बिजनेस

View All
Published / 2022-10-17 23:06:13
झटके पे झटका : फिर रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा आरबीआई

एबीएन बिजमी डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने एक लेख में कहा है कि मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये जारी अभियान लंबा चलेगा। मौद्रिक नीतिगत कदमों का असर आने में लगने वाले समयांतराल को इसका कारण बताया गया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई वाली एक टीम ने अर्थव्यवस्था की हालत के बारे में लिखे एक लेख में यह संभावना जताई है। इस लेख के मुताबिक, अगर हम सफल होते हैं तो हम नकारात्मक मुद्रास्फीति से जूझ रही बाकी दुनिया के मुकाबले सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक के तौर पर भारत की संभावनाएं मजबूत करेंगे। लेख के मुताबिक, मुद्रास्फीति के खिलाफ जारी जंग का सुखद नतीजा विदेशी निवेशकों में नया जोश भरेगा, बाजारों को स्थिरता देगा और टिकाऊ आधार पर वित्तीय स्थायित्व प्रदान करेगा। खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 7.41 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह लगातार नौवां महीना रहा जब मुद्रास्फीति आरबीआई के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बना हुआ है। ऊंची मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने इस साल अब तक चार बार नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि की है। अब रेपो दर बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो चुकी है। आरबीआई के अक्टूबर बुलेटिन में प्रकाशित यह लेख कहता है, सकल मुद्रास्फीति के लगातार तीन तिमाहियों से सुविधाजनक दायरे से ऊपर बने होने से निर्दिष्ट उत्तरदायित्व प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, वहीं मौद्रिक नीति मुद्रास्फीति का लक्ष्य के साथ तालमेल बिठाने पर केंद्रित बनी रहेगी। दरअसल मुद्रास्फीति के लगातार छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर बने रहने के बाद आरबीआई को इसके बारे में उठाए गए कदमों को लेकर सरकार को रिपोर्ट देनी होगी। आरबीआई के इस बुलेटिन में पर्यावरण मंत्रालय के तहत हरित जीडीपी के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ बनाने का भी सुझाव दिया गया है। यह प्रकोष्ठ पर्यावरणीय ह्रास, प्राकृतिक संसाधनों में कमी और संसाधनों की बचत से जुड़ी गणनाएं कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उनका समायोजन करेगा।

Published / 2022-10-17 12:10:18
त्योहारी मांग बढ़ते ही अक्टूबर में बढ़ी ईंधन की बिक्री

एबीएन बिजनेस डेस्क। त्योहारों के मौसम में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से परिवहन ईंधन की मांग भी बढ़ी है जिसकी वजह से अक्टूबर के पहले पखवाड़े में भारत में ईंधन की बिक्री भी अधिक रही। पेट्रोलियम उद्योग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की बिक्री सालाना आधार पर 22-26 प्रतिशत बढ़ी। 1-15 अक्टूबर के बीच पेट्रोल की बिक्री 22.7 फीसदी बढ़कर 12.8 लाख टन हो गई जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 10.5 लाख टन रही थी। वहीं कोविड महामारी से बुरी तरह प्रभावित अक्टूबर 2020 की तुलना में बिक्री 31 प्रतिशत अधिक रही है। इसके अलावा मासिक आधार पर भी बिक्री में वृद्धि हुई है। सितंबर 2022 के पहले पंद्रह दिन की तुलना में अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ईंधन मांग 1.3 प्रतिशत अधिक रही है। देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ईंधन डीजल की बिक्री अक्टूबर 2022 के दौरान अब तक करीब 27 प्रतिशत बढ़कर 30.8 लाख टन रही है। वहीं 1-15 अक्टूबर 2020 की तुलना में डीजल बिक्री 16 प्रतिशत अधिक रही है। मांग मासिक आधार पर 6.9 फीसदी बढ़ी है। पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी बारिश का मौसम खत्म हो जाने और कृषि गतिविधियों में तेजी आने से डीजल की मांग को समर्थन मिला। इसके अलावा त्योहारों का मौसम करीब आने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से भी ईंधन की मांग बढ़ी। इसके पहले जुलाई और अगस्त के महीनों में मानसून के सक्रिय रहने से मांग कम रही और पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई थी। हवाई परिवहन गतिविधियों के जोर पकड़ने से विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग भी एक साल पहले की तुलना में एक से 15 अक्टूबर के बीच 22.1 प्रतिशत उछलकर 264,00 टन हो गई। एक से 15 अक्टूबर 2020 की तुलना में यह वृद्धि 64 प्रतिशत रही है। इसी तरह रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की बिक्री भी एक से 15 अक्टूबर के बीच सालाना आधार पर 9.94 प्रतिशत बढ़कर 12.2 लाख टन हो गई। एक से 15 अक्टूबर 2020 की तुलना में एलपीजी की बिक्री 5.3 प्रतिशत बढ़ी है।

Published / 2022-10-17 11:58:57
सीरप बनाने वाली कंपनी ने कैसे रखा सॉफ्ट ड्रिंक की दुनिया में कदम...

एबीएन बिजनेस डेस्क। कोका कोला चर्चा में है, चर्चा की वजह है वो खास तरह की बोतल जिसे कंपनी ने में मार्केट में उतारा है। कंपनी ने दिवाली के मौके पर ऐसी बोतल पेश की है जिसका ढक्कन ब्लूटूथ के जरिये अनलॉक किया जा सकता है। कोका कोला उन ब्रांड में शामिल है जिसने सॉफ्ट ड्रिंक की दुनिया में रिकॉर्ड बनाया। आज यह कंपनी दुनिया के 200 देशों में 200 से ज्यादा ब्रांड बेच रही है। कोका कोला की शुरुआत 1886 को अटलांटा में हुई। इसकी शुरुआत की फार्मासिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने। अपनी लैब में जॉन ने दवा से जुड़े प्रयोग करने के दौरान सोडे से खास तरह लिक्विड बनाया। इसे तैयार करने के बाद कुछ लोगों को इसका स्वाद चखने के लिए दिया तो उन्होंने बहुत पसंद आया। इस तरह कोका कोला का फॉर्मूला खोजा गया, लेकिन आज भी इसका फॉर्मूला तिजोरी में बंद है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 8 मई 1886 ही वो दिन था जब पहली बार लोगों ने कोका कोला का स्वाद चखा। शुरुआती दौर में इसे बोतल में नहीं, बल्कि गिलास में सर्व किया जाता था। रोजाना इसके नौ गिलास ही बिकते थे। धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर इसका स्वाद चढ़ने लगा। इस सॉफ्ट ड्रिंक को नाम देने का काम किया जॉन के अकाउंटेंट फ्रैंक रॉबिनसन ने। उनका मानना था कि अगर कंपनी का नाम "सी" से रखा जाए तो कंपनी को फायदा होगा। चौंकाने वाली बात है कि यह कंपनी सिर्फ इसका सीरप बनाती है। इसमें पानी और शुगर दूसरी जगह मिलाया जाता है। पिछले 136 सालों के सफर में कंपनी अपना सीरप बॉटलिंग पार्टनर को बेचती है। वो पार्टनर इसमें पानी, स्वीटनर, सोडा के साथ बोतल में पैक करके मार्केट तक पहुंचाता है। समय के साथ कंपनी ने अलग-अलग तरह के सॉफ्ट ड्रिंक भी तैयार किए लेकिन कोका कोला के टेस्ट में बदलाव नहीं किया। वर्तमान में कंपनी के फैंटा, थम्सअप और स्प्राइट समेत 200 ब्रैंड मार्केट में मौजूद हैं। कोका कोला का सीरप कैसे तैयार होता है और उसकी रेसिपी क्या है, यह आज तक सीक्रेट है जिसकी सटीक जानकारी सिर्फ कंपनी के एक-दो लोगों के पास ही है। कोका कोला के फॉर्मूले की ओरिजनल कॉपी अटलांटा के सन ट्रस्ट बैंक में रखी गई है। बैंक कभी उसे किसी के साथ साझा न करे, इसके लिए कंपनी ने उसे अपने 48.3 मिलियन शेयर दे रखे हैं। इतना ही नहीं, ट्रस्ट के उच्चाधिकारियों को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया है। कंपनी को अपनी सॉफ्ट ड्रिंक्स के लिए जितनी पॉपुलैरिटी मिली उतना ही इसकी खामियों को भी गिनाया गया। इसे दुनियाभर में सबसे ज्यादा पॉल्यूशन फैलाने वाली कंपनी के तौर पर भी जाना गया। 2020 में इसे यह नाम दिया गया। अमेरिकी एनजीओ की रिपोर्ट कहती है, कंपनी की पैकिंग से हर साल 29 लाख टन का कचरा दुनियाभर में फैलता है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी प्रदूषक कंपनी के तौर पर जाना जाता है, वो संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस की स्पॉन्सर रही है। कंपनी की स्पॉन्सरशिप पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के इस दोहरे रवैये के कारण सोशल मीडिया परउसे ट्रोल किया जा रहा है। भारत में कोका कोला की पहली एंट्री 1956 में हुई। कंपनी ने तेजी से कारोबार बढ़ाना शुरू किया क्योंकि तब व्यापार को लेकर कानून बहुत सख्त नहीं था। 1974 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने फॉरेन एक्सचेंज एक्ट को लागू किया। इसके बाद में कंपनी ने भारत में कारोबार बंद कर दिया। 1993 में उदारीकरण की नीतियों के कारण एक बार फिर कंपनी ने भारत में एंट्री की और देश में एक नामी ब्रांड बनकर उभरा।

Published / 2022-10-07 15:20:20
हीरो मोटोकॉर्प ने लॉन्च किया दो इलेक्ट्रिक स्कूटर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिमांड के बीच शुक्रवार को हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपना पहला ई-स्कूटर लॉन्च कर दिया। यह इलेक्ट्रिक स्कूटर दो वेरिएंट में उपलब्ध होगा। इसमें प्लस वैरिएंट के लिए 143 किमी और प्रो मॉडल के लिए 165 किमी की ज्वाइंट रेंज के साथ डुअल रिमूएवल बैटरी मिलती है। कंपनी ने कहा है कि दोनों मॉडल की टॉप स्पीड 80 किमी प्रति घंटे है। वी1 प्लस 3.4 सेकेंड में 0-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेता है जबकि प्रो मॉडल 3.2 सेकेंड में इसे हासिल कर लेता है। जयपुर में इस ई- स्कूटर के लॉन्च के मौके पर कंपनी के चेयरमैन पवन मुंजाल ने संवाददाताओं से कहा कि हम इस प्रोडक्ट को पहले ही लॉन्च करना चाहते थे लेकिन हम इसे बेहतर बना कर लाना चाहते थे। इसकी कीमत 1.45 लाख से 1.59 लाख रुपये रखी गयी है। इसके लिए 16-18 महीनों के बीच लीज विकल्प और बायबैक आॅफर भी दे रही है। इसे सबसे पहले नई दिल्ली, जयपुर और बैंगलोर में लॉन्च किया जायेगा। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिलीवरी दिसंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू होगी। हीरो मोटोकॉर्प का नया इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, वीडा वी1, ओला एस1 प्रो, एथर 450एक्स जेन3, बजाज चेतक और टीवीएस आईक्यूब को टक्कर देगा। हालांकि इसकी कीमत दूसरी स्कूटरों की अपेक्षा ग्राहकों को ज्यादा लग सकती है क्योंकि दूसरी कंपनियां सस्ता ई-स्कूटर लाने पर जोर दे रही हैं।

Published / 2022-10-04 10:09:50
सीएनजी-एलपीजी दोनों एक ही साथ झटका देने की तैयारी में

एबीएन बिजनेस डेस्क। प्राकृतिक गैस की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद सीएनजी आठ से 12 रुपये प्रति किलो महंगी हो सकती है जबकि रसोई गैस के भाव में छह रुपये प्रति यूनिट का इजाफा किया जा सकता है। विश्लेषकों ने यह अनुमान जताया है। एक अक्टूबर से प्राकृतिक गैसों के रेट बढ़ गए हैं जिसके चलते सीएजी और पीएनजी के रेट में वृद्धि देखी जा सकती है। गैसों के दाम में 40 परसेंट तक की वृद्धि हुई है जिसके बाद सीएनजी और पीएनजी के दाम में बढ़ोतरी लाजिमी है। पूरी दुनिया में ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा संकट देखा जा रहा है, खासकर यूरोप में। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद गैसों की सप्लाई पर बेहद विपरीत प्रभाव देखा जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में गैसों की महंगाई के पीछे एक और वजह है। सरकार ने पिछले सप्ताह पुराने गैस क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस के लिए भुगतान की दर को मौजूदा 6.1 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट से बढ़ाकर 8.57 डॉलर प्रति यूनिट कर दिया। वहीं, मुश्किल क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस की कीमत 9.92 डॉलर से बढ़ाकर 12.6 डॉलर प्रति यूनिट कर दी गई है। इसी रेट के आधार पर देश में बनने वाली गैस के लगभग दो-तिहाई हिस्से की बिक्री होती है। प्राकृतिक गैस फर्टिलाइजर बनाने के साथ बिजली पैदा करने के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है। इसे सीएनजी में भी बदला जाता है और पाइप के जरिये इसे रसोई में खाना पकाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि पुराने गैस क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमतें सिर्फ एक साल में लगभग पांच गुना बढ़ गई हैं। सितंबर, 2021 में इसकी कीमत 1.79 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से सितंबर 2021 में 8.57 डॉलर तक पहुंच गई थी। एमएमबीटीयू गैस मूल्य में प्रत्येक डॉलर की वृद्धि पर सिटी गैस वितरण संस्थाओं को सीएनजी की कीमत 4.7 से 4.9 रुपये प्रति किलो बढ़ानी पड़ती है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, कच्चे माल की ऊंची लागत के प्रभाव को पूरी तरह से दूर करने के लिए सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में 6.2 रुपये प्रति मानक क्यूबिक मीटर और 9 से 12.5 रुपये प्रति किग्रा की वृद्धि करने की जरूरत होगी।

Published / 2022-10-02 06:34:12
डिजिटल भारत : देश में यूपीआई लेनदेन सितंबर में 3% बढ़कर 6.78 अरब

एबीएन बिजनेस डेस्क। यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान लेनदेन की संख्या इस साल सितंबर में तीन फीसदी से अधिक बढ़कर 6.78 अरब हो गई। अगस्त में यूपीआई के माध्यम से कुल 6.57 अरब (657 करोड़) लेनदेन हुए थे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में 6.78 अरब (678 करोड़) लेनदेन हुए और इनका मूल्य 11.16 लाख करोड़ रुपये रहा जो अगस्त में 10.73 लाख करोड़ रुपये था। जुलाई में यूपीआई आधारित डिजिटल लेनदेन का मूल्य 10.62 लाख करोड़ रुपये रहा था। एनसीपीआई ढांचे के अन्य आंकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि तत्काल हस्तांतरण-आधारित भुगतान प्रणाली आईएमपीएस के जरिए सितंबर में 46.27 करोड़ लेनदेन हुए जबकि अगस्त में आईएमपीएस के जरिए कुल 46.69 करोड़ लेनदेन हुए थे। जुलाई में आईएमपीएस के माध्यम से कुल 46.08 करोड़ लेनदेन हुए थे।

Published / 2022-10-01 17:32:43
बाजार में उतार-चढ़ाव रहने के आसार

एबीएन डेस्क (पुनीत वाधवा)। आईआईएफएल सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरामन ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अपना रुख स्पष्ट किए जाने से बाजार इस उम्मीद से अलग नजर आ रहा है कि वै​श्विक मंदी को ध्यान में रखते हुए आगामी दर वृद्धि तेज किए जाने की जरूरत नहीं होगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: क्या आप मानते हैं कि केंद्रीय बैंक की बैठकों के परिणाम के संदर्भ में बाजार की चाल बाद में कुछ हद तक अनि​श्चित हो गई है? ऐसा लग रहा है कि बाजार इस उम्मीद से अलग दिख रहे हैं कि वै​श्विक मंदी को देखते हुए भविष्य में दर वृद्धि की रफ्तार तेज करने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन मुद्रास्फीति का आंकड़ा अनुकूल नहीं है, जिससे बड़ी बिकवाली की आशंका बढ़ी है। मुद्रास्फीति दर ऊंची बनी रहेगी। भले ही इसमें धीरे धीरे कमी आए, या यह काफी समय तक तय स्तरों से ऊपर बनी रहे, लेकिन दर वृद्धि की रफ्तार तेज रहेगी और बाजारों में बिकवाली की धारणा के साथ उतार-चढ़ाव बरकरार रह सकती है। निर्माण संबं​धित ताजा पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स का आंकड़ा निराशाजनक रहा है। मुद्रास्फीति भी कम नहीं हुई है। ऐसे में, बाजार और निवेशक इन आंकड़ों को नजरअंदाज क्यों कर रहे हैं? जहां पीएमआई आंकड़े वै​श्विक तौर पर कमजोर रहे हैं, वहीं भारत में निर्माण और सेवा पीएमआई दोनों ही 57-58 के दायरे में हैं। इसलिए हम अच्छी ​स्थि​ति में हैं। बैंकों से मिली ताजा प्रतिक्रिया में कहा गया है कि कॉरपोरेट पूंजीगत खर्च बढ़ने की संभावना है। अर्थव्यवस्था में, क्षमता इस्तेमाल पर आरबीआई का आंकड़ा 75 पर पहुंचना उत्साहजनक है। इसलिए, कमजोर पीएमआई भारत के लिए, दूसरों के लिए समस्या है। बाजार अनि​श्चितता पर छोटे निवेशकों ने कैसी प्रतिक्रिया दिखाई है : हाल के वर्षों में छोटे निवेशक बाजार उतार-चढ़ाव को लेकर अ​धिक सजग हुए हैं। भले ही बाजार ऊंचे स्तरों पर डटे रहने में सफल नहीं हो पा रहा है, लेकिन छोटे निवेशक म्युचुअल फंड योजनाओं, एसआईपी आदि के जरिये लगातार बाजारों में पैसा लगा रहे हैं। वै​​श्विक बाजारों की चुनौतियों का हमारे बाजारों पर भी प्रभाव पड़ेगा।

Published / 2022-10-01 06:26:51
2021-22 में फोर्ड इंडिया का शुद्ध घाटा बढ़कर 4,229 करोड़

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी कार कंपनी फोर्ड की भारतीय इकाई का पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में शुद्ध घाटा बढ़कर 4,229 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। व्यापार आसूचना मंच टॉफलर के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। कंपनी को वित्त वर्ष 2020-21 में 188 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ था। फोर्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने शेयर बाजारों को भेजी एक सूचना में कहा कि उसका घाटा बढ़ने की मुख्य वजह पुनर्गठन है। कंपनी की पिछले वित्त वर्ष में परिचालन आय 15 प्रतिशत घटकर 10,202 करोड़ रुपये रह गई। इससे एक साल पहले यह 12,057 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने कहा कि सितंबर, 2021 में पुनर्गठन के फैसले से चालू वित्त वर्ष का वित्तीय प्रदर्शन काफी हद तक प्रभावित हुआ है। फोर्ड इंडिया ने अगस्त में अपने साणंद संयंत्र को टाटा मोटर्स की अनुषंगी कंपनी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (टीपीईएमएल) को 725.7 करोड़ रुपये में बेचने के लिए एक समझौता किया।

Page 43 of 75

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse