एबीएन बिजनेस डेस्क। महाराष्ट्र में प्याज की खेती करने वाले किसानों की समस्या कम नही हो रही हैं। पिछले तीन-चार महीने से प्याज के गिरते दाम के कारण किसान परेशानी में हैं। उनकी लागत नहीं निकल पा रही है। अभी तक राज्य के कई जिलों में किसानों को प्याज का दाम का 200 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक का न्यूनतम रेट मिल रहा है। मंगलवार को सूबे की कई मंडियों में प्याज का दाम एक बार फिर गिरकर 1 से 1.5 रुपये प्रति किलो तक रह गया। जबकि लागत 1500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक आती है। प्याज के गिरते दाम के चलते किसान अब इसकी खेती छोड़ सोयाबीन और कपास की ओर रुख कर रहे हैं। जिन किसानों के पास स्टोरेज की सुविधा है वो अभी तक प्याज का स्टॉक करके रखे हुए हैं। क्योंकि उन्हें अगस्त और सितंबर तक अच्छे दाम की उम्मीद है। लेकिन जिनके पास ऐसा इंतजाम नहींं है वो औने-पौने दाम पर प्याज बेचने के लिए मजबूर हैं। हालात ये है कि प्याज की जिस लासलगांव मंडी को लेकर महाराष्ट्र के किसान गर्व महसूस करते हैं वो भी अब उन्हें निराश करवा रही है। यह एशिया की सबसे बड़ी प्याज की मंडी है, लेकिन यहां न्यूनतम दाम 4 जुलाई को सिर्फ 500 रुपये प्रति क्विंटल रहा। निफाड़ मंडी में भी यही रेट रहा। किसानों को प्याज का सबसे कम दाम नासिक, अहमदनगर और सोलापुर की मंडियों में मिल रहा है। कुछ किसानों को उम्मीद है कि बांग्लादेश में एक्सपोर्ट से दाम में कुछ तेजी आ सकती है। नई समस्या का सामना कर रहे प्याज उत्पादक किसान : जिन किसानों ने प्याज स्टोर किया है उन्हें अब एक नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जिलों में तेज बारिश के कारण स्टॉक किया हुआ प्याज खराब हो रहा है। इसलिए किसान फटाफट प्याज बेचना चाहते हैं। प्याज उत्पादक संगठन, महाराष्ट्र के अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि सिर्फ 10 फीसदी ही किसानों के पास स्टोरेज की सही और अच्छी सुविधा है। अब जिनके पास सुविधा है वो भी प्याज सड़ने की समस्या से जूझने लगे हैं। दिघोले का कहना है कि बांग्लादेश में प्याज एक्सपोर्ट से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। दाम में कम से कम 3 से 4 रुपये प्रति किलो की तेजी आ सकती है। हालांकि, अभी ईद के त्यौहार के चलते बॉर्डर 7 से 8 दिन बंद रहा सकता है। यानी उसके बाद ही पता चल पाएगा कि इस एक्सपोर्ट से किसानों को कितना फायदा हो रहा है। फिलहाल तो देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक प्रदेश महाराष्ट्र में किसान परेशान हैं कि वो प्याज की खेती छोड़ दें या फिर अभी कुछ दिन घाटा सहकर बिक्री करें। विभिन्न मंडियों में प्याज की दर : औरंगाबाद मंडी में न्यूनतम दाम 150 रुपये प्रति क्विंटल रहा। जबकि औसत रेट 750 रुपये रहा। कराड मंडी में 5 जुलाई को यहां न्यूनतम दाम 200 रुपये क्विंटल और औसत रेट 1600 रुपये रहा। सोलापुर में प्याज का न्यूनतम दाम 100 क्विंटल जबकि औसत रेट 1000 रुपये रहा। जामखेड़ मंडी में न्यूनतम दाम 100 रुपये जबकि औसत रेट 900 रुपये प्रति क्विंटल रहा। येवला मंडी में न्यूनतम रेट 250 रुपये प्रति क्विंटल जबकि औसत 1050 रुपये रहा। अकोले मंडी में सिर्फ 863 क्विंटल प्याज की आवक हुई। फिर भी यहां न्यूनतम रेट 125 जबकि औसत दाम 1400 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया की गिरावट बरकरार है। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को यह 42 पैसे गिरकर 79.37 रुपया प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 79.38 रुपया प्रति डॉलर के स्तर तक गया, जो अब तक का सबसे निचल स्तर है। आपको बता दें कि सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 78.95 पर बंद हुआ था। ताजा हालात को देखते हुए शेयर बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इसकी गिरावट का स्तर 80 रुपया प्रति डॉलर के पार जा सकता है। नोमुरा ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) द्वारा तेजी से बाहर निकलने की आशंका के बीच, रुपया 2022 की तीसरी तिमाही तक डॉलर के मुकाबले 82 के स्तर तक गिर सकता है। इस बीच, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 1.10 प्रतिशत गिरकर 112.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। घरेलू इक्विटी बाजार के मोर्चे पर, बीएसई सेंसेक्स 100.42 अंक या 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,134.35 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक एनएसई निफ्टी 24.50 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,810.85 पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्थिक गतिविधियां तेज होने, गर्मियों की छुट्टियों में लोगों के यात्राएं करने तथा फसल बुवाई शुरू हो जाने से जून में भारत में पेट्रोल और डीजल की बिक्री बढ़ गई है। उद्योग के शुरुआती आंकड़ों में बताया है कि बुवाई का मौसम शुरू होने से डीजल की मांग दो अंक में बढ़ी है। इस ईंधन की बिक्री सालाना आधार पर 35.2 प्रतिशत बढ़कर जून में 73.8 लाख टन पर पहुंच गई। यह जून, 2019 की तुलना में 10.5 प्रतिशत और जून, 2020 के मुकाबले 33.3 फीसदी अधिक है। डीजल की बिक्री इस साल मई की तुलना में जून में 11.5 प्रतिशत अधिक रही। उस समय 67 लाख टन डीजल बिका था। उद्योग के सूत्रों ने डीजल की मांग में वृद्धि के बारे में कहा कि कृषि और परिवहन क्षेत्रों में अधिक खपत इसकी वजह है। सार्वजनिक क्षेत्र के ईंधन विक्रेताओं द्वारा पेट्रोल की बिक्री जून में 28 लाख टन रही जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक है। जून, 2020 की तुलना में पेट्रोल की खपत 36.7 फीसदी और जून, 2019 की तुलना में 16.5 प्रतिशत अधिक रही है। मासिक आधार पर बिक्री 3.1 फीसदी अधिक रही है। रसोई गैस यानी एलपीजी की बिक्री जून में 0.23 प्रतिशत बढ़कर 22.6 लाख टन रही। यह जून, 2020 के मुकाबले 9.6 फीसदी और जून, 2019 की तुलना में 27.9 फीसदी अधिक है। जून, 2021 की तुलना में एलपीजी बिक्री छह प्रतिशत अधिक रही है।
एबीएन डेस्क (मृत्युंजय कुमार विधि सह वित्त संवाददाता एबीएन न्यूज)। दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली जारी है। जैसा कि मंदी के दिनों में अक्सर होता है, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की कीमत में लार्जकैप शेयरों की तुलना में ज्यादा गिरावट आई है। जनवरी 2022 से निफ्टी में 11 फीसदी की गिरावट रही जबकि मिडकैप सूचकांक में 14.5 प्रतिशत तथा स्मॉलकैप सूचकांक में 19 प्रतिशत की गिरावट आई है। मूल्यांकन के संदर्भ में बाजार 19-20 के मूल्य-आय अनुपात के साथ संचालित है लेकिन एनएसई 500 के करीब दो तिहाई शेयरों की कीमत 30 प्रतिशत तक घटी है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर बुनियादी रूप से गिरावट के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और इसकी कई वजह हैं। एक कारण तो यही है कि आधारभूत संदर्भों में एक बड़ी कंपनी के पास ज्यादा संसाधन होने की संभावना होती है जो मंदी से निपटने में उसकी मदद करती है। दूसरी वजह यह है कि संस्थानों के पास छोटे शेयर कम होते हैं। संस्थागत निवेशक चक्रीय मंदी से निजात पाने के लिए शेयर खरीद कर इंतजार भी कर सकते हैं। वहीं खुदरा निवेशकों के पास मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा होते हैं और उन्हें भारी पूंजीगत नुकसान होने की भी आशंका अधिक होती है। जाहिर है मंदी के दिनों में वे घबराहट में बिकवाली करते हैं। इसके विपरीत तेजी के दिनों में वे अत्यधिक आशावादी हो जाते हैं। यही कारण है कि स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर तेजी के दिनों में लार्जकैप शेयरों पर भारी पड़ते हैं। अधिकांश विश्लेषक मानते हैं कि अल्पावधि से मध्यम अवधि में मूल्य- अस्थिरता और बिकवाली की आशंका अधिक रहती है। मुद्रास्फीति निरंतर ऊंची बनी हुई है और हर प्रमुख केंद्रीय बैंक मौद्रिक सख्ती जारी रख सकता है। इतना ही नहीं आपूर्ति श्रृंखला की बाधा, चीन में लगे लॉकडाउन और यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक वृद्धि के अनुमानों में भी कमी की गई है। बीते नौ महीनों में भारी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक सुरक्षा चाह रहे हैं। उभरते बाजारों को लेकर उन्हें निरंतर नकारात्मक सलाह दी जा रही है। इस श्रेणी के मूल्यांकन की दृष्टि से भारत का शेयर बाजार अब तक सबसे अधिक महंगा है। रुपये पर भी लगातार दबाव बना हुआ है क्योंकि व्यापार घाटा अधिक है और विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं। सामान्य हालात में कमजोर रुपया निर्यात में तेजी लाता। बहरहाल निर्यात का प्रदर्शन बेहतर है और धीमी वैश्विक वृद्धि का अर्थ यह है कि मांग भी सहज होगी। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की शिकायत है कि मार्जिन पर दबाव है और उनके ग्राहक विवेकाधीन व्यय में कटौती कर रहे हैं। फार्मा उद्योग भी आपूर्ति श्रृंखला के मसलों से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। धातु उत्पादकों की मांग में भी कमी आई है जबकि निर्यात कर ने भी उन्हें प्रभावित किया है। कुल मिलाकर भारत के निवेशक सतर्कता और आशावाद के मिलेजुले रुख का प्रदर्शन कर रहे हैं। घरेलू संस्थान इक्विटी म्युचुअल फंड और बीमा योजनाओं की बदौलत कुछ हद तक भारी भरकम विदेशी बिकवाली का मुकाबला करने में सफल रहे हैं। यह आवक जारी है जिससे पता चलता है कि कुछ खुदरा निवेशक दीर्घावधि में शेयरों को लेकर प्रतिबद्ध हैं। लेकिन खुदरा निवेशकों ने शेयरों की सीधी बिक्री भी जमकर की है। खुदरा निवेशकों के लिए एक दिक्कत यह है कि आकर्षक वैकल्पिक निवेश सीमित हैं। वास्तविक ब्याज दरें अभी भी नकारात्मक हैं जिससे डेट अनाकर्षक हुआ है। सोने की कीमतें भी अस्थिर हैं और डॉलर की मजबूती के कारण वे दबाव में रह सकती हैं। अगर खुदरा निवेशकों को और पूंजीगत नुकसान होता है तो भी उन्हें स्वयं पर नियंत्रण रखना होगा। वे लार्जकैप शेयरों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं या गिरते बाजार में अच्छे शेयर चुन सकते हैं और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से विविध शेयरों में निवेश कर सकते हैं। व्यापक मंदी अक्सर व्यापक सुधार की ओर ले जाती है और एसआईपी इसलिए आदर्श हैं क्योंकि वे औसत मूल्य पर व्यापक शेयर पहुंच मुहैया कराते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को कुछ राहत मिली है। दरअसल, 1 जुलाई से दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 198 रुपये की कमी आई है। 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 2021 रुपए होगी। इससे पहले इशकी कीमत 2219 रुपये थी। बता दें कि राजधानी दिल्ली में 1 जुलाई को कमर्शियल इंडेन गैस सिलेंडर की दरों में 198 रुपये की कटौती की गई है। वहीं चेन्नई में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹187 कम किया गया है। कोलकाता में इस गैस सिलेंडर की कीमत में 182 रुपए की कमी आई है। वहीं मुंबई में 190.50 रुपये की कटौती की गई है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं मिली है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की दो दिवसीय बैठक बुधवार को समाप्त हो गई। इस दौरान क्षतिपूर्ति की अवधि को 30 जून के बाद भी बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका। हालांकि कम से कम दो दर्जन राज्यों ने यह मुद्दा उठाया। यह क्षतिपूर्ति जीएसटी की व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों को रही राजस्व हानि की भरपाई के लिए दी जा रही थी। पांच वर्ष के लिए की गयी यह व्यवस्था 30 जून को समाप्त हो रही है। हालांकि बैठक के दौरान जीएसटी दर के ढांचे को सहज बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। इसके लिए कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं की दरों को संशोधित किया गया जबकि व्यापक खपत वाली कई पैकेटबंद वस्तुओं पर दी जाने वाली रियायत को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। यह व्यवस्था आगामी 18 जुलाई से लागू होगी। इस बीच परिषद ने आॅनलाइन गेमिंग पर भी सट्टेबाजी के समान 28 फीसदी की दर से कर लगाने के मसले को टाल दिया। उसने मंत्रिसमूह को इस मसले पर दोबारा विचार करने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है। परिषद अगस्त के पहले सप्ताह में मदुरै में आयोजित बैठक में इस विषय पर निर्णय लेगी। जीएसटी परिषद की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ह्यक्षतिपूर्ति उपकर के मामले में 16 राज्यों ने अपनी बात कही। मोटे तौर पर उनका कहना यह था कि क्षतिपूर्ति को कुछ वर्षों तक जारी रखा जा सकता है। वे चाहते हैं कि पांच वर्ष नहीं तो भी कम से कम कुछ वर्ष तक यह व्यवस्था जारी रहे। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों ने अवधि बढ़ाने की मांग नहीं की। तीन-चार राज्यों ने यह भी कहा कि वे क्षतिपूर्ति की व्यवस्था से परे राजस्व संग्रह की अपनी व्यवस्था निर्मित करना चाहते हैं। केंद्र सरकार जहां लिए गये ऋण को चुकाने के लिए क्षतिपूर्ति उपकर को मार्च 2026 तक बढ़ाने के लिए सहमत हो गई थी, वहीं कई राज्यों (भाजपा शासित राज्यों सहित) ने इस व्यवस्था को कुछ साल बढ़ाने या राजस्व की कमी को दूर करने के लिए राजस्व साझेदारी के फॉमूर्ले में बदलाव का आग्रह किया। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि परिषद को क्षतिपूर्ति को लेकर कुछ खाका या निर्देश देना चाहिए था और इस मामले को अनिर्णित नहीं छोड़ना चाहिए था। उत्तराखंड और पुदुच्चेरी जैसे भाजपा शासित राज्यों ने भी राहत की मांग की है और कहा है कि यह व्यवस्था समाप्त होने से उनका बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। केरल के वित्त मंत्री के एन बालगोपाल ने कहा कि राज्यों के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति व्यवस्था को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि राजस्व नुकसान की भरपाई हो सके। परिषद की बैठक में आये राजस्व वृद्धि के आंकड़ों के अनुसार 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से केवल पांच, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम ने ही 2021-22 के लिए जीएसटी के तहत संरक्षित राजस्व से अधिक राजस्व वृद्धि हासिल की।
एबीएन बिजनेस डेस्क। एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने भारत के टियर-ककक शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों में कैश कलेक्शन सिस्टम को डिजिटाइज करने के लिए भारत के तीसरे सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी की है। एयरटेल पेमेंट्स बैंक अपने डिजिटल प्रणाली वाले नेबरहुड बैंकिंग मॉडल की व्यापक पहुंच का लाभ उठाएगा ताकि लास्ट माइल कैश कलेक्शन के डिजिटलीकरण के साथ एक्सिस बैंक का सहयोग किया जा सके। इस साझेदारी के माध्यम से, एक्सिस बैंक और उसके ग्राहकों को नकद प्रबंधन प्रक्रिया के परिचालन क्षमता को बेहतर करके काफी लाभ होगा। इससे पेमेंट साईकल में भी तेजी आएगी और देश भर में काम करने वाले फील्ड एजेंटों को बैंडविड्थ जारी करने में मदद मिलेगी। इन एजेंटों को अब फील्ड से एकत्रित ईएमआई राशि जमा करने के लिए ब्रांच तक वापस जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अब आसानी से पड़ोस के किसी भी एयरटेल पेमेंट्स बैंक आउटलेट पर राशि जमा कर सकते हैं और यह तुरंत एक्सिस बैंक के खातों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया लंबी दूरी की यात्रा कर एजेंटों द्वारा नकद संग्रह करने के जोखिम में कमी लाएगी। इसके अतिरिक्त, यह प्रक्रिया किसी भी देरी से बचने में मदद करेगी, क्योंकि एयरटेल पेमेंट्स बैंक आउटलेट पारंपरिक बैंकिंग समय के अलावा वीकेंड पर भी काम करते हैं। गौरव सेठ, चीफ फाइनेंस आॅफिसर और हेड इंस्टीट्यूशनल बिजनेस, एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने कहा, हमें लास्ट-माइल तक कैश-कलेक्शन के डिजिटलीकरण के लिए एक्सिस बैंक के साथ हाथ मिलाते हुए खुशी हो रही है। हमारी कलेक्शन मैनेजमेंट सर्विसेज फिजिकल कैश के प्रबंधन की चुनौतियों को कम करती हैं और इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज करके एक जगह से दूसरी जगह नकदी ले जाने में आने वाले जोखिम को भी कम करती हैं। यह हमारे साझेदारों के साथ-साथ उनके ग्राहकों के लिए परिचालन क्षमता को बेहतर करता है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इस्पात के दाम एक जुलाई से फिर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इससे पहले इस्पात कीमतें कुछ नीचे आई हैं। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की तरफ से यह बात कही। उन्होंने कहा, जहां कोयले की कीमत 17,000 रुपए प्रति टन है, वहीं ओडिशा खनिज निगम के लौह अयस्क की कीमतें अब भी ऊंची हैं। यह ओडिशा में लौह अयस्क का मुख्य आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने कहा, इस्पात की कीमतें पहले ही नीचे आ चुकी हैं। उन्हें और कम करने की कोई संभावना नहीं है। मुख्य रूप से उच्च लागत के कारण शुक्रवार यानी एक जुलाई से इस्पात की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। शर्मा ने कहा कि द्वितीयक श्रेणी के इस्पात विनिर्माताओं ने पिछले चार दिन में पहले ही सरिये की कीमत 2,000 रुपए बढ़ाकर 55,000 रुपए प्रति टन कर दी है। उन्होंने कहा कि इस्पात विनिर्माताओं पर दबाव के कई और कारण हैं और इसमें कोयले की उपलब्धता का भी मुद्दा हैं। कोयले की आपूर्ति के लिए रैक भी उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर का बिजली क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
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