एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र चुनावों में भाजपा की मजबूत जीत से दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक रुख देखने को मिला और आज के कारोबारी सत्र में निफ्टी +370 अंकों की बढ़त के साथ खुला। वहीं सेंसक्स +1,216 के साथ खुली। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा के प्रदर्शन से बाजार में आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और खर्च पर नया ध्यान केंद्रित होगा।
यह बदलाव खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्सों में 2.5 फीसदी से अधिक की बढ़त देखी गई थी, हालांकि इसके बाद कुछ करेक्शन भी आया था। अक्टूबर में लगभग 6% की गिरावट के बाद, नवंबर में सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट देखी गयी है।
एक्सपर्ट का मानना है कि आज के सत्र के पहले हिस्से में निफ्टी 300-400 अंकों की बढ़त देख सकता है, जिससे यह 24,000 अंक के स्तर को पार कर सकता है। अगर यह गति कायम रहती है, तो निफ्टी 24,250-24,300 के स्तर तक पहुंच सकता है, और इसके बाद 24,700 तक की रैली संभव हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि निफ्टी के लिए 24,400 के स्तर को पार करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि भले ही भाजपा की जीत से बाजार खुश होगा, यह देखना होगा कि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है या नहीं।
उनके अनुसार, भाजपा की हार की संभावना अधिक थी और बाजार ने जीत के अनुमान के आधार पर अपनी चाल चली थी। अब, बाजार की रैली की स्थिरता मुख्य रूप से सरकारी खर्च और विकास योजनाओं पर निर्भर करेगी, जो अगले कुछ महीनों में रैली की दिशा तय करेंगे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अडानी समूह के लिए गुरुवार, 21 नवंबर, 2024 का दिन एक बुरे सपने जैसा साबित हुआ, जब अमेरिकी अदालतों में उनके ऊपर रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद भारतीय शेयर बाजार में अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया और बाजार में तनाव का माहौल बन गया।
शेयर बाजार खुलते ही अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। सबसे ज्यादा गिरावट अडानी एनर्जी सोल्युशंस के शेयरों में देखने को मिली, जो 20 फीसदी गिरकर 697.70 रुपये पर पहुंच गए और स्टॉक में लोअर सर्किट लग गया। लोअर सर्किट का मतलब है कि इस गिरावट के बाद इस शेयर पर और कारोबार नहीं हो सकता। निवेशकों के लिए यह बड़ा झटका था, क्योंकि यह शेयर हाल ही में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था।
समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर भी 10 फीसदी की गिरावट के साथ 2539 रुपये पर गिरकर लोअर सर्किट में चला गया। इसके अलावा अडानी पोर्ट्स के शेयर भी 10 फीसदी नीचे गए और 1160 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं। अंबुजा सीमेंट और अडानी पावर के शेयरों में भी क्रमशः 10 फीसदी और 16 फीसदी की गिरावट आई, जो निवेशकों के लिए एक और चिंता का कारण बन गया।
अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में 18 फीसदी की गिरावट आई और यह 1159 रुपये पर पहुंच गए, जबकि अडानी टोटाल गैस के शेयर 14 फीसदी गिरकर 577.80 रुपये तक पहुंच गए। एसीसी के शेयरों में भी 10 फीसदी की गिरावट आई, जिससे यह 1966.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था और इस स्टॉक में भी लोअर सर्किट लग गया। अडानी विल्मर का शेयर 8 फीसदी गिरकर 301 रुपये पर कारोबार कर रहा है। इस गिरावट के कारण निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है और अडानी समूह की कंपनियों के भविष्य को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर अडानी समूह पर लगाए गए आरोपों की जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह उनके लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों का विश्वास भी डगमगा सकता है, जिससे इन कंपनियों के शेयरों में और गिरावट हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अडानी समूह को इस समय अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि यह स्थिति और खराब न हो।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कई दिनों बाद आज शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। आज सेंसेक्स 1000 अंक से भी ज्यादा चढ़ा था लेकिन कारोबार के अंत में सेंसेक्स 239 अंक बढ़कर 77,578 और निफ्टी 64 अंकों की तेजी के साथ 23,518 पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंक की बढ़त के साथ 78,350 के स्तर वहीं निफ्टी में भी 300 अंक से ज्यादा की तेजी थी, ये 23,750 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 में बढ़त और सिर्फ 3 शेयरों में गिरावट देखने को मिल रही है। आज आटो, एनर्जी और कळ शेयर्स में ज्यादा बढ़त देखने को मिल रही है। एम एंड एम और टाटा मोटर्स के शेयर्स में 2% से ज्यादा की तेजी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। विदेशी पूंजी निकासी, आईटी शेयरों में बिकवाली और अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत के चलते बेंचमार्क शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को भी गिरावट के साथ बंद हुए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 241.30 अंक या 0.31 प्रतिशत गिरकर 77,339.01 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार गिरावट का चौथा दिन रहा। कारोबार के दौरान यह 615.25 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 76,965.06 अंक पर आ गया। लगातार सातवें दिन गिरावट के साथ एनएसई निफ्टी 78.90 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,453.80 पर आ गया।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एनटीपीसी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, इंडसइंड बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रमुख रूप से पिछड़ गए। टाटा स्टील, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, नेस्ले और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर लाभ में रहे।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 1,849.87 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय इक्विटी बाजारों से 22,420 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसका कारण उच्च घरेलू शेयर मूल्यांकन, चीन में बढ़ते निवेश तथा अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ ट्रेजरी प्रतिफल में वृद्धि है। इससे पहले, शुक्रवार को गुरु नानक जयंती के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहे।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "बाजार में कमजोरी का दौर जारी रह। तिमाही नतीजों में आय वृद्धि में मंदी और मुद्रास्फीति के कारण कमजोर रुपये ने धारणा को प्रभावित किया। दिसंबर में फेड ब्याज दर में कटौती की कम उम्मीद के कारण आज आईटी शेयरों ने नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिससे बीएफएसआई खंड में खर्च में देरी हो सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। कुछ का कहना है कि यह मील का पत्थर अगले दो साल के भीतर हासिल किया जा सकता है। 2023 में जापान की अर्थव्यवस्था $4.22 ट्रिलियन की थी, जबकि भारत की $3.55 ट्रिलियन।
कैपिटल इकोनॉमी के एशिया-प्रशांत प्रमुख मार्सेल थीलिएंट के अनुसार, हमारे मौजूदा अनुमानों के अनुसार, भारत 2026 तक जापान को पीछे छोड़ सकता था। लेकिन अब यह बदलाव जल्द होने की संभावना है।अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि (जो महंगाई को ध्यान में रखती है) को 2024 में 7% और 2023 में 8.2% बताया है। 2025 और 2026 में यह वृद्धि 6.5% के आसपास बनी रहेगी।
दूसरी ओर, जापान की आर्थिक स्थिति कमजोर नजर आ रही है। आइएमएफ ने 2024 में जापान की जीडीपी वृद्धि मात्र 0.3% रहने का अनुमान लगाया है, जो 2023 में 1.7% और 2022 में 1.2% थी। जापान मुद्रास्फीति, कमजोर येन और धीमी आर्थिक वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पिछले महीने हुए चुनाव में इन मुद्दों पर बहस हुई, जहां जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक दशक में पहली बार सत्ता गंवा दी।
हालांकि, इशिबा ने संसदीय मतदान में अपने पद को बरकरार रखा। भारत का भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है। व्यापार, कृषि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है।
एस एंड पी ग्लोबल के अभिषेक तोमर ने कहा, भारत की युवा और ऊर्जावान जनसंख्या इसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करेगी। एस एंड पी ग्लोबल का अनुमान है कि भारत 2030 या 2031 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। अमेरिका, जो अब भी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, 2024 में 2.8% और 2025 तक 2.2% जीडीपी वृद्धि दर्ज कर सकता है।
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी आर्थिक नीतियां वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकती हैं। ट्रंप द्वारा चीनी आयात पर 60% तक के शुल्क का प्रस्ताव अन्य अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भी चीजें महंगी हो सकती हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क (नई दिल्ली)। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का आईपीओ निवेशकों के लिए 19 नवंबर को खुलेगा। कंपनी ने इसके लिए मूल्य का दायरा (प्राइस बैंड) 102-108 रुपये प्रति शेयर तय किया है।
कंपनी ने एक बयान में कहा कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का आईपीओ 19 नवंबर को खुलेगा। निवेशक इसके लिए 22 नवंबर, 2024 तक बोली लगा सकेंगे। कंपनी की योजना इस इश्यू के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयर 27 नवंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे।
बाजार नियामक सेबी को दी जानकारी के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की राष्ट्रीय तापविद्युत निगम मिटेड की सब्सिडियरी कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का आईपीओ 10 हजार करोड़ रुपये का पूरी तरह से फ्रेश इक्विटी शेयरों का है, जिसमें 92.59 करोड़ शेयर शामिल हैं। इसमें कोई आॅफर फॉर सेल नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करती है, जो एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार निवेशकों के लिए अक्टूबर से शुरू हुआ बुरा दौर लगातार जारी है। मंगलवार को शेयर बाजार में एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली। आज बीएसई सेंसेक्स 820.97 अंकों की गिरावट के साथ 78,675.18 अंकों पर बंद हुआ और इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 भी 257.85 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 23,883.45 अंकों पर बंद हुआ। बताते चलें कि बाजार आज ठीक-ठाक बढ़त के साथ हरे निशान में खुला था। लेकिन कारोबार के आखिरी कुछ घंटों में अचानक बिकवाली हावी हो गई और मार्केट क्रैश हो गया।
इससे पहले कल यानी 11 नवंबर को शेयर बाजार में फ्लैट कारोबार था। सेंसेक्स 9 अंक की तेजी के साथ 79,496 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी में 6 अंक की गिरावट थी, ये 24,141 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, स्मॉल कैप 627 अंक की गिरावट के साथ 54,286 के स्तर पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 में गिरावट और 12 में तेजी थी। निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 में गिरावट और 19 में तेजी थी। जबकि, एक शेयर में कोई भी बदलाव नहीं हुआ था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत का स्टील निर्यात इस साल अक्टूबर में 11 प्रतिशत बढ़ा है, जो सितंबर के मुकाबले 4.4 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा स्टील मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजे डेटा से सामने आया है। इस बढ़ोतरी से स्टील क्षेत्र में सुधार का संकेत मिल रहा है और घरेलू कंपनियों को अपनी उत्पादों के लिए बेहतर कीमतें मिल रही हैं। अक्टूबर में स्टील का निर्यात 4 मिलियन टन से बढ़कर 4.4 मिलियन टन हो गया, जो पिछले महीने के मुकाबले 11 प्रतिशत ज्यादा है। इस वृद्धि का मुख्य कारण आयात में गिरावट है। इसके चलते घरेलू स्टील कंपनियों को तीसरी तिमाही में अपने उत्पादों के लिए अच्छे दाम मिलेंगे।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में स्टील आयात 4 प्रतिशत घटकर 9.8 लाख टन रह गया, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 11 लाख टन था। सरकार ने वियतनाम जैसे देशों से आने वाले खराब गुणवत्ता वाले स्टील पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे आयात कम हुआ और घरेलू कंपनियों को फायदा हुआ।
भारत के स्टील सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी के पीछे देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का योगदान है। 2023-24 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही थी और चालू वित्त वर्ष में यह 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे स्टील की मांग में और वृद्धि होने की उम्मीद है। इस तरह भारत का स्टील सेक्टर धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में इसकी वृद्धि को बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।
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