केंद्र सरकार ने एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट क्षेत्रों के लिए 6,238 करोड़ रुपये के व्यय से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एसी और एलईडी के लिये पीएलआई योजना की मंजूरी से घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी। केंद्र की ओर से लाई गई इस उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का मकसद देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
एबीएन डेस्क। टाटा ग्रुप की एक और कंपनी का मार्केट कैप आज 1 लाख करोड़ रुपए को पार कर गई। टाटा स्टील की एंट्री आज पहली बार 1 ट्रिलियन m-cap वाली कंपनियों की Elite लिस्ट में हो गई। टाटा स्टील टाटा ग्रुप की चौथी कंपनी है जिसका m-cap 1 लाख करोड़ को पार कर गया। हालांकि, बाजार बंद होने तक टाटा स्टील इस आंकड़े को बरकरार नहीं रख पाई और फिर से इसके m-cap में 1 लाख करोड़ के नीचे फिसल गया। टाटा स्टील के शेयर आज बीएसई पर तेजी के साथ 875 रुपए प्रति शेयर के भाव पर खुला और कुछ ही देर में अपने ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया। कंपनी के शेयर आज 882.30 रुपए के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। यह कंपनी के स्टॉक्स का New 52- Week High है। इसी के साथ कंपनी का M-Cap 1 लाख करोड़ रुपए हो गया लेकिन कंपनी इस मोमेंटम को बरकरार नहीं रख पाई और मुनाफा-वसूली के कारण इसके शेयर आज बीएसई पर 0.52% की गिरावट के साथ 862.85 रुपए पर बंद हुए। वहीं NSE पर इसके स्टॉक्स में 0.71% की गिरावट आई और ये 861.55 रुपए पर बंद हुए। इससे कंपनी की बाजार पूंजी 1 लाख करोड़ से फिसलकर 99,285 करोड़ रुपए पर आ गई। टाटा स्टाल के शेयर पिछले एक साल में 220% चढ़े हैं। एक साल पहले इसके शेयर की कीमत केवल 276 रुपए थी जो अब बढ़कर 882 रुपए तक पहुंच गई है। मेटल स्टॉक्स में तेजी शेयर बाजार में आज मेटल स्टॉक्स में तेजी देखी गई। टाटा स्टील के स्टॉक्स जहां गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं JSW Steel, सेल (SAIL) और JSPL के शेयर में 1.5% से 2.3% तक की तेजी आई। Axis Securities ने अपने नोट में कहा कि डॉलर में कमजोरी और चीन में मेटल और माइनिंग सेक्टर में तेजी आने के साथ मिड टर्म में मेटल स्टॉक्स में अपट्रेंड जारी रहने की उम्मीद के कारण आज मेटल स्टॉक्स में तेजी आई। वहीं, Edelweiss Securities ने अपने नोट में कहा कि चीन से स्टील आयात में कटौती होने की संभावना है। इस वजह से घरेलू स्टील कंपनियों के स्टील की कीमतों में इजाफा होगा। इस वजह से Edelweiss Securities ने टाटा स्टाल का टार्गेट प्राइस 770 रुपए, SAIL का टार्गेट प्राइस 85 रुपए और JSPL का टार्गेट प्राइस 378 रुपए दिया है।
एबीएन डेस्क। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी एलजी ने अपने घाटे वाले मोबाइल फोन कारोबार से बाहर निकलने की घोषणा की है। कंपनी ने सोमवार को कहा कि अब वह इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जे, रोबोटिक्स, आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) और अन्य उत्पादों व सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी ने एक बयान में कहा कि एलजी के निदेशक मंडल ने रणनीति में बदलाव की मंजूरी दे दी है। कंपनी जुलाई के अंत तक मोबाइल फोन कारोबार से पूरी तरह बाहर निकल जाएगी। किसी समय एलजी तीसरी सबसे बड़ी मोबाइल फोन कंपनी थी। लेकिन बाद में चीन की कंपनियों और अन्य प्रतिद्वंद्वियों से उसने अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा दी। काउंटरपॉइंट टेक्नोलॉजी मार्केट रिसर्च के अनुसार एलजी उत्तरी अमेरिका में अब भी तीसरे नंबर पर है। उसकी बाजार हिस्सेदारी 13 प्रतिशत है। 2020 की तीसरी तिमाही में उत्तरी अमेरिका में एप्पल 39 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले और सैमसंग 30 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर थी। एलजी ने इससे पहले कहा था कि वह अपनी रणनीति का आकलन कर रही है। 2020 की तीसरी तिमाही में उसकी बिक्री एक साल पहले की तुलना में पांच प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन प्रीमियम उत्पादों की बिक्री सुस्त रहने से उसका मुनाफा घटा है।
विश्व बैंक का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज्यादा सुधार दिखा है। इसने पिछले एक साल साल में महामारी और लॉकडाउन से उबरकर आश्चर्यजनक रूप से वापसी की है। हालांकि, खतरा अभी टला नहीं है। विश्व बैंक ने रिपोर्ट में कहा, 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.5 फीसदी से 12.5 फीसदी के बीच रह सकती है। हालांकि, यह इस पर निर्भर करेगी कि टीकाकरण अभियान कैसे आगे बढ़ रहा है, कौन से नए प्रतिबंध लगाए जाते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी जल्दी ठीक हो जाती है। दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के सामने आने से पहले ही अर्थव्यवस्था सुस्त थी। भारत में हर किसी को टीका लगाना सबसे बड़ी चुनौती विश्व बैंक के दक्षिण एशिया के मुख्य अर्थशास्त्री हंस टिमर ने कहा, यह आश्चर्यजनक है कि भारत एक साल पहले के मुकाबले कितना आगे आ गया है। एक साल पहले मंदी कितनी गहरी थी। लेकिन, अब कारोबारी गतिविधियां खोल दी गई हैं। टीकाकरण शुरू हो गया है। हालांकि, भारत में हर किसी को टीका लगाना भी सबसे बड़ी चुनौती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों में भारी तेजी है. भारत में बड़े पैमाने पर सरसों तेल का इस्तेमाल होता है. लेकिन इस बार सरसों की नई आवक के बावजूद इसके दाम घटे नहीं है घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम काफी बढ़ गए हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल खाद्य तेलों कीमतों में अब तक 80 फीसदी तक कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है. दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों में भारी तेजी है. भारत में बड़े पैमाने पर सरसों तेल का इस्तेमाल होता है. लेकिन इस बार सरसों की नई आवक के बावजूद इसके दाम घटे नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ज्यादा होने की वजह से आयातक ऊंचे भाव पर खाद्य तेलों का बड़े पैमाने पर आयात करने से बच रहे हैं. फरवरी में खाद्य तेलों का आयात 27 फीसदी घटकर 7.96 लाख टन रह गया. जबकि चालू तेल वर्ष की नवंबर-फरवरी के दौरान आयात में 3.7 फीसदी गिरावट दर्ज की गई. पाम तेल की कीमतों में उछाल से देश में बढ़े खाद्य तेल की कीमतें भारत में पाम तेल का बड़े पैमाने पर आयात होता है . ज्यादातर ढाबों, रेस्तराओं और पैकेटबंद फूड, स्नैक्स में पाम तेल का इस्तेमाल होता है. पिछले एक साल के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में आरबीडी पामोलीन का भाव 590 डॉलर से बढ़कर 1,100 डॉलर, क्रूड पाम तेल का भाव 580 डॉलर से बढ़कर 1120 डॉलर प्रति टन हो चुका है. घरेलू बाजार में आयातित आरबीडी पामोलीन 70 फीसदी बढ़कर 120-125 रुपये और क्रूड पाम तेल 80 फीसदी बढ़कर 115 रुपये से 117 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. इससे देश में खाद्य तेलों के दाम काफी बढ़ गए हैं. देश में खाद्य तेलों की ब्लेडिंग में भी पाम आयल का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि देश में खाद्य तेल के दाम बढ़ रहे हैं. सरसों तेल के दाम में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी पिछले एक एक साल में घरेलू खाद्य तेलों में सरसों तेल के दाम 85-90 रुपये से बढ़कर 120-125 रुपये हो गए हैं. रिफाइंड सोया तेल 80-85 रुपये से बढ़कर 125-130 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. इस दौरान मूंगफली तेल के दाम करीब 30 फीसदी बढ़कर 155-160 रुपये हो गए हैं. वहीं सूरजमुखी तेल के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 185-190 रुपये प्रति किलो हो चुके हैं.अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह मुख्य पाम उत्पादक देश मलेशिया व इंडोनेशिया में फसल कमजोर होने के साथ सट्टेबाजी है.
हाल ही में केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों का न्यूनतम किराया 5 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था। अब अगले महीने से हवाई यात्रियों को एक और झटका लगने वाला है। अप्रैल 2021 से विमान यात्रियों से अधिक विमानन सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। एक अप्रैल से घरेलू यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क 200 रुपए होगा। मौजूदा समय में यह 160 रुपए है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बात करें, तो इनके लिए शुल्क 5.2 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो जाएगा। नागर विमानन महानिदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क में 114.38 रुपए का इजाफा किया है। ये दरें एक अप्रैल 2021 से जारी होने वाली टिकटों पर लागू होंगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों का न्यूनतम किराया 5 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था। अब अगले महीने से हवाई यात्रियों को एक और झटका लगने वाला है। अप्रैल 2021 से विमान यात्रियों से अधिक विमानन सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। एक अप्रैल से घरेलू यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क 200 रुपए होगा। मौजूदा समय में यह 160 रुपए है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बात करें, तो इनके लिए शुल्क 5.2 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो जाएगा। नागर विमानन महानिदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क में 114.38 रुपए का इजाफा किया है। ये दरें एक अप्रैल 2021 से जारी होने वाली टिकटों पर लागू होंगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों का न्यूनतम किराया 5 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था। अब अगले महीने से हवाई यात्रियों को एक और झटका लगने वाला है। अप्रैल 2021 से विमान यात्रियों से अधिक विमानन सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। एक अप्रैल से घरेलू यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क 200 रुपए होगा। मौजूदा समय में यह 160 रुपए है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बात करें, तो इनके लिए शुल्क 5.2 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो जाएगा। नागर विमानन महानिदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क में 114.38 रुपए का इजाफा किया है। ये दरें एक अप्रैल 2021 से जारी होने वाली टिकटों पर लागू होंगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों का न्यूनतम किराया 5 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था। अब अगले महीने से हवाई यात्रियों को एक और झटका लगने वाला है। अप्रैल 2021 से विमान यात्रियों से अधिक विमानन सुरक्षा शुल्क वसूला जाएगा। एक अप्रैल से घरेलू यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क 200 रुपए होगा। मौजूदा समय में यह 160 रुपए है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बात करें, तो इनके लिए शुल्क 5.2 डॉलर से बढ़कर 12 डॉलर हो जाएगा। नागर विमानन महानिदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए विमानन सुरक्षा शुल्क में 114.38 रुपए का इजाफा किया है। ये दरें एक अप्रैल 2021 से जारी होने वाली टिकटों पर लागू होंगी।
गोल्ड लोन को आमतौर पर कोलैटेरल लोन माना जाता है। बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से गोल्ड लोन आसानी से मिल सकता है और यह पर्सनल लोन के मुकाबले सस्ता होता है। कम जोखिम के कारण बैंक, एनबीएफसी या अन्य वित्तीय संस्थानों से सोना गिरवी रखकर आसानी से लोन लिया जा सकता है। टेबल के जरिए जानते हैं कि कौन बैंक किस ब्याज दर गोल्ड लोन दे रहा है... बैंक ब्याज दर • पंजाब एंड सिंध बैंक 7.00% • बैंक ऑफ इंडिया 7.35% • एसबीआई 7.50% • केनरा बैंक 7.65% • कर्नाटक बैंक 8.42% • इंडियन बैंक 8.50% • यूको बैंक 8.50% • फेडरल बैंक 8.50% • पीएनबी 8.75% • यूनियन बैंक 8.85% (सोर्स: बैंकबाजार डॉट कॉम, आंकड़े: 23 मार्च, 2021 तक)
एबीएन डेस्क। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमण्यम ने कहा है कि 2021-22 का 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य काफी हद तक हासिल होने योग्य है। सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि एलआईसी के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से ही सरकार को एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। सीईए ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को लक्ष्य में रखने का जो लक्ष्य दिया गया है, उससे उतार-चढ़ाव तथा मुद्रास्फीति के स्तर को कम करने में मदद मिली है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को 31 मार्च, 2021 तक वार्षिक मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी ऊपर या नीचे) पर रखने का लक्ष्य दिया गया है। जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुब्रमण्यम ने शनिवार को कहा कि 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य वास्तव में 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के 2.10 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का शेष हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसमें भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का निजीकरण और एलआईसी का आईपीओ महत्वपूर्ण होंगे। अनुमानों के अनुसार बीपीसीएल के निजीकरण से 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं। एलआईसी के आईपीओ से ही एक लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। सरकार बीपीसीएल में अपनी समूची 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसे आज की तारीख तक देश का सबसे बड़ा निजीकरण माना जा रहा है। जहां तक एलआईसी की सूचीबद्धता का सवाल है, सरकार ने इसी सप्ताह संसद में पारित वित्त विधेयक 2021 के जरिये एलआई अधिनियिम में संशोधन कर लिया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, विनिवेश के ये आंकड़े काफी हद तक हासिल होने योग्य हैं। इनमें से कई पर काम शुरू हो गया है। अगले वित्त वर्ष में इन्हें पूरा कर लिया जाएगा। सुब्रमण्यम ने निजीकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पिछले महीने कहा था कि सरकार का काम व्यापार करना नहीं है और उनका प्रशासन चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को प्रतिबद्ध है। सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत को अपनी वृद्धि की क्षमता को पूरा करने के लिए और बैंकों की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की आबादी भारत की एक-तिहाई है लेकिन वहां 25,000 से 30,000 बैंक हैं। भारत की दीर्घावधि की वृद्धि पर उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 10 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ने की उम्मीद है। 2022-23 में यह घटकर 6.5 से 7 फीसदी रह सकती है। उसके बाद अर्थव्यवस्था 7.5 से आठ फीसदी की दर से बढ़ेगी।
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