एबीएन सेंट्रल डेस्क। अदाणी ग्रुप अपने कारोबार को और भी बड़ा करने की सोच रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये ग्रुप अब भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में भी कूदने की तैयारी में है। ऐसा करके वो टाटा, गूगल और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों से सीधी टक्कर लेना चाहता है।
जानकारों के मुताबिक अदाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े सरकारी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, रूपे कार्ड की तरह काम करने वाले यूपीआई का लाइसेंस लेने के लिए बातचीत कर रहा है। साथ ही, पहले से ऐलान किये गये अदाणी क्रेडिट कार्ड को बैंकों के साथ मिलकर लाने की योजना को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अदाणी ग्रुप अपने उपभोक्ता ऐप अदाणी वन में नये फीचर्स जोड़ सकता है। सिर्फ पेमेंट सेक्टर ही नहीं, बल्कि खबरों के अनुसार अदाणी ग्रुप सरकारी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के जरिए आनलाइन शॉपिंग की सुविधा भी देने के लिए बातचीत कर रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अगर ये बातचीत सफल होती है, तो ये सारी सर्विसिज अदाणी ग्रुप के उपभोक्ता ऐप अदाणी वन पर मिलेंगी, जिसे 2022 के अंत में लॉन्च किया गया था।
अदाणी ग्रुप सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले बाजारों में कदम रखने की अपनी योजना पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अदाणी ग्रुप की ई-कॉमर्स और पेमेंट सर्विस शुरुआत में उन्हीं लोगों को टारगेट करेंगी जो पहले से ही अदाणी ग्रुप की दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। जैसे गैस और बिजली के ग्राहक या अदाणी के हवाई अड्डों से यात्रा करने वाले लोग।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में शामिल कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में पहले से ही कई बड़ी कंपनियां मौजूद हैं, ऐसे में अदाणी ग्रुप के लिए सफल होना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, अदाणी ग्रुप के पास पहले से ही देशभर में फैला हुआ बड़ा बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स का नेटवर्क है। साथ ही, उनके पास पहले से ही कई ग्राहक भी जुड़े हुए हैं। ये सब मिलकर अदाणी ग्रुप को इन नये बाजारों में आगे बढ़ने का एक मजबूत आधार दे सकते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में मौजूदा तेजी मजबूत बुनियाद और कंपनियों की आय बढ़ने के कारण आयी है। शेयर विशेषज्ञों ने यह राय जाहिर करते हुए कहा कि खुदरा निवेशक खरीदारी के मौके का इस्तेमाल अच्छे शेयर जमा करने के लिए कर सकते हैं।
प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स ने सोमवार को पहली बार 76,000 अंक का स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 23,110.80 अंक के नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह भी प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 और सेंसेक्स ने दो मौकों पर सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि कॉरपोरेट बही-खाते पांच साल पहले की तुलना में अब बहुत साफ-सुथरे हैं और क्षमता विस्तार की गुंजाइश है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के बुनियादी अनुसंधान निवेश सेवाओं के प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि भारतीय बाजार में हालिया तेजी, जीडीपी वृद्धि और विनिर्माण पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) जैसे मजबूत घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों से समर्थित है। यहां तक कि मुद्रास्फीति भी काफी हद तक स्थिर है।
संपत्ति प्रबंधन कंपनी द इन्फिनिटी ग्रुप के संस्थापक और निदेशक विनायक मेहता ने कहा कि पोर्टफोलियो में विविधता लाकर, मजबूत बुनियादी सिद्धांतों के साथ गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करके और और सट्टा व्यापार से बचकर जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक जून को चुनाव के अंतिम चरण तक अस्थिरता जारी रहने का अनुमान है।
चुनाव नतीजों से पहले बाजार में बड़ी गिरावट की गुंजाइश नहीं है। कारोबारी मंच फायर्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तेजस खोडे ने कहा कि खुदरा निवेशकों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और जोखिमों को कम करने के लिए व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) और विविध पोर्टफोलियो पर विचार करना चाहिए।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में आम चुनाव की शुरुआत होने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक अब तक 37,700 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। बावजूद घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी बाजार में लगातार बनी हुई है। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 60,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
देश में 19 अप्रैल 2024 को आम चुनाव की शुरुआत होने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अब तक 37,700 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान विदेशी निवेशकों ने हर दिन औसतन 1800 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।
दलाल स्ट्रीट में लोकसभा चुनाव परिणामों पर अनिश्चितता के कारण उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 67% की उछाल के साथ 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में मंगलवार को भी बिकवाली करते दिखे और शुद्ध रूप से 1,874.54 करोड़ रुपये की कीमत के शेयर बेचे।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बावजूद घरेलू निवेशकों (डीआईआई) की दिलचस्पी बाजार में लगातार बनी हुई है। वे न केवल अपनी पूर्व की खरीदारी को बनाये रखे हुए हैं, बल्कि लगातार नयी खरीदारी भी कर रहे हैं। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 60,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
अप्रैल महीने के अंत तक म्यूचुअल फंड्स के पास करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बड़ी नकदी मौजूद थी, जिस कारण वे विदेशी निवेशकों की ओर से की जा रही बिकवाली के कारण पैदा हुए दबाव को काफी हद तक कम करने में सफल रहे हैं। मोजोपीएमएस के चीफ इन्वेस्टमेंट आफिसर सुनील दमानिया के अनुसार भारतीय इक्विटी बाजार लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
5 ट्रिलियन डॉलर के करीब बाजार पूंजीकरण तक पहुंचने से भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है। इस उपलब्धि का श्रेय खुदरा निवेशकों को दिया जा सकता है, जिन्होंने हाल के वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद दृढ़ता से खरीदारी की है। साथ ही, सरकार के त्वरित सुधारों और भारतीय निगमों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने निरंतर निवेशकों की आय वृद्धि में योगदान दिया है।
जिससे निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार के प्रति उनका आकर्षण भी बढ़ा है। मौजूदा रैली आय वृद्धि और तरलता के संयोजन से प्रेरित है, जो अगले पांच वर्षों के भीतर भारत के बाजार पूंजीकरण को 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकती है। हालांकि, 5 ट्रिलियन डॉलर से 10 ट्रिलियन डॉलर के बीच की यात्रा में चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है और यह बहुत आसान यात्रा नहीं होगी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार हिमाचल की गुच्छी चीन द्वारा तैयार की जा रही अपनी गुच्छी के आगे बौनी साबित हो गयी है। किसी समय 40 से 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली गुच्छी के दाम आज के दौर में अनाज मंडी शिमला में 5 हजार रुपये प्रति किलो भी नहीं मिल रहे हैं।
चीन पिछले दो-तीन वर्षों से अपनी स्वयं की गुच्छी तैयार कर रहा है, जो हिमाचल की गुच्छी से देखने में भी बहुत अच्छी है और इसके दाम भी बहुत कम हैं। चीन इसका अन्य देशों में भी निर्यात कर रहा है जिससे हिमाचल की गुच्छी के दाम फीके पड़ गए हैं।
किसी समय यह हिमाचल के पहाड़ी इलाकों के लोगों की आय का मुख्य स्त्रोत होती थी और बैसाख की संक्रांति से शुरू होने वाले लोकल त्यौहारों, पर्वों यानी बीशू के लिए कपड़े आदि की खरीद के लिए गुच्छी एकमात्र साधन मानी जाती थी लेकिन आज के दौर में गुच्छी का आलम यह है कि इसके 5 हजार रुपए प्रतिकिलो भी दाम नहीं मिल रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार गुच्छी चमत्कारी और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसमें आयरन, विटामिन बी और सी के अलावा अमीनो एसिड और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इसमें लो फैट और हाई एंटी आॅक्सीडैंट्स फाइबर होते हैं। विशेषकर हृदय रोगियों के लिए गुच्छी मशरूम संजीवनी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आॅफ इंडिया (सेबी) ने डेरिवेटिव सेगमेंट में शेयर बाजार में कारोबारी समय के विस्तार के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रस्ताव को वापस कर दिया है। ब्रोकर समुदाय के बीच आम सहमति की कमी के कारण सेबी ने ये फैसला लिया है।
सेबी ने एक्सचेंजों की ओर से ट्रेडिंग समय बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। शेयर बाजार में कुछ समय से ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने के लिए कुछ वर्ग से मांग की जा रही थी जिस पर अब सेबी ने ये फैसला सुनाया है।
एनएसई ने मार्केट रेगुलेटर के पास शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच डेरिवेटिव मार्केट को तीन अतिरिक्त घंटों के लिए खुला रखने के लिए एक एप्लीकेन दायर की थी। ये मांग इसलिए की गयी थी जिससे बाजार सहभागियों को शाम के समय ग्लोबल न्यूज फ्लो का आकलन करने और उस पर कार्रवाई करने में मदद मिल सके। हालांकि बढ़ने वाली एक्स्ट्रा कॉस्ट के कारण सभी स्टॉक ब्रोकर इसका समर्थन करने में आगे नहीं आये और इस मांग का सपोर्ट नहीं किया।
हालांकि इसी साल फरवरी के महीने में खबर आई थी कि इंडेक्स फ्यूचर्स में ट्रेडिंग समय बढ़ाने के लिए एसोसिएशन आॅफ नेशनल एक्सचेंज मेंम्बर्स आफ इंडिया (एएनएमआई) की ओर से जो प्रयास किए जा रहे थे उनके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की बात सामने आई है। वहीं इसके बाद चर्चा थी कि ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम ने इस बारे में मार्केट रेगुलेटर सेबी को औपचारिक लेटर लिखने का फैसला किया है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। आलू और प्याज की कीमतें अब आपकी नींद उड़ा सकती है। दरअसल, रिटेल मार्केट में पिछले एक महीने में आलू की कीमत में करीब 30 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है। वहीं दूसरी ओर प्याज का निर्यात ओपन होने के बाद कीमतों में इजाफे का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते एक महीने में आलू कीमतें 20 रुपए से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गयी है। इसका मतलब है कि आलू की कीमत में 10 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा देखने को मिल चुकाई है।
अगर चिप्सोना आलू रिटेल मार्केट में 35 से 40 रुपए किलो के भाव पर मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर छोटे आलू के दाम 20 से 22 रुपए हो गए हैं, जोकि कुछ दिन पहले 14 रुपए प्रति किलोग्राम थे। ऐसे में आप अनुमान लगा सकते हैं कि आलू की कीमतें कितनी तेजी के साथ बढ़ रही हैं।
एग्री कमोडिटी के विशेषज्ञ बताते हैं कि अब प्याज भी महंगा हो सकता है। सरकार ने प्याज के निर्यात पर अनुमति दे दी है। अब प्याज उत्पादक अपने प्याज को दुनिया के किसी भी कोने में भेज सकेंगे।
ऐसे में आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है, जब भारत के प्याज के निर्यात पर रोक लगाई हुई थी तो दूसरे देशों में प्याज की कीमतें 100 रुपये से 150 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गयी थी। मौजूदा समय में भी एक्सपोर्ट मार्केट में अभी प्याज 100 रुपए प्रति किलोग्राम है, जिसकी वजह से घरेजू यूज में आने वाले प्याज कीद कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है।
देश के रिटेल इंफ्लेशन में सब्जियों की महंगाई का वेटेज 7.4 फीसदी है जबकि फूड इंफ्लेशन में सब्जियों का वेटेज 15 फीसदी के आसपास है। मौजूदा समय में सब्जियों की महंगाई में इजाफा लगातार देखा जा रहा है। गर्मियों में हरी सब्जी डिमांड ज्यादा होती है जिनकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सब्जियों की महंगाई की वजह से कुल महंगाई दर डबल डिजिट में पहुंच सकती है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिका की दिग्गज कंपनी ऐपल के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर आईफोन बनाने वाली ताइवान की एक और कंपनी टाटा ग्रुप की झोली में आने वाली है। सूत्रों के मुताबिक टाटा ग्रुप ताइवानी कंपनी पेगाट्रॉन की इंडिया यूनिट में मैज्योरिटी स्टेक खरीदने के लिए की तैयारी में है। दोनों कंपनियों के बीच बातचीत एडवांस स्टेज में है।
इससे पहले टाटा ग्रुप ऐपल की एक और कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरर विस्ट्रॉन को खरीद चुकी है। सूत्रों का कहना है कि यह डील आने वाले दो से तीन महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह विस्ट्रॉन की तरह का अधिग्रहण होगा या जॉइंट वेंचर। अभी दोनों विकल्प खुले हैं।
पेगाट्रॉन और फॉक्सकॉन की तरह विस्ट्रॉन भी ऐपल के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर आईफोन बनाती है। टाटा ग्रुप ने पिछले साल नवंबर में 12.5 करोड़ डॉलर (1,000 करोड़ रुपये) में इसकी लोकल यूनिट को खरीदा था और iPhone बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गयी।
टाटा के पेगाट्रॉन की खरीदने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि मोबाइल फोन निर्माण में भारतीय चैंपियन उभर रहे हैं। जैसे-जैसे यह सेक्टर बढ़ रहा है, ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
एक सूत्र ने कहा कि इस डील की रकम विस्ट्रॉन सौदे से कम होने वाली है। इसकी वजह यह है कि पेगाट्रॉन एक छोटी कंपनी है और जब यह अधिग्रहण पूरा होगा तो उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) स्कीम के तहत दो साल से भी कम समय बाकी रहेगा। एक सूत्र ने कहा कि टाटा ग्रुप अपनी सहायक कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए यह डील पूरा करने की तैयारी में है।
जानकारों का कहना है कि ऐपल इस डील को जल्द से जल्द बंद करना चाहती है ताकि एनुअल लॉन्च से पहले पहले ऑनरशिप को लेकर किसी तरह का कनफ्यूजन न हो। कंपनी सितंबर में नए iPhone लॉन्च करेगी जिनका प्रॉडक्शन जून-अगस्त में शुरू होगा।
इस बारे में टाटा ग्रुप, पेगाट्रॉन और ऐपल ने प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। पेगाट्रॉन के भारत में लगभग 9,500 कर्मचारी हैं और वह सालाना लगभग 45 लाख iPhone बनाती है। कंपनी ने 2022 में भारत में बिजनस शुरू किया था। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट है।
पेगाट्रॉन ऐपल के तीन कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरर्स में से एक है जिन्हें स्मार्टफोन PLI स्कीम के तहत चुना गया है लेकिन इसे केवल चार साल ही फायदा मिलेगा क्योंकि उसने फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन की तुलना में एक साल बाद निर्माण शुरू किया था। कंपनी ने PLI स्कीम के तहत FY23 और FY25 के बीच 1,132 करोड़ रुपये का निवेश करने का वादा किया था।
अभी भारत में अधिकांश आईफोन फॉक्सकॉन बनाती है। सूत्रों के मुताबिक अगर टाटा और पेगाट्रॉन की डील होती है तो पेगाट्रॉन के कर्मचारी नई यूनिट में चले जायेंगे। एक सूत्र ने कहा कि ऐपल भारत में अपना बिजनस बढ़ाना चाहती है और टाटा द्वारा पेगाट्रॉन का अधिग्रहण इसी योजना का हिस्सा हो सकता है।
ऐपल चीन में इसी रणनीति के तहत काम करती है जहां 90% आपूर्तिकर्ता चीनी हैं। वियतनाम का मामला अलग है क्योंकि वहां कोई मजबूत कंपनी नहीं है। कंपनी वियतनाम में iPad और Mac पर्सनल कंप्यूटर बनाती है लेकिन वहां iPhone नहीं बनाये जाते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। स्कोडा ऑटो इंडिया ने अपनी ऑल-न्यू कॉम्पैक्ट एसयूवी की घोषणा की है। नये युग की ओर एक और कदम बढ़ाते हुए कंपनी ने यूजर के जुड़ाव, उपभोक्ताओं को कंपनी की योजनाओं में शामिल करने और डिजिटाइज़ेशन की ओर बढ़ते हुए कई डिजिटल गतिविधियों की शुरुआत की है। इससे बिक्री में काफी उछाल आया है और कंपनी अपने ग्राहकों या प्रशंसकों के ज्यादा नजदीक पहुंची।
स्कोडा ऑटो इंडिया के ब्रैंड डायरेक्टर पेट्र जेनेबा ने कहा कि लगातार बदलते डिजिटल फलक, प्लेटफॉर्म और मीडियम को देखते हुए उपभोक्ताओं के अनुभव और उनके सफर को यादगार बनाने के लिए नये तरीकों को अमल में लाना बहुत जरूरी हो गया है। हमारी डिजिटल रणनीति यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गयी है कि हमारे प्रोडक्ट्स और सर्विसेस उपभोक्ताओं और फैंस तक उनके पसंदीदा रूप में पहुंचे।
अभी तक कंपनी को नेम योर स्कोडा कैंपेन के तहत अपनी जल्द ही लॉन्च होने वाली ऑल-न्यू कॉम्पैक्ट एसयूवी के लिए 1,50,000 एंट्रीज या नामों के सुझाव मिले हैं। हाल ही मे कंपनी का 24 घंटे का डिजिटल कैंपेन समाप्त हुआ, जिसमें कंपनी ने भारत में अपने कार्यकाल के 24 वर्ष पूरा करने का जश्न मनाते हुए एक दिन या 24 घंटे में 709 स्कोडा कारों की बुकिंग की।
हमने स्कोडा गियर हेड्स कम्युनिटी के माध्यम से स्कोडावर्स इंडिया एनएफटी को और विस्तार दिया है। इसके साथ हम बड़े और विविधता से भरपूर मार्केट में ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए निरंतर नयी पहल कर रहे हैं और नयी रणनीति को अपना रहे हैं।
इस कैंपेन से यूजर्स, उपभोक्ताओं और स्कोडा के फैंस कंपनी से अपना जुड़ाव और कंपनी की नयी पहल में शामिल होने में कामयाब हुए हैं। इस कैंपेन के तहत उपभोक्ताओं को स्कोडा ऑटो इंडिया की नयी कॉम्पैक्ट एसयूवी के लिए नये नाम का सुझाव दिया। कंपनी की नयी कॉम्पैक्ट एसयूवी 2025 में भारत की सड़कों पर दौड़ेगी।
इस कैंपेन के नतीजे के तौर पर कंपनी को अभी तक अपनी नयी कॉम्पैक्ट एसयूवी के लिए 1,50,000 से ज्यादा नाम मिले हैं, जिसमें से 21 हजार बिल्कुल नये और अनोखे नाम है। ये एंट्रीज स्कोडा के अपनी सभी एसयूवी के नाम "के" से शुरू करने और बीच में एक या दो अक्षरों के साथ "क्यू" पर खत्म करने की परंपरा की कसौटी पर खरी उतरी हैं।
स्कोडा ऑटो इंडिया ने देश में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का जश्न भी मनाया। कंपनी की शुरुआत भारत में दिसंबर 1999 में हुई है। इस महत्वपूर्ण अवसर का उत्सव मनाने के लिए कंपनी ने 24 मार्च 2024 को 24 घंटे के लिए ऑफर्स की एक सीरीज लॉन्च की। यह ऑफर विशेष रूप से डिजिटल प्लटफॉर्म पर दिये गये। इस पहल के तहत 24 घंटे की अवधि में 709 कारों की बुकिंग की गयी।
कंपनी के स्कोडा को सभी तक पहुंचाने के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए इस नई पहल न ग्राहकों को अपने पसंदीदा स्कोडा ब्रैंड से जुड़ने का एक और अवसर दिया है। कंपनी ने वयस्कों और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से 5 स्टार रेटिंग वाली कारों के बेड़े को सभी तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है।
यह देश भर में अपनी तरह का अनोखा सदस्यता कार्यक्रम है। इसका लक्ष्य नयी-नयी कारों के शौकीन लोगों का समुदाय विकसित करना है। इस मेंबरशिप प्रोग्राम से प्रीमियम मर्चेंडाइज की ओर से एक वेलकम किट के अलावा सदस्यों को स्कोडा के इसी इवेंट्स में वीआईपी की तरह ट्रीट किया जाता है। उपभोक्ताओं को कारों और सर्विस प्रोडक्ट्स की खरीद पर विशेष लाभ होते हैं। उन्हें नयी कारों की लॉन्चिंग और उनके नयी फीचर्स पर अंदरूनी अपडेट्स मिलते रहते हैं।
इसके साथ ही उपभोक्ताओं को इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स और अपनी तरह कारों के शौकीन दूसरे व्यक्तियों से ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से विशेष रूप से मिलने का मौका मिलता है। सभी सदस्य पॉलीगॉन की ब्लॉकचेन पर बनाये जाते हैं और स्कोडावर्स इंडिया प्लेटफॉर्म पर शानदार एनएफटी (नॉन फंजिबल टोकन) के तौर पर इसे एक्सेस किया जा सकता है।
कंपनी की ओर से पूरी तरह से डिजिटल पहल के इस संग्रह की बदौलत 2022 सबसे बड़ा साल रहा। कंपनी ने 2022 और 2023 के बीच 1 लाख से ज्यादा कारों की बिक्री की। इस नयी पहल ने दुनिया भर में सबसे पहले भारत में 2025 में पहले छमाही में लॉन्च होने वाली स्कोडा की ऑल-न्यू कॉम्पैक्ट एसयूवी के लिए नयी उत्सुकता पैदा कर दी। इस नई एसयूवी का निर्माण कुशाक एसयूवी और स्लाविया सेडान की तरह MQB-A0-IN प्लेटफॉर्म पर किया गया है। MQB-A0-IN को भारत और चेक रिपब्लिक की टीमों ने भारत के लिए विकसित किया है।
इसमें तरह-तरह के फीचर्स, सुरक्षा, गतिशीलता के साथ स्थानीयकरण, कम रखरखाव की लागत और परेशानी से मुक्त स्वामित्व के अनुभव के लिए विकसित किया गया है। कुशाक एसयूवी भारत और दुनिया में जुलाई 2021 में लॉन्च की गयी और स्लाविया सेडान मार्च 22 में लॉन्च की गयी।
स्कोडा ऑटो इंडिया के डिजिटाइज़ेशन की शुरुआत कुछ सालों पहले हुई। कंपनी ने भारत में सबसे पहले डिजिटाइज़ेशन की कवायद के तहत अपने सभी शोरूम को पूरी तरह डिजिटाइज किया। इंटरएक्टिव टेबल बनाये गये। बेहतरीन अनुभव प्रदान किये गये और भारत में इंडस्ट्री का पहला डिजिटल कार इंफॉर्मेशन स्टैंड बनाया गया। इन डिजिटल जुड़ाव से उपभोक्ताओं का कारों को चुनने और खरीदने का अनुभव और बेहतर हो गया।
2023 में स्कोडा ऑटो इंडिया ने फोन ऐप बेस्ड सिस्टम सर्विस कैम की शुरुआत की। इससे उपभोक्ता अपनी सर्विस के लिए गयी कारों की निगरानी कर सकते हैं। उसमें किये जाने वाले काम को रिजेक्ट कर सकते हैं और अप्रूव कर सकते हैं। इस डिजिटल ऐप को लॉन्च करने का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं के लिए स्वामित्व के अनुभव को और बेहतरीन बनाना है।
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