एबीएन नॉलेज डेस्क। टेलीकॉम रेगुलेटरी आॅथोरिटी आॅफ इंडिया (ट्राई) का एक नया नियम भारत के टेलीकॉम यूजर्स के लिए राहत की खबर लेकर आया है। दरअसल, जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया या बीएसएनएल के टेलीकॉम यूजर्स अब कम से कम मात्र 20 रुपये के प्रीपेड रिचार्ज के साथ भी अपने सिम कार्ड को एक्टिव रख पायेंगे। आइये हम आपको ट्राई का यह नया नियम समझाते हैं।
दरअसल, ट्राई ने जियो, एयरटेल, वीआई और बीएसएनएल समेत भारत के सभी टेलीकॉम आपरेटर्स को आटोमैटिक नंबर रिटेंशन स्कीम फॉलो करने को कहा है। ट्राई के नियमों के अनुसार अगर आप 90 दिनों तक अपनी सिम से वॉयस, डेटा, एसएमएस या किसी अन्य सर्विस का इस्तेमाल नहीं करते हैं और आपके पास कोई भी एक्टिव रिचार्ज प्लान नहीं है, तो आपकी सिम बंद कर दी जायेगी।
ऐसे में आपका टेलीकॉम आपरेटर आपकी नंबर आपके नाम से हटाकर किसी अन्य कस्टमर के नाम पर जारी कर सकता है। अब ट्राई के नये नियम के अनुसार आप अपने प्रीपेड नंबर को कम से कम 20 रुपये का रिचार्ज कराकर अगले 30 अतिरिक्त दिनों के लिए एक्टिव रख सकते हैं। अब 90 दिनों के बाद आपके अकाउंट से हर महीने अपने-आप 20 रुपये कट जायेंगे और आपकी सिम की वैधता अगले 30 दिनों के लिए बढ़ जायेगी।
यह साइकिल तब तक रिपीट होता जायेगा, जब तक आपके पास पर्याप्त प्रीपेड बैलेंस न हो। अगर आपके पास पर्याप्त बैलेंस न हो, तो आपको टॉप-अप करने के लिए 15 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलेगा। अगर आप उसके बाद भी रिचार्ज करने में फेल हो जाते हैं तो आपकी टेलीकॉम कंपनी आपकी सिम बंद कर देगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में पेट्रोल महंगा हो गया है। 9 जनवरी को तेल कंपनियों ने पेट्रोल के जो दाम जारी किए हैं, उसके मुताबिक, झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 1.28 रुपये बढ़ गई है। आज के दिन में पेट्रोल की कीमत में यह सबसे बड़ी वृद्धि है।
झारखंड के अन्य 7 जिलों में भी पेट्रोल के दाम बढ़े हैं। बोकारो, धनबाद, दुमका, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा और पाकुड़ में भी पेट्रोल महंगा हुआ है। चतरा, देवघर, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, गुमला, जामताड़ा और सरायकेला-खरसावां जिले में पेट्रोल की कीमतों में गिरावट भी आई है।
जामताड़ा में पेट्रोल 2 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है, तो गिरिडीह में 48 पैसे। आज यानी 9 जनवरी 2025 को आपके जिले में पेट्रोल का भाव क्या है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में आज 30 दिसंबर को भारी उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 450.94 अंक या 0.57 फीसदी की गिरावट के साथ 78,248.13 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स, निफ्टी 168.50 अंक या 0.71 फीसदी लुढ़ककर 23,644.90 के स्तर पर बंद हुआ।
इसके चलते शेयर बाजार में आज निवेशकों के करीब 81,000 करोड़ रुपए डूब गये। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी निवेशकों की ओर से निकासी और डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है।
आज के कारोबार के दौरान कैपिटल गुड्स, आटो, मेटल, कमोडिटी, रियल्टी और बैकिंग शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन आज 30 दिसंबर को घटकर 441.50 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो इसके पिछले कारोबारी दिन यानी शुक्रवार 27 दिसंबर को 442.31 लाख करोड़ रुपए था। इस तरह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब 81,000 करोड़ रुपये घटा है या दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों की संपत्ति में करीब 81,000 करोड़ रुपए की गिरावट आयी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। 2024 के बजट की तैयारियां जोरों पर हैं, और इस बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अहम घोषणा की उम्मीद जतायी जा रही है। कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क कम करने की मांग की है।
बजट 2024 की तैयारियां तेजी से चल रही हैं, और सभी प्रमुख सेक्टर्स सरकार से अपनी मांगें रख रहे हैं। इस बीच, भारत की प्रमुख इंडस्ट्री बॉडी, कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) ने पेट्रोल-डीजल और इनकम टैक्स से जुड़े कई अहम प्रस्ताव सरकार के सामने रखे हैं।
यदि ये मांगें मान ली जाती हैं, तो इसका सीधा फायदा आम जनता को होगा। सीआईआई ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क कम करने की सिफारिश की है। वर्तमान में पेट्रोल पर 21 फीसदी और डीजल पर 18 फीसदी उत्पाद शुल्क लिया जा रहा है, जबकि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 40 फीसदी की गिरावट आयी है।
इससे इन ईंधनों की कीमतों में कमी की संभावना जतायी जा रही है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा, सीआइआइ ने लोअर और मिडल इनकम ग्रुप को राहत देने के लिए इनकम टैक्स में कटौती की भी मांग की है। उनका सुझाव है कि जिनकी सालाना आय 20 लाख रुपये तक है, उनके लिए टैक्स में कमी की जानी चाहिए।
सीआइआइ ने मनरेगा और पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि बढ़ाने की भी बात की है। वर्तमान में पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6,000 रुपये मिलते हैं, जो तीन समान किस्तों में उनके बैंक खातों में भेजे जाते हैं। सीआईआई का कहना है कि आगामी बजट का मुख्य फोकस कंजम्प्शन डिमांड को बढ़ाने पर होना चाहिए, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिले।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय चिंतन के दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के केंद्र बिंदु ग्राहक संप्रभुता पर विचार करने से पहले ग्राहक शब्द का अर्थ समझना आवश्यक है। क्योंकि वैश्विक ग्राहक आंदोलन ग्राहक को बाजार में की जाने वाली खरीद-बिक्री की गतिविधियों तक ही सीमित रखता है। जबकि ग्राहक शब्द अंग्रेजी में उपभोक्ता या कस्टमर का पर्याय नहीं है। इसे हिंदी शब्द उपभोक्ता का पर्याय भी नहीं माना जा सकता। उपभोक्ता शब्द उपभोग की अवधारणा से लिया गया है, जबकि ग्राहक शब्द प्राप्त करने या स्वीकार करने की क्रिया से उत्पन्न हुआ है। दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। उपभोग असीमित है और आवश्यकता के बजाय क्षमता को संतुष्ट करता है, जबकि प्राप्ति आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित है। आवश्यकता पूरी होने पर संतुष्टि प्राप्त होती है।
ग्राहक शब्द सुनकर वास्तव में विचार यह होना चाहिए कि ग्राहक ही अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। ग्राहक केवल वस्तुओं और सेवाओं के खरीदार नहीं हैं। ग्राहक आर्थिक ढांचे का केंद्रीय तत्व हैं। ग्राहक की मांग ही उत्पादन प्रक्रिया की शुरुआत करती है, और यही मांग अर्थव्यवस्था की गति को बनाये रखती है। ग्राहक की प्राथमिकताएं और शक्ति अर्थव्यवस्था को दिशा देती हैं। अगर ग्राहक उत्पादों या सेवाओं के प्रति उत्साह नहीं दिखाते हैं तो उद्योग और व्यवसाय मंदी का अनुभव कर सकते हैं, जिससे अंतत: उत्पादन में कमी और अर्थव्यवस्था में संभावित ठहराव आ सकता है। इसका मतलब है कि आर्थिक समृद्धि के लिए ग्राहक का आत्मविश्वास और क्रय शक्ति आवश्यक है।
आर्थिक परिदृश्य में विभिन्न बाजार विकल्पों की उपलब्धता बढ़ रही है, परंतु ग्राहक को प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। उनकी जरूरतें और प्राथमिकताएं अद्वितीय हैं। इसलिए, सरकार और विभिन्न व्यवसाय अपने ग्राहक अनुभव और संतुष्टि पर ध्यान केंद्रित करते हुए रणनीतियां तैयार करते हैं। इस संदर्भ में ग्राहक की संप्रभुता का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। ग्राहकों के पास अब ज्ञान और विकल्प दोनों हैं और वे इनका उपयोग संतोषजनक अनुभव सुनिश्चित करने के लिए करते हैं। उनके लिए अपने अधिकारों और विकल्पों के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल उनकी संप्रभुता मजबूत होती है, बल्कि अर्थव्यवस्था भी सशक्त होती है।
अंतत: हम कह सकते हैं कि ग्राहक अर्थव्यवस्था के विकास और सुधार के लिए जरूरी कुंजी हैं। उनकी संतुष्टि और भरोसा दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। किसी भी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्राहक की सक्रिय भागीदारी एक अनिवार्य शर्त है। लेकिन, वर्तमान में वैश्विक आर्थिक गतिविधियां ग्राहक की अनदेखी करते हुए संचालित की जा रही हैं। पारदर्शिता का पूर्ण अभाव है। यही कारण है कि दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्था इस समय संकट में हैं। सरकार, उत्पादक, कॉरपोरेट और व्यापारी ग्राहकों को अंधेरे में रखकर न केवल उनका शोषण कर रहे हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था के पोषक तत्वों को भी नष्ट कर रहे हैं। वे भूल जाते हैं कि जैसे ही ग्राहक का बाजार से भरोसा डगमगाता है, वैसे ही मंदी की काली छाया बाजार को अपनी चपेट में लेने लगती है। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था के सभी घटक प्रभावित होने लगते हैं और वे ग्राहकों को बाजार की ओर आकर्षित करने के लिए अप्राकृतिक तरीकों का सहारा लेते हैं।
पश्चिमी दुनिया में ग्राहकों की प्रकृति, व्यवहार और विशेषताओं के कारण बाजार मंदी से उबर जाते हैं, लेकिन इसकी कीमत ग्राहकों को चुकानी पड़ती है, जो लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जाते हैं। इसके विपरीत हमारे देश में ग्राहक, भारतीय ग्राहक आंदोलनों और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से प्रभावित होकर अपनी आवश्यकताओं को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सरकार विभिन्न वित्तीय संस्थानों के माध्यमों से ग्राहकों को अपनी जरूरत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आसान पूंजी और ऋण उपलब्ध कराने के बाद भी स्थानीय ग्राहक अपनी जरूरतें बढ़ाने में बहुत कम रुचि दिखाते हैं, क्योंकि वे अपने कर्ज का बोझ नहीं बढ़ाना चाहते। भारतीय बाजार में ग्राहक मांग बढ़ाने के कृत्रिम तरीकों से दूर रहते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि बाजार की समृद्धि पूरी तरह से ग्राहक के व्यवहार और आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।
इसके बावजूद वर्तमान में सरकार, उत्पादक और व्यापारी ग्राहक की अनदेखी कर रहे हैं। हालांकि, ग्राहक आंदोलनों के प्रचार-प्रसार और ग्राहक कार्यकतार्ओं की सतर्कता के कारण, ग्राहक सहायता के नाम पर कुछ कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम ग्राहक की समस्या को हल करने के बजाय उसे और जटिल बनाते नजर आते हैं। वे ग्राहक की समस्याओं को सुनते नहीं हैं, बल्कि ग्राहक को अपनी समस्याओं को अपने तैयार किए गए ढांचे में बांधने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे समस्या-समाधान की आड़ में उनका ध्यान भटक जाता है। इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य उत्पादकों के हितों की सेवा करना है, जिसके कारण अपनी समस्याओं का समाधान चाहने वाले अधिकांश ग्राहक निराशा में सिर पकड़कर बैठ जाते हैं।
उत्पादक वस्तुओं का निर्माण करते हैं और सेवा प्रदाता ग्राहक को सेवाएं प्रदान करते हैं। ग्राहक को इन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। फिर इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव क्यों है? उत्पादकों और सेवा प्रदाताओं के मुनाफे पर ग्राहकों को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, इस मुनाफे की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। आजकल ग्राहकों का शोषण करने के लिए नई-नई मार्केटिंग तकनीक अपनायी जा रही है। यह शोषण बंद होना चाहिए। ग्राहक आंदोलन वस्तुओं को सस्ता बनाने के बारे में नहीं है, यह उचित मूल्य पर उचित वस्तु की वकालत करता है। जब कोई ग्राहक किसी उत्पाद के लिए निमार्ता द्वारा मांगी गयी पूरी कीमत चुकाता है, तो उसे ऐसा उत्पाद मिलना चाहिए जो निमार्ता द्वारा वादा किए गए गुणों को पूरा करता हो। वे उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता क्यों करें? ग्राहक उत्पाद के लिए चुकायी गयी कीमत का पूरा मूल्य चाहता है, थोड़ा भी कम नहीं। यही परिस्थितियां हैं जो बाजार में टकराव का माहौल बनाती हैं।
नीतिगत विषय तो यह है कि ग्राहक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु होने तथा आर्थिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण संप्रभुता होना चाहिए। ये गतिविधियां पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि पारदर्शी तरीके से संचालित होनी चाहिए। इन आर्थिक गतिविधियों में ग्राहक को शामिल होना चाहिए। आर्थिक गतिविधियां त्रिकोणीय (सरकार, उत्पादक और व्यापारी) नहीं होनी चाहिए। वे चतुर्भुज (सरकार, उत्पादक, व्यापारी और ग्राहक) होनी चाहिए। अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से और स्थायी रूप से विकसित करने के लिए यह एक आवश्यक शर्त है। इसके अभाव में सरकार, उत्पादक और ग्राहक के बीच टकराव जारी रहेगा, जो देश और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक नहीं है। यह अलग बात है कि आज ग्राहक आंदोलन इतना संगठित या मजबूत नहीं है कि वह सीधे आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर उन्हें पंगु बना सके। हालांकि, ग्राहकों को संगठित करने के लिए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रयास सफल हो रहे हैं। वर्तमान समय की आवश्यकता है कि ग्राहकों को आर्थिक व्यवस्था के नीति निर्धारण में शामिल करना और उन्हें उनका उचित स्थान देना, प्राथमिकता होना चाहिए और आर्थिक ढांचे के सभी घटकों को साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। (लेखक, अखिल भारतीय संगठन ग्राहक पंचायत के केंद्रीय संगठन मंत्री हैं।)
एबीएन बिजनेस डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त गिरावट देखी गयी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1176.46 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 78,041.59 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 364.2 अंक लुढ़ककर 23,587.50 के स्तर पर बंद हुआ।
इस गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। 19 दिसंबर को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.49 लाख करोड़ रुपये था, जो 20 दिसंबर को घटकर 4.40 लाख करोड़ रह गया। इस तरह निवेशकों को एक ही दिन में 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
निफ्टी में ट्रेंट, टेक महिंद्रा, एमएंडएम, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि डॉ रेड्डीज लैब्स, नेस्ले इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक में बढ़त रही। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। इसमें रियल्टी इंडेक्स में 4 प्रतिशत की गिरावट, आटो, आईटी, कैपिटल गुड्स, मेटल, टेलीकॉम, पीएसयू बैंक में 2-2 प्रतिशत की गिरावट रही।
बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2-2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी। निफ्टी आईटी सबसे अधिक 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ सबसे अधिक पिछड़ गया। इसके अलावा, एक्सेंचर की पहली तिमाही की मजबूत आय भी धारणा को बढ़ाने में विफल रही।
बाजार में आज की गिरावट का कारण एफआईआई की बिकवाली में तेज वृद्धि है। लगातार पांचवें सत्र में गिरावट देखी गयी। पिछले पांच दिनों के नुकसान में निवेशकों को 18 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है, क्योंकि शुक्रवार 13 दिसंबर को बीएसई-सूचीबद्ध फर्मों का कुल बाजार पूंजीकरण 459 लाख करोड़ था।
एनएसई पर सभी प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में 20 दिसंबर को गिरावट दर्ज की गयी। निफ्टी रियल्टी में 4 प्रतिशत की गिरावट आयी, जबकि पीएसयू बैंक और आईटी सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आयी। निफ्टी मेटल, मीडिया, आॅटो और निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गयी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में आज यानी बुधवार (18 दिसंबर) को गिरावट दिनभर गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 502 अंक गिरकर 80,182 के स्तर जबकि निफ्टी में भी 137 अंक की गिरावट रही, ये 24,198 के स्तर पर बंद हुआ।
कोराबर के दौरान सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा गिरा और ये 80,071 के स्तर लेवल पर पहुंचा गया। वहीं, निफ्टी में भी करीब 178 अंक की गिरावट देखी गयी, ये 24,157 के स्तर पर था। बुधवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 में गिरावट और 9 में तेजी रही। निफ्टी के 50 शेयरों में से 31 में गिरावट और 19 में तेजी रही।
एशियाई बाजार में जापान के निक्केई में 0.21% की गिरावट जबकि कोरिया के कोस्पी में 0.95% की तेजी है। चीन का शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स 0.52% की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। एनएसई के डेटा के अनुसार, 17 दिसंबर को विदेशी निवेशकों की नेट सेल 6,409.86 करोड़ रुपये रही।
इस दौरान घरेलू निवेशकों ने 2,706.48 करोड़ के शेयर्स खरीदे। 17 दिसंबर को अमेरिका का डाओ जोंस 0.61% गिरकर 43,449 पर बंद हुआ। एस एंड पी 500 0.39% की गिरावट के साथ 6,050 और नैस्डैक 0.32% नीचे 20,109 के स्तर पर बंद हुआ।
कल यानी मंगलवार (16 दिसंबर) को सेंसेक्स 1,064 अंक की गिरावट के साथ 80,684 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 332 अंक की गिरावट रही, ये 24,336 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई मिडकैप 311 अंक की गिरावट के साथ 47,816 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में गिरावट और 1 में तेजी रही।
निफ्टी के 50 शेयरों में से 49 में गिरावट रही, इसके केवल एक शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट रही। निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा 1.88% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी मेटल, बैंक, आॅटो, फार्मा में भी करीब 2% की गिरावट रही।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी फेड के ब्याज दर निर्णय से पहले निवेशकों के सतर्क रूख के बीच व्यापक बिकवाली से मंगलवार को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ 1,064.12 अंक या 1.30 प्रतिशत टूटकर 80,684.45 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,136.37 अंक या 1.39 प्रतिशत गिरकर 80,612.20 अंक पर आ गया। एनएसई निफ्टी 332.25 अंक या 1.35 प्रतिशत गिरकर 24,336 पर आ गया।
रुपये की तुलना में अमेरिकी डॉलर की कीमत लगातार बढ़ रही है। डॉलर इंडेक्स 106.77 पर स्थिर है, लेकिन इस साल इसमें 5% की तेजी आ चुकी है। मजबूत डॉलर भारतीय शेयर मार्केट के लिए विदेशी निवेशकों की रुचि को कम करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उभरते बाजारों में निवेश को कम आकर्षक बनाता है।
नवंबर में चीन की खपत उम्मीद से कहीं ज्यादा कम रही है। खुदरा बिक्री में सिर्फ 3% की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर के 4.8% की वृद्धि से काफी कम है। वहीं दूसरी ओर औद्योगिक उत्पादन में साल-दर-साल 5.4% की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर के अनुरूप है।
यह मंदी वैश्विक कमोडिटी मांग को प्रभावित कर सकती है। इससे भारत में मेटल, एनर्जी और आटो सेक्टर के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। आज के कारोबार में निफ्टी मेटल और आटो सेक्टर में बड़ी गिरावट आयी।
भारत का व्यापारिक व्यापार घाटा नवंबर में बढ़कर 37.84 बिलियन डॉलर के अब तक के हाई लेवल पर पहुंच गया है। यह अक्टूबर में 27.1 बिलियन डॉलर था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश का आयात बिल बढ़ गया और निर्यात में गिरावट आयी।
व्यापारिक घाटा बढ़ने से रुपये पर दबाव पड़ेगा जिससे यह डॉलर के मुकाबले 85 डॉलर पर पहुंच जायेगा। इससे आईटी और फार्मा जैसे निर्यातकों को रुपये में गिरावट से लाभ होगा लेकिन आयातकों के लिए आयात लागत में वृद्धि से उनके शेयर की कीमतों पर असर पड़ेगा।
फेड रिजर्व की बैठक को लेकर दुनिया के दूसरे बाजार भी मंगलवार को सहम गये। जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों के एमएससीआई के व्यापक सूचकांक में 0.3% की गिरावट आयी। जापान के निक्केई में 0.15% की गिरावट आयी, जबकि वायदा कारोबार ने यूरोपीय शेयर बाजारों के लिए सुस्त शुरुआत का संकेत दिया।
यूरोस्टॉक्स 50 वायदा कारोबार में 0.16% की गिरावट आयी। वहीं जर्मन डीएएक्स वायदा कारोबार में 0.06% की गिरावट आयी। एफटीएसई वायदा कारोबार में 0.24% की कमजोरी आयी।
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