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Published / 2022-03-14 18:04:36
फरवरी में 6.07% रही खुदरा महंगाई दर

एबीएन बिजनेस डेस्क। खुदरा महंगाई फरवरी में 6.07 फीसदी के साथ आठ महीने की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। यह लगातार दूसरे महीने आरबीआई के स्तर से ऊपर रही है। सोमवार को जारी आधिकारिक डेटा में दिखता है कि इसके पीछे मुख्य वजह खाने की चीजों की कीमतों में इजाफा होना है। कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स आधारित खुदरा महंगाई फरवरी 2021 में 5.03 फीसदी और इस साल जनवरी में 6.01 फीसदी रही थी। इससे पहले जून 2021 में यह 6.26 फीसदी के ऊंचे स्तर पर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक को सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सीपीआई महंगाई 4 फीसदी पर बनी रहे, जिसमें दोनों तरफ 2 फीसदी का मार्जिन रखा गया है। इससे पहले दिन में सरकार द्वारा जारी होलसेल प्राइस इंडैक्स आधारित महंगाई के फरवरी डेटा में दिखा है कि यह दर बढ़कर 13.11 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके पीछे उसने वजह कच्चे तेल और खाने की चीजों के अलावा आइटम की कीमतों में इजाफा बताया है। हालांकि, खाने की चीजों की कीमत में कमी आई है। खाने की चीजों की महंगाई बढ़ी : राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी सीपीआई डेटा के मुताबिक, खाने की चीजों में कीमतों में बढ़ोतरी फरवरी में 5.89 फीसदी रही है, जो पिछले महीने के 5.43 फीसदी से ज्यादा है।।खाने की चीजों में, अनाज में महंगाई बढ़कर 3.95 फीसदी पर पहुंच गई। जबकि, मांस और मछली में महंगाई 7.54 फीसदी पर रही है। जबकि, अंडों में महंगाई की दर महीने के दौरान 4.15 फीसदी पर रही है। इसके अलावा सब्जियों की महंगाई 6.13 फीसदी पर रही है। जबकि, मसालों की महंगाई बढ़कर 6.09 फीसदी पर पहुंच गई। फलों में महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 2.26 फीसदी पर स्थिर रही है। तेल और ऊर्जा में महंगाई जनवरी के 9.32 फीसदी से घटकर 8.73 फीसदी हो गई है। CPI आधारित महंगाई क्या है : आपको बता दें कि जब हम महंगाई दर की बात करते हैं, तो यहां हम कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स (CPI) पर आधारित महंगाई की बात कर रहे हैं। सीपीआई सामान और सेवाओं की खुदरा कीमतों में बदलाव को ट्रैक करती है, जिन्हें परिवार अपने रोजाना के इस्तेमाल के लिए खरीदते हैं। महंगाई को मापने के लिए, हम अनुमान लगाते हैं कि पिछले साल की समान अवधि के दौरान सीपीआई में कितने फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई अर्थव्यवस्था में कीमतों में स्थिरता रखने के लिए इस आंकड़े पर नजर रखता है। सीपीआई में एक विशेष कमोडिटी के लिए रिटेल कीमतों को देखा जाता है।।इन्हें ग्रामीण, शहरी और पूरे भारत के स्तर पर देखा जाता है। एक समयावधि के अंदर प्राइस इंडैक्स में बदलाव को सीपीआई आधारित महंगाई या खुदरा महंगाई कहा जाता है।

Published / 2022-03-13 16:07:36
रुपया-रूबल में व्यापार को मिली मंजूरी!

एबीएन डेस्क (श्रेया नंदी-निकुंज ओहरी)। केंद्र सरकार शुरुआती चरण में कृषि, फार्मा और ऊर्जा जैसे उन क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार की अनुमति दे सकती है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सामूहिक रूप से प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। मामले के जानकार लोगों ने कहा कि रक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में इस तरह की व्यापार सुविधा के लिए काफी विचार-विमर्श की जरूरत होगी क्योंकि ऐसा होने से पश्चिमी देशों में संकेत जाएगा कि भारत प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रहा है। इन क्षेत्रों के कारोबार के लिए रणनीतिक निर्णय लेने की जरूरत होगी। एक जानकार शख्स ने कहा, अगर ऊर्जा, फार्मा और कृषि से इतर क्षेत्रों में स्थानीय मुद्रा से व्यापार की अनुमति देते हैं तो लगेगा कि हम प्रतिबंधों को नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक निर्णय है। व्यापार एक पहलू है लेकिन यह भी अहम है कि हम यूरोप और अमेरिका को किस तरह का संदेश देते हैं। कृषि, फार्मा और ऊर्जा क्षेत्रों में रुपया-रूबल में व्यापार को लागू करना भी आसान है। उक्त शख्स ने कहा, अन्य क्षेत्रों के लिए हमें इस पर विचार करना होगा कि हम प्रतिबंधों को मानते हैं या नहीं। ऐसे में यह कठिन निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरण और दोहरे उपयोग वाले सामान के व्यापार के बारे में व्यापक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक भी यूको बैंक जैसे बैंकों के साथ चर्चा कर रहा है। ईरान पर प्रतिबंध के समय यूको बैंक के जरिये ही इस देश के साथ लेनदेन किया गया था और भारतीय स्टेट बैंक भुगतान की सुविधा के लिए तीसरे पक्ष को नियुक्त करने की संभावना तलाश रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक रूबल के मूल्य में लगातार आ रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए विनिमय दर तय करने पर निर्णय ले सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा रूस के कई बैंकों को स्विफ्ट से बाहर कर देने के बाद निर्यातक को भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा पार लेनदेन स्विफ्ट प्रणाली के जरिये ही किया जाता है। निर्यातकों ने सरकार को अपनी चिंता बताई है और रुपया-रूबल व्यापार व्यवस्था शुरू करने का आग्रह किया है। इससे रूस के आयातकों को रूबल में भुगतान की अनुमति होगी और भारतीय निर्यातक रुपये में भुगतान कर सकेंगे। रूस के सरकारी बैंक सबरबैंक और वीटीबी का भारत में परिचालन है और लेनदेन में मध्यस्थता के लिए उससे गठजोड़ किया जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि भारत ने रूस पर तटस्थ रुख बनाए रखा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों देशों के बीच कोई भी लेन-देन विनियम दर पर होगा।

Published / 2022-03-12 18:09:02
देश में 6 महीने में बनने लगेंगे फ्लैक्स-फ्यूल वाहन : नितिन गडकरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने उनसे वादा किया है कि वे छह महीने के भीतर फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों का विनिर्माण शुरू कर देंगे। गडकरी ने ईटी ग्लोबल बिजनेस समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक परिवहन को 100 फीसदी स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से चलाने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते, मैंने सभी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रबंध निदेशकों और सियाम के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। गडकरी के मुताबिक, उन्होंने मंत्री से वादा किया कि वे ऐसे वाहनों के लिए फ्लैक्स-फ्यूल इंजन का विनिर्माण शुरू करेंगे, जो एक से ज्यादा ईंधन से चल सकते हैं। फ्लैक्स-फ्यूल, गैसोलीन और मेथनॉल या इथेनॉल के मिश्रण से तैयार एक वैकल्पिक ईंधन है। उन्होंने कहा कि टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों ने पहले ही दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए फ्लैक्स-फ्यूल इंजन का विनिर्माण शुरू कर दिया है। क्या होते हैं फ्लैक्स फ्यूल वाहन : आपको बता दें कि फ्लैक्स फ्यूल इंजन एक तरह से इंटरनल कंबस्शन इंजन ही होता है जो एक से ज्यादा टाइप के फ्यूल से चल सकता है और चाहे तो इसे मिक्स फ्यूल पर भी चलाया जा सकता है। इसमें पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल और मेथेनॉल का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है।।फ्यूल कंपोजिशन सेंसर और ईसीयू प्रोग्रामिंग जैसी टेक्नोलॉजी के आ जाने से इंजन अपने आप मात्रा तय करते हुए फ्यूल का इस्तेमाल कर सकता है। फ्लैक्स फ्यूल से ईंधन की लागत घट जाती हैं। वहीं ऐसे ईंधन पर चलने वाली गाड़िया कम प्रदूषण फैलाती हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री ने सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों से इस पहल को शुरू करने की अपील की है। इथेनॉल या गैसोलीन का इस्तेमाल करना है, तो उसके लिए ऐसी गाड़ियां बाजार में उतारनी होंगी जो फ्लैक्स इंजन पर चलने वाली हों। ऐसी गाड़ियां दुनिया के कई हिस्सों में बनती और चलती हैं। भारत में अभी इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है। एफएवी में इंटरनल कंबशन इंजन लगा होता है जो गैसोलीन, गैसोलीन के मिश्रण और इथेनॉल पर काम करता है। ऐसी गाड़ियों में ईंधन में 83 परसेंट तक इथेनॉल मिलाया जा सकता है।

Published / 2022-03-11 17:53:19
जनवरी में औद्योगिक उत्पादन 1.3% बढ़ा

एबीएन बिजनेस डेस्क। जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 1.3 फीसदी बढ़ा है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक डेटा में कहा गया है कि इसके पीछे वजह खनन और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के प्रदर्शन में सुधार रहा है। जनवरी 2021 में इंडैक्स ऑफ इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन (IIP) में जनवरी 2021 में 0.6 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, खनन क्षेत्र में ग्रोथ जनवरी 2021 में 2.4 फीसदी की गिरावट मुकाबले 2.8 फीसदी बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी में 1.1 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है।।इसमें एक साल पहले के समान महीने में 0.9 फीसदी की दर से गिरावट आई थी। पिछले तीन महीनों में जनवरी के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे तेज ग्रोथ देखी गई है। ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटी : हालांकि, ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटकर 0.9 फीसदी पर रही है। जनवरी 2021 में इसमें 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में, आईआईपी ग्रोथ 13.7 फीसदी पर रही है। वित्त वर्ष 2020-21 की समान अवधि के दौरान 12 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। जनवरी में प्राइमेरी गुड्स कैटेगरी में 1.6 फीसदी की ग्रोथ देख गई है। वहीं, कैपिटल गुड्स में जनवरी महीने के दौरान 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। जबकि, इंटरमीडिएट गुड्स कैटेगरी में जनवरी महीने में 0.9 फीसदी ग्रोथ हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर/ कंस्ट्रक्शन गुड्स में जनवरी महीने में 5.4 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में जनवरी 2022 में 3.3 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में 2.1 फीसदी की ग्रोथ हुई है। क्या होता है IIP : बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है। इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है। आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक, किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए। इसके अलावा यह भी शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए। इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है। फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है।

Published / 2022-03-10 10:14:54
भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए साझेदार बने एक्सिस बैंक और एयरटेल

एबीएन डेस्क। एक्सिस बैंक, जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बैंक है, और भारती एयरटेल (एयरटेल) जो भारत का प्रमुख संचार समाधान प्रदाता है, ने आज वित्तीय समाधानों की एक श्रृंखला के माध्यम से भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की। देश में डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेजी लाने के लिए, आगामी महीनों में, एक्सिस बैंक और एयरटेल विशेष रूप से एयरटेल के 340 मिलियन से अधिक ग्राहकों के लिए कई नये-नये वित्तीय पेशकश और डिजिटल सेवाओं को बाजार में लाएंगे। इनमें उद्योग के अग्रणी लाभों के साथ पूर्व-अनुमोदित तुरंत लाभ, बाय नाउ पे लैटर आदि लाभों वाला को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड शामिल होगा। यह गठबंधन, देश भर में अपनी महत्वपूर्ण पहुंच के साथ, डिजिटलीकृत भुगतानों के प्रयोग को बढ़ाकर टियर 2 और टियर 3 बाजारों में प्रवेश करने में मदद करेगा। इस साझेदारी को आज अपनी तरह के पहले "एयरटेल एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड" के लॉन्च के साथ शुरू किया गया, जो एयरटेल ग्राहकों को कैशबैक, विशेष छूट, डिजिटल वाउचर और मानार्थ सेवाओं जैसे कई आकर्षक लाभ प्रदान करेगा। भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा, एयरटेल अपने ग्राहकों को विश्व स्तरीय डिजिटल सेवाओं की पेशकश करने के अपने प्रयास तहत मजबूत वित्तीय सेवा पोर्टफोलियो का निर्माण कर रहा है। हम इस रोमांचक प्रयास में एक्सिस बैंक के साथ सहयोग करके खुश हैं। दोनों ही कंपनियों के लिए लाभप्रद इस टेल्को-बैंक साझेदारी के जरिए, एयरटेल ग्राहकों के लिए एक्सिस बैंक के विश्व स्तरीय वित्तीय सेवा पोर्टफोलियो और विशेष लाभ उपलब्ध होंगे, जबकि एक्सिस बैंक एयरटेल की मजबूत डिजिटल क्षमताओं और गहरी वितरण पहुंच से लाभान्वित होगा।

Published / 2022-03-06 03:39:41
15 से 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

एबीएन डेस्क। रूस-यूक्रेन के बीच अनिश्चित्ता की स्थिति के साथ बरकरार मांग से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें छोटी अवधि में 95 डॉलर से 125 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रहने की उम्मीद है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की घरेलू बाजार में कीमतें 15 से 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां 7 मार्च या उसके बाद कीमतों में बदलाव करेगी, जो मौजूदा राज्य के विधानसभा चुनावों में मतदान का आखिरी दिन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में कटौती से कुछ हद तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह नहीं होगा। मौजूदा समय में, भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी हिस्से का आयात करता है। इसके अलावा तेल की ज्यादा कीमत के बड़े असर से सामान्य महंगाई में बढ़ोतरी का ट्रेंड देखने को मिल सकता है। देश में महंगाई और बढ़ने के आसार : इससे पहले ही भारत में महंगाई को मापने वाला मुख्य कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स जो रिटेल महंगाई को दिखाता है, जनवरी में भारतीय रिजर्व बैंक की टार्गेट रेंज के पार चला गया है। बढ़ोतरी को कमोडिटी की ज्यादा कीमतों पर थोपा गया था। इंडस्ट्री के कैलकुलेशन के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से सीपीआई आधारित महंगाई में करीब 10 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी होती है। इस संकट के अलावा कम सप्लाई को लेकर भय ने ब्रैंट क्रूड ऑयल की कीमत को 10 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। यह करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर मौजूद है। शुक्रवार को, ब्रैंट इंडैक्स्ड क्रूड ऑयल 113.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा है। इन्वेस्टमेंट बैंकर मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि अगर रूस से तेल की सप्लाई आगे भी बाधित रहती है तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 185 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। कच्चा तेल 120 डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका था और आज यह 110 डॉलर के रेंज में ट्रेड कर रहा है। दरअसल, रूस के खिलाफ अमेरिका और यूरोप के अन्य देश पाबंदियां लगा रहे हैं। इसके कारण भी वह तेल का खुलकर निर्यात नहीं कर पा रहा है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, रूस अभी 66 फीसदी तेल का निर्यात नहीं कर पा रहा है।

Published / 2022-03-05 12:55:11
अमूल के बाद कल से महंगा होगा मदर डेयरी का दूध

एबीएन बिजनेस डेस्क। मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमत में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी करेगी। खरीद लागत में वृद्धि होने के कारण की जा रही यह मूल्य वृद्धि रविवार से प्रभाव में आएगी। इससे पहले अमूल और पराग मिल्क फूड्स दूध की कीमत दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा चुके हैं। मदर डेयरी ने शनिवार को कहा कि खरीद लागत (किसानों को अदा किया जाने वाला शुल्क), ईंधन की कीमत और पैकेजिंग सामग्री की कीमत बढ़ने के कारण मदर डेयरी को दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करनी पड़ रही है जो छह मार्च 2022 से प्रभाव में आएगी। रविवार से फुल क्रीम दूध की कीमत 59 रुपये प्रति लीटर होगी जो अभी 57 रुपये प्रति लीटर है। टोन्ड दूध 49 रुपये प्रति लीटर, डबल टोन्ड दूध 43 रुपये प्रति लीटर, गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर होगा। टोकन वाला दूध 44 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 46 रुपये प्रति लीटर होगा। मदर डेयरी ने हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। इन क्षेत्रों के अलावा अन्य इलाकों में दूध के दामों में चरणबद्ध तरीके से बढोतरी होगी। मदर डेयरी का दूध देश के 100 से अधिक शहरों में मिलता है। दिल्ली-एनसीआर में मदर डेयरी प्रतिदिन 30 लाख लीटर से अधिक दूध बेचती है।

Published / 2022-03-05 07:46:19
रूस-यूक्रेन लड़ाई से गहरा रहा 1970 के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के बैंकिंग सिस्टम पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। ये देश रूस के ऑयल का भी विरोध कर रहे हैं। दुनियाभर के बैंक, पोर्ट्स और ट्रांसपोर्टर्स रूसी ऑयल से खुद को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी ऑयल क्राइसिस का खतरा दिख रहा है। आईएचएस मार्किट के वाइस-चेयरमैन डेनियल येर्गिन ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से दुनिया में 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी ऑयल क्राइसिस पैदा हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, येर्गिन ने कहा, 1970 के दशक में अरब ऑयल पर बैन और ईरानियन क्रांति के बाद से ऑयल की सबसे बड़ी क्राइसिस सामने आ सकती है। रूस से भारी निर्यात : येरगिन का कहना है कि यह 1970 के दशक में अरब तेल प्रतिबंध और ईरानी क्रांति के बाद से सबसे खराब संकट हो सकता है। उस दशक में दोनों घटनाएं तेल के लिए बहुत बड़ा झटका था। यद्यपि अमेरिका और अन्य देशों द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध अभी तक लागू नहीं किए गए हैं, येरगिन का मानना है कि बाजार से रूसी बैरल का एक महत्वपूर्ण नुकसान होगा। उनके अनुसार, रूस प्रतिदिन लगभग 7.5 मिलियन बैरल तेल और प्रोसेस्ड वस्तुओं का निर्यात करता है। रूस का आधा निर्यात नाटो को : येरगिन के मुताबिक, लोजिस्टिक्स के मामले में वास्तव में यह एक बड़ा व्यवधान होने जा रहा है और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी होने जा रही है। यह एक आपूर्ति संकट है। यह एक लोजिस्टिक्स संकट है। यह एक भुगतान संकट है और यह 1970 के दशक के पैमाने पर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने वाली सरकारों और उद्योग के बीच मजबूत कम्युनिकेशन सबसे खराब स्थिति का की तरफ बढ़ सकते हैं। येरगिन के मुताबिक, सरकारों को स्पष्टता प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नाटो के सदस्य रूस के निर्यात का लगभग आधा हिस्सा प्राप्त करते हैं। उसका कुछ हिस्सा बाधित होने वाला है।

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