बिजनेस

View All
Published / 2023-01-21 23:56:54
अमेरिकी बाजार में तनिष्क की धमक, अपना पहला स्टोर खोला

एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा समूह के अग्रणी आभूषण ब्रांड तनिष्क ने न्यू जर्सी में अपना पहला स्टोर खोलने के साथ अब अमेरिका में भी अपना कदम रख दिया है। अमेरिकी संसद के सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने न्यू जर्सी के मशहूर ओक ट्री रोड पर स्थित इस स्टोर का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर मेनेंडेज ने कहा कि कई आभूषण विक्रेताओं की मौजूदगी वाले ओक ट्री रोड पर तनिष्क स्टोर की शुरुआत कई मायनों में बेहद खास है। तनिष्क ने एक विज्ञप्ति में कहा कि यह स्टोर 18 कैरट और 22 कैरट सोने के अलावा हीरों से बने आभूषणों की भी बिक्री करेगा। इस स्टोर की शुरुआत के पहले तनिष्क की अमेरिकी बाजार में ई-कॉमर्स मंचों के जरिये मौजूदगी थी।

पिछले एक साल की ऑनलाइन मौ़जूदगी में तनिष्क को खरीदारों से अनुकूल प्रतिक्रिया मिली है। तनिष्क की अमेरिकी बाजार में भौतिक मौजूदगी कंपनी की कारोबार विस्तार रणनीति का हिस्सा है। इसके पहले कंपनी ने दुबई में भी नवंबर 2020 में अपना पहला स्टोर खोला था।

तनिष्क ब्रांड का संचालन करने वाली टाइटन कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (अंतरराष्ट्रीय कारोबार खंड) कुरुविला मार्कोस ने कहा कि इस शोरूम में हमारे नवीनतम उत्पादों को पेश किया जाएगा जो अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय की जरूरतों पर खरे उतरेंगे।

विज्ञप्ति के मुताबिक, कंपनी की योजना उत्तर अमेरिका और पश्चिम एशिया में अपने स्टोर की संख्या अगले दो-तीन साल में बढ़ाकर 20-30 तक पहुंचाने की है।

Published / 2023-01-19 09:05:03
सेकंडरी मार्केट में खरीद-बिक्री के भुगतान के लिए नई व्यवस्था की तैयारी में सेबी

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सेकंडरी मार्केट कारोबार के लिए नई भुगतान प्रणाली अपनाने की प्रस्तावित व्यवस्था ब्योरा आज जारी किया। इस कदम का मकसद ब्रोकरों को निवेशकों के पैसे के संभावित दुरुपयोग से रोकना है।

उद्योग के भागीदारों ने कहा कि नई प्रणाली के साथ ही कम अव​धि यानी टी+1 निपटान चक्र अपनाया गया तो भारतीय शेयर बाजार दुनिया का सबसे कुशल और उन्नत बाजार हो जायेगा।

बाजार नियामक ने सेकंडरी मार्केट में ट्रेडिंग के लिए धन को ब्लॉक करना शीर्षक से परिचर्चा पत्र जारी किया है। बाजार नियामक का मकसद इसके जरिये यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मंजूर नई डेबिट सुविधाओं का लाभ उठाना है।

सेबी ने इस पर आम लोगों से प्रतिक्रिया मांगी है। परिचर्चा पत्र में कहा गया है, ऐसा महसूस किया गया है कि आरबीआई द्वारा यूपीआई के लिए अनुमोदित सिंगल ब्लॉक और मल्टिपल डेबिट को सेकंडरी मार्केट के साथ जोड़ा जा सकता है ताकि ग्राहकों को धनरा​शि ब्लॉक करने की सुविधा मिल सके और उन्हें सेकंडरी मार्केट में खरीद-बिक्री के लिए अपने बैंक खाते में धनरा​शि ब्लॉक करने का अधिकार मिले। साथ ही उन्हें ट्रेडिंग सदस्य को पहले ही यह रकम नहीं देनी पड़े। नई व्यवस्था लागू होने से ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

इस समय निवेशक को खरीद-फरोख्त से पहले ब्रोकर को उक्त रा​शि भेजनी पड़ती है। इससे ब्रोकर के पास अतिरिक्त धन आ जाता है और उन्हें उस पर ब्याज की शक्ल में कमाई करने का मौका मिल जाता है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक ब्रोकरों के पास ग्राहकों की 30,000 करोड़ रुपये से अ​धिक की रा​शि पड़ी है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राहकों का पैसा उनके ही खाते में सुरक्षित रहेगा और उसे सीधे क्लियरिंग कॉरपोरेशन के पास भेजा जाएगा। इसी तरह की व्यवस्था प्राइमरी मार्केट के लिए भी की गई है, जिसे आस्बा (ऐ​प्लिकेशन सर्पोटेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) कहा जाता है।

हालांकि सेकंडरी मार्केट के लिए व्यवस्था का ढांचा ज्यादा जटिल है क्योंकि इसमें नकद और डेरिवेटिव सहित कई तरह के कारोबार यानी खरीद, बिक्री और इंट्रा-डे जैसे सेगमेंट शामिल हैं।

अभी बैंक के समर्थन वाले ब्रोकरेज ग्राहकों को 3-इन-1 अकाउंट की सुविधा देते हैं, जिसमें ब्रोकर को ट्रेड मूल्य के बराबर धनरा​शि दे दी जाती है।

मगर सेबी मानता है कि इसमें कुछ जो​खिम हैं, जिन्हें दूर नहीं किया गया है। इसमें गैर-निपटान का भुगतान, ग्राहकों के धन की गलत निकासी और गलत जानकारी शामिल है। सेबी ने कहा कि नई व्यवस्था ब्रोकरों के डिफॉल्ट के जो​खिम से भी बाजार को सुरक्षा प्रदान करेगी।

बाजार नियामक ने कहा कि शेयर ब्रोकरों की चूक का कारण अलग-अलग हो सकता है, लेकिन समस्या का मूल ग्राहक के धन और/या प्रतिभूतियों के दुरुपयोग से जुड़ा है। बड़ी संख्या में ग्राहकों को आ​र्थिक नुकसान होने के अलावा ऐसी घटनाएं प्रतिभूति बाजार में निवेशकों के भरोसे को भी कम करता है और यह चिंता की बड़ी वजह है।

सेबी ने कहा कि निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उन्हें शेयर ब्रोकरों द्वारा पैसों और प्रतिभतियों के दुरुपयोग से समुचित सुरक्षा प्रदान की जाए। नई व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो ब्रोकरों द्वारा धन या प्रतिभूति के दुरुपयोग के बारे में समय से पहले पता लगा लेगा और चेतावनी जारी करेगा।

Published / 2023-01-19 06:51:38
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शुद्ध लाभ 64 फीसदी बढ़ा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शुद्ध लाभ चालू वित्त 2022-23 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 64 फीसदी बढ़कर 458 करोड़ रुपये रहा। फंसे कर्ज में कमी और शुद्ध ब्याज आय (एनआईएआई) में सुधार से बैंक का मुनाफा बढ़ा है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में बैंक ने 279 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।

बैंक ने बुधवार को शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा कि तिमाही के दौरान उसकी कुल आय भी बढ़कर 7,635.71 करोड़ रुपये हो गयी। एक साल पहले समान तिमाही में यह 6,523.78 करोड़ रुपये थी। तीसरी तिमाही के दौरान शुद्ध ब्याज आय भी 20 फीसदी बढ़कर 3,285 करोड़ रुपये रहा। तीसरी तिमाही में बैंक का परिचालन लाभ भी 44.21 फीसदी बढ़कर 1,807 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में यह आंकड़ा 1,253 करोड़ रुपये रहा था।

मुनाफा 12 फीसदी बढ़कर 1,151 करोड़ रुपये पर पहुंचा : संपत्ति की गुणवत्ता के मोर्चे पर, बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) दिसंबर, 2022 के अंत तक घटकर आधा यानी 8.85 फीसदी रह गया। दिसंबर, 2021 के अंत तक यह 15.16 फीसदी रहा था। वहीं शुद्ध एनपीए भी बीते दिसंबर तिमाही में 4.39 फीसदी से घटकर 2.09 फीसदी रह गया।

Published / 2023-01-18 08:04:28
रायगढ़ में दो साल में होगा 50 मिलियन टन कोयले का उत्पादन

रवि रंजन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगले दो सालों में मांड-रायगढ़ कोल फील्ड पुरानी माइंस के साथ नई माइंस डेवलप करने पर काम चल रहा है। वर्तमान में 12.25 मिलियन टन कोयला प्रतिवर्ष निकाला जा रहा है जो अगले साल तक 21 मिलियन टन हो जाएगा। नई खदानें शुरू होने के बाद यह करीब 50 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक हो जायेगा।

वर्तमान में रायगढ़ में छाल माइंस 3.5 एमटी, बरौद 3.5 एमटी, जामपाली 3 एमटी और बिजारी 2.25 एमटी प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता है। सभी खदानों का माइनिंग प्लान रिनीवल हो रहा है। एसईसीएल ने बरौद को 10 एमटी, जामपाली को 4.5 एमटी और छाल को 6 एमटी प्रतिवर्ष बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। कोयला उत्पादन के क्षेत्र में इन दिनों बड़ी हलचल मची हुई है। चारों पुरानी माइंस का उत्पादन ही अकेले 20.5 एमटी हो जाएगा जो वर्तमान से करीब दो गुना है।

देश में साल दर साल बिजली की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसे पूरा करने के लिए कोयले के अलावा कोई बड़ा विकल्प नहीं है। इसलिए कोल इंडिया तेजी से कोयला खदानों का विकास करने पर काम कर रहा है। एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र में भी खदानों की क्षमता वृद्धि के साथ नई माइंस को डेवलप करने पर काम चल रहा है।

 अचानक से उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के पीछे आगामी वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग ही है। इसके साथ तीन तई खदानें पेलमा, दुर्गापुर और पोरडा-चिमटापानी भी शुरू हो जाएंगी जिसके लिए भूअर्जन प्रारंभ हो चुका है।

तीन खदानों में ही 31 एमटी उत्पादन : इसके अलावा कोल मिनिस्ट्री ने एसईसीएल को पेलमा 15 एमटी, दुर्गापुर 6 एमटी और पोरडा-चिमटापानी 10 एमटी क्षमता वाली तीन माइंस भी आवंटित की थी। पेलमा का एमडीओ हो चुका है जबकि बाकी दोनों की प्रक्रिया चल रही है। भूअर्जन भी जल्द प्रारंभ होना है। इन तीनों खदानों को अगले दो साल में शुरू किया जाना है।

Published / 2023-01-16 10:53:55
शेयर बाजार : 34% बढ़ी डीमैट खातों की संख्या

  • आकर्षक रिटर्न ने नये निवेशकों को शेयर बाजार में खींचा

एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर कारोबार के लिए इस्तेमाल होने वाले डीमैट खातों की संख्या दिसंबर, 2022 में बढ़कर 10.8 करोड़ हो गई जो सालाना आधार पर 34 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। एक विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजारों से आकर्षक रिटर्न मिलने, खाता खोलने की प्रक्रिया सुगम होने और वित्तीय बचत में वृद्धि से डीमैट खातों की संख्या में इतनी तेज वृद्धि हुई है। इस तरह के खातों में क्रमिक वृद्धि दिसंबर में उससे पहले के तीन महीनों की तुलना में अधिक रही। 

हालांकि, यह वित्त वर्ष 2021-22 की औसत खाता संख्या 29 लाख से कम ही है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के एक विश्लेषण में कहा गया है कि अक्टूबर और नवंबर में 18-18 लाख और सितंबर में 20 लाख खातों की तुलना में दिसंबर, 2022 में ऐसे खातों की क्रमिक वृद्धि 21 लाख थी। यस सिक्योरिटीज के पीआरएस इक्विटी रिसर्च प्रमुख निस्ताशा शंकर का मानना है कि हर महीने जुड़ने वाले खातों की वृद्धि दर सुस्त पड़ने के पीछे मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध, उच्च ब्याज दर का माहौल एवं बढ़ती मुद्रास्फीति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण देखी गयी अस्थिरता कारण रही है। 

आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (निवेश सेवाएं) रूप भूटेरा ने कहा कि एक साल पहले की तुलना में वर्ष 2022 में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की संख्या में आयी कमी ने भी पिछले कुछ महीनों में डीमैट खातों की वृद्धि दर पर असर डाला है। 

आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर, 2022 में डीमैट खातों की संख्या दिसंबर 2021 के 8.1 करोड़ की तुलना में 34 प्रतिशत बढ़कर 10.8 करोड़ हो गयी। इक्विटी बाजारों से आकर्षक रिटर्न मिलने और ब्रोकरों की तरफ से ग्राहकों को खाता खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाने से पिछले वर्ष डीमैट खातों में वृद्धि हुई। हालांकि, डीमैट खातों की बढ़ती संख्या के बीच एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या पिछले छह महीनों से लगातार घट रही है। उद्योग में सक्रिय उपयोगकर्ता ग्राहक सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़े, लेकिन दिसंबर, 2022 में महीने-दर-महीने यह एक प्रतिशत गिरकर 3.5 करोड़ हो गये।

मोतीलाल ओसवाल इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के बैंकिंग, बीमा एवं वित्तीय शोध प्रमुख नितिन अग्रवाल ने कहा कि बाजारों में अस्थिरता बढ़ने से वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी छमाही में बाजार में आने वाले ग्राहक अपनी खरीद-बिक्री गतिविधियां कम कर रहे हैं। मौजूदा समय में देश की शीर्ष पांच ब्रोकिंग फर्मों की एनएसई सक्रिय ग्राहकों में हिस्सेदारी बढ़कर 59.3 प्रतिशत हो गई है जबकि दिसंबर, 2021 में यह अनुपात 56.2 प्रतिशत था। इन फर्मों में जेरोधा, एंजेल वन, ग्रो, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और आईआईएफएल सिक्योरिटीज शामिल हैं।

Published / 2023-01-15 08:50:48
देश की पहली सोलर इलेक्ट्रिक कार पेश, 80 पैसे में चलेगी एक किमी, 45 मिनट में फुल चार्ज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ग्रेटर नोएडा में चल रहे 16वें ऑटो एक्सपो 2023 में अलग-अलग वाहन निर्मता कंपनियों ने अपने एक से बढ़कर एक मॉडल पेश किये हैं। जिसमें इलेक्ट्रिक से लेकर हाइब्रिड कारें शामिल हैं। पुणे स्थित स्टार्टअप वायवे मोबिलिटी ने ऑटो एक्सपो 2023 में भारत की पहली सोलर एनर्जी (सौर ऊर्जा से चलने वाली) इलेक्ट्रिक कार ईवीए (ईवा) को पेश किया है। पावर और ड्राइविंग रेंज : यह कार का प्रोटोटाइप है और इसमें दो एडल्ट और एक बच्चा आसानी से बैठ सकता है। बेहद आकर्षक लुक वाली इस छोटी इलेक्ट्रिक कार में दो दरवाजे दिये गये हैं। कार पूरी तरह से सोलर एनर्जी से चलती है, और एक सिंगल चार्ज में 250 किमी तक की दूरी तय कर सकती है। वाहन में 14 केडब्ल्यूएच की बैटरी लगी है जिसे सौर पैनलों या एक स्टैंडर्ड इलेक्ट्रिकल आउटलेट के जरिए चार्ज किया जा सकता है। बैटरी और चार्जिंग : इस सोलर कार में एक लिक्विड-कूल्ड पीएमएसएम मोटर मिलता है और यह 6 केडब्ल्यू का पावर जेनरेट करता है। इसके छोटे 14 केडब्ल्यूएच बैटरी पैक और फास्ट चार्जिंग की बदौलत इसे 45 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। इसमें एक्टिव लिक्विड कूलिंग भी मिलता है। कार की बैटरी को स्टैंडर्ड सॉकेट के जरिए 4 घंटे में फुल चार्ज किया जा सकता है। कार चलाने का खर्च : कार के सोलर पैनल इसकी छत में इंटीग्रेटेड होते हैं, जिससे वे लगभग दिखाई नहीं देते हैं। इसके वाहन को एक स्कील और स्ट्रीमलाइन लुक मिलता है। सोलर चार्जिंग के अलावा कार को इसकी बैटरी से भी चलाया जा सकता है। इस कार की बैटरी को फुल चार्ज करने के बाद इसकी रनिंग कॉस्ट सिर्फ 80 पैसे प्रति किमी हो जायेगी। इसका सोलर पावर स्रोत ईंधन की जरूरत को भी खत्म कर देता है। जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बन जाता है। फीचर्स : ईवीए में एक रिवर्सिंग कैमरा, एक टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग जैसे फीचर्स दिये गये हैं। इसमें मोनोकोक चेसिस, ड्राइवर का एयरबैग और आईपी-68- प्रमाणित पावरट्रेन जैसे सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं। इसमें एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो कनेक्टिविटी सिस्टम मिलता है। इसका पैनारोमिक सनरूफ कार के इंटीरियर को ज्यादा स्पेसियश लुक देता है। साइज : कार की साइज की बात करें तो इसकी लंबाई 3060 एमएम, चौड़ाई 1150 एमएम, उंचाई 1590 एमएम है और 170एमएम का ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है। कार का कॉम्पैक्ट साइज और कुशल डिजाइन इसे शहर में ड्राइविंग के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। कब होगी लॉन्च : कार की बॉडी हल्की सामग्री से बनी है जिसमें लचीलेपन और भविष्य की अवधारणा को ध्यान में रखा गया है। यह डिजाइन कार के ओवरऑल वजन को कम करने और दक्षता बढ़ाने में मदद करता है। कंपनी इसे 2024 में भारत में लॉन्च करने की योजना बना रही है।

Published / 2023-01-13 21:43:44
जीएसटी के तहत रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म क्या है?

अजय दीप वाधवा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। जीएसटी में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के अंतर्गत कई लेन देन में आपूर्तिकर्ता के बजाय प्राप्तकर्ता द्वारा जीएसटी भुगतान की प्रक्रिया है। इस मामले में, कर भुगतान का दायित्व आपूर्तिकर्ता के बजाय प्राप्तकर्ता/ क्रेता को स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसे ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) बोलते हैं। सामान्यता जीएसटी में क्रेता बिल के साथ जीएसटी भी विक्रेता या आपूर्तिकर्ता को भुगतान कर देता है जिसे विक्रेता या आपूर्तिकर्ता निश्चित तिथि के अंदर सरकार को दे देता है। पर कुछ परिस्थितियों या लेनदेन में क्रेता या प्राप्तकर्ता सिर्फ वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य का बिल का भुगतान ही विक्रेता या आपूर्तिकर्ता को करता है, जीएसटी का नहीं और जीएसटी वह सीधे सरकार को जमा कर देता है। अर्थात आरसीएम में जीएसटी भुगतान की जिम्मेवारी विक्रेता की न हो कर क्रेता, खरीददार या प्राप्तकर्ता की होती है। 

उदाहरण के लिए, श्याम ने हरि को 1,00,000 रुपये का सामान विक्रय किया। जीएसटी के समान्य प्रणाली के हिसाब से श्याम द्वारा हरि से जीएसटी लिया जायेगा और आगे सरकार को भुगतान किया जायेगा। लेकिन इस व्यवहार या लेनदेन में अगर आरसीएम प्रणाली लागु होती है तो हरि द्वारा श्याम को जीएसटी का भुगतान करने के बजाय सीधा सरकार को भुगतान किया जायेगा। अर्थात, जीएसटी भुगतान सरकार को करने की जिम्मेवारी श्याम की न हो कर आरसीएम के तहत हरी की हो जायेगी। आरसीएम (रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म) सामान्यता आयात, अपंजीकृत (जिसका रजिस्ट्रेशन ना हो) डीलर से खरीदारी और कुछ अधिसूचित वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लागू होता है। सरकार अधिसूचना के तहत उन वस्तुओं या सेवाओं को अधिसूचित करती है जिस पर आरसीएम के तहत जीएसटी का भुगतान होगा। 

वर्तमान परिदृश्य में, बीमा एजेंट, जनशक्ति आपूर्ति, माल परिवहन एजेंसी, आदि जैसी सेवाओं के लिए भी सेवा कर में रिवर्स चार्ज तंत्र लागू है। प्राप्तकर्ता को आपूर्ति पर 100% जीएसटी कर का भुगतान करना होता है। पहले के परिदृश्य में, माल परिवहन के समान ही कई असंगठित क्षेत्रों से सेवा कर एकत्र करना सरकार के लिए कठिन होता था व सरकार को पूर्ण कर की प्राप्ति नहीं होती थी। पर जीएसटी में सरकार ने कर वंचना से बचने के लिए आरसीएम के अंर्तगत उन विक्रेता या आपूर्तिकर्ता से भी जीएसटी प्राप्त कर लेती है जिस से पूर्व के विक्रय कर, वैट या सेवा कर के युग में कर प्राप्त नहीं हो पाता था। (लेखक सुप्रसिद्ध सीएमए, कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट, कर/ वित्तीय/ निवेश सलाहकार हैं।)

Published / 2023-01-11 10:10:37
2023 में मंदी की चपेट में आ सकती है ग्लोबल इकोनॉमी

  • वर्ल्ड बैंक की चेतावनी ने ग्रोथ अनुमान घटाया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व बैंक ने इस वर्ष विकसित देशों में मंदी और बढ़ने तथा विश्व में आर्थिक वृद्धि मात्र 1.7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। विश्व बैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट ग्लोबल इकोनामिक प्रोस्पेक्ट्स में यह छह महीना पहले के अनुमान का करीब आधा है।

यदि ऐसा रहा तो यह है पिछले 30 वर्ष में 2019 और 2020 को छोड़कर विश्व अर्थव्यवस्था में सबसे कम जीडीपी वृद्धि का वर्ष होगा। रिपोर्ट में विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कहा है कि विकसित देशों में संकट गहरा हो रहा है। उन्होंने कहा है कि ताजा अनुमान बता रहे है कि स्थिति तेजी से और व्यापक रूप से बिगड़ रही है।

दुनिया के करीब करीब सभी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय कोविड महामारी से पहले के दशक की तुलना में धीमी गति से बढ़ेगी क्योंकि विश्व अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के लिए चुनौती अभी बने रहने की आसार हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के अंत में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कोविड-19 महामारी के शुरू होने के पहले की तुलना में छह प्रतिशत कम रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों के सामने ऋण भार और कमजोर निवेश के कारण कई साल तक आर्थिक वृद्धि नरम रहने का खतरा है।

Page 36 of 75

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse