एबीएन बिजनेस डेस्क। तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल में 1 अरब डॉलर तक का निवेश करेगी। यह निवेश इक्विटी और किफायती स्मार्टफोन, नेटवर्क और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक साझेदारी के मिश्रण के तौर पर होगा। गूगल का यह भारत में दूरसंचार क्षेत्र में दूसरा निवेश है, इससे पहले कंपनी ने रिलायंस जियो में निवेश किया था। यह निवेश गूगल के 10 अरब डॉलर के इंडिया डिजिटलीकरण कोष का हिस्सा है। निवेश के मसले पर दोनों कंपनियों में 2021 की पहली छमाही से ही बातचीत चल रही थी, जिसकी आज औपचारिक घोषणा की गई। 1 अरब डॉलर के निवेश में से भारती एयरटेल में 70 करोड़ डॉलर (करीब 5,224 करोड़ रुपये) का निवेश किया जाएगा। इसके बदले गूगल को 734 रुपये प्रति शेयर भाव पर तरजीही शेयर जारी किए जाएंगे। इस सौदे से भारती एयरटेल में गूगल की हिस्सेदारी 1.28 फीसदी होगी। सौदे का मूल्य गुरुवार को एयरटेल के शेयर भाव 715.90 रुपये से 2.5 फीसदी अधिक दाम पर किया गया है। इसके अतिरिक्त गूगल स्मार्टफोन एक्सेस, नेटवर्क और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में संभावित निवेश के लिए 30 करोड़ डॉलर का कोष अलग से रखेगी। इस निवेश से एयरटेल को अपने ग्राहकों को किफायती उपकरण की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। एयरटेल के मुख्य कार्याधिकारी गोपाल वि_ल ने कहा कि कंपनी की योजना अपना विशिष्ट स्मार्टफोन विकसित करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्मार्टफोन की उपलब्धता में सुधार के लिए ऋणदताओं, उपकरण विनिमार्ताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों सहित पारिस्थितिकी तंत्र के सभी साझेदारों के साथ काम करती रहेगी। कंपनी ग्राहकों के खरीदारी के रुझान का अनुामन लगाने के लिए सॉफ्टवेयर टूल और डेटा मॉडल का भी उपयोग कर रही है जिससे लक्षित ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। वर्तमान में एयरटेल के 19 करोड़ से अधिक 4जी ग्राहक हैं, जिनमें से करीब 8 करोड़ ग्राहक पिछले दो साल में जुड़े हैं। साझेदारी के दो अन्य क्षेत्र हैं 5जी और क्लाउड। दोनों कंपनियां साथ मिलकर 5जी और अन्य स्टैंडर्ड के लिए भारत-निर्दिष्ट नेटवर्क डोमेन भी बनाएंगी। एयरटेल पहले से ही गूगल के 5जी-रेडी इवॉल्व्ड पैकेट कोर और सॉफ्टवेयर नेटवर्क प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है। विल ने कहा कि एयरटेल हर साल 2.5 अरब डॉलर का पूंजीगत निवेश कर रही है और होम ब्रॉडबैंड, डेटा सेंटर तथा 5जी सेवाओं पर निवेश जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गूगल के निवेश से कंपनी के डिजिटल एजेंडा में व्यापक तेजी आएगी। विल ने कहा कि इससे गूगल के जियो में मौजूदा निवेश पर कोई विवाद नहीं होगा। जुलाई 2020 में गूगल ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 4.5 अरब डॉलर (33,737 करोड़ रुपये) के निवेश से 7.73 फीसदी हिस्सेदारी ली थी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को आगामी बजट में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए कर कटौती की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। सुब्बाराव ने यह भी कहा कि अनुभव से पता चलता है कि संरक्षणवादी दीवारों के साथ निर्यात को बढ़ावा देने की नीति शायद ही कभी प्रतिस्पर्धी होती है, इसलिए आयात शुल्कों को घटाने की जरूरत है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में कहा, वृद्धि को गति देना हर बजट का मकसद होता है और इस बजट का भी यह उद्देश्य होना चाहिए। लेकिन, इस बजट में अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए। सुब्बाराव ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले निम्न-आय वर्ग के लिए भारी संकट पैदा कर दिया है, जबकि दूसरी ओर उच्च-आयवर्ग न केवल अपनी आमदनी बढ़ाने में सक्षम है, बल्कि वास्तव में उनकी बचत और संपत्ति बढ़ी है। उन्होंने हाल में आई विश्व असमानता रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, इस तरह की व्यापक असमानता न केवल नैतिक रूप से गलत और राजनीतिक रूप से नुकसानदेह है, बल्कि इससे हमारी दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाएं भी प्रभावित होंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को आम बजट 2022-23 संसद में पेश करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धि को गति देना हर बजट का मकसद होता है और इस बजट का भी यह उद्देश्य होना चाहिए, लेकिन इस बार अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें रोजगार आधारित वृद्धि की जरूरत है। अगर इस बजट के लिए कोई "थीम" है, तो वह रोजगार होनी चाहिए। पूर्व गवर्नर ने कहा कि मंदी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। इसके अलावा आर्थिक गतिविधियों के श्रम प्रधान अनौपचारिक क्षेत्र से पूंजी प्रधान औपचारिक क्षेत्र की ओर केंद्रित होने से भी रोजगार का संकट पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि रोजगार पैदा करने के लिए वृद्धि जरूरी है, लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। निर्यात बढ़ाने से न सिर्फ विदेशी मुद्रा मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा सुब्बाराव ने कहा कि इस साल देश के कर संग्रह में आया उछाल अगले साल खत्म हो जाएगा, क्योंकि अनौपचारिक क्षेत्र फिर से पटरी पर आने लगेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की लगातार जरूरत को देखते हुए कर कटौती की गुंजाइश बहुत कम है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पूरी दुनिया में आईटी सर्विस सेक्टर में टाटा कंसल्टेंसी दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनकर उभरी है। ब्रांड फाइनेंस 2022 ग्लोबल 500 रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पहले स्थान पर एक्सेंचर काबिज है। टाटा कंसल्टेंसी के अलावा भारत की अन्य दिग्गज कंपनियों में से इंफोसिस समेत चार टेक कंपनियों ने इस सूची में टॉप 25 आईटी सर्विसेज ब्रांड में जगह बनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सेंचर सबसे मूल्यवान और सबसे मजबूत आईटी सेवा ब्रांड के रूप में जारी है। इसकी ब्रांड वैल्यू 36.2 अरब डॉलर है। इसके बाद वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते आईटी सेवा ब्रांड के रूप में उभरते हुए तीसरे स्थान पर है, जो पिछले साल से 52 प्रतिशत मूल्य वृद्धि और 2020 से 80 प्रतिशत बढ़कर 12.8 अरब डॉलर मूल्य की हो गई है। टीसीएस की बात करें तो यह कारोबारी प्रदर्शन और सफल साझेदारियों के चलते 16.8 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी बनकर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में टीसीएस की ब्रांड वैल्यू 1.844 अरब डॉलर (12.5 फीसदी) बढ़कर 16.786 अरब डॉलर हो गई है। गौरतलब है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज टाटा ग्रुप की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में एक है जो आईटी सेवाओं से जुड़े काम देखती है। इस उपलब्धि पर टीसीएस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कंपनी ने अपना निवेश ब्रांड और कर्मचारियों में किया यह शानदार रैंकिंग इसकी का नतीजा है। दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाले 10 बड़े आईटी सर्विसेज ब्रांड को देखें तो इनमें सभी 6 बड़े भारतीय ब्रांड शामिल हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में डिजिटलीकरण का अमह रोल देखने को मिला है खासतौर से कोरोना महामारी के दौर में। यही वचह है कि पिछले दो साल में आईटी सेवाओं ने सबसे तेजी से रफ्तार पकड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आईटी कंपनियों को सबसे तेज वृद्धि 2020 से 2022 के बीच मिली है जो कि 51 प्रतिशत के आसपास है। हालांकि इसी दौर में अमेरिकी कंपनियों की ग्रोथ देखें तो भारतीय कंपनियां उनसे 7 फीसदी पीछे रही हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण उद्योग में डीजल के उपयोग पर चिंता जताते हुए मंगलवार को कहा कि क्षेत्र को जीवाश्म ईंधन की जगह जैव-एथनॉल, एलएनजी और सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह न केवल खतरनाक उत्सर्जन को कम करेगा बल्कि भारी आयात बिल में भी कटौती करेगा। उद्योग मंडल सीआईआई के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि फिलहाल भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इस पर सालाना आठ लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह अर्थव्यवस्था पर काफी बड़ा बोझ है। उन्होंने कहा, फिलहाल, डीजल का बड़े पैमाने पर निर्माण उद्योग में उपयोग हो रहा है। दुर्भाग्य से, यह ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिये भी काफी जिम्मेदार है। मंत्री ने कहा, हमें डीजल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करना होगा। खतरनाक उत्सर्जन को कम करने के साथ भारी आयात बिल में कमी लाने के लिए यह जरूरी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि अगर हम डीजल के स्थान पर जैव ईंधन का उपयोग नहीं करते हैं, तो अगले पांच साल में देश का कच्चे तेल का आयात बिल 25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। गडकरी ने यह भी कहा कि वह अपने चीनी कारखानों में बायोडीजल का उपयोग कर रहे हैं, और ट्रैक्टरों को सीएनजी पर चलाने के लिये उसमें जरूरी बदलाव किये गये हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख के बीच घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली से बीएसई सेंसेक्स सोमवार को 1,546 अंक का गोता लगाकर 58,000 अंक के नीचे आ गया। कारोबारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी बाजार धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा। बाजार में शुरूआत गिरावट के साथ हुई और दोपहर के कारोबार में बिकवाली और तेज हो गयी। लगभग सभी खंडवार सूचकांक नुकसान में रहे। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,545.67 अंक यानी 2.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,491.51 पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 468.05 अंक यानी 2.66 प्रतिशत का गोता लगाकार 17,149.10 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर नुकसान में रहे। बजाज फाइनेंस का शेयर करीब 6 प्रतिशत टूटकर सर्वाधिक नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील, विप्रो, टेक महिंद्रा, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक में भी प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के इक्विटी शोध प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा, एशिया के अन्य बाजारों में मिले-जुले रुख के बीच घरेलू बाजार गिरावट के साथ खुले। इसका कारण निवेशकों की अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर नजर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। दोपहर के कारोबार में बिकवाली में तेजी आयी क्योंकि दोनों सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गये थे। उन्होंने कहा, बिकवाली इतनी तेज थी कि दोनों मानक सूचकांक करीब 3-3 प्रतिशत नीचे आ गये। धारणा इतनी कमजोर थी कि कारोबारियों ने 14 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार के 2.22 अरब डॉलर बढ़कर 634.96 अरब डॉलर पर पहुंचने के रिजर्व बैंक के आंकड़ों को भी नजरअंदाज किया। एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग, दक्षिण कोरिया कॉस्पी नुकसान में, जबकि जापान का निक्की और चीन का शंघाई कंपोजिट लाभ में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख रहा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.32 प्रतिशत बढ़कर 88.17 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 19 पैसे टूटकर 74.62 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर आ गया।
एबीएन बिजनेस डेस्क। मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलांयस जियो इस साल IPO ला सकती है। इसका वैल्यूएशन 7.40 लाख करोड़ यानी 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इसकी लिस्टिंग के बाद यह ग्रुप में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरी सबसे बड़ी कंपनी होगी। CLSA ने उम्मीद जताई : विदेशी ब्रोकरेज हाउस CLSA ने इस तरह की उम्मीद जताई है कि इस साल में यह कंपनी लिस्ट हो सकती है। जियो में 2020 में 13 निवेशकों को करीबन 33% हिस्सेदारी बेची जा चुकी है। इसमें से 10% के करीब फेसबुक को और 8% के करीब गूगल को हिस्सेदारी बेची गई थी। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके पास अक्टूबर 2021 में 42 करोड़ से ज्यादा ग्राहक थे। 2020 में जियो की बिकी थी हिस्सेदारी : रिलायंस ने साल 2020 में जियो में हिस्सेदारी बेचकर 1.52 लाख करोड़ रुपए हासिल किया था। गूगल और फेसबुक ने मिलकर 77,311 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इन्हें इसके बदले 18% हिस्सेदारी मिली थी। रिटेल में इसने 10% से ज्यादा हिस्सेदारी बेचकर 47 हजार करोड़ रुपए जुटाए थे। CLSA ने कहा कि हमारा मानना है कि रिलायंस जियो IPO अलग से लिस्ट हो सकती है। इसका वैल्यूएशन 99 अरब डॉलर का हो सकता है। 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो सकते हैं : जियो के जनवरी अंत तक 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक होने की उम्मीद है जबकि दूसरी सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल के पास 32 करोड़ ग्राहक हैं। हालांकि प्रति ग्राहक कमाई में एयरटेल आगे है। यह हर ग्राहक से 157 रुपए कमाती है जबकि जियो 144 रुपए कमाती है। वैसे कीमतें बढ़ने से सभी कंपनियों की प्रति ग्राहक कमाई बढ़ने की उम्मीद है। तीनों कंपनियों ने बढ़ाया दाम : हाल में एयरटेल सहित तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने कीमतो में जमकर बढ़ोत्तरी की है। पहले वोडाफोन ने कीमत बढ़ाई, फिर एयरटेल ने और अंत में जियो ने बढ़ाई। 2021 में जियो के पास करीबन 39% बाजार हिस्सेदारी थी। रिलायंस जियो ने जियो फोन नेक्स्ट को लॉन्च किया था। एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ : रिलायंस ने साल 2020 में जब जियो में हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाई तो उस समय इसका एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ रुपए था। जबकि मार्केट वैल्यूएशन 4.91 लाख करोड़ रुपए था। उस आधार पर जियो के एक शेयर की कीमत 885 रुपए के करीब आ रही थी। जियो में इस समय प्रमोटर की हिस्सेदारी करीबन 67% है। कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है : इस आधार पर अगर देखा जाए तो कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर्स के पास 50% हिस्सेदारी है। ऐसे में अगर जियो में कंपनी 17% हिस्सा बेचती है तो उसके पास 50% हिस्सा रहेगा। इस 17% के लिए जियो को 85 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि बाजार की स्थितियों और आगे चलकर ज्यादा वैल्यूएशन पर बेचने की रणनीति के तहत कंपनी कम हिस्सा भी में बेच सकती है।
नयी दिल्ली। इटली की सुपर लग्जरी वाहन विनिर्माता आॅटोमोबिली लैम्बॉर्गिनी की 2021 के दौरान भारत में बिक्री 86 प्रतिशत बढ़कर 69 इकाई पर पहुंच गई। कंपनी का यह अब तक का बिक्री का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। लैम्बॉर्गिनी ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2020 में उसने भारत में 37 वाहनों की बिक्री की थी। कंपनी की कारों की कीमत 3.16 करोड़ रुपये से शुरू होती है। कंपनी ने इससे पहले वर्ष 2019 में अपनी सबसे अधिक 52 इकाइयों की बिक्री की थी। वैश्विक स्तर पर भी कंपनी ने पिछले वर्ष दुनियाभर में 8,405 वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी। कंपनी ने कहा कि लक्षित और निगरानी वाली विकास रणनीति के कारण 2020 के मुकाबले उसकी बिक्री में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
एबीएन डेस्क। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस रिटेल ने घरेलू रोबोटिक्स कंपनी एडवर्ब में 13.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 983 करोड़ रुपए) में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। एडवर्ब टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और सीईओ संगीत कुमार ने बताया कि कंपनी स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखेगी और रिलायंस से मिली धनराशि का इस्तेमाल विदेश में कारोबार के विस्तार तथा नोएडा में एक बड़ा रोबोट विनिर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए किया जाएगा। कंपनी के पास पहले ही नोएडा में एक विनिर्माण संयंत्र है, जहां हर साल लगभग 10,000 रोबोट बनाए जाते हैं। कुमार ने कहा, इस निवेश के साथ रिलायंस के पास एडवर्ब में लगभग 54 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वे कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक बन गए हैं। रिलायंस पहले ही हमारे सम्मानित ग्राहकों में से एक था, जिसके साथ मिलकर हमने उनके किराना व्यवसाय जियो मार्ट के लिए उच्च क्षमता वाले स्वचालित गोदामों का निर्माण किया था। सहूलियत और भरोसा, जैसे कारक पहले से मौजूद थे, जिसके कारण यह जुड़ाव हुआ। उन्होंने कहा कि रिलायंस रिटेल के साथ रणनीतिक साझेदारी से हमें नई ऊर्जा पहलों के जरिए 5जी, बैटरी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, हम एक लाभदायक कंपनी हैं। हम इस धनराशि का इस्तेमाल विदेश में विस्तार करने और विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना में करेंगे। कुमार ने कहा, इस समय हमारी आय का 80 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है लेकिन अगले 4-5 वर्षों में भारत और विदेश व्यापार के बीच 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। हमारी आय में सॉफ्टवेयर की कुल हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है, जिसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान है। एडवर्ब की स्थापना 2016 में हुई थी और उसे चालू वित्त वर्ष के दौरान 400 करोड़ रुपए की आय की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
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