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Published / 2022-12-18 17:04:00
66,999 रुपये में मिलेगा देश का सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर बड्डी 25

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय बाजार में सबसे सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर बड्डी 25 लॉन्च हो गया है। इस स्कूटर की शुरुआती कीमत 66,999 रुपये है। बड्डी 25 इलेक्ट्रिक व्हीकल को 999 रुपये के टोकन अमाउंट के साथ कंपनी की वेबसाइट पर जाकर बुक किया जा सकता है। इसकी डिलीवरी अप्रैल 2023 से शुरू करेगी।

 कंपनी ग्राहकों को इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की आसान खरीद के लिए फाइनेंस में भी कई ऑप्शन दे रही है। इसमें आपको तत्काल लोन और नो कॉस्ट ईएमआई भी मिल रहा है।
रेवम्प मोटो कंपनी ने अपने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 48वी, 25एएच लिथियम-आयन बैटरी दी है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 70 किमी की राइडिंग रेंज मिल सकती है। इसकी टॉप स्पीड 25 किमी प्रति घण्टा है। 

आरएम बड्डी 25 इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए किसी रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस की जरूरत नहीं है। इसे 2 घंटे 45 मिनट में 0 से 100% तक फुल चार्ज किया जा सकता है। रेवम्प मोटो का दावा है कि बड्डी 25 को पूरी तरह से भारत में तैयार किया गया है और इसे महाराष्ट्र के ठाणे में कंपनी के फैसिलिटी में बनाया जायेगा। इसमें आगे की तरफ दोनों साइड हेडलाइट और पीछे की तरफ सर्कुलर टेल लाइट लगी है।

 इसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और फंक्शन पर ऑटो हेडलाइट शामिल है। लॉन्च पर बोलते हुए कंपनी के संस्थापक और सीईओ प्रीतेश महाजन ने कहा कि लंबी और कठिन यात्रा के बाद, रेवैम्प को भारत का पहला ट्रांसफॉर्मेबल ईवी, आरएम बडी 25 लॉन्च करने पर गर्व है। इसमें इंसुलेटेड बॉक्स, कैरियर, सैडल बैग जैसी चीजों को 30 सेकंड से भी कम समय में जरूरत के मुताबिक स्वैप किया जा सकता है

Published / 2022-12-17 23:24:19
कर कोष में उपकरों का 18 फीसदी योगदान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार की शुद्ध राजस्व प्राप्तियों में विभिन्न प्रकार के उपकरों के माध्यम से एकत्रित आय का हिस्सा वित्त वर्ष 2014 के 7.3 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 21 में 18.2 फीसदी हो गया है। संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्रालय ने सरकार द्वारा एकत्रित उपकर का विवरण साझा किया था।

आंकड़े दर्शाते हैं कि वित्त वर्ष 14 में उपकर के रूप में 73,880 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। यह उसी साल 10.14 लाख करोड़ रुपये की कुल राजस्व प्राप्ति का 7.3 फीसदी था। वित्त वर्ष 21 में, उप कर जमा बढ़कर 296,884 करोड़ रुपये हो गया (वस्तु एवं सेवा कर मुआवजा उपकर को छोड़कर)। यह उसी साल के 16.33 लाख करोड़ रुपये की कुल राजस्व प्राप्ति का 18.2 फीसदी है।
व्यक्तिगत करदाताओं के लिए, उपकर अतिरिक्त नियमित करों की तरह होते हैं क्योंकि ये उनके कर के कुल बोझ को बढ़ाते हैं। हालांकि, उपकर केंद्र की कर कोष में जुड़ते हैं, लेकिन राज्यों को इसका हिस्सा नहीं मिलता है। 

जीएसटी लागू होने के बाद, राज्य अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए वित्त के स्रोत के रूप में केंद्रीय कर विचलन पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बजट पूर्व बैठक में अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए केंद्र द्वारा उपकर लगाने के बढ़ते मामलों पर राज्य चिंता जता रहे थे। बैठक के दौरान, राज्यों ने केंद्र सरकार से उपकर को कर की मूल दरों में विलय करने का आग्रह किया ताकि राज्यों को करों के विचलन के दौरान उनका उचित हिस्सा प्राप्त हो सके। 

डॉ बीआर आंबेडकर स्कूल आॅफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति एन आर भानुमूर्ति कहते हैं कि उपकर और अधिभार को विभाज्य पूल में लाने की आवश्यकता है और इन्हें नियमित करों की तरह राज्यों के बीच वितरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समावेशन से, राज्यों को अपनी व्यय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए केंद्र की शुद्ध आय से विचलन का एक बड़ा हिस्सा मिलेगा।

14वें वित्त आयोग ने यह भी सिफारिश की थी कि उपकर से एकत्रित राजस्व को विभाज्य पूल के तहत रखने के लिए एक संवैधानिक संशोधन लाया जाये। केंद्र अभी स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर, पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, हाई-स्पीड डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर, राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क, कच्चे तेल पर उपकर, निर्यात पर उपकर, कृषि अवसंरचना और विकास उपकर और जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर जैसे उपकर एकत्र करता है।

Published / 2022-12-17 20:52:15
सालाना 50 लाख से कम टर्नओवर वाले व्यवसायियों के लिए है कंपोजिशन स्कीम

अजय दीप वाधवा

एबीएन बिजनेस डेस्क। छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी में  कंपोजिशन स्कीम है, जिसे अपनाने पर व्यापारी को अपने सभी लेन-देनों का अलग-अलग डिटेल नहीं देना पड़ता। उन्हें अपने पूरे कारोबार का सिर्फ एक निश्चित प्रतिशत टैक्स चुकाना पड़ता है। वस्तुओं के कारोबार का 1% चुकाना पड़ता है और सेवाओं के कारोबार पर, उनकी कैटेगरी के हिसाब से 5 से 6% तक चुकाना पड़ता है। 
सामान्य श्रेणी को राज्यों  के ऐसे कारोबारी, जिनका सालाना टर्न ओवर 1.5 करोड़ रुपये या इससे कम है, वे कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं। पर विशेष श्रेणी के राज्यों (उतरी भारत के 8 राज्य, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) के ऐसे कारोबारी, जिनका सालाना टर्नओवर 75 लाख रुपये या इससे कम है, वे भी कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं। सेवा क्षेत्र में सालाना 50 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाले व्यवसायी कंपोजिशन स्कीम अपना सकते हैं।

कुल टर्नओवर की गणना के लिए, एक पैन नंबर के तहत, होने वाले सभी कारोबारों को शामिल किया जाएगा। क्योंकि एक व्यक्ति या संस्थान के अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग कारोबारों को एक ही पैन के आधार पर अलग-अलग जीएसटी नंबर जारी किए जाते हैं।  कंपोजिशन स्कीम अपनाने वाले कारोबारी, टैक्स की रसीद / टैक्स इनवॉइस जारी नहीं कर सकते क्योंकि इन्हें अपने ग्राहकों से टैक्स लेने का अधिकार नहीं होता। इसकी बजाय कंपोजिशन कारोबारियों को अपनी जेब से टैक्स चुकाना पड़ता है। इन्हें अपने बिल पर ऊपर की तरफ इस बात का उल्लेख भी करना होता है कि वे कंपोजिशन टैक्सेबल पर्सन है और जीएसटी लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं। 
इसके अलावा, इन कारोबारियों के साथ और प्रतिबंध और शर्तें भी होती हैं, जैसे वे अपनी खरीदारियों पर चुकाए गए जीएसटी के बदले में इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं, जीएसटी के दायरे से बाहर की वस्तुओं का कारोबार नहीं कर सकते जैसे कि शराब आदि,  रिवर्स चार्ज सिस्टम के तहत होने वाले सौदों पर नॉर्मल रेट्स के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा, ऐसे कारोबारियों को अपने सभी बिलों और जारी की जाने वाली नोटिस पर कंपोजिशन टैक्सेबल पर्सन का उल्लेख करना अनिवार्य है, अपनी दुकान या आॅफिस के बाहर लगे साइनबोर्ड पर भी कम्पोजिशन टैक्सेबल पर्सन का उल्लेख होना चाहिए। 

अगर किसी कारोबारी के अलग-अलग कई तरह के कारोबार है, तो सभी तरह के कारोबारों का टर्नओवर जोड़कर कंपोजिशन के लिए निर्धारित लिमिट से अधिक नहीं होनी चाहिए ; जैसे कि एक ही मालिक के ग्रॉसरी, इलेक्ट्रॉनिक, टेक्सटाइल वगैरह का व्यवसाय है तो सब का टर्नओवर मिला कर कम्पोजिशन स्कीम की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। छोटे व्यवसायियों को इस स्कीम का लाभ लेना चाहिए क्योंकि इसके अंर्तगत कागजात कम रखने होते हैं और मासिक जीएसटी रिटर्न के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न ही भरना होता है। (लेखक राजधानी रांची के सुप्रसिद्ध कर सलाहकार हैं।)

Published / 2022-12-16 18:31:05
टेक महिंद्रा के साथ कैप्टिव प्राइवेट नेटवर्क को महिंद्रा के चाकन फैसिलिटी में लगाने के लिए एयरटेल ने किया समझौता

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत की प्रमुख दूरसंचार सेवा समाधान प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल  (एयरटेल) और टेक महिन्द्रा, जोकि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, कंसल्टिंग व बिजनेस री-इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस के अग्रणी प्रदाता हैं, ने आज एक अहम साझीदारी का ऐलान किया जिसके तहत उन्होंने ‘5जी फॉर एंटरप्राइज सॉल्यूशन’ को महिंद्रा की चाकन मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी में लागू किया है, जो भारत की पहली 5जी युक्त आॅटो मैन्यूफैक्चरिंग इकाई होगी।

व्यापार के लिए 5 जी समाधान ने चाकन की नेटवर्क कनेक्टिविटी को काफी बेहतर किया है जिससे सॉफ्टवेयर फ्लैशिंग की गति में सुधार हुआ है। अत्यधिक तेज गति और बेहद कम लैटेंसी से अब मैनेजरों के लिए यह मुमकिन हुआ है कि एक साथ कई सॉफ्टवेयर फ्लैशिंग सत्र ले सकते हैं जिससे किसी काम की प्रक्रिया पूरी करने में कम समय लगता है। इसके अलावा कम्प्यूटर आधारित निरीक्षण अब पूरी तरह स्वचालित हो गया है जिससे पेंट क्वालिटी बेहतर हुई है।

इस साझीदारी के बारे में बताते हुए एयरटेल बिजनेस के डायरेक्टर व सीईओ अजय चितकारा ने कहा, हमारा उद्यम के लिए 5 जी समाधान देश में मैन्यूफैक्चरिंग के कामों को बदल देगा। हम टेक महिंद्रा और महिन्द्रा आटो के साथ साझीदारी करके बहुत खुश हैं ताकि यह बदलाव दिखा सकें। हमने चाकन मैन्यूफैक्चरिंग ईकाई को भारत की पहली 5जी युक्त आटो मैन्यूफैक्चरिंग इकाई बनाया है। चूंकि उद्योग आदर्श 4.0 जोर पकड़ रहा है, ऐसे में विश्वसनीय डेटा नेटवर्क फैक्ट्री व मैन्यूफैक्चरिंग के नतीजों में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी होगा। यह तो शुरुआत भर है, और मुझे पूरा यकीन है कि हम और कई नवाचारी उपयोग के मामलों को सामने लाएंगे जिससे भारत में मैन्यूफैक्चरिंग की दुनिया बदल जायेगी।

Published / 2022-12-13 20:46:52
जीएसटी निबधंन या रजिस्ट्रेशन कैसे होता है...

अजयदीप बाधवा

टीम एबीएन, रांची। जीएसटी निबधंन या रजिस्ट्रेशन कैसे होता है? जिन व्यवसायियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक होता है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर जीएसटीआइएन लेना जरूरी होता है. कुछ राज्यों में टर्नओवर की यह सीमा 20 लाख रुपये से अधिक है. इसलिए, अगर आप इस टर्नओवर के दायरे में आते हैं, तो आपको जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। मान लें इस वर्ष तक आपकी कुल सालाना विक्रय, जिसे हम टर्नओवर कहते है, 19 लाख है तो आपको न जीएसटी ग्राहक से लेना है और न सरकार को देना हैं। आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। छोटे व्यापारियों के लिए यह बहुत बड़ी राहत है। पर अगर इस वर्ष आपका सालाना टर्निवर 40 लाख या ज्यादा हो जाता है तो आपको जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है। 

इसमें एक व्यवस्था और है कि अगर आप कि सालाना ट्यूरीवर 40 लाख से ज्यादा है पर 1.50 करोड़ से कम है तो आप कंप्सिशन स्कीम के तहत जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवा सकते है जिसमे आपको महज 1 % जीएसटी देना होता है और आप को मासिक के स्थान पर त्रैमासिक अर्थात तीन माह में एक बार ही जीएसटी रिटर्न भरना होता है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की कोई फीस नहीं है। आप खुद ही जीएसटी  पोर्टल पर जाकर आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं या किसी कर सलाहकार की मदद ले सकते हैं। कहने का तात्पर्य है कि जिन लोगों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक होता है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर जीएसटीआइएन लेना जरूरी होता है (कुछ राज्यों में टर्नओवर की यह सीमा 20 लाख रुपये  है)। 

हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने किसी राज्य के अंदर ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिये सप्लाई के नियम को आसान बना दिया है। आॅनलाइन सप्लायर का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपये से कम है या 20 लाख रुपये से कम का जीएसटी है, तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी. यह नया नियम 1 जनवरी, 2023 से लागू होगा। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए फोटोग्राफ, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक डीटेल्स, एकाउंट स्टेमेंट और कैंसिल चेक,आॅथराइजेशन फॉर्म या बोर्ड रेजोल्यूशन जैसे दस्तावेजों की आवश्कता पड़ती है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के 15 अंकों या अक्षरों का जीएसटीआइएन मिलता है जिसमें प्रथम दो अंक आप के राज्य को बताते है और अगले 10 अंक आपका पैन नंबर होता है। शेष अंक या अक्षर कुछ भी हो सकता है। व्यवसाय को अपना यह जीएसटी नंबर अपने कार्यालय में पब्लिक की जानकारी के लिए डिस्पले करना होता है।

जीएसटी रजिस्ट्रेशन का सबसे बड़ा लाभ है कि इसके बिना आप जीएसटी ले नही सकते। जिसका तात्पर्य है कि एक व्यवसाई बिना रजिस्ट्रेशन के  जीएसटी नंबर नहीं ले सकता और बिना इसके जब वो समान की खरीद करेगा तो उसको तो जीएसटी देना होगा पर वो अपने ग्राहक से जीएसटी ले नही पाएगा। इस से उसको इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा और जीएसटी उसको अपनी जेब से भरना पड़ जायेगा जो उसके लिए आर्थिक क्षति होगी। फिर जीएसटी रजिस्ट्रेशन से एक सम्मान की अनुभूति भी होती है  कि आप भी करदाता हैं और देश के विकास में आपका सहयोग है। रजिस्ट्रेशन करवा लेने से अंदर की गलत भावना भी समाप्त हो जाती है इसके बाद सरकारी कर अधिकारी अनावश्यक जांच और तंग नहीं करेंगे। (लेखक सीएमए, कोल इंडिया के सेनि अधिकारी,जीएसटी के कई पुस्तकों के लेखक और कर सलाहकार हैं।)

Published / 2022-12-10 13:31:26
महंगाई का बुरा दौर तो पीछे छूट गया है, लेकिन अभी ढिलाई की गुंजाइश नहीं : शक्तिकांत दास

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि महंगाई का खराब दौर पीछे छूट चुका है लेकिन अभी इस मोर्चे पर ढिलाई बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है। दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो इस निराशावादी दुनिया में भारत उम्मीद की किरण के रूप मे दिखाई दे रहा है। 

दुनिया के कई देशों में मंदी की भी आशंका है। इससे पहले दिन में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.35 प्रतिशत बढ़ाकर 6.25 करने की घोषणा की। इस तरह मई, 2022 से रिजर्व बैंक रेपो दर में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है। ऊंची मुद्रास्फीति की वजह से रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है। खुदरा मुद्रास्फीति पिछले कुछ महीनों से लगातार रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। 
दास ने कहा कि जिंस कीमतों और कच्चे तेल के दामों में कमी से वैश्विक स्तर पर महंगाई कम हो रही है लेकिन मुद्रास्फीति के मोर्चे पर सकारात्मक खबरों के बावजूद अभी हम ढिलाई नहीं बरत सकते। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक का प्रयास पहले मुद्रास्फीति को छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से नीचे लाना है। रेपो दर में 0.50 प्रतिशत के बजाय 0.35 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसे केंद्रीय बैंक की ओर से संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। पात्रा ने कहा कि ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत वृद्धि का दौर बीत चुका है।

Published / 2022-12-07 20:49:43
80 डॉलर से नीचे आया कच्चा तेल

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुआ बदलाव

एबीएन बिजनेस डेस्क। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 24 घंटे के दौरान बड़ी गिरावट दिख रही है। इसका असर बुधवार सुबह जारी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर भी दिखा। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी खुदरा रेट में यूपी से बिहार और हरियाणा तक नरमी दिख रही है। हालांकि, दिल्ली-मुंबई जैसे देश के चारों महानगरों में आज भी पेट्रोल-डीजल के रेट में बदलाव नहीं हुआ है। 
 

पिछले 24 घंटे में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 डॉलर की गिरावट दिख रही है और ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर से नीचे उतर आया है। ब्रेंट क्रूड आज सुबह 2 डॉलर से ज्यादा टूटकर 79.35 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। डब्ल्यूटीआई का रेट भी आज करीब 3 डॉलर की गिरावट के साथ 74.66 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा है। 
 

सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार, आज सुबह गौतमबुद्ध नगर जिले (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में पेट्रोल 36 पैसे सस्ता होकर 96.64 रुपये लीटर और डीजल 32 पैसे गिरकर 89.82 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। लखनऊ में पेट्रोल 18 पैसे नीचे आया और 96.44 रुपए लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल 17 पैसे टूटकर 89.64 रुपए लीटर हो गया है। बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल के रेट आज सुबह 50 पैसे गिरकर 107.24 रुपए लीटर जबकि डीजल 47 पैसे टूटकर 94.04 रुपए लीटर बिक रहा है। गुरुग्राम में भी आज पेट्रोल 61 पैसे सस्ता हुआ और 96.77 रुपए लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल 59 पैसे गिरकर 89.65 रुपए लीटर बिक रहा है।

Published / 2022-12-02 16:09:50
नवंबर ने बनाया रिकॉर्ड... मारुति, हुंडई और टाटा मोटर्स की बिक्री में भारी बढ़ोतरी

एबीएन बिजनेस डेस्क। कार कंपनियों के लिए नवंबर 2022 अब तक का सबसे अच्छा महीना रहा। त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद भी निजी उपयोग के लिए वाहनों की मजबूत मांग बनी हुई है। इसके साथ ही साल 2022 में रिकॉर्ड बिक्री होने की उम्मीद है। 

प्रमुख ऑटो कंपनियां मारुति सुजुकी इंडिया, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ने बताया कि पिछले महीने उनकी थोक बिक्री डबल डिजिट में बढ़ी। इस तरह यात्री वाहन उद्योग ने नवंबर में अब तक की सबसे अच्छी ग्रोथ दर्ज की। किआ इंडिया, होंडा कार्स, स्कोडा और एमजी मोटर ने भी पिछले महीने मजबूत बिक्री दर्ज की। हालांकि, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और निसान ने बताया कि पिछले महीने में नवंबर 2021 की तुलना में उनकी थोक बिक्री घट गयी। 

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) की कुल थोक बिक्री नवंबर, 2022 में 14 फीसदी बढ़कर 1,59,044 यूनिट रही। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने नंवबर, 2021 में डीलरों को 1,39,184 वाहनों की आपूर्ति की थी। बयान में कहा गया कि इस दौरान एमएसआई की घरेलू बिक्री 18 फीसदी बढ़कर 1,39,306 यूनिट रही। उसने नवंबर, 2021 में 1,17,791 यूनिट्स की बिक्री की थी। पिछले महीने में कंपनी की छोटी कारों- ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री 17,473 यूनिट से बढ़कर 18,251 यूनिट हो गयी। 

मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (मार्केटिंग एंड सेल्स) शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि पूरी इंडस्ट्री की थोक बिक्री पिछले महीने 31 फीसदी बढ़कर 3,22,860 यूनिट रही, जो पिछले साल नवंबर महीने में 2,45,636 यूनिट थी। श्रीवास्तव ने कहा कि इंडस्ट्री के लिए यह नवंबर महीने में अब तक की सर्वाधिक बिक्री है। इससे पहले, नवंबर 2020 में सर्वाधिक 2.86 लाख वाहन बिके थे।

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