एबीएन बिजनेस डेस्क। टैक्स आडिट और कॉस्ट अकाउंटेंट्स किसी भी क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारना है तो यह अति आवश्यक है कि वहां प्रतिस्पर्धा बढ़ायी जाये। सेवा या वस्तु प्रदान करने वाली संस्थाओं की संख्या बढ़ेगी तो वे उपभोक्ता को खुश करने के लिए अपनी सेवाओं में सुधार करेगी। हम यह भी जानते हैं कि भारत में सरकार की आय का एक बहुत बड़ा स्रोत आय कर या इनकम टैक्स है।
सरकार को आय कर से जितनी ज्यादा आय प्राप्त होगी उतना भारत सरकार आम आदमी को देने वाली स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा और जन कल्याण सेवाओं या सुविधाओं में अधिक खर्च कर पायेगी। साथ ही आय बढ़ने से सरकार आम आदमी से मिलने वाली करों की दरों में कमी भी कर पायेगी जिस से आम आदमी को राहत मिलगी।
इसी उद्देश्य से भारत के आय कर प्रावधानों में टैक्स आडिट या कर अंकेक्षण की व्यवस्था है। अगर किसी कर दाता की वार्षिक आय 1 करोड़ या 10 करोड़ (जैसी स्थिति हो) से ज्यादा है तो उसे अपना टैक्स आडिट करवाना है। यह अनिवार्य है। वर्तमान में टैक्स आडिट सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स कर सकते हैं। हाल के वर्षों में यह पाया गया है कि सरकार के प्रयासों से निरन्तर आय कर दाताओं में वृद्धि हो रही है पर उस हिसाब से आडिटर की संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है जिसके कारण अनेक केसों में टैक्स आडिट मात्र एक वार्षिक रिचुअल बन कर रह गई है।
इसकी गुणवत्ता में सुधार न होने के कारण सरकार की आय में भी विशेष वृद्धि नहीं हो रही है। इसी कारण अब बेहद यह आवश्यक हो गया है कि टैक्स आडिटर्स की संख्या में न सिर्फ वृद्धि की जाए बल्कि अन्य प्रोफेशन, जैसे कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट, को भी इसमें आने का अवसर दिया जाये जिस से कर और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके।
भारत में दी इंस्टीट्यूट आफ कॉस्ट अकाउंटेंट आफ इंडिया की स्थापना संसद के एक विशेष अधिनियम से हुई थी और इसके सदस्य कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट कहलाते हैं। वे भी अपने कोर्स वही सारे आय कर के नियम पढ़ते हैं जो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पढ़ते हैं। पर भारत सरकार ने आय कर अधिनियम में इन्हें सिर्फ इन्वेंटरी वैल्युएशन के कार्य तक सीमित रखा है।
अब जबकि भारत सरकार आय कर नियमों में अमूल चूल परिवर्तन लाना चाहती है और इसी कारण संसद के वर्तमान बजट सत्र में नये कानून की रूपरेखा सरकार ने पेश की है जिसे संसद की विशेष समिति को विचार हेतु भेजा गया है, में सरकार टैक्स आडिट में सुधार ला सकती है।
समिति और सरकार को इस नए प्रस्तावित कानून में कॉस्ट अकाउंटेंट्स को टैक्स आडिट करने वाले अकाउंटेंट्स की श्रेणी में शामिल करना चाहिए; इस से न सिर्फ आडिट की गुणवत्ता में सुधार आएगा बल्कि सरकार की आय भी बढ़ेगी। आज जब सरकार हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता लाना चाहती है तो उसे टैक्स आडिट में ऐसा आम जन हित में लाना ही चाहिए। (लेखक कॉस्ट अकाउंटेंट आडिट विशेषज्ञ हैं।)
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ का सफर अब दिल्ली से लंदन जाने से भी ज्यादा महंगा हो गया है। जहां दिल्ली से लंदन की उड़ानें प्रयागराज से 30 फीसदी तक सस्ती हैं। वहीं, प्रयागराज तक जाने के लोगों को काफी महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। पहले एयरलाइंस, घरेलू मार्गों पर यात्रियों को किफायती दरों में फ्लाइट टिकट उपलब्ध कराती थीं। लेकिन अब महाकुंभ के चलते टिकट की कीमतों में काफी उछाल देखने को मिला है।
इससे कम बजट वाले व मध्यम वर्ग के श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। दिल्ली से प्रयागराज मार्ग पर सामान्य दिनों में फ्लाइट की कीमत चार से पांच हजार रुपये हुआ करती थी। वहीं, मौजूदा समय में यह बढ़कर 13 से 80 हजार तक पहुंच गई है। सामान्य दिनों की तुलना से टिकट की कीमतों में तीन गुना वृद्धि देखने को मिली है। महाकुंभ के महंगे सफर की मार सबसे ज्यादा भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान में देखने को मिल रही है।
भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान की कीमत भुवनेश्वर से बैंकॉक तक की उड़ान की कीमत से चार गुना अधिक है। भुवनेश्वर से प्रयागराज की उड़ान की कीमत 39,508 है, जबकि भुवनेश्वर से बैंकॉक की उड़ान की कीमत 13,538 से शुरू है। वहीं, सामान्य दिनों में इस मार्ग के उड़ानों की कीमत तीन से चार हजार तक से शुरू हो जाती है। महांकुभ के कारण इसमें 15 से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
महाकुंभ के चलते आरक्षित ट्रेनों में भी काफी भीड़ है। लोग महाकुंभ में पहुंचने के लिए ज्यादा कीमत देकर तत्काल टिकट कराकर पहुंच रहे हैं। ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन टिकट करने वाले यात्रियों को भी मुश्किल से सीट मिल पा रही है। इसके साथ ही ट्रेनों में काफी दिनों तक वेटिंग टिकट ही मिल रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में सोने की कीमतें लगातार नयी ऊंचाइयों को छू रही हैं। स्पॉट मार्केट में सोना 86,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में यह 85,000 रुपये से ऊपर ट्रेड कर रहा है। बढ़ती कीमतों के बीच, भारत में सोने का भंडार और इसके आर्थिक प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर रखा गया सोना देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाये, तो भारत एक बार फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है।
भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और परंपरागत रूप से भी बेहद अहम रहा है। भारतीय परिवारों के पास मौजूद 24,000-25,000 टन सोना दुनिया के कई देशों के कुल स्वर्ण भंडार से ज्यादा है।
वर्तमान में, यह सोना भारतीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाया है। यदि इसे गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम या अन्य सरकारी उपायों के तहत बैंकों में जमा किया जाये, तो यह देश की वित्तीय ताकत को जबरदस्त रूप से बढ़ा सकता है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड इंपोर्टर है, लेकिन अगर घरों में रखा सोना सिस्टम में लाया जाये, तो यह एक्सपोर्टर बनने की दिशा में बढ़ सकता है।
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के तहत अगर लोग अपने घरों में रखा सोना बैंकों में जमा करें, तो इससे देश की विदेशी मुद्रा पर निर्भरता घट सकती है।
अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सकती है, जिससे भारत की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली में शुक्रवार को सोना 86,070 रुपये प्रति 10 ग्राम के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 99.5% शुद्धता वाला सोना 85,670 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। चांदी की कीमतें भी 96,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई हैं।
टीम एबीएन, रांची। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में 2025 का बजट पेश किया। इसमें कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं, लेकिन झारखंड के लिए केंद्र सरकार ने किसी खास योजना की घोषणा नहीं की है। हालांकि, बजट में कई ऐसी योजनाएं हैं जिनसे राज्य के लोगों को फायदा होगा।
दरअसल, निर्मला सीतारमण ने अपने बजट में महिला, एससी-एसटी उद्यमियों के लिए भी बड़ी घोषणाएं की हैं। इन सभी योजनाओं का लाभ झारखंड के लोगों को भी मिलेगा। पहली योजना है- सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र और पोषण 2.0 योजना- सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र और पोषण 2.0 योजना का लाभ झारखंड को मिलेगा। झारखंड में 38 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं।
झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में कुपोषण की समस्या भी गंभीर है। राज्य में 3.90 लाख बच्चे ऐसे हैं, जो कुपोषण के शिकार हैं। उनका वजन कम है। केंद्र सरकार की इस योजना का लाभ इन बच्चों को मिलेगा और झारखंड को कुपोषण से मुक्ति दिलाने में मददगार साबित होगा। बजट से पहले पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड से शिशु शक्ति खाद्य पैकेट के वितरण की शुरूआत की गयी थी।
केंद्र सरकार 5 लाख महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए 10 हजार करोड़ का अतिरिक्त फंड देगी। उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए वित्त मंत्री ने इसकी घोषणा की है। झारखंड में बड़ी संख्या में आदिवासी और अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं। झारखंड में महिला उद्यमियों की भी अच्छी-खासी संख्या है। इन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार अगले 5 साल में 5 लाख लोगों को 2 करोड़ रुपये तक का टर्म लोन उपलब्ध करवायेगी। इसका उद्देश्य उद्यमशीलता और उद्यमियों का मैनेजमेंट स्किल बढ़ाना है।
निर्मला सीतारमण ने अपने बजट में किसान क्रेडिट कार्ड पर कृषि लोन की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख करने की घोषणा की है। झारखंड के 21.50 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से इतने ही किसान जुड़े हुए हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2025 में देश के सभी सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने की घोषणा की है। इस योजना का लाभ झारखंड के कम से कम 35,773 सरकारी स्कूलों को मिलेगा। ये स्कूल ब्रॉडबैंड से जुड़ जाएंगे। भारत नेट परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सरकारी माध्यमिक स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जायेगी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में, जीएसटी के तहत पूंजीगत सामान को केंद्रीय माल और सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा 2(19) में परिभाषित किया गया है। इस परिभाषा के अनुसार, पूंजीगत सामान से तात्पर्य उन वस्तुओं से है जिनका उपयोग या उपयोग के लिए इरादा व्यवसाय के दौरान या आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है और जिनका मूल्य करदाता के वित्तीय खातों में पूंजीगत संपत्ति के रूप में दर्ज किया जाता है। ये सामान इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पात्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे व्यवसायों को उनके पूंजीगत व्यय के आधार पर आईटीसी का दावा करने की अनुमति देते हैं।
व्यवसाय, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ढांचे के तहत व्यवसाय के दौरान या उसे आगे बढ़ाने में उपयोग किए जाने वाले पूंजीगत सामानों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकते हैं। पूंजीगत वस्तुओं पर आईटीसी के लिए पात्रता इस प्रकार है :
एबीएन बिजनेस डेस्क। आमतौर पर सप्ताहांत पर बंद रहने वाले भारतीय शेयर बाजार इस बार शनिवार 1 फरवरी को खुले रहेंगे, क्योंकि इसी दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आम बजट 2025 पेश करेंगी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने घोषणा की है कि बजट को ध्यान में रखते हुए इस दिन पूरे समय ट्रेडिंग होगी।
एक्सचेंजों के अनुसार, इसे स्पेशल ट्रेडिंग डे के रूप में मनाया जायेगा। यह पहला मौका नहीं है जब बजट के चलते शेयर बाजार को शनिवार के दिन खोला जा रहा है। इससे पहले 1 फरवरी 2020 और 28 फरवरी 2015 को भी बजट के चलते शेयर बाजार शनिवार के दिन खुले रहे थे।
शनिवार 1 फरवरी को बाकी दिनों की तरह ही शेयर बाजार सामान्य समय से खुलेगा। इक्विटी मार्केट सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक खुले रहेंगे, जबकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में ट्रेडिंग का समय शाम 5:00 बजे तक रहेगा। हालांकि सेटलमेंट हॉलिडे के कारण टी-0 सेशन बंद रहेगा। ट्रेडिंग सेशन से जुड़ी डिटेल्स को आप नीचे देख सकते हैं :
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में आज भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 500 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी50 23,000 के नीचे चला गया।
सुबह 9:19 बजे सेंसेक्स 75,626.79 पर था, जो 564 अंकों या 0.74% की गिरावट है। वहीं, निफ्टी50 22,926.80 पर कारोबार कर रहा था, जो 165 अंकों या 0.72% की गिरावट में है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली: विदेशी निवेशकों द्वारा भारी मात्रा में शेयरों की बिक्री बाजार पर दबाव बना रही है।
दिसंबर तिमाही के कमजोर कॉपोर्रेट नतीजे: कंपनियों के तिमाही नतीजों ने बाजार की उम्मीदों को निराश किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया।
अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, क्योंकि 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जायेगा। इस दिन बाजार में विशेष ट्रेडिंग सत्र होगा, जिसमें बजट की घोषणाओं पर तत्काल प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमूल ने अपने दूध प्रोडक्ट की कीमतें घटाने का ऐलान कर दिया है। 26 जनवरी से पहले लोगों के लिए यह बड़ी राहत है। कंपनी ने यह कीमत अपने तीन अलग-अलग दूध प्रोडक्ट पर कम किया हैं। इसमें अमूल गोल्ड, अमूल टी स्पेशल और अमूल फ्रेश शामिल हैं।
इनकी कीमतों में 1 रुपये की कटौती की गई है। पहले अमूल गोल्ड 66 रुपये का था। अब यह 65 रुपये में मिलेगा। वहीं अमूल टी स्पेशल की कीमत 63 से 62 रुपये कर दिया गया है। वहीं अमूल ताजा पहले 54 रुपये में मिलता था। अब वह 53 रुपये में मिलेगा।
यह कटौती केवल 1 रुपये प्रति लीटर पैक पर लागू होगी। गुजरात कोआपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने इस बात की घोषणा की है। गणतंत्र दिवस से पहले लोगों के लिए यह बड़ी राहत वाली खबर है।
कीमतों में कटौती के बाद कंपनी ने इसके पीछे का कोई कारण नहीं दिया है। अमूल पहली बार दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद इस प्रकार की कटौती की है। अब ऐसा माना जा रहा है कि मदर डेयरी भी अपनी कीमतों में कटौती कर सकता है।
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