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Published / 2022-11-01 08:10:14
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत घटी, क्या सस्ता होगा डीजल-पेट्रोल

एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। भारत में पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 40 पैसे प्रति लीटर की कटौती का फैसला किया है। तेल की कीमतों में यह कटौती करीब 4 महीने बाद की जा रही है। बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध के बाद इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें 140 बैरल प्रति डॉलर के करीब पहुंच गई थीं। इसका असर भारत में भी देखने को मिला था। एक समय पर पेट्रोल की कीमतें 100 के पार पहुंच गयी थीं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर बोझ पड़ने लगा। लगातार बढ़ती तेल की कीमतों से देश में महंगाई बढ़ने लगीं। कोविड के बाद इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई और कीतमें तेजी से बढ़ने लगीं। तेल की कीमतों का असर बाजार पर दिखने लगा, जिसके बाद सरकार ने पिछले साल दिवाली से पहले एक्साइज में बड़ी कटौती कर जनता को राहत पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद सरकार ने इस साल भी एक्साइज मे बड़ी कटौती की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंदन ब्रेंट क्रूड आज 0.60 प्रतिशत उतरकर 95.20 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 0.85 प्रतिशत गिरकर 87.15 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। इस समय दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। देश में चार महीने से अधिक समय से ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मुंबई में पेट्रोल के दाम 106.31 रुपये प्रति लीटर और और डीजल की कीमत 94.27 रुपये प्रति लीटर है।

Published / 2022-10-31 22:31:46
निवेशकों के लिए सबक है मंदी का माहौल

एबीएन बिजनेस डेस्क। तमाम नकारात्मक खबरों के बावजूद शेयर बाजारों में बदलाव आएगा। बस दो परिदृश्यों से बचने की आवश्यकता है। बाजार में मंदी का माहौल है और जिंस को छोड़कर हर परिसंपत्ति वर्ग नुकसान में है। ऐसे में बिकवालों की ओर से और अधिक मंदी की बातें होना स्वाभाविक है। दुनिया भर में यही हो रहा है। पिछले तेजी के चक्र में जो गलतियां की गई थीं वे अब सामने आ रही हैं। बात चाहे मूल्यांकन की हो, वृद्धि अनुमानों की या वृद्धि के स्थायित्व की तो कई निवेशक फिलहाल नासमझ नजर आ रहे हैं। आप आखिर अमुक कंपनी को 40 के मूल्य/बिक्री अनुपात पर कैसे कर सकते हैं? आपने कैसे मान लिया कि महामारी के बाद भी एबीसी क्षेत्र में डिजिटल पहुंच 35-40 फीसदी की दर से बढ़ती रहेगी? ये कुछ नमूने हैं जिनसे पता चलता है कि कैसे विशेष शेयरों को लेकर सूक्ष्म स्तर पर बातचीत की जा रही है। वृहद स्तर पर देखें तो ब्याज दर के हमेशा शून्य रहने की अपेक्षा कैसे की गई? मुद्रास्फीति के बढ़ने का अनुमान क्यों नहीं लगाया गया जबकि 2020 में वैश्विक वित्तीय और मौद्रिक नीति संबंधी हालत खराब थी। तमाम तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं। शायद उस वक्त आकलन नहीं कर पाने के प्रायश्चित में अनेक टीकाकार अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं। इस बात पर भारी भरकम शोध लिखे जा रहे हैं कि क्यों दुनिया का अंत होने वाला है और बाजारों में आगे और गिरावट आनी है। इन आशंकाओं को समझा जा सकता है और ये वास्तविक भी हैं। यूरोप में पहले ही मंदी का माहौल है और 2023 में अमेरिका में भी गिरावट आनी तय है। मुद्रास्फीति अभी ?भी नियंत्रण में नहीं है और वास्तविक दरें ऋणात्मक बनी हुई हैं। आय संबंधी अनुमानों में 15-20 फीसदी की गिरावट आनी तय है। बेरोजगारी दर अमेरिका में रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। जब भी मंदी आती है रोजगार में गिरावट आती ही है। केंद्रीय बैंक की नीतियों के सामान्यीकरण को लेकर भय का माहौल है। क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी मौद्रिक सख्ती का क्या असर होगा? हमें नहीं पता क्योंकि हमने पहले कभी ऐसा देखा नहीं। वित्तीय तंत्र बढ़ती ब्याज दरों से कैसे निपटेगा? इन हालात को समझा जा सकता है और यह तार्किक भी है तथा हम क्वांटिटेटिव टाइटनिंग जैसे पहलुओं को समझ पा रहे हैं लेकिन इनके बावजूद वित्तीय बाजारों में एक ठोस हकीकत हमारे सामने है। अगर हम अतीत में मंदी की तमाम घटनाओं पर नजर डालें तो हमें पता चलेगा कि तमाम वास्तविक आर्थिक और वित्तीय बाजार मानकों पर शेयर बाजार एकदम निचले स्तर पर रहते हैं। वे अन्य संकेतकों से कई माह पहले निचले स्तर पर आ जाते हैं। यही कारण है कि अमेरिका में उन्हें प्रमुख आर्थिक संकेतकों में गिना जाता है। सामान्य रुझान यही है कि शेयर बाजार सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के छह माह पहले निचले स्तर पर आ जाता है। जीडीपी के बाद वेतन भत्तों और आय में गिरावट आती है। बाजार इन संकेतकों को देखते हैं और सुधार की तैयारी में लगते हैं। ऐसे में केवल इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि शेयर बाजार निचले स्तर पर जायेंगे क्योंकि जीडीपी, वेतन-भत्तों और आय में गिरावट की खबर देर से आती है। शेयर बाजार ने केवल एक बार देर से संकेत दिया था और वह था 2000 का समय जब शेयर बाजार तब नीचे गए थे जब वेतन गिरकर दोबारा बढ़ने लगा था। उस समय आय भी शेयर बाजार की तुलना में 12 महीना पहले न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई थी। उस समय भी मंदी की स्थिति शायद ही बनी थी। तकनीकी क्षेत्र की बात करें तो नैसडैक में तेज गिरावट आई जबकि व्यापक सूचकांक बात में नीचे आये। एक आर्थिक संकेतक जिसके शेयर बाजारों के साथ ही नीचे आने की संभावना होती है वह है आपूर्ति प्रबंधन संस्थान यानी आईएसएम का क्रय प्रबंधक सूचकांक जो शेयर बाजारों की गिरावट के एक दो माह के भीतर निचले स्तर पर आ गया। हर निवेशक को इस संकेतक पर भी नजर रखनी चाहिए। मेरा यह भी मानना है कि बाजारों में गिरावट के ज्यादातर मामलों में अधिकतर नुकसान गिरावट के शुरुआती 12-15 महीनों में होता है। शुरूआती गिरावट के बाद या तो बाजार में दोबारा तेजी आने लगती है या फिर एक विस्तारित अवधि के लिए बाजार किसी खास दिशा का रुख कर लेता है। हम वर्ष के अंत की ओर बढ़ रहे हैं और इस दौरान दोनों दिशाओं में तेज हलचल के साथ जहां बाजार अस्थिर बना रहेगा वहीं वैश्विक बाजारों में शेयरों का वजन बढ़ाने का अवसर भी होगा। यह याद रखना जरूरी है कि जिस समय यह होगा उस वक्त भी खबरें नकारात्मक रहेंगी। यह भी संभव है कि जिन टीकाकारों ने बाजार के रुझान में बदलाव को दर्ज किया और जो मंदी का रुख रखे हुए थे, वे बहुत तेजी का रुख नहीं अपनायेंगे। वर्षों तक शून्य ब्याज दर और प्रचुर मात्रा में नकदी वाले दौर से निकलते हुए एक मुखर विचार ऐसा भी है जिसे पूरा यकीन है कि बिना वित्तीय तंत्र में किसी दुर्घटनापूर्ण स्थिति के निर्माण के हम मौद्रिक नीति को सामान्य नहीं कर सकते हैं। ऐसी किसी दुर्घटना का अर्थ यही होगा कि सभी दांव नाकाम हो जाएं और यह आकलन करना असंभव हो जाए कि बाजार किस प्रकार की भूमिका निभायेंगे? एक अन्य परिदृश्य यह भी है कि मुद्रास्फीति के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने के बाद लक्ष्य पर वापसी करने में कई वर्षों का समय लगेगा। इस मामले में भी तयशुदा तौर तरीके शायद काम न आयें। वैश्विक और खासतौर पर अमेरिकी बाजारों का अपने निचले स्तर को छूना भारतीय शेयर बाजारों के नजरिये से बहुत आवश्यक है। भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ा जो?खिम वै?श्विक कारक हैं। अधिकांश आवंटकों को यकीन है कि भारत बहुत महंगा है। बीते कुछ वर्षों में बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहा है और 2022 में भी उसने मजबूती दिखाई है। भारत कई निवेशकों के लिए ऐसा बाजार रहेगा जहां वे अभी भी पैसा कमा सकते हैं। जब तक वैश्विक और उभरते बाजार के पोर्टफोलियो दबाव में रहेंगे तब तक भारत से बिकवाली का दबाव रहेगा। बीते बारह महीनों में द्वितीयक बाजारों से 40 अरब डॉलर की बिकवाली हुई है। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक वैश्विक बाजार दबाव में रहेंगे। घरेलू आवक को बचाव मुहैया है और वह पूंजी के इस बहिर्गमन की भरपाई कर देगी लेकिन बेहतर होगा अगर यह मुश्किल पूंजी की आवक की दृष्टि से अनुकूल हालात में बदल सके तो बेहतर होगा। हालांकि वैश्विक माहौल के मद्देनजर सतर्कता बरतना उचित होगा लेकिन हमें इस बात को लेकर भी सावधान रहना होगा कि मंदी की बातों के दोहराव में न फंस जायें। मंदी से जुड़ी तमाम बातों के बीच भी शेयर बाजार की हालत बदलेगी जरूर।

Published / 2022-10-28 23:22:19
बदले जा रहे रेलवे डिब्बों के डिजाइन, अब होगी कार और एसयूवी वाहनों की दोगुनी ढुलाई

एबीएन सेंट्रल डेस्क। माल ढुलाई में रिकॉर्ड कायम करने वाला भारतीय रेलवे अब वैगन के नये डिजाइन बनाने के साथ बुनियादी ढांचे को भी दुरुस्त करने में जुट गया है। रेलवे के इस कदम से वाहन निर्माताओं की ढुलाई की लागत तो आधी होगी ही, वहीं दूसरी तरफ रेलवे भी कार और खासकर स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की दोगुनी ढुलाई कर सकेगा। ज्यादा ऊंचाई वाले होंगे नए वैगन विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे के नए वैगन आकार में पहले से लंबे होंगे। जिससे उसी मालगाड़ी में ज्यादा कारें और खासकर एसयूवी की ढुलाई हो सकेगी। मौजूदा डबल डेकर वैगनों का आकार कापी छोटा है, जिससे दोनों डेक में कारों की ढुलाई नहीं हो सकती है। डिजाइन किये जा रहे नए वैगनों की ऊंचाई ज्यादा होगी। इसमें ऊपरी व निचली दोनों डेक में एसयूवी की ढुलाई हो सकेगी। नये वैगन में अभी के तुलना में दोगुने एसयूवी की ढुलाई हो सकेगी। वैगनों के डिजाइन में बदलाव की मांग लंबे समय से वाहन निर्माताओं द्वारा की जा रही थी। क्योंकि इससे एसयूवी की ढुलाई की लागत आधी हो जायेगी। इस समय रेलवे नए मॉडिफाइड गुड्स (एनएमजी) वैगनों का इस्तेमाल करती है। इसका डिजाइन बिल्कुल वैसा ही है, जैसा नियमित यात्री ट्रेनों का होता है। इसमें एक वैगन में 3-4 वाहन ले जाए जा सकते हैं, जो वाहन की लंबाई पर निर्भर है। रेलवे डबल डेकर वैगनों का भी इस्तेमाल करता है। बहरहाल वैगनों के ऊपरी डेक की लंबाई और चौड़ाई एसयूवी की ढुलाई के अनुकूल नहीं है। इसमें हैचबैक और दोपहिया की ढुलाई हो सकती है। सूत्र ने आगे बताया कि नए वैगन को नमूने के तौर पर तैयार किया जा रहा है और उसका परीक्षण हो रहा है। एक और डिजाइन को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, इसके बाद उपयोग के हिसाब से वैगनों का निर्माण व परीक्षण होगा। नये डिजाइन के जरिए रेलवे 2027 तक 300 मिलियन टन ढुलाई का लक्ष्य रखा है। यह 2021-22 के 1,418 टन ढुलाई की तुलना में यह दोगुना है। इसके इस्तेमाल से सड़क मार्ग से ढुलाई का बड़ा हिस्सा रेलवे के खाते में चला जायेगा। इस समय कुल पीवी की ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी 16 फीसदी है। बढ़ेगी रेलवे की ढुलाई क्षमता, पर्यावरण को भी होगा लाभ जानकारों का कहना है कि रेलवे द्वारा तैयार इन नये वैगन से रेलवे की ढुलाई क्षमता तो बढ़ेगी। साथ ही सड़कों पर भीड़ भी कम होगी। इससे कार्बन उत्सर्जन घटेगा और ग्राहकों का आधार भी तेजी से बढ़ेगा। इस समय ज्यादातर कारों की ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। जिसमें ज्यादा ईंधन का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण के प्रतिकूल है और महंगा भी है। रेलवे ने चालू वित्त वर्ष में 2,206 रैक यात्री वाहन (पीवी) देश भर में पहुंचाए हैं। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में इसमें 68 फीसदी की वृद्धि हुई है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में कुल बिकी 22.7 लाख पीवी में करीब आधी यूटिलिटी व्हीकल (यूवी) थीं। वित्त वर्ष 23 की पहली छमाही में कुल मिलाकर पीवी की बिक्री 35.5 फीसदी बढ़ी है, वहीं यूवी की बिक्री में 45.51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यूवी सेगमेंट में एसयूवी और एमयूवी (मल्टी यूटिलिटी व्हीकल) शामिल हैं।

Published / 2022-10-28 20:17:32
अगले हफ्ते बाजार में आ रहे हैं तीन कंपनियों के आइपीओ

एबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप भी किसी कंपनी के आइपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो अगले हफ्ते आपके पास बड़ा मौका आने वाला है। त्योहारी सीजन खत्म होते ही अगले हफ्ते बाजार में तीन बड़ी कंपनियां अपना बुआई लाने जा रही हैं। ये कंपनियां हैं डीसीएक्स सिस्टम, ग्लोबल हेल्थ और फ्यूजन माइक्रो फाइनेंस। डीसीएक्स सिस्टम आईपीओ : डीसीएक्स सिस्टम का आईपीओ अगले हफ्ते सोमवार को खुलेगा। इसमें निवेशक 31 अक्टूबर से लेकर 2 नवंबर 2022 तक बोली लगा सकते हैं। इस ने अपने आइपीओ के लिए 197 से 207 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी आइपीओ के जरिए बाजार से कुल 500 करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास करेगी जिसमें से 400 करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू से और 100 करोड़ रुपये आॅफर फॉर सेल के जरिए जुटाये जायेंगे। यह एक बेंगलुरु बेस्ड कंपनी है। फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस आईपीओ : अगले हफ्ते बाजार में आने वाला दूसरा आइपीओ फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस कंपनी का है। कंपनी का आइपीओ 2 नवंबर 2022 को खुलेगा। इसमें निवेशक 4 नवंबर 2022 तक बोली लगा सकते हैं। फ्यूजन माइक्रोफाइनेंस ने अपने आइपीओ के लिए 350-368 रुपये प्रति शेयर प्राइस बैंड रखा है। कंपनी आइपीओ के जरिए बाजार से 1,100 करोड़ रुपये जुटाने की कोशिश कर रही है, जिसमें से 600 करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू के जरिए और 500 करोड़ रुपये आॅफर फॉर सेल के जरिए जुटाये जायेंगे। ग्लोबल हेल्थ आईपीओ : अगले हफ्ते बाजार में आने वाला तीसरा आइपीओ देशभर में मेंदाता ब्रांड के नाम से हॉस्पिटल चेन चलाने वाली कंपनी ग्लोबल हेल्थ लाने जा रही है। ग्लोबल हेल्थ का आइपीओ गुरुवार को खुलेगा। इसमें निवेशक 3 से 7 नवंबर तक बोली लगा सकते हैं। ग्लोबल हेल्थ ने आइपीओ के लिए 319-336 रुपये प्रति शेयर प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी आइपीओ के जरिए बाजार से 2,200 करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास करेगी जिसमें से 500 करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू के जरिए और 5.08 करोड़ रुपये आॅफर फॉर सेल के जरिए जुटाये जायेंगे।

Published / 2022-10-27 22:32:38
सबसे बड़ी एवं विलासितापूर्ण वाहन है जर्मनी की मर्सिडीज...

एबीएन बिजनेस डेस्क। जर्मनी की मर्सिडीज-बेंज की क्लास कार इस ब्रैंड की सबसे बड़ी एवं विलासितापूर्ण वाहन है। कई दशकों से मर्सिडीज इस कार का निर्माण कर रही है। पिछले वर्ष मर्सिडीज ने इस कार का एकदम नया मॉडल मार्केट में उतारा। एकदम नया से तात्पर्य यह है कि एस क्लास कार की पुन: डिजाइन की गयी। नये ढांचे पर कार का निर्माण किया गया और कई प्रकार की नयी सुविधाओं, सुरक्षा साधन एवं विलासिता से कार को सुसज्जित किया गया और इस कार के उत्पादन के लिए जर्मनी में एक नए कारखाने का निर्माण किया गया। मर्सिडीज ने निर्णय लिया कि कार की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए पूरे विश्व में बिकने वाली नयी एस क्लास का उत्पादन केवल जर्मनी के प्लांट में किया जायेगा। जबकि मर्सिडीज की अन्य कारो का निर्माण कई देशो में होता है। अमेरिका में इस कार को 17 जुलाई 2021 में लांच किया गया जिसका पहला बैच सीधे जर्मनी से आया था। जुलाई में ही नयी र क्लास की अधिक शक्तिशाली एवं विलासितापूर्ण कार (एस-580) मेरे पास थी। कुछ ही दिन बाद मर्सिडीज से पत्र आया कि कार में कुछ कमी या समस्या पायी गयी है; अत: कार को रिकॉल किया गया है और मुझसे उस कार को सर्विस सेंटर में लाने का आग्रह किया गया जिससे उस समस्या को ठीक किया जा सके। तब से लेकर लगभग एक वर्ष तक, कुछ माह के अंतराल पर रिकॉल के पत्र आते रहे जिसे फिक्स कराने के लिए कार को सर्विस सेंटर ले जाना पढ़ा। उदाहरण के लिए, कुछ कार ड्राइव करते समय एकाएक बंद हो जाती थी या फिर कार की कंप्यूटर स्क्रीन ब्लैंक हो जाती थी। यद्यपि मेरी कार में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, तब भी कार को सर्विस सेंटर ले जाकर उस रिकॉल को फिक्स कराया गया। यह भी उस कार में जो विश्व की एक श्रेष्ठतम कार कंपनी - मर्सिडीज - की है और वह भी जर्मनी के प्लांट में जर्मन इंजीनियर एवं लेबर द्वारा बनाई गयी हो। लगभग आधे दर्जन रिकॉल के बाद भी इस कार पर मेरा विश्वास अडिग है। भारत के संदर्भ में देखा जाए तो वंदे भारत को लेकर यही स्थिति है। पहली बार एक नयी ट्रेन भारत में बनी है। भारत में ही इस ट्रेन का ढांचा, फ्रेमवर्क एवं डिजाइन बनाया गया है। प्रत्येक कार्य भारतीय इंजीनियर एवं लेबर ने किया है। दो बार जानवर टकराने से इस ट्रेन के प्लास्टिक या फाइबर के ढांचे में थोड़ा सा नुकसान हुआ है जिसे बदल दिया गया है। एक बार ब्रेक जाम हो गया। अर्थात, निर्माण एवं डिजाइन में कुछ समस्या केवल एक बार ही सामने आयी है। लेकिन देश-तोड़क शक्तियां इस एक्सीडेंट एवं ब्रेक जाम होने का उपहास उड़ा रही है। चाहे शाहीनबाग या फर्जी किसान आंदोलन का षडयंत्र हो; या फिर चंद्रयान की अंतिम क्षणों की विफलता; या फिर सर्जिकल स्ट्राइक की सफलता; या फिर डिजिटल भुगतान को लांच करना; या फिर भारतीय उद्यमियों की सफलता; हर पड़ाव पर यह लोग राष्ट्र के विरोध में खड़े है। इस शक्तियों का विश्वास भारत पर है ही नहीं। भारत की कोई भी उपलब्धि हो, यह शक्तियां चाहती है भारत फेल हो जाये, राष्ट्र की इमेज गिर जाये। क्योकि भारत के फेल होने पर ही वे लोग अनुचित रूप से अरबो-खरबो रुपये कमा सकते हैं, राष्ट्र की सत्ता हथिया सकते हैं।

Published / 2022-10-25 00:59:12
झारखंड : धनतेरस पर जमकर बरसा धन, रांची समेत प्रदेश में 1250 करोड़ का कारोबार

एबीएन बिजनेस डेस्क। धनतेरस पर इस बार झारखंड के बाजारों पर जमकर धन बरसा है। बात सोना-चांदी की खरीदारी की हो या फिर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक या फिर दूसरे सेक्टर की, खरीदारों ने बाजार पर जमकर पैसे लुटाए हैं। झारखंड चेंबर के मुताबिक इस साल धनतेरस पर राज्य भर में करीब 1250 करोड़ का कारोबार हुआ है, जबकि सिर्फ रांची में ही यह कारोबार करीब 700 करोड़ रुपये का है। इसमें ऑटोमोबाइल का बाजार सबसे बूम पर रहा। धनतेरस पर राज्य भर में कारोबार की बात करें तो अलग-अलग सेक्टर्स में जमकर खरीदारी हुई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में 450 करोड़, आभूषण बाजार में 300 करोड़, इलेक्ट्रॉनिक बाजार में 150 करोड़, मोबाइल बाजार में 140 करोड़, जमीन की करीब 480 रजिस्ट्री, सरकार को 3:50 करोड़ का रेवेन्यू मिला है। झारखंड चेंबर के अध्यक्ष किशोर मंत्री ने बताया कि बाजार इस साल धनतेरस पर मुस्कुरा नहीं बल्कि खिलखिला रहा है राजधानी के बाजार में 5. 50 लाख तक की घड़ी भी धनतेरस पर बिकी है। ऑटोमोबाइल ट्रैक्टर का हाल तो यह रहा धनतेरस पर जितने लोगों ने कार, बाइक या फिर अपने जिन वाहनों की बुकिंग करायी थी। उनमें कई लोगों को धनतेरस पर उनकी डिलीवरी नहीं मिल पायी। रांची के कांके रोड के रहने वाले निखिल ने अपनी पहली कार बुक करायी थी, लेकिन भारी भीड़ के कारण उन्हें धनतेरस के दिन उन्हें उनकी कार की डिलिवरी नहीं मिल पायी। हालांकि वो हताश नहीं चूंकि धनतेरस के अगले दिन उन्हें डिलीवरी का भरोसा दिया गया है। यही हाल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल के बाजार का रहा। चूंकि धनतेरस पर इन दोनों सेक्टर्स में ऑफर की भरमार थी, लिहाजा कोई भी इस ऑफर से चूकना नहीं चाहता था। स्मार्ट टीवी के साथ वॉशिंग मशीन समेत दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की जमकर बिक्री देखी गयी।

Published / 2022-10-22 14:25:12
धनतेरस बाजार : जानें कहां सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल

एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के आज शनिवार धनतेरस के दिन 22 अक्टूबर 2022 के रेट जारी कर दिये हैं। आज भी लोगों को राहत है और पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर रखे गये हैं। पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं की हैं। बता दें कि देश में सबसे महंगा फ्यूल राजस्थान के श्रीगंगानगर में है। इससे पहले महाराष्ट्र के परभणी में सबसे महंगा पेट्रोल मिलता था। श्रीगंगानगर की तुलना में पोर्टब्लेयर में पेट्रोल 29.39 रुपये सस्ता है, वहीं डीजल भी 18.50 रुपये सस्ता है। बता दें पोर्ट ब्लेयर में 84.10 रुपये है और डीजल ₹79.74 लीटर है। नये रेट के मुताबिक देश में सबसे सस्ता पेट्रोल पोर्ट ब्लेयर में है, जबकि सबसे महंगा तेल राजस्थान के श्रीगंगानगर में। पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल 84 रुपये 10 पैसे प्रति लीटर और डीजल का रेट 79 रुपये 74 पैसे लीटर है। आज दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के लिए 96.72 रुपये और डीजल 89.62 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

Published / 2022-10-22 13:48:30
दिवाली पर शेयर बाजारों में एक घंटे के लिए मुहूर्त ट्रेडिंग

एबीएन सोशल डेस्क। हिंदू संवत वर्ष 2079 की शुरुआत के पहले दिन दीपावली पर सोमवार को प्रमुख शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में एक घंटे का विशेष कारोबारी सेशन मुहूर्त ट्रेडिंग होगा। शेयर बाजारों में दिवाली के दिन भले ही छुट्टी रहती है, लेकिन इस दिन बाजार एक घंटे के लिए खुलता है। दोनों शेयर बाजारों ने अलग-अलग सर्कुलर में बताया कि यह सांकेतिक कारोबारी सेशन शाम को 6:15 बजे से 7:15 बजे के बीच होगा। ऐसी मान्यता है कि मुहूर्त के दौरान लेन-देन करना शुभ होता है और यह वित्तीय समृद्धि लाता है। मुहुर्त ट्रेडिंग के दौरान शेयर के अलावा जिंस वायदा, मुद्रा वायदा, शेयर वायदा एवं विकल्प जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार होगा। अपस्टॉक्स में डायरेक्टर पुनीत माहेश्वरी ने कहा कि किसी भी नई चीज की शुरुआत करने के लिए दीपावली को सबसे अच्छा वक्त माना जाता है। बाजार में धारणा सकारात्मक है और विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी हो रही है। माना जाता है कि इस सेशन के दौरान खरीदारी करने पर निवेशक को सालभर लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि यह सत्र केवल एक घंटे का है इसलिए नए कारोबारियों को इस दौरान सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

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