बिजनेस

View All
Published / 2025-12-26 20:21:37
आपकी पूंजी ही आपका अधिकार

भूली हुई वित्तीय परिसंपत्तियां वापस पाना और नागरिक स्वामित्व को सुदृढ़ करना 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक देशव्यापी जागरूकता और सुगमीकरण पहल है जो नागरिकों को बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और वापस पाने में मदद करती है। यह पहल विनियमित वित्तीय प्रणालियों में बैंकों, बीमा, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड, शेयरों और सेवानिवृत्ति लाभों में बिना दावे वाली बचत पर ध्यान देती है। 

वित्तीय सेक्टर विनियामक के साथ वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित, यह अभियान डिजिटल पोर्टल को जिला-स्तरीय सुविधाओं के साथ जोड़ता है। सरकारी विभागों, विनियामकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वित प्रयासों से, लगभग 2,000 करोड़ रुपये सही मालिकों को लौटाये जा चुके हैं। 

पीढ़ियों से, भारतीय परिवार बैंक खाता खोलकर, बीमा पॉलिसी खरीदकर, म्यूचुअल फंड में निवेश करके, शेयर से लाभांश कमाकर और सेवानिवृत्ति के लिए पैसे अलग रखकर ध्यान से बचत करते आए हैं। ये वित्तीय निर्णय अक्सर बच्चों की पढ़ाई में सहायता करने, स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओें को पूरा करने और वृद्धावस्था में सम्मान का जीवन सुनिश्चित करने के लिए उम्मीद और जिÞम्मेदारी के साथ लिये जाते हैं। 

फिर भी, पिछले कुछ समय से मेहनत से कमाई गई इन बचत के एक बड़े हिस्से पर कोई दावा नहीं किया गया है। यह धन न तो विलुप्त हुआ है, न ही इसका गलत इस्तेमाल हुआ है। यह विनियमित वित्तीय संस्थानों के पास सुरक्षित है, जो जानकारी की कमी, पुराने रिकॉर्ड, रहने की जगह में बदलाव या खोए दस्तावेजों की वजह से अपने असली हकदारों से अलग हो गया है। कई मामलों में, परिवारों को पता ही नहीं होता कि ऐसी परिसंपत्तियां विद्यमान हैं।

आपकी पूंजी, आपका अधिकार, नागरिकों को इन भूली वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ने और यह सुनिश्चत करने की एक देशव्यापी कोशिश है कि जो धन लोगों और परिवारों का है, वह आखिर में उनके पास वापस आ जाये। 

बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियां क्या हैं? 

बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों का निर्माण तब होता है जब वित्तीय संस्थानों के पास रखे पैसे पर खाता धारक या उनके कानूनी वारिस लंबे समय तक दावा नहीं करते। ऐसी परिसंपत्तियों में शामिल हैं : 

  • बैंक डिपॉजिट जैसे सेविंग्स अकाउंट, करेंट अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और रेकरिंग डिपॉजिट जो दस साल या उससे अधिक समय से आॅपरेट नहीं किये गये हैं 
  • बीमा पॉलिसी की राशि जिसका निर्धारित तिथि के बाद भी भुगतान नहीं होता 
  • म्यूचुअल फंड रिडेंपशन से मिली राशि या डिविडेंड जो बैंक अकाउंट में बदलाव, बैंक अकाउंट बंद होना, रिकॉर्ड में बैंक अकाउंट अधूरा होना आदि कारणों से क्रेडिट नहीं हो पाये। 
  • डिविडेंड और शेयर जो बिना दावे के रह जाते हैं और कानूनी अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिये जाते हैं 
  • पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ जिनका दावा सामान्य तरीके से नहीं किया जाता 
  • अधिकतर मामलों में, काम के लिए प्रवास, अनुबंध विवरणों में बदलाव, पुराने बैंक खाता बंद होने या परिवार के सदस्यों और कानूनी वारिसों के बीच जानकारी की कमी जैसी आम जिंदगी की घटनाओं की वजह से परिसंपत्तियां बिना दावे के रह सकती हैं। 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल 

इस चुनौती का एक संरचित और नागरिक-केंद्रित तरीके से समाधान करने के लिए, सरकार ने अक्टूबर 2025 में एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और सुविधा अभियान के रूप में आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल आरंभ की। इस पहल को वित्तीय सेक्टर के प्रमुख फंड विनियामकों के सहयोग से वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित किया गया है, जिसमें शामिल हैं : 

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 
  • भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) 
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) 
  • निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) 
  • पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) 

इसका मुख्य लक्ष्य सरल प्रकियाओं और पारदर्शी प्रणालियों का उपयोग कर उन नागरिकों की पहचान करने, एक्सेस प्रदान करने तथा बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियां प्राप्त करने में उनकी मदद करना है जो कानूनी रूप से उनके हैं। 

बिना दावे वाली धन राशि का परिमाण 

भारत में बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की संख्या बहुत अधिक है और यह औपचारिक वित्तीय प्रणाली के कई हिस्सों में फैली हुई है। एक मोटे अनुमान के अनुसार, भारतीय बैंकों के पास कुल मिलाकर लगभग 78,000 करोड़ रुपए के बिना दावे वाले डिपॉजिट हैं। बिना दावे वाली बीमा राशि पॉलिसी से मिलने वाली राशि के लगभग 14,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि म्यूचुअल फंड में बिना दावे वाली रकम लगभग 3,000 करोड़ रुपये है।

इसके अतिरिक्त, बिना दावे वाले डिविडेंड लगभग 9,000 करोड़ रुपये के हैं। कुल मिलाकर, यह धन राशि नागरिकों की उन बिना दावे वाली बचत की मात्रा को रेखांकित करती है जो वित्तीय प्रणाली में सुरक्षित होने के बावजूद उपयोग में नहीं लायी जा रही है। 

बिना दावे वाली परिसंपत्तियां क्यों महत्वपूर्ण हैं 

बिना दावे वाला धन केवल एक वित्तीय संख्या नहीं है। परिवारों के लिए, इसका दुष्परिणाम यह हो सकता है कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका सहायता या आपातकालीन स्थितियों के लिए आवश्यक फंड सीमित मात्रा में या देर से प्राप्त हो। वरिष्ठ नागरिकों के लिए, इसमें पेंशन या बीमा के लाभ शामिल हो सकते हैं जो आवश्यक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। 

प्रणालीगत स्तर पर बिना दावे वाली परिसंपत्तियां नागरिकों और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बीच संपर्क को कमजोर करती हैं। जब लोग उन धन को प्राप्त करने में विफल रहते हैं जो उनके अपने हैं तो इससे भरोसे, भागीदारी और विश्वास पर असर पड़ता है। आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल के साथ इस मुद्दे को हल करने से न केवल घरेलू वित्त सुदृढ़ होगा, बल्कि वित्तीय संस्थानों की साख और समावेशिता भी मजबूत होगी। 

बिना दावे वाली लावारिस परिसंपत्तियों का पता लगाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म 

बिना दावे वाली बैंक जमाराशियां : यूडीजीएएम पोर्टल 

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित यूडीजीएएम पोर्टल एक केंद्रीकृत तरीके से सभी सहभागी बैंकों में बिना दावे वाली बैंक जमाराशियों के लिए केंद्रीय खोज की सुविधा प्रदान करता है। जब संबंधित बैंक दावे का निपटान करते हैं, तो यह पोर्टल नागरिकों की पहचान करने में मदद करता है कि बिना दावे वाली  शेष राशि कहां मौजूद हैं। 

अगर बैंक में जमा राशि (डिपॉजिट) पर दस साल या उससे ज्यादा समय तक कोई दावा नहीं करता है, तो उसे डिपॉजिÞटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। हालांकि, वो राशि तब भी कस्टमर का ही रहता है, और कस्टमर या उनके कानूनी वारिस कभी भी इस राशि के लिए दावा कर सकते हैं, इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं है। 

बीमा राशि : बीमा भरोसा पोर्टल 

बीमा भरोसा पोर्टल लोगों को बिना क्लेम की गई बीमा पॉलिसी की रकम का पता लगाने में मदद करता है। इसमें पॉलिसीधारक, नॉमिनी और उनके कानूनी वारिसों को बीमा कंपनियों के इंक्वायरी पेज के लिंक मिल जाते है जहां वो यह चेक कर सकते हैं कि उन्हें कोई बीमा राशि मिलनी है या नहीं। 
बीमा की रकम तब अनक्लेम्ड मानी जाती है जब ड्यू डेट से बारह महीने के बाद भी उसका भुगतान नहीं हुआ होता है। 

बीमा की रकम जो दस साल से ज्यादा समय तक अनक्लेम्ड रहती है, उसे सरकार द्वारा मेंटेन किए जाने वाले सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर फंड (एससीडब्ल्यूएफ) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। इस तरह के हस्तांतरण से बीमा रकम के मालिकाना अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है, और लाभार्थी के पास हस्तांतरण की तारीख से 25 साल तक रकम पर दावा करने का अधिकार बना रहता है। 

पॉलिसीधारक, नॉमिनी या कानूनी वारिस, एससीडब्ल्यूएफ में बीमा रकम हस्तांतरित होने के बाद भी, तय प्रक्रिया के हिसाब से दावा शुरू करने के लिए संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं। बीमा की दावा रहित रकम पर दावा करने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं है। 

यह व्यवस्था बचाव के उपायों को भी बढ़ावा देता है, जिसमें कॉन्टैक्ट विवरण को अद्यतन करना, नॉमिनेशन रजिस्टर और अपडेट करना, परिवार के सदस्यों को बीमा पॉलिसी के बारे में बताना, और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसी दस्तावेज का फिजिकल या डिजिटल रिकॉर्ड रखना शामिल है। आसान पहचान के लिए पॉलिसी को आधार और पैन से भी लिंक किया जा सकता है। 

म्यूचुअल फंड निवेश : मित्र पोर्टल 

एमएफ सेंट्रल पर होस्ट किया गया म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट ट्रेसिंग एंड रिट्रीवल असिस्टेंट (एमआईटीआरए-मित्र) निवेशकों को दावा रहित और निष्क्रिय इनएक्टिव म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स का पता लगाने में मदद करता है। यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को बताए गए सर्च पैरामीटर्स का इस्तेमाल करके उस म्यूचुअल फंड की पहचान करने की सुविधा देता है जिसमें ऐसे निवेश हो सकते हैं। 

फोलियो नंबर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर है जो म्यूचुअल फंड इंस्टीट्यूशन अपने निवेशकों को किसी खास योजना में उनकी संपत्ति को ट्रैक करने के लिए देते हैं। जब रिडेम्पशन, मैच्योरिटी प्रोसीडिंग्स, या डिविडेंड्स निवेशक के बैंक खाता में बदलाव या उसके बंद होने, अधूरे रिकॉर्ड, पुराने संपर्क विवरण, या केवाईसी अनुपालन लंबित होने जैसी वजहों से क्रेडिट नहीं होते हैं, तो म्यूचुअल फंड की रकम बिना दावे की रह जाती है। 

ऐसे मामलों में, बीमा रकम डूबती नहीं है; ड्यू डेट पर, इसे तय अनक्लेम्ड स्कीम में हस्तांतरित कर दिया जाता है, जहां यह तब तक रहता है जब तक इसे क्लेम नहीं किया जाता। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड फोलियो को निष्क्रिय माना जाता है अगर निवेशक दस साल तक कोई लेन-देन नहीं करता है, भले ही फोलियो में यूनिट बैलेंस मौजूद हो। 

एमआईटीआरए-मित्र बिना दावे वाले या निष्क्रिय निवेश की पहचान करने में मदद करता है, जिसके बाद निवेशक दावा प्रक्रिया शुरू करने के लिए संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) या रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) से संपर्क कर सकते हैं। 

यह व्यवस्था बचाव के उपायों पर भी जोर देता है, निवेशक को केवाईसी विवरण, बैंक खाते की जानकारी और सम्पर्क रिकॉर्ड अद्यतन रखने के लिए बढ़ावा देता है, और भविष्य में दावा रहित निवेश से बचने के लिए बैंक खाता स्टेटमेंट को नियमित तौर पर देखते रहने के लिए कहता है। 

लाभांश और शेयर : आईईपीएफए पोर्टल 

बिना दावे वाले डिविडेंड और शेयर को, लगातार सात साल तक बिना पेमेंट या बिना दावे के रहने के बाद, कंपनियां इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (आईईपीएफए) को हस्तांतरित कर देती हैं। आईईपीएफए पोर्टल एक सर्च सुविधा देता है जिससे लोग पैन, नाम या कंपनी का नाम और डीमैट आईडी/फोलियो नंबर जैसी जानकारी डालकर बिना दावे वाले डिविडेंड, शेयर या डिपॉजिट का पता लगा सकते हैं। 

आईईपीएफए के पास दावा करने का कोई शुल्क नहीं लगता है, और फंड में हस्तांतरित की गई रकम को क्लेम करने की कोई खास समय-सीमा नहीं है। सही क्लेम करने वाला रकम हस्तांतरित हो जाने के बाद किसी भी समय रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है। 

पहल को अमल में लाना 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल नागरिकों तक सीधे पहुंचने पर जोर देती है, और देश भर में व्यापक और सबको साथ लेकर चलने वाली कवरेज पक्का करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को व्यवहार में लाने से जोड़ती है। 

अक्टूबर 2025 में शुरू की गयी इस पहल को अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक तीन महीने के देशव्यापी अभियान के तौर पर लागू किया गया, जिसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को शामिल किया गया। यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क जागरूकता (अवेयरनेस), पहुंच (एक्सेसिबिलिटी) और कार्रवाई (एक्शन) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सरल और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी यथोचित बचत की पहचान करने, उस तक पहुंचने और उसे पुन: प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। 

अक्टूबर से 19 दिसंबर 2025 तक 668 जिलों में सुविधा सेवा शिविर लगाये गये। इन शिविरों में जन प्रतिनिधि, जिला प्रशासन, और बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के अधिकारियों ने प्रमुखता से हिस्सा लिया, जिससे स्थानीय स्तर पर समन्वित और असरदार सर्विस डिलीवरी दुरूस्त हुई। 

ये शिविर राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और राज्य स्तरीय बीमा समितियों के जरिए जिले के प्रमुख बैंकों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर लगाये गये थे। 

हेल्पडेस्क और डिजिटल कियोस्क के जरिए लोगों को दावा रहित वित्तीय परिसंपत्तियों को चेक करने और आसानी से दावा शुरू करने में मदद की गयी। 
एनरोल करने और केवाईसी और री-केवाईसी फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए भी बढ़ावा दिया गया, ताकि औपचारिक वित्तीय प्रणाली के साथ उनका लिंक मजबूत हो सके। 

जिला स्तरीय परिणाम 

जिला स्तर पर इसे लागू करने से देश के मकसद स्थानीय स्तर पर ऐसे नतीजों में बदले जिन्हें मापा जा सके। बंद और बिना दावे वाले वित्तीय खाते की पहचान की गयी, दावे शुरू किये गये और कई मामलों में फायदों को वापस किया गया, जिसमें आउटरीच एक्टिविटी के दौरान मौके पर ही सेटलमेंट भी शामिल था। बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर शामिल होने से समन्वित सर्विस डिलीवरी मुमकिन हुई, लोगों के बीच बातचीत आसान हुई और प्रोसेस में होने वाली देरी कम हुई। 

प्राप्त की गयी प्रगति 

अभियान के दौरान सरकारी विभागों, नियामकों और वित्तीय संस्थानों की मिलकर की गयी कोशिशों से अच्छे नतीजे मिले। लगभग 2,000 करोड़ रुपये उनके असली मालिकों को लौटाये गये, जिससे उन परिवारों को वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ा गया जिन पर लंबे समय से कोई दावा नहीं कर रहा था। 

वित्तीय वसूली के अलावा, इस पहल ने नामांकन, दस्तावेजीकरण और रिकॉर्ड रखने के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की, जिससे घर के स्तर पर ज्यादा असरदार वित्तीय योजना में मदद मिली। 

निष्कर्ष 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक नागरिक-केंद्रित पहल है जो लोगों और परिवारों को उन वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ती है जिनपर उनका अधिकार बनता है। जागरूकता, आसान एक्सेस और समन्वित सुविधा सेवा को मिलाकर, यह पहल वित्तीय प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करती है और यह पक्का करती है कि बिना दावे वाली बचत की पहचान की जाये और उनके असली मालिकों को लौटायी जाये। 

बड़े स्तर पर देखा जाये तो यह पहल वित्तीय संस्थान में भरोसा बढ़ाती है, वित्तीय समावेशिता को मजबूत करती है और जिम्मेदार वित्तीय तरीकों को बढ़ावा देती है। यह पक्का करके कि व्यक्तिगत बचत आसानी से मिल सकें, सुरक्षित रहें और हस्तांतरित हो सकें, आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक ज्यादा पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम वित्तीय प्रणाली में योगदान देता है।

Published / 2025-12-20 20:28:50
दोपहिया वाहनों पर ग्रामीण बाजार का दबदबा

त्योहारी सीजन में दोपहिया वाहनों की बिक्री चमकी, ग्रामीण बाजार ने बढ़ायी रफ्तार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में दोपहिया वाहन उद्योग इस वित्त वर्ष 2026 में 6 से 9 फीसदी की वृद्धि के साथ मजबूत वापसी कर रहा है। 
भारत के घरेलू दोपहिया उद्योग में चालू वित्त वर्ष 2026 में 6 से 9 फीसदी की सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह जानकारी दी है।

इक्रा के मुताबिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में की गई कटौती, शहरी उपभोग में उछाल और सामान्य मॉनसून के कारण ग्रामीण आय में मजबूती से इसे बल मिलेगा। त्योहारों के दौरान और उसके बाद शोरूम में ग्राहकों की निरंतर आवाजाही के कारण डीलरों को वाहनों की थोक बिक्री भी इस साल नवंबर में 19 फीसदी बढ़ गई और 18 लाख गाड़ियां बिक गयी। 

इक्रा ने कहा कि हाल में जीएसटी दरों में की गई कटौती और मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की प्रचार पेशकशों ने खुदरा मांग में कमी के बावजूद डीलरों को स्टॉक जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया। 

इसके विपरीत, इस महीने खुदरा बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 3.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी, जो इस वित्त वर्ष में त्योहारी सीजन जल्द शुरू होने और अक्टूबर में रिकॉर्ड बिक्री के बाद बने उच्च आधार के प्रभाव को दर्शाती है। मगर जीएसटी दरों में कटौती को लेकर सकारात्मक माहौल और शादी के सीजनमें मांग के कारण डीलरों की पूछताछ निरंतर बनी रही। 

फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के अनुसार, दशहरा और दीवाली के बीच 42 दिनों की त्योहारी अवधि में दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले साल के मुकाबले इस साल 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी। ग्रामीण धारणा में सुधार, नकदी की दमदार स्थिति और कर दरों में कमी से इसे बल मिला है। 

डीलरों ने इस सीजन को हाल के वर्षों में सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने मोटरसाइकिलों और स्कूटरों की मजबूत मांग के साथ-साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि का हवाला दिया। फाडा ने कहा कि त्योहारी मांग और नीतिगत समर्थन के मेल से इस खंड की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 

फाडा के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 2.5 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे बिक्री की संख्या भी पिछले साल की 1,43,887 गाड़ियों से घटकर 1,16,982 गाड़ियां रह गयी।

Published / 2025-12-09 20:06:58
शेयर मार्केट : सेंसेक्स 436 और निफ्टी 120 अंक गिरा

शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 436 अंक गिरा, निफ्टी 25,839 पर बंद 

एबीएन बिजनेस डेस्क। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद कुछ समय संभला, लेकिन ट्रेडिंग के आखिरी सत्र में बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। 

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपए में कमजोरी, अमेरिका-भारत ट्रेड तनाव और फेडरल रिजर्व की बैठक को लेकर अनिश्चितता ने बाजार पर बड़ा दबाव डाला। बीएसई सेंसेक्स 436 अंक गिरकर 84,666 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 120 अंक फिसलकर 25,839 पर बंद हुआ। 

दिनभर की बिकवाली में निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। बीएसई का मार्केट कैप एक ही दिन में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। अगर पिछले सत्र के नुकसान को जोड़ दिया जाये, तो दो दिनों में निवेशक 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा चुके हैं। 

गिरावट के बड़े कारण  

  1. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली : लगातार कई दिनों से एफआईआई बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा और शेयर कीमतें नीचे आयीं। 
  2. ट्रंप की टैरिफ धमकी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चावल पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, जिससे ट्रेड तनाव बढ़ा और निवेशकों की सेंटिमेंट कमजोर हुई। 
  3. फेडरल रिजर्व की बैठक को लेकर अनिश्चितता : फेड की नीति बैठक से पहले निवेशकों में सावधानी रही। यह चिंता थी कि फेड दरों में कटौती की गति को धीमा कर सकता है। 
  4. रुपये में कमजोरी : रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 90 के पार चला गया। इससे विदेशी निवेश महंगा होता है और बाजार में दबाव बढ़ता है। 
  5. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत : एशियाई बाजार—जैसे हांगकांग, कोरिया और चीन—सभी गिरावट में थे। अमेरिकी बाजार भी लाल निशान में बंद हुए, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

Published / 2025-12-08 21:02:30
जानें शेयर मार्केट में गिरावट के पांच प्रमुख कारण

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, इन 5 कारणों से क्रैश हुआ शेयर बाजार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 8 दिसंबर को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स ट्रेडिंग के दौरान 800 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी करीब 270 अंकों की गिरावट के साथ 25,900 के नीचे फिसल गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, मिडकैपझ्रस्मॉलकैप में भारी प्रॉफिट बुकिंग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सतर्क माहौल ने मार्केट पर दबाव बढ़ाया। 

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 609.68 अंक गिरकर 85,102.69 पर था, जबकि निफ्टी 225.90 अंक टूटकर 25,960.55 पर बंद हुआ। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 2% तक टूट गये, जिससे मार्केट में भारी गिरावट आयी। निफ्टी पर इंडिगो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इटरनल 7% तक लुढ़के और टॉप लूजर्स में रहे। 

शेयर बाजार में आज की गिरावट के 5 बड़े कारण 

यूएस फेड मीटिंग से पहले सतर्कता 

निवेशक 9 दिसंबर से शुरू होने वाली फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक से पहले सतर्क नजर आये। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकिल के अनुसार, निवेशक महंगाई के ताजा आंकड़ों और साल अंत पोर्टफोलियो बदलाव से पहले पोजिशन कम कर रहे हैं। इस हफ्ते आॅस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा और स्विट्जरलैंड के सेंट्रल बैंक की भी बैठकें हैं लेकिन नीति बदलाव की संभावना सिर्फ फेड में देखी जा रही है। 

स्मॉलकैप-मिडकैप में भारी मुनाफा वसूली 

स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 2% से ज्यादा टूटा, निफ्टी मिडकैप 100 लगभग 2% गिरा। स्मॉलकैप इंडेक्स लगातार 5वें दिन लाल निशान में, 5 दिन में 4% से ज्यादा की गिरावट आयी।  

एफआईआई की लगातार बिकवाली 

विदेशी संस्थागत निवेशक सातवें दिन भी बिकवाली करते रहे। शुक्रवार को एफआईआई ने 438.90 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दिसंबर में अब तक 10,403 करोड़ रुपये की बिकवाली रही। इससे मार्केट सेंटीमेंट और कमजोर हुआ है। 

भारतीय रुपये में कमजोरी 

रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 90.11 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसकी वजह तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी फंड की लगातार निकासी को माना जा रहा है। फॉरेक्स डीलर्स के मुताबिक, रुपये शुरू में 90.07 पर खुला था लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, कॉरपोरेट और इम्पोर्टर्स की डॉलर डिमांड और एफआईआई की बिकवाली के चलते इस पर दबाव बढ़ गया। 

क्रूड आयल में उछाल 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.13% बढ़कर $63.83 प्रति बैरल हो गया। भारत के लिए तेल की कीमतें बढ़ना हमेशा चिंता का विषय होता है क्योंकि इंपोर्ट बिल बढ़ता है, महंगाई का जोखिम बढ़ता है और यह दोनों ही कारण शेयर बाजार पर दबाव डालते हैं।

Published / 2025-12-04 21:39:25
मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और कारें होंगी महंगी

लगने वाला है महंगाई का झटका 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले बुधवार को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया पहली बार 90 के पार पहुंच गया है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जिनके कारोबार में इंपोर्टेड कच्चे माल या कंपोनेंट्स का बड़ा हिस्सा शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स, कार, ब्यूटी और फैशन सेक्टर की कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत की भरपाई अब कीमतें बढ़ाकर करेंगी।  

कमजोर रुपये से कंपनियों की लागत बढ़ी 

रुपए में भारी गिरावट के चलते कन्जुमर इलेक्ट्रॉनिक्स, आॅटो और ब्यूटी प्रोडक्ट्स तैयार करने वाले ब्रांड्स की लागत 3 से 7% तक बढ़ गयी है। इंपोर्ट पर निर्भर कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। जीएसटी कट की वजह से इन सेक्टर्स में हाल ही में सेल्स बढ़ी थीं लेकिन अब बढ़ी लागत ने कंपनियों की गणना बदल दी है। 

  • स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी होंगे महंगे 
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने दिसंबर-जनवरी के बीच 3-7% तक दाम बढ़ाने की तैयारी कर ली है। 
  • मेमोरी चिप्स, कॉपर और अन्य पार्ट्स महंगे 
  • कुल लागत में 30-70% हिस्सा इम्पोर्टेड पार्ट्स का 
  • चार महीने में मेमोरी चिप्स के दाम छह गुना बढ़े

Published / 2025-11-27 18:27:32
2026 में नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में शेयर बाजार

शेयर मार्केट : सेंसेक्स-निफ्टी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 2026 में पलटेगी बाजी या शेयर सूचकांक लगायेंगे लंबी छलांग? 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कुछ ऐसा हुआ, जिसने दलाल स्ट्रीट को रोमांचित कर दिया। सेंसेक्स पहली बार 86,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 ने भी सितंबर 2024 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नयी ऊंचाई छू ली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। 

लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 110.87 अंक या 0.13 प्रतिशत चढ़कर 85,720.38 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 446.35 अंक या 0.52 प्रतिशत की उछाल के साथ 86,055.86 के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। बेंचमार्क का इससे पहले का सर्वकालिक उच्च स्तर 27 सितंबर, 2024 को 85,978.25 था। 

50 शेयरों वाला निफ्टी भी नये हाई पर 

50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 10.25 अंक या 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 26,215.55 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान, बेंचमार्क 105.15 अंक या 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,310.45 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले, व्यापक सूचकांक ने 27 सितंबर, 2024 को 26,277.35 के अपने रिकॉर्ड इंट्रा-डे उच्च स्तर को छुआ था।

Published / 2025-11-26 22:12:10
क्या 2026 में भी बरकरार रहेगी सोने की चमक

सोने की कीमतों में 60% की ऐतिहासिक तेजी 

एबीएन बिजनेस डेस्क। एक्सिस डायरेक्ट का एनालिसिस कहता है कि लॉन्ग टर्म में सोने की मांग और कीमतें मजबूत रह सकती हैं। लेकिन 2026 में इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सोने पर दांव लगाने वाले निवेशकों ने साल 2025 में शानदार कमाई की है। 

एक्सिस डायरेक्ट की 2026 आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सोने की कीमतों में 60% से ज्यादा उछाल आया है। यह 1979 के बाद सबसे बड़ी सालाना बढ़त है। इस जोरदार तेजी के बाद भारतीय निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल है: क्या 2026 में भी सोना ऐसी ही चमक बनाए रखेगा, या फिर कीमतें ज्यादा बढ़ जाने से इसमें गिरावट आ सकती है? 

एक्सिस डायरेक्ट का एनालिसिस कहता है कि लॉन्ग टर्म में सोने की मांग और कीमतें मजबूत रह सकती हैं। लेकिन 2026 में इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सोने की कीमतें अब नीतिगत फैसलों, दुनिया के राजनीतिक हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार की लिक्विडिटी पर निर्भर करेंगी। 

2025 में सोना क्यों चमका? 

  • रिपोर्ट में पांच बड़े कारण बताये गये हैं, जिनकी वजह से 2025 में सोना रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंच गया। 
  • अमेरिका में राजनीतिक उथल-पुथल और टैरिफ वॉर : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बनाया। साथ ही नए और सख्त टैरिफ लगाए। इससे दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने का रुख किया। 
  • फेड द्वारा लगातार ब्याज दरों में कटौती : फेड ने सितंबर और अक्टूबर 2025 में ब्याज दरें कम कीं और दिसंबर में एक और कटौती की उम्मीद है। अमेरिका में गिरती यील्ड्स ने सोने को और आकर्षक बना दिया। 
  • केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी : पिछले साल विभिन्न देशों ने अपनी रिजर्व में 1,180 टन सोना जोड़ा और 2025 में भी लगभग 1,000 टन तक की खरीद की संभावना है। इससे सोने की मजबूत मांग बनी हुई है। 
  • ग्लोबल डी-डॉलराइजेशन : कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने डॉलर से निवेश हटाकर सोने को अपनी रिजर्व एसेट के रूप में चुना। इससे सोने की मांग और बढ़ी। 
  • ईटीएफ में तेजी से निवेश बढ़ना : दुनिया भर के गोल्ड ईटीएफ में पूरे साल बड़े पैमाने पर निवेश आया, जिससे संस्थागत निवेशकों का सोने पर मजबूत भरोसा दिखा। 

2026 में सोने के दाम इन वजहों से बढ़ने की उम्मीद 

  • एक्सिस डायरेक्ट के अनुसार, कई ऐसे फैक्टर हैं जो अगले साल सोने को नयी ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं: 
  • हाइपरइन्फ्लेशन का खतरा:अगर केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेड, बढ़ते कर्ज को संभालने के लिए और ज्यादा नोट छापते हैं। 
  • डी-डॉलराइजेशन की रफ्तार बढ़ना: जिससे सोने की भूमिका एक रिजर्व करेंसी के रूप में और मजबूत होगी। 
  • ईटीएफ में लगातार बढ़ता निवेश: जो सोने की कीमतों को आगे बढ़ा सकता है। 
  • 2026 की शुरुआत में फेड द्वारा और ब्याज दरें घटाना: इससे वास्तविक यील्ड्स कम होंगी और सोने की मांग बढ़ेगी। 
  • भू-राजनीतिक तनाव जारी रहना: मध्य पूर्व, यूक्रेन और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों में अनिश्चितता से सोने को सपोर्ट मिलेगा। इन 
  • सब कारकों का मिलाजुला असर सोने की लंबी तेजी को जारी रख सकता है। 

लेकिन यह तेजी रुक भी सकती है अगर 

  • रिपोर्ट ने कुछ ऐसे जोखिम भी बताये हैं, जो 2026 में सोने की तेजी को धीमा या रोक सकते हैं: 
  • अगर महंगाई कम न हुई तो दुनियाभर के केंद्रीय बैंक फिर से सख्त रुख अपना सकते हैं। 
  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जो आमतौर पर सोने की कीमतों को नीचे लाती है। 
  • केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीद में कमी, खासकर चीन और उभरते बाजारों में। 
  • भू-राजनीतिक तनाव कम होना, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट सकती है। 
  • शेयर बाजार, टेक सेक्टर और क्रिप्टो में अच्छा प्रदर्शन, जिससे निवेशक सोने से पैसा निकालकर उन बाजारों में लगा सकते हैं। 
  • ऊंची कीमतों या कड़े आयात नियमों के कारण भारत और चीन में फिजिकल सोने की मांग में गिरावट आना। 
  • भारतीय निवेशकों के लिए खासकर, कमजोर रुपये और ऊंचे आयात शुल्क से घरेलू मांग पर कुछ समय के लिए दबाव आ सकता है। 
  • मंथली टाइमफ्रेम के हिसाब से देखें तो सोना अभी भी लॉन्ग टर्म के लिए मजबूत तेजी दिखा रहा है।

Published / 2025-11-26 19:04:54
शेयर मार्केट : चार प्रतिशत तक उछले मेटल के शेयर

सरकार के संकेत से मेटल शेयर चमके, 4% तक उछले स्टॉक 

एबीएन बिजनेस डेस्क। आज (26 नवंबर) को मेटल कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। सेल, जेएसडब्ल्यू स्टील, वेदांता, हिंद कॉपर सहित कई दिग्गज स्टॉक्स ट्रेडिंग के दौरान 4% तक बढ़े। इसके दम पर निफ्टी मेटल इंडेक्स 2% उछलकर 10,267 तक पहुंच गया। 

दो दिनों में यह इंडेक्स कुल 2.5% चढ़ चुका है। मेटल शेयरों में यह तेजी ऐसे समय में आयी है, जब स्टील सेके्रटरी ने संकेत दिया कि सरकार स्टील आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी को लेकर जल्द ही फैसला ले सकती है। 

इस तेज रैली के पीछे तीन बड़े कारक रहे 

  1. स्टील आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी की वापसी के संकेत : स्टील मंत्रालय के सेके्रटरी संदीप पौंड्रिक ने कहा है कि सरकार कुछ स्टील उत्पादों पर सेफगार्ड ड्यूटी लगाने पर निकट भविष्य में फैसला कर सकती है। डीजीटीआर ने तीन साल की सेफगार्ड ड्यूटी की सिफारिश की है और इस पर विचार शुरू हो चुका है। यह बयान आते ही मेटल स्टॉक्स में तेजी बढ़ गयी। 
  2. आरबीआई से रेट कट की उम्मीद : आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दरों में कटौती की स्पष्ट गुंजाइश का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर एमपीसी मीटिंग के बाद आये डेटा ने रेट कट की संभावनाओं को कमजोर नहीं किया है। दिसंबर की बैठक में रेट कट की संभावना ने बाजार सेंटीमेंट को मजबूत किया और मेटल स्टॉक्स को बल दिया। 
  3. अमेरिका में भी दरें घटने की संभावना : अमेरिकी फेड दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। यूएस में रेट कट होने पर ग्लोबल फंड्स की लागत कम होती है और भारत जैसे ग्रोथ मार्केट में निवेश बढ़ सकता है, जिससे मेटल सेक्टर को सपोर्ट मिलता है।

Page 4 of 75

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse