एबीएन बिजनेस डेस्क। मारुति सुजुकी इंडिया ने समग्र मुद्रास्फीति तथा बढ़ी हुई जिंस दरों के कारण लागत दबाव का हवाला देते हुए सोमवार को कहा कि वह जनवरी 2024 में अपने वाहनों की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही है।
कंपनी कम कीमत की छोटी कार ऑल्टो लेकर मल्टी-यूटिलिटी वाहन इनविक्टो तक वाहनों की एक श्रृंखला बेचती है। इनकी कीमत 3.54 लाख रुपए से 28.42 लाख रुपये (एक्स-शोरूम दिल्ली) के बीच है। हालांकि, कंपनी ने अब दाम कितने बढ़ाये जायेंगे इसकी कोई जानकारी नहीं दी।
मारुति सुजुकी इंडिया ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा, कंपनी ने समग्र मुद्रास्फीति और बढ़ी हुई जिंस कीमतों के चलते लागत दबाव में वृद्धि के कारण जनवरी 2024 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाने की योजना बनायी है।
जर्मनी की लक्जरी कार निर्माता कंपनी ऑडी ने भी कच्चे माल की मांग और परिचालन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए अगले साल जनवरी से भारत में अपने वाहनों की कीमतें दो प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय कार बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है और इस उभरते बाजार में अपना ब्रांड स्थापित करने के लिए बहुत सारी कार कंपनियां बड़े पैमाने पर काम कर रही है। इसी कड़ी में दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला आइएनसी कल्लू भी शामिल है, जो भारत में अपने वाहन बेचने के लिए केंद्र सरकार के साथ जल्द एक समझौते पर पहुंच सकती है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार अमेरिकी कार कंपनी को अगले साल से भारत में अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियां को इम्पोर्ट करने की अनुमति दे सकती है और इसके लिए इंपोर्ट ड्यूटी में कमी पर सहमति बन गयी है।
साथ ही दो साल के भीतर टेस्ला भारत में अपनी फैक्टरी स्थापित करेगी। एक व्यक्ति ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि इस संदर्भ में अगले साल जनवरी में होने वाले वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में घोषणा हो सकती है।
वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात समेत महाराष्ट्र और तमिलनाडु में टेस्ला अपनी फैक्टरी लगा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन राज्यों में पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों और निर्यात के लिए अच्छी तरह से मौजूद इको-सिस्टम हैं।
टेस्ला इंडिया में अपनी फैक्टरी लगाने के लिए शुरू में कम से कम 2 बिलियन डॉलर का निवेश कर सकती है। साथ ही भारत से आटो पार्ट्स की अपनी खरीद को 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा सकती है। टेस्ला लागत कम करने के लिए भारत में बैटरियां की मेन्युफेक्चरिंग भी कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस बारे में फिलहाल कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और योजनाएं बदल भी सकती है। इससे पहले कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने जून में कहा था कि टेस्ला की भारत में महत्वपूर्ण निवेश करने की योजना है और वह 2024 में यहां आने का इरादा रखते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पतंजलि फूड्स लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष (2023-24) की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही का शुद्ध लाभ दोगुना होकर 254.53 करोड़ रुपये रहा है। पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 112.28 करोड़ रुपये रहा था।
जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय घटकर 7,845.79 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 8,524.67 करोड़ रुपये थी। समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का कुल खर्च भी 8,371.03 करोड़ रुपये से घटकर 7,510.71 करोड़ रुपये रह गए।
कंपनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को महाकोश तथा सनरिच का ब्रांड एम्बैसडर बनाने की घोषणा भी की। बयान के अनुसार, धोनी का साथ कंपनी के खाद्य तेल खंड को मजबूत करेगा।
वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में खाद्य एवं एफएमसीजी खंड ने 2,487.62 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया। पतंजलि फूड्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संजीव अस्थाना ने कहा कि चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद वित्त वर्ष की पहली छमाही सकारात्मक रुख पर समाप्त हुई।
एबीएन बिजनेस डेस्क। चाय उत्पादकों के निकाय भारतीय चाय संघ ने कहा है कि उत्तरी बंगाल का चाय उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहा है और क्षेत्र में कई बागान बंद हो गये हैं। टीएआई के महासचिव पी के भट्टाचार्य ने कहा कि अक्टूबर, 2023 में उत्तरी बंगाल में 13-14 चाय बागान बंद हो गये जिससे 11,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए।
जानकारों का कहना है कि चाय बागान बंद होने से चाय का उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे आने वाले दिनों में चायपत्ती के दाम बढ़ेंगे। ठंड में वैसे भी चायपत्ती की अधिक खपत होती है, जिससे कीमत में तेजी आ जाती है।
टी एसोसिएशन आफ इंडिया ने कहा कि इस साल अप्रैल में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा घोषित अंतरिम मजदूरी में बढ़ोतरी के कारण संगठित और छोटे चाय कारखानों (बीएलएफ) सहित लगभग 300 बागानों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में सालाना लगभग 40 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। भट्टाचार्य के अनुसार, उत्तर बंगाल में लगभग 300 चाय बागान हैं, जिनमें से 15 बंद हैं।
टी एसोसिएशन आफ इंडिया ने कहा कि उद्योग को उर्वरक, कोयला और रसायनों से लेकर उत्पादन लागत में अचानक वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है, जबकि नीलामी में कीमत बहुत कम मिल रही है। संघ ने यह भी कहा कि वित्तीय संकट को कम करने में मदद करने के लिए उद्योग ने पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार के साथ बातचीत की है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। बिहार झारखंड में इन दिनों प्याज की बढ़ती कीमतों ने लोगों के घर का जायका बिगाड़ दिया है। बीते एक सप्ताह में बिहार झारखंड में प्याज का भाव दोगुना हो गया है।
बात करें बिहार की तो एक सप्ताह पहले जहां प्याज 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा था। वहीं अब 1 किलो प्याज की कीमत 60 से 65 रुपये के थोक मार्केट में बिक रहा है। तो वहीं खुदरा बाजार में 70 से 75 रुपये किलो बिक रहा है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पेट्रोलियम कंपनियों ने नवंबर महीने के पहले दिन ही जोर का झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में करीब 100 रुपये से ज्यादा की वृद्धि की गयी है।
बता दें, हर महीने की पहली तारीख को पेट्रोलियम कंपनियां गैस सिलेंडरों के दाम तय करती हैं। इसी सिलसिले में पहली नवंबर को आज करवाचौथ और दीपावली त्योहार से पहले कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ाये गये हैं।
वहीं, घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोलियम कंपनियों के कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाने के बाद राजधानी दिल्ली में नये रेट आज से लागू हो गये हैं।
आइओसीएल की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडेर के नये दाम 1,833 रुपये हो गये हैं। जो पहले 1731 में मिल रहा था। वहीं, मायानगरी मुंबई में नये दाम बढ़कर 1785.50 रुपये हो गये हैं, जो पहले 1684 रुपये में उपलब्ध था।
बात कोलकाता की करें तो यहां कमर्शियल सिलेंडर के नये दाम 1943 रुपये हैं, जो पहले 1839.50 रुपये में आता था। चेन्नई में भी दाम बढ़कर 1999. 50 रुपये हो गये हैं, जो पहले 1898 रुपये थे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वुड ने बिजनेस स्टैण्डर्ड के सम्मेलन में कहा, भारत उभरते बाजारों के बीच सबसे अच्छी घरेलू इक्विटी मार्केट है। अगर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2024 में सत्ता में नहीं लौटती है तो अगले साल भारतीय शेयर बाजारों में 25 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है।
यह बात निवेश बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस वुड ने बिजनेस स्टैंडर्ड के बीएफएसआई शिखर सम्मेलन 2023 में कही है। उन्होंने कहा- अगर 2004 में आश्चर्यजनक चुनाव के साथ जो हुआ, वो फिर से होता है तो बाजार में कम से कम 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। लेकिन गति के कारण बाजार तेजी से वापस आ जायेगी।
वुड ने कहा, मोदी सरकार ने कई बुनियादी सुधार किये हैं जिन्हें बदलना या वापस करना मुश्किल है। इसलिए, मैं आगामी आम चुनाव से पहले भारत पर कोई दबाव नहीं डालूंगा। उन्होंने कहा कि अगर यह सरकार वापस नहीं आयी तो बड़ी गिरावट होने का जोखिम है। हालांकि संभावना कम है, जोखिम अभी भी बना हुआ है। वुड ने बिजनेस स्टैण्डर्ड के सम्मेलन में कहा, भारत उभरते बाजारों के बीच सबसे अच्छी घरेलू इक्विटी मार्केट है।
उन्होंने कहा, उभरते बाजारों और खास कर एशियाई बाजारों में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। चीन की समस्याओं के कारण इस विश्वास को बल मिला है। फिर भी, हालांकि यह दुनिया का सर्वसम्मति वाला दृष्टिकोण नहीं है क्योंकि वैश्विक निवेशकों ने भारत में मुश्किल से ही निवेश किया है।
वुड ने कहा कि चीन की स्थिति इस साल जापान की तरह लग रही है और आर्थिक ग्रोथ धीमी हो रही है। लेकिन मुख्य सवाल हालांकि, यह है कि क्या स्थिति में बदलाव आयेगा या फिर चीन की इकॉनमी बाउंस बैक या वापसी करेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आने वाले ढाई साल में टाटा ग्रुप्स भारत में शीघ्र ही आइफोन का निर्माण शुरू कर देगा। ये डिवाइस भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के आईफोन प्रशंसकों तक पहुंचाया जायेगा।
टाटा ग्रुप्स ने भारत में आइफोन बनाने वाली विस्ट्रॉन फैक्ट्री का अधिग्रहण कर लिया है। आइटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कंफर्म किया है कि टाटा ग्रुप जल्द भारत में आईफोन को बनाना शुरू कर देगा जिन्हें भारत के साथ-साथ दुनियाभर में एक्सपोर्ट किया जायेगा।
राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में लिखा कि मंत्रालय वैश्विक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के विकास में पूरी तरह से समर्थन में खड़ा है, जो भारत को अपना विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग और टैलेंट पार्टनर बनाना चाहते हैं और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति बनाने के पीएम के लक्ष्य को साकार करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि टाटा ग्रुप्स ने भारत में आइफोन बनाने वाली विस्ट्रॉन फैक्ट्री पर अधिग्रहण कर लिया है। यह कंपनी भारत के कर्नाटक राज्य के साउथईस्ट में स्थित है। विस्ट्रॉन ने 2008 में भारत में अपनी शुरुआत की थी। उस समय यह कई कंपनियों के डिवाइस के लिए रिपेयरिंग का काम करती थी।
बाद में लगभग 9 साल बाद कंपनी ने अपना बिजनेस बढ़ाते हुए आईफोन मैन्युफेक्चरिंग का काम शुरू किया। टाटा और विस्ट्रॉन की डील लगभग एक साल से चल रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है। 2024 में इस फैक्ट्री से 1.8 बिलियन आईफोन को मैन्युफेक्चर किया जायेगा।
साथ ही कंपनी मेनफोर्स भी बढ़ाने का विचार कर रही है, फिलहाल इस फैक्ट्री में 10000 लोग काम करते हैं। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि विस्ट्रॉन को भारत में नुकसान का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि एपल उससे फॉक्सकॉन और पेगाट्रॉन के मुकाबले ज्यादा मार्जिन लेता है।
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