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Published / 2023-04-08 18:41:50
म्युचुअल फंड : वित्त वर्ष 2023 में बाजार में झोंके 1.73 लाख करोड़

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों ने वित्त वर्ष 2023 में 35,000 करोड़ रुपये निकाले 

अभिषेक कुमार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। म्युचुअल फंडों ने वित्त वर्ष 2023 में शेयरों में 1.73 लाख करोड़ रुपये झोंके हैं। फंडों की तरफ से यह निवेश तब आया, जब भारतीय शेयर बाजार की हालत खराब थी और विदेशी निवेशक तेजी से बिकवाली कर रहे थे। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के 12 में से 11 महीनों में म्युचुअल फंडों ने शेयर बाजार में शुद्ध लिवाली की। 

पिछले वित्त वर्ष में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 35,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वित्त वर्ष 2022 में एफआईआई शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने बाजार से 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेचे थे। 

स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बलिगा ने कहा कि जब एफआईआई तेजी से निवेश निकाल रहे थे तब म्युचुअल फंडों द्वारा किए गए निवेश की बदौलत बाजार वित्त वर्ष 2022-23 में मजबूती से डंटा रहा।

म्युचुअल फंडों में ज्यादातर रकम खुदरा निवेशकों से आती है। इसलिए तत्काल रकम निकलने की आशंका कम रहती है, जिससे बाजार को स्थिरता एवं मजबूती मिलती है। कुल मिलाकर देसी संस्थागत निवेशकों ने वित्त वर्ष 2023 में 2.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। डीआईआई में म्युचुअल फंड भी आते हैं। 

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी चोकालिंगम कहते हैं कि देसी स्रोतों से लगातार रकम आने से विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद बाजार में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई।

मगर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देसी निवेशकों की तुलना में विदेशी निवेशकों से आने वाली रकम के प्रति हमारा बाजार ज्यादा संवेदनशील रहता है। यही वजह है कि देसी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी निवेश के बाद भी बाजार का प्रदर्शन फीका ही रहा। 

वित्त वर्ष 2023 में शेयर बाजार से शायद ही कोई प्रतिफल मिला। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग सपाट रहे। डीआईआई द्वारा भारी भरकम निवेश के बावजूद दुनिया भर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी, रूस-यूक्रेन युद्ध, महंगाई और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बैंकिंग संकट जैसे कारकों से शेयरों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। 

पिछले वित्त वर्ष में अनिश्चितता और निवेशकों के कमजोर उत्साह के बावजूद खुदरा निवेशकों ने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स के जरिये निवेश जारी रखा। पहले 11 महीनों में एसआईपी के जरिये कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की निवेश आया। यह वित्त वर्ष 2022 में एसआईपी के जरिये आए कुल निवेश से 14 प्रतिशत अधिक रहा। 

नुवामा वेल्थ के अध्यक्ष एवं प्रमुख राहुल जैन कहते हैं कि बाजार में निवेश संबंधी रुझान में बदलाव दिख रहा है। निवेशक अब बाजार में छोटी अवधि के दांव लगाने में अधिक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। 

अधिक से अधिक निवेशक समझने लगे हैं कि शेयरों में निवेश से बड़ा मुनाफा हासिल करना है तो लंबे समय तक निवेश बनाए रखना होगा। यही वजह है कि बैंक जमा, सोना और रियल एस्टेट के बजाय लोग शेयरों में निवेश को तरजीह दे रहे हैं। 

एसआइपी से आने वाली ज्यादातर रकम इक्विटी योजनाओं में जाती है। आंकड़ों के अनुसार 10 एसआइपी में केवल 1 की रकम डेट योजना में जाती है।

Published / 2023-04-08 10:53:55
आठ रुपये सस्ती हुई सीएनजी, पीएनजी के दाम में भी गिरावट

महंगाई की मार के बीच जनता को बड़ी राहत

एबीएन बिजनेस डेस्क। गेल इंडिया की अनुषंगी महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) ने अपने वितरण वाले क्षेत्रों में सीएनजी की कीमत में आठ रुपये प्रति किलो और घरेलू पाइप रसोई गैस की कीमत में पांच रुपये प्रति यूनिट तक की कटौती करने की शुक्रवार को घोषणा की। एमजीएल ने यह कदम घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण की नयी व्यवस्था की बृहस्पतिवार को की गयी घोषणा को ध्यान में रखते हुए उठाया है।

इस घोषणा के बाद सरकार ने सीएनजी एवं पाइप वाली रसोई गैस की नयी कीमतों का भी ऐलान शुक्रवार को कर दिया। एमजीएल ने गत फरवरी में भी सीएनजी की कीमतों में 2.5 रुपये प्रति किलो की कटौती की थी। इसके बावजूद सीएनजी के दाम अप्रैल 2022 की तुलना में करीब 80 प्रतिशत तक अधिक बने हुए हैं।

एमजीएल ने देर शाम एक बयान में कहा कि उसे घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस की कीमतों में कटौती का लाभ सीएनजी एवं पीएनजी उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की खुशी है। इस फैसले के तहत मुंबई महानगर एवं नजदीकी इलाकों में सीएनजी के दाम में आठ रुपये प्रति किलो और पीएनजी में पांच रुपये प्रति घनमीटर तक की कटौती की जा रही है। आधी रात से प्रभावी हो रहे इस फैसले के बाद सीएनजी 79 रुपये प्रति किलो और पीएनजी 49 रुपये प्रति एससीएम के दाम पर मिलने लगेगी।

पेट्रोलियम एवं गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) ने दिन में जारी एक आदेश में कहा कि आठ अप्रैल से 30 अप्रैल की अवधि के लिए प्राकृतिक गैस की कीमत 7.92 अमेरिकी डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश ताप इकाई (एमएमबीटीयू) होगी। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए दरें 6.5 डॉलर प्रति यूनिट पर सीमित कर दी गयी हैं।

Published / 2023-04-07 19:37:01
पेट्रोल-डीजल के नये दाम जारी, जानें नयी कीमत

एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आॅइल की कीमतों में बदलाव का असर भारत पर भी देखने को मिला है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई भारी बढ़ोत्तरी या कटौती नहीं हुई है। बता दें कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का भाव एक बार फिर 85 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है। इसके साथ ही भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के नये रेट जारी कर दिए हैं। 

कहीं घटे-कहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम 

पेट्रोल-डीजल की नयी रेट लिस्ट जारी किये जाने के बाद भी देश के प्रमुख शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में कोई खास परिवर्तन नहीं देखा गया। बात करें नोएडा की तो यहां पेट्रोल 11 पैसे महंगा होकर 96.76 रु प्रति लीट बिक रहा है। वहीं डीजल 11 पैसे बढ़कर 89.93 रु लीटर हो गया है। 

इसके अलावा गाजियाबाद में पेट्रोल 14 पैसे सस्ता हुआ और 96.44 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। गुरुग्राम में भी पेट्रोल 41 पैसे सस्ता हुआ है और 96.77 रु लीटर बिक रहा है। यहां डीजल भी 40 पैसे घटा है और 89.65 रुपये लीटर बिक रहा है। 

प्रमुख शहरों में पेट्रोल डीजल की कीमत 

  • दिल्ली : पेट्रोल 96.65 रुपये, डीजल 89.82 रुपये 
  • मुंबई : पेट्रोल 106.31 रुपये, डीजल 94.27 रुपये 
  • चेन्नई : पेट्रोल 102.63 रुपये, डीजल 94.24 रुपये 
  • कोलकाता : पेट्रोल 106.03 रुपये, डीजल 92.76 रुपये

Published / 2023-04-07 07:31:00
रियलटी उद्योग ने किया रेपो दर यथावत रखने का स्वागत

एबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो दर में पिछले वर्ष मई से जारी बढोतरी पर ब्रेक लगाये जाने का रियलटी उद्योग ने स्वागत करते हुए आज कहा कि यदि दो तिमाही तक इसे स्थिर रखा जाता है जो उद्योग को बल मिलेगा। 

क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष एवं गौड़ समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ ने कहा कि हम रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के आरबीआई के फैसले का स्वागत करते हैं। नीतिगत दरों में पिछले 6 बार से लगातार वृद्धि संभावित खरीदारों पर नकारात्मक प्रभाव पैदा कर रही थी। 

अगर ब्याज दरों को कम से कम 2 तिमाहियों के लिए स्थिर रखा जाता है तो रियल एस्टेट बाजार को प्रोत्साहन मिलेगा क्योंकि इससे खरीदारों को कोई वित्तीय चिंता नहीं होगी और होम लोन पर अधिक ब्याज का भुगतान करने का डर भी नहीं होगा। स्थिर रेपो दर निवेशकों को अपने पैसे को और सुविधाजनक तरीकों से विकास कार्यों में लगाने की मदद करेगा।

क्रेडाई (पश्चिमी यूपी) के अध्यक्ष एवं काउंटी समूह के निदेशक अमित मोदी ने कहा कि हाल की बढ़ोतरियों ने निवेशकों को एक तरह से हतोत्साहित कर दिया था। दरों को स्थिर रखने से रियल एस्टेट क्षेत्र फलेगा-फूलेगा क्योंकि मध्यम-आय वर्ग को आवास ऋण पर उच्च ब्याज का भार नहीं पड़ेगा और यह निवेश उन्हें निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा। 

गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं के कारण, आवासीय और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में मांग असाधारण रूप से अधिक रही है। रेपो रेट स्थिर रहने पर निवेशक परियोजनाओं में और भी आसानी से निवेश कर सकते हैं।

Published / 2023-04-04 22:10:07
विश्व बैंक का अनुमान : नये वित्त वर्ष के लिए घटकर 6.3% रहेगी भारत की जीडीपी

एबीएन बिजनेस डेस्क। विश्व बैंक ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024 में खपत में नरमी के कारण भारत की जीडीपी कम होकर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बता दें कि पहले देश की जीडीपी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। विश्व बैंक ने अपने इंडिया डेवलपमेंट अपडेट में कहा है कि खपत में धीमी वृद्धि और चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों के कारण विकास दर के बाधित होने की आशंका है। 

कर्ज महंगा होने और आय में धीमी वृद्धि से प्रभावित हो सकती है जीडीपी 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज महंगा होने और आय में धीमी वृद्धि से निजी उपभोग की वृद्धि पर असर पड़ेगा। वहीं, महामारी से संबंधित राजकोषीय समर्थन उपायों को वापस लेने के कारण सरकारी खपत में भी धीमी वृद्धि का अनुमान है। 

रिपोर्ट में चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 24 में कम होकर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो बीते वित्त वर्ष में तीन प्रतिशत था। मुद्रास्फीति पर विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटकर 5.2 प्रतिशत रह जायेगी, जो हाल ही में खत्म हुए बीते वित्त वर्ष में 6.6 प्रतिशत थी। 

अमेरिका और यूरोप के बाजार में जारी उथल-पुथल ने भारतीय बाजार के लिए जोखिम पैदा किया 

विश्व बैंक के अर्थशास्त्री ध्रुव शर्मा के अनुसार अमेरिका और यूरोप के वित्तीय बाजारों में हालिया उथल-पुथल ने भारत सहित उभरते बाजारों में अल्पकालिक निवेश के प्रवाह के लिए जोखिम पैदा किया है। 

विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत का सेवा निर्यात अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था इससे अर्थव्यवस्था को बाहरी जोखिमों से बचने में मदद मिलेगी क्योंकि धीमी वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण देश के व्यापारिक निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेवा क्षेत्र का निर्यात अब केवल आईटी सेवाओं से संचालित नहीं किया जा रहा है, बल्कि परामर्श और अनुसंधान और विकास जैसे अधिक आकर्षक प्रस्तावों से भी ये सचालित हो रहे हैं। 

एडीबी ने भी विकास दर का अनुमान घटाया 

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने मंगलवार को कहा कि कड़ी मौद्रिक स्थिति और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष में इसमें  6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

 हालांकि, एडीबी को उम्मीद है कि परिवहन के बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए सरकारी नीतियों के कारण निजी खपत और निजी निवेश से वित्त वर्ष 25 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है।

Published / 2023-03-30 18:36:24
वाहनों की स्क्रैप पालिसी से कम होगा प्रदूषण

लालजी जायसवाल 

एबीएन बिजनेस डेस्क। उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की व्हीकल स्क्रैप पालिसी को पूरी तरह से लागू करने की तैयारी चल रही है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ने वाले 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित किया जाएगा। एक अप्रैल 2023 से 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजे जाने की तैयारी है।

लिहाजा केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। नया नियम निगमों और परिवहन विभाग की बस एवं अन्य गाड़ियों के लिए भी अनिवार्य होगा। सड़क परिवहन मंत्रालय की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार 15 वर्ष से ऊपर के निजी वाहनों के साथ-साथ विभागों में लगे पुराने वाहनों को भी स्कै्रप में बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। 

सरकार ने यह निर्णय निरंतर बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए लिया है। पर्यावरणीय प्रदूषण को देखते हुए वित्त मंत्री ने आम बजट 2021-22 में पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए स्क्रैप पालिसी की घोषणा की थी। ध्यातव्य है कि देश में एक करोड़ से अधिक वाहन ऐसे हैं जो आम वाहनों की तुलना में 10 से 12 गुणा अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। 

स्क्रैप पालिसी से गाड़ियों की वजह से होने वाले प्रदूषण में 25 से 30 प्रतिशत की कमी होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि स्क्रैप पालिसी से पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आयेगी। अनुमान है कि वाणिज्यिक वाहन, जो कुल वाहन बेड़े का लगभग पांच प्रतिशत हैं, प्रदूषण में लगभग 65-70 प्रतिशत तक का योगदान देते हैं। 

वर्ष 2000 से पहले निर्मित वाहन कुल बेड़े का एक प्रतिशत हैं, लेकिन कुल वाहनों के प्रदूषण में इनका योगदान लगभग 15 प्रतिशत है। इनकी तुलना यदि आधुनिक वाहनों से करें तो पुराने वाहन 10 से 15 गुना अधिक प्रदूषण उत्सर्जित करते हैं। 

सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन

उल्लेखनीय है कि स्क्रैप पालिसी के पीछे सरकार की मंशा निजी वाहनों की बढ़ती संख्या को कम करना और सार्वजनिक परिवहन के अधिक से अधिक उपयोग पर बल देना है। आज स्थिति यह है कि देश में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अपने निजी वाहनों से चलना पसंद करती है। 

ऐसे लोग ट्रेन या बसों में यात्रा करने से परहेज करते हैं। कुल यात्रियों की तुलना में सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से यात्रा करने वालों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1994 में जहां भारत के सभी बड़े शहरों में 60 से 80 प्रतिशत नागरिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते थे, वहीं यह संख्या 2019-20 में घटकर 25-35 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। 

वर्तमान में यह संख्या और कम हुई होगी, क्योंकि कोरोना महामारी के बाद अधिकांश सक्षम लोगों ने निजी वाहन खरीदने को प्राथमिकता दी है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 10 किलोमीटर की यात्रा बस से करने में औसतन एक व्यक्ति द्वारा 0.01 ग्राम पर्टिकुलेंट मैटर (पीएम) उत्सर्जित होता है। 

जबकि उतनी ही दूरी यदि कार से तय की जाए तो उससे 0.08 ग्राम यानी आठ गुना और दोपहिया वाहन से 0.1 ग्राम यानी दस गुना अधिक पर्टिकुलेंट मैटर उत्सर्जित होता है। डीजल चलित आटो रिक्शा भी अत्यधिक प्रदूषण (.46 ग्राम पीएम प्रति 10 किमी) फैलाते हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में चंडीगढ़ में एक वाहन द्वारा औसतन 26.46 ग्राम पीएम और 250 ग्राम कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जित किया जाता है, जबकि दिल्ली में यह औसत 9.91 और 120 ग्राम है। चंडीगढ़ में निजी वाहनों के अधिक और सार्वजनिक परिवहन (बस, लोकल ट्रेन) आदि के कम प्रयोग के कारण ऐसा हो रहा है। चूंकि आज अधिकांश लोग निजी वाहन से यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं, लिहाजा वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। 

सार्वजनिक वाहन की समुचित व्यवस्था 

निजी वाहनों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का ढांचा लुंज-पुंज होने से जुड़ा है। सार्वजनिक परिवहन के नाम पर केवल बसें ही हैं और वह भी अपर्याप्त हैं। बसों के लिए कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है। दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या एक करोड़ से अधिक हो चुकी है। 

प्रदूषण के बढ़ने के बड़े कारणों में यह शामिल है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अदालत में दिल्ली पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) के अधिकारियों ने बताया था कि दो-पहिया और डीजल गाड़ियां पेट्रोल की गाड़ियों से कहीं अधिक प्रदूषण फैलाती हैं। वायु प्रदूषण में दो-पहिया वाहनों का कुल 30 प्रतिशत तक का योगदान रहता है, जो सबसे ज्यादा हानिकारक गैस फैलाते हैं। 

इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें स्वयं जिम्मेदार नजर आती हैं। इसलिए जब तक सभी राज्य सरकारें शहरों के लिए समन्वित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को विकसित करने के लिए समुचित योजना तैयार नहीं करेंगी, तब तक शहरों की परिवहन व्यवस्था में सुधार नहीं लाया जा सकता है। 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के बजट में जोर देते हुए कहा था कि स्क्रैप पालिसी से प्रदूषण में भारी कमी आयेगी। परंतु ऐसा तब होगा जब अधिक से अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, लेकिन चिंता की बात यह है कि उसकी व्यवस्था देश में अभी भी अपर्याप्त है। 

सरकार स्क्रैप पालिसी से प्रदूषण की समस्या को कम करना तो चाहती है, परंतु सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किए बिना ऐसा होना संभव नहीं है। देश का मध्यम वर्ग अधिकतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहता है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इसका सुचारु रूप से प्रबंधन करे। 

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह भी है कि वर्ष 2014 से 2017 के बीच दो-पहिया वाहनों और कार से चलने वाले यात्रियों की संख्या में हर साल आठ से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं सरकारी बसों की संख्या निरंतर घटती जा रही है। 

वहीं दूसरी ओर निजी बस मालियों या कंपनियों द्वारा संचालित बसों में अपेक्षाकृत अधिक किराया होने और सुविधाएं कम होने के कारण भी कई लोगों का सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से मोहभंग हो रहा है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें वास्तव में निजी वाहनों के प्रति लोगों को हतोत्साहित कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना चाहती हैं तो उसे कई देशों से सीख लेकर अपने यहां सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार लाना होगा।

 उल्लेखनीय है कि लग्जमबर्ग विश्व का पहला ऐसा देश है जहां सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करना पूरी तरह से नि:शुल्क है। ट्रैफिक जाम कम करने के उद्देश्य से सरकार ने यह निर्णय लिया है। इससे वहां बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक रूप से भी लाभ होगा। भारत भी इस ओर अपने सामर्थ्य के अनुसार कदम बढ़ा सकता है। वैसे भारत की जनसंख्या सभी यूरोपीय देशों से कई गुना अधिक है। 

इस लिहाज से यहां पर सार्वजनिक परिवहन को सुचारू बनाने के लिए वाहनों का बेड़ा भी बड़ा चाहिए होगा, जिसका भार सरकार पर पड़ेगा। लोक-निजी सहभागिता से सरकार पर पड़ने वाले भार को कम किया जा सकता है। वाणिज्यिक वाहनों को फ्रेट कॉरिडोर की ओर शिफ्ट किया जाना चाहिए। ई-वाहन या बैटरी चालित वाहनों को बढ़ावा देना होगा। 

इसके लिए निजी निवेश को आकर्षित करने पर भी काम होना चाहिए। इन सभी उपायों से सार्वजनिक परिवहन में सुधार तो होगा ही साथ में जनता का रुझान निजी वाहनों से हट कर सार्वजनिक वाहन की ओर बढ़ेगा। यह सभी उपाय प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

Published / 2023-03-29 11:50:06
आर्थिक सुस्ती के बीच ग्लोबल इकोनॉमी में करीब आधा योगदान देंगे भारत-चीन

एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्थिक सुस्ती का सामना कर रही ग्लोबल इकोनॉमी की इस साल की ग्रोथ में भारत और चीन मिलकर करीब आधा योगदान देंगे, जिससे एशिया असाधारण प्रदर्शन करने वाला महाद्वीप बनकर उभरेगा। चीन के एक शोध संस्थान ने यह अनुमान जताया है।

चीन सरकार के अग्रणी शोध संस्थान बाओ फोरम फॉर एशिया (बीएफए) ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2023 में एशियाई अर्थव्यवस्थाएं दुनिया के समग्र आर्थिक पुनरुद्धार की रफ्तार को बनाये रखे हुए हैं। इस तरह वैश्विक आर्थिक सुस्ती के दौर में एशिया का प्रदर्शन असाधारण साबित हो रहा है।

हैनान प्रांत के बाओ में आयोजित चार-दिन के सम्मेलन के पहले दिन एशियाई आर्थिक परिदृश्य एवं एकीकरण में प्रगति शीर्षक वाली यह रिपोर्ट जारी की गयी। इसके मुताबिक, वर्ष 2023 में एशिया की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर वर्ष 2022 के 4.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत और चीन इस साल वैश्विक आर्थिक वृद्धि में मिलकर आधा योगदान देने वाले हैं। इस तरह एशियाई अर्थव्यवस्थाएं वर्ष 2023 में समग्र आर्थिक वृद्धि को तेज करने में प्रमुख इंजन बनी हुई हैं।

आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल भारत की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहेगी जबकि चीन की वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत रह सकती है।

Published / 2023-03-25 19:42:21
सरकारी तेल कंपनियों ने जारी की पेट्रोल-डीजल की नयी रेट

एबीएन बिजनेस डेस्क। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक का दौर जारी है। कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कई दिनों से गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों पर देखने को मिल रहा है। 

इस क्रम में आज यानी शनिवार को देश की सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की नई रेट लिस्ट जारी कर दी है। जिसके अनुसार कई शहरों में तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जबकि देश का एक शहर ऐसा भी है जहां पेट्रोल-डीजल के रेट सबसे कम बने हुए हैं। 

आपको बता दें कि दिल्ली और मुंबई समेत देश के चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि पोर्ट ब्लेयर देश की ऐसी जगह है जहां पेट्रोल और डीजल सबसे सस्ती दरों में मिल रहा है। यहां पेट्रोल 84.10 रुपए लीटर और डीजल 79.74 रुपए लीटर पर बिक रहा है। 

गौरतलब है कि देश की सरकारी तेल कंपनियां हर रोज सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के दामों को अपडेट करती हैं। जिसके बाद देशभर में तेल के खुदरा मूल्य तय किए जाते हैं। आपको बता दें की देश की सरकारी तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे तेल की ताजा कीमतों को लिस्ट जारी कर देती हैं। जिसके बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव नजर आता है। 

तेल की कीमतों में डीलर कमीशन और दूसरी तरह के टैक्स जोड़ने के बाद मूल भाव से लगभग दोगुना हो जाता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल के दाम वास्तव में कच्चे तेल की कीमतों के मुकाबले कहीं ज्यादा नजर आते हैं।

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