद 7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी चाहिए। औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान (ISID) के निदेशक नागेश कुमार ने कहा कि जीएसटी संग्रह, निर्यात और पीएमआई के मजबूत आंकड़े 2022-23 के दौरान एक मजबूत वृद्धि दर का संकेत दे रहे हैं। नागेश कुमार का कहना है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7-7.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है। फ्रांस के अर्थशास्त्री गाय सोर्मन ने कहा कि ऊर्जा और उर्वरक आयात की उच्च लागत भारत को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी एक कृषि अर्थव्यवस्था है। इस वजह से धीमी वृद्धि का सामाजिक प्रभाव शहर के श्रमिकों के अपने गांव वापस जाने से कम हो जाएगा। इससे कृषि उत्पादन और खाद्यान्न निर्यात बढ़ सकता है। एनआर भानुमूर्ति का कहना है कि मार्च 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर पहुंने और पिछले तीन महीनों में इसमें तेजी जारी रहने का प्रमुख कारण ईंधन के दाम में उछाल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ने और अन्य चीजों के भाव में तेजी से खुदरा महंगाई में अचानक उछाल आया है। लेकिन ईंधन दरों में कटौती और रेपो रेट में बढ़ोतरी होने से महंगाई दर आने वाली तिमाहियों में नरम पड़ सकती है।

Published / 2022-06-19 13:32:49
घोषणाओं के बाद साहसी और महत्त्वाकांक्षी समझी जा रहीं कंपनियां

एबीएन डेस्क (अजय सानी)। पिछले महीने कंपनी क्षेत्र में महज कुछ ही सप्ताहों के भीतर दो घोषणाएं हुर्इं। दोनों घोषणाओं का भारतीय उपभोक्ता बाजार के अतीत से संबंध था। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 5 मई को कहा कि वह व्यक्तिगत देखभाल खंड (पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स) खंड में दोबारा कदम रखने की योजना बना रही है। इसी तरह 25 मई को आई एक खबर में कहा गया कि हिंदुस्तान मोटर्स और प्यूजो के बीच संयुक्त उद्यम अगले दो वर्षों में एंबेसडर कार का नया और अधिक खूबियों वाला संस्करण पेश करेगा। इन घोषणाओं के बाद ये कंपनियां कम से कम साहसी और महत्त्वाकांक्षी अवश्य समझी जा सकती हैं। जब उपभोक्ता बाजार छोटा था उनका कारोबार काफी चमका था और ऊंचे शुल्क की वजह से भारतीय बाजार स्थानीय कंपनियों के लिए एक तरह से कारोबारी दृष्टिकोण से सुरक्षित था। हालांकि धीरे-धीरे बाजार की संरचना कारोबारी नियम-कायदों में काफी बदलाव हुआ है। नई ऐंबेसडर कार कैसी होगी इसकी कोई ठोस जानकारी किसी के पास नहीं है। हमें इतना जरूर मालूम है कि यह नई कार हिंदुस्तान मोटर्स के तमिलनाडु संयंत्र में बनेगी। इस नये संयंत्र पर अब सी के बिड़ला समूह की सहायक कंपनी का नियंत्रण है। यह परियोजना हिंदुस्तान मोटर्स की उस योजना से अलग है जिसके तहत वह इलेक्ट्रिक वाहन बनाएगी। हिंदुस्तान मोटर्स इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी के पश्चिम बंगाल में उत्तरपाड़ा संयंत्र में बनाएगी। इस संयंत्र के लिए एक विदेशी साझेदार की तलाश कर रही है। पेट्रोल से चलने वाली पुरानी ऐंबेसडर कार 1950 के दशक की तकनीक पर आधारित थी। इस कार को उम्मीद से कहीं अधिक सफलता मिली थी मगर 2014 में इसका सुहाना सफर खत्म हो गया। हिंदुस्तान मोटर्स ने अपना यह ब्रांड प्यूजो को बेच दिया। प्यूजो भारत के कारोबारी बाजार में सबसे पहले कदम रखने वाली कुछ विदेशी कंपनियों में एक थी। ऐंबेसडर कार की दो विशेष खूबियां थीं। उनकी बनावट काफी मजबूत थी और दूसरी खासियत यह थी कि कोई खराबी आने पर मामूली से मामूली मैकेनिक भी उसे ठीक कर सकता था। बाद में स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल(एसयूवी) के बाजार में उतरने के बाद तकनीक पेचीदा होती गई और मैकेनिकों के लिए भी नए हुनर सीखना जरूरी हो गया। एंबेसडर तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी और उस समय केवल प्रीमियर पद्मिनी उसे टक्कर देने वाली एकमात्र कार थी। प्रीमियर पद्मिनी फिएट तकनीक से बनाई गई थी। इसके बाद एक और कार आई जो छोटी थी और उसमें गियर बदलने के लिए कम ताकत का इस्तेमाल करना पड़ता था। इन खूबियों की वजह से यह ऐंबेसडर से उम्दा मानी जाने लगी थी। खरीदारों की लंबी कतार, जल्द डिलिवरी के लिए अतिरिक्त रकम और दूसरी कंपनियों को बाजार से दूर रखने की कवायद के बूते ये दोनों ही कंपनियां काफी मुनाफे में थीं। अपने शुरूआती दिनों में हिंदुस्तान मोटर्स का शेयर बाजार में सबसे महंगे शहरों में एक हुआ करता था। अस्सी के दशक की शुरूआत में मारुति ने बाजार में शानदार मुनाफे के साथ जब आगाज किया और हिंदुस्तान मोटर्स की बाजार हिस्सेदारी में सेंध लगाई तब भी ऐंबेसडर कार की खासी मांग थी। मगर धीरे-धीरे ऐंबेसडर की बाजार में पकड़ कमजोर होती गई। सरकार ने दूसरे मॉडल की कारें खरीदनी शुरू कर दी थी। यह ऐंबेसडर के प्रति घटते आकर्षण का एक स्पष्ट संकेत था। पहले ऐंबेसडर कारों के लिए एक ही बार में भारी भरकम आॅर्डर आते थे मगर बाद में यह सिलसिला कमजोर पड़ने लगा। ब्रिटेन और यूरोप में ऐंबेसडर की बिक्री बढ़ाने का पूरा प्रयास किया गया मगर यह ऐंबेसडर की रफ्तार बनाए रखने के लिए काफी साबित नहीं हुआ। इतिहास के पन्ने पलटने के बाद एंबेसडर के नए अवतार में लोगों की काफी दिलचस्पी हो सकती है। हो सकता है कि नया संस्करण एक बार फिर बाजार में छा जाए। आयशर के उदाहरण पर विचार किया जा सकता है जिसने रॉयल एनफील्ड ब्रांड के तहत मोटरसाइकिल उतारी और इससे कंपनी की किस्मत दोबारा चमक गई। एक प्रमुख अंतर यह है कि एनफील्ड एक अच्छा उत्पाद था मगर यह खराब प्रबंधन का शिकार हो गया। ऐंबेसडर के साथ जुड़ा एक पहलू यह भी था कि इसका कारोबार एक सीमित बाजार में होता रहा। ब्रांड की महत्ता दोबारा स्थापित करना ऐंबेसडर के नए संस्करण के लिए एक चुनौती होगी। देश में उदारीकरण के शुरूआती दिनों में ही टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट पर्सनल केयर कारोबार से बाहर निकल गई थी। टाटा आॅयल मिल कंपनी (टॉमको ) बेच दी गई और बाद में हिंदुस्तान यूनिलीवर ने लैक्मे कॉस्मेटिक ब्रांड खरीद लिया। उदारीकरण से पहले टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के उत्पाद का लोगों में काफी रसूख हुआ करता था। वह ऐसा दौर था जब किसी को एक आयातित कैमे साबुन देना एक महंगा उपहार माना जाता था। टाटा आॅयल मिल कंपनी में बने साबुन जैसे हमाम और मोती उस समय कम दाम में अच्छे उत्पाद माने जाते थे और अच्छी पैकिंग में आते थे। तब एक मोटे ग्लास बोतल में नारियल तेल भी आया करता था और टाटा कुछ सुगंधित उत्पाद भी बनाया करती थी जो डियोड्रेंट की तरह भी काम करता था। उस समय भारत में डियोड्रेंट कर मिलना बड़ी बात हुआ करती थी। मोती साबुन उस समय महंगा समझा जाता था, खासकर सीमित पैसों में घर चलाने वाली महिलाओं के लिए यह एक बड़ा उत्पाद हुआ करता था। मगर किशोर एवं युवाओं को मोती साबुन रास नहीं आया करता था। अस्सी के दशक में पैदा हुए लोगों के लिए लैक्मे ब्रांड अब भी खासा मायने रखता है। विदेशी ब्रांडों की चमक के बावजूद मध्यम दायरे में आने वाला यह उत्पाद 80 के दशक के लोगों का पसंदीदा हुआ करता था। नमक एवं चाय की खुदरा बिक्री करने वाली टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने पर्सनल केयर श्रेणी को लेकर फिलहाल विस्तार से कुछ नहीं कहा है। मगर हम इतना जानते हैं कि यह टाटा ब्रांड के बूते बाजार में फिर अपनी धाक जमाना चाहती है। यह एक सुरक्षित दांव है, बशर्ते कंपनी नैनो की तरह कोई उत्पाद नहीं लाए जिसका अंत सुखद नहीं रहा। इलेक्ट्रिक वाहन अवतार में अपनी वापसी करने वाली चेतक स्कूटर की तरह ही दो पुराने स्थापित ब्रांडों का वापसी की योजना बनाना एक तरह से उन ब्रांडों का पुनर्जन्म हो सकता है जो आर्थिक सुधारों के बाद कमजोर या विलुप्त हो गए थे। ऊंचे शुल्क और आत्मनिर्भरता के नारे के बीच पुराने ब्रांडों को नए अवतार में उतारने के लिए पर्याप्त संभावनाएं नजर आ रही हैं।

Published / 2022-06-17 15:28:10
राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल दो स्टॉक्स औंधे मुंह गिरे, बिग बुल को 866 करोड़ का नुकसान

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 17 जून को भी गिरावट रही। बिग बुल राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो में शामिल टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयर भी आज औंधे मुंह गिरे। टाइटन के शेयरों में 6.09 फीसदी की गिरावट आई वहीं स्टार हेल्थ का स्टॉक 4.54 फीसदी गिरकर बंद हुआ है। आज इन दोनों शेयरों के गिरने से राकेश झुनझुनवाला को 8,666,527,875.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयरों में पिछले कई दिनों से बिकवाली हावी है। वर्ष 2022 में टाइटन का शेयर अब तक 23 फीसदी गिर चुका है। पिछले छह महीनों में टाटा ग्रुप के इस शेयर ने 13.57 फीसदी का गोता लगाया है तो पिछले एक महीने में टाइटन का शेयर 10.67 फीसदी गिरा है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में ही यह शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहा है और इसमें आठ फीसदी की गिरावट आई है। आज यह 6.09 फीसदी गिरकर 1935.45 रुपये पर बंद हुआ है। लगातार गिर रहा है स्टार हेल्थ का शेयर : स्टार हेल्थ के शेयर का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में ही यह आठ फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। पिछले छह महीनों में इसने 20 फीसदी से ज्यादा गोता लगाया है। वर्ष 2022 में यह अब तक 18.67 नुकसान निवेशकों को करा चुका है। शुक्रवार को भी इस शेयर में 4.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 634 रुपये पर बंद हुआ। झुनझुनवाला को लगा 866 करोड़ का झटका : मार्च के शेयर होल्डिंग पैटर्न के अनुसार राकेश झुनझुनवाला और उनकी पत्नी रेखा झुनझुनवाला के पास टाइटन कंपनी के कुल 4,48,50,970 शेयर हैं। आज टाइटन के शेयर 125.5 रुपये गिरे हैं। इससे झुनझुनवाला दंपति को 5,628,796,735 रुपये (4,48,50,970- 125.5 रुपये) का नुकसान टाइटन के शेयरों में हुआ है। बिग बुल के पास स्टार हेल्थ के कुल 10,07,53,935 शेयर हैं। अगर प्रत्येक शेयर में आज आई 30.15 रुपये की गिरावट को जोड़ा जाए, तो पता चलता है कि राकेश झुनझुनवाला को इस स्?टॉक में आज 3,037,731,140.25 रुपये (30.10 रुपये - 10,07,53,935) का घाटा हुआ है। इस तरह टाइटन और स्टार हेल्थ के शेयरों में आज गिरावट आने से झुनझुनवाला की नेटवर्थ में 8,666,527,875.25 रुपये की कमी हो गई है।

Published / 2022-06-17 15:25:53
बाजार टूटने से दुनियाभर के निवेशकों में हाहाकार...

एबीएन बिजनेस डेस्क। फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में कमजोरी के आसार हैं। फेड ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का संकेत दिया है। यूरोप में केंद्रीय बैंक भी इसी राह पर चल रहे हैं और वहां स्विटजरलैंड ने गुरुवार को ब्याज दरों में अचानक बढ़ोतरी कर दी, जो करीब एक साल से अपरिवर्तित था। बैंक आॅफ इंगलैंड ने भी ब्याज दरों में इजाफा किया है। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल फ्यूचर्स 1.7 फीसदी टूट गया और एसऐंडपी फ्यूचर में भी 2.1 फीसदी की गिरावट आई? यूरोपीय बेंचमार्क और ज्यादातर एशियाई बाजार भी टूटे क्योंकि तेल की कीमत का भी इस पर असर पड़ा। फेड की ब्याज बढ़ोतरी के बाद न्यूयॉर्क में बुधवार दोपहर शेयरों में तेजी आई थी, जो 1994 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है क्योंकि निवेशकों ने शुरू में फेड चेयरमैन जीरोम पॉवेल की टिप्पणी से संकेत लिया, जो बताता है कि भविष्य में ब्याज दरों में कम बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि उच्च महंगाई को देखते हुए यह बढ़त अल्पावधि की ही हो सकती है। बैंक आॅफ इंगलैंड ने गुरुवार को ब्याज दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया। यह ब्रिटिश केंद्रीय बैंक की तरफ से दिसंबर के बाद ब्याज दरों में पांचवीं बढ़ोतरी है, जिसने मुख्य दरों को 1.25 फीसदी पर पहुंचा दिया है। स्विस नैशनल बैंक ने ब्याज दरों में आधा फीसदी का इजाफा किया है। ताइवान के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें 0.125 आधार अंक बढ़ाकर 1.5 फीसदी कर दी है। एसपीआई ऐसेट मैनेजमेंट के स्टीफंस इन्स ने कहा, एफओएमसी ने अपना रुख सामने कर दिया है और हम अन्य केंद्रीय बैंकों की तरफ से आक्रामक ब्याज बढ़ोतरी देख सकते हैं। फ्रांस का सीएसी 40 भी 2 फीसदी टूटा जबकि जर्मनी का डैक्स 2.7 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 100, 2.3 फीसदी लुढ़क गया। एशियाई कारोबार में जापान के बेंचमार्क निक्केई 225 में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 26,431.20 पर बंद हुआ। आॅस्ट्रेलिया के पी-एएसएक्स 200 ने शुरूआती बढ़त गंवा दी और करीब 0.2 फीसदी टूटकर 6,591.10 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.2 फीसदी चढ़कर 2,451.41 पर पहुंचा। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 2.2 फीसदी फिसलकर 20,845.43 पर बंद हुआ, वहीं शांघाई कम्पोजिट 0.6 फीसदी फिसलकर 3,285.38 पर आ गया। बैंक आॅफ जापान की दो दिन की नीतिगत बैठक शुरू हो गई है, जो शुक्रवार को खत्म होगी। जापानी केंद्रीय बैंक येन में गिरावट को लेकर दबाव में है। निवेशक येन की बिकवाली कर डॉलर की खरीद कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि डॉलर वाली होल्डिंग में ज्यादा प्रतिफल मिलेगा। जापान के राजनेता और केंद्रीय बैंक प्रमुख ने घटते येन पर चिंता जताई है, लेकिन नीति में कोई नाटकीय बदलाव शायद नहीं होगा। इस साल बॉन्ड से लेकर बिटकॉइन तक, यानी हर तरह के निवेश पर गिरावट देखने को मिली है क्योंकि उच्च महंगाई केंद्रीय बैंकों को इस पर लगाम कसने के लिए बाध्य कर रहे हैं, जिसने अर्थव्यवस्थाओं को महामारी से सुधरने बाधा खड़ी की है। यूक्रेन युद्ध? ने संकट और बढ़ा दिया है।

Published / 2022-06-16 07:02:36
एएनआईएल में टोटाल एनर्जीज का निवेश

एबीएन बिजनेस डेस्क। फ्रांस की दिग्गज ऊर्जा कंपनी टोटाल एनर्जीज ने एक बार फिर अदाणी समूह की कंपनी में निवेश किया है। अदाणी समूह की हरित हाइड्रोजन तैयार करने की मुहिम में निवेश के साथ ही वह मुकेश अंबानी की हरित हाइड्रोजन योजना को टक्कर देगी। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में अदाणी समूह ने बताया टोटाल एनर्जीज अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज (एएनआईएल) में अदाणी एंटरप्राइजेज से 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी और उसके साथ मिलकर हरित हाइड्रोजन का तंत्र तैयार करेगी। मगर कंपनी ने सौदे के मूल्य का खुलासा नहीं किया। अदाणी समूह की कंपनियों में टोटाल का यह चौथा निवेश है। एएनआईएल अगले 10 साल में हरित हाइड्रोजन और उससे जुड़े तंत्र में 50 अरब डॉलर (3.9 लाख करोड़ रुपये) निवेश करना चाहती है। शुरुआती चरण में वह 2030 से पहले 10 लाख टन सालाना हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता तैयार करेगी। टोटाल और अदाणी समूह के बीच यह चौथी साझेदारी है। 2021 में उसने अदाणी ग्रीन एनर्जी में 20 फीसदी हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया था। 2019 में टोटाल ने अदाणी गैस में 37.4 फीसदी और समूह की धामरा एलएनजी परियोजना में 50 फीसदी हिस्सेदारी का अ​धिग्रहण किया था। संयुक्त उपक्रम के तहत ये कंपिनयां 10 साल में धामरा एलएनजी सहित वि​भिन्न रीगैसिफिकेशन टर्मिनल और 1,500 सर्विस स्टेशन का रिटेल नेटवर्क खड़ा करेंगी। 2020 में टोटाल और अदाणी ने 2.3 गीगावाट सौर संप​त्तियों के लिए 17,385 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य वाला संयुक्त उपक्रम बनाया था, जिसमें दोनों कंपनियों की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी है। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि कंपनी दुनिया की सबसे सस्ती हरित हाइड्रोजन विकसित करने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, दुनिया की सबसे बड़ी हरित हाइड्रोजन कंपनी बनने के हमारे सफर में टोटाल एनर्जीज के साथ साझेदारी से शोध एवं विकास, बाजार शोध और वास्तविक ग्राहकों के बारे में समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे बाजार की मांग का भी पता लगाने में मदद मिलेगी। टोटाल एनर्जीज के चेयरमैन और मुख्य कार्या​धिकारी पैट्रिक पॉयने ने कहा कि भविष्य में 10 लाख टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन की उत्पादन क्षमता से फर्म को नए डीकार्बनाइज्ड मॉलिक्यूल की हिस्सेदारी बढ़ाकर कुल ऊर्जा उत्पादन और बिक्री की 25 फीसदी करने में मदद मिलेगी। अदाणी ने यह दावा तब किया है, जब मुकेश अंबानी हाल ही में घोषणा कर चुके हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज एक दशक के अंदर हरित हाइड्रोज की लागत 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक ले आएगी। पिछले दो साल में इन दोनों अरबपति भारतीय उद्योगपतियों ने हरित हाइड्रोजन कारोबार में महत्त्वाकांक्षी निवेश योजनाओं की घोषणा की है। अदाणी ने 2020 में घोषणा की थी कि समूह अपने पूंजीगत व्यय का 70 फीसदी से अधिक स्वच्छ और ऊर्जा कुशल प्रणालियों में लगाएगा। जून 2021 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 75,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उतरने का ऐलान किया था। रिलायंस ने अपनी नई इकाई न्यू एनर्जी ऐंड न्यू मटीरियल्स के तहत सौर ऊर्जा उत्पादन और विनिर्माण, हाइड्रोजन उत्पादन, ई-ईंधन और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में निवेश की योजना बनाई है।

Published / 2022-06-13 16:33:49
जून में सुधरी दवाओं की बिक्री

एबीएन बिजनेस डेस्क (सोहिनी दास)। पहली तिमाही में बिक्री में बड़ी गिरावट के बाद देसी दवा बाजार उद्योग में सुधार नजर आया। जून में बाजार में 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई जबकि मई में उसमें करीब 9 फीसदी की गिरावट आई थी और अप्रैल में बिक्री पर 11 फीसदी की चोट पड़ी थी। ज्यादातर थेरेपी में सुधार नजर रआया है, जो संकेत देता है कि मांग वापस आ रही है। हालांकि इससे जुड़े लोग दावा कर रहे हैं कि मॉनसून के जल्द आने और जून 2019 के निचले आधार ने इसमें आंशिक भूमिका निभाई। बाजार शोध फर्म एआईओसीडी अवैक्स के आंकड़ोंं के मुताबिक, देसी दवा बाजार ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल-जून के दौरान 5.9 फीसदी की नकारात्मक बढ़त दर्ज की। सालाना मूविंग औसत के आधार पर हालांकि बिक्री में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एआईओसीडी अवैक्स के निदेशक अमीष मासुरेकर का मानना है कि जून 2019 का आधार निचला था क्योंंकि मॉनसून में थोड़ी देर हुई थी। उन्होंने कहा, उसकी तुलना में इस साल मॉनसून जल्दी आ गया। यह मोटे तौर पर संक्रमरोधी दवाओं जैसी श्रेणी की बिक्री बढ़ाती है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि प्रमुख थेरेपी की रफ्तार में सुधार को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। एआईओसीडी अवैक्स का मानना है कि जून के मुकाबले जुलाई की रफ्तार हालांकि स्थिर रहने की संभावना है। मासुरेकर ने कहा, यह मानना अभी जल्दबाजी होगी कि देसी दवा उद्योग जल्द ही बढ़त की पटरी पर लौट आएगा। जून के मुकाबले जुलाई करीब 2-3 फीसदी की बढ़त के साथ स्थिर रहेगा। क्रॉनिक थेरेपी क्षेत्र हालांकि पटरी पर लौटा है और हृदय रोग के इलाज की दवा में 11.8 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि मधुमेह की दवा में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। श्वसन से संबंधित बीमारी की दवा मेंं जून में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चूंकि लोग घर से बाहर निकल रहे हैं, लिहाजा संक्रमण की दर तेज हो रही है। एंटीबायोटिक (संक्रमणरोधी) और एलर्जी की दवा में कमी आई है। एक विश्लेषक ने कहा, उदाहरण के लिए अस्थमा की परेशानी कम हुई है क्योंकि लोग घर में रह रहे हैं। ये चीजें श्वसन रोग के इलाज की दवाओं की बिक्री में नजर आई हैं। एडलवाइस ने कहा कि ग्लेनमार्क फार्मा (13.1 फीसदी), अजंता (9.3 फीसदी), सिप्ला (7.4 फीसदी), टॉरंट (6.7 फीसदी) की रफ्तार भारतीय दवा बाजार के मुकाबले तेज रही। वहीं अन्य कंपनियों मसलन एल्केम (-1.8 फीसदी), नैटको (0.1 फीसदी), जायडस (0.2 फीसदी), सन फार्मा (0.8 फीसदी), डॉ. रेड्डीज (1.1 फीसदी), एलेंंबिक (1.7 फीसदी), ल्यूपिन (1.8 फीसदी) ने सुस्त बढ़ोतरी दर्ज की। ग्लेनमार्क के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जून में दो अंकों की रफ्तार फेविपिराविर के कारण दर्ज नहीं हुई। फेविपिराविर का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज में होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हमारी बढ़त की रफ्तार बाजार के मुकाबले लगातार बेहतर रही है।

Published / 2022-06-13 16:28:08
निवेशकों को पसंद आ रहीं होटल क्षेत्र की कंपनियां

एबीएन सेंट्रल डेस्क (देवांशु दत्ता)। हॉ​स्पिटै​लिटी यानी आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में सुधार आता दिख रहा है। मार्च 2020 के बाद से पहली बार, इस उद्योग में ग्राहकों की दर अप्रैल में 65 प्रतिशत के स्तर से ऊपर पहुंच गई। औसत किराया दरें (एआरआर) अब अप्रैल 2019 के मुकाबले 4 प्रतिशत ऊपर हैं। उपलब्ध प्रति कमरा राजस्व (रेवपार) भी अप्रैल 2019 के आंकड़ों से करीब 5 प्रतिशत ऊपर है। लेकिन पांच होटलों के लिए समग्र राजस्व भी वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में तिमाही आधार पर 19 प्रतिशत घटा है, भले ही राजस्व में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया। समग्र एबिटा में तिमाही आधार पर 52 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन कई सूचीबद्ध होटल कंपनियों के लिए सालाना आधार पर इसमें 200 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। कुल मिलाकर, होटल अब कोविड-पूर्व स्तरों से अपनी एआरआर सुधारने में सक्षम होंगे। कॉरपोरेट मांग कोविड से पहले जैसी ​स्थिति में आने की संभावना मजबूत हो गई है। कमरों की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर है, जिससे बेहतर प्रा​प्तियां दर्ज की जा सकती हैं। इंडियन होटल्स (आईएचसीएल) के लिए लागत कटौती से कॉरपोरेट खर्च घटकर 28 प्रतिशत रह गया। यह मौजूदा समय में 20 से ज्यादा शहरों में मौजूद है और 25 अन्य शहरों में विस्तार की संभावना तलाश रही है। चौथी तिमाही में कंपनी का राजस्व करीब कोविड-पूर्व स्तरों के 96 प्रतिशत के आसपास था। आईएचसीएल के प्रबंधन ने 300 होटलों का पोर्टफोलियो तैयार करने की योजना बानई है। वित्त वर्ष 2022 तक उसके पोर्टफोलियो में 175 होटलों के साथ 20,581 कमरे शामिल थे। मौजूदा समय में 60 होटलों पर विचार किया जा रहा है और 40 प्रतिशत परियोजनाएं जिंजर शृंखला के अधीन और 74 प्रतिशत प्रबंधन अनुबंधों के दायरे में हैं। आईएचसीएल ने 33 प्रतिशत एबिज मार्जिन का लक्ष्य रखा है जो मौजूदा समय में महज 13 प्रतिशत है। कंपनी के प्रबंधन ने नए व्यवसाय और प्रबंधन शुल्कों से वित्त वर्ष 2026 तक 35 प्रतिशत एबिटा योगदान का अनुमान जताया है, जो मौजूदा समय में 22 प्रतिशत है। प्रबंधन अनुबंध वित्त वर्ष 2022 में सभी कमरों के 36 प्रतिशत पर रहे और अगले 3-5 साल में यह लक्ष्य 50 प्रतिशत रखा गया है। कंपनी को प्रबंधन शुल्क से 400 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की संभावना है। इन अनुबंधों से हासिल होने वाला मौजूदा राजस्व 230 करोड़ रुपये के आसपास है। एक विश्लेषक ने इस शेयर के लिए कीमत लक्ष्य 260 रुपये तय की है, जो उसकी मौजूदा 227 रुपये की कीमत के मुकाबले ज्यादा है। कंपनी के शेयर में बुधवार को करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल और मई में लेमन ट्री होटल्स की बेंगलूरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में कमरे भरे रहने यानी ग्राहकों के आने की दर 80 प्रतिशत थी।

Page 54 of 77

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse