एबीएन बिजनेस डेस्क। जीरा, टमाटर और दलहन के बाद अब हल्दी की कीमत बढ़ने की बारी है। प्रमुख इलाकों में बोआई में देरी, व्यापारियों के पास स्टॉक कम होने और पिछले कुछ सीजन में कम मुनाफा के कारण इसकी खेती को लेकर उदासीनता के कारण एक महीने से भी कम समय में हल्दी की कीमत में करीब 42 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
कुछ व्यापारियों का कहना है कि कुछ जमाखोरी भी संभव है, क्योंकि कई साल के बाद इससे मुनाफे में सुधार हुआ है।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक हल्दी का हाजिर भाव 20 जून को मोटे तौर पर 8,100 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 19 जून को बढ़कर 11,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक हल्दी की खुदरा महंगाई जनवरी के 7.6 प्रतिशत से घटकर जून में 4 प्रतिशत पर आ गई है, जो मंत्रालय के अंतिम उपलब्ध आंकड़े हैं। हल्दी लंबे समय में तैयार होने वाली फसल है और इसकी ज्यादातर फसल 250 से 270 दिन में पकती है। इसकी बोआई सामान्यतया जाते मॉनसून के वक्त जुलाई में शुरू होती है और मार्च में फसल तैयार होती है।
हालांकि कुछ ऐसी किस्में हैं, जो जल्दी तैयार हो जाती हैं, लेकिन अधिकतर फसल को तैयार होने में 8 महीने लग जाते हैं। पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक 2022-23 फसल वर्ष में भारत में 11.6 लाख टन हल्दी का उत्पादन हुआ, जो 2021-22 के 12.2 लाख टन की तुलना में मामूली कम था।
सामान्यतया 2,90,000 से 3,30,000 हेक्टेयर जमीन पर हल्दी की खेती की जाती है। लेकिन 2022-23 में आधिकारिक अनुमान के मुताबिक इसके रकबे में करीब 10,000 हेक्टेयर की कमी आर्यी है।
तेलंगाना के निजामाबाद के आरमूर इलाके के हल्दी किसान मधुसूदन ने कहा, ह्यपिछले 5 साल में हल्दी की कीमत बमुश्किल 5,000 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर गई है, जो उत्पादन की लागत निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसकी वजह से किसानों ने इसकी जगह दूसरी खेती शुरू कर दी।
इस साल तेलंगाना और महाराष्ट्र में बारिश कम हुई है, इसकी वजह से बुआई का रकबा और कम हुआ है। उन्होंने कहा कि आरमूर में हल्दी का रकबा घटकर 20,000 से 25,000 एकड़ रह गया है, जो 5 साल पहले 35,000 एकड़ था।
हल्दी कारोबारी पूनम चंद गुप्ता ने कहा कि महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक इलाकों महाराष्ट्र के सांगली और नांदेड़, तेलंगाना के निजामाबाद और तमिलनाडु के इरोड में पिछले साल की तुलना में अब तक बोआई का रकबा 10 से 15 प्रतिशत कम हुआ है, जिसकी वजह से कीमत बढ़ी है।
बहरहाल कुछ कारोबारियों का कहना है कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश तेज होने के साथ बोआई गति पकड़ेगी, जिससे खुले बाजार में हल्दी की कीमत में कमी आ सकती है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 19 जुलाई तक कुल मिलाकर दक्षिण पश्चिम मॉनसून से बारिश तेलंगाना में सामान्य से 1 प्रतिशत ज्यादा हुई है, जबकि महाराष्ट्र में 5 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
इन दोनों राज्यों में पिछले कुछ दिनों ने मॉनसून ने जोरदार वापसी की है, जिससे स्थिति सुधरेगी। पिछले सप्ताह तक तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र उन राज्यों में थे जहां ज्यादातर जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा स्टील का वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही के दौरान नेट मुनाफा 93 फीसदी घटकर 524.85 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी ने एक्सचेंजों को फाइलिंग में यह जानकारी दी। टाटा स्टील ने पिछले साल की समान तिमाही में 12.8 फीसदी की नेट प्रॉफिट में गिरावट देखी थी, जिसके बाद कंपनी ने 7,765 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
वहीं कंपनी ने पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही में नेट प्रॉफिट में 82.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की और इसका मुनाफा 1,704.86 करोड़ रुपये रहा। हालांकि पिछली तिमाही में मुनाफे में कमी की वजह कंपनी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में स्टील का प्रसार था।
वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही में कंपनी का राजस्व 6.3 फीसदी कम होकर 59,490 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 18.6 फीसदी बढ़कर 63,430 करोड़ रुपये रहा था।
कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 9.17 फीसदी की गिरावट के साथ 62,961.54 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के छह साल पूरा होने पर अच्छी खबर है। जीएसटी राजस्व संग्रह जून महीने में 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है।
इससे पिछले महीने मई की तुलना में इसमें इजाफा हुआ है, जो 1.57 लाख करोड़ रुपये रहा था। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक मई महीने में जीएसटी राजस्व संग्रह 1,61,497 करोड़ रुपये रहा है। इससे पिछले महीने मई में जीएसटी संग्रह 1.57 लाख करोड़ रुपये रहा था।
छह साल पहले एक जुलाई, 2017 को जीएसटी कर व्यवस्था लागू होने के बाद से सकल कर संग्रह चौथी दफा 1.60 लाख करोड़ रुपये के पार रहा। मंत्रालय के मुताबिक जून महीने में कुल जीएसटी राजस्व संग्रह 161497 करोड़ रुपये रहा है। इसमें केंद्रीय जीएसटी 31,013 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी 38,292 करोड़ रुपये रहा और एकीकृत जीएसटी 80292 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें (माल के आयात पर एकत्र 39,035 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 11,900 करोड़ रुपये (माल के आयात पर एकत्र 1,028 करोड़ रुपये सहित) शामिल है।
वित्त मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए औसत मासिक सकल जीएसटी राजस्व संग्रह क्रमश: 1.10 लाख करोड़ रुपये, 1.51 लाख करोड़ रुपये और 1.69 लाख करोड़ रुपये है। गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल महीने में जीएसटी राजस्व संग्रह 1.87 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार ने बुधवार (28 जून) को नया रिकॉर्ड बनाया। सेंसेक्स पहली बार 64,012 तक पहुंचा। साथ ही निफ्टी 19000 के पार पहुंचा। दोनों इंडेक्स पहली बार इन लेवल्स पर पहुंचे। निफ्टी ने इससे पहले 1 दिसंबर, 2022 को 18,887 का न्यू हाई बनाया था।
इससे पहले,सेंसेक्स 63,701.78 अंकों के लेवल पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 200 अंकों तक चढ़ा और 63,716.00 अंकों के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचा।
इससे पहले मंगलवार को सेंसेक्स 63,416.03 अंकों के लेवल पर बंद हुआ था। वहीं एनएसई निफ्टी 62.40 (0.33%) अंक उछलकर 18,879.80 अंकों के लेवल पर कारोबार कर रहा है। बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान निफ्टी के ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर कारोबार करते दिखे।
निफ्टी का 19000 तक का सफर
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक बाजार की तेजी के बीच स्थानीय स्तर पर टाटा टेक्नोलॉजीज के आईपीओ को सेबी की मंजूरी, चालू खाता घाटा (सीएडी) कम होना और एचडीएफसी एवं एचडीएफसी बैंक के विलय की तिथि नजदीक आने से उत्साहित निवेशकों की चौतरफा लिवाली की बदौलत आज दोनों मानक सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी नए शिखर पर पहुंच गए।
बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स के आज कारोबार के दौरान 64 हजार अंक के पार के सार्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली के दबाव में आने के बावजूद अंत में 499.39 अंक अर्थात 0.79 प्रतिशत की तेजी लेकर 63,915.42 अंक के नए रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ।
इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी पहली बार 19 हजार अंक को पार गया। अंत में 154.70 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की उड़ान भरकर नई ऊंचाई 18,972.10 अंक पर रहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में संपन्न अमेरिका की राजकीय यात्रा के बाद दुनिया की तीन दिग्गज आईटी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जतायी है। अमेजन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी के विकास के लिए पूंजी निवेश और तकनीकी सहयोग की घोषणा की है।
अमेजन ने अगले सात साल में भारत में अतिरिक्त 15 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जतायी है, जिससे भारत में कंपनी का कुल निवेश 26 अरब डॉलर हो जाएगा, वहीं गूगल ने कहा है कि वह गुजरात में अपना वैश्विक फिनटेक ऑपरेशन सेंटर खोलेगा।
माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्य नडेला ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी बैठक में भारतीयों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति पर चर्चा की। जो बाइडन और पीएम मोदी ने शुक्रवार को सिलिकॉन वैली में कुछ सबसे शक्तिशाली अधिकारियों के साथ मुलाकात की।
बैठक के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने एक बयान में कहा- भारत दुनिया के सबसे जीवंत डेवलपर और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी प्रणालियों में से एक है, और माइक्रोसॉफ्ट भारतीय प्रौद्योगिकी के विकास के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है - जो भारत और दुनिया भर के बाजारों दोनों को प्रभावित करेगा।
माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले महीने भारत में सरकारी सहायता के लिए मोबाइल उपकरणों पर एक नया जनरेटिव एआई संचालित चैटबॉट जुगलबंदी लॉन्च किया था। यह कई भाषाओं में प्रश्नों को समझ सकता है, चाहे बोले गये या टाइप किये गये। यह प्रासंगिक कार्यक्रमों पर जानकारी प्राप्त करता है - आमतौर पर अंग्रेजी में लिखा जाता है और इसे स्थानीय भाषा में वापस रिले करता है। जुगलबंदी एआई असिस्टेंट को सरकार समर्थित पहल एआई4भारत के भाषा मॉडल और माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर ओपनएआई सर्विस के रीजनिंग मॉडल द्वारा संचालित किया जाता है।
गूगल के सीईओ सुंदर पुचाई ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ साझा किया कि गूगल भारत के डिजिटलीकरण कोष में 10 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। पिचाई ने कहा- हम गुजरात के गिफ्ट सिटी में अपना वैश्विक फिनटेक ऑपरेशन सेंटर खोलने की घोषणा कर रहे हैं।
पीएम के साथ आईटी कंपनियों के दिग्गजों की बैठक के दौरान एपल के टिम कुक, फ्लेक्स की सीईओ रेवती अद्वैती, ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन, एफएमसी कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क डगलस, माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख सत्य नडेला और गूगल के सुंदर पिचाई मौजूद थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में एक्सएलआरआई जमशेदपुर पीजीडीएम (जीएम) की ओर से एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता सह रिसोर्स पर्सन के रूप में हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेज (एचसीसीबी) के चीफ पीपुल ऑफिसर गौरव शर्मा उपस्थित थे।
उन्होंने आज एक्सएलआरआइ के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आज के दौर में कोका कोला समेत अन्य पेय पदार्थ कंपनियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक प्रबंधक के लिए यह काफी अहम है कि वे अपने उत्पाद को लेकर कंज्यूमर बिहेवियर पर रिसर्च करें।
कंज्यूमर उनके उत्पाद को किस प्रकार ले रहे हैं, उसमें वे क्या बदलाव चाहते हैं, इस पर समय- समय पर प्लानिंग व उसे धरातल पर उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतर उत्पाद रहने के बावजूद वह बाजार में परफॉर्म नहीं कर पाता है, इसके लिए अच्छी सेल्स टीम के साथ ही सप्लाई चेन मैनेजमेंट भी उम्दा रखने की जरूरत है।
शर्मा ने बताया कि सभी प्रकार के पेय पदार्थों की कंपनियों के लिए यह आवश्यक होता है कि वह विविधता, समानता और समावेशन को अपनायें। इस दौरान हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेज (एचसीसीबी) द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत किये जाने वाले कार्यों की जानकारी भी दी गयी।
साथ ही बताया गया कि किस प्रकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है। इस दिशा में अन्य कंपनियों से भी कार्य करने का आह्वान किया गया। उन्होंने समाज के सभी स्टेक होल्डर्स के लिए कार्य करने की बात कही।
एक्सलर्स को संबोधित करते हुए हमेशा सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए कार्य करने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन एक्सएलआरआई के कृष्णा कश्यप और ऑइंद्रीला मुखर्जी ने किया।
एबीएन बिजनेस डेस्क। टायर बनाने वाली कंपनी एनएफ ने रिकॉर्ड बनाया है। हाल में कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपये के आंकड़े पार पहुंचकर इतिहास रच दिया। एमआरएफ को भले ही टायर बनाने की कंपनी के तौर पार जाना जाता है, लेकिन कभी यह कंपनी बच्चों के लिए गुब्बारा बनाने के लिए फेमस थी।
1946 में शुरू हुई कंपनी एमआरएफ का पूरा नाम है मद्रास रबर फैक्ट्री। मैमन मपिल्लई ने इसकी नींव आजादी से पहले रखी। वहीं मपिल्लई जो सड़कों गुब्बारे बेचा करते थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि गुब्बारे से शुरू हुए सफर के जरिये वो बुलंदिया छू लेंगे। ईसाई परिवार में जन्में मापिल्लई के पिता सफल कारोबारी थे, लेकिन जिन हालातों में कंपनी की शुरुआत हुई वो काफी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
जब त्रावणकोर के राजा आजादी की लड़ाई में शामिल हुए तो उन्होंने मपिल्लई के पिता की प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया। नतीजा, पिता का कारोबार ठप हो गया। हालांकि हालातों से लड़ते हुए एक गुब्बारा बनाने वाली कंपनी शुरू की गयी।
कंपनी के शुरुआती दौर में मपिल्लई ने खुद एक-एक दुकान पर जाकर गुब्बारा बेचना शुरू किया। आजादी के बाद हालात बदले और कारोबार को नई तरह विस्तार करने की योजना बनायी। 1954 में रबर उत्पादन की ट्रेनिंग लेने के बाद इससे जुड़ा कारोबार शुरू किया।
1962 में रबर के टायर बनाने शुरू किये। देश में एमआरएफ के टायरों को पॉपुलैरिटी मिलनी शुरू हुई। साल 1964 कंपनी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी साल कंपनी ने टायर अमेरिका एक्सपोर्ट करने शुरू किये।
समय के साथ कंपनी ने विस्तार किया। 1989 में एमआरएफ ने स्पोर्ट्स में एंट्री की। 1989 में खिलौने बनाने वाली दिग्गज कंपनी हैसब्रो इंटरनेशनल यूएसए के साथ हाथ मिलाया। 1993 में बिजनेस के क्षेत्र में योगदान के लिए मपिल्लई को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मपिल्लाई यह सम्मान पाने वाले पहले दक्षिण कारोबारी रहे हैं।
कंपनी ने 1973 में पहला रेडियल टायर बनाया। इसके बाद कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एमआरएफ की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, पहली बार 2007 में एमआरएफ ने एक अरब अमेरिकी डॉलर का कारोबार करके रिकॉर्ड बनाया। अगले 4 सालों में कारोबार बढ़कर 4 गुना तक पहुंच गया।
कंपनी वर्तमान में वाहनों, हवाईजहाज के साथ लड़ाकू विमान सुखोई के लिए भी टायर बना रही है। दुनिया के 65 देशों में एमआरएफ के उत्पादों की पहुंच है। एमआरएफ की कंपनी ने समय-समय पर अपने निवेशकों को मालामाल किया है।
एनएसई की वेबसाइट के मुताबिक, 1991 कंपनी के एक शेयर की कीमत मात्र 11 रुपये थी। यह पहला मौका नहीं है जब कंपनी के शेयर 1 लाख के पार पहुंचे। फरवरी 2021 में भी कंपनी के शेयर्स ने 1 लाख रुपए की कीमत का आंकड़ा पार किया। इसके बाद कंपनी कई बार अपने रेवेन्यू के कारण चर्चा में रही।
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