एबीएन बिजनेस डेस्क। खाद्य तेल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। तेल के आयात शुल्क में छूट की सीमा सरकार ने मार्च 2025 तक बढ़ा दी है। इस फैसले से फिलहाल एक साल तक आम जनता को खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से राहत मिलेगी।
सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जून में कच्चा पॉम ऑयल, कच्चा सूरजमुखी तेल और कच्चा सोयाबीन तेल के लिए आयात शुल्क में छूट की सीमा मार्च 2024 तय की थी।
बीते दिनों देश की थोक और खुदरा महंगाई दरों में काफी उछाल आया था। इसके पीछे का मुख्य कारण खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी होना थी।
ऐसे में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ सकती है, लेकिन सरकार के इस फैसले से देश में खाद्य तेल की कीमतों को काबू रखने में काफी मदद मिलेगा।
बता दें भारत दुनिया में वनस्पति तेल और रिफाइंड ऑयल की खपत के मामले में दूसरे स्थान पर है। देश में खाद्य तेलों की यह जरूरत हर साल दो तिहाई आयात से पूरी होती है।
केंद्र सरकार ने जून 2023 में रिफाइंड सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क 17.5 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया था।
इससे पहले खाद्य तेल पर लगने वाला आयात शुल्क 32.5% था, जिसे अक्टूबर 2021 में घटाकर 17.5 फीसदी किया गया था।
सबसे अधिक पाम ऑयल और इससे जुड़े अन्य उत्पाद इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड से आयात किए जाते हैं।
भारत में ज्यादातर सरसों, पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी से निकलने वाला तेल खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से आयात होता है।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री बढ़ रही है। इसका सबूत यह है कि टेस्ला ने पिछले साल 18 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की डिलिवरी करते हुए वर्ष 2022 के 13 लाख के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है। इससे वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के अच्छे संकेत मिल रहे हैं। हालांकि वार्षिक वृद्धि दर कम रहने की उम्मीद है लेकिन बाजार का विस्तार जारी है।
ब्लूमबर्ग एनईएफ ने वर्ष 2024 में 1.67 करोड़ ईवी की बिक्री का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल के लगभग 1.4 करोड़ वाहनों से अधिक है। इस साल दुनिया में बिकने वाली हर पांचवीं कार इलेक्ट्रिक होगी। इस बाजार में टेस्ला और चीन की बीवाईडी दो सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निमार्ता कंपनियां हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पिछले साल 1 लाख के आंकड़े के करीब पहुंच गयी थी। नये मॉडल, सस्ती बैटरियां और कारें इस बाजार को बढ़ावा दे रही हैं। इसके अलावा कैब आपरेटरों की बढ़ती मांग और टेस्ला का इस क्षेत्र में संभावित प्रवेश भी देश के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की तेजी को हवा दे रहा है।
भारत के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में अच्छी-खासी तेजी देखी जा रही है। हालांकि मार्च में सरकारी सब्सिडी खत्म होने पर इस उद्योग को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बीएनईएफ की प्रमुख ईवी विश्लेषक कमल करीर कहती हैं कि सब्सिडी खत्म होने से निजी उपयोगकर्ताओं को की जाने वाली बिक्री प्रभावित हो सकती है लेकिन व्यावसायिक बिक्री के लिहाज से यह पूरा अलग मामला है। दरअसल, परिचालन लागत कम होने से व्यावसायिक क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ेगी।
वर्ष 2023 के आखिरी तीन महीनों में देश में 2,40,000 से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बिके जबकि एक साल पहले इसी अवधि के दौरान 2,19,000 वाहन बिके थे। ओला इलेक्ट्रिक अब भी इस बाजार में अग्रणी है। देश के कुछ हिस्सों में नया बैटरी-स्वैपिंग मॉडल भी आजमाया जा रहा है। ताइवान की कंपनी गोगोरो ने पिछले महीने भारत में अपना इलेक्ट्रिक स्कूटर और बैटरी-स्वैपिंग विकल्प शुरू किया जो शुरूआत में केवल कारोबारी ग्राहकों के लिए है। बीएनईएफ की प्रमुख ईवी विश्लेषक कमल करीर का कहना है कि इलेक्ट्रिक
बसों के लिए नीतिगत समर्थन अब भी मजबूत है, जिसके परिणामस्वरूप और अधिक निविदाओं और बिक्री की उम्मीद की जा सकती है। दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों में वृद्धि, वाहनों की बढ़ती ईंधन दक्षता जैसे अन्य कारकों के चलते तेल की मांग में स्पष्ट रूप से कमी देखी जा रही है। बीएनईएफ ने इस वर्ष ईवी और स्वच्छ ईंधन से चलने वाले परिवहन से संबंधित 10 प्रमुख रुझान से जुड़ी अपनी
ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2024 में सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहन 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल की जगह लेंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुल मिलाकर परिवहन के लिए तेल की मांग के शीर्ष स्तर पर पहुंचने में लगभग चार साल और लगेंगे।
अमेरिका के एक राज्य टैक्सस में जल्द ही रोबोट्रक आम हो सकते हैं और कुछ स्टार्टअप को उम्मीद है कि जल्द ही सुरक्षा चालकों को हटाया जा सकता है। पिट्सबर्ग में मौजूद आरोरा कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी क्रिस उर्मसन ने जनवरी में एक साक्षात्कार में ब्लूमबर्ग न्यूज को बताया, वर्ष के आखिर में ऐसी स्थिति भी आ सकती है जब बिना ड्राइवर के ट्रक चलाए जा सकेंगे। सौर ऊर्जा का स्थानीयकरण स्थानीय विनिर्माण वास्तव में पर्यावरण के लिहाज से काफी फायदेमंद होता है।
इसमें सामान लाने-ले जाने और इधर-उधर भेजने की मांग बहुत कम होती है। लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन न होने की लागत भी चुकानी पड़ती है। अमेरिका ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई तरीके से उदारतापूर्वक प्रोत्साहन दिए हैं। इसका नतीजा हुआ है कि मुंबई की कंपनी वारी एनर्जीज ने पिछले महीने टेक्सस में 5 गीगावॉट क्षमता वाला सौर सेल और पैनल का एक कारखाना लगाने के लिए 1 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है।
इस कारखाने की पहली इकाई 2024 के अंत तक तैयार हो जायेगी जिसकी क्षमता 3 गीगावॉट के मॉड्यूल बनाने की होगी। पूरी क्षमता से परिचालन 2027 तक चालू हो जाने की उम्मीद है। वारी एनर्जीज ने ओडिशा में भी 6 गीगावॉट क्षमता वाला संयंत्र लगाने और अन्य खर्च के वास्ते पूंजी जुटाने के लिए भारत में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दस्तावेज दाखिल किये हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका की कंपनी फर्स्ट सोलर ने भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत समर्थन हासिल किया है। यह योजना पूरी तरह से एकीकृत विनिर्माताओं के लिए है। इस कंपनी की एशिया और अमेरिका में कई विनिर्माण इकाइयां हैं। पिछले महीने फर्स्ट सोलर ने अमेरिका में उत्पादन कर के्रडिट की बिक्री की घोषणा की। कर क्रेडिट से पैसे बनाने का यह नया तरीका है जो मुद्रास्फीति कटौती अधिनियम के तहत उपलब्ध कराया गया है।
दरअसल, अमेरिकी सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को कर छूट दे रही है। इसके खरीदार, फिसर्व को दो अलग-अलग कर क्रेडिट हस्तांतरण समझौतों के तहत 50 करोड़ डॉलर और 20 करोड़ डॉलर तक के क्रेडिट बेचने के लिए 1 डॉलर कर क्रेडिट पर 0.96 डॉलर का भुगतान करना होगा। यह कीमतों का अब तक का उच्चतम स्तर है।
हाल ही में हुए कॉप28 सम्मेलन के बाद दुनिया के देश 2030 तक अक्षय ऊर्जा को तीन गुना बढ़ा सकते हैं और ऊर्जा दक्षताओं में सुधार को दोगुना कर सकते हैं। इसके साथ ही कोयले से चलने वाले बिजलीघरों को चरणों में कम किया जाएगा और जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे कम होगा। लेकिन ये सब इस बात पर निर्भर करता है कि अलग-अलग देश इस सम्मेलन की बातों की व्याख्या किस तरह करते हैं और दुनिया के 8 अरब लोग इस मुद्दे पर कितनी सक्रियता दिखाते हैं।
वर्ष 2025 के नवंबर महीने में ब्राजील में आयोजित होने वाला कॉप30 एक महत्त्वपूर्ण सम्मेलन होगा क्योंकि विभिन्न देशों को नए वादों के साथ तैयार रहना होगा। कॉप28 के समापन के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक बयान में कहा गया है कि उन्हें इस तैयारी के साथ आना चाहिए कि वे राष्ट्रीय स्तर निर्धारित योगदान देंगे जो अर्थव्यवस्था के स्तर पर व्यापक हो और जिसमें सभी ग्रीनहाउस गैस शामिल हों और जो 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान सीमा के लक्ष्य के अनुरूप हो।
इस साल का जलवायु सम्मेलन कॉप29 अजरबैजान में होगा और इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के पैमाने और उसकी तात्कालिकता को दशार्ते हुए इससे निपटने के लिए धन जुटाने के तरीकों पर चर्चा होगी। दो दशक से अधिक समय तक सरकारी तेल और गैस कंपनी में काम कर चुके और वर्तमान में अजरबैजान के पारिस्थितिकी मंत्री मुख्तार बाबायेव को सम्मेलन का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। (लेखिका न्यू यॉर्क में ब्लूमबर्ग एनईएफ के लिए ग्लोबल पॉलिसी की वरिष्ठ संपादक हैं)
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत ब्रांड के तहत खुदरा बाजार में बेची जा रही चना दाल घरेलू उपभोक्ताओं के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड बनकर उभरी है। इसने बाजार में उतारे जाने के चार महीनों में ही एक-चौथाई बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है।
उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि किफायती होने के कारण इस दाल को उपभोक्ता काफी पसंद कर रहे हैं। अक्टूबर में जारी की गयी भारत-ब्रांड चना दाल की कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि अन्य ब्रांड की दाल लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम है।
सिंह ने कहा कि ग्राहकों की प्रतिक्रिया इतनी अच्छी रही है कि देश में परिवारों के बीच सभी ब्रांड वाली चना दाल की 1.8 लाख टन मासिक खपत में से एक-चौथाई भारत ब्रांड वाली चना दाल है। उन्होंने कहा कि बाजार में उतारे जाने के बाद से लगभग 2.28 लाख टन भारत ब्रांड चना दाल बेची जा चुकी है।
शुरुआत में इसकी बिक्री 100 खुदरा केंद्रों के जरिये की गयी और अब 21 राज्यों के 139 शहरों में मौजूद 13,000 केंद्रों से इसकी बिक्री की जा रही है। उपभोक्ता मामलों के सचिव ने इस कदम से दालों की मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलने का दावा करते हुए कहा- दालों की कीमतें एक समूह के रूप में व्यवहार करती हैं।
चने की कीमतों को नीचे लाने के लिए बफर स्टॉक का उपयोग करने से अन्य दालों की कीमतों पर भी इसका पार्श्व प्रभाव पड़ता है। सरकार घरेलू उपलब्धता को बढ़ावा देने और कीमतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पिछले कुछ वर्षों से चने सहित विभिन्न प्रकार की दालों का बफर स्टॉक बनाकर रख रही है।
फिलहाल 15 लाख टन चना सरकारी बफर स्टॉक में है। सरकार नेफेड, एनसीसीएफ, केंद्रीय भंडार और पांच राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से भारत ब्रांड के तहत चना दाल की खुदरा बिक्री कर रही है। सचिव ने बताया कि इन एजेंसियों को बफर स्टॉक से कच्चा चना 47.83 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर इस शर्त के साथ दिया जा रहा है कि उसकी खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम से कम नहीं होनी चाहिए।
एजेंसियां सरकार से कच्चा चना खरीदती हैं, उसकी मिलिंग करती हैं और भारत ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री करने से पहले उसकी पॉलिश करती हैं। सरकार भारत ब्रांड के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का गेहूं का आटा भी बेच रही है। कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए वह भारत ब्रांड के तहत एफसीआई चावल की बिक्री पर भी विचार कर रही है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम में आज कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर पर पड़े रहे।
तेल विपणन करने वाली प्रमुख कंपनी हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन की वेबसाइट पर जारी दरों के अनुसार, देश में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में इनकी कीमतों के यथावत रहने के साथ ही मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर पर रहा।
वैश्विक स्तर पर साप्ताहांत पर अमेरिकी क्रूड 2.44 प्रतिशत उबलकर 73.95 डॉलर प्रति बैरल और लंदन ब्रेंट क्रूड भी तेजी के साथ 78.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में शेयर बाजार को लेकर लोगों का आकर्षण बढ़ता ही जा रहा है। साल 2023 के आखिरी महीने यानी दिसंबर में करीब 41.73 लाख डीमैट खाते खोले गये थे। निफ्टी के 21,000 के पार जाने और आईपीओ मार्केट में अच्छी तेजी के चलते लोगों ने जमकर डीमैट खाते खुलवाये।
दिसंबर महीने में सभी सेक्टर्स में उछाल देखने को मिला था। साथ ही दिसंबर में 11 आईपीओ लॉन्च हुए थे। इससे बड़ी संख्या में निवेशकों ने शेयर मार्केट में एंट्री ली। दिंसबर तक भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या 139.3 मिलियन यानी 13.93 करोड़ पहुंच गयी थी।
दिसंबर में करीब 40 लाख नये इन्वेस्टर अकाउंट्स सीडीएसएल में खोले गये। वहीं, करीब 5 लाख अकाउंट एनएसडीएल में खोले गये। इससे पहले नवंबर में कुल 28 लाख अकाउंट खोले गये थे। वहीं, अक्टूबर में 26 लाख अकाउंट्स खोले गये थे।
दिसंबर महीने में अकेले ब्रॉडर मार्केट में 7 फीसदी से अधिक का उछाल दर्ज हुआ है। निफ्टी दिसंबर में 7 फीसदी बढ़ा था। जबकि निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमश: 6.5 फीसदी और 5.19 फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी थी।
बीते महीने विदेशों से भी जमकर निवेश आया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने दिसंबर महीने में भारतीय शेयर बाजार में करीब 58,498 करोड़ रुपये निवेश किये।
हालांकि, अभी भी जनसंख्या की तुलना में निवेशकों के प्रतिशत के मामले में भारत काफी पीछे है। इस मामले में अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है। कोविड के बाद से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है।
मार्च 2020 में निफ्टी 7,511 अंक रह गया था। इसके बाद से यह बढ़ते-बढ़ते 21,700 तक पहुंच गया है। एक अप्रैल 2022 के बाद से अब तक भारत में करीब 9.84 करोड़ डीमैट खाते खोले गये हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। गरीबों की थाली भरी रहे, इसके लिए केंद्र सरकार ने दो बड़े फैसले लिये। पहले तो खाद्य तेलों के आयात पर कस्टम ड्यूटी में पांच फीसदी छूट के फैसले को एक साल के लिए और बढ़ा दिया। इसके बाद मसूर दाल के आयात पर भी कस्टम ड्यूटी को शून्य रखने के फैसले को एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया।
सरकार की कोशिश है कि लोगों की आवश्यक आवश्यकता की चीजें उचित कीमत पर मिलती रहे, भले ही उसके खजाने में कुछ कम पैसे आये। घरेलू बाजार में मसूर दाल की सप्लाई उचित कीमत पर बनी रहे, इसके लिए सरकार ने इस पर अभी आयात की शर्तों में राहत दी हुई है।
सरकार ने मसूर दाल पर प्रभावी आयात शुल्क को शून्य किये हुए है। यह फैसला मार्च 2024 तक के लिए प्रभावी है। कल इस फैसले को लागू होने की अवधि को एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया। मतलब कि अब मार्च 2025 तक यह कमोडिटी जीरो कस्टम ड्यूटी पर इंपोर्ट होगा।
यूं तो पिछले कुछ वर्षों में हमने दालों का उत्पादन बढ़ाया है। साल 2022-23 में हमने 278.10 लाख टन दलहन पैदा किया था, जो कि अब तक का सर्वाधिक है लेकिन हमारी खपत इससे भी ज्यादा की है। दुनिया भर में दाल उत्पादन में हमारी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी की है जबिक खपत में हिस्सेदारी 28 फीसदी की।
इसी तीन फीसदी के गैप को भरने के लिए हमें हर साल करीब 25 से 27 लाख टन दाल का आयात करना होता है। हमारे कुल दाल के आयात में से 50 फीसदी हिस्सेदारी म्यांमार और कनाडा की है। हमारा अधिकतर मसूर दाल तो कनाडा से ही आता रहा है, साल में करीब पांच लाख टन। इसके अलावा अरहर, चना, उड़द और मूंग की दाल का भी आयात कनाडा से होता है।
केंद्र सरकार ने कल ही खाना पकाने के तेल की कीमतों पर अंकुश रखने के लिए खाद्य तेल के आयात पर लागू सीमा शुल्क में कटौती को एक साल के लिए बढ़ा दिया था। दरअसल, घरेलू बाजार में एडिबल ऑयल की बढ़ती कीमत को थामने के लिए केंद्र सरकार ने इसी साल जून में क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सनफ्लावट ऑयल और क्रूड सोयाबीन तेल पर कस्टम ड्यूटी में पांच फीसदी की कटौती की थी।
उस समय इन खाद्य तेलों पर 15.5 फीसदी की कस्टम ड्यूटी लगती थी। इसे घटा कर 12.5 फीसदी कर दिया गया था। यह फैसला मार्च 2024 तक के लिए लागू था। अब सरकार ने छूट की अवधि को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। मतलब कि 12.5 फीसदी का रेट मार्च 2025 तक लागू रहेगा।
दाल तो हमे बाहर से काफी कम मंगाना पड़ता है लेकिन खाद्य तेलों के मामले में हम आयात पर कुछ ज्यादा ही निर्भर हैं। हम एडिबल ऑयल की अपनी 60 प्रतिशत आवश्यकता आयात से पूरी करते हैं। खाद्य तेलों के आयात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पाम ऑयल की ही है। हम साल भर में जितना खाद्य तेल आयात करते हैं, उनमें से करीब 60 फीसदी तो पाम ऑयल ही होता है। इसलिए यदि इस पर कस्टम ड्यूटी ज्यादा रहती है तो घरेलू बाजार में आयातित खाद्य तेल महंगे हो जाते हैं।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। टाटा मोटर्स में शुक्रवार 22 दिसंबर से तीन दिन कामकाज नहीं होगा। कंपनी प्रबंधन ने 22 व 23 दिसंबर को दो दिन का ब्लॉक क्लोजर लिया है। 24 दिसंबर रविवार को कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश है।
ऐसे में कंपनी तीन दिन बाद 25 दिसंबर को खुलेगी। दिसंबर माह में दूसरी बार प्रबंधन ने 31 जुलाई 2017 के समझौता के तहत 22 और 23 दिसंबर को जमशेदपुर प्लांट में ब्लॉक क्लोजर का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्लांट हेड के आदेश से गुरुवार को सर्कुलर जारी किया गया।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र के देश के प्रतिष्ठित उपक्रम स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) को दुनिया के टॉप 10 स्टील कंपनियों की सूची में शामिल कराने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे। दरअसल, वर्तमान में सेल स्टील उत्पादक कंपनियों की विश्व स्तरीय सूची में 21वें स्थान पर है।
सेल के अध्यक्ष अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्टील की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सेल न केवल अपने उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनायेगा बल्कि उत्पादन को बढ़ाने के लिए आधुनिक तरीकों को अपनायेगा और इस दिशा में नये-नये अन्वेषण पर भी जोर देगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सेल के सभी प्लांटों को विशेष प्रयास करने के लिए निर्देश दिये गये हैं।
श्री प्रकाश ने कहा कि सेल की वर्तमान उत्पादन क्षमता 20 मिलियन टन प्रतिवर्ष की है जिसे हम वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 35 मिलियन टन करना चाहते हैं। इस दिशा में कंपनी ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने बताया कि उत्पादन को विशेष रूप से बढ़ाने के लिए अध्ययन टीम गठित की गयी है, जो इसके लिए योजना तैयार कर रही है।
अध्यक्ष ने बताया कि सेल स्टेटमेंट अगले साल जनवरी में प्रस्तुत किया जायेगा। इस विजन स्टेटमेंट में स्टील के क्षेत्र में नित नये हो रहे अभिनव प्रयोगों, अनुसंधानों, अन्वेषण और आवश्यकता के अनुरूप स्टील के उत्पादन पर जोर दिया जायेगा।
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