जमशेदपुर। इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन के तत्वाधान जमशेदपुर के एक होटल में टाटा ग्रुप की कंपनियों के नेताओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य सुरक्षा और श्रम कानूनों में होने वाले बदलाव के विषय में रखा गया है। इस कार्यशाला का आयोजन इंडियन स्टील मेटल माइंस एंड इंजीनियरिंग इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव श्री रघुनाथ पांडेय के द्वारा किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती अत्रैई सरकार (वीपी- एच आर एम ,टाटा स्टील), विशिष्ट अतिथि के रूप में उप श्रमायुक्त (कोल्हान) राजेश प्रसाद एवं सम्मानित अतिथि के रुप में इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन के क्षेत्रीय सचिव श्री अपूर्वा कैवार उपस्थित थी। मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए श्रीमती अत्रैयी सरकार ने कहा कि टाटा स्टील अपनी कंपनी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कृत्य संकल्प है तथा हर स्तर पर महिलाओं को दृढ़ करने का काम कर रही है उन्होंने यूनियन लीडर से भी कहा कि जिस यूनियन में महिलाओं की भागीदारी होती है वह यूनियन सदैव अग्रसर होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो यूनियन नेता अपने कनिष्ठ नेताओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं वह वाकई नेता नहीं होते है। उन्होंने यूनियन को शरीर का दिल कहा जो कि मुख्य हिस्सा होता है उन्होंने कहा कि आने वाले 10 सालों में तेजी से उद्योगों में बदलाव आएंगे जिसमें मशीनीकरण होगा यूनियन नेता अभी से श्रमिकों को कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कराए। उन्होंने श्रमिकों के साथ ही साथ पर्यावरण की सुरक्षा करने की भी सलाह दी। उप श्रम आयुक्त श्री राजेश प्रसाद ने उपस्थित श्रमिक नेताओं को असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिकों को संगठित करने पर बल दिया और उन्हें यूनियन से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने हाल में ही केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ई श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रजिस्टर्ड कराने की भी सलाह दी। इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन की क्षेत्रीय सचिव अपूर्वा कैवार ने श्रमिकों को संगठित करने पर बल दिया तथा इंडस्ट्री अल से हर सहयोग देने का वादा किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए वक्ता श्री बीएस सारंगी ने केंद्र सरकार द्वारा नए लेबर कानून के आने से मजदूरों तथा यूनियनों के होने वाले फायदे एवं नुकसान के विषय में विस्तृत जानकारी दी। श्री नीरज सिन्हा चीफ सेफ्टी टाटा स्टील ने कहा कि अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर बहुत सारे होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। श्री आशुतोष भट्टाचार्य ने इंडस्ट्री अल ग्लोबल यूनियन के विश्व सर पर उपस्थिति एवं किए जाने वाले कार्य के विषय में विस्तृत जानकारी दी। टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष एस आलम ने आने वाले समय में यूनियन की चुनौतियों के विषय में विस्तृत रूप से बताया। कार्यशाला को टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष श्री संजीव चौधरी डिप्टी प्रेसिडेंट श्री शैलेश एक्सीडेंट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन रघुनाथ पांडेय ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन देविका सिंह ने किया आज के कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे।
एबीएन डेस्क। टाटा संस के अंकेक्षक ने टाटा स्टील की सहायक टाटा स्टील यूरोप के चालू रहने को लेकर अनिश्चितता पर कंपनी के शेयरधारकों का ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, टाटा स्टील यूरोप के चालू रहने की क्षमता को लेकर पर्याप्त खुलासा न किए जाने पर हम एकीकृत वित्तीय विवरण पर आपका ध्यान खींचना चाहते हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण टाटा स्टील यूरोप को अपने दायित्व के निर्वहन के लिए समूह कंपनी का सहयोग लेना होगा क्योंकि इसकी तारीख नजदीक आ रही है। टाटा स्टील यूरोप को टीएस ग्लोबल प्रोक्योरमेंट कंपनी पीटीई लिमिटेड अंडरटेकिंग से पत्र मिला है कि उन्हें कार्यशील पूंजी व अन्य नकद सहायता उपलब्ध कराया जाए, जो टाटा स्टील यूरोप की अगले 12 महीने की अपनी जरूरत के अनुमान से ज्यादा है। इस पत्र में कहा गया है कि इस पर कोई निश्चितता नहीं है कि टाटा स्टील यूरोप को वास्तव में यह रकम उपलब्ध कराई जाएगी। अंकेक्षक ने कहा है, ये बातें व एकीकृत वित्तीय विवरण में लिखे अन्य मामलों के साथ अनिश्चितता की स्थिति टाटा स्टील यूरोप के चालू बने रहने को लेकर संदेह पैदा करते हैं। एकीकृत वित्तीय विवरण में समायोजन को शामिल नहीं किया गया है, जिसका नतीजा यह होगा कि टाटा स्टील यूरोप चालू स्थिति में बने रहने सक्षम नहीं होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड का परिचालन राजस्व वित्त वर्ष 21 में 62 फीसदी घटकर 9,460.24 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 24,770.46 करोड़ रुपये रहा था। परिचालन राजस्व में सहायक कंपनियों से मिला लाभांश शामिल होता है और यह वित्त वर्ष 20 में काफी ज्यादा था, जिसकी वजह लाभ वाली सहायक फर्म टीसीएस से विशेष लाभांश थी। वित्त वर्ष 21 की अन्य आय 10,138 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 125.93 करोड़ रुपये रही थी। इसकी मुख्य वजह टीसीएस की तरफ से हुई पुनर्खरीद के कारण मिला लाभ है। कंपनी की सालाना रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। टाटा स्टील यूरोप का नुकसान पिछले वित्त वर्ष में 79.3 करोड़ पाउंड रहा, जिसकी मुख्य वजह कोविड के कारण मांग में आई गिरावट है। टाटा स्टील ने हालांकि यूरोपीय परिचालन को वित्तीय सहारा दिया, लेकिन उसकी अंकेक्षक पीडबल्यूसी ने चेतावनी दी है कि इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि टाटा स्टील यूरोप की फंड की जरूरत पूरी की जाएगी। स्टील कीमतों में तेजी से हालांकि उसकी किस्मत में सुधार के संकेत मिले हैं। सालाना रिपोर्ट हालांकि चेयरमैन व अन्य निदेशकों के वेतन का जिक्र नहीं करता। कार्यकारी निदेशक सौरभ अग्रवाल का वेतन 35 फीसदी बढ़कर 21.5 करोड़ रुपये रहा। उनके कार्यकाल के विस्तार पर 14 सितंबर को होने वाली आगामी एजीएम में चर्चा होगी। वित्त वर्ष 21 में कर पूर्व लाभ 7,503.01 करोड़ रुपये था, जो एक साल पहले 2,679.75 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी सकल कर्ज घटाकर 27,615 करोड़ रुपये पर लाने में कामयाब रही, वहीं सकल उधारी वित्त वर्ष 21 के लिए 30,334.30 करोड़ रुपये रही।
जमशेदपुर। वर्तमान में देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी टाटा स्टील वैश्विक स्तर पर पांच शीर्ष स्टील कंपनियों में शामिल है। द टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड के नाम से यह कंपनी 26 अगस्त 1907 को इंग्लैंड में पंजीकृत कराया गया, हालांकि ब्रिटिश निवेशकों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। 26 अगस्त 1907 को यह कंपनी भारत में 2,31,75,000 रुपये की मूल पूंजी के साथ पंजीकृत हुई। पूंजी जुटाने का नोटिस जारी किया गया, जिसे जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और तीन सप्ताह के भीतर पूरी राशि जुटा ली गई। तब वर्तमान में झारखंड के साकची गांव में 1908 में वर्क्स का निर्माण शुरू हुआ जबकि पहली बार स्टील का उत्पादन 16 फरवरी, 1912 को शुरू हुआ। वर्तमान में टाटा स्टील लिमिटेड ग्रुप का सालाना टर्न ओवर 1,57,184 करोड़ रुपये है जबकि इसकी सालाना इस्पात उत्पादन क्षमता 33 मिलियन टन है। आइए जानते हैं कि स्वदेशी कंपनी की रोचक विकास यात्रा के बारे में : 1867 में जमशेदजी नसेरवानजी टाटा ने प्रसिद्ध ब्रिटिश निबंधकार थॉमस कार्लाइल के एक व्याख्यान में हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने कहा था, जिस राष्ट्र को लोहे पर नियंत्रण प्राप्त होता है, वह जल्द ही सोने पर भी नियंत्रण प्राप्त कर लेता है। कार्लाइल को शायद ही पता होगा कि उनका यह व्याख्यान भारत को एक आर्थिक पुनरुत्थान की पथप्रदर्शक यात्रा की ओर ले जाएगा और इस प्रकार, उसी क्षण स्टील प्लांट के निर्माण को लेकर जमशेदजी के विचारों को सकारात्मक गतिशक्ति मिला। 1899 में मेजर महोन द्वारा भारत में इस्पात उद्योग को बढ़ावा देने की सिफारिश की एक रिपोर्ट को स्वीकृति मिली, जिसके आधार पर भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने तत्काल कदम उठाते हुए खनिज रियायत नीति को उदार बनाया, जिसने भारत को इसकी पहली एकीत इस्पात कंपनी देने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जमशेदजी को एक सुनहरा अवसर प्रदान किया। 1902 में पिट्सबर्ग, यूएसए में जमशेदजी की मुलाकात जूलियन कैनेडी, सहलिन ऐंड कंपनी लिमिटेड के प्रमुख जूलियन कैनेडी से हुई। जमशेदजी ने कैनेडी को भारत में एक इस्पात संयंत्र स्थापित करने की अपनी इच्छा के बारे में बताया। कैनेडी ने जमशेदजी को स्थानीय परिस्थितियों, कच्चे माल की उपलब्धता और भारत में बाजार की स्थितियों की गहन वैज्ञानिक जांच करने की सलाह दी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए न्यूयर्क के एक प्रख्यात कंसल्टिंग इंजीनियर चार्ल्स पेज पेरिन की भी सिफारिश की। 24 फरवरी, 1904 में टाटा को भारत के फर्स्ट ग्रेड जियोलजिस्ट प्रमथ नाथ बोस का एक पत्र मिला, जिसमें मयूरभंज राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले लौह और झरिया में कोयले की उपलब्धता के बारे में बताया गया था। 1905 में चार्ल्स पेज पेरिन और उनके सहयोगी सी एम वेल्ड ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इस्पात संयंत्र के निर्माण का खाका तैयार किया गया था। सितंबर 1905 में, मयूरभंज के महाराजा ने टाटा को पूर्वेक्षण (प्रस्पेक्टिंग) लाइसेंस प्रदान किया। 1906 में भारत सरकार ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से एक विशेष अवधि के लिए इस्पात खरीदने का वादा कर टाटा की मदद करने के अपने इरादे जाहिर की। साथ ही, सरकार ने अन्य सहायता की भी घोषणा की, जिसकी आवश्यकता आगे चल कर कंपनी को अपना उत्पादन शुरू करने के लिए होने वाली थी।
एबीएन डेस्क। वॉलमार्ट इंक के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी डग मैकमिलन का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे रोमांचक खुदरा बाजारों में से है। उन्होंने कहा कि देश के खुदरा बाजार की अपनी विशिष्टता है और यह 2025 तक बढ़कर 1,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। कन्वर्जेंस@वॉलमार्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मैकमिलन ने कहा कि भारतीय बाजार की विविधता को देखते हुए कंपनी को स्थानीय स्तर पर सोचना होगा और स्थानीय स्तर पर ही क्रियान्वयन करना होगा। उन्होंने कहा, भारत इतना विविधता वाला बाजार है, कई मायनों में यह एक देश नहीं है। ऐसे में हमें स्थानीय सोचना होगा और स्थानीय का क्रियान्वयन करना होगा, जिसके अपने नियम होते हैं। ऐसे में हमें इन नियमों के अनुरूप चलना होगा। मैकमिलन ने कहा कि अभी वॉलमार्ट को बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे में कंपनी अलग तरीके से परिचालन कर रही है। वॉलमार्ट के शीर्ष कार्यकारी ने इस बात का जिक्र किया कि अमेरिका और चीन के साथ भारत उसके तीन प्रमुख बाजारों में से है। कन्वर्जेंस@वॉलमार्ट कार्यक्रम वॉलमार्ट ग्लोबल टेक इंडिया का प्रमुख कार्यक्रम है। मैकमिलन ने कहा कि वॉलमार्ट की ई-कॉमर्स इकाई फ्लिपकार्ट और डिजिल भुगतान कंपनी फोनपे दोनों ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इन कंपनियों के आंकड़े उत्साहजनक हैं। उन्होंने कहा कि फ्लिपकार्ट के मंच पर अब तीन लाख से अधिक मार्केटप्लेस विक्रेता हैं। वहीं फोनपे के प्रयोगकर्ताओं की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो चुकी है। फ्लिपकार्ट भारतीय बाजार में अमेरिकी की ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमेजन की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है।
एबीएन डेस्क। देश में बढ़ते कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए इन दिनों लोगों ने करंसी नोटों से दूरी बना ली है। इसकी जगह भुगतान के लिए लोग डिजिटल माध्यमों का उपयोग पहले के मुकाबले ज्यादा करते हुए नजर आ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्केट में करंसी नोटों की उपलब्धता की दर पिछले साल 13 अगस्त के मुकाबले कम होकर 10 फीसदी रह गई है। जबकि पिछले वर्ष की इस अवधि में वित्तीय प्रणाली में करंसी नोटो के प्रसार की दर 22.4 फीसदी थी। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई की रिपोर्ट में कोविड-19 की दूसरी लहर बाद से पैदा हुए हालात के बाद बैंकिंग प्रणाली में जमा रकम बढ़ रही है। दूसरी लहर के दौरान बैंकों में रकम जमा होने की दर शून्य से भी नीचे आ गई थी और वित्तीय तंत्र में करंसी का प्रसार बढ़ गया था। बैंकों में जमा रकम बढ़ने से पता चल रहा है कि पहले की तुलना में अब आर्थिक अनिश्चितता कम हो गई है और लोगों का मनोबल पहले से बढ़ गया है। हालांकि लोन देने की रफ्तार सुस्त रही तो बैंकों के लिए जमा रकम का अंबार संभालना मुश्किल हो सकता है। बाजार में मौजूद ज्यादातर करंसी औपचारिक माध्यमों से आ रही है। लोग अब डिजिटल माध्यम से भुगतान को अधिक तरजीह दे रहे हैं इसलिए वे बैंकों से नकदी निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पहले के मुकाबले अब नकदी पर लोगों की निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है, खासकर खुदरा उपभोक्ता और बड़ी संख्या में लोग डिजिटल माध्यम के जरिए अधिक भुगतान कर रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम से भुगतान को नोटबंदी के मुकाबले कोरोना महामारी से ज्यादा बढ़ावा मिला है। डिजिटल भुगतान अब थमने वाला नहीं है और इसकी लोकप्रियता बढ़ती ही जाएगी। कोविड महामारी के कारण डिजिटल भुगतान अपनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में डिजिटल भुगतान को जोर पकड़ने में कम से कम 5 से 10 वर्षों का और समय लग जाता। महामारी की वजह से यह एक वर्ष में ही संभव हो पाया है।
एबीएन डेस्क। शुक्रवार को गोदरेज इंडस्ट्रीज के चेयरमैन आदि गोदरेज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब उनकी जगह भाई नादिर गोदरेज के हाथ में कंपनी की कमान होगी। लेकिन आदि गोदरेज के इस्तीफे के बाद तत्काल उनकी विदाई होने नहीं जा रही है। वह 1 अक्टूबर 2021 तक अपने पद पर बने रहेंगे और उसके बाद कंपनी के चेयरमैन का कार्यभार अपने भाई नादिर गोदरेज को सौंप देंगे। नादिर गोदरेज वर्तमान में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) हैं। अब आदि गोदरेज के इस्तीफे के बाद उनके पास इसके साथ चेयरमैन पद की जिम्मेदारी भी होगी। आदि गोदरेज के पद छोड़ने के मौके पर कहा, ‘ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 4 दशक तक गोदरेज इंडस्ट्रीज की सेवा का मौका मिला। इस बीच हमारी कंपनी ने बेहतर परिणाम दिए हैं और कंपनी को इतना बदला है। मैं अपने बोर्ड के सदस्यों का भी शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने समय-समय पर मेरा साथ दिया और अच्छी सलाह दी. मैं अपनी कंपनी से जुड़े हर व्यक्ति का शुक्रगुजार हूं। कंपनी के नए चेयरमैन नादिर गोदरेज ने कहा, ‘Godrej Industries में मैं अपनी टीम की ओर से हमारे चेयरमैन का उनके दीर्घकालिक दृष्टिकोण, मूल्यों और असाधारण नेतृत्व के लिए धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने इस कंपनी को आकार देने का काम किया।’
बेरमो। चालू वित्तीय वर्ष में 20 जुलाई तक सीसीएल के कोयला उत्पादन में 51% प्रतिशत ग्रोथ हुआ। इस अवधि में कुल कोयला उत्पादन 15 .760 मिलियन हुआ, जो गत वित्तीय वर्ष की तुलना में 5.3मिलियन टन ज्यादा है। इस अवधि में कोयला डिस्पैच 22.142 मिलियन टन हुआ, जो गत वित्तीय वर्ष की तुलना में 8 मिलियन टन ज्यादा है। इस प्रकार ग्रोथ 55%का है। सीसीएल के ढोरी क्षेत्र में 20 जुलाई तक 9 लाख टन कोयला उत्पादन हुआ। जो गत वर्ष की तुलना में दो लाख 29 हजार टन ज्यादा है। इस प्रकार ग्रोथ 34% का हुआ है। डिस्पैच 10.77 लाख धन मीटर हुआ। जो गत वर्ष की तुलना में 4.19 लाख टन ज्यादा है। डिस्पैच में 64% का ग्रोथ हुआ।बीएन्डके क्षेत्र 20 जुलाई तक 17.39 लाख टन कोयला उत्पादन हुआ ।जो गत वर्ष की तुलना में 8.44 लाख टनज्यादा है ।कुल डिस्पैच 23 लाख 7 0 हजार टन हुआ।जो गत वर्ष की तुलना में 10 .2 1 लाख टन ज्यादा है। इस प्रकार ग्रोथ 76 प्रतिशत का हुआ। बीएंडके क्षेत्र में इस अवधि में ओबीआर 25.2 लाख घन मीटर हुआ ।जो गत वर्ष की तुलना में 7.60 लाख धन मीटर ज्यादा है। इस प्रकार ओबी आर में 44% का ग्रोथ हुआ। 20 जुलाई तक कथारा क्षेत्र में कोयला उत्पादन 3.92लाख टन हुआ ।जो गत वर्ष से 2.5 6 लाख टन कम है। इस अवधि ओबीआर 9.2 लाख धन मीटर हुआ जो गत वर्ष की तुलना में 10.51 लाख धन मीटर कम है। डिस्पैच6.51लाख टन हुआ, जो गत वर्ष की तुलना में 64 हजार टन ज्यादा है।ढोरी क्षेत्र के महाप्रबंधक एम के अग्रवाल, बीऐंडके क्षेत्र के महाप्रबंधक एम के राव और कथा क्षेत्र के महाप्रबंधक एम के पंजाबी ने विश्वास व्यक्त किया है कि क्षेत्र निर्धारित लक्ष्य से अधिक कोयला उत्पादन करेगा। सीसीएल के सीएमडी पी एम प्रसाद के नेतृत्व में कार्य संस्कृति में सुधार हुआ है। टीमवर्क हो रहा है। कोरोना गाइड लाईन का पालन करते हुए तथा सुरक्षित कोयला उत्पादन बढ़ाने का काम हो रहा है। जिसमें श्रमिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों , विस्थापितों और बुद्धिजीवियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
नई दिल्ली। बीते दिनों लगातार बढ़त के बाद सोमवार को सोना-चांदी फिर सस्ते हुए। MCX पर 4:30 बजे शाम को सोना 203 रुपये कम होकर प्रति 10 ग्राम 47,720 रुपये पर आ गया। सफारा बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार सोना 92 रुपये सस्ता होकर 47,771 पर आ गया।चांदी MCX पर शाम 4:30 बजे 504 रुपये सस्ती होकर 68,793रुपये प्रति किलो पर आ गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार, सराफा बाजार में भी चांदी में मामूली गिरावट आई। 148 रुपये सस्ती होकर 67,641 रुपये प्रति किलो पर आ गई। IIFL सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी) अनुज गुप्ता कहते हैं कि अभी सोने में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में सोने की चमक बढ़ सकती है। यह साल के आखिर तक फिर 55 हजार तक जा सकता है। इसीलिए निवेशकों को इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोमवार को सोने की चमक फीकी पड़ी है। यह 1,799 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। शुक्रवार को ये 1,810 डॉलर पर आ गया था। आनेवाले दिनों में यह फिर बढ़ सकता है। पिछले साल जब कोरोना अपने चरम पर था तक सोने का भाव अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। अगस्त 2020 में 56,200 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। उस समय कोरोना महामारी के कारण निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ था। इस समय फिर एक बार ऐसा ही माहौल बनने लेगा है।
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