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Published / 2022-07-09 13:41:45
कारों में खराबी : फोर्ड कंपनी ने वापस बुलाई एक लाख से ज्यादा गाड़ियां

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिका की बड़ी कार निमार्ता कंपनी फोर्ड मोटर ने गाड़ियों में आई खराबी की वजह से ग्राहकों से करीब एक लाख कारें वापस मंगाने के लिए रिकॉल जारी किया है। फोर्ट की तरह से ये सप्ताह में जारी किया गया दूसरा रिकॉल है। रिकॉल आॅर्डर संदिग्ध वाहनों में संभावित आग के जोखिमों की जांच के लिए जारी किया गया है। इससे पहले 60,000 कारों की जांच के लिए इसी तरह का रिकॉल आॅर्डर जारी किया गया था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, डीलरों को इंजन शील्ड और ग्रिल शटर को ठीक करने के लिए कहा जा रहा है ताकि इस समस्या से बचा जा सके। अब तक, इस संभावित आग जोखिम के कारण किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। ये है कारों में खराबी : फोर्ड के लेटेस्ट रिकॉल में 2020 और 2022 के बीच निर्मित हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड इंजन के साथ फोर्ड एस्केप, मावेरिक और लिंकन कॉर्सयर जैसी कारें शामिल है। संभावित समस्या ऐसी स्थिति से संबंधित है जहां इंजन फेल होने के मामले में इंजन का तेल और भाप निकल सकता है और अगर इग्निशन सोर्स के पास ये तेल पहुंच तो इंजन में आग भी लग सकती है। कंपनियां जारी कर रहीं सेफ्टी रिकॉल : देश के आॅटोमोटिव सेफ्टी रेगुलेटरी बॉडी मॉडल वाली कंपनियों के खिलाफ नकेल कसना शुरू कर दिया है। इस वजह से कंपनियां अब जोखिम लेने से बच रही हैं और चेक करने के लिए रिकॉल आॅर्डर जारी करने में काफी सक्रिय हो गई हैं। ऐसे लगभग सभी मामलों में ये जांच होती है और यदि आवश्यक हो तो मरम्मत भी जाती है। कुछ दिन पहले भी किया था रिकॉल : इससे कुछ दिन पहले फोर्ड मोटर ने ग्राहकों से करीब 30 लाख कारों को वापस बुलाया था। बताया जा रहा है कि कंपनी ने यह फैसला कारों में आई बड़ी खराबी की वजह से लिया है। अमेरिका के नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, जिन कारों में खराबी का पता लगा है, वे सभी कारें 2013 और 2021 के बीच बनाई गई थीं। इसमें कई मॉडल शामिल थे।

Published / 2022-07-09 04:34:41
टेस्ला को धूल चटाने के ट्वीट पर आनंद महिंद्रा का रिट्वीट, बोले- आपके मुंह में घी शक्कर

एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला ने फिलहाल भारत आने की योजना टाल दी है। टेस्ला दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है और इसके सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे बड़े रईस हैं। मस्क चाहते थे कि टेस्ला को भारत में कार बेचने की अनुमति दी जाए और विदेश से मंगाई जाने वाली कारों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाए लेकिन भारत सरकार ने उसकी इस मांग को ठुकरा दिया था। फॉर्चून की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कारें बन रही हैं जो टेस्ला को धूल चटा सकती हैं। सोडियम आयन बैटरी बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी Faradion ने इसे ट्वीट किया था। महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इसी रिट्वीट करते हुए लिखा, आपके मुंह में घी शक्कर। भारत में टाटा और महिंद्रा सहित कई कंपनियां इलेक्ट्रिक कारें बना रही हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इलेक्ट्रिक कारों के लिए बड़ी योजना बनाई है। कंपनी को वित्त वर्ष 2027 तक दो लाख इलेक्ट्रिक कारें बेचने का भरोसा है। कंपनी ईवी बिजनेस पर एक अरब डॉलर से अधिक निवेश कर रही है। उसकी योजना अगले पांच साल में पांच इलेक्ट्रिक वीकल निकालने की है। कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 से उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 20 से 30 फीसदी होंगी। मस्क ने हाल में ट्वीट किया था कि टेस्ला किसी भी ऐसी जगह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाएगी जहां उसे पहले अपने कारों को बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। मस्क चाहते थे कि भारत सरकार टेस्ला को चीन से कारें आयात करने का लाइसेंस दे और इस कारों पर कोई इम्पोर्ट ड्यूटी न लगाई जाए लेकिन भारत सरकार ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों की नई जेनरेशन डेवलप हो रही है। ये गाड़ियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में टेस्ला की छुट्टी कर सकती हैं। इसकी वजह यह है कि भारत में आधुनिक तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रिक कारें बन रही है जबकि टेस्ला की तकनीक एक दशक पुरानी है।

Published / 2022-07-08 16:12:17
विकसित बाजारों से आगे सेंसेक्स

एबीएन बिजनेस डेस्क (कृष्ण कांत)। भारतीय शेयर बाजार ने अब उत्तर अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में अपने प्रतिस्पर्द्धी बाजारों को प्रदर्शन के मामले में पछाड़ दिया है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले एक महीने के दौरान 9 प्रतिशत तक उछल गया है, जबकि इसी अवधि में डाऊ जोंस में महज 3 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई है। इसी दौरान यूनाइटेड किंगडम का मानक सूचकांक एफटीएसई 100 में 2.1 प्रतिशत, फ्रांस के सीएससी 40 सूचकांक में 7.3 प्रतिशत और जर्मनी के डीएएक्स इंडेक्स में 6 प्रतिशत तेजी देखी गई है। इसके उलट पिछले एक वर्ष के दौरान सेंसेक्स विकसित बाजारों के शेयर सूचकांकों से कमजोर रहा है। उदाहरण के लिए पिछले वर्ष जून से सेंसेक्स में 11.3 प्रतिशत कमी आई है, जबकि इसके मुकाबले न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.6 प्रतिशत तेजी रही है। इसी तरह, जर्मनी के डीएक्स में 1.6 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई है। भारतीय बाजार तीन वर्ष की अवधि में भी अमेरिकी बाजारों से प्रदर्शन के मामले में कमजोर रहा है। पिछले तीन वर्ष के दौरान सेंसेक्स में 12.3 प्रतिशत तेजी दिखी है, जबकि डाऊ जोन्स 20.3 प्रतिशत बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा है। हालांकि पिछले एक महीने में भारतीय बाजारों में आपेक्षिक तेजी को विशेषज्ञ अधिक तवज्ज्जो नहीं दे रहे हैं। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के निदेशक यू आर भट्ट ने कहा,पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बाजार में तेजी जरूर आई है, लेकिन इसके पीछे तकनीकी कारण है। देश में कोविड-19 के बढ़ते मामले के मद्देनजर कंपनियों की आय कमजोर रहेगी। लिहाजा मौजूदा तेजी को अधिक तूल नहीं दिया जा सकता। कुछ विशेषज्ञों की नजर में विकसित बाजारों में मौद्रिक प्रसार के प्रभाव से भारत जैसे तेजी से उभरते बाजारों में तेजी दिख रही है।

Published / 2022-07-08 13:41:00
शेयर बाजार : टाइटन और एचयूएल के शेयर चमके, ओएनजीसी टूटा

एबीएन बिजनेस डेस्क। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी भारतीय शेयर बाजार में हरियाली नजर आई है। सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स में 303.38 अंक (0.56%) की तेजी देखने को मिली है यह इंडेक्स 54,481.84 के लेवल पर बंद हुआ है। इसके अलावा निफ्टी 50 इंडेक्स अच्छी खासी मजबूती देखने को मिली है। निफ्टी 16200 के महत्वपूर्ण लेवल के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार बंद होने के समय निफ्टी 50 में करीब 100 अंकों तक की तेजी देखने को मिली है।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार के कारोबार में 1911 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली तो 1374 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। 155 शेयरों की कीमतों में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया है। निफ्टी के टॉप गेनर्स की लिस्ट में शुक्रवार को Titan Co (10%), HUL (9.5%), UPL (7.5%) और L&T (7.3%) जैसे शेयर रहे हैं। वहीं टॉप लूजर्स की लिस्ट में ONGC, HDFC LIFE, JSW STEEL और टीसीएस जैसे शेयर रहे हैं।

Published / 2022-07-06 08:17:50
घरेलू रसोई गैस के दाम 50 रुपये बढ़े

एबीएन बिजनेस डेस्क। आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। 14.2 kg वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं। इनकी कीमत में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। राजधानी दिल्ली में अब घरेलू LPG सिलेंडर 1053 रुपये में मिलेगा। 14.2 kg वाले सिलेंडर के साथ-साथ 5kg वाले छोटे घरेलू सिलेंडर के दाम भी बढ़ गये हैं। इसके दाम में 18 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई है। दूसरी तरफ 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटाये गये हैं। इसकी कीमत में 8.50 रुपये प्रति सिलेंडर कम की गई है। हालांकि, यह राहत बहुत ज्यादा नहीं है। कुछ दिन पहले ही कमर्शियल सिलेंडर के दामों में 198 रुपये कम किये गए थे जो कि बड़ी राहत थी। उस फैसले के बाद राजधानी दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम 2021 रुपये हो गये थे, लेकिन अब 8.50 रुपये और घटने से कीमत 2012 रुपये के करीब आ जाएगी।

Published / 2022-07-05 16:37:24
सबसे बड़ी मंडी में भी प्याज ने दिया किसानों को झटका

एबीएन बिजनेस डेस्क। महाराष्ट्र में प्याज की खेती करने वाले किसानों की समस्या कम नही हो रही हैं। पिछले तीन-चार महीने से प्याज के गिरते दाम के कारण किसान परेशानी में हैं। उनकी लागत नहीं निकल पा रही है। अभी तक राज्य के कई जिलों में किसानों को प्याज का दाम का 200 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक का न्यूनतम रेट मिल रहा है। मंगलवार को सूबे की कई मंडियों में प्याज का दाम एक बार फिर गिरकर 1 से 1.5 रुपये प्रति किलो तक रह गया। जबकि लागत 1500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक आती है। प्याज के गिरते दाम के चलते किसान अब इसकी खेती छोड़ सोयाबीन और कपास की ओर रुख कर रहे हैं। जिन किसानों के पास स्टोरेज की सुविधा है वो अभी तक प्याज का स्टॉक करके रखे हुए हैं। क्योंकि उन्हें अगस्त और सितंबर तक अच्छे दाम की उम्मीद है। लेकिन जिनके पास ऐसा इंतजाम नहींं है वो औने-पौने दाम पर प्याज बेचने के लिए मजबूर हैं। हालात ये है कि प्याज की जिस लासलगांव मंडी को लेकर महाराष्ट्र के किसान गर्व महसूस करते हैं वो भी अब उन्हें निराश करवा रही है। यह एशिया की सबसे बड़ी प्याज की मंडी है, लेकिन यहां न्यूनतम दाम 4 जुलाई को सिर्फ 500 रुपये प्रति क्विंटल रहा। निफाड़ मंडी में भी यही रेट रहा। किसानों को प्याज का सबसे कम दाम नासिक, अहमदनगर और सोलापुर की मंडियों में मिल रहा है। कुछ किसानों को उम्मीद है कि बांग्लादेश में एक्सपोर्ट से दाम में कुछ तेजी आ सकती है। नई समस्या का सामना कर रहे प्याज उत्पादक किसान : जिन किसानों ने प्याज स्टोर किया है उन्हें अब एक नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जिलों में तेज बारिश के कारण स्टॉक किया हुआ प्याज खराब हो रहा है। इसलिए किसान फटाफट प्याज बेचना चाहते हैं। प्याज उत्पादक संगठन, महाराष्ट्र के अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि सिर्फ 10 फीसदी ही किसानों के पास स्टोरेज की सही और अच्छी सुविधा है। अब जिनके पास सुविधा है वो भी प्याज सड़ने की समस्या से जूझने लगे हैं। दिघोले का कहना है कि बांग्लादेश में प्याज एक्सपोर्ट से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। दाम में कम से कम 3 से 4 रुपये प्रति किलो की तेजी आ सकती है। हालांकि, अभी ईद के त्यौहार के चलते बॉर्डर 7 से 8 दिन बंद रहा सकता है। यानी उसके बाद ही पता चल पाएगा कि इस एक्सपोर्ट से किसानों को कितना फायदा हो रहा है। फिलहाल तो देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक प्रदेश महाराष्ट्र में किसान परेशान हैं कि वो प्याज की खेती छोड़ दें या फिर अभी कुछ दिन घाटा सहकर बिक्री करें। विभिन्न मंडियों में प्याज की दर : औरंगाबाद मंडी में न्यूनतम दाम 150 रुपये प्रति क्विंटल रहा। जबकि औसत रेट 750 रुपये रहा। कराड मंडी में 5 जुलाई को यहां न्यूनतम दाम 200 रुपये क्विंटल और औसत रेट 1600 रुपये रहा। सोलापुर में प्याज का न्यूनतम दाम 100 क्विंटल जबकि औसत रेट 1000 रुपये रहा। जामखेड़ मंडी में न्यूनतम दाम 100 रुपये जबकि औसत रेट 900 रुपये प्रति क्विंटल रहा। येवला मंडी में न्यूनतम रेट 250 रुपये प्रति क्विंटल जबकि औसत 1050 रुपये रहा। अकोले मंडी में सिर्फ 863 क्विंटल प्याज की आवक हुई। फिर भी यहां न्यूनतम रेट 125 जबकि औसत दाम 1400 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

Published / 2022-07-05 12:43:14
डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, अभी और गिरेगा

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया की गिरावट बरकरार है। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को यह 42 पैसे गिरकर 79.37 रुपया प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 79.38 रुपया प्रति डॉलर के स्तर तक गया, जो अब तक का सबसे निचल स्तर है। आपको बता दें कि सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 78.95 पर बंद हुआ था। ताजा हालात को देखते हुए शेयर बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इसकी गिरावट का स्तर 80 रुपया प्रति डॉलर के पार जा सकता है। नोमुरा ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) द्वारा तेजी से बाहर निकलने की आशंका के बीच, रुपया 2022 की तीसरी तिमाही तक डॉलर के मुकाबले 82 के स्तर तक गिर सकता है। इस बीच, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 1.10 प्रतिशत गिरकर 112.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। घरेलू इक्विटी बाजार के मोर्चे पर, बीएसई सेंसेक्स 100.42 अंक या 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,134.35 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक एनएसई निफ्टी 24.50 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,810.85 पर बंद हुआ।

Published / 2022-07-03 16:33:10
जून में 29% बढ़कर 28 लाख टन पर पहुंची पेट्रोल की बिक्री, डीजल की खपत भी 35.2% बढ़ी

एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्थिक गतिविधियां तेज होने, गर्मियों की छुट्टियों में लोगों के यात्राएं करने तथा फसल बुवाई शुरू हो जाने से जून में भारत में पेट्रोल और डीजल की बिक्री बढ़ गई है। उद्योग के शुरुआती आंकड़ों में बताया है कि बुवाई का मौसम शुरू होने से डीजल की मांग दो अंक में बढ़ी है। इस ईंधन की बिक्री सालाना आधार पर 35.2 प्रतिशत बढ़कर जून में 73.8 लाख टन पर पहुंच गई। यह जून, 2019 की तुलना में 10.5 प्रतिशत और जून, 2020 के मुकाबले 33.3 फीसदी अधिक है। डीजल की बिक्री इस साल मई की तुलना में जून में 11.5 प्रतिशत अधिक रही। उस समय 67 लाख टन डीजल बिका था। उद्योग के सूत्रों ने डीजल की मांग में वृद्धि के बारे में कहा कि कृषि और परिवहन क्षेत्रों में अधिक खपत इसकी वजह है। सार्वजनिक क्षेत्र के ईंधन विक्रेताओं द्वारा पेट्रोल की बिक्री जून में 28 लाख टन रही जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक है। जून, 2020 की तुलना में पेट्रोल की खपत 36.7 फीसदी और जून, 2019 की तुलना में 16.5 प्रतिशत अधिक रही है। मासिक आधार पर बिक्री 3.1 फीसदी अधिक रही है। रसोई गैस यानी एलपीजी की बिक्री जून में 0.23 प्रतिशत बढ़कर 22.6 लाख टन रही। यह जून, 2020 के मुकाबले 9.6 फीसदी और जून, 2019 की तुलना में 27.9 फीसदी अधिक है। जून, 2021 की तुलना में एलपीजी बिक्री छह प्रतिशत अधिक रही है।

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