एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा समूह की कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड तगड़ी शॉपिंग की तैयारी में है। दरअसल, टाटा कंज्यूमर पांच ब्रांड को खरीदने के लिए चर्चा कर रही है। इसके जरिए कंपनी कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा कि कंपनी Tetley चाय और Eight O’Clock कॉफी बेचती है और अब कई कंपनियों के साथ गंभीरता से जुड़ने पर विचार कर रही है। हालांकि, डिसूजा ने उन ब्रांड की जानकारी नहीं दी, जिसे खरीदने की योजना पर काम हो रहा है। आपको बता दें कि टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का गठन 2020 में हुआ था। इसने बोतलबंद पानी की कंपनी NourishCo Beverages और अनाज ब्रांड Soulfull जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदकर अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के नए कदम से समूह को मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल के अलावा वैश्विक दिग्गज यूनिलीवर के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में रिलायंस दर्जनों छोटे किराना और नॉन-फूड ब्रांड्स का अधिग्रहण कर सकती है। रिलायंस का लक्ष्य 6.5 अरब डॉलर कंज्यूमर गुड्स के कारोबार का है। टाटा के विस्तार की नई योजना ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर गंभीर मुद्रास्फीति की वजह से कंपनियों की मुश्किलें बढ़ी हैं। यूक्रेन में युद्ध, राष्ट्रीय कृषि-वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध और सप्लाई चेन में दिक्कतों की वजह से इनपुट लागत बढ़ी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक की चिंताओं के बीच थोक महंगाई ने तीन दशक के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक थोक महंगाई अप्रैल में बढ़कर 15.08 फीसदी हो गई, जो मार्च में 14.55 फीसदी थी। आपको बता दें कि अप्रैल 2021 से लगातार थोक महंगाई दहाई अंक में बनी हुई है। अप्रैल में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 8.35 फीसदी रही, जो मार्च में 8.06 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति एक महीने पहले के 34.52% से बढ़कर 38.66 फीसदी हो गई। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति मार्च के 10.71 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 10.85 फीसदी हो गई।वहीं, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की मुद्रास्फीति अप्रैल में 69.07 प्रतिशत थी। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा, अप्रैल 2022 में मुद्रास्फीति की ऊंची दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक की ओर से तरह-तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। बीते दिनों केंद्रीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 4.40 फीसदी हो गई है। आरबीआई के इस कदम से होम-कार लोन की ब्याज दर बढ़ने लगी हैं। वहीं, आरबीआई ने कैश रिजर्व रेशियो को भी बढ़ाने का ऐलान किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के शेयर मंगलवार को एनएसई पर 8.11 प्रतिशत गिरकर सूचीबद्ध हुए। एनएसई पर शेयर 949 रुपए के निर्गम मूल्य के मुकाबले 872 रुपए प्रति शेयर के भाव पर सूचीबद्ध हुए। बीएसई पर एलआईसी के शेयर 8.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 867.20 रुपए पर सूचीबद्ध हुए। सरकार को 20,557 करोड़ रुपए के इस आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए घरेलू निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। सरकार ने एलआईसी के शेयरों का निर्गम मूल्य 949 रुपये प्रति शेयर तय किया है। हालांकि, एलआईसी के पॉलिसीधारकों और खुदरा निवेशकों को क्रमश: 889 रुपए और 904 रुपए प्रति शेयर के भाव पर शेयर मिले। नौ मई को बंद हुआ था आईपीओ : एलआईसी का आईपीओ नौ मई को बंद हुआ था और 12 मई को बोली लगाने वालों को इसके शेयर आवंटित किए गए। सरकार ने आईपीओ के जरिये एलआईसी के 22.13 करोड़ से अधिक शेयर यानी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की पेशकश की है। इसके लिए कीमत का दायरा 902-949 रुपये प्रति शेयर रखा गया था। एलआईसी के आईपीओ को करीब तीन गुना अभिदान मिला था। इसमें घरेलू निवेशकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जबकि विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया ठंडी रही। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेलवे ने मार्च 2020 से दो वर्षों में वरिष्ठ नागरिक यात्रियों से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है, जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद वरिष्ठ नागरिकों को टिकट पर दी जाने वाली रियायत निलंबित कर दी गई थी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब से यह जानकारी मिली। मध्य प्रदेश के चंद्रशेखर गौर द्वारा दायर आरटीआई के सवाल के जवाब में रेलवे ने कहा कि 20 मार्च, 2020 और 31 मार्च, 2022 के बीच रेलवे ने 7.31 करोड़ वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को रियायतें नहीं दीं। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के 4.46 करोड़ पुरुष, 58 से अधिक आयु की 2.84 करोड़ महिलाएं और 8,310 ट्रांसजेंडर लोग शामिल हैं। आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, इस अवधि के दौरान वरिष्ठ नागरिक यात्रियों से प्राप्त कुल राजस्व 3,464 करोड़ रुपये है, जिसमें रियायत के निलंबन के कारण अर्जित अतिरिक्त 1,500 करोड़ रुपये शामिल हैं। वरिष्ठ नागरिकों से कुल राजस्व में लिंगवार राजस्व पर आरटीआई के उत्तर में कहा गया है कि पुरुष यात्रियों से 2,082 करोड़ रुपये, महिला यात्रियों से 1,381 करोड़ रुपये और ट्रांसजेंडर से 45.58 लाख रुपये राजस्व मिले। महिला वरिष्ठ नागरिक यात्री 50 प्रतिशत रियायत के लिए पात्र होते हैं, जबकि पुरुष और ट्रांसजेंडर सभी वर्गों में 40 प्रतिशत छूट का लाभ उठा सकते हैं। एक महिला के लिए रियायत का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 58 है, जबकि एक पुरुष के लिए यह 60 वर्ष है। देश के कोरोनावायरस महामारी की चपेट में आने के बाद मार्च 2020 से जिन रियायतों को रोक दिया गया था, वे आज तक निलंबित हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि उन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता है। वर्ष 2020 में और 2021 में कुछ समय तक ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं, लेकिन अब सेवाओं के सामान्य होते ही रियायतों की मांग उठने लगी है। पिछले दो दशकों में रेलवे की रियायतें बहुत चर्चा का विषय रही हैं, जिसमें कई समितियों ने उन्हें वापस लेने की सिफारिश की है। इसका नतीजा यह हुआ कि जुलाई 2016 में रेलवे ने बुजुर्गों के लिए रियायत को वैकल्पिक बना दिया। विभिन्न प्रकार के यात्रियों को दी जाने वाली लगभग 53 प्रकार की रियायतों के कारण रेलवे पर हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ता है। वरिष्ठ नागरिक रियायत रेलवे द्वारा दी गई कुल छूट का लगभग 80 प्रतिशत है। इससे पहले रेलवे ने लोगों को अपने वरिष्ठ नागरिक रियायतों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की थी, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक यात्रियों की गिव इट अप योजना की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 4.41 करोड़ वरिष्ठ नागरिक यात्रियों में से 7.53 लाख (1.7 फीसदी) ने 50 फीसदी रियायत छोड़ने का विकल्प चुना और 10.9 लाख (2.47 फीसदी) ने 100 फीसदी रियायत छोड़ दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। टेस्ला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एलन मस्क ने सोमवार को संकेत दिए कि वह माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के अधिग्रहण के लिए 44 अरब डॉलर से कम राशि का भुगतान करना चाहेंगे। मस्क ने पिछले महीने साइट की खरीदारी के लिए 44 अरब डॉलर की पेशकेश की थी। ब्लूमबर्ग न्यूज की एक खबर के मुताबिक, मियामी में आयोजित एक टेक सम्मेलन में मस्क ने कहा कि ट्विटर के अधिग्रहण के संबंध में एक कम कीमत वाला व्यवहार्य समझौता संभव है। वेबसाइट ने एक ट्विटर यूजर द्वारा प्रसारित सम्मेलन के लाइव वीडियो के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इन समिट में मस्क ने अनुमान जताया कि ट्विटर पर मौजूद 22.9 करोड़ अकाउंट में से कम से कम 20 फीसदी अकाउंट स्पैम बोट द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। स्पैम बोट इंटरनेट पर मौजूद उन स्वचालित सॉफ्टवेयर को कहते हैं, जो उपयोगकर्ताओं को बड़ी संख्या में स्पैम संदेश भेजते हैं या फिर ऑनलाइन मंचों पर बड़ी तादाद में स्पैम संदेश पोस्ट करते हैं। स्पैम संदेश का स्रोत इन्हें प्राप्त करने वाले लोगों को भी मालूम नहीं होता है। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उन्होंने ट्विटर के CEO पराग अग्रवाल के उन ट्वीट को लेकर उन पर निशाना साधा है, जिनमें कहा गया कि ट्विटर स्पैम बोट से निपटने की कवायद में जुटा है और साइट पर मौजूद पांच फीसदी से भी कम अकाउंट फर्जी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। आधिकारिक अधिसूचना से यह जानकारी मिली है। हालांकि, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा कि इस अधिसूचना की तारीख या उससे पहले जिस खेप के लिए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (LOC) जारी किए गए हैं, उसके निर्यात की अनुमति होगी। डीजीएफटी ने कहा कि गेहूं की निर्यात नीति पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है...। उसने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर दी गई अनुमति के आधार पर गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी। एक अलग अधिसूचना में डीजीएफटी ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की। डीजीएफटी ने कहा कि प्याज के बीज की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी के तहत रखा जाता है। पहले प्याज के बीज का निर्यात प्रतिबंधित था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में खुदरा महंगाई दर उच्च स्तर पर पहुंच गई है। खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में सालाना आधार पर बढ़कर 7.79 प्रतिशत हो गई, जो आठ साल का सबसे ऊंचा स्तर है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी, और यह रिजर्व बैंक के लक्ष्य की ऊपरी सीमा से लगातार चौथे महीने ऊपर रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई इस साल मार्च में 6.95 फीसदी और अप्रैल, 2021 मंर 4.23 प्रतिशत थी। खाद्य मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 8.38 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने में 7.68 प्रतिशत और एक साल पहले इसी महीने में 1.96 प्रतिशत थी। सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के स्तर पर रहे, जिसमें ऊपर-नीचे दो प्रतिशत तक घट-बढ़ हो सकती है। जनवरी, 2022 से खुदरा मुद्रास्फीति छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। पिछले महीने रिजर्व बैंक की अचानक आयोजित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का प्रतिकूल प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है, और आगे मुद्रास्फीति का दबाव जारी रहने की संभावना है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट आयी। वैश्विक स्तर पर नकारात्मक रूख के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रतिशत और नीचे आ गये। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से भी बाजार की धारणा प्रभावित हुई। अप्रैल की मुद्रास्फीति और मार्च के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों की घोषणा से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,158.08 अंक यानी 2.14 प्रतिशत फिसलकर 53,000 अंक के स्तर से नीचे 52,930.31 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,386.09 अंक तक फिसलकर 52,702.30 अंक के स्तर तक आ गया था। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 359.10 अंक यानी 2.22 प्रतिशत लुढ़कर 15,808 अंक पर बंद हुआ। मेहता इक्विटीज के उपाध्यक्ष-शोध प्रशांत तापसे ने कहा, ह्यइसमें कोई शक नहीं है कि गिरावट का सबसे बड़ा कारण सभी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति है। दुनियाभर के शेयर बाजारों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों को लेकर अगले कदम पर टिकी हुई है। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंडसइंड बैंक, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, टाइटन, एनटीपीसी और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर नुकसान में रहे। दूसरी तरफ केवल विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर लाभ में थे। एशिया के अन्य बाजारों... जापान का निक्की, हांगकांग का हैंगसेंग, चीन का शंघाई कंपोजिट और दक्षिण कोरियो के कॉस्पी में भी गिरावट रही। यूरोप के बाजार दोपहर के सत्र में नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे। इसके पहले अमेरिकी शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.02 प्रतिशत गिरकर 105.7 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 3,609.35 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse