एबीएन बिजनेस डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी गेल (इंडिया) लि. और तेल उत्पादक ओएनजीसी पेट्रो रसायन क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने के लिए ईथेन और अन्य हाइड्रोकार्बन के आयात को लेकर गुजरात के हजीरा में शेल के आयात टर्मिनल का उपयोग करने की संभावना तलाशेंगी। गेल ने पिछले साल मई में ईथेन मंगाने सहित ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में अवसरों का पता लगाने के लिए शेल एनर्जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे।
आधिकारिक बयान के अनुसार गेल, ऑयल एंड नैचुरल गैस-कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) और शेल एनर्जी इंडिया (एसईआई) प्राइवेट लिमिटेड ने ईथेन और अन्य हाइड्रोकार्बन के आयात तथा हजीरा में शेल एनर्जी टर्मिनल के उपयोग के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास के अवसरों का पता लगाने को लेकर बृहस्पतिवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।
गेल और ओएनजीसी दोनों नियोजित पेट्रोरसायन संयंत्रों के लिए अमेरिका जैसे देशों से ईथेन के आयात की संभावना तलाश रही हैं। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में प्लास्टिक से लेकर पेंट और चिपकने वाले सामानों की जरूरतों को पूरा करना है। गेल एक ईथेन क्रैकर बनाने पर विचार कर रही है जो प्लास्टिक जैसे उत्पादों के लिए आवश्यक एथिलीन का उत्पादन करेगा।
गेल ने बयान में कहा कि उसने पहले ऊर्जा सहयोग के विभिन्न पहलुओं में अवसरों की तलाश के लिए शेल एनर्जी इंडिया के साथ द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। इसमें हजीरा में मौजूदा एसईआई टर्मिनल में ईथेन आयात बुनियादी ढांचे के विकास पर एक प्रतिष्ठित परामर्श कंपनी ने व्यवहार्यता अध्ययन किया था। हाइड्रोकार्बन के आयात और प्रबंधन के लिए ओएनजीसी का गेल के साथ द्विपक्षीय समझौता है।
बयान में कहा गया है कि भारत में ईथेन की आवश्यकता उभरने और ईथेन बुनियादी ढांचे के प्रस्तावित विकास को देखते हुए ओएनजीसी, गेल और एसईआई ने गठजोड़ किया है। इस मौके पर गेल के निदेशक (कारोबार विकास) राजीव कुमार सिंघल ने कहा कि ईथेन भारत में एक पसंदीदा पेट्रोरसायन कच्चा माल बनकर उभरा है और इसकी आयात सुविधाओं के विकास में काफी तेजी आयी है।
ओएनजीसी समूह के महाप्रबंधक और पेट्रोरसायन मामलों के प्रमुख अशोक कुमार ने कहा कि ईथेन भारतीय पेट्रोरसायन उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में भविष्य का ईंधन है। भारत अच्छी पेट्रोरसायन क्षमताएं जोड़ रहा है और व्यावहारिक तथा किफायती ईथेन उपलब्ध कराना आगे की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। नये महीने की आज से शुरुआत हो गयी है और महीने के पहले दिन यानी 1 मार्च को एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम एक बार फिर से बढ़ गये हैं।
क्योंकि आज से LPG सिलेंडर और जेट फ्यूल की कीमतों में इजाफा कर दिया है। नई दरें आज से ही लागू होंगी। OMCs ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। दिल्ली में ये 25 रुपये, तो वहीं मुंबई में 26 रुपये महंगा हो गया है। आइये जानते हैं नये रेट के बारे में।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लगातार दूसरे महीने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव कर के महंगाई के तगड़ा झटका दिया है।
पिछले महीने यानी 1 फरवरी 2024 को बजट वाले दिन सिलेंडर में 14 रुपये का इजाफा होने के बाद अब सिलेंडर के दाम में 25 रुपये की और बढ़ोतरी हुई है। IOCL की वेबसाइट पर बदले हुए रेट जारी कर दिये गये हैं, जो कि 1 मार्च 2024 यानी आज से लागू हैं।
नये रेट के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर 1795 रुपये में मिलेगा, जबकि कोलकाता में यह सिलेंडर अब 1911 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट बढ़कर 1749 रुपये, जबकि चेन्नई में 1960.50 रुपये हो गया है।
घरेलू सिलेंडर के दाम में बदलाव नहींकॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में जहां बढ़ोतरी दी गयी है, तो वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 903 रुपये, कोलकाता में 929 रुपये, मुंबई में 902.50 रुपये और चेन्नई में 918.50 रुपये का मिल रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर के दाम लंबे समय से स्थिर बने हुए हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्रीय बैंक (आरबीआइ) ने शुक्रवार यानी 1 मार्च को बताया कि 2,000 रुपये मूल्य के लगभग 97.62 फीसदी नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट चुके हैं। अब सिर्फ 8,470 करोड़ रुपये के नोट ही लोगों के पास मौजूद हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई, 2023 को 2,000 रुपये के बैंक नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी। आरबीआइ ने इन नोटों को बैंकों में जमा कराने या दूसरे मूल्य के नोटों से बदलने को कहा था।
आरबीआइ के बयान के मुताबिक 19 मई, 2023 को कारोबार की समाप्ति पर 2,000 रुपये मूल्य के कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में मौजूद थे। इस मूल्य वर्ग के चलन में मौजूद नोटों का मूल्य 29 फरवरी, 2024 को कारोबार समाप्ति पर घटकर 8,470 करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह 2,000 रुपये मूल्य वर्ग के चलन में मौजूद कुल 97.62 प्रतिशत नोट वापस आ चुके हैं। इसके साथ ही फइक ने साफ किया कि 2,000 रुपये के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे।
यदि अभी भी आपके पास 2,000 रुपये के नोट शेष रह गये हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आरबीआइ ने अभी भी नोट बदलने की सुविधा जारी रखी है। आप आरबीआइ के 19 कार्यालयों में 2,000 रुपये के नोट को जमा या बदल सकते हैं।
यह सुविधा आरबीआइ के अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम कार्यालयों में है। इसके अलावा आप किसी भी डाकघर से आरबीआइ के किसी भी कार्यालय में इंडिया पोस्ट के जरिये इन नोटों को भेज सकते हैं।
आरबीआइ ने पहले 30 सितंबर, 2023 तक इन नोट को बैंकों में जाकर बदलने या जमा करने को कहा था। हालांकि बाद में डेडलाइन सात अक्टूबर, 2023 तक बढ़ा दी गयी थी। फइक ने नवंबर, 2016 में 500 और 1,000 रुपये मूल्य वर्ग के नोटों को चलन से बाहर किए जाने के बाद 2,000 रुपये मूल्य के नोट जारी किये थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आरबीआई के कार्यकारी निदेशक पी वासुदेवन का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा नहीं माना जा सकता है क्योंकि इनका कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं होता है। आईआईएम कोझिकोड के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस पर फैसला आखिरकार सरकार को लेना है कि क्रिप्टो मुद्राओं से किस तरह निपटा जाये।
वर्तमान में बिटकॉइन को भारत में कोई कानूनी समर्थन नहीं है। निवेशकों को इसमें कारोबार से अर्जित आय पर कर देना पड़ता है। आरबीआई ने बिटकॉइन जैसी नए जमाने की क्रिप्टो मुद्राओं को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया हुआ है।
उसका कहना है कि ये मुद्राएं वित्तीय प्रणालियों के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा करती हैं। पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई व प्रतिबंधों पर वासुदेवन ने कहा कि स्व-नियमन वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बेहतर सुरक्षा कर सकता है।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 5.24 अरब डॉलर घटकर 617.23 अरब डॉलर रह गया। 2 फरवरी वाले सप्ताह में यह भंडार बढ़कर 622.5 अरब डॉलर रहा था। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 9 फरवरी वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति 4.81 अरब डॉलर घट गयी। देश का स्वर्ण भंडार 35 करोड़ डॉलर घट गया।
भारत ने चीन और वियतनाम से कुछ सौर ग्लास के आयात पर डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) चीन और वियतनाम में बने टेक्सचर्ड टेम्पर्ड कोटेड और अनकोटेड ग्लास की कथित डंपिंग की जांच कर रहा है। घरेलू उद्योग की ओर से बोरोसिल रिन्यूएबल्स ने जांच और आयात पर उचित डंपिंग रोधी शुल्क लगाने के लिए आवेदन किया है।
घरेलू प्रौद्योगिकी उद्योग का राजस्व चालू वित्त वर्ष में 3.8 फीसदी बढ़कर 254 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हार्डवेयर को छोड़ इस उद्योग का राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.3 फीसदी बढ़कर 2023-24 में 199 अरब डॉलर पहुंच सकता है।
सॉफ्टवेयर उद्योग निकाय नैसकॉम ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक समीक्षा में कहा, अकेले इंजीनियरिंग शोध एवं विकास (ईआरएंडडी) क्षेत्र की चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात राजस्व वृद्धि में 48 फीसदी हिस्सेदारी रहने वाली है।
संगठन ने कहा, वैश्विक स्तर पर 2023 में तकनीकी खर्च में 50 फीसदी और तकनीकी अनुबंधों में छह फीसदी की गिरावट आने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को पेटीएम पेमेंट बैंक के लिए जमा और क्रेडिट लेनदेन की समयसीमा 15 मार्च तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के ग्राहकों की दुविधा दूर करने के लिए एफएक्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके जवाब) जारी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने इस एफएक्यू के माध्यम से पेटीएम पेमेंट्स बैंक से निकासी, रिफंड, सैलरी क्रेडिट, डीबीटी और बिजली बिल जमा करने से जुड़ी जानकारी दी है।
आरबीआई की ओर से यह निर्णय बैंक द्वारा ग्राहकों और नियामक प्राधिकरणों के बारे चिंता जताने के बाद लिया गया है। आरबीआई ने कहा है, 15 मार्च, 2024 (29 फरवरी, 2024 की पूर्व निर्धारित समय-सीमा से विस्तारित) के बाद किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स, वॉलेट, फास्टैग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि में कोई और जमा या क्रेडिट लेनदेन या टॉप अप की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, किसी भी ब्याज, कैशबैक, पार्टनर बैंकों से स्वीप इन या रिफंड आदि को कभी भी जमा किया जा सकता है।
केंद्रीय बैंक ने 31 जनवरी को निर्देश दिया था कि वह 29 फरवरी, 2024 के बाद किसी भी ग्राहक खाते, वॉलेट, फास्टैग और अन्य उपकरणों में जमा या टॉप-अप स्वीकार करना बंद कर दे। आरबीआई ने कहा था कि एक व्यापक सिस्टम आडिट रिपोर्ट और बाहरी आॅडिटरों की सत्यापन रिपोर्ट में पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड की ओर से दिशा-निर्देशों को नहीं मानने के संकेत मिले हैं। उसके बाद केंद्रीय बैंक की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
पेटीएम ब्रांड मालिकाना हक रखने वाली फिनटेक कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने अपना नोडल खाता पेटीएम पेमेंट्स बैंक से एक्सिस बैंक में स्थानांतरित कर दिया है। इस कदम से पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स, कार्ड मशीन से जुड़ी सेवाएं भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से निर्धारित 15 मार्च की तारीख के बाद भी जारी रह सकेंगी।
रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) के ग्राहकों और व्यापारियों को सलाह दी है कि वे अपने खातों को 15 मार्च तक अन्य बैंकों में स्थानांतरित कर दें। कंपनी ने एक नियामकीय फाइलिंग में कहा कि उसने अपना नोडल खाता एक्सिस बैंक (एस्क्रो खाता खोलकर) में स्थानांतरित कर दिया है ताकि निर्बाध मर्चेंट सेटलमेंट जारी रखा जा सके।
एबीएन बिजनेस डेस्क। बैंक के स्टॉक में 39 करोड़ शेयरों की बड़ी डील हुई है, जिसकी टोटल वैल्यू 1129 करोड़ रुपये बतायी जा रही है। प्राइवेट सेक्टर के बैंक यस बैंक के शेयर में आज यानी गुरुवार (15 फरवरी) को तेजी देखने को मिल रही है। शुरुआती कारोबार में बैंक के स्टॉक में सगभग 4 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।
बैंक का शेयर 29 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर खुला। खबर लिखते समय, इसका शेयर 2.61 फीसदी की तेजी के साथ 29.45 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार करता दिखा। बता दें कि, यह 29.50 रुपये प्रति शेयर के ऊपरी स्तर बनाने में कामयाब रहा। हालांकि, यह 52-हफ्ते का ऊपरी स्तर 32.85 रुपये प्रति शेयर है।
यस बैंक के स्टॉक में आज की तेजी का कारण है स्टॉक में बड़ी ब्लॉक डील का होना। बता दें कि बैंक के स्टॉक में 39 करोड़ शेयरों की बड़ी डील हुई है, जिसकी टोटल वैल्यू 1129 करोड़ रुपये बतायी जा रही है। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लार्ज ट्रेड के जरिए 1.36% इक्विटी का सौदा हुआ। साथ ही इस डील के जरिए करीब 40 करोड़ शेयरों की बिक्री की है।
एसबीआइ पर उपलब्ध शेयरधारकों के आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई की यस बैंक में 26.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि एचडीएफसी बैंक की निजी ऋणदाता में 3 फीसदी हिस्सेदारी है।
यस बैंक का नेट प्रॉफिट दिसंबर तिमाही में 231 करोड़ रुपये पर येस बैंक का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर, 2023) में 231 करोड़ रुपये रहा है। मुंबई के निजी क्षेत्र के बैंक का बीते वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध लाभ 52 करोड़ रुपये रहा था। बैंक का शुद्ध लाभ जुलाई-सितंबर, 2023 तिमाही में 225 करोड़ रुपये रहा था।
टीम एबीएन, रांची। भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनियों में से एक, उड़ानकैपिटल ने आज दुनिया में शीशे के प्रमुख निर्माताओं में एक सेंट गोबेन की सब्सिडियरी, सेंट गोबेन ग्लास बिजनेस के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को 170 करोड़ रुपये से अधिक की कार्यशील पूंजी को मुहैया कराने की घोषणा की है।
साझेदारी के जरिये इस फाइनेंसिंग प्रोग्राम को सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) के लिए लाया गया है। इस सहयोग के तहत, उड़ान कैपिटल ने 20 महीने से ज्यादा समय में देश के 23 राज्यों के 122 शहरों में फैले 200 से ज्यादा वितरकों को अपने साथ जोड़ा है।
उड़ानकैपिटल के हेड चैतन्य अदापा ने कहा- हम भारत के व्यापार के लिए अगली पीढ़ी की कार्यशील पूंजी उत्पादों का निर्माण करने के हमारे लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत साझेदारी करने में विश्वास रखते हैं।
यह एक फिनटेक कंपनी है, जो छोटे कारोबार की क्रियाशील पूंजी की जरूरत को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करती है। भारत में लाखों छोटे रिटेलर और वितरक हैं, जो अपने आस-पड़ोस के उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश की तीन पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में 69,000 करोड़ रुपए का बंपर मुनाफा हुआ है जोकि ऑयल क्राइसिस से पहले के सालों के प्रॉफिट से काफी ज्यादा है। तेल संकट से पहले के वर्षों की उनकी वार्षिक कमाई से कहीं अधिक है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशल लि. (एचपीसीएल) का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2023-24 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में ज्वाइंटली ऑयल क्राइसिस से पहले के सालों में रही 39,356 करोड़ रुपए की वार्षिक कमाई से बेहतर है।
इस बंपर मुनाफे के बाद सबसे बड़ा सवाल से खड़ा हो गया है कि आखिर देश में ऑयल पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम कब कम करेगी। खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों ने दैनिक मूल्य संशोधन व्यवस्था पर लौटने और उपभोक्ताओं को दरों में आई कमी का लाभ देने की मांग का विरोध किया है।
उनका तर्क है कि कीमतें बेहद अस्थिर बनी हुई हैं और उनके पिछले नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं हुई है। भारत के लगभग 90 फीसदी फ्यूल मार्केट को कंट्रोल करने वाली तीनों कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में स्वेच्छा से लगभग दो साल से कोई बदलाव नहीं किया है। इसकी वजह से कच्चे तेल की लागत अधिक होने पर नुकसान होता है और कच्चे माल के दाम कम होने से मुनाफा होता है।
इन तेल कंपनियों को अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान रूस-यूक्रेन वॉर की वजह से संयुक्त रूप से 21,201.18 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ था। इसका एक कारण बही-खाते में 22,000 करोड़ रुपए का प्रावधान था लेकिन पिछले दो साल के लिए एलपीजी सब्सिडी प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी और सरकार के एलपीजी सब्सिडी देने से आईओसी और बीपीसीएल को 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) के दौरान सालाना लाभ प्राप्त करने में मदद मिली लेकिन एचपीसीएल घाटे में रही।
चालू वित्त वर्ष में हालात बदले हैं। तीनों कंपनियों ने पहली दो तिमाहियों (अप्रैल-जून और जुलाई-सितंबर) में रिकॉर्ड कमाई की। इसका कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें एक साल पहले की तुलना में लगभग आधी होकर 72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल होना रहा। बाद की तिमाही में अंतरराष्ट्रीय कीमतें फिर से बढ़कर 90 अमेरिकी डॉलर हो गईं। इससे उनकी कमाई में कमी आई लेकिन कुल मिलाकर साल के दौरान उन्हें अच्छा लाभ हुआ।
आईओसी ने चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2023) में एकल आधार पर 34,781.15 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया। कंपनी ने इसकी तुलना में 2022-23 में 8,241.82 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। आईओसी यह तर्क दे सकती है कि वित्त वर्ष 2022-23 तेल संकट से प्रभावित था। 9 महीने की कमाई संकट-पूर्व वर्षों की तुलना में भी अधिक है। कंपनी को 2021-22 में 24,184 करोड़ रुपए और 2020-21 में 21,836 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था।
बीपीसीएल ने चालू वित्त वर्ष में नौ महीने महीने की अवधि में 22,449.32 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में उसे 4,607.64 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। यह लाभ 2022-23 में 1,870.10 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2021-22 में 8,788.73 करोड़ रुपए की कमाई से अधिक है। एचपीसीएल का 9 महीने का मुनाफा 11,851.08 करोड़ रुपए रहा जबकि उसे वित्त वर्ष 2022-23 में 8,974.03 करोड़ रुपए का घाटा और 2021-22 में 6,382.63 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था।
फ्यूल की कीमतों पर रोक 6 अप्रैल, 2022 से लगी हुई है। उस वजह से 24 जून, 2022 को समाप्त सप्ताह में पेट्रोल पर 17.4 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 27.7 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हुआ था। हालांकि, बाद में कच्चे तेल की कीमतें घटने से यह घाटा समाप्त हो गया। पिछले महीने तीनों कंपनियों का पेट्रोल पर 11 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर पर छह रुपए प्रति लीटर का मार्जिन मिला था।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत आम लोगों को राहत मिलेगी। बंपर मुनाफे के बाद सब जगह यही सवाल उठा रहा है। जानकारों की मानें तो चुनावों से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आना शुरू हो जाएगा। मुमकिन है कि वित्त वर्ष खत्म होने के बाद यानी अप्रैल के महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कटौती शुरू हो जाए। जानकारों की मानें तो मौजूदा वित्त वर्ष के खत्म होने के बाद तीनों कंपनियों का प्रॉफिट एक लाख करोड़ रुपए के पार जा सकता है, जिसके बाद पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती पर विचार कर सकती हैं।
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