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Published / 2022-08-09 13:15:14
चालू वित्त वर्ष में 20 लाख वाहन बनायेगी मारुति सुजुकी : चेयरमैन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया ने सेमीकंडक्टर की आपूर्ति में सुधार से चालू वित्त वर्ष में करीब 20 लाख इकाइयों के उत्पादन का लक्ष्य रखा हुआ है जिसके लिए वह अपने उत्पादन में बढ़ोतरी भी करेगी। कंपनी के चेयरमैन आरसी भार्गव ने वित्त वर्ष 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को दिए गए अपने संदेश में कहा है कि चालू वित्त वर्ष में 20 लाख इकाइयों के उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने में नया एसयूवी मॉडल ग्रैंड विटारा एक अहम भूमिका निभाएगा। पिछले वित्त वर्ष में मारुति सुजुकी का उत्पादन 13.4 प्रतिशत बढ़कर 16.52 लाख इकाई रहा। अप्रैल-जून 2021 में महामारी की दूसरी लहर के कारण उत्पादन गतिविधियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद कंपनी ने यह उत्पादन आंकड़ा हासिल किया था। इसके अलावा सेमीकंडक्टर की आपूर्ति बाधित होने से भी कंपनी मांग के अनुरूप वाहनों की बिक्री नहीं कर पायी। भार्गव ने कहा, वित्त वर्ष 2021-22 के अंत में हम बुकिंग के बावजूद करीब 2.7 लाख वाहनों की आपूर्ति नहीं कर पाए। घरेलू बाजार में आपूर्ति कम होने की वजह से इसकी बाजार हिस्सेदारी भी करीब 50 फीसदी से कम होकर 43.4 फीसदी पर आ गई थी। भारतीय वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार में वर्ष 2021-22 में कुल 30,69,499 यात्री वाहनों की बिक्री हुई थी जबकि एक साल पहले 27,11,457 इकाई की बिक्री हुई थी। भार्गव ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपना आकलन पेश करते हुए कहा, सेमीकंडक्टर की उपलब्धता बेहतर होने से वाहन उत्पादन की स्थिति बेहतर होगी। अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने कुछ कदम भी उठाए हैं। हमने इस आंकड़े को 20 लाख इकाई तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वैसे इसे हासिल कर पाना एक चुनौती होगी। हालांकि उन्होंने कहा कि ग्रैंड विटारा मॉडल का उत्पादन टोयोटा के संयंत्र में होने से मारुति सुजुकी के लिए उत्पादन बढ़ाने की चुनौती को पूरा करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ग्रैंड विटारा मॉडल के आने से एसयूवी खंड में कंपनी की स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में अपनी पुरानी एसयूवी ब्रेजा को नए अवतार में उतारा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के संदर्भ में कंपनी चेयरमैन ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 से सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के गुजरात संयंत्र में इलेक्ट्रिक मॉडलों का उत्पादन शुरू हो जाएगा और मारुति इनकी बिक्री करेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि ईवी मॉडल के कार बाजार में अहम स्थान लेने में अभी वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी ने अपनी भावी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा के खरखोडा में नया उत्पादन संयंत्र लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संयंत्र के पहले चरण पर 11,000 करोड़ रुपए निवेश किए जाएंगे।

Published / 2022-08-06 17:51:13
नया रिकॉर्ड... एचपीसीएल को पहली तिमाही में 10,196.94 करोड़ का घाटा

एबीएन बिजनेस डेस्क। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने शेयर बाजारों को तिमाही नतीजों की जानकारी देते हुए कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में उसे एकल आधार पर 10,196.94 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह किसी भी तिमाही में एचपीसीएल को हुआ सबसे बड़ा घाटा है। एक साल पहले की समान अवधि में उसे 1,795 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। दरअसल, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की जिससे उन्हें परिचालन व्यय के अनुपात में राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। एचपीसीएल की तरह सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और बीपीसीएल ने भी बीती तिमाही में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। ऐसा बढ़ती मुद्रास्फीति पर काबू पाने की सरकार की कोशिशों को ध्यान में रखते हुए किया गया। कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने से आईओसी को भी इस तिमाही में 1,992.53 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि एचपीसीएल को तेल उत्पादन से अधिक बिक्री करने से ज्यादा बड़ा घाटा उठाना पड़ा है। एचपीसीएल को उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला राजस्व बीती तिमाही में बढ़कर 1.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 77,308.53 करोड़ रुपये रहा था। राजस्व वृद्धि की बड़ी वजह कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई बढ़ोतरी रही। अप्रैल-जून तिमाही में एचपीसीएल को हुए रिकॉर्ड घाटे ने रिफाइनिंग कारोबार से हुए रिकॉर्ड मार्जिन को भी फीका कर दिया। एचपीसीएल को वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रति बैरल कच्चे तेल पर 16.69 डॉलर की कमाई हुई जो एक साल पहले की समान अवधि में महज 3.31 डॉलर प्रति बैरल रही थी। एचपीसीएल ने अपने बयान में कहा, इस तिमाही में मोटर ईंधन और एलपीजी पर विपणन मार्जिन घटने से हमारी लाभप्रदता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके अलावा कंपनी को विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव होने से भी 945.40 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा का नुकसान झेलना पड़ा। एचपीसीएल ने अप्रैल-जून तिमाही में 13,496.66 करोड़ रुपये का कर-पूर्व घाटा दिखाया है जबकि पिछले साल की इसी अवधि में उसे 2,381.53 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। कंपनी को आलोच्य तिमाही में तेल बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद घाटा उठाना पड़ा है।

Published / 2022-08-06 07:43:35
वर्ष 2021-22 के लिए चीनी निर्यात कोटा में सरकार ने दी 12 लाख टन अधिक निर्यात की अनुमति

एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकार चीनी निर्यात पर एक करोड़ टन के मात्रात्मक प्रतिबंध में ढील देगी और सितंबर को समाप्त होने वाले चालू विपणन वर्ष में अतिरिक्त 12 लाख टन निर्यात खेप को अनुमति प्रदान करेगी। मई के अंत में, केंद्र ने चीनी की घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाये रखने के लिए विपणन वर्ष 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी निर्यात को एक करोड़ टन पर सीमित रखने का फैसला किया था। चीनी मिलों ने चालू विपणन वर्ष में अब तक लगभग एक करोड़ टन चीनी का निर्यात किया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। उद्योग की मांग रही है कि निर्यात सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। यहां एक कार्यक्रम से इतर खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि सरकार और 12 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना जारी की जायेगी। विपणन वर्ष 2020-21 में चीनी का निर्यात 70 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष के 59.6 लाख टन से अधिक है। खाद्य मंत्रालय ने इस सप्ताह के आरंभ में एक बयान में कहा था, मौजूदा चीनी सत्र 2021-22 में एक अगस्त 2022 तक लगभग 100 लाख टन (एक करोड़ टन) चीनी का निर्यात किया गया है और निर्यात के 112 लाख टन का स्तर छूने की संभावना है। उद्योग निकाय भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने अनुमान लगाया है कि इथेनॉल निर्माण के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ने के कारण भारत का चीनी उत्पादन अक्टूबर से शुरू होने वाले विपणन वर्ष 2022-23 में थोड़ा घट सकता है। सितंबर को समाप्त होने वाले चालू विपणन वर्ष में चीनी का उत्पादन 3.6 करोड़ टन होने का अनुमान है।

Published / 2022-08-04 15:29:14
गर्मी के साथ खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े, रिटेल महंगाई 6.8% रहने का अनुमान

एबीएन बिजनेस डेस्क। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि देश में 2022 की शुरूआत में पारा चढ़ना खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी का प्रमुख घरेलू कारण रहा है। एजेंसी ने 2021-22 के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2022-23 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.7 प्रतिशत के अनुमान से कुछ अधिक है। आरबीआई मुद्रास्फीति में वृद्धि का प्रमुख कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और उससे जिंसों के दाम में तेजी को बताता रहा है। महंगाई दर लगातार रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर (दो से छह प्रतिशत) के ऊपर बनी हुई है। फिलहाल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है। क्रिसिल रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, ह्यह्यखाद्य वस्तुओं की महंगाई दर का मुख्य कारण आपूर्ति की कमी है। आपूर्ति कम होने की वजह रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ घरेलू स्तर पर गर्मी का अचानक से बढ़ना है।' रेटिंग एजेंसी ने कहा, ह्यह्यहमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहेगी। यह खाद्य मुद्रास्फीति के सात प्रतिशत के स्तर पर रहने के अनुमान पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार मौद्रिक नीति समिति के समक्ष खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर एक बड़ी चुनौती है। गर्मी के बढ़ने से उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में औसत तापमान 122 साल के उच्चस्तर पर पहुंच गया था। पारा चढ़ने से गेहूं, मूंगफली, बाजरा और आम जैसे फसलों पर असर पड़ा है। क्रिसिल ने कहा, ह्यह्यलू चलना प्रमुख घरेलू कारण है जिससे इस साल खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। यह 2020 के आरबीआई के एक अध्ययन की ओर संकेत देता है। इसमें कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक आर्थिक प्रभाव पिछले दो दशकों में भारत के लिए सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण रहा है।

Published / 2022-08-01 08:15:54
रेपो दर में 0.25 से 0.35% की वृद्धि कर सकता है रिजर्व बैंक!

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कुछ दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक भी प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 से 0.35 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति पर अंकुश के लिए केंदीय बैंक आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर बढ़ा सकता है। केंद्रीय बैंक पहले ही अपने नरम मौद्रिक रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा कर चुका है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की द्विमासिक बैठक तीन अगस्त से शुरू हो रही है। बैठक के नतीजों की घोषणा पांच अगस्त को होगी। खुदरा मुद्रास्फीति छह माह से रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने मई और जून में रेपो दर में क्रमश: 0.40 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस सप्ताह प्रमुख नीतिगत दर को कम से कम महामारी-पूर्व के स्तर पर ले जाएगा। आगामी महीनों में इसमें और वृद्धि होगी। बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है, हमारा मानना है कि एमपीसी पांच अगस्त को रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगी। साथ ही वह अपने रुख को धीरे-धीरे सख्त करेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेपो दर में आक्रामक 0.50 प्रतिशत या कुछ नरम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फेडरल रिजर्व ने कैलेंडर साल 2022 में ब्याज दरों में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे ऐसी संभावना बन रही है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में तय समय से पहले अधिक वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट कहती है, हालांकि भारत में परिस्थितियों को देखते हुए अभी आक्रामक रुख की जरूरत नहीं है। हाउसिंग.कॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देशों के बैंकिंग नियामक आक्रामक तरीक से ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। लेकिन भारत में स्थिति ऐसी नहीं है। यहां आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.20 से 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा। डीबीएस ग्रुप रिसर्च की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने एक रिपोर्ट में कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति अगली दो तिमाहियों में मूल्य स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करेगी। ऐसे में हमारा मानना है कि अगस्त में एमपीसी रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत रुख तय करते समय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है। खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी, 2022 से छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। जून में यह 7.01 प्रतिशत के स्तर पर थी।

Published / 2022-08-01 07:43:35
घट गई रसोई गैस की कीमतें, जानें आपके शहर में सिलेंडर के दाम?

एबीएन बिजनेस डेस्क। रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों से परेशान जनता को सरकार ने सोमवार को बड़ी राहत दी है। ऑयल कंपनियों ने रसोई गैस के दाम घटाए गए हैं। अब कमर्शियल सिलेंडर 36 रुपये सस्ता मिलेगा। हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए रेट के मुताबिक, एक अगस्त यानी आज से दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1976.50 रुपये में मिलेगा, जबकि पहले इसकी कीमत 2012.50 रुपये थी। इसके अलावा कोलकाता में यह 2095.50 रुपये, मुंबई में 1936.50 रुपये व चेन्नई में 2141 रुपये में मिलेगा। घरेलू सिलेंडर पर कोई राहत नहीं : भले ही ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भारी कटौती की हो, लेकिन घरलू सिलेंडर के दाम वहीं के वहीं हैं। 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर पुराने ही दाम पर मिल रहा है। छह जुलाई को इसके दाम में भारी इजाफा किया गया था। ऑयल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 50 रुपये तक का इजाफा किया था। इसके बाद से इसके दाम 1000 रुपये के पार ही बने हुए हैं।

Published / 2022-07-30 17:03:39
सितंबर 2023 तक मुनाफे में लौटेगी पेटीएम

एबीएन बिजनेस डेस्क। पेटीएम की पैतृक कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने भुगतान और उधारी उत्पाद व्यवसायों के वितरण को प्राथमिकता दी है, क्योंकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही तक परिचालन मुनाफा हासिल करने का लक्ष्य रखा है। डिजिटल भुगतान कंपनी ने सूचीबद्धता के बाद पहली बार वित्त वर्ष 2022 के लिए सालाना रिपोर्ट पेश की है। पेटीएम के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी विजय शेखर शर्मा ने कहा कि कंपनी ने भुगतान सेगमेंट में शानदार वृद्धि दर्ज की है और उधारी तथा पेमेंट डिवाइस व्यवसाय में तेजी से दायरा बढ़ाया है। शर्मा ने कहा, पेटीएम के बिजनेस मॉडल का उद्देश्य भुगतान सेवाओं के लिए उपभोक्ता ओर व्यवसायियों को जोड़ना और उपभोक्ताओं को सेवाएं मुहैया कराना है। यह हमारे वितरण, संग्रह, लेनदेन और व्यवहार संबंधित अंतर्दृष्टि का लाभ उठाकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘बाई नाउ पे लैटर’ (बीएनपीएल) पसंदीदा पेशकश बन गई है। यह पेशकश उपभोक्ताओं को पॉइंट आॅफ सेल पर हमारे ऋण लाभ की अनुमति देती है। कंपनी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, हमारा उधारी व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है और महंगी बिक्री संबंधित राजस्व आकर्षित कर रहा है। पेटीएम वित्तीय संस्थानों की भागीदारी के जरिये पर्सनल लोन, मर्चेंट लोन और बीएनपीएल विकल्प मुहैया कराती है। पेटीएम के उधारी भागीदारों ने वित्त वर्ष 2022 में प्लेटफॉर्म के जरिये 1.52 करोड़ ऋण वितरित किए, जो वित्त वर्ष 2021 के मुकाबले 478 प्रतिशत की वृद्धि है। ऋणों की वैल्यू वित्त वर्ष 2022 में 441 प्रतिशत बढ़कर 7,623 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2021 में 1,409 करोड़ रुपये थी। शर्मा ने कहा, पेटीएम ऐप के प्लेटफॉर्म पर अब ज्यादा संख्या में उपयोगकर्ता किसी रियायत के बगैर भी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए जुड़ रहे हैं। हमने अच्छी गुणवत्ता के ग्राहक और कारोबारियों को जोड़कर अपने पेमेंट नेटवर्क का दायरा बढ़ाने पर ध्यान दिया है। पेटीएम के मासिक लेनदेन संबंधित उपयोगकर्ता की संख्या सालाना आधार पर 41 प्रतिशत बढ़ी, जो वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिामही के दौरान 7 करोड़ के पार पहुंच गई। श्रेय के समाधान के लिए तीसरी बार बढ़ी समयसीमा : श्रेय समूह की फर्मों के लिए समाधान योजना जमा कराने की समयसीमा तीसरी बार बढ़ाई गई है और अब 10 अगस्त तक समाधान योजना जमा कराई जा सकती है। ये फर्में कॉरपोरेट दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, चार आवेदकों ने लेनदारों से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। श्रेय के प्रशासक रजनीश शर्मा ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। पहले की समयसीमा 30 जुलाई थी। समझा जाता है कि एरेना इन्वेस्टर्स, एलपी व वीएफएसआई होल्डिंग्स (वरडे पार्टनर्स की सहायक) तीन समाधान आवेदक हैं। वरडे ने टिप्पणी करने से मना कर दिया जबकि एरेना की टिप्पणी की प्रतीक्षा की जा रही है।

Published / 2022-07-29 16:42:03
तीन माह के उच्चतम स्तर पर शेयर बाजार

एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक बाजार के मिलेजुले रुख के बीच स्थानीय स्तर पर धातु, बेसिक मैटेरियल्स, ऊर्जा, आईटी, तेल एवं गैस और टेक समेत सभी 19 समूहों में हुई लिवाली की बदौलत आज शेयर बाजार सवा प्रतिशत चढ़कर तीन माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 712.46 अंक की उड़ान भरकर 29 अप्रैल के उच्चतम स्तर 57 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार 57570.25 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 228.65 अंक उछलकर 17 हजार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर 17158.25 अंक पर रहा। बीएसई की छोटी और मझौली कंपनियों में भी तेजी रही। मिडकैप 1.01 प्रतिशत चढ़कर 24,050.90 अंक और स्मॉलकैप 1.38 प्रतिशत की छलांग लगाकर 27,056.38 अंक पर रहा। इस दौरान बीएसई में कुल 3471 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 2100 में लिवाली जबकि 1227 में बिकवाली हुई वहीं 144 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसी तरह एनएसई में 43 कंपनियां हरे जबकि शेष सात लाल निशान पर रही। बीएसई में सभी 19 समूहों में तेजी का रुख रहा। इस दौरान धातु समूह सर्वाधिक 4.59 प्रतिशत के बढ़त में रहा। साथ ही बेसिक मैटेरियल्स 2.30, सीडीजीएस 1.46, ऊर्जा 2.41, हेल्थकेयर 1.04, इंडस्ट्रियल्स 1.12, आईटी 1.71, ददूरसंचार 1.34, यूटिलिटीज 1.41, आॅटो 1.29, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.47, तेल एवं गैस 2.21, पावर 1.33 और टेक समूह के शेयर 1.68 प्रतिशत चढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलाजुला रुख रहा। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.39 और जर्मनी का डैक्स 0.94 प्रतिशत मजबूत रहा वहीं जापान का निक्केई 0.05, हांगकांग का हैंगसैंग 2.26 और चीन का संघाई कंपोजिट 0.89 प्रतिशत उतर गया।

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