एबीएन सेंट्रल डेस्क। 1.76 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाले गोदरेज ग्रुप की शुरुआत 1897 में हुई थी। अब इस 126 साल पुराने बिजनेस ग्रुप पर बंटवारे की तलवार लटक रही है। गोदरेज ग्रुप की शुरुआत ताले बेचने से हुई थी।
इसी ग्रुप ने 1897 में भारत का पहला लीवर टेक्नोलॉजी वाला बनाया था। उस समय मुंबई में अपराध बढ़ रहा था। लोगों की जान-माल की सेफ्टी के मद्देनजर गोदरेज ने शुरू में खास ताले बनाना शुरू किया। ग्रुप की शुरुआत दो भाइयों अर्देशिर गोदरेज और पिरोजशा बुरजोरजी गोदरेज ने की थी। समय के साथ ग्रुप ने कई सेक्टरों में कामयाबी हासिल की। मगर अब इस ग्रुप का बंटवारा हो सकता है।
आज गोदरेज ग्रुप कई सेक्टरों में कारोबार करता है, जिनमें इंजीनियरिंग, इक्विपमेंट, सिक्योरिटी सॉल्यूशंस, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स, रियल एस्टेट और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार इन सभी सेक्टरों में फैले कारोबार का बंटवारा किया जा सकता है। हालांकि अभी गोदरेज ग्रुप की तरफ से बंटवारे पर कोई बयान नहीं आया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अक्टूबर महीने की शुरुआत महंगाई के बड़े झटके के साथ हुआ है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में बड़ा इजाफा किया है। 1 अक्टूबर 2023 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ गये हैं। आज यानी 01 अक्टूबर से कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट में 209 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गयी है।
फेस्टिव सीजन से पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा होने से आम आदमी की जेब पर असर पड़ने वाला है। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अक्टूबर महीने में नवरात्र, दशहरा जैसे त्योहार पड़ रहे हैं और इन पर्वों से पहले ही तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर महंगा कर दिया है। बता दें कि 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होटलों, रेस्त्रां और कैटरिंग वाले करते हैं।
फेस्टिव सीजन पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। इसके अलावा होटलों में खाना खाने के लिए भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में अगले कुछ दिनों में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो जायेगी। इसके साथ ही लोग बड़ी संख्या में आवाजाही के लिए फ्लाइट का इस्तेमाल करेंगे।
ऐसे में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने बड़ा झटका दिया है और हवाई ईंधन को महंगा कर दिया है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में एटीएफ कीमत 1,18,199.17 रुपये प्रति किलो लीटर पर पहुंच गयी है।
यहां पिछले महीने के मुकाबले 5500 किलो लीटर यानी 5.50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। बता दें कि नयी कीमत 1 अक्टूबर 2023 से लागू हो चुकी हैं।
ध्यान देने वाली बात ये है कि कच्चे तेल के दाम में इजाफे के बाद एटीएफ की कीमत में इजाफा हुआ है। सितंबर 2023 में दिल्ली में एटीएफ का दाम 1.12 लाख प्रति लीटर पर बिक रहा था। सितंबर को भी एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी, जिसके बाद त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले एयरलाइंस कंपनियों की चिंता बढ़ गयी थी।
ध्यान देने वाली बात ये है कि अक्तूबर के महीने में हुई हवाई ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी को मिलाकर लगातार चार बार एयर फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी की जा चुकी है। 1 जुलाई को भी तेल कंपनियों ने एटीएफ के दाम में 1.65 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। जेट फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण है कच्चे तेल की कीमत में इजाफा।
पिछले कुछ दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गयी है और इसकी कीमत 97 डॉलर तक पहुंच गयी है। ऐसे में जुलाई से लेकर अब तक कच्चे तेल के दाम में 30 फीसदी और सितंबर में अकेले कीमत में 15 फीसदी की जबरदस्त बढ़त देखी गयी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय कार बाजार में नयी गाड़ियों के आने का सिलसिला लगातार जारी रही हैं। कई गाड़ियों को दमदार बुकिंग मिल रही है तो गाड़ियां लोगों को खास पसंद नहीं आ रही है।
हालांकि, कार बनाने वाली कंपनी टोयोटा की एक गाड़ी ऐसी भी है जिसे इतनी बुकिंग मिल गयी कि कंपनी को कुछ समय के लिए बुकिंग लेना ही बंद करना पड़ गया है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने लंबे समय से लंबित बैकलॉग के कारण रुमियन के सीएनजी एडिशन के लिए बुकिंग स्वीकार करना अस्थायी रूप से रोक दिया है।
बता दें कि टोयोटा ने पिछले महीने ही मारुति की रीबैज्ड अर्टिगा का अनावरण किया गया था, जबकि कीमतों की आधिकारिक घोषणा इस महीने की शुरुआत में की गयी थी।
टोयोटा ने एक बयान में कहा कि बुकिंग पर यह अस्थायी रोक वास्तव में कार को भारत में कंपनी की उम्मीद से ज्यादा मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया के कारण है। हमने इस साल अगस्त में आल-न्यू टोयोटा रुमियन लॉन्च की और हमें अपने उन ग्राहकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है जो बी-एमपीवी सेगमेंट में टोयोटा वाहन का इंतजार कर रहे हैं। हम आॅल न्यू टोयोटा रुमियन के लिए बढ़ती पूछताछ और अच्छी बुकिंग को देखकर उत्साहित हैं।
कंपनी ने कहा- इस मॉडल की मांग हमारी उम्मीद से ज्यादा हो गयी है और इस वजह से सभी वेरिएंट्स की डिलीवरी में लंबा समय लग रहा है। खासकर ई-सीएनजी मॉडल के लिए। इसलिए हमने लंबी वेटिंग को देखते हुए ग्राहकों को किसी भी असुविधा से बचाने के लिए ई-सीएनजी विकल्प की बुकिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि, टोयोटा ने एमपीवी के पेट्रोल-संचालित (नियोड्राइव) वेरिएंट के लिए बुकिंग स्वीकार करना जारी रखा है।
रुमियन का सीएनजी मॉडल 1.5 लीटर और 4 सिलेंडर इंजन से लैस है जो 87 बीएचपी और 121.5 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है। यह केवल 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ आती है। वहीं, पेट्रोल मॉडल में यह कार 102 बीएचपी और 137 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है, जबकि पेट्रोल वेरिएंट में यह अतिरिक्त 6-स्पीड आॅटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। गणेश चतुर्थी की छुट्टी के बाद आज शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। खुलने के साथ यह गिरावट बढ़ती गयी। हैवी वेट शेयर में चौतरफा बिकवाली के कारण बीएसई सेंसेक्स 796.00 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 66,800.84 अंक पर बंद हुआ।
निफ्टी 50 भी औंधे मुंह गिरकर बंद हुआ। निफ्टी 50 222.85 अंक लुढ़क कर 19,910.45 अंक पर बंद हुआ। इस तरह एक दिन में निवेशकों के लाख करोड़ रुपये डूब गये। 18 सितंबर को जब बाजार बंद हुआ था तो बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 3.23 लाख करोड़ रुपये था।
वहीं, आज में बाजार में बड़ी गिरावट आने से लिस्टेड कंपनियों का पूंजीकरण घटकर 3.20 लाख करोड़ रह गया। इस तरह एक दिन में ही निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गये। सेंसेक्स में शामिल 30 में से सिर्फ 6 शेयर हरे निशान में और 24 बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज से लेकर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक का शेयर 3.84% टूटकर 1565.50 रुपये पर बंद हुआ। रिलांयस के शेयरों में भी 2% से अधिक की गिरावट रही।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरबैग की संख्या बढ़ाने को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही थी। पिछली रिपोर्टों के मुताबिक आगामी अक्तूबर महीने से देश में बेची जाने वाली सभी कारों में 6-एयरबैग को अनिवार्य किये जाने की खबर थी लेकिन आज केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि इस साल की शुरुआत में नये क्रैश टेस्ट नियम लागू होने के बाद से सरकार भारत में यात्री कारों के लिए छह-एयरबैग सुरक्षा नियम को अनिवार्य नहीं बनायेगी।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वार्षिक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार कारों के लिए 6 एयरबैग नियम को अनिवार्य नहीं बनायेगी। उन्होंने कहा कि देश में बहुत सी वाहन निर्माता कंपनियां हैं जो पहले से ही 6 एयरबैग दे रही हैं और वो कंपनियां अपने उन कारों का विज्ञापन भी कर रही हैं। ऐसे में 6-एयरबैग अनिवार्य किये जाने की जरूरत नहीं है।
नितिन गडकरी ने कहा कि, देश का ऑटो सेक्टर तेजी से ग्रोथ कर रहा है। भारत ने हाल ही में जापान को पीछे कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो बाजार बन चुका है। ऐसे में वाहनों में नयी तकनीक को लेकर कंपटीशन भी बढ़ रहा है। वाहन मालिक भी नये तकनीक और फीचर्स को तरजीह दे रहे हैं।
ऐसे में कुछ कंपनियां पहले से ही 6 एयरबैग को वाहनों में शामिल कर चुकी हैं। इस स्थिति में जो ब्रांड्स प्रतिस्पर्धा में बने रहना चाहते हैं वो भी अपने वाहनों में 6 एयरबैग देंगे, लेकिन हम इसे अनिवार्य नहीं करेंगे।
बता दें कि पिछले साल नितिन गडकरी ने कहा था कि अक्तूबर-2023 से देश में इस नये नियम को लागू किया जायेगा। उन्होंने मीडिया को दिये अपने बयान में कहा था कि देश में सबसे ज्यादा छोटी कारों की खरीदारी मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा की जाती है और लो-बजट कारों की डिमांड सबसे ज्यादा है।
लेकिन उन्होंने चिंता व्यक्त की थी कि वाहन निर्माता कंपनियां केवल उंची कीमत वाली प्रीमियम कारों में ही 6 या 8 एयरबैग की सुविधा क्यों देती हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। खाने-पीने की चीजों खासतौर से टमाटर की कीमतों में कमी के चलते अगस्त 2023 में खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों में गिरावट आयी है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर घटकर 6.83 फीसदी रही है जो जुलाई में 15 महीने के हाई 7.44 फीसदी पर जा पहुंची थी।
जून 2023 में खुदरा महंगाई दर 4.81 फीसदी रही थी। बीते वर्ष अगस्त 2022 में खुदरा महंगाई दर 7 फीसदी रही थी। अगस्त में भले ही खुदरा महंगाई दर में गिरावट आयी हो लेकिन ये अभी भी आरबीआई के टोलरेंस बैंड के अपर लेवल 6 फीसदी से ऊपर बना हुआ है।
सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 7.63 फीसदी से घटकर 7.02 फीसदी रही है जबकि शहरी इलाकों में महंगाई दर 7.20 फीसदी से घटकर 6.59 फीसदी पर आ गयी है।
वहीं अगस्त महीने में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में जुलाई के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है और ये 10 फीसदी के नीचे जा पहुंचा है।
अगस्त में खाद्य महंगाई दर घटकर 9.94 फीसदी पर आ गई है जो जुलाई में 11.51 फीसदी रही थी। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन 5.7% बढ़ा : देश का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) जुलाई महीने में 5.7 प्रतिशत बढ़ा है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार मापे जाने वाले औद्योगिक उत्पादन में पिछले साल इसी महीने में 2.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन जुलाई, 2023 में 4.6 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं खनन उत्पादन में 10.7 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार माह अप्रैल-जुलाई में औद्योगिक उत्पादन में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं। पिछले साल की समान अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि 2.2 प्रतिशत रही थी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। बीते महीने यानी अगस्त में देश में निवेशकों ने जमकर डीमैट खाते खोले हैं। अगस्त में 19 महीनों में सबसे ज्यादा नये डीमैट खाते खोले गये। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विस और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो, बीते महीने 31 लाख डीमैट खाते खोले गये।
जो कि जनवरी 2022 के बाद से खाता खुलने की सबसे अधिक संख्या है। कुल डीमैट टेली 12.66 करोड़ को पार कर गयी, जो इसके एक महीने पहले की संख्या से 2.51 प्रतिशत और एक साल पहले से 25.83 प्रतिशत अधिक है।
अगर भारत के बेंचमार्क इंडेक्सेस सेंसेक्स और निफ्टी की बात करें को बीते महीने यानी अगस्त में लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। जबकि ब्रॉडर मार्केट बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप में क्रमश: 2.6 प्रतिशत और 6.1 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
अगस्त में निवेशकों ने अंडरवैल्यूड स्टॉक्स पर फोकस दिखाया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सेस में भागीदारी और ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़त देखी गयी। दोनों इंडेक्स अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गये हैं।
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि आइपीओ लिस्टिंग में भी उछाल देखने को मिला। आइपीओ ने लगभग 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड ने बेंचमार्क इंडेक्सेस से बेहतर प्रदर्शन किया है। जिससे शेयर बाजार के प्रति लोगों की रुचि में इजाफा देखने को मिला।
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