बिजनेस

View All
Published / 2023-05-08 23:47:39
शेयर बाजार में आया 700 से ज्यादा अंकों का उछाल

एबीएन बिजनेस डेस्क। बांबे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 700 से ज्यादा अंकों का उछाल के साथ 61,764.25 अंकों पर बंद हुआ। वैसे सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 62 हजार अंकों के करीब पहुंचते हुए 61,854.19 अंकों पर भी गया। आंकड़ों के अनुसार सेंसेक्स अपने लाइफ टाइम हाई से 1,818.82 अंक पीछे है, जो कभी भी टूट सकता है।

वहीं दूसरी ओर निफ्टी में करीब 195 अंकों का इजाफा देखने को मिला और 18,264.40 अंकों पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 18,286.95 अंकों के साथ दिन के हाई पर भी पहुंच गया। सेंसेक्स ने एक दिसंबर को 63,583 अंकों के साथ लाइफ टाइम हाई का रिकॉर्ड कायम किया था।

इन कारणों से आयी शेयर बाजार में तेजी
विदेशी निवेशकों ने मौजूदा वित्त वर्ष में अच्छी खरीदारी की है, अब तक 22,500 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं और बीते 7 कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों 11,700 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आने का असर भी भारतीय बाजारों में देखने को मिला है। डाउ जोंस 6 अप्रैल को डेढ़ फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली थी। वास्तव में अप्रैल का जॉब डाटा उम्मीद से बेहतर देखने को मिला।

कच्चे तेल की कीमतें गिरना भारत के लिए अच्छी खबर है। बीते सप्ताह ब्रेंट 5 फीसदी से ज्यादा और डब्ल्यूटीआई में 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है।

तिमाही नतीजे उम्मीद बेहतर देखने को मिल रहे हैं, जिसकी वजह से शेयर बाजार को सपोर्ट मिलता हुआ दिखाई दे रहा है।

फाइनेंशियल और ऑटो कंपनियों के ग्रोथ में इजाफा होने से बाजार में कंपनियों के शेयर उछल रहे हैं। भारत का इकोनॉमिक मैक्रो आउटलुक बेहतर दिखायी दे रहा है।

जानकारों की मानें तो 2 से 4 तिमाहियों में भारत के कंजंप्शन में और सुधार देखने को मिल सकता है, जिसकी वजह से एफएमसीजी के अलावा दूसरी कंपनियों के शेयरों में इजाफा है।

बैंक शेयरों में तेजी के साथ रिकवरी के कारण भी शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली है। इंडसइंड बैंक के शेयरों में इजाफा देखने को मिला है। बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व के शेयरों में तेजी आयी है।

Published / 2023-05-02 19:23:18
जीएसटी कलेक्शन के लिए अप्रैल रहा शानदार

  • पिछले माह अब तक का सबसे बड़ा जीएसटी क्लेकशन, जानें पीएम मोदी का विचार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अप्रैल में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1.87 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह किसी एक महीने में जुटाया गया सबसे अधिक जीएसटी राजस्व है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी है। कम कर दरों के बावजूद बढ़ता कर संग्रह इस बात को दर्शाता है कि जीएसटी ने एकीकरण और अनुपालन को कैसे बढ़ाया है। 

बताते चलें कि जुलाई, 2017 में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद से सर्वाधिक कर संग्रह का पिछला रिकॉर्ड 1.68 लाख करोड़ रुपये था जो पिछले साल अप्रैल में बना था। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को अप्रैल, 2023 के कर संग्रह आंकड़े जारी करते हुए कहा कि पिछले महीने सकल जीएसटी संग्रह 1,87,035 करोड़ रुपये रहा। 

इसमें केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 38,440 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 47,412 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 89,158 करोड़ रुपये के अलावा 12,025 करोड़ रुपये का उपकर भी शामिल है।

Published / 2023-05-01 16:54:51
कमर्शियल गैस सिलेंडर 171.50 रुपये सस्ता, जानें नयी कीमत

एबीएन बिजनेस डेस्क। कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर आज (सोमवार) सुबह से सारे देश में 171.50 रुपये सस्ता हो गया। अब देश के प्रमुख चार महानगरों दिल्ली में यह 1856.50 रुपये, कोलकाता में 1960.50 रुपये, मुंबई में 1808.50 रुपये और चेन्नई में 2021.50 रुपये में मिलेगा। नयी दरें आज से प्रभावी हो गयी हैं। सनद रहे हर महीने की पहली तारीख को सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां गैस का दाम रिवाइज करती हैं। पिछले महीने भी कमर्शियल सिलेंडर के दाम में करीब 92 रुपये की कटौती की गयी थी।

Published / 2023-04-22 20:56:10
टैक्स स्लैब और मिडिल क्लास

अजय दीप वाधवा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। आयकर का नयी कर व्यवस्था इस वर्ष फरवरी में पेश किये गये बजट 2023 में वित्त मंत्री ने टैक्स व्यवस्था में बदलाव किया और अप्रैल 2023 माह से नयी टैक्स प्रणाली (रिजाइम) को ही मुख्य कर प्रणाली बनाने की घोषणा की थी। इसके तहत 3 लाख रुपये तक की सालाना कमाई वाले टैक्सपेयर्स को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।

अर्थात उसे कोई आय कर नहीं देना होगा; जबकि 15 लाख रुपये तक सालाना कमाई वाले करदाताओं को नई कर व्यवस्था 2023 का चुनाव करने पर सीधे 37,500 रुपये की बचत होगी। मिडिल क्लास को राहत देते हुए बजट 2023 में वित्त मंत्री ने नई कर व्यवस्था को रिवाइज करते हुए टैक्स स्लैब की संख्या को घटाकर 5 कर दिया और टैक्स रेट्स में भी बदलाव किया।                 

रिवाइज नई कर व्यवस्था 2023 में टैक्स रेट्स इस प्रकार हैं :- 

  • 0-3 लाख  आय पर शून्य कर
  • 3-6 लाख आय पर  5% आय कर
  • 6-9 लाख आय पर 10%
  • 9-12 लाख आया पर 15%
  • 12-15 लाख आय पर  20%
  • 15 लाख से अधिक  आय पर 30%      

नई कर व्यवस्था को रिवाइज करने से पहले सालाना 15,00,000 लाख रुपये की कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स को अनुमानता 1,87,500 रुपये टैक्स देना होता था, लेकिन, रिवाइज नयी कर व्यवस्था 2023 के बाद अब टैक्सपेयर्स को केवल 1,50,000 रुपये टैक्स देना होगा। इसका मतलब है कि अब टैक्सपेयर्स को सीधे 37,500 रुपये की बचत हो सकती है। 

इसी तरह 9,00,000 रुपये की सालाना आय वालों को केवल 45 हजार रुपए टैक्स देना होगा जो की उसकी आय का केवल 5 प्रतिशत है। रिवाइज नई टैक्स व्यवस्था के अनुसार इससे पहले तक 5,00,000 रुपये तक की सालाना आय पर कोई भी टैक्स नहीं देना होता था, लेकिन, अब यह सीमा बढ़ाकर 7,00,000 रुपये कर दी गयी है।  

वेतन भोगी वर्ग अपने वेतन से स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा भी नई व्यवस्था में उठा सकेंगे। रिवाइज नई टैक्स व्यवस्था के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये होगा, जो पहले शून्य होता था। 

पहले ओल्ड टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प मौजूद था पर अब यह साफ किया गया है कि रिवाइज नयी आयकर व्यवस्था को डिफॉल्ट टैक्स व्यवस्था रखा गया है, पर  टैक्सपेयर्स ओल्ड टैक्स व्यवस्था का विकल्प भी चुन सकते हैं। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कॉस्ट अकाउंटेंट और कर विशेषज्ञ हैं।)

Published / 2023-04-22 07:31:34
रिलायंस के तिमाही मुनाफे में रिकार्ड बढ़ोतरी

एबीएन बिजनेस डेस्क। पेट्रोलियम , दूरसंचार, डिजिटल, रिटेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाली देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2022-23 की अंतिम तिमाही में अब तक का रिकार्ड 19299 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया जो इससे पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में अर्जित 16203 करोड़ रुपये के लाभ की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद जारी वित्तीय लेखा जोखा में कहा गया है कि इस तिमाही में उसका सकल शुद्ध लाभ 21327 करोड़ रुपये रहा है जो मार्च 2022 में समाप्त तिमाही के 18021 करोड़ रुपये की तुलना में 18.3 प्रतिशत अधिक है। इसमें 2028 करोड़ रुपये गैर नियंत्रक ब्याज शामिल है। इसको हटाने के बाद कंपनी का शुद्ध लाभ 19299 करोड़ रुपये है।

मार्च 2023 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 216376 करोड़ रुपये रहा है जो मार्च 2022 में समाप्त तिमाही में 211887 करोड़ रुपये रहा था। सभी व्यवसायों में जोरदार प्रदर्शन के दम पर रिलायंस का वार्षिक कंसोलिडेटेड राजस्व 23.2 प्रतिशत बढ़कर 9,76,524 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का वित्त वर्ष 2022-23 में वार्षिक कंसोलिडेटेड लाभ 9.2 प्रतिशत बढ़कर 74,088 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने कहा कि 2,300 से अधिक शहरों/कस्बों में 5जी रोलआउट कर रिलायंस जियो ने अपनी मार्केट लीडरशिप को और मज़बूत किया है। जियो ने 700मेगाहर्ट्ज और 3500मेगाहर्ट्ज बैंड में 60 हजार 5जी साइट को लगा दिया है और दिसंबर 2023 तक पूरे भारत में रोलआउट करने का काम तेज़ी से प्रगति पर है। वित्त वर्ष 2022-23 रिलायंस रिटेल ने पहले के मुकाबले अधिक गति से स्टोर खोलते हुए इस साल 3,300 स्टोर जोड़े। इस तरह रिलायंस रिटेल का कुल क्षेत्रफल 6 करोड़ 56 लाख वर्गफ़ीट हो गया है। 

वित्त वर्ष 2022-23 ऑइल टू केमिकल्स व्यवसाय में कच्चे माल की कम हुई क़ीमत और अच्छी मार्जिन के कारण पिछले एक साल के नतीजे दमदार रहे हैं।

Published / 2023-04-21 18:56:12
नयी इलेक्ट्रिक कार लॉन्च, दाम 10 लाख से भी कम और रेंज 405 किमी

एबीएन बिजनेस डेस्क। स्मॉल इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में एक और नयी कार ने दस्तक दी है। दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनियों में शुमार बीवाईडी आटो ने बीवाईडी सिगल को लॉन्च किया है। ये एक छोटी 5 डोर इलेक्ट्रिक कार है जो शानदार फीचर्स और रेंज के साथ आती है। 

चाइनीज इलेक्ट्रिक कार मैन्यूफैक्चरर ने इस कार को शंघाई आटो शो 2023 में लॉन्च किया है। कीमत की बात करें इसका प्राइस 78,800 युआन (करीब 9.4 लाख रुपये) है। बीवाईडी सीगल की बुकिंग भी शुरू हो गयी है। सिर्फ 24 घंटे में इसके 10,000 आर्डर मिल चुके हैं। बीवाईडी सिगल के दूसरे वेरिएंट की कीमत 83,800 युआन (करीब 10 लाख रुपये) है। 

वहीं, टॉप-स्पेक मॉडल के लिए 95,800 युआन (करीब 11.43 लाख रुपये) खर्च करने होंगे। सीगल की टॉप स्पीड 130 किमी प्रति घंटे है। इसमें 70 किलो वाट प्रति घंटे मोटर का इस्तेमाल किया गया है। पावर की बात करें तो बीवाईडी सीगल में 38 किलो वाट तक के बैटरी पैक की सपोर्ट मिलेगी। 

एक बार फुल चार्ज होने पर ये कार 405 किलोमीटर का सफर पूरा कर सकती है। इसके इंटीरियर में 5 इंच का इंस्ट्रूमेंट कंसोल, 12.8 इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन जैसे फीचर्स शामिल हैं। 

इसके अलावा फ्लैट-बॉटम स्टीयरिंग व्हील, लेयर्ड डैशबोर्ड, पावर्ड ड्राइवर सीट, इंटिग्रेटेड वायरलेस चार्जिंग पैड और कई कप होल्डर कार की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। फिलहाल बीवाईडी इंडिया में ई6 और आट्टो 3 की बिक्री करती है। सस्ती कार होने की वजह से सीगल को भी इंडिया में पेश किया जा सकता है।

Published / 2023-04-18 13:48:18
2022-23 में 15% बढ़ा यात्री देश में वाहनों का निर्यात

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश से यात्री वाहनों का निर्यात 2022-23 में 15 प्रतिशत बढ़कर 6,62,891 इकाई रहा। इसमें 2.5 लाख से अधिक इकाइयों का निर्यात करने वाली मारुति सुजुकी इंडिया की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। उद्योग संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में कुल यात्री वाहनों का निर्यात 6,62,891 इकाई रहा है जो 2021-22 में 5,77,875 इकाई था।

 आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में यात्री कारों का निर्यात दस प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4,13,787 इकाई रहा। वहीं उपयोगी (यूटिलिटी) वाहनों का निर्यात 23 प्रतिशत बढ़कर 2,47,493 इकाई रहा। हालांकि वैन का निर्यात घट गया और 2022-23 में यह 1,611 इकाई रहा जबकि 2021-22 में यह आंकड़ा 1,853 इकाई था। पिछले वित्त वर्ष में यात्री वाहन श्रेणी के निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी मारुति सुजुकी इंडिया की रही। इसके बाद हुंदै मोटर इंडिया और किआ इंडिया का स्थान रहा।

देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता मारुति सुजुकी ने 2022-23 में 2,55,439 यात्री वाहनों का निर्यात किया जो 2020-21 में निर्यात किये गये 2,35,670 वाहनों से आठ प्रतिशत अधिक है। हुंदै मोटर इंडिया ने 1,53,019 वाहनों का निर्यात किया जो 2021-22 की 1,29,260 इकाइयों से 18 प्रतिशत अधिक है। 

किआ इंडिया ने 2022-23 में 85,756 वाहनों का निर्यात किया जबकि 2021-22 में उसने 50,864 इकाइयों का निर्यात किया था। निसान मोटर इंडिया ने 60,637 वाहनों का, रेनो इंडिया ने 34,956 वाहनों का; फॉक्सवैगन इंडिया ने 27,137 इकाइयों का निर्यात किया। होंडा कार्स ने 22,710 इकाइयों का जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 2022-23 में 10,622 इकाइयों का निर्यात किया। बीते वित्त वर्ष में भारत से वाहनों का कुल निर्यात 47,61,487 इकाई रहा है जो 2021-22 की 56,17,359 इकाइयों से 15 प्रतिशत कम है।

Published / 2023-04-17 20:29:01
मेक इन इंडिया की सफलता के सूत्र...

अजय दीप वाधवा

एबीएन बिजनेस डेस्क। कॉस्ट आडिट और मेक इन इंडिया देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने, राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने, उत्पादों के मूल्य में कमी करने के साथ-साथ इनकी आसानी से आम भारतीय को उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार ने मेक इन इंडिया योजना का प्रारंभ किया।

इसका उद्देश्य देश में ही उत्पादों को बनाकर उनके आयात में कमी करना भी था ताकि डॉलर के रिजर्व को कम होने से बचाया जा सके और आत्म निर्भर की परिकल्पना सच हो सके। पर मेक इन इंडिया को सफल करने के लिए यह भी आवश्यक है कि जो उत्पाद भारत में बनने आरंभ हों उनका विक्रय भी हो। 

हम सब जानते हैं कि कोई भी कंपनी किसी भी उत्पाद को स्टॉक में रखने के लिए नहीं, बल्कि विक्रय के लिए बनाती है। यदि उसके उत्पाद विक्रय नहीं होंगे तो कंपनी बंद हो जाएगी और सरकार का मेक इन इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी फेल हो जायेगी। इस कारण उत्पादों को बनाने के साथ साथ उनका विक्रय बढ़ाना भी आवश्यक है। पर समस्या यह है कि भारतीयों की क्रय करने की क्षमता सीमित है।

भारत तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था अवश्य है, पर अभी भी एतिहासिक कारणों से अधिकांश भारतीयों के पास विकसित देशों के नागरिकों की तुलना में कम आमदनी है और इस कारण वे महंगे उत्पाद नहीं खरीद सकते हैं। इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि अगर भारतीय उत्पादकों को अपने उत्पाद भारत में बेचने हैं तो उनकी उत्पादों की लागत और मुक्त को कम रखना होगा और इस बिंदु पर कॉस्ट आॅडिट की भूमिका समझ में आती है। 

कॉस्ट आडिट एक प्रक्रिया है जिसमें उत्पादक अपने उत्पादन के दौरान होने वाले तमाम लागत का विस्तृत विवरण नियमानुसार रखते हैं,  जिसका कॉस्ट अकाउंटेंट (सीएमए) विश्लेषण कर कंपनी को यह बताते हैं कि कौन सी लागत सही है और कौन सी लागत अनावश्यक है। अनावश्यक लागत को कम करने या बंद करने का तरीका भी कॉस्ट आडिट के दौरान बताया जाता है।

 इस से उत्पादक अपने लागत को नियंत्रण कर मूल्यों को भी नियंत्रण में रख पाते हैं। यह पाया गया है कि जो कंपनी लागत के विवरण को ठीक ढंग से रखती है और  कॉस्ट आडिट करवा कर दिए गए सुझावों का पालन करते हैं तो उनका उत्पादन लागत काफी कम हो जाता है जिससे न सिर्फ कम्पनी का लाभ बढ़ता है, बल्कि उसके उत्पादों के मूल्य भी कम होते हैं और उनका विक्रय बढ़ जाता है।

विकसित देशों ने कॉस्ट आडिट के महत्व को पहचान कर उनका पालन अपने देशों अनिवार्य कर दिया है पर भारत में इसके लिए जागरूकता कम पाई जाती है। भारत सरकार को चाहिए कि वह भारत की हर कंपनी में कॉस्ट आडिट को अनिवार्य कर दे ताकि अनावश्यक लागत को कम कर देश के संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और उत्पादों का मूल्य भी कम किया जा सकें। मूल्य कम होंगे तो आम व्यक्ति उत्पादों को खरीद पायेगा और सरकार का मेक इन इंडिया सफल हो पायेगा। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात वित्त/कर विशेषज्ञ हैं।)

Page 32 of 75

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse