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Published / 2022-08-24 07:55:02
2030 तक हर साल 1.7 करोड़ से ज्यादा ई-वाहन बेचने की तैयारी

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में 2030 तक हर साल 1.7 करोड़ से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बिकेंगे। भारत ऊर्जा भंडारण गठबंधन (आईईएसए) ने मंगलवार को कहा, घरेलू ईवी उद्योग में 2021 से 2030 के बीच हर साल 49% की रफ्तार से बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है, ईंधन की बढ़ती कीमतों, नए कंपनियों के प्रवेश, ईवी प्रौद्योगिकी में उन्नति, केंद्र और राज्य सरकारों से लगातार सब्सिडी मिलने की वजह से ईवी उद्योग में तेजी आएगी। इसके अलावा, उत्सर्जन मानकों को लागू करने से भी इन्हें बढ़ावा मिलेगा। • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ईवी उद्योग ने 2020 में महामारी के चलते आई मंदी के बाद तेजी से वापसी की है। ई-दोपहिया वाहनों की घरेलू ईवी बाजार में 2021 के दौरान कुल 50 फीसदी हिस्सेदारी थी। • ई-दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 4.67 लाख इकाई से अधिक रही। इसके बाद धीमी गति वाले ई-तिपहिया वाहनों का स्थान रहा।

Published / 2022-08-21 11:54:09
विदेशी बाजार में भाव गिरने से खाद्य तेल की कीमतों में और राहत की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। शिकागो एक्सचेंज के लगभग आधा प्रतिशत मजबूती के साथ बंद होने से शनिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोयाबीन तेल की कीमतों में सुधार देखने को मिला जबकि आयात भाव के मुकाबले सोयाबीन का स्थानीय भाव कम होने से सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्व-स्तर पर बने रहे। वहीं पामोलीन तेल के भाव टूटने के बीच बाकी लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतें पिछले स्तर पर बंद हुईं। वहीं बाजार के सूत्रों ने कहा कि फिलहाल खाद्य तेलों के दाम काफी नीचे हैं लेकिन खुदरा कीमतों में खास गिरावट नहीं आई है ऐसे में कीमतों में और गिरावट की पूरी गुंजाइश है। बाजार के जानकार सूत्रों ने बताया कि सोयाबीन डीगम तेल का आयात कहीं महंगा बैठता है और इस तेल का स्थानीय भाव भी कमजोर होने से इसके आयात में नुकसान है। पामोलीन तेल का भाव इतना कम है कि इसके आगे कोई खाद्यतेल नहीं टिकेगा। पामोलीन इसी तरह सस्ता बना रहा तो अगले लगभग सवा महीने बाद आने वाली सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला की फसल की खपत को लेकर दिक्कत आ सकती है। सूत्रों ने कहा कि ऐसा होने पर सरकार को घरेलू किसानों के हित साधने के लिए समुचित कदम उठाने होंगे। विदेशों में खाद्य तेलों के भाव टूट गए हैं और सरकार ने आयात शुल्क में भी ढील दे रखी है। इसके बावजूद कीमतों में हुई टूट के मुकाबले उपभोक्ताओं को उसका 25-30 प्रतिशत भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण खुदरा कारोबार में अधिकतम खुदरा मूल्य जरुरत से कहीं ज्यादा रखा जाना है। सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार को दिल्ली के मालवीय नगर में खुदरा कारोबारियों को सरसों तेल 140 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिका जबकि वहां से 180-200 रुपए प्रति लीटर के एमआरपी भाव पर सरसों तेल बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सौदों की निगरानी कर सकती है और उनके बिलों की जांच कर सकती है कि एक सीमा से अधिक कीमत उपभोक्ताओं से क्यों वसूली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह तेल 145 रुपए प्रति लीटर से अधिक भाव पर नहीं बिकना चाहिए। थोक कारोबारियों का मार्जिन बेहद कम है पर खुदरा में एमआरपी के बहाने अधिक कीमत वसूली जा रही है। सूत्रों ने कहा कि विदेशों में जिस मात्रा में भाव टूटे हैं, उसी के अनुरूप भारत में भी तेल कीमतें कम होनी चाहिए।

Published / 2022-08-20 15:36:00
निवेश से जुड़ी सलाह और अविवेकी चयन

एबीएन बिजनेस डेस्क (देवाशीष बसु)। मीडिया रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) शोध विश्लेषकों और निवेश सलाहकारों की सेवाओं को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है। इसके लिए उन नियमों में एक बार फिर बदलाव किया जाएगा जिनसे ये शासित होते हैं। बात की शुरुआत एक प्रकटीकरण से करते हैं। मैं एक कंपनी चलाता हूं जो सेबी द्वारा विनियमित है और ऐसे में मेरा नजरिया निरपेक्ष नहीं होगा। बहरहाल, मैं इस बारे में कुछ अंत:दृ?ष्टि प्रदान कर सकता हूं कि निवेशकों को किस चीज की तलाश है। कुछ ऐसी बातें जिनका अनुमान शायद उन लोगों को नहीं होगा जो वास्तव में व्यावहारिक रूप से काम नहीं कर रहे हैं। सेबी ने निवेश सलाहकारों को 2013 में और शोध विश्लेषकों को 2014 में नियामकीय दायरे में शामिल किया। निवेश सलाहकार प्राय: पारिवारिक चिकित्सकों की तरह होते हैं जिसे परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य की पूरी जानकारी होती है। जो बातें चिकित्सक स्वास्थ्य के बारे में जानता है वही बातें निवेश सलाहकार को आपकी संपत्ति के बारे में जानना चाहिए। परंतु यह तुलना यहीं समाप्त हो जाती है। यदि एक से 100 के पैमाने पर चिकित्सकों पर नियामकीय बोझ का स्तर 10 है तो निवेश सलाहकारों के लिए यह 100 है। चिकित्सक हमारी जिंदगी से ताल्लुक रखते हैं। 2013 और 2016 के सेबी नियमन के जरिये पहले ही ग्राहकों के जोखिम के अनिवार्य आकलन, अनुशंसित उत्पादों की उपयुक्तता और दी जाने वाली हर सलाह की उपयुक्तता और व्यवहार्यता पर ध्यान दिया जा चुका था। निवेश सलाहकारों के पास यकीनन एक दस्तावेजीकृत प्रक्रिया होनी चाहिए जिसके मुताबिक वे ग्राहक की जरूरत और वित्तीय स्थिति के अनुसार निवेश का निर्णय कर सकें। उनके पास यह मानने का उचित आधार भी होना चाहिए कि कोई अनुशंसा या लेनदेन ग्राहक के लक्ष्यों और जोखिम प्रोफाइल के अनुरूप है। ये नियमन अब और अधिक सख्त होते जा रहे हैं। सन 2019-21 के दौरान सेबी ने कुछ और बदलाव किए। उसने 23 सितंबर, 2020 को अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए। यानी जुलाई 2020 में किए गए व्यापक बदलाव के दो माह के भीतर। इन बदलावों के परिणामस्वरूप निवेश सलाहकार क्रेडिट कार्ड से शुल्क नहीं ले सकते और उन्हें 26 प्रावधानों वाले निवेशक समझौते पर हस्ताक्षर करने होते हैं। इसके अलावा उन्हें लिखित और हस्ताक्षरित लिखित रिकॉर्ड रखने होते हैं, टेलीफोन की रिकॉर्डिंग, ईमेल, एसएमएस संदेश तथा अन्य विधिक रूप से जांचे जा सकने लायक रिकॉर्ड कम से कम पांच वर्ष तक रखने होते हैं। क्या ऐसी व्यवस्था व्यावहारिक है : निवेशक सलाहकार को इनका अनुपालन करने के लिए कर्मचारियों की पूरी फौज रखनी होगी। यदि एक चिकित्सक को हर मरीज के साथ 25 पन्नों पर हस्ताक्षर करने पड़े और हर मरीज को लिखे जाने वाले पर्चे को पांच वर्ष तक संभालना हो तथा हर वर्ष पूरी आॅडिट कराना हो तो वह एक दिन में शायद कुछ मरीज ही देख पाएगा। इस स्थिति में स्वास्थ्य सेवा अधिकांश लोगों की पहुंच से बाहर निकल जाएगी। यहां मूल विषय है सेबी का आदर्श निवेश सलाहकार का विचार जिसे अपने ग्राहक की पूरी वित्तीय जानकारी हो, उसके लक्ष्य और प्राथमिकताओं के बारे में, उसकी उधारी के बारे में, उसका वर्तमान निवेश, बचत, व्यय और व्यय और व्यक्तिगत कर आदि सब पता हो ताकि वह उसे एक समग्र राय दे सके। सेबी के दिमाग में जो चल रहा था उस पर उन व्यापक केस अध्ययन ने मुहर लगा दी जिन्हें निवेश सलाहकारों को हर तीसरे वर्ष राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान (एनआईएसएम) की अनिवार्य परीक्षा पास करने के लिए पढ़ना पड़ता। सेबी की यह चाह हो सकती है कि सलाहकार व्यापक आंकड़े जुटाएं और अधिक विशिष्ट सेवा प्रदान करें लेकिन कई बार ग्राहक ही अपना ब्योरा नहीं देना चाहते। कुछ लोग विभिन्न सलाहकारों की सेवा का इस्तेमाल करना चाहते हैं जबकि अन्य पूरा भरोसा नहीं करते। दूसरी ओर फिनटेक कंपनियों का संचालन कर रहे वित्तीय उद्यमी एमेजॉन जैसी उपभोक्ता तकनीक को वित्तीय दुनिया में प्रतिरोपित करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि कुछ ही महीनों में उनके लाखों ग्राहक हो जाएं। इतने बड़े पैमाने पर काम तभी हो सकता है जब न्यूनतम हस्तक्षेप हो, भौतिक प्रतिक्रिया न के बराबर हो और सारी प्रक्रिया महज कुछ मिनटों में समाप्त हो जाए। मौजूदा नियमन के तहत ऐसा कर पाना असंभव है और सेबी तथा फिनटेक कंपनियां दोनों का लक्ष्य है कि उचित निवेश सलाह लाखों लोगों तक पहुंचायी जा सके। फिनटेक कंपनियों की नजर में सेबी का वास्तविक निवेश सलाहकार का मॉडल गुजरे जमाने की व्यवस्था है। फिलहाल फिनटेक कंपनियां मशविरा देने और जोखिम प्रोफाइलिंग का काम कर रही हैं वह भी बिना सेबी के नियमों की परवाह किए। सवाल यह है कि उपभोक्ता क्या चाहते हैं : क्या हर ग्राहक को अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण वित्तीय सलाह चाहिए या कुछ लोग सामान्य सलाह से संतुष्ट होंगे? याद रखिए कि वित्तीय नियोजन बिकता है, उसे खरीदना नहीं जाता। चिकित्सक के पास जाना किसी बीमार के लिए जरूरी हो सकता है लेकिन किसी वित्तीय सलाहकार के सामने बैठना जरूरी नहीं है। हमें अपने ग्राहकों से जो हजारों सवाल मिलते हैं उनमें से 80 प्रतिशत को व्यापक तौर पर तीन श्रे?णियों में बांटा जा सकता है: पहली, मेरे पास पांच लाख रुपये की अधिशेष राशि बैंक में रखी है, मुझे उसे कहां निवेश करना चाहिए? दूसरा, यह मेरा पोर्टफोलियो है। क्या मुझे इन शेयरों को अपने पास रखना चाहिए या बेच देना चाहिए? तीसरा, फलाने शेयर या फंड के बारे में आपकी क्या राय है? सेबी के मौजूदा नियमन के अधीन निवेशक सलाहकार इनमें से किसी सवाल का जवाब तब तक नहीं दे सकता जब तक कि उसे वित्तीय नियोजन के बारे में भरपूर जानकारियां न हों। फिनटेक कंपनियां सेबी की मांग की भौतिक प्रक्रिया से कैसे निपटती हैं? वे ऐसा नहीं कर सकतीं। उनकी प्रक्रियाएं सेबी के नियमन का उल्लंघन करती हैं। पश्चिम में रोबो सलाह शुरू होने के एक दशक बाद 2016 में सेबी ने एक चर्चा पत्र में इसका उल्लेख किया लेकिन नियमन में इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बावजूद बिना नियामकीय कदमों के भय के इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्राहकों की जरूरत पूरी करने के लिहाज से शुरू की गई एक तरह की सेवा ने शोध विश्लेषकों और निवेश सलाहकारों के बीच के अंतर को धुंधला कर दिया है। यह दुख की बात है कि सेबी के कुछ नियम बहुत अस्पष्ट हैं लेकिन नियामक ने निवेश सलाहकारों द्वारा मानकों के उल्लंघन के मामलों में? किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई। हकीकत में ग्राहकों की आवश्यकता, फिनटेक कंपनियों द्वारा उन्हें की जा रही पेशकश और निवेश सलाहकारों से सेबी की अपेक्षाओं में काफी अंतर है। मैं इस अंतर को दूर करने के लिए पेश किए जाने वाले चर्चा पत्र की प्रतीक्षा कर रहा हूं। (लेखक मनीलाइफडॉटइन के संपादक हैं।)

Published / 2022-08-20 12:49:42
मिजोरम से दुबई भेजी गई अनानास की पहली खेप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिजोरम में उगाए गए अनानास को पहली बार दुबई निर्यात किया गया है। पहली खेप के तौर पर 230 किलोग्राम अनानास शुक्रवार को दुबई के लिए रवाना किया गया। मिजोरम के उप मुख्यमंत्री तॉनलुइया ने अनानास की इस निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य में उगाए गए अनानास को कतर की राजधानी दोहा में और बहरीन भी भेजने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि खाजॉल जिले के सैलहॉक गांव के किसानों ने अनानास की खेती की है। उसमें से 230 किलोग्राम अनानास की खेप को दुबई रवाना किया गया। राज्य के बागवानी विकास बोर्ड उपाध्यक्ष एफ लालननमाविया ने इसे मिजोरम के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि बताया। बागवानी विभाग में सचिव के ललथममाविया ने बताया कि सैलहॉक से और 900 किलो अनानास को दुबई भेजा जाएगा। इसके अलावा 740-740 किलो की खेप जल्द ही कतर और बहरीन भी भेजी जाएगी।

Published / 2022-08-17 03:46:57
9% की दर से बढ़ने पर पांच लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जायेगी जीडीपी

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत की अर्थव्यवस्था 2028-29 तक 5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। बशर्ते सालाना इसकी विकास दर नौ फीसदी की दर से होती रहे। एक कार्यक्रम में पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा, पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था को हासिल करने के लिए आठ प्रमुख चुनौतियां हैं, जिनसे देश को निपटना होगा। एलआईसी की पांच साल से बंद पॉलिसी शुरू कराने पर शुल्क में 30 फीसदी तक छूट : भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपने उन पॉलिसीधारकों को विलंब शुल्क में 30 फीसदी तक छूट देने की घोषणा की है, जिनकी पॉलिसी पांच साल से बंद है। कंपनी ने एक बयान में कहा, पॉलिसीधारक 17 अगस्त से 21 अक्तूबर, 2022 तक बंद पड़ी पॉलिसी को शुरू करा सकते हैं। यह गैर यूलिप पॉलिसी के लिए लागू होगा। इस विशेष रिवाइवल अभियान में पॉलिसीधारकों को विलंब शुल्क में 30 फीसदी तक या 3,500 रुपये तक की छूट मिलेगी। सूक्ष्म बीमा (माइक्रो इंश्योरेंस) पॉलिसी में देरी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही इसके लिए किसी मेडिकल चेक अप की भी जरूरत नहीं होगी। कम-से-कम एक लाख के प्रीमियम पर ही छूट : एक लाख रुपये के प्रीमियम पर विलंब शुल्क में 25 फीसदी या 2,500 रुपये तक छूट मिलेगी। एक से तीन लाख के प्रीमियम पर 25 फीसदी या 3,000 रुपये और तीन लाख से ज्यादा के प्रीमियम पर 30 फीसदी या 3,500 रुपये तक छूट मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा 10 फीसदी बढ़े मकानों के दाम : मांग में सुधार और निर्माण लागत बढ़ने से देश के शीर्ष आठ शहरों में मकानों की कीमतें जून तिमाही में पांच फीसदी तक बढ़ी हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिल्ली-एनसीआर में 10 फीसदी तक दाम बढ़े हैं। इससे यहां कीमतें 7,434 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है। यहां सबसे ज्यादा कीमत गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर बढ़ी है जो 21 फीसदी है। दूसरे स्थान पर नोएडा एक्सप्रेस वे है। क्रेडाई की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में नौ फीसदी भाव बढ़कर 5,927 रुपये वर्ग फुट हो गए जबकि बेंगलुरु में चार फीसदी की बढ़त के साथ 7,848 रुपये कीमत हो गई। कोलकाता में आठ फीसदी बढ़ीं कीमतें : कोलकाता में मकानों की कीमतें आठ फीसदी बढ़कर 6,362 रुपये वर्ग फुट हो गईं। पुणे में 5 फीसदी बढ़त के साथ 7,681 रुपये वर्ग फुट कीमत है। एशियाई देशों में सर्वाधिक 10 फीसदी भारत में बढ़ेगा वेतन : कंपनियां वेतन बढ़ाने के हिसाब से बना रहीं बजट, पिछले साल 9.5 फीसदी हुई थी बढ़ोतरी। चालू वित्त वर्ष में देश में कंपनियां कर्मचारियों के वेतन में 10 फीसदी इजाफा कर सकती हैं। यह एशियाई क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़त होगी। नौकरी छोड़ने की अधिक दर और कर्मियों की कमी के कारण ऐसा होगा। वैश्विक सलाहकार फर्म विलिस टावर्स वाटसन के अनुसार, 2022-23 में कंपनियां 10 फीसदी वेतन बढ़ाने के हिसाब से बजट बना रही हैं। पिछले साल 9.5 फीसदी की बढ़त हुई थी। देश में 58 फीसदी नियोक्ता बजट का प्रावधान कर चुके हैं। 24.4 फीसदी नियोक्ता अपने बजट में कोई बदलाव नहीं कर रहे हैं। वित्तीय सेवाएं, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी, मीडिया और गेमिंग क्षेत्र में 10.4 फीसदी तक वेतन बढ़ सकता है। बजाज हिंदुस्तान के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू : एसबीआई ने चीनी कंपनी बजाज हिंदुस्तान के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए एनसीएलटी की प्रयागराज बेंच में आवेदन किया है। बजाज हिंदुस्तान ने यह जानकारी दी। चीनी कंपनी को पिछले वित्त वर्ष में 267 करोड़ का घाटा हुआ था। जून तिमाही में 45 करोड़ का घाटा था। उत्सव डिपॉजिट : 6.1 फीसदी ब्याज देगा एसबीआई : एसबीआई ने एक नई टर्म डिपॉजिट योजना शुरू की है। आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर 75 दिन के लिए इसे उत्सव डिपॉजिट नाम से शुरू किया गया है। योजना में निवेशकों को 6.1 फीसदी की दर से सालाना ब्याज मिलेगा। इसे 15 अगस्त से चालू किया गया है। योजना 30 अक्तूबर तक के लिए है। हिंदुस्तान जिंक के लिए पांच मर्चेंट बैंकर नियुक्त : सरकार ने हिंदुस्तान जिंक में 29.53 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए 5 मर्चेंट बैंकर्स नियुक्त किया है। इसमें एक्सिस कैपिटल, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी बैंक सिटीग्रुप और अन्य हैं। 12 अगस्त को 6 बैंकरों ने सरकार के समक्ष इस बारे में प्रस्तुति दी थी। अदाणी ने आईसीडी को 835 करोड़ में खरीदा : अदाणी लॉजिस्टिक्स ने आईसीडी टंब को 835 करोड़ में खरीदा है। कंपनी ने मंगलवार को बताया कि इससे इसकी क्षमता में बढ़त होगी। आईसीडी हजीरा और न्हावा शेवा पोर्ट के लिए सुविधाजनक है। इसका कारोबार पिछले वित्त वर्ष में 403 करोड़ रुपये था। अदाणी ने इसे नवकार कॉर्प से खरीदा है।

Published / 2022-08-16 14:14:58
एक और झटका... अमूल-मदर डेयरी ने फिर बढ़ाये दूध के दाम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मंगलवार को देश वासियों को महंगाई का एक और झटका लगा है। दरअसल, मदर डेयरी और अमूल दोनों ने ही दूध के दामों में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 6 महीने के अंदर ये दूध की कीमतों में लगातर दूसरी बढ़त है। इससे पहले 6 मार्च को ही मदर डेयरी, अमूल और पराग मिल्क ने भी अपने अपने दूध उत्पादों की कीमतों को 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया था। यानि 6 महीने के अंदर पराग और मदर डेयरी के उत्पाद 4 रुपये प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। वहीं एक साल से कुछ ज्यादा वक्त यानि 13 महीने में कीमतें 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ी हैं। पिछले साल पहली जुलाई से अब तक 3 बार में 2-2 रुपये दूध महंगा हो चुका है। अमूल और मदर डेयरी ने बढ़ती लागत को कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बताया है। इससे पहले मार्च को ही अमूल, पराग डेयरी, मदर डेयरी आदि ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। उस वक्त मदर डेयरी ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि किसानों की बढ़ती लागत, ईंधन की कीमत और पैकेजिंग मैटिरियल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दूध की कीमतें में वृद्धि की जा रही है। इस बढ़त से पहले यानि मार्च से पहले दिल्ली एनसीआर में एक किलो टोकन मिल्क की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं एक किलो फुल क्रीम दूध की कीमत 57 रुपये प्रति लीटर , टोंड मिल्क की कीमत 47 रुपये प्रति लीटर और डबल टोंड की कीमत 41 रुपये प्रति लीटर थी। गाय का दूध इस बढ़त से पहले 49 रुपये प्रति लीटर का मिल रहा था। 6 महीने के बाद टोकन मिल्क 48 रुपये, फुल क्रीम दूध 61 रुपये प्रति लीटर, टोंड दूध की कीमत 51 रुपये प्रति लीटर और डबल टोंड की कीमत 45 रुपये प्रति लीटर होगी वहीं गाय का दूध अब 53 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। साल 2021 में जुलाई के महीने के दौरान अमूल और मदर डेयरी ने अपने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। अमूल ने पहली जुलाई को कीमतों में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी। वहीं मदर डेयरी ने 11 जुलाई 2021 को कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। जुलाई की बढ़ोतरी से पहले अमूल गोल्ड 55 रुपये, अमूल ताजा 50 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। वहीं गाय की दूध 47 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। यानि जुलाई 2021 से लेकर अगस्त 2022 के बीच तक देश में दूध की कीमतें 6 रुपये प्रति लीटर तक महंगी हो चुकी हैं।

Published / 2022-08-15 06:26:06
एनएसई के शेयरधारकों ने दी चौहान की नियुक्ति को मंजूरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के प्रमुख शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के शेयरधारकों ने प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में आशीष कुमार चौहान की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। एनएसई ने रविवार को यह जानकारी दी। एक बयान के अनुसार, एनएसई की असाधारण आम सभा 11 अगस्त को आयोजित की गई थी। इसमें शेयरधारकों ने 99.99 प्रतिशत मतों से चौहान की नियुक्ति को मंजूरी दी। चौहान इससे पहले बीएसई के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ थे। उन्होंने 26 जुलाई को एनएसई के प्रमुख का पद संभाला था। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 18 जुलाई को ही चौहान की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। उन्होंने विक्रम लिमये का स्थान लिया है जिनका एनएसई में पांच साल का कार्यकाल 16 जुलाई को पूरा हो गया था।

Published / 2022-08-14 18:01:41
राकेश झुनझुनवाला : ब्लैक कोबरा का मंदड़िया चेला जिसने हर्षद मेहता की बर्बादी से लगायी छलांग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मैं जिंदगी अपनी शर्तों पर जीता हूं, आज जो कुछ भी हूं अपने बूते हूं, अगर लाइफ में मिस्टेक करने से डर गए तो कुछ नहीं कर पाओगे। ये थे हमारे वॉरन बफेट यानी राकेश झुनझुनवाला। हर पल मस्ती में जीने वाला शख्स। चाहे कैमरे सामने हों, लाइव चल रहा हो अगर पान मसाला खाना है तो खाना है। कोई टोक नहीं सकता। कई बीमारियां पर दिलेरी वही। बैठे हैं वील चेयर पर लेकिन जब कजरारे - कजरारे... कजरारे तेरे नयना बजा तो झूमने लगे। दलाल स्ट्रीट का ये सरताज गमजदा कभी नहीं हुआ। आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो ये जानना जरूरी है कि राकेश झुनझुनवाला हमेशा देश और इकॉनमी के बारे में पॉजिटिव रहे। जब अकासा एयर लॉन्च किया और किसी ने विजय माल्या, गोपीनाथ का जिक्र कर पूछा कि बजट एयरलाइन चल पाएगी, जवाब आया - क्यों नहीं, रिस्क तो लेना पड़ेगा न। 350 करोड़ डॉलर में 70 प्लेन के आॅर्डर देने के बाद आज अकासा एयर आसमां छू रहा है तब राकेश झुनझुनवाला हमारे बीच नहीं है। आखिरी बार अकासा एयर की पहली फ्लाइट के मौके पर ही उन्हें देखा गया। हर जगह हम ये खबर देख रहे कि शेयर मार्केट का बिग बुल नहीं रहा। लेकिन ये पूरा सच नहीं है। राकेश झुनझुनवाला को तेजड़िया (बुल) किसी ने बनाया तो उनके अंदर बसे मंदड़िए (बीयर) ने। तब जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर हर्षद मेहता का राज था। हर्षद मेहता कैसे आॅपरेट करता और किसी शेयर के भाव को आसमान पर पहुंचाता इसे वेब सिरीज स्कैम-1992 में बखूबी दिखाया है। दलाल स्ट्रीट का असली बुल तो मेहता था। उसने एसीसी के शेयर को 200 रुपए से 9000 रुपए पर पहुंचा दिया। एक अप्रैल 1991 से मई 1992 के बीच बीएसई का सेंसेक्स रॉकेट हुआ जा रहा था। कुछ लोगों की राय थी मनमोहन सिंह सरकार के उदारीकरण से उम्मीद जगी है और इसीलिए तेजी आई है। लेकिन ये सच नहीं था। हर्षद मेहता रिजर्व बैंक के सारे नियमों को तोड़ कर सरकारी बैंकों से पैसा उठा रहा था और वो भी बिना किसी अनामत के। हर्षद मेहता ने बैकों से बैंक रिसीट लिया पर 90 दिन के भीतर शेयर खरीदने का प्रूफ या शेयर पेपर जमा ही नहीं किए। ये बीआर कैश मनी की तरह था। हर्षद इसे दूसरे बैंक से कैश भी करा लेता था। हर्षद ने स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को भी चूना लगा दिया। 500 करोड़ रुपए के स्कैम में हर्षद ने स्टॉक मार्केट को इतना बढ़ा दिया कि शेयरों की कुल कीमत देश के हेल्थ और शिक्षा बजट से ज्यादा हो गई। जब सुचेता दलाल ने हर्षद के गेम का पदार्फाश किया तो उसका दुश्मन मनु मानेक इसका फायदा उठाने को बेताब था। मनु मानेक को शेयर दलाल ब्लैक कोबरा के तौर पर जानते थे। राधाकृष्ण दमानी और राकेश झुनझुनवाला इसी के चेले थे। ले फटाफट-दे फटाफट : जैसे ही हिंट मिला कि मार्केट क्रैश होने वाला है। आरीबाई ने बीआर के गेम में बैंकों पर शिकंजा कस दिया है। वैसे ही ब्लैक कोबरा ने फन फैला दिया। फटाफट शेयर शॉर्ट होने लगे। यानी मंदड़िए बने ब्लैक कोबरा के गुट ने हर्षद मेहता की खरीदे शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। जैसे ही मार्केट गिरना शुरू हुआ इनकी चांदी हो गई। 500 में शेयर बेच 200 में खरीदने लगे। यानी 300 का शुद्ध मुनाफा। देखते ही देखते सेंसेक्स 4500 से 2500 पर आ गया। राकेश झुनझुनवाला मालामाल हो गए। वो जमाना कागजों पर शेयरों की खरीद बिक्री का था। ब्लैक कोबरा के बारे में कहा जाता है कि अस्सी के दशक में वो शर्त लगाकर 100 रुपए के शेयर को एक रुपए पर तोड़ सकता है। मनु मानेक ने हर्षद मेहता को पटखनी देने के लिए 90-91 में अफवाह फैलाई कि हर्षद को एक करोड़ रुपए का घाटा हो गया है। उसे उम्मीद थी कि इसके बाद हर्षद ने जिन कंपनियों के शेयर खरीदे थे उसमें बिकवाली शुरू हो जाएगी। लेकिन तब ब्लैक कोबरा कामयाब नहीं हो सका। जैसे ही हिंट मिला कि मार्केट क्रैश होने वाला है। आरीबाई ने बीआर के गेम में बैंकों पर शिकंजा कस दिया है। वैसे ही ब्लैक कोबरा ने फन फैला दिया। फटाफट शेयर शॉर्ट होने लगे। यानी मंदड़िए बने ब्लैक कोबरा के गुट ने हर्षद मेहता की खरीदे शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। हर्षद मेहता और सेंसेक्स के गर्त में जाने से जो पैसा राकेश झुनझुनवाला ने बनाया उसी से वो बीयर से बुल गियर में आ गये। वो सबकी नजरों में तब चढ़े जब 1996 में टाटा टी के शेयर 43 रुपये के भाव पर लिया और तीन महीने में दाम 143 रुपए हो गया। इसके बाद राकेश झुनझुनवाला ने कभी मुड़ कर नहीं देखा। ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट दोनों पर समान पकड़ उनकी खासियत थी। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों ही तरीकों से उन्होंने निवेश किया। ले फटाफट - दे फटाफट शैली वाले निवेशक। वो डील पकड़ने के माहिर थे। हाली ही में जब जी इंटरटेनमेंट और सोनी के बीज डील हुई तो उससे आठ दिन पहले ही झुनझुनवाला ने जी के शेयर लिए थे। महज हफ्ते भर में 50 करोड़ रुपए का मुनाफा उनकी जेब में थे। वो हमारे आपके जैसे छोटे निवेशकों के लिए रोल मॉडल थे। जिस कंपनी में पैसा लगा दिया उसके पीछे निवेशक टूट पड़ते। लेकिन एग्जिट स्ट्रैटेजी सबसे तगड़ी थी। एक शातिर ट्रेडर की तरह झुनझुनवाला ये नहीं बताते कि आज वो अमुक कंपनी से निकलने वाले हैं। टाटा ग्रुप की कंपनियों से उन्होंने जम कर पैसे कमाए। खासकर टाइटन के शेयर को तो झुनझुनवाला ने अनमोल रत्न बना दिया। आज जब राकेश झुनझुवाला हमारे बीच नहीं रहे, तब उनके पोर्टफोलियो में 32 कंपनियों के शेयर हैं। वो 36 हजार करोड़ रुपए का फंड छोड़ गए हैं। अकासा एयर रतन टाटा की एयर एशिया और एयर इंडिया को चुनौती देने के लिए उड़ान भर चुकी है।

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