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Published / 2024-03-01 21:08:25
बैंकों ने वापस ले लिये 97.62% नोट

क्या अब भी बदला जा सकता है नोट? 

2000 के अब सिर्फ 8,470 करोड़ रुपये के नोट ही लोगों के पास मौजूद हैं 

एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्रीय बैंक (आरबीआइ) ने शुक्रवार यानी 1 मार्च को बताया कि 2,000 रुपये मूल्य के लगभग 97.62 फीसदी नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट चुके हैं। अब सिर्फ 8,470 करोड़ रुपये के नोट ही लोगों के पास मौजूद हैं। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई, 2023 को 2,000 रुपये के बैंक नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी। आरबीआइ ने इन नोटों को बैंकों में जमा कराने या दूसरे मूल्य के नोटों से बदलने को कहा था। 

वैध मुद्रा बने रहेंगे 2,000 के नोट 

आरबीआइ के बयान के मुताबिक 19 मई, 2023 को कारोबार की समाप्ति पर 2,000 रुपये मूल्य के कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में मौजूद थे। इस मूल्य वर्ग के चलन में मौजूद नोटों का मूल्य 29 फरवरी, 2024 को कारोबार समाप्ति पर घटकर 8,470 करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह 2,000 रुपये मूल्य वर्ग के चलन में मौजूद कुल 97.62 प्रतिशत नोट वापस आ चुके हैं। इसके साथ ही फइक ने साफ किया कि 2,000 रुपये के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे। 

आरबीआइ के आफिस में अब भी बदले जा सकते हैं नोट 

यदि अभी भी आपके पास 2,000 रुपये के नोट शेष रह गये हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आरबीआइ ने अभी भी नोट बदलने की सुविधा जारी रखी है। आप आरबीआइ के 19 कार्यालयों में 2,000 रुपये के नोट को जमा या बदल सकते हैं। 

यह सुविधा आरबीआइ के अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम कार्यालयों में है। इसके अलावा आप किसी भी डाकघर से आरबीआइ के किसी भी कार्यालय में इंडिया पोस्ट के जरिये इन नोटों को भेज सकते हैं। 

आरबीआइ ने पहले 30 सितंबर, 2023 तक इन नोट को बैंकों में जाकर बदलने या जमा करने को कहा था। हालांकि बाद में डेडलाइन सात अक्टूबर, 2023 तक बढ़ा दी गयी थी। फइक ने नवंबर, 2016 में 500 और 1,000 रुपये मूल्य वर्ग के नोटों को चलन से बाहर किए जाने के बाद 2,000 रुपये मूल्य के नोट जारी किये थे।

Published / 2024-02-17 20:46:27
विदेशी मुद्रा भंडार 5.24 अरब डॉलर घटा : आरबीआइ

आरबीआइ ने कहा- क्रिप्टोकरेंसी मुद्रा नहीं, बिटकॉइन जोखिम भरा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आरबीआई के कार्यकारी निदेशक पी वासुदेवन का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा नहीं माना जा सकता है क्योंकि इनका कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं होता है। आईआईएम कोझिकोड के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इस पर फैसला आखिरकार सरकार को लेना है कि क्रिप्टो मुद्राओं से किस तरह निपटा जाये।

वर्तमान में बिटकॉइन को भारत में कोई कानूनी समर्थन नहीं है। निवेशकों को इसमें कारोबार से अर्जित आय पर कर देना पड़ता है। आरबीआई ने बिटकॉइन जैसी नए जमाने की क्रिप्टो मुद्राओं को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया हुआ है। 

उसका कहना है कि ये मुद्राएं वित्तीय प्रणालियों के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा करती हैं। पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई व प्रतिबंधों पर वासुदेवन ने कहा कि स्व-नियमन वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बेहतर सुरक्षा कर सकता है। 

विदेशी मुद्रा भंडार 5.24 अरब डॉलर घटा 

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 5.24 अरब डॉलर घटकर 617.23 अरब डॉलर रह गया। 2 फरवरी वाले सप्ताह में यह भंडार बढ़कर 622.5 अरब डॉलर रहा था। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 9 फरवरी वाले सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति 4.81 अरब डॉलर घट गयी। देश का स्वर्ण भंडार 35 करोड़ डॉलर घट गया। 

चीन आयातित सोलर ग्लास पर डंपिंग जांच 

भारत ने चीन और वियतनाम से कुछ सौर ग्लास के आयात पर डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) चीन और वियतनाम में बने टेक्सचर्ड टेम्पर्ड कोटेड और अनकोटेड ग्लास की कथित डंपिंग की जांच कर रहा है। घरेलू उद्योग की ओर से बोरोसिल रिन्यूएबल्स ने जांच और आयात पर उचित डंपिंग रोधी शुल्क लगाने के लिए आवेदन किया है। 

254 अरब डॉलर पहुंच सकता है प्रौद्योगिकी उद्योग का राजस्व 

घरेलू प्रौद्योगिकी उद्योग का राजस्व चालू वित्त वर्ष में 3.8 फीसदी बढ़कर 254 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। हार्डवेयर को छोड़ इस उद्योग का राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.3 फीसदी बढ़कर 2023-24 में 199 अरब डॉलर पहुंच सकता है। 

सॉफ्टवेयर उद्योग निकाय नैसकॉम ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक समीक्षा में कहा, अकेले इंजीनियरिंग शोध एवं विकास (ईआरएंडडी) क्षेत्र की चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात राजस्व वृद्धि में 48 फीसदी हिस्सेदारी रहने वाली है। 

संगठन ने कहा, वैश्विक स्तर पर 2023 में तकनीकी खर्च में 50 फीसदी और तकनीकी अनुबंधों में छह फीसदी की गिरावट आने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

Published / 2024-02-16 21:17:39
अब 15 मार्च तक लेनदेन कर सकेगा पेटीएम

रिजर्व बैंक से पेटीएम पेमेंट्स बैंक को 15 दिन की मोहलत मिली

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को पेटीएम पेमेंट बैंक के लिए जमा और क्रेडिट लेनदेन की समयसीमा 15 मार्च तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के ग्राहकों की दुविधा दूर करने के लिए एफएक्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके जवाब) जारी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने इस एफएक्यू के माध्यम से पेटीएम पेमेंट्स बैंक से निकासी, रिफंड, सैलरी क्रेडिट, डीबीटी और बिजली बिल जमा करने से जुड़ी जानकारी दी है। 

आरबीआई की ओर से यह निर्णय बैंक  द्वारा ग्राहकों और नियामक प्राधिकरणों के बारे चिंता जताने के बाद लिया गया है। आरबीआई ने कहा है, 15 मार्च, 2024 (29 फरवरी, 2024 की पूर्व निर्धारित समय-सीमा से विस्तारित) के बाद किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स, वॉलेट, फास्टैग, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि में कोई और जमा या क्रेडिट लेनदेन या टॉप अप की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, किसी भी ब्याज, कैशबैक, पार्टनर बैंकों से स्वीप इन या रिफंड आदि को कभी भी जमा किया जा सकता है। 

केंद्रीय बैंक ने 31 जनवरी को निर्देश दिया था कि वह 29 फरवरी, 2024 के बाद किसी भी ग्राहक खाते, वॉलेट, फास्टैग और अन्य उपकरणों में जमा या टॉप-अप स्वीकार करना बंद कर दे। आरबीआई ने कहा था कि एक व्यापक सिस्टम आडिट रिपोर्ट और बाहरी आॅडिटरों की  सत्यापन रिपोर्ट में पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड की ओर से दिशा-निर्देशों को नहीं मानने के संकेत मिले हैं। उसके बाद केंद्रीय बैंक की ओर से मामले की जांच की जा रही है।

पेटीएम ने अपना खाता एक्सिस बैंक में शिफ्ट किया  

पेटीएम ब्रांड मालिकाना हक रखने वाली फिनटेक कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने अपना नोडल खाता पेटीएम पेमेंट्स बैंक से एक्सिस बैंक में स्थानांतरित कर दिया है। इस कदम से पेटीएम क्यूआर, साउंडबॉक्स, कार्ड मशीन से जुड़ी सेवाएं भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से निर्धारित 15 मार्च की तारीख के बाद भी जारी रह सकेंगी। 

रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) के ग्राहकों और व्यापारियों को सलाह दी है कि वे अपने खातों को 15 मार्च तक अन्य बैंकों में स्थानांतरित कर दें। कंपनी ने एक नियामकीय फाइलिंग में कहा कि उसने अपना नोडल खाता एक्सिस बैंक (एस्क्रो खाता खोलकर) में स्थानांतरित कर दिया है ताकि निर्बाध मर्चेंट सेटलमेंट जारी रखा जा सके।

Published / 2024-02-15 21:25:45
बाजार खुलते ही रॉकेट हुआ शेयर बाजार

39 करोड़ शेयर की बड़ी डील के बाद आया उछाल 

एबीएन बिजनेस डेस्क। बैंक के स्टॉक में 39 करोड़ शेयरों की बड़ी डील हुई है, जिसकी टोटल वैल्यू 1129 करोड़ रुपये बतायी जा रही है। प्राइवेट सेक्टर के बैंक यस बैंक के शेयर में आज यानी गुरुवार (15 फरवरी) को तेजी देखने को मिल रही है। शुरुआती कारोबार में बैंक के स्टॉक में सगभग 4 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। 

बैंक का शेयर 29 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर खुला। खबर लिखते समय, इसका शेयर 2.61 फीसदी की तेजी के साथ 29.45 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार करता दिखा। बता दें कि, यह 29.50 रुपये प्रति शेयर के ऊपरी स्तर बनाने में कामयाब रहा। हालांकि, यह 52-हफ्ते का ऊपरी स्तर 32.85 रुपये प्रति शेयर है। 

39 करोड़ शेयरों का हुआ सौदा 

यस बैंक के स्टॉक में आज की तेजी का कारण है स्टॉक में बड़ी ब्लॉक डील का होना। बता दें कि बैंक के स्टॉक में 39 करोड़ शेयरों की बड़ी डील हुई है, जिसकी टोटल वैल्यू 1129 करोड़ रुपये बतायी जा रही है। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लार्ज ट्रेड के जरिए 1.36% इक्विटी का सौदा हुआ। साथ ही इस डील के जरिए करीब 40 करोड़ शेयरों की बिक्री की है। 

एसबीआइ की यस बैंक में हिस्सेदारी 

एसबीआइ पर उपलब्ध शेयरधारकों के आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई की यस बैंक में 26.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि एचडीएफसी बैंक की निजी ऋणदाता में 3 फीसदी हिस्सेदारी है।

यस बैंक का दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट बढ़ा 

यस बैंक का नेट प्रॉफिट दिसंबर तिमाही में 231 करोड़ रुपये पर येस बैंक का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर, 2023) में 231 करोड़ रुपये रहा है। मुंबई के निजी क्षेत्र के बैंक का बीते वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध लाभ 52 करोड़ रुपये रहा था। बैंक का शुद्ध लाभ जुलाई-सितंबर, 2023 तिमाही में 225 करोड़ रुपये रहा था।

Published / 2024-02-13 20:45:11
उड़ान कैपिटल और सेंट गोबेन ने की साझेदारी

टीम एबीएन, रांची। भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनियों में से एक, उड़ानकैपिटल ने आज दुनिया में शीशे के प्रमुख निर्माताओं में एक सेंट गोबेन की सब्सिडियरी, सेंट गोबेन ग्लास बिजनेस के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को 170 करोड़ रुपये से अधिक की कार्यशील पूंजी को मुहैया कराने की घोषणा की है।

साझेदारी के जरिये इस फाइनेंसिंग प्रोग्राम को सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) के लिए लाया गया है। इस सहयोग के तहत, उड़ान कैपिटल ने 20 महीने से ज्यादा समय में देश के 23 राज्यों के 122 शहरों में फैले 200 से ज्यादा वितरकों को अपने साथ जोड़ा है।  

उड़ानकैपिटल के हेड चैतन्य अदापा ने कहा- हम भारत के व्यापार के लिए अगली पीढ़ी की कार्यशील पूंजी उत्पादों का निर्माण करने के हमारे लक्ष्य को आगे बढ़ाने  के लिए मजबूत साझेदारी करने में विश्वास रखते हैं। 

यह एक फिनटेक कंपनी है, जो छोटे कारोबार की क्रियाशील पूंजी की जरूरत को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करती है। भारत में लाखों छोटे रिटेलर और वितरक हैं, जो अपने आस-पड़ोस के उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करते हैं।

Published / 2024-02-07 21:39:57
भारी मुनाफा के बावजूद नहीं घट रहे डीजल-पेट्रोल के दाम

आयल कंपनियों का नौ महीनों में 69,000 करोड़ रहा मुनाफा, फिर भी नहीं घटे पेट्रोल-डीजल के दाम 

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश की तीन पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में 69,000 करोड़ रुपए का बंपर मुनाफा हुआ है जोकि ऑयल क्राइसिस से पहले के सालों के प्रॉफिट से काफी ज्यादा है। तेल संकट से पहले के वर्षों की उनकी वार्षिक कमाई से कहीं अधिक है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशल लि. (एचपीसीएल) का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2023-24 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में ज्वाइंटली ऑयल क्राइसिस से पहले के सालों में रही 39,356 करोड़ रुपए की वार्षिक कमाई से बेहतर है। 

इस बंपर मुनाफे के बाद सबसे बड़ा सवाल से खड़ा हो गया है कि आखिर देश में ऑयल पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम कब कम करेगी। खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों ने दैनिक मूल्य संशोधन व्यवस्था पर लौटने और उपभोक्ताओं को दरों में आई कमी का लाभ देने की मांग का विरोध किया है। 

उनका तर्क है कि कीमतें बेहद अस्थिर बनी हुई हैं और उनके पिछले नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं हुई है। भारत के लगभग 90 फीसदी फ्यूल मार्केट को कंट्रोल करने वाली तीनों कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में स्वेच्छा से लगभग दो साल से कोई बदलाव नहीं किया है। इसकी वजह से कच्चे तेल की लागत अधिक होने पर नुकसान होता है और कच्चे माल के दाम कम होने से मुनाफा होता है।

रूस यूक्रेन वॉर में कितना हुआ था नुकसान

इन तेल कंपनियों को अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान रूस-यूक्रेन वॉर की वजह से संयुक्त रूप से 21,201.18 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ था। इसका एक कारण बही-खाते में 22,000 करोड़ रुपए का प्रावधान था लेकिन पिछले दो साल के लिए एलपीजी सब्सिडी प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी और सरकार के एलपीजी सब्सिडी देने से आईओसी और बीपीसीएल को 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) के दौरान सालाना लाभ प्राप्त करने में मदद मिली लेकिन एचपीसीएल घाटे में रही।

आधी हो गई कच्चे तेल की कीमत

चालू वित्त वर्ष में हालात बदले हैं। तीनों कंपनियों ने पहली दो तिमाहियों (अप्रैल-जून और जुलाई-सितंबर) में रिकॉर्ड कमाई की। इसका कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतें एक साल पहले की तुलना में लगभग आधी होकर 72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल होना रहा। बाद की तिमाही में अंतरराष्ट्रीय कीमतें फिर से बढ़कर 90 अमेरिकी डॉलर हो गईं। इससे उनकी कमाई में कमी आई लेकिन कुल मिलाकर साल के दौरान उन्हें अच्छा लाभ हुआ।

IOC का मुनाफा

आईओसी ने चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2023) में एकल आधार पर 34,781.15 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया। कंपनी ने इसकी तुलना में 2022-23 में 8,241.82 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। आईओसी यह तर्क दे सकती है कि वित्त वर्ष 2022-23 तेल संकट से प्रभावित था। 9 महीने की कमाई संकट-पूर्व वर्षों की तुलना में भी अधिक है। कंपनी को 2021-22 में 24,184 करोड़ रुपए और 2020-21 में 21,836 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था।

BPCL और HPCL को कितना हुआ प्रॉफिट

बीपीसीएल ने चालू वित्त वर्ष में नौ महीने महीने की अवधि में 22,449.32 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में उसे 4,607.64 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। यह लाभ 2022-23 में 1,870.10 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2021-22 में 8,788.73 करोड़ रुपए की कमाई से अधिक है। एचपीसीएल का 9 महीने का मुनाफा 11,851.08 करोड़ रुपए रहा जबकि उसे वित्त वर्ष 2022-23 में 8,974.03 करोड़ रुपए का घाटा और 2021-22 में 6,382.63 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था।

पेट्रोल पर कितना घाटा और कितना नुकसान

फ्यूल की कीमतों पर रोक 6 अप्रैल, 2022 से लगी हुई है। उस वजह से 24 जून, 2022 को समाप्त सप्ताह में पेट्रोल पर 17.4 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 27.7 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हुआ था। हालांकि, बाद में कच्चे तेल की कीमतें घटने से यह घाटा समाप्त हो गया। पिछले महीने तीनों कंपनियों का पेट्रोल पर 11 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर पर छह रुपए प्रति लीटर का मार्जिन मिला था।

कब मिलेगी राहत?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत आम लोगों को राहत मिलेगी। बंपर मुनाफे के बाद सब जगह यही सवाल उठा रहा है। जानकारों की मानें तो चुनावों से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आना शुरू हो जाएगा। मुमकिन है कि वित्त वर्ष खत्म होने के बाद यानी अप्रैल के महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कटौती शुरू हो जाए। जानकारों की मानें तो मौजूदा वित्त वर्ष के खत्म होने के बाद तीनों कंपनियों का प्रॉफिट एक लाख करोड़ रुपए के पार जा सकता है, जिसके बाद पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती पर विचार कर सकती हैं।

Published / 2024-02-01 21:01:13
बिना कोई कर परिवर्तन का रहा अंतरिम बजट

एडी बाधवा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट पेश किया है। जिसमें कोई कर परिवर्तन नहीं किया गया है।  

प्रश्न : बजट 2024 में कर में राहत है क्या?  

उत्तर : विशेष नहीं। दरअसल, यह बजट अंतरिम था तो भारत सरकार ने कर में कोई परिवर्तन नहीं किया है। स्टार्ट अप और पेंशन फंड के लिए मामूली कर राहत है पर आम आदमी के लिए कर में कोई परिवर्तन नहीं है। 

प्रश्न : क्या आय कर के दर में कोई परिवर्तन है?  

उत्तर : नहीं। 

प्रश्न : इस बजट की बड़ी घोषणाएं क्या हैं?  

उत्तर : विशेष नहीं। पर वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया है। दो करोड़ नये घर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में बनाये जायेंगे। सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर में 11.11 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी, जो कि हमारी जीडीपी का 3.4% होगा। 40,000 रेल की सामान्य बोगियों को वंदे भारत जैसी बोगियों में बदला जायेगा। 

प्रश्न : सरकार का डिसइन्वेस्टमेंट पर क्या टारगेट है?  

उत्तर : वर्ष 2023-24 के लक्ष्य को 30,000 करोड़ कर दिया गया है। 2024-25 का यह लक्ष्य 50,000 करोड़ है। 

प्रश्न : किसानों के लिए बजट में क्या है? 

उत्तर : किसान फसल योजना में 4 करोड़ किसानों को लाया जायेगा। पीएम किसान योजना के अंतर्गत 11.8 करोड़ किसानों को लाया जायेगा। 

निष्कर्ष  : वास्तव में अगर आप मोदी जी का 10 वर्ष के शासन के सारे बजट को देखें तो उन सबमें सरकार ने पूर्व सरकारों की तरह आम जनता को तुरंत खुश करने वाली घोषणाएं करने से स्वयं को बचाया है और अपना ज्यादा फोकस उन निर्णयों को लेने में लगाया है जिसमें देश को दूरगामी लाभ हो। 

इस बार तो सरकार को ऐसा करने का बहाना मिल गया क्योंकि चुनाव के सरकार ने अंतरिम बजट पेश करने का निर्णय लिया और स्वयं को लोभ लुभावने वादों को करने से बचा लिया। इस कारण इस बार का बजट भी दूरगामी कदमों, जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि की ज्यादा बात करता है। 

मेरे विचार से अगर यही सरकार चुनाव के बाद पुन: आती है तो पूर्ण बजट में बिलकुल लोभ लुभावने वायदे नहीं होंगे और सरकार का सरकार पूरा ध्यान भारत को 2047 में विकसित राष्ट्र बनाने पर होगा जिसका इस बजट में हल्की से चर्चा भी है। 

प्रधान मंत्री ने दुबई में जो घोषणा की थी उसका भी इस बजट में ध्यान रखा गया है और सरकार ने छत पर आधारित सोलर पैनल, ई बस औेर ग्रीन एनर्जी की बात की है जिस से भारत 2070 तक कार्बन न्यूट्रल के लक्ष्य को प्राप्त कर सके। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कर सलाहकार हैं।)

Published / 2024-01-17 13:31:52
अगले एक साल तक नहीं बढ़ेगा खाद्य तेलों का दाम

तेल की कीमतें नहीं बिगाड़ेंगी रसोई का बजट

मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

एबीएन बिजनेस डेस्क। खाद्य तेल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। तेल के आयात शुल्क में छूट की सीमा सरकार ने मार्च 2025 तक बढ़ा दी है। इस फैसले से फिलहाल एक साल तक आम जनता को खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से राहत मिलेगी। 

सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जून में कच्चा पॉम ऑयल, कच्चा सूरजमुखी तेल और कच्चा सोयाबीन तेल के लिए आयात शुल्क में छूट की सीमा मार्च 2024 तय की थी।

वनस्पति तेल और रिफाइंड ऑयल की खपत के मामले में भारत दूसरे स्थान पर

बीते दिनों देश की थोक और खुदरा महंगाई दरों में काफी उछाल आया था। इसके पीछे का मुख्य कारण खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी होना थी। 

ऐसे में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ सकती है, लेकिन सरकार के इस फैसले से देश में खाद्य तेल की कीमतों को काबू रखने में काफी मदद मिलेगा। 

बता दें भारत दुनिया में वनस्पति तेल और रिफाइंड ऑयल की खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। देश में खाद्य तेलों की यह जरूरत हर साल दो तिहाई आयात से पूरी होती है।

पहले 32.5% था आयात शुल्क

केंद्र सरकार ने जून 2023 में रिफाइंड सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क 17.5 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया था। 

इससे पहले खाद्य तेल पर लगने वाला आयात शुल्क 32.5% था, जिसे अक्टूबर 2021 में घटाकर 17.5 फीसदी किया गया था।

इन देशों से आता है तेल

सबसे अधिक पाम ऑयल और इससे जुड़े अन्य उत्पाद इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड से आयात किए जाते हैं। 

भारत में ज्यादातर सरसों, पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी से निकलने वाला तेल खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से आयात होता है।

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