एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के खौफ से दुनिया भर के बाजारों में कोहराम मचा हुआ है। शेयर बाजारों की शुरुआत शुक्रवार को काफी कमजोर हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 705.93 गिरकर 58,089.16 पर आया और वहीं निफ्टी 230.40 अंक गिरकर 17,305.85 पर आया। बता दें कि दुनिया के कई हिस्सों में कोरोना का फिर से बढ़ता प्रकोप है जिसका असर शेयर बाज़ार में देखने को मिला, इसलिए दवा कंपनियों के शेयर ग्रीन जोन में रहे, जबकि ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री के शेयरों में बड़ी गिरावट जारी है। शुरुआती कारोबार के दौरान Sensex में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। बता दें कि सुबह 10 बजकर 01 मिनट पर सेंसेक्स 1039.29 अंक यानी 1.77 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।तो वहीं, सुबह 10.42 बजे तक सेंसेक्स 1328.69 अंक गिरकर 57,468.48 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं, निफ्टी 395.80 अंक लुढ़ककर 17,140.45 पर पहुंच गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों के बीच देश भर में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की धूम है। वहीं इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अगले दो साल में इलेक्ट्रिक और पेट्रोल गाड़ियों की कीमत एक हो जाएगी। गडकरी ने कहा कि जल्द ही इस क्षेत्र में क्रांति आने वाली है। गडकरी ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स और FY21 एजीएम के सालाना सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दो साल के अंदर, इलेक्ट्रिक व्हीकल की लागत उस स्तर पर आ जाएगी जो उनके पेट्रोल वेरिएंट के बराबर होगी। गडकरी ने आगे कहा कि हम 2023 तक प्रमुख राजमार्गों पर 600 ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित कर रहे हैं। गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी केवल 5% है और लिथियम-आयन बैटरी की लागत भी घट रही है। गडकरी का मानना है कि सस्ती प्रति किलोमीटर लागत के कारण भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की काफी बिक्री होगी। गडकरी ने कहा कि पेट्रोल से चलने वाली कार की कीमत प्रति किलोमीटर 10 रुपए, डीजल की कीमत 7 रुपए प्रति किलोमीटर और बिजली की कीमत सिर्फ 1 रुपये प्रति किलोमीटर है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पेटीएम का शेयर 13 फीसदी टूट गया और इस तरह से दो दिन की गिरावट 37 फीसदी पर पहुंच गई, जो इसे किसी देसी कंपनी व अहम वैश्विक तकनीकी कंपनी का एक्सचेंजों पर सबसे खराब आगाज में से एक करार देता है। अलीबाबा की एंट फाइनैंशियल और सॉफ्टबैंक समर्थित कंपनी का बाजार मूल्यांकन अब घटकर 12 अरब डॉलर (88,185 करोड़ रुपये) रह गया जबकि आईपीओ में उसे 18.7 अरब डॉलर (1.39 लाख करोड़ रुपये) का मूल्यांकन हासिल हुआ था। आगाज पर इस शेयर के अंजाम को देखते हुए सवाल उठता है कि आखिर कंपनी और उसके निवेश बैंकर 18,300 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए कंपनी के मूल्यांकन पर पहुंचे, जो देसी बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। पेटीएम का शेयर 1,271 रुपये तक टूटने के बाद अंत में यह 1,360 रुपये पर बंद हुआ, जो इश्यू प्राइस 2,150 रुपये से काफी नीचे है। कीमत में 37 फीसदी की गिरावट ब्लैकरॉक व कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड जैसे निवेशकों को झटका देगा, जिन्होंने आईपीओ के लिए बड़े चेक पर हस्ताक्षर किए हैं। यह करीब 10 लाख खुदरा निवेशकों को भी झटका देगा, जिन्होंने करीब 2,100 करोड़ रुपये के शेयर के लिए आवेदन किया। जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, सूचीबद्धता पर सुस्ती और लगातार इस शेयर की हो रही कमजोर ट्रेडिंग देसी बाजार के लिए बड़ी अवधारणात्मक चोट है, जो मजबूत प्राथमिक बाजार पर सवार है। यह खुदरा श्रेणी से बाजार में निवेश पर असर डालेगा, जो साल के दौरान अहम किरदार रहे हैं। पेटीएम ने रविवार को अक्टूबर के प्रदर्शन के बारे में खुलासा किया। कंपनी का सकल मर्केंडाइज वैल्यू (जीएमवी) 2.31 गुना बढ़कर 83,200 करोड़ रुपये रहा। कर्ज वितरण 5 गुना से ज्यादा बढ़कर 627 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। साल दर साल के हिसाब से बढ़त हालांकि विश्लेषकों को उत्साहित नहीं कर पाया। मैक्वेरी के विश्लेषकों सुरेश गणपति और परम सुब्रमण्यन ने एक रिपोर्ट में कहा है, जहां जीएमवी सालाना आधार पर 112 प्रतिशत बढ़ी है, वहीं इस पर यूपीआई (हमारे अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में 66 प्रतिशत) का दबदबा है, जिसमें पेटीएम जीरो-एमडीआर कमाती है। हमारा मानना है कि यूपीआई योगदान वित्त वर्ष 2026ई तक बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसलिए हमें मजबूत जीएमवी वृद्घि से मुनाफा और नुकसान के आंकड़े ज्यादा प्रभावित होने का अनुमान नहीं है। पेटीएम ने अपने आरएचपी में पहली तिमाही के दौरान 890 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया और हमने पेटीएम के लिए वित्त वर्ष 2022ई का राजस्व अनुमान 4,500 करोड़ रुपये पर बरकरार रखा है। इसके अलावा, हम अक्टूबर 2021 के आंकड़ों में भी बदलाव नहीं करेंगे, क्योंकि वे मजबूत त्योहारी बिक्री पर आधारित थे। एमडीआर मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह ऐसा शुल्क है जो कंपनी भुगतान संबंधित ट्रांजेक्शन की प्रोसेसिंग के लिए वसूलती है। गुरुवार को पेटीएम की सूचीबद्धता से पहले, मैक्वायरी ने अंडरपरफॉर्म रेटिंग और 1200 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ इस शेयर पर कवरेज शुरू किया। मैक्वेरी के विश्लेषकों ने अपनी शुरूआती रिपोर्ट में कहा था, पेटीएम के मजबूत कैश-बर्निंग बिजनेस मॉडल को देखते हुए मुनाफे के लिए कोई स्पष्ट राह नहीं दिखने से व्यवसाय और कॉरपोरेट प्रशासन के लिए बड़े नियामकीय जोखिम पर विचार करते हुए हमारा मानना है कि कंपनी की वैल्यू 2,150 रुपये के कीमत दायरे के अपर ऐंड पर ज्यादा है। सोमवार को पेटीएम में करीब 3,700 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों में अदला-बदली हुई। सूचीबद्धता के दिन, इस शेयर में ट्रेडिंग कारोबार करीब 4,000 करोड़ रुपये था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और नीचे आ सकती हैं। भारत कच्चे तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार से 50 लाख बैरल कच्चा तेल निकालने की योजना बना रहा है। इसके लिए अमेरिका, चीन, जापान से बातचीत करनी होगी। हफ्ते-दस दिन में यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। भारत के रणनीतिक भंडार से निकाले जाने वाले कच्चे तेल को मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को बेचा जाएगा। ये दोनों सरकारी तेल शोधन इकाइयां रणनीतिक तेल भंडार से पाइपलाइन के जरिये जुड़ी हुई हैं। इस अधिकारी ने कहा कि इस बारे में औपचारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत अपने रणनीतिक भंडार से और कच्चे तेल की निकासी का भी फैसला ले सकता है। भारत ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में जारी तेजी के बीच अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर अपने आपातकालीन तेल भंडार से निकासी का मन बनाया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने का आधार तैयार होगा। भारत ने अपने पश्चिमी एवं पूर्वी दोनों तटों पर रणनीतिक तेल भंडार बनाए हुए हैं। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलूरु एवं पदुर में ये भूमिगत तेल भंडार बनाए गए हैं। इनकी सम्मिलित भंडारण क्षमता करीब 3.8 करोड़ बैरल की है। भारत ने यह कदम तेल उत्पादक देशों की तरफ से कीमतों में कमी लाने के लिए उत्पादन बढ़ाने से इनकार करने के बाद उठाने का मन बनाया है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते दुबई में कहा था कि तेल कीमतें बढ़ने का असर वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 78 डॉलर प्रति बैरल पर हैं। पिछले महीने यह 86 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गया था लेकिन यूरोप के कुछ देशों में फिर से लॉकडाउन लगने और प्रमुख उपभोक्ता देशों के मिलकर सुरक्षित तेल जारी करने की धमकियों से इसमें गिरावट आई है।
एबीएन डेस्क।. देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शुमार भारती एयरटेल ने अपने उपभोक्ताओं को बड़ा झटका देते हुए प्रीपेड प्लान्स की कीमत में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। एयरटेल ने प्रीपेड प्लान्स की दरों में तकरीबन 25 फीसदी तक बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई नई दरें आगामी 26 नवंबर 2021 से लागू होंगी। कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि एयरटेल ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि प्रति यूजर्स मोबाइल औसत राजस्व (ARPU) कम से कम 200 रुपए और अधिकतम 300 पर होना चाहिए, ताकि पूंजी पर एक उचित रिटर्न प्रदान किया जा सके, जो वित्तीय रूप से स्वस्थ व्यापार मॉडल की अनुमति देता है। कंपनी ने आगे कहा कि हम यह भी मानते हैं कि ARPU का यह स्तर नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में आवश्यक पर्याप्त निवेश को सक्षम करेगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात है कि यह एयरटेल को भारत में 5जी को रोल आउट करने के लिए काफी जगह देगा। इसलिए, पहले कदम के रूप में नवंबर के महीने के दौरान हम अपने टैरिफ को rebalance करने का कदम उठा रहे हैं और नई टैरिफ 26 नवंबर, 2021 से प्रभावी होंगी। प्रीपेड की नई दरें : सभी प्रीपेड पैक की नई टैरिफ 26 नवंबर, 2021 से www.airtel.in पर उपलब्ध होंगे। शुरुआती वायस प्लान का टैरिफ 28 दिनों की वैधता के साथ मौजूदा 79 रुपए की जगह अब 99 रुपए होगा। इसमें 50 प्रतिशत अधिक टॉकटाइम (99 रुपए), 200 एमबी डेटा और एक पैसा प्रति सेंकेंड का वॉयस टैरिफ जैसे लाभ शामिल हैं।
नई दिल्ली। आजकल ऑनलाइन शॉपिंग बड़ी तेजी से पांव पसार चुका है। जिसमें सभी लोगों की सहभागिता है। खासकर युवा वर्ग का तो कहा ही नहीं जाता। लेकिन इसके जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कुछ इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया है। ऑनलाइन गांजा बेचने के मामले में अमेजन के निदेशकों पर एफआईआर दर्ज किया गया है। दर्ज FIR के अनुसार कथित तौर पर इकॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए स्वीटनर बेचने की आड़ में गांजा बेचा जा रहा था। मध्य प्रदेश की भिंड जिले की पुलिस ने यह मामला दर्ज किया है। भिंड पुलिस ने ऑनलाइन गांजा बिक्री रैकेट का भंडाफोड़ किया था। जिसके बाद एफआईआर की यह कार्रवाई की गई। भिंड के एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि देश में एएसएसएल के तौर पर काम करने वाली ऐमजॉन इंडिया के कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 38 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं कैट ने केंद्र सरकार से तत्काल इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की थी। कैट ने अपनी मांग में कहा था कि एनसीबी को अमेजन के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि इसने विक्रेता के रूप में काम किया है और पैसे कमाए हैं। हालांकि अमेजन ने इससे पहले एक बयान में कहा था कि वह अपने प्लेटफार्म के जरिए अवैध उत्पादों की बिक्री की इजाजत नहीं देता है। वह इस मामले की जांच में सहयोग कर रहा है।
एबीएन डेस्क। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का शुक्रवार को स्वागत किया लेकिन अफसोस जताया कि सरकार कुछ किसान समूहों को कानूनों के लाभों के बारे में समझाने में असफल रही। इस फैसले की सराहना करते हुए तोमर ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की श्रद्धा और भाईचारे की भावना का भी प्रतिबिंब है। तोमर ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा राष्ट्रहित और जनभावना को हर चीज से ऊपर रखा है और यह फैसला उनके बड़े दिल को भी दर्शाता है। कृषि कानूनों को निरस्त करने के अलावा मोदी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की और साथ ही शून्य बजट आधारित कृषि को बढ़ावा देने के तरीके भी सुझाए।
एबीएन डेस्क। विश्व बैंक ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया कि प्रवासी भारतीयों ने कोरोना महामारी के बावजूद इस साल अब तक 87 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 64.64 खरब रुपये) भारत भेजे हैं। विश्व बैंक के मुताबिक, अमेरिका इसका (प्रेषित धन) सबसे बड़ा स्रोत है और कुल रकम में इसका योगदान 20 फीसदी है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत दुनिया में विदेशों से पैसे भेजे जाने के लिहाज से पहले नंबर पर है और इस राशि में 4.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि दूसरी तीमाही के दौरान कोविड-19 के मामलों और मौतों की गंभीरता को देखते हुए परोपकारी कार्य करने के लिए प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे गए धन ने एक प्रमुख भूमिका निभाई, प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे गए पैसे में ऑक्सीजन टैंक की खरीद के लिए भेजी गई राशि शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के बाद चीन, मैक्सिको, फिलीपींस और मिस्र हैं। इस राशि में 2022 तक और वृद्धि होने और इसके 89.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। विश्व बैंक ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में विदेशों से भेजी गई राशि 2021 में 7.3 प्रतिशत बढ़कर 589 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। विश्व बैंक के प्रव्रजन और विकास संक्षिप्त के अनुमानों के अनुसार, विकास की यह वापसी पहले के अनुमानों की तुलना में अधिक मजबूत है और 2020 में प्रवाह के लचीलेपन का अनुसरण करती है, जब कोविड-19 के कारण गंभीर वैश्विक मंदी के बावजूद विदेशों से पैसे भेजने में केवल 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई थी। विश्व बैंक के सोशल प्रोटेक्शन एंड जॉब्स के वैश्विक निदेशक माइकल रुतकोव्स्की ने कहा "प्रवासियों से प्रेषित धन प्रवाह ने कोविड-19 संकट के दौरान आर्थिक कठिनाइयों से पीड़ित परिवारों को मदद पहुंचाने के लिए सरकारी नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों को बहुत सहायता पहुंचाई है। वैश्विक स्तर पर महामारी से तनावपूर्ण घरेलू बजट को राहत प्रदान करने के लिए प्रेषित धन के प्रवाह को सुगम बनाना सरकारी नीतियों का एक प्रमुख घटक होना चाहिए।
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