एबीएन बिजनेस डेस्क। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क के रूप में केंद्र सरकार को 4.31 लाख करोड़ रुपए का कर राजस्व मिला। मध्य प्रदेश में नीमच के सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने मंगलवार को कहा कि आरटीआई कानून के तहत दाखिल अर्जियों के जवाब में उन्हें यह जानकारी मिली है। गौड़ ने केंद्र के दो विभागों से पेट्रोलियम उत्पादों पर वसूले गए शुल्क के बारे में जानकारी मांगी थी। गौड़ ने आरटीआई कानून के तहत दी गई जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर 50,902.43 करोड़ रुपए का सीमा शुल्क वसूला गया। इस दौरान देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों के विनिर्माण पर लागू केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में 3,80,113.47 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में जमा हुए।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पहली बार ऐसा हुआ है कि डॉलर के मुकाबसे रुपये की वैल्यू 80 पार चली गई है, यानि अब आपको एक डॉलर देने पर 80 रुपये मिलेंगे। यानि, डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार गिरना जारी है, वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा है कि भारतीय रुपये के मूल्य में दिसंबर 2014 के बाद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, भारतीय वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि हाल ही में आई गिरावट कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक कारकों की वजह से हैं। लेकिन, उसके बाद भी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 25 प्रतिशत तक गिरावट आना कई सवाल खड़े करता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 80 के स्तर तक गिर गया है, जिससे इसकी साल-दर-साल गिरावट लगभग 7 प्रतिशत हो गई है। घरेलू मुद्रा के शुरुआती कारोबार में एक दिन पहले ट्रेड 79.9775 पर बंद हुआ था और आज ये 80.0175 के निचले स्तर पर पहुंच गई है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स ने कहा कि रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 79.85- 80.15 के दायरे में कारोबार कर सकता है। दिसंबर 2014 से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है और हाल ही में गिरावट कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक कारकों के कारण है, भारतीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की संसद में ये बात कबूल की है। भारत की विदेश मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में कहा कि 31 दिसंबर 2014 को एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 63.33 भारतीय रुपये थी। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री द्वारा उल्लिखित आंकड़ों के अनुसार 11 जुलाई, 2022 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 79.41 पर आ गया है। वहीं, सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 79.98 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय रुपये की कीमत में लगातार सातवें दिन गिरावट आई है। लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक कारक, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक वित्तीय स्थितियों का सख्त होना, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, उन्होंने संसद के निचले सदन को सूचित किया कि भारतीय मुद्रा अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुई है। भारतीय वित्त मंत्री ने कहा कि, ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरो जैसी मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की तुलना में ज्यादा कमजोर हुई हैं और इसलिए, भारतीय रुपया 2022 में इन मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। अर्थव्यवस्था पर रुपये के मूल्य में मूल्यह्रास के प्रभाव पर भारत सरकार ने कहा कि मुद्रा में उतार-चढ़ाव केवल एक कारक है जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। सरकार ने कहा कि मुद्रा के मूल्यह्रास से निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की संभावना है जो बदले में अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। सरकार ने कहा कि मुद्रा का मूल्यह्रास आयात को और अधिक महंगा बनाकर प्रभावित करता है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच आज से आपकी जेब और ढीली होने वाली है। अब आपको पैकेज्ड एवं लेबल वाले दही, पनीर, लस्सी और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर आज से अधिक जीएसटी देना होगा। पिछले महीने हुई बैठक में जीएसटी परिषद ने विभिन्न उत्पादों पर जीएसटी दरों में बदलाव किया है। इसके तहत अब दही, लस्सी, पनीर, शहद, अनाज, मांस और मछली खरीदने पर 5% जीएसटी देना होगा। इसके अलावा अन्य वस्तुओं के जीएसटी स्लैब में भी बदलाव किया गया है। इन पर करना होगा ज्यादा खर्च : पैकेज्ड एवं लेबल युक्त दही, लस्सी, पनीर, शहद, अनाज, मांस और मछली खरीदने पर 5% जीएसटी देना होगा। अस्पताल में 5,000 रुपये (गैर-आईसीयू) से अधिक किराये वाले कमरे पर 5% जीएसटी लगेगा। चेक बुक जारी करने पर बैंकों की ओर लिए जाने वाले शुल्क पर 18% जीएसटी। होटल के 1,000 रुपये प्रति दिन से कम किराये वाले कमरे पर 12% जीएसटी। अभी नहीं लगता है। टेट्रा पैक पर दर 12% से बढ़कर 18%। प्रिंटिंग/राइटिंग या ड्रॉइंग इंक, एलईडी लाइट्स, एलईडी लैम्प पर 12% की जगह 18% जीएसटी। मैप, एटलस और ग्लोब पर 12% जीएसटी देना होगा। ब्लेड, चाकू, पेंसिल शार्पनर, चम्मच, कांटे वाले चम्मच, स्किमर्स आदि पर 18% जीएसटी। अभी 12%। आटा चक्की, दाल मशीन पर 5% की जगह 18% जीएसटी। अनाज छंटाई मशीन, डेयरी मशीन, फल-कृषि उत्पाद छंटाई मशीन, पानी के पंप, साइकिल पंप, सर्किट बोर्ड पर 12% की जगह 18% जीएसटी। मिट्टी से जुड़े उत्पाद पर 12% जीएसटी। अभी 5% है। चिट फंड सेवा पर 12% से बढ़कर 18% जीएसटी। ये सामान होंगे सस्ते : रोपवे के जरिये यात्रियों और सामान लेकर आने-जाने पर 5% टैक्स। अभी 18% है। स्प्लिंट्स और अन्य फ्रैक्चर उपकरण, शरीर के कृत्र्मि अंग, बॉडी इंप्लाट्स, इंट्रा ओक्यूलर लेंस आदि पर 12% की जगह 5% लगेगा। उन आॅपरेटरों के लिए माल ढुलाई किराया पर जीएसटी 18% से कम होकर 12% रह जाएगी, जहां ईंधन लागत शामिल है। डिफेंस फोर्सेज के लिए आयातित कुछ खास वस्तुओं पर आईजीएसटी नहीं लगेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 ने आज देश और दुनिया में काम करने के तरीकों को बदल कर रख दिया है। महामारी के बाद से कई क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसा ही एक अहम परिवर्तन शेयर बाजार में भी देखा गया है। आज नई पीढ़ी के युवा निवेशक उत्साह के साथ इस बाजार में कदम रख रहे हैं। वे अपने स्मार्टफोन के जरिए शेयर ट्रेडिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, नकदी बाजार के टर्नओवर में मोबाइल फोन के जरिए होने वाला कारोबार जून 2019 के 5.3 फीसदी के मुकाबले जून 2022 में बढ़कर 18.7 फीसदी पर पहुंच गया। जबकि एनएसई पर मोबाइल ट्रेडिंग की हिस्सेदारी जून 2022 में 19.5 फीसदी रही है। हालिया एनएसई की रिपोर्ट में कहा गया है, देश में इंटरनेट आधारित ट्रेडिंग ने पहले के मुकाबले तेजी से रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2020 के बाद से लोगों का इसके प्रति ज्यादा रुझान देखा गया है। लॉकडाउन के बाद से खुदरा भागीदारी में इजाफे के कारण ऐसी ट्रेडिंग बढ़ी है। खुदरा निवेशकों और ट्रेडरों ने अपने घर से सीधे इक्विटी में ट्रेड के लिए आॅनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू किया है। इसमें ज्यादातर युवा निवेशक सक्रिय ट्रेडर बन रहे हैं। वे स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के जरिए इस बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। 70 से 75 फीसदी ग्राहक नई पीढ़ी के : अरिहंत कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के सीए अनीश जैन अमर उजाला से चर्चा में कहते हैं कि आज ट्रेडिंग में 70 से 75 फीसदी ग्राहक नई पीढ़ी के हैं। वे सभी आॅनलाइन ट्रेडिंग ही कर रहे हैं। पहले के मुकाबले आज आसानी से खाता खुलना मोबाइल ट्रेडिंग में बढ़ोतरी में सबसे अहम माना गया है। आधार कार्ड ने भी डीमैट खाता बिना किसी परेशानी के खोलना की प्रक्रिया को आसान कर दिया है। पहले यही खाता खोलने में दो से तीन दिन लग जाते थे। आज जिस तरह की बढ़त हम देख रहे हैं, उसके लिए आधार के जरिए खाता खुलना एक उत्प्रेरक की तरह रहा है। इससे पहले ग्राहकों को खाता खोलने के लिए कम से कम 25 से 30 हस्ताक्षर आवेदन फॉर्म पर करने होते हैं और फॉर्म के साथ संलग्न किए जाने वाले सभी दस्तावेजों को स्वप्रमाणित करना होता है। आज आधार के जरिए खाता खोलने पर ये प्रक्रियाएं नहीं अपनानी पड़ती हैं। अब महज केवल आधे घंटे में खाता खुल जाता है। आॅनलाइन ट्रेडिंग से कर्मचारियों की संख्या घटी : शेयर बाजार कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि कोरोना महामारी के बाद बाजार में कई बदलाव देखने को मिले हैं। पहला, निवेशकों ने डिजिटल माध्यम को तेजी से अपनाया है। दूसरा, ब्रोकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों ने नई टेक्नोलॉजी में ज्यादा निवेश किया है। ऐसे में डीलरों के जरिए आने वाला वॉल्यूम मोबाइल की ओर शिफ्ट कर गया है। क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते डीलिंग रूम में कर्मचारियों की उपलब्धता बहुत सीमित हो गई है। आज टेक्नोलॉजी पर खर्च जरूर बढ़ा है। लेकिन कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन की बचत भी हुई है। इससे बाजार में पिछले 10 साल में कर्मचारियों की संख्या घटकर 10 फीसदी रह गई है। जबकि वॉल्यूम दोगुने से ज्यादा हो गया है। कंपनियां यह सब रिलेशनशिप मैनेजर के बड़े नेटवर्क के जरिए ही कर सकी है। क्योंकि आज सभी बड़ी कंपनियों के पास नई-नई तकनीकें हैं। इससे काम पहले की तुलना में बहुत आसान हो गया है। इससे पहले क्लाइंट ब्रोकर के कंप्यूटर टू कंप्यूटर लिंक सिस्टम का इस्तेमाल आॅर्डर के लिए करते थे। इसमें उन्हें डीलरों की मदद लेना होती थी। मोबाइल ट्रेडिंग से यह हो रहे फायदे : मोबाइल ने ट्रेडिंग की लागत काफी कम करने में मदद की है। क्योंकि इससे आॅर्डर के लिए किसी व्यक्ति पर आश्रित होने की अनिवार्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। चूंकि किसी व्यक्ति के लिए कार्य की एक सीमा होती है, ऐसे में जब ब्रोकरेज कर्मी के जरिए आॅर्डर दिए जाते हैं, तब गलत ट्रेड होने के चांसेंज काफी ज्यादा होते हैं। इसके अलावा चूंकि डीलर ट्रेड की सिफारिश करते हैं, ऐसे में क्लाइंटों को नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है। लेकिन अब ग्राहक खुद ही मोबाइल पर ट्रेड करते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिका की बड़ी कार निमार्ता कंपनी फोर्ड मोटर ने गाड़ियों में आई खराबी की वजह से ग्राहकों से करीब एक लाख कारें वापस मंगाने के लिए रिकॉल जारी किया है। फोर्ट की तरह से ये सप्ताह में जारी किया गया दूसरा रिकॉल है। रिकॉल आॅर्डर संदिग्ध वाहनों में संभावित आग के जोखिमों की जांच के लिए जारी किया गया है। इससे पहले 60,000 कारों की जांच के लिए इसी तरह का रिकॉल आॅर्डर जारी किया गया था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, डीलरों को इंजन शील्ड और ग्रिल शटर को ठीक करने के लिए कहा जा रहा है ताकि इस समस्या से बचा जा सके। अब तक, इस संभावित आग जोखिम के कारण किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। ये है कारों में खराबी : फोर्ड के लेटेस्ट रिकॉल में 2020 और 2022 के बीच निर्मित हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड इंजन के साथ फोर्ड एस्केप, मावेरिक और लिंकन कॉर्सयर जैसी कारें शामिल है। संभावित समस्या ऐसी स्थिति से संबंधित है जहां इंजन फेल होने के मामले में इंजन का तेल और भाप निकल सकता है और अगर इग्निशन सोर्स के पास ये तेल पहुंच तो इंजन में आग भी लग सकती है। कंपनियां जारी कर रहीं सेफ्टी रिकॉल : देश के आॅटोमोटिव सेफ्टी रेगुलेटरी बॉडी मॉडल वाली कंपनियों के खिलाफ नकेल कसना शुरू कर दिया है। इस वजह से कंपनियां अब जोखिम लेने से बच रही हैं और चेक करने के लिए रिकॉल आॅर्डर जारी करने में काफी सक्रिय हो गई हैं। ऐसे लगभग सभी मामलों में ये जांच होती है और यदि आवश्यक हो तो मरम्मत भी जाती है। कुछ दिन पहले भी किया था रिकॉल : इससे कुछ दिन पहले फोर्ड मोटर ने ग्राहकों से करीब 30 लाख कारों को वापस बुलाया था। बताया जा रहा है कि कंपनी ने यह फैसला कारों में आई बड़ी खराबी की वजह से लिया है। अमेरिका के नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, जिन कारों में खराबी का पता लगा है, वे सभी कारें 2013 और 2021 के बीच बनाई गई थीं। इसमें कई मॉडल शामिल थे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला ने फिलहाल भारत आने की योजना टाल दी है। टेस्ला दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी है और इसके सीईओ एलन मस्क दुनिया के सबसे बड़े रईस हैं। मस्क चाहते थे कि टेस्ला को भारत में कार बेचने की अनुमति दी जाए और विदेश से मंगाई जाने वाली कारों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाए लेकिन भारत सरकार ने उसकी इस मांग को ठुकरा दिया था। फॉर्चून की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कारें बन रही हैं जो टेस्ला को धूल चटा सकती हैं। सोडियम आयन बैटरी बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी Faradion ने इसे ट्वीट किया था। महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इसी रिट्वीट करते हुए लिखा, आपके मुंह में घी शक्कर। भारत में टाटा और महिंद्रा सहित कई कंपनियां इलेक्ट्रिक कारें बना रही हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इलेक्ट्रिक कारों के लिए बड़ी योजना बनाई है। कंपनी को वित्त वर्ष 2027 तक दो लाख इलेक्ट्रिक कारें बेचने का भरोसा है। कंपनी ईवी बिजनेस पर एक अरब डॉलर से अधिक निवेश कर रही है। उसकी योजना अगले पांच साल में पांच इलेक्ट्रिक वीकल निकालने की है। कंपनी का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 से उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 20 से 30 फीसदी होंगी। मस्क ने हाल में ट्वीट किया था कि टेस्ला किसी भी ऐसी जगह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाएगी जहां उसे पहले अपने कारों को बेचने की अनुमति नहीं मिलेगी। मस्क चाहते थे कि भारत सरकार टेस्ला को चीन से कारें आयात करने का लाइसेंस दे और इस कारों पर कोई इम्पोर्ट ड्यूटी न लगाई जाए लेकिन भारत सरकार ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों की नई जेनरेशन डेवलप हो रही है। ये गाड़ियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में टेस्ला की छुट्टी कर सकती हैं। इसकी वजह यह है कि भारत में आधुनिक तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रिक कारें बन रही है जबकि टेस्ला की तकनीक एक दशक पुरानी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क (कृष्ण कांत)। भारतीय शेयर बाजार ने अब उत्तर अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में अपने प्रतिस्पर्द्धी बाजारों को प्रदर्शन के मामले में पछाड़ दिया है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले एक महीने के दौरान 9 प्रतिशत तक उछल गया है, जबकि इसी अवधि में डाऊ जोंस में महज 3 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई है। इसी दौरान यूनाइटेड किंगडम का मानक सूचकांक एफटीएसई 100 में 2.1 प्रतिशत, फ्रांस के सीएससी 40 सूचकांक में 7.3 प्रतिशत और जर्मनी के डीएएक्स इंडेक्स में 6 प्रतिशत तेजी देखी गई है। इसके उलट पिछले एक वर्ष के दौरान सेंसेक्स विकसित बाजारों के शेयर सूचकांकों से कमजोर रहा है। उदाहरण के लिए पिछले वर्ष जून से सेंसेक्स में 11.3 प्रतिशत कमी आई है, जबकि इसके मुकाबले न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.6 प्रतिशत तेजी रही है। इसी तरह, जर्मनी के डीएक्स में 1.6 प्रतिशत तेजी दर्ज हुई है। भारतीय बाजार तीन वर्ष की अवधि में भी अमेरिकी बाजारों से प्रदर्शन के मामले में कमजोर रहा है। पिछले तीन वर्ष के दौरान सेंसेक्स में 12.3 प्रतिशत तेजी दिखी है, जबकि डाऊ जोन्स 20.3 प्रतिशत बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा है। हालांकि पिछले एक महीने में भारतीय बाजारों में आपेक्षिक तेजी को विशेषज्ञ अधिक तवज्ज्जो नहीं दे रहे हैं। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के निदेशक यू आर भट्ट ने कहा,पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बाजार में तेजी जरूर आई है, लेकिन इसके पीछे तकनीकी कारण है। देश में कोविड-19 के बढ़ते मामले के मद्देनजर कंपनियों की आय कमजोर रहेगी। लिहाजा मौजूदा तेजी को अधिक तूल नहीं दिया जा सकता। कुछ विशेषज्ञों की नजर में विकसित बाजारों में मौद्रिक प्रसार के प्रभाव से भारत जैसे तेजी से उभरते बाजारों में तेजी दिख रही है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भी भारतीय शेयर बाजार में हरियाली नजर आई है। सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स में 303.38 अंक (0.56%) की तेजी देखने को मिली है यह इंडेक्स 54,481.84 के लेवल पर बंद हुआ है। इसके अलावा निफ्टी 50 इंडेक्स अच्छी खासी मजबूती देखने को मिली है। निफ्टी 16200 के महत्वपूर्ण लेवल के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। बाजार बंद होने के समय निफ्टी 50 में करीब 100 अंकों तक की तेजी देखने को मिली है।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार के कारोबार में 1911 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली तो 1374 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। 155 शेयरों की कीमतों में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया है। निफ्टी के टॉप गेनर्स की लिस्ट में शुक्रवार को Titan Co (10%), HUL (9.5%), UPL (7.5%) और L&T (7.3%) जैसे शेयर रहे हैं। वहीं टॉप लूजर्स की लिस्ट में ONGC, HDFC LIFE, JSW STEEL और टीसीएस जैसे शेयर रहे हैं।
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