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Published / 2022-03-04 04:37:07
यूट्यूबर्स ने वीडियो से देश को कराई 6800 करोड़ की कमाई

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर में कमाई अब सिर्फ नौकरी या बिजनेस करने तक ही सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल युग में पैसे कमाने के कई ऐसे तरीके सामने आए हैं, जिन्हें पहले उतनी तवज्जो नहीं मिलती थी। खास बात है कि इन नए तरीकों से न सिर्फ लोग अपना घर-परिवार चला रहे हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रहे हैं। यूट्यूब भी एक ऐसा ही जरिया बनकर सामने आया है। 92 फीसदी छोटे उद्यमियों ने कहा, मंच के जरिये दुनियाभर में नए लोगों तक पहुंचने में मिली मदद : ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यूट्यूब क्रिएटर्स (यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले) ने वीडियो बना-बनाकर 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6,800 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। खास बात है कि यूट्यूबर्स ने 6,83,900 फुल टाइम नौकरियों के बराबर भी जीडीपी को मजबूत किया है। 92 फीसदी छोटे एवं मध्यम उद्यमियों का कहना है कि यूट्यूब की मदद से उन्हें दुनियाभर में नए लोगों तक पहुंचने में मदद मिली है। आर्थिक विकास पर असर डालने की क्षमता : यूट्यूब पार्टनरशिप के एशिया-प्रशांत के क्षेत्रीय निदेशक अजय विद्यासागर का कहना है कि भारत में यूट्यूब की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देखकर खुशी हो रही है। देश के यूट्यूबर्स में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक मूल्यों पर असर डालने की अहम शक्ति के रूप में उभरने की क्षमता है। जैसे-जैसे हमारे यूट्यूबर वैश्विक दर्शकों से जुड़ने वाली मीडिया कंपनियों की इस अगली पीढ़ी का निर्माण करेंगे, अर्थव्यवस्था पर इसका असर और तेज होगा। लाखों में होती है कमाई : रिपोर्ट के मुताबिक, 40,000 से अधिक यूट्यूब चैनलों के एक लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स (ग्राहक) हैं। इनकी संख्या हर साल 45 फीसदी की दर से बढ़ रही है। देश में कम-से-कम छह अंकों या इससे अधिक में कमाई करने वाले यूट्यूब चैनलों की संख्या में सालाना आधार पर 60 फीसदी बढ़ रही है। देश में 44.8 करोड़ यूट्यूब यूजर्स : पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक, देश में यूट्यूब का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 44.8 करोड़ है। 53 करोड़ व्हाट्सएप और 41 करोड़ लोग फेसबुक उपयोग करते हैं। इंस्टाग्राम यूजर्स की संख्या 21 करोड़ है, जबकि 1.75 करोड़ ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं। कारोबार को आगे बढ़ाने में मददगार : ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स के सीईओ एड्रियन कूपर ने कहा कि यूट्यूब भारतीय निर्माताओं के लिए उनके पेशेवर लक्ष्यों को पाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूट्यूब पर सामग्री के मौद्रिकरण के आठ अलग-अलग तरीकों के साथ यूट्यूब दुनियाभर के क्रिएटर्स के लिए एक प्रेरक स्रोत बनकर उभरा है। भारत में 80 फीसदी से ज्यादा क्रिएटर्स का कहना है कि यूट्यूब मंच का उनके पेशेवर लक्ष्यों पर सकारात्मक असर पड़ा है।

Published / 2022-03-02 14:56:02
मोटी कमाई का मौका देगा रतन टाटा समर्थित "ब्लूस्टोन ज्वैलरी" का आईपीओ

एबीएन बिजनेस डेस्क। रतन टाटा सपोर्टेड ब्लूस्टोन ज्वैलरी आईपीओ के माध्यम से फंड जुटाने की योजना बना रही है। ब्लूस्टोन ज्वैलरी भारत की अग्रणी ओमनीचैनल ज्वैलरी चेन में से एक है और वह प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से 1,500 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की योजना बना रही है। रतन टाटा समर्थित ज्वैलरी प्लेटफॉर्म ने पहले ही आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईआईएफएल सिक्योरिटीज, जेफरीज और जेएम फाइनेंशियल को आईपीओ के लिए निवेश बैंकर नियुक्त कर दिया है और उसे 12,000-15,000 करोड़ रुपए के मूल्यांकन की उम्मीद है। जनिक प्रस्ताव लॉन्च करना चाहती है। आईपीओ के माध्यम से कंपनी अपनी हिस्सेदारी का 10-12 प्रतिशत बेचना चाहती है। कंपनी के निजी इक्विटी निवेशकों, कलारी कैपिटल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा या पूरी तरह से बेच सकते हैं।

Published / 2022-03-01 15:13:14
टाटा मोटर्स : फरवरी में 27% बढ़ी घरेलू बिक्री, हुंडई को नुकसान

एबीएन बिजनेस डेस्क। टा मोटर्स ने मंगलवार को कहा कि फरवरी में उसकी कुल घरेलू बिक्री सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर 73,875 इकाई हो गई। कंपनी ने फरवरी 2021 में 58,366 इकाइयों को डीलरों के पास भेजा। आॅटो कंपनी ने कहा कि पिछले महीने घरेलू बाजार में उसकी यात्री वाहनों की बिक्री 47 प्रतिशत बढ़कर 39,981 इकाई हो गई, जो पिछले साल इसी महीने में 27,225 इकाई थी। समीक्षाधीन अवधि में घरेलू बाजार में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री नौ प्रतिशत बढ़कर 33,894 इकाई हो गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 31,141 इकाई थी। हुंदै मोटर इंडिया की बिक्री फरवरी में घटी : हुंडई मोटर इंडिया ने मंगलवार को कहा कि फरवरी में उसकी कुल बिक्री सालाना आधार पर 14 प्रतिशत घटकर 53,159 इकाई रह गई। हुंदै मोटर इंडिया ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने पिछले साल इसी महीने में 61,800 इकाइयां बेची थीं। समीक्षाधीन माह में घरेलू बिक्री सालाना आधार पर 14.6 प्रतिशत घटकर 44,050 इकाई रह गई। टोयोटा किर्लोस्कर की थोक बिक्री फरवरी में 38 प्रतिशत घटकर 8,745 इकाई रह गई। कंपनी ने फरवरी 2021 में घरेलू बाजार में डीलरों को 14,075 इकाइयां भेजी थीं। निसान इंडिया की कुल थोक बिक्री फरवरी में 57 प्रतिशत बढ़कर 6,662 इकाई हो गई। कंपनी ने पिछले महीने घरेलू बाजार में 2,456 इकाइयों की बिक्री की और 4,206 इकाइयों का निर्यात किया। आॅटो विनिर्माता ने पिछले साल इसी महीने में 4,244 इकाइयों की थोक बिक्री की थी। स्कोडा आॅटो ने बताया कि फरवरी में उसकी बिक्री में पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई और यह 4,503 इकाई रही। कंपनी ने पिछले साल इसी महीने में 853 इकाइयां बेची थीं। स्कोडा आॅटो इंडिया ने एक बयान में कहा कि फरवरी 2022 की बिक्री में मुख्य रूप से कुशाक एसयूवी का योगदान था। एमजी मोटर इंडिया ने कहा कि उसकी खुदरा बिक्री सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर फरवरी 2022 में 4,528 इकाई हो गई, जो फरवरी 2021 में 4,329 इकाई थी।

Published / 2022-02-28 13:13:13
कल से 2 रुपये महंगे हो जायेगा अमूल दूध

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमूल ब्रांड के नाम से दूध और दूध उत्पादों के विपणनकर्ता गुजरात को-आॅपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) ने देश भर में कल से अपने अमूल फ्रेश ब्रांड के दूध की कीमत में दो रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी का फैसला किया है। अमूल फ्रेश देश भर के जिन भी बाजारों में उपलब्ध है, वह उसकी कीमत में उक्त वृद्धि के अलावा गुजरात के अहमदाबाद और सौराष्ट्र क्षेत्र के बाजारों में कल यानी एक मार्च से अमूल गोल्ड, ताजा और शक्ति की कीमतों में भी वृद्धि की गयी है। गोल्ड की कीमत रुपये 30 प्रति 500 मिली, अमूल ताजा रुपये 24 प्रति 500 मिली और अमूल शक्ति रुपये 27 प्रति 500 मिली होगी। यह रुपये 2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल 4 प्रतिशत की वृद्धि होती है, जो औसत खाद्य महंगाई से बहुत कम है। इसमें कहा गया है कि पिछले 2 वर्षों में अमूल ने अपने फ्रेश दूध श्रेणी की कीमतों में प्रति वर्ष केवल 4 प्रतिशत की वृद्धि की है। एनर्जी, पैकेजिंग, परिवहन, पशु आहार की लागत में वृद्धि के कारण दूध उत्पादन खर्च में वृद्धि हुई है और इस प्रकार संचालन की कुल लागत में वृद्धि हुई है। अमूल ने किसानों की दूध खरीद की कीमतों में रुपये 35 से रुपये 40 प्रति किलो फैट की वृद्धि की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा है।

Published / 2022-02-27 16:15:11
दोगुना बढ़कर 100 अरब डॉलर के पार होगा कच्चे तेल का आयात बिल

एबीएन, बिजनेस डेस्क। रूस पर यूक्रेन के हमले के बीच कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास तक पहुंच गया है, जो सात सालों में सबसे ज्यादा स्तर है। इस कारण भारत का कच्चे तेल का आयात बिल भी 100 अरब डॉलर के पार जा सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश का कच्चे तेल का आयात बिल मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 में 100 अरब डॉलर को पार कर सकता है। यह पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर हुए खर्च का करीब दोगुना होगा। इसकी वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 7 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ ने ये अनुमान जारी किया है। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 94.3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इस साल जनवरी में ही कच्चे तेल के आयात पर 11.6 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं। कच्चा तेल बढ़ने से पेट्रोल डीजल भी महंगा हुआ है। पिछले साल जनवरी में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 7.7 अरब डॉलर खर्च किए थे। फरवरी2022 में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारत का तेल आयात बिल दोगुना होकर 110 से 115 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। भारत अपने कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत को आयात से पूरी करता है। आयातित कच्चे तेल को तेल रिफाइनरियों के जरिये पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पादों में बदला जाता है। भारत के पास बेहतर शोधन क्षमता है। वो कुछ पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात भी करता है, लेकिन रसोई गैस यानी एलपीजी का उत्पादन काफी कम है। इसे सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से आयात किया जाता है। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह अप्रैल-जनवरी में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात 3.36 करोड़ टन या 19.9 अरब डॉलर रहा था। जबकि इस दौरान 33.4 अरब डॉलर के 5.11 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारत ने 2020-21 के वित्त वर्ष में 19.65 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 62.2 अरब डॉलर खर्च किए थे। उस समय कोरोना महामारी के कारण कच्चे तेल की कीमतें नरम थीं। चालू वित्त वर्ष में भारत पहले ही 17.59 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात कर चुका है। भारत दुनिया का तीसरे सबसे बड़ा तेल-गैस आयातक और उपभोक्ता देश है। भारत ने वित्त वर्ष 2019-2022.7 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 101.4 अरब डॉलर खर्च किए थे। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ब्रेंट क्रूड स्पॉट के दाम 7 साल के उच्चस्तर 105.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। हालांकि, अमेरिका और यूरोपी देशों ने रूस पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, ऊर्जा को उनसे बाहर रखा गया है, जिससे तेल के दाम घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए।

Published / 2022-02-26 15:14:47
भारत में अप्रैल तक का ही खाद्य तेल, दो दिन में 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े दाम

एबीएन बिजनेस डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय बाजार पर भी पड़ने लगा लगा है। आने वाले दिनों में भी अगर दोनों देशों के बीच इसी तरह का टकराव जारी रहता है, तो भारतीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिले सकता है। फिलहाल देश में अप्रैल मध्य तक का ही सूरजमुखी तेल का भंडार मौजूद है। बढ़ते तनाव के कारण पिछले दो दिन में तेल की कीमत 10 से 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। दरअसल, भारत सालाना 25 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात करता है। इनमें 90 फीसदी हिस्सा रूस और यूक्रेन से आता है। क्योंकि यह दोनों देश ही तेल के बड़े निर्यातक हैं। पाम और सोयाबीन तेल के बाद देश में सूरजमुखी तीसरा ऐसा खाद्य तेल है, जिसका बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। इन दिनों यूक्रेन से सनफ्लावर, इंडोनेशिया, मलेशिया से पाम, अर्जेंटीना व ब्राजील से सोया तेल की आवक कम हो गई है। इसी कारण पिछले सात दिन में तेल की कीमतों में 15 रुपये लीटर तक तथा दो दिन में सर्वाधिक 12 रुपये लीटर तक वृद्धि हो चुकी है। इसी तरह सूरजमुखी के तेल की कीमत एक दिन में 10 रुपये बढ़कर 167 से 168 प्रति लीटर पर पहुंच गईं। सात दिन पहले इसके दाम 150 रुपये प्रति लीटर थे।

Published / 2022-02-25 04:39:50
रूस-यूक्रेन विवाद का संकट : कच्चा तेल हुआ महंगा, 15 फीसदी बढ़ेगा आयात बिल

एबीएन बिजनेस डेस्क। यूक्रेन व रूस के बीच जारी जंग का दुनियाभर के देशों पर असर पड़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। कच्चा तेल 2014 के बाद पहली बार 1053 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे भारत का कच्चा तेल आयात बिल 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। उधर, अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 10.6 फीसदी घटा है। इससे भी विदेशी मुद्रा कोष पर असर पड़ा है। यूक्रेन जंग के कारण तेल की आपूर्ति गड़बड़ाने का अंदेशा है। इससे भारत पर भी असर पड़ना तय है। यूक्रेन तनाव के कारण आठ साल बाद ब्रेंट क्रूड आइल के दाम पहली बार 105 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वह यूरोप की तेल कंपनियों को इसकी आपूर्ति करता है। वह यूरोप को अपनी करीब 35 फीसदी प्राकृतिक गैस भी निर्यात करता है। ताजा जंग के कारण यूरोप को तेल व गैस की आपूर्ति ठप हो सकती है। विश्व में कच्चे तेल की मांग बढ़ गई है और ओपेक ने उत्पादन घटा रखा है, इसलिए तेल के दाम और बढ़ने की आशंका है। रूस पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां बढ़ने का भी विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा। क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी के अनुसार विश्व के तेल निर्यात बाजार में रूस की 12 फीसदी हिस्सेदारी और यूक्रेन संकट के कारण कच्चे तेल के दाम आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। जब तक ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं करता, तब तक कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा ही बने रहने के आसार हैं। बीते दिन माहों से ओपेक देश अपने उत्पादन लक्ष्य के अनुसार तेल नहीं निकाल रहे हैं। इसके कारण दाम पर असर पड़ा है। इसी तरह गैस के दामों पर भी असर पड़ेगा। ईंधन की आपूर्ति व उत्पादन में कमी के कारण इसके भी दाम बढ़ सकते हैं। आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। एफडीआई में आई कमी : उधर, देश में अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच 60.3 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। यह पिछले साल के मुकाबले 10.6 फीसदी कम है। 2020 की इसी अवधि में यह 67.5 अरब डॉलर रहा था। इसी तरह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश 43.1 अरब डॉलर रहा। यह 16 फीसदी कम है। 2020-21 में यह 51.4 अरब डॉलर रहा था। सरकार के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।

Published / 2022-02-23 14:31:13
भारती एयरटेल को 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में वोडाफोन

एबीएन बिजनेस डेस्क। वोडाफोन भारती एयरटेल को इंडस टावर्स में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बिक्री से वोडाफोन को मिलने वाली राशि उसकी भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में डाली जाएगी। इंडस टावर्स लिमिटेड पहले भारती इन्फ्राटेल लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। नयी दिल्ली, ब्रिटिश दूरसंचार कंपनी वोडाफोन इंडस टावर्स में अपनी करीब पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए भारती एयरटेल के साथ बात कर रही है। दूरसंचार उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बुधवार को इस संभावित सौदे की जानकारी दी। हालांकि, वोडाफोन ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। इंडस टावर्स में वोडाफोन के पास फिलहाल 28 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों ने कहा कि वोडाफोन 3,300 करोड़ रुपये मूल्य वाली कंपनी इंडस टावर्स में अपनी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एयरटेल के संपर्क में है। सूत्रों के मुताबिक, इस बिक्री से वोडाफोन को मिलने वाली राशि उसकी भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में डाली जाएगी। इंडस टावर्स लिमिटेड पहले भारती इन्फ्राटेल लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। वह दूरसंचार टावर खड़ा करने, उनके स्वामित्व एवं प्रबंधन का काम करती है। इस तरह उसकी कई मोबाइल आॅपरेटरों के लिए संचार संरचना प्रदान करने में भूमिका है। इंडस टावर्स के पास 1,84,748 दूरसंचार टावर हैं और उसकी देश के सभी 22 दूरसंचार सर्किल में मौजूदगी है।

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