एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्र ने खुदरा प्याज की कीमतों में किसी भी तेजी पर लगाम लगाने को लेकर कदम उठाया है। उसने उन राज्यों के लिए प्याज का बफर स्टॉक सुनियोजित और लक्षित तरीके से उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जहां दाम पिछले महीनों के मुकाबले बढ़ रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि बाजारों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में प्याज की लासलगांव और पिंपलगांव थोक मंडियों में भी बफर स्टॉक जारी किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों को भंडारण से अलग स्थानों पर 21 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की पेशकश की गई है। मदर डेयरी के सफल बिक्री केन्द्रों को भी परिवहन लागत सहित 26 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से इस सब्जी की आपूर्ति की गई है। मंत्रालय ने कहा, बफर स्टॉक के तेजी से बाजार में आने से प्याज की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। धीरे-धीरे महंगा हो रहा है प्याज : मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में खुदरा प्याज की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। दिल्ली और चेन्नई में प्याज की कीमत 37 रुपए किलो थी, जबकि मुंबई में 39 रुपए किलो और कोलकाता में 43 रुपए किलो थी। मंत्रालय ने आगे कहा कि देर से पैदावार वाली खरीफ (गर्मी) प्याज की आवक स्थिर है और मार्च, 2022 से रबी (सर्दियों) फसल के आने तक स्थिर रहने की उम्मीद है। इस साल 17 फरवरी तक, प्याज की अखिल भारतीय औसत कीमत पिछले साल की तुलना में 22.36 प्रतिशत कम थी। मंत्रालय के अनुसार, मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के माध्यम से प्रभावी बाजार हस्तक्षेप के कारण वर्ष 2021-22 के दौरान प्याज की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। इसी तरह, आलू का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य पिछले महीने की तुलना में 17 फरवरी को 6.96 प्रतिशत कम यानी 20.58 रुपए प्रति किलोग्राम था। अब तक छह राज्यों, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने अग्रिम रूप से लिया है और कुल 164.15 करोड़ रुपए केंद्रीय हिस्से के रूप में जारी किए गए हैं। इन राज्यों के पास आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए धन और जनादेश है। इसमें कहा गया है, अन्य राज्यों से भी अनुरोध किया गया है कि वे आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर हस्तक्षेप के लिए पीएसएफ का गठन करें।
जमशेदपुर। ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् द्वारा 2022 के लिए टाटा स्टील को विनिर्माण श्रेणी में भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों में से एक के रूप में मान्यता दी गयी है। कंपनी को यह सम्मान पांचवीं बार प्राप्त हुआ है जो उच्च-विश्वास, अखंडता, विकास और कर्मचारियों का ख्याल रखने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर कंपनी के निरंतर प्रयास को रेखांकित करता है। पिछले कुछ वर्षों में, टाटा स्टील ने कार्यबल के विभिन्न क्षेत्रों के लिए कोर माइनिंग आॅपरेशन्स में ट्रांसजेंडर और महिलाओं की नियुक्ति जैसी कई पथ-प्रदर्शक नीतियों, अभ्यासों और पहल की शुरूआत की हैं। कंपनी लोगों को काम पर रखने, जुड़ाव, विविधता तथा समावेशन, पुरस्कार और सम्मान और प्रदर्शन प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर नवाचार और अग्रणी रही है। टाटा स्टील ने सभी विविध समूहों के लिए एक सक्षम कार्यस्थल बनाने के लिए एलजीबीटीक्यू + पार्टनर्स, एजाइल वर्किंग मॉडल और विस्तारित मातृत्व अवकाश का लाभ देने जैसी पथ प्रदर्शक नीतियां लागू की हैं। अत्रेयी सान्याल, वाईस प्रेसिडेंट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, टाटा स्टील ने कहा : हम पांचवीं बार इस सम्मान को हासिल कर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं। टाटा स्टील में, हम टीम वर्क को बढ़ावा देने, प्रतिभा को पोषित करने और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने में दृढ़ता से विश्वास करते हैं। हमारे कर्मचारी हमेशा संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति रहे हैं। हमारी नीतियां, हमेशा से कर्मचारी सर्वप्रथम के दर्शन से प्रेरित रहती हैं। इसने हमें एक ऐसा कार्य वातावरण बनाने में सक्षम बनाया है जो समावेशी है और सभी के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देता है। टाटा स्टील ने कार्यबल के विभिन्न वर्गों के लिए कई पथ-प्रदर्शक नीतियों और अभ्यासों को लागू किया है और अपने कार्यबल के पोषण और सशक्तीकरण के लिए समय के साथ विकसित होती रहेगी। कार्यस्थल संस्कृति पर एक वैश्विक प्राधिकरण के रूप में, ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् तीन दशकों से भी अधिक समय से कर्मचारियों के अनुभवों और संगठनों में लोगों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा है। हर साल, 60 से अधिक देशों के 10,000 से अधिक संगठन अपनी कार्यस्थल संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए मूल्यांकन, बेंचमार्किंग और कार्यों की योजना के लिए ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् संस्थान के साथ भागीदारी करते हैं। इस साल विनिर्माण क्षेत्र के 132 संगठनों ने इस मूल्यांकन में भाग लिया । इस अध्ययन ने देश भर में विनिर्माण क्षेत्र के 3,83,583 कर्मचारियों की आवाज का भी प्रतिनिधित्व किया। कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर, टाटा स्टील को 2022 के लिए विनिर्माण श्रेणी में भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों के रूप में मान्यता प्राप्त शीर्ष 30 संगठनों में से एक के रूप में नामित किया गया है।
एबीएन डेस्क। अगर आप एलआईसी की आईपीओ में निवेश का इंतजार कर रहे हैं तो फिर ये मौका आपको जल्द मिलने वाला है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च से पहले इस आईपीओ को लॉन्च करने का है। लेकिन इस बीच मीडिया में चल रहीं खबरों के मुताबिक आईपीओ 10 मार्च 2022 को लॉन्च हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निवेशकों के लिए यह आईपीओ 10 मार्च को ओपन होगा, और 14 मार्च तक ओपन रहेगा। खबर है कि एलआईसी के इश्यू का साइज 65,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सबसे ज्यादा रिटेल निवेशकों में एलआईसी की आईपीओ को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। इश्यू प्राइस को लेकर खबर : लोग जानना चाह रहे हैं कि इस मेगा आईपीओ में अप्लाई करने के लिए कम से कम कितने रुपये की जरूरत होगी। चल रहीं अटकलों को मानें तो एलआईसी का इश्यू प्राइस 2000 रुपये से 2100 रुपये के बीच हो सकता है। ऐसे में अपर प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशक को एक लॉट के लिए 14,700 रुपये लगाने होंगे। 7 शेयरों का एक लॉट हो सकता है।
एबीएन डेस्क। सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की मंजूरी के लिए आज भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा (डीआरएचपी) जमा करा दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी का आईपीओ मार्च में बाजार में आ सकता है। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्वीट कर कहा, एलआईसी के आईपीओ का डीआरएचपी आज सेबी के पास जमा करा दिया गया है। इससे पहले बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण से एलआईसी के आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी, जिसके बाद बीमा कंपनी के निदेशक मंडल ने भी कंपनी को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी थी। सेबी के पास जमा कराए गए आईपीओ मसौदे के अनुसार सरकार निर्गम के जरिये एलआईसी के 31 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयर बेचेगी। सरकार का लक्ष्य मार्च तक एलआईसी के शेयर को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्घ कराना है। एलआईसी का अंतर्निहित मूल्य भी 5.4 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और सरकार जो मूल्यांकन चाह रही है उसे रोडशो के बाद तय किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि डीआरएचपी जमा कराने के बाद बाजार नियामक सेबी से इसे आसानी से मंजूरी मिल जाएगी क्योंकि इसके बारे में सेबी के साथ पहले से ही विचार-विमर्श चल रहा है। उम्मीद की जा रही है निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ की जबरदस्त मांग होगी। बीमा कंपनी के मूल्यांकन, मूल्य दायरे आदि का विवरण निर्गम दस्तावेज में जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी निर्गम आरक्षित रखेगी और उन्हें कम कीमत में भी शेयर दिए जा सकते हैं। एंकर निवेशकों के लिए भी कुछ शेयर आरक्षित रखे जाएंगे। एलआईसी के आईपीओ को देश में अब तक का सबसे बड़ा निर्गम माना जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार के विनिवेश लक्ष्य में 78,000 करोड़ रुपये की कमी रहने का अनुमान है, इसीलिए एलआईसी का आईपीओ सरकार के लिए महत्त्वपूर्ण है। सरकार अब तक एयर इंडिया के निजीकरण और अन्य सरकारी उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बिक्री से करीब 12,000 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। एलआईसी की 2020 में घरेलू बाजार में 64.1 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक एलआईसी जीवन बीमा प्रीमियम के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में परंपरागत वाहनों के मुकाबले अब इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें अब इस दिशा में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। हाल ही में बजट में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर तमाम घोषणाएं की गई हैं। पिछले कुछ समय से देश में पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए भी ईवी को महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है, यही वजह है कि लोगों से पेट्रोल-डीजल के बजाय इन्हें ही खरीदने के लिए सलाह दी जा रही है। हालांकि हर महीने देखा जाए तो इवी की खरीद में भी वृद्धि देखी जा रही है। काउंसिल फॉर एनवायरनमेंट, एनर्जी एंड वॉटर की सीईएफ हैंडबुक का आंकड़ा बताता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में काफी उछाल आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में ही ईवी की बिक्री में 250 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी देखी गई है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में ईवी की बिक्री बढ़कर 1.3 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई है। जबकि साल 2020-21 के वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में लगभग 34 हजार यूनिट ही बिकी थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी को लेकर लोगों की दिलचस्पी यूं ही नहीं बढ़ी है। पिछले कुछ समय से डीजल और पेट्रोल की कीमतों में हुई रिकॉर्ड वृद्धि, फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (फेम-2) के तहत प्रोत्साहन के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियों के नए-नए मॉडल्स की लॉन्चिंग जैसे कदमों ने शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में योगदान दिया है। सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक ने यह भी रेखांकित किया है कि तीसरी तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में कुल बिजली उत्पादन 3.7 प्रतिशत बढ़कर 324 बिलियन किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) हो गया। ऐसा त्योहारी सीजन के दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के कारण हुआ। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के दौरान नीलाम की गई कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में पिछले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 61 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। इस अवधि के लिए बिजली वितरण कंपनियों का कुल बकाया भी पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि की तुलना में सात प्रतिशत (7%) बढ़कर 1.23 लाख करोड़ रुपये हो गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरोपीय प्रकाशक परिषद (ईपीसी) ने शुक्रवार को गूगल के डिजिटल विज्ञापन व्यवसाय के खिलाफ अविश्वास जताते हुए यूरोपीय आयोग में शिकायत दर्ज कराई। इससे यूरोपीय संघ के एंटीट्रस्ट प्रमुख मार्गेथ वेस्टेगर को जांच में मदद मिलेगी। गूगल ने 2020 में ऑनलाइन विज्ञापनों से करीब 147 अरब डॉलर की कमाई की, जो दुनिया की किसी भी अन्य कंपनी की तुलना में अधिक है, इसमें सर्च इंजन, यूट्यूब और जीमेल विज्ञापन गूगल की कुल बिक्री और मुनाफे का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। 16 फीसदी राजस्व कंपनी को नेटवर्क व्यवसाय से मिला, जिसमें अन्य मीडिया कंपनियां अपनी वेबसाइट और एप्स पर विज्ञापन बेचने के लिए गूगल एडसेंस का इस्तेमाल करती हैं। बाजार हिस्सेदारी 100% तक : प्रकाशकों के व्यापार निकाय, जिसमें एक्सल स्प्रिंगर, न्यूज यूके, कोंडे नास्ट, बोनियर न्यूज और प्रैसा इबेरिका शामिल हैं, ने यूरोपीय आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि प्रेस प्रकाशक गूगल की तकनीक की वजह से पूरी तरह से उसके कब्जे में हैं। ईपीसी के अध्यक्ष क्रिश्चियन वान थिलो ने कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोपीय आयोग ऐसे फैसले करे जिससे गूगल को वास्तविक बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि विज्ञापन तकनीक की मूल्य श्रृंखला में ऊपर से नीचे तक गूगल का कब्जा है। पिछले साल शुरू हुई जांच : वेस्टेगर, ने हाल के वर्षों में तीन अलग-अलग मामलों में प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाओं के लिए गूगल के खिलाफ आठ अरब यूरो (9.2 अरब डॉलर) से अधिक का जुर्माना लगाया था। बार-बार मिल रही शिकायतों के आधार पर पिछले साल उन्होंने गूगल के डिजिटल विज्ञापन व्यवसाय की जांच शुरू की थी। वहीं गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि हर साल हम अपने विज्ञापन नेटवर्क में प्रकाशन भागीदारों को सीधे अरबों डॉलर का भुगतान करते हैं। ब्रिटेन में गूगल का संशोधित प्रस्ताव मंजूर : ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा नियामक ने शुक्रवार को कहा कि उसने उपभोक्ताओं को ट्रैक करने के लिए विज्ञापनदाताओं की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाली थर्ड पार्टी कुकीज पर प्रतिबंध लगाने की अपनी योजना के संबंध में गूगल के एक संशोधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। निजता की रक्षा के लिए कुकीज को रोकने का दावा : गूगल का दावा है वह उपयोगकर्ताओं की निजता की रक्षा के लिए थर्ड पार्टी कुकीज को रोकने पर काम कर रहा है। वहीं, 250 अरब डॉलर के वैश्विक डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र के अन्य खिलाड़ियों का कहना है कि थर्ड पार्टी कुकीज को बैन करने से उनकी क्षमता सीमित हो जाएगी। सीएमए के सीईओ एंड्रिया कोसेली ने कहा कि इसको दूर करने को गूगल कानूनी रूप से बाध्य है और पारदर्शिता के लिए सूचना प्राधिकरण कड़ी निगरानी करेंगे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से नौ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 1,03,532.08 करोड़ रुपए की गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को हुआ। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 491.90 अंक या 0.83 प्रतिशत नीचे आया। शीर्ष 10 कंपनियों में सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी हुई। समीक्षाधीन सप्ताह में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 30,474.79 करोड़ रुपए बढ़कर 16,07,857.69 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में 44,037.2 करोड़ रुपए की गिरावट आई और यह 13,67,021.43 करोड़ रुपए पर आ गया। एचडीएफसी की बाजार हैसियत 13,772.72 करोड़ रुपए के नुकसान से 4,39,459.25 करोड़ रुपये रह गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार पूंजीकरण 11,818.45 करोड़ रुपए के नुकसान से 5,30,443.72 करोड़ रुपए पर और आईसीआईसीआई बैंक का 9,574.95 करोड़ रुपए टूटकर 5,49,434.46 करोड़ रुपए पर आ गया। बजाज फाइनेंस का बाजार मूल्यांकन 8,987.52 करोड़ रुपए के नुकसान से 4,22,938.56 करोड़ रुपए पर और इन्फोसिस का 8,386.79 करोड़ रुपए की गिरावट के साथ 7,23,790.27 करोड़ रुपए रह गया। समीक्षाधीन सप्ताह में भारती एयरटेल को 3,157.91 करोड़ रुपए का घाटा हुआ और उसका बाजार पूंजीकरण 3,92,377.89 करोड़ रुपए पर आ गया। एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 2,993.33 करोड़ रुपए घटकर 8,41,929.20 करोड़ रुपए रह गई। इसी तरह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का मूल्यांकन 803.21 करोड़ रुपए घटकर 4,72,379.69 करोड़ रुपए पर आ गया। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। उसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई, एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल का स्थान रहा।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क (निकुंज ओहरी)। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के मसौदे में सरकार द्वारा 5 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का उल्लेख हो सकता है और निर्गम के आकार का जिक्र शायद नहीं हो। क्योंकि संभावित निवेशकों के साथ मूल्यांकन पर अभी पर्याप्त चर्चा नहीं की गई है। एक अधिकारी ने कहा, अगर एलआईसी नए शेयर जारी करती और नई पूंजी जुटाती तो उसे निर्गम के आकार का उल्लेख करना होता। लेकिन यह आॅफर फॉर सेल होगा, जिसमें सरकार बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। उक्त अधिकारी ने कहा कि बीमा कंपनी का मूल्यांकन बाजार की मांग और स्थिति पर निर्भर करता है। सरकार ने अभी निवेशकों के साथ परामर्श नहीं किया है, इसलिए कोई मूल्यांकन तय करना संभव नहीं है। एलआईसी का अंतर्निहित मूल्य भी 5 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और सरकार जो मूल्यांकन चाह रही है उसे रोड शो के बाद तय किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, शेयर का मूल्य अभी पता नहीं है और इसे निवेशकों के साथ चर्चा के बाद ही तय किया जाएगा। डीआरएचपी में केवल यह कहा जाएगा कि सरकार 5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। 31 दिसंबर, 2021 को एलआईसी के शेयरधारिता प्रारूप के हिसाब से 5 फीसदी हिस्सेदारी करीब 31.6 करोड़ शेयर के बराबर होगी। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आईपीओ के पूर्व-नियोजन के जरिये शेयर मूल्य की तलाश नहीं की गई है, ऐसे में फिलहाल बीमा कंपनी का मूल्यांकन तय करना कठिन होगा। अधिकारी ने बताया कि एलआईसी के निदेशक मंडल ने आज आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और इसका डीआरएचपी रविवार को जमा कराया जाएगा। अब इस प्रस्ताव को भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा। बीमा नियामक से मंजूरी के बाद मसौदे की दोबारा जांच होगी और उसे सेबी के पास उसे जमा कराया जाएगा। अगर रविवार को बीमा नियामक से मंजूरी मिलती है तो डीआरएचपी उसी दिन या सोमवार को जमा कराया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि डीआरएचपी जमा कराने के बाद बाजार नियामक सेबी से इसे आसानी से मंजूरी मिल जाएगी क्योंकि इसे लेकर सेबी के साथ पहले से ही विचार-विमर्श चल रहा है। उम्मीद की जा रही है निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ की जबरदस्त मांग होगी। बीमा कंपनी के मूल्यांकन, मूल्य दायरे आदि का विवरण निर्गम दस्तावेज में जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी निर्गम को आरक्षित रखेगी और उन्हें कम कीमत में भी शेयर दिए जा सकते हैं।
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