बिजनेस

View All
Published / 2022-05-09 09:36:48
अप्रैल में UPI ने किया रिकॉर्ड 9.83 लाख करोड़ के लेनदेन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ता जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) द्वारा किए गए लेनदेन के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2022 में यूपीआई के जरिए 9.83 लाख करोड़ रुपए के 558 करोड़ लेनदेन हुए, जो अब तक का रिकॉर्ड उच्च स्तर है। पिछले महीने यानी मार्च 2022 के मुकाबले यह लगभग 3 फीसदी ऊपर है। मार्च में यूपीआई के जरिए 9,60,581.66 करोड़ रुपए के 540 करोड़ लेनदेन हुए थे। साल- दर- साल 111% की वृद्धि : पिछले साल से तुलना करें, तो लेनदेन की मात्रा में जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह 111 फीसदी बढ़ी है। लेनदेन के मूल्य में लगभग 100 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल 2021 में, UPI ने 4.93 ट्रिलियन रुपए के 2.64 अरब लेनदेन को प्रोसेस किया था। वित्त वर्ष 2022 में UPI ने 46 अरब से भी ज्यादा लेनदेन को प्रोसेस किया। इसकी राशि 84.17 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा थी। वहीं वित्त वर्ष 2021 में इसने 22.28 अरब लेनदेन को प्रोसेस किया। क्या है यूपीआई : यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस डिजिटल रूप से पेमेंट का एक तरीका है। इसके तहत आप घर बैठे आसानी से किसी को भी पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। यह एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसा तुरंत ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। आप यूपीआई के जरिए रात या दिन कभी भी पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। यूपीआई लेनदेन को बढ़ाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 8 मार्च को बड़ा कदम उठाया था। केंद्रीय बैंक ने UPI123Pay नामक फीचर लॉन्च किया और डिजीसाथी नाम का 24x7 हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया था।

Published / 2022-05-03 12:32:18
"कोहिनूर" के सहारे चावल बाजार में छायेगी अडानी विल्मर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस गौतम अडानी की झोली में एक और कंपनी आ गई है। अडानी ग्रुप की हाल में लिस्ट हुई कंपनी अडानी विल्मर ने कोहिनूर राइस ब्रांड को खरीद लिया है। इसका मालिकाना हक स्विटजरलैंड की कंपनी Mccormick के पास था। हालांकि यह सौदा कितने में हुआ है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि इस अधिग्रहण से उसे कोहिनूर ब्रांड बासमती चावल के साथ-साथ रेडी टू कुक, रेडी टु ईट और भारत में कोहिनूर ब्रांड के दूसरे पोर्टफोलियो पर एक्सक्लूसिव राइट मिल जाएंगे। अडानी ग्रुप खाद्यान्न बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। कंपनी के रेवेन्यू में अभी इस सेगमेंट की करीब 11 फीसदी हिस्सेदारी है।अडानी विल्मर फॉर्च्यून ब्रांड से खाद्य तेल और खाने पीने के दूसरे प्रॉडक्ट बनाती है। कंपनी ने हाल में पश्चिम बंगाल की एक खस्ताहाल राइस प्रोसेसिंग यूनिट को खरीदा था। इसके साथ ही कंपनी ने चावल सेक्टर में एंट्री मारी थी। देश में सालाना चावल की सालाना खपत तीन से 3.5 करोड़ टन है। कंपनी आटा और चावल सेगमेंट में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। उसने अधिग्रहण के लिए 450 से 500 करोड़ रुपए रखे हैं। अडानी विल्मर के पास पहले से ही भारत में सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक, रिफाइनर और मार्केटर है। यह अधिग्रहण अडानी विल्मर को अपनी ग्रोथ को अगले स्तर तक ले जाने में मदद करेगा। देश में चावल का बाजार बहुत बड़ा है और अडानी ग्रुप बासमती के अलावा स्थानीय राइस ब्रांड्स में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। कोहिनूर ब्रांड में प्रीमियर बासमती राइस ब्रांड कोहिनूर के साथ चारमिनार और ट्रॉफी शामिल हैं। अडानी विल्मर के सीईओ और एमडी अंशु मलिक ने कहा कि यह अधिग्रहण कंपनी की बिजनस स्ट्रैटजी के मुताबिक है। मलिक ने कहा कि कोहिनूर के अधिग्रहण से हायर मार्जिन वाले ब्रांडेड स्टैपल्स एंड फूड प्रॉडक्टमस सेगमेंट में कंपनी के पोर्टफोलियो का विस्तार होगा। कंपनी को लगता है कि पैकेज्ड फूड कैटगरी में अभी काफी संभावनाएं हैं। कोहिनूर ब्रांड की मजबूत ब्रांड वैल्यू है और इससे हमें फूड एफएमसीजी कैटगरी में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा। अडानी विल्मर ने हाल में शेयर बाजार में एंट्री मारी थी। इसमें अडानी ग्रुप और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की 50:50 हिस्सेदारी है।

Published / 2022-05-01 14:41:15
झटके पर झटका : कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से गड़बड़ाया बजट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। महीने की शुरूआत में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर वृद्धि कर दी गई है। 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2253 रुपये से बढ़ाकर 2355.50 रुपये कर दी गई है। वहीं, 5 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमत अभी 655 रुपये है। इससे पहले एक अप्रैल को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 250 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी की गयी थी। बता दें पेट्रोल-डीजल और एलपीजी उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लगना 22 मार्च से शुरू हुआ था। बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद एक अप्रैल को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गयी। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से अब बाहर खाना महंगा होने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि एक अप्रैल 2022 को एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 250 रुपये की बढ़ोतरी की थी। यह बढ़ोतरी 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर में की थी। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 2253 रुपये का हो गया था। घरेलू रसोई गैस की कीमत में 10 दिन पहले 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से अब बाहर खाना महंगा होने की उम्मीद जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, अभी 10 दिन पहले ही घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बढ़े थे, जबकि 22 मार्च को ही कॉमर्शियल सिलेंडर सस्ता हुआ था। नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में 949.50 रुपये, कोलकाता में 976 रुपये, मुंबई में 949.50 रुपये और चेन्नई में 965.50 रुपये में रीफिल हो रहा था। 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1 मार्च को दिल्ली में 2012 रुपये में रीफिल हो रहा था, 22 मार्च को घटकर 2003 रुपये पर आ गया। लेकिन फिर से दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर को रीफिल करवाने के लिए 2253 रुपये खर्च करने पड़ते थे। जानकारी के मुताबिक कोलकाता में 2087 रुपये के बजाय 2351 रुपये और मुंबई में 1955 की जगह 2205 रुपये खर्च करने पड़ते थे। चेन्नई में 2138 रुपये के बजाय 2406 रुपये खर्च करने पड़ते थे। बता दें कि, सरकार ने वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम में आई तेजी के बीच प्राकृतिक गैस का दाम एक अप्रैल से बढ़ाकर दोगुना से अधिक कर दिया है। इस गैस का उपयोग उर्वरक संयंत्रों, सीएनजी और पाइप के जरिये घरों में पहुंचने वाली रसोई गैस (पीएनजी) बनाने में किया जाता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार नियमित फील्डों से उत्पादित गैस की कीमत रिकॉर्ड 6.10 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (यूनिट) की गयी, जबकि अभी यह दर 2.90 डॉलर प्रति यूनिट है। इन क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी (ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का बसईं फील्ड शामिल है जो देश के सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है। सरकार हर छह महीने पर...एक अप्रैल और एक अक्टूबर...को दरें निर्धारित करती है। यह निर्धारण अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे अधिशेष गैस वाले देशों में जारी सालाना औसत कीमतों के आधार पर होता है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार गैस के दाम में वृद्धि से दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सीएनजी और पीएनजी की दरें 10 से 15% बढ़ सकती हैं। इक्रा लिमिटेड के उपाध्यक्ष और सह-प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, वैश्विक गैस केंद्रों पर दाम में तेजी के कारण घरेलू गैस की कीमतें बढ़ी हैं। गैस के दाम में वृद्धि से भारतीय गैस उत्पादक कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि पहले की कीमत पर ज्यादातर फील्डों से गैस उत्पादन घाटे का सौदा था। शहरों में सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति ओएनजीसी द्वारा उत्पादित गैस से होती है। कीमत वृद्धि से बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। लेकिन गैस से बिजली उत्पादन की मात्रा बहुत अधिक नहीं होने से उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं होगा। इसके अलावा, उर्वरक उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। लेकिन सरकार उर्वरकों के लिये सब्सिडी देती है, ऐसे में दाम बढ़ने की संभावना नहीं है। यह नवंबर 2014 और मार्च 2015 के बीच ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड को पुराने क्षेत्रों के लिए भुगतान किए गए 5.05 डॉलर और अप्रैल-सितंबर 2019 में नये क्षेत्रों के लिए 9.32 डॉलर प्रति यूनिट के बाद लगातार दूसरी और अच्छी बढ़ोतरी है। नई दरें वैश्विक मानक दरों...अमेरिका के हेनरी हब, कनाडा के अल्बर्ट गैस, ब्रिटेन के एनबीपी और रूस गैस... में वृद्धि के साथ-साथ तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की दरों में वृद्धि को प्रतिबिंबित करती हैं। आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ मांग बढ़ने से ईंधन के दाम बढ़े हैं।

Published / 2022-05-01 13:52:39
3.22% और बढ़ी ATF कीमत, रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा विमान ईंधन

एबीएन बिजनेस डेस्क। विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में 3.22 प्रतिशत की और वृद्धि की गई है। इससे इसके दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। इस साल यानी 2022 में विमान ईंधन कीमतों में यह नौवीं बढ़ोतरी है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर विमान ईंधन पर भी पड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में एटीएफ की कीमतों में 3,649.13 रुपए प्रति किलोलीटर या 3.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब राष्ट्रीय राजधानी में एटीएफ का दाम 1,16,851.46 रुपए प्रति किलोलीटर (116.8 रुपए लीटर) पर पहुंच गया है। इस बीच, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार 25वें दिन कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले वाहन ईंधन के दामों में रिकॉर्ड 10-10 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। विमान ईंधन की कीमतों में हर महीने की पहली और 16 तारीख को संशोधन किया जाता है। वहीं पेट्रोल और डीजल कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों के दामों के अनुरूप प्रतिदिन संशोधन होता है। इससे पहले 16 मार्च को एटीएफ के दाम 18.3 प्रतिशत या 17,135.63 रुपए प्रति किलोलीटर बढ़ाए गए थे। वहीं एक अप्रैल को भी विमान ईंधन दो प्रतिशत या 2,258.54 रुपए प्रति किलोलीटर महंगा हुआ था। 16 अप्रैल को इसकी कीमतों में मामूली 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। मुंबई में एटीएफ का दाम अब 1,15,617.24 रुपए प्रति किलोलीटर हो गया है। कोलकाता में यह 1,21,430.48 रुपए और चेन्नई में 1,20,728.03 रुपए प्रति किलोलीटर हो गया है। स्थानीय करों की वजह से विभिन्न राज्यों में एटीएफ का दाम अलग-अलग होता है। किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत में विमान ईंधन का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत होता है। 2022 की शुरुआत से एटीएफ का दाम हर पखवाड़े में बढ़ाया गया है। एक जनवरी से नौ बार में एटीएफ कीमतों में 42,829.55 रुपए प्रति किलोलीटर या 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Published / 2022-04-28 17:35:32
12% तक बढ़े सीमेंट के दाम, आम आदमी से लेकर सरकार के बजट पर गहरा असर

एबीएन बिजनेस डेस्क। सीमेंट का कट्टा 30 रुपए से लेकर 50 रुपए तक महंगा हो गया। लागत बढ़ने से कंपनियों ने सीमेंट के दाम 12 फीसदी तक बढ़ा दिए। सीमेंट की महंगाई के बाद घर खरीदना या उसकी मरमम्त और महंगी हो जाएगी। सिर्फ घर ही क्यों सड़क, पुल, पुलिया, स्कूल समेत तमाम प्रोजेक्ट्स की कंस्ट्रक्शन लागत में भी इजाफा होगा। यानी आने वाले दिनों में किसी सरकारी प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ती दिखे या गांव से सटे किसी सरकारी प्रोजेक्ट में देहाड़ी मजदूरों की मांग घटे तो चौकिंएगा नहीं...। सीमेंट की बढ़ी कीमतों का असर आम आदमी से लेकर सरकार के बजट तक हर जगह है। किसी बिल्डिंग के निर्माण में स्टील के बाद सबसे ज्यादा लागत सीमेंट की होती है। कंस्ट्रक्शन लागत में स्टील का योगदान लगभग 25 फीसदी रहता है, जबकि सीमेंट का 16-17 फीसद के करीब…स्टील महंगा होने से पहले ही कंस्ट्रक्शन लागत बढ़ी हुई है और अब सीमेंट की बढ़ी हुई कीमतें इस लागत को और बढ़ा रही है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का हवाला देकर कीमतें बढ़ा रही हैं। आयातित कोयले के दाम आसमान पर हैं। जिस वजह से सीमेंट उत्पादन पर खर्च बढ़ गया है। ऊपर से पेट्रोल डीजल के महंगा होने से परिवहन की लागत भी बढ़ी है। सीमेंट कंपनियों का मानना है कि उनकी उत्पादन लागत में 60-70 रुपए प्रति बैग बढ़ोतरी हुई है। जबकि कीमतों इतनी नहीं बढ़ी…. यानी सीमेंट की कीमतों में इजाफे की एक लहर और आ सकती है। सीमेंट की कीमतें ऐसे समय बढ़ी हैं। जब अर्थव्यवस्था कोरोना की मार से उबर रही है और देश में खपत बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि वित्तवर्ष 2022-23 के दौरान देश में सीमेंट की खपत 7-8 फीसद बढ़कर 38.2 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। पिछले वित्तवर्ष में खपत 35.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है। बढ़ती मांग में कीमतें बढ़ने का फायदा सीमेंट कंपनियों की बैलेंसशीट में दिखेगा.. हां सीमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों को महंगाई की एक लड़ाई यहां भी लड़नी होगी।

Published / 2022-04-23 08:57:22
...और महंगा होगा खाने का तेल, इंडोनेशिया ने पाम ऑयल निर्यात पर लगाया बैन

एबीएन बिजनेस डेस्क। दुनिया के सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादक और निर्यातक इंडोनेशिया ने अपने देश में ही इसकी किल्लत के चलते निर्यात पर रोक लगा दी है। यह रोक 28 अप्रैल से शुरू होगी और किल्लत खत्म होने तक चलेगी। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने शुक्रवार को कहा, मैं खुद इसकी निगरानी करूंगा ताकि देश में खाद्य तेल की आपूर्ति पर्याप्त रहे और कीमत भी कम रहे। दरअसल, खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से इंडोनेशिया में ज्यादातर पाम ऑयल उत्पादक इसका निर्यात करने लगे थे। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया के कई देश अपने यहां खाद्यान आपूर्ति सामान्य और कीमतें स्थिर रखने के लिए कृषि उत्पादों के निर्यात को सीमित या प्रतिबंधित कर रहे हैं। वनस्पति तेल सप्लायर अर्जेंटीना ने सोयाबीन तेल पर निर्यात कर बढ़ा दिया है। ग्लोबल मार्केट में बढ़ सकती हैं कीमतें : इंडोनेशिया द्वारा बैन की घोषणा के बाद अमेरिकी सोया तेल वायदा 3% से ज्यादा उछलकर 84.03 सेंट प्रति पाउंड के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा। ट्रेड बॉडी सॉल्वेंट एक्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि यह कदम पूरी तरह से अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कदम से न केवल सबसे बड़े खरीदार भारत में बल्कि विश्व स्तर पर उपभोक्ताओं को नुकसान होगा, क्योंकि पाम दुनिया का सबसे अधिक खपत वाला तेल है। जनवरी में भी लगाया गया था बैन : इससे पहले जनवरी में इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर बैन लगाया था, हालांकि बैन को मार्च में हटा लिया गया था।

Published / 2022-04-17 17:54:25
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बरकरार रहेगा UPI का दबदबा!

एबीएन बिजनेस डेस्क।बीएनपीएल और डिजिटल मुद्रा जैसे नए तरीकों के भविष्य के भुगतान को परिभाषित करने की संभावना के बावजूद खुदरा ऑनलाइन लेनदेन मंच यूपीआई का देश में डिजिटल भुगतान परिदृश्य में दबदबा कायम रहने की संभावना है। पीडब्ल्यूसी इंडिया ने अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), बाय नाउ पे लैटर (बीएनपीएल), सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) और ऑफलाइन भुगतान अगले पांच वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान की वृद्धि को गति देते रहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई का डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ा योगदान बना रहेगा और उसके बाद बीएनपीएल का स्थान होगा। पीडब्ल्यूसी की "द इंडियन पेमेंट्स हैंडबुक 2021-26" शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार में संख्या के हिसाब से 23 फीसदी की मजबूत वृद्धि देखी गई है और इसके वित्त वर्ष 2025-26 तक 217 अरब लेनदेन तक पहुंचने की संभावना है। मूल्य के हिसाब से यह आंकड़ा अगले पांच वर्षों में 5,900 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020-21 में यूपीआई के जरिए 22 अरब डिजिटल लेनदेन हुए थे और वर्ष 2025-26 तक इसके 169 अरब लेनदेन हो जाने की संभावना है। इस तरह सालाना आधार पर 122 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई के जरिए कम मूल्य वाले लेनदेन और सीमापार पैसे भेजने के लिए एशिया के अन्य देशों के साथ साझेदारी होने से भी इस वृद्धि को मजबूती मिल रही है। वहीं बीएनपीएल के जरिए फिलहाल 36,300 करोड़ रुपए मूल्य के करीब 363 अरब लेनदेन हुए हैं जिसके अगले पांच साल में 3,19,100 करोड़ रुपए मूल्य के 3,191 अरब लेनदेन हो जाने की उम्मीद है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के भागीदार एवं भुगतान बदलाव प्रमुख मिहिर गांधी ने कहा, नियामकों, बैंकों, भुगतान एवं वित्त-प्रौद्योगिकी कंपनियों के अलावा कार्ड नेटवर्क एवं सेवाप्रदाताओं के मिले-जुले प्रयासों से डिजिटल भुगतान उद्योग में आने वाले वर्षों में जबर्दस्त वृद्धि की संभावना नजर आ रही है।

Published / 2022-04-17 04:51:26
झारखंड : सुधा डेयरी का दूध दो रुपये प्रति लीटर हुआ महंगा

टीम एबीएन, रांची। बिहार झारखंड का सबसे लोकप्रिय पैक्ड दूध सुधा दूध झारखंड में महंगा हो गया है। रविवार 17 अप्रैल से झारखंड में दूध की नई दरें लागू हो गई है। इस दूध की आपूर्ति करने वाली कंपनी बिहार स्टेट मिल्क को-आपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कम्फेड) ने सुधा डेयरी के दूध की कीमत झारखंड में बढ़ाने की घोषणा की थी। बिजली, पेट्रोलियम पदार्थों, पॉलिथीन, मानव बल आदि के खर्च में वृद्धि के साथ ही पशुपालकों की मांग को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। सुधा दूध की नई दरें झारखंड में लागू हो गई है। प्रति लीटर दूध की कीमत में औसतन दो रुपये की वृद्धि की गयी है, इससे पहले भी सुधा दूध की कीमत में 07 फरवरी 2021 और 21 सितंबर 2021 को वृद्धि की गयी थी। सुधा की दही के दाम में अभी कोई वृद्धि नहीं की गई है। नई दर के अनुसार एक लीटर सादा दूध (टोन्ड) 47 रुपये प्रति लीटर, हाफ लीटर सादा दूध (टोन्ड) 24 रुपये, क्रीम दूध 52 रुपये प्रति लीटर और आधा लीटर क्रीम दूध की कीमत 26 रुपये कर दी गयी है। इससे पूर्व इसकी कीमत 45 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं हाफ लीटर दूध का मूल्य 23 रुपये क्रीम दूध 50 रुपये प्रति लीटर और हाफ लीटर की कीमत 25 रुपये थी।

Page 55 of 75

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse