एबीएन बिजनेस डेस्क। रियल मी एक फास्ट चार्जिंग मोबाइल लांच करने जा रहा है। इसकी लांचिग तारीख 16 सितंबर है। रियल मी ने इस मॉडल का नाम GT NEO 3T रखा है। यह मोबाइल 16 सितंबर को दोपहर 12.30 बजे से ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म Flipkart में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसमें Snapdragon 870 5G प्रोसेसर लगा हुआ है। कंपनी का कहना है कि इस मोबाइल में 38 level का safety protection लगा हुआ है। इस मोबाइल में बेहद ही खास फीचर दिए गए है। Realme GT Neo 3T में 6.62 इंच की AMOLED E4 स्क्रीन फुल HD+ रेजॉल्यूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ उपलब्ध है। स्नैपड्रैगन 870 चिपसेट के साथ 8GB तक रैम और 128GB और 256 GB तक की क्षमता के साथ यह मोबाइल बाजार में आ रहा है। फोन में 5,000mAh की बैटरी है। जो 80W तक फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करने वाली है। इस मोबाइल में ट्रिपल रियर कैमरा की सुविधा दी गई है। इसमें 64MP प्राइमरी कैमरा है, 8MP अल्ट्रा-वाइड लेंस और 2MP मैक्रो कैमरा लेंस का फीचर भी दिया गया है। इस मोबाइल में Dual-LED फ्लैश की सुविधा भी है। इसके फ्रंट पर 16MP का बेहद ही खास सेल्फी कैमरा भी दिया गया है। इसमें Android 12, Realme UI 3.0 का ऑपरेटिंग सिस्टम है। यूज़र्स इसमें 1080p@30fps, gyro-EIS की वीडियो क्वालिटी का आनंद ले पाएंगे। इसमें फिंगरप्रिंट भी दिया गया है। मोबाइल की स्क्रीन की सुरक्षा के लिए इसमें कोर्निंग गोरिल्ला गिलास 65 लगाया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले दो कारोबारी सत्र में जोमैटो का शेयर करीब 23 फीसदी टूटा है जब उसके प्री-आईपीओ शेयरधारिता पर लगी एक साल की पाबंदी समाप्त हो गई। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के लाभ को लेकर चिंता के बावजूद ब्लिंकिट के अधिग्रहण से लाभ में आने की खातिर उसे लंबा रास्ता तय करना होगा। सूचीबद्धता के बाद से शेयर कीमतों में आई तेज गिरावट के कारण जेफरीज के विश्लेषक लंबी अवधि के निवेशकों को इस शेयर को खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने इसका कीमत लक्ष्य 100 रुपये बनाये रखा है। जेफरीज ने कहा, मुश्किल समय पहले ही सभी स्टार्टअप को नकदी प्रवाह पर ध्यान केंद्रित करने की हिदायत दे चुका है। ब्रोकरेज ने कहा कि जोमैटो का प्रबंधन बेहतर आर्थिक हालात के लिए पहले ही अपनी रफ्तार तेज कर चुका है और अब फूड डिलिवरी बिजनेस में जल्द ही घाटा समाप्त करने की उम्मीद कर रहा है। सख्त नकदी स्विगी को भी लाभ पर ध्यान केंद्रित करने की ओर ले जायेगा क्योंकि वह मूल कारोबार से आगे कुछ और कारोबारों गठन कर रही है, खास तौर से क्विक कॉमर्स, जिसकी पेशकश स्विगी इंस्टामार्ट के तहत हो रही है। जेफरीज का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के बुरे दिन पीछे रह गये हैं, ऐसे में उद्योग का लाभ बढ़ेगा क्योंकि यह क्षेत्र अन्य के मुकाबले पहले ही एकीकृत हो चुका है। विश्लेषकों ने कहा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्ती बिना लाभ वाली वैश्विक कंपनियों पर असर डाल रही है। पूरा क्षेत्र अब पुनर्समायोजन के दौर से गुजर रहा है क्योंकि अब बढ़त से ज्यादा ध्यान नकदी प्रवाह की ओर है। विश्लेषकों ने कहा, फेसबुक, ऐपल, निविडिया, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन और नेटफ्लिक्स के शेयर इस साल अब तक के लिहाज से15 से 65 फीसदी तक नीचे हैं। इसका भी वैश्विक फूड डिलिवरी शेयरों पर असर दिखा है, जिनमें इस साल अब तक के लिहाज से तेज गिरावट आई है और उनमें जोमैटो सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में शामिल है। मंगलवार को जोमैटो का शेयर 12.4 फीसदी टूटा, पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस, डेलिवरी और कारट्रेड टेक के शेयरों में 8 फीसदी की फिसलन दर्ज हुई। 23 जुलाई, 2021 को सूचीबद्ध होने वाली जोमैटो अभी अपने इश्यू प्राइस 76 रुपये से करीब 45 फीसदी नीचे कारोबार कर रही है। 16 नवंबर, 2021 को यह शेयर 169.10 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा मोटर्स कंपनी ने एक बड़ा एलान किया है, जिसके तहत अब आप भी अपने बजट में इलेक्ट्रिक वेहिकल्स लेने की योजना बना सकते हैं। जिस तरह से इलेक्ट्रिक वेहिकल्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है उसकी वजह से हर कोई ईवी कार खरीदना चाहता है। लेकिन ईवी कार खरीदने में इस वक्त सबसे बड़ी बाधा है उसकी कीमतें। ईवी कार सामान्य कार की तुलना में काफी महंगी है, यही वजह है कि लोग अभी ईवी कार खरीदने से बच रहे हैं। लोग इंतजार कर रहे हैं कि जब ईवी कार की कीमतें कम होंगी और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होंगे तो वह ईवी कार खरीदेंगे। खुद सरकार भी ईवी कार को आगे बढ़ाने में हर संभव मदद कर रही है। ऐसे में जो लोग सस्ती ईवी कार का इंतजार कर रहे हैं उनका इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। दरअसल टाटा मोटर्स जल्द ही छोटी यानि हैचबैक ईवी कार कार लॉन्च करने जा रही है और बड़ी बात यह है कि इसकी कीमतें उम्ंमीद से भी कहीं ज्यादा कम होंगी। रिपोर्ट की मानें तो टाटा 12.50 लाख से कम कीमत वाली ईवी कार लाने जा रहा है। कंपनी के एमडी शैलेश चंद्रा ने बताया कि टाटा मोटर्स जल्द ही सस्ती ईवी कार लॉन्च करने जा रही है। यह कार टिगोर से भी सस्ती होगी। बता दें कि टिगोर ईवी की शुरुआती कीम 12.5 लाख रुपए है। टिगोर मिनी सिडान सेगमेंट में आती है लेकिन टाटा अब छोटी यानि हैचबैक ईवी कार लाने की तैयारी में है। शैलेश चंद्रा ने बताया कि हैचबैक ईवी की कीमत टिगोर की कीमत से भी कहीं ज्यादा कम होगी। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2023 तक 50 हजार ईवी की बिक्री की जाए। ईवी इंडस्ट्री की ग्रोथ के बारे में एमडी ने कहा कि वित्त वर्ष 2019 में ईवी कारों का बाजार सिर्फ 2000 कार का था, लेकिन उसके बाद से तीन साल के भीतर यह तीन गुना बढ़ गई है। इस इंडस्ट्री में पहले ही 20 हजार ईवी कारों की बिक्री हो गई है। इस वित्त वर्ष में ईवी कारों की बिक्री 50 हजार को भी पार कर जाएगी। चंद्रा ने बताया कि कंपनी ने अभी तक 17 हजार ईवी कारें बेच दी हैं और हमारा लक्ष्य अगले साल तक इसे 50 हजार तक पहुंचाना है। हम इस योजना पर काम कर रहे हैं। हम सानंद स्थित फोर्ड प्लांट का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं, जहां रीटूलिंग का काम किया जायेगा, हम यहां पर कार की क्षमता को तीन लाख तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। चंद्रा ने कहा कि नेक्सॉन ईवी कार में आग लगने की खबरों को हम देख रहे हैं। मुंबई में यह घटना सामने आई थी, हम इसके सभी संभावित वजहों का पता लगा रहे हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वाणिज्यिक बैंकों के ऋण में वृद्धि करीब 9 महीने के उच्च स्तर पर है और इसमें 26 अगस्त को समाप्त सप्ताह में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। हाल में जारी भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक यह 1 नवंबर, 2013 के बाद का उच्चतम स्तर है, जब वृद्धि 16.1 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष में अब तक बैंकों ने 5.66 लाख करोड़ रुपए कर्ज दिए हैं। इंडिया रेटिंग्स में डायरेक्टर एवं हेड, फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशंस प्रकाश अग्रवाल ने कहा, व्यवस्था में ऋण में वृद्धि तेज है और यह कई साल के उच्च स्तर पर है लेकिन 20 प्रतिशत बढ़ोतरी चुनौतीपूर्ण नजर आती है क्योंकि ज्यादातर कर्ज खुदरा क्षेत्र में लिया गया है। उन्होंने कहा कि ऋण में वृद्धि 20 प्रतिशत हो, इसके लिए आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बहुत तेज होनी चाहिए और इसके लिए जमा में भी बढ़ोतरी करनी होगी। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में जमा में 9.5 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इस वित्त वर्ष में जमा में वृद्धि, ऋण वृद्धि से पिछड़ रही है। इसे देखते हुए विश्लेषकों में यह चिंता है कि कम जमा ऋण में वृद्धि की राह में बड़ा व्यवधान बन सकती है। मैक्वैरी रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा है, हम कर्ज में वृद्धि में स्थिर आधार पर व्यापक विस्तार देख रहे हैं, भले ही ब्याज दरें बढ़ी हैं। इसे हमने सकारात्मक रूप में लिया है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कम होती कीमत के बीच भी पेट्रोल-डीजल के रेट पुराने स्तर पर ही कायम हैं। तेल की कीमत से जनता को राहत देने के लिए पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार अब हर 15 दिन में कच्चा तेल, डीजल-पेट्रोल और विमान ईंधन पर लगाए गए नए टैक्स की समीक्षा करेगी। अंतरराष्ट्रीय कीमत को ध्यान में रखते हुए करों की समीक्षा हर पखवाड़े की जायेगी। इसके बाद पिछले दिनों केंद्र सरकार ने डीजल और विमानन ईंधन पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स बढ़ाने का फैसला किया था। इसके अलावा सरकार ने घरेलू क्रूड आॅयल पर भी टैक्स बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस बदलाव को 1 सितंबर से लागू भी कर दिया गया है। यह निर्णय सरकार की तरफ से क्रूड की बेलगाम होती कीमत के बीच लिया गया था। हालांकि फिलहाल क्रूड 7 महीने के निचले स्तर पर चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा, हम निर्यात को हतोत्साहित नहीं करना चाहते लेकिन घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ाना चाहते हैं। यदि तेल की उपलब्धता नहीं होगी और निर्यात अप्रत्याशित लाभ के साथ होता रहेगा तो कुछ हिस्सा देशवासियों के लिए भी रखना जरूरी है। घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का कर लगाया गया है। राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा कि नया कर सेज इकाइयों पर भी लागू होगा। लेकिन उनके निर्यात को लेकर पाबंदी नहीं होगी। इसके साथ ही रुपये की गिरावट पर वित्त मंत्री ने कहा आरबीआई और सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। सरकार आयात पर रुपये के मूल्य के असर को लेकर पूरी तरह सचेत है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। पेट्रोल और डीजल की कीमत में आने वाले दिनों में कटौती देखने को मिल सकती है। इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आई है। रूस ने तेल की सप्लाई रोकने की धमकी दी है लेकिन इसके बावजूद तेल की कीमत में नरमी आई है। डॉलर की कीमत में तेजी और मांग में कमी की आशंका से तेल की कीमत गिरी है। यूएस बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है जबकि ग्लोबल ब्रेंट बेंचमार्क की कीमत 90 डॉलर से कम रह गई है। यह जनवरी के बाद इसके न्यूनतम स्तर है। इससे आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में गिरावट आ सकती है। बुधवार को डॉलर गेज आॅल टाइम हाई पर पहुंच गया। महंगाई को काबू में करने के लिए दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। निवेशकों को आशंका है कि दुनिया के कई देश मंदी की चपेट में आ सकते हैं। चीन में महामारी के प्रकोप से बचने के लिए सख्त लॉकडाउन लगाया गया है। इससे मांग प्रभावित हुई है। ओपेक देशों ने उत्पादन में कटौती का फैसला किया था। इससे कच्चे तेल की कीमत में तेजी आई थी। लेकिन उसने इस बढ़त को खो दिया है। सऊदी अरब ने एशिया और यूरोप में अपनी कस्टमर्स के लिए अगले महीने के खेप की कीमत में कटौती की है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी जो 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर था। लेकिन हाल के दिनों में इसमें गिरावट आई है। हालांकि, भारतीय बाजार में कई महीनों से पेट्रोल और डीजल की कीमत स्थिर बनी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये और डीजल की कीमत 89.62 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 102.63 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 94.24 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 106.03 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी कार लेने का मन बना रहे हैं, तो थोड़ा सब्र कर लीजिये। हो सकता है इस इंतजार का फल ज्यादा मीठा हो। क्योंकि तब आपको गिने चुने नहीं बल्कि कई ऑप्शन मिलने वाले हैं। ईवी कार लॉन्च करने की कतार में अब एक और दिग्गज कंपनी शामिल हो गई है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने ईवी कार लॉन्चिंग का ऐलान कर दिया है। 2024-25 में लॉन्च होगी कार न केवल ऐलान बल्कि लॉन्चिंग का समय भी बता दिया है। जी हां, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में कार लॉन्च करने की उम्मीद जताई है। जनरल मीटिंग में शेयरहोल्डर्स के सवालों पर ये जानकारी कंपनी के प्रेसीडेंट आरसी भार्गव ने दी। इस दौरान बताया कि शुरुआती चरण के ईवी को अपर प्राइज बैंड में लॉन्च किया जायेगा। कंपनी अपने ग्रीन एनर्जी प्रोग्राम के अनुसार 2022-23 में 400,000 और 500,000 CNG कारों का निर्माण करेगी, जो 2021-22 में लगभग 250,000 CNG कारों से कहीं अधिक है। ईवी का प्रोडक्शन गुजरात में सुजुकी प्लांट में होने जा रहा है। कंपनी को उम्मीद है ग्राहक ईवी कार को काफी पसंद करेंगे। कार को डिजाइन काफी सावधानी से किया जायेगा। वहीं, बैटरी प्लांट लगने से ईवी में स्वदेशी अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के हंसलपुर में सुजुकी के ईवी बैटरी प्लांट की फाउंडेशन रखी थी। फिलहाल कंपनी का हाइब्रिड कार पर फोकस : इधर, पिछले कुछ वर्षों में, कंपनी ने अपनी ईवी योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया था, क्योंकि वह अधिग्रहण की हाई कॉस्ट को लेकर चिंतित थी। साथ ही चार्जिंग स्टेशन की कमी भी रोड़ा बन रही थी। इस बीच कंपनी ने ऑल्टरनेटिव टेक्निक जैसे CNG और हाइब्रिड पर फोकस किया। बता दें कि टाटा मोटर्स, एमजी मोटर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हुंडई और किआ जैसी कंपनी पहले ही ईवी लॉन्च कर चुकी हैं। कैसा रहा है कंपनी का प्रदर्शन : मारुति सुजुकी का मार्केट शेयर 2018-19 में 51.21 प्रतिशत के पीक से 2021-22 में 43.38 प्रतिशत तक गिरा है। इसका नेट प्रॉफिट 2020-21 में 4,389 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 22 में 11.6 प्रतिशत घटकर 3,879 करोड़ रुपये हो गया। 2019-20 से, कंपनी की बिक्री में 16 फीसदी और industry-wide sales में 18 फीसदी की गिरावट आई है। यह गिरावट मूल्य में बढोतरी के कारण हुई जब कंपनी बीएस IV से बीएस VI में स्विच कर रही थी। इसके बाद, 2020-21 में कोविड-19 ने झटका दिया। पिछले कुछ वर्षों में, सेमीकंडक्टर की कमी और यूक्रेन-रूस वॉर ने उद्योग की परेशानी को और बढा दिया है। इससे कार की कीमतों में काफी इजाफा हो गया। हालांकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। बिक्री और प्रोडक्शन बढ़ा है। कंपनी के मुताबिक बाजार में हिस्सेदारी तब बढ़ेगी जब स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल यानी एसयूवी सेगमेंट में अधिक से अधिक वाहन मिलेंगे। हाल ही में एक नई ऑल्टो लॉन्च हुई है। इस साल काफी कुछ अपग्रेडेशन हुआ है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। UPI के जरिये डिजिटल भुगतान लेनदेन का मूल्य इस साल अगस्त में बढ़कर 10.73 लाख करोड़ रुपये हो गया। जुलाई में UPI आधारित डिजिटल लेनदेन का मूल्य 10.63 लाख करोड़ रुपये रहा था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त माह के दौरान यूपीआई के माध्यम से कुल 6.57 अरब (657 करोड़) लेनदेन हुए, जो पिछले महीने में 6.28 अरब (628 करोड़) रहा था। जून में 10.14 लाख करोड़ रुपये के 5.86 अरब लेनदेन हुए थे। NCPI ढांचे के अन्य आंकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि तत्काल हस्तांतरण-आधारित आईएमपीएस के जरिये अगस्त में लेनदेन का मूल्य 4.46 लाख करोड़ रुपये रहा। अगस्त में आईएमपीएस के जरिये कुल 46.69 करोड़ लेनदेन हुए। जुलाई में, यह कुल 46.08 करोड़ लेनदेन पर 4.45 लाख करोड़ रुपये रहा था। टोल प्लाजा पर अगस्त में फास्टैग के जरिये 4,245 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो पिछले महीने में 4,162 करोड़ रुपये था।
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