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Published / 2024-05-29 21:55:40
अडाणी के कारण बढ़ रहे पेटीएम के शेयरों के दाम?

क्या पेटीएम में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने जा रहे गौतम अडाणी? शेयरों में आयी तूफानी तेजी, कंपनी ने दिया यह बयान 

एबीएन बिजनेस डेस्क। पेटीएम के पेरेंट कंपनी यानी वन 97 कम्युनिकेशंस के शेयर्स में काफी तेजी देखने को मिली और कंपनी के शेयर्स में करीब 5 प्रतिशत तक का अपर सर्किट भी लग गया है। इस अचानक आये उछाल की वजह अडाणी ग्रुप द्वारा पेटीएम में हिस्सेदारी लेने की दिलचस्पी की अटकलें बतायी गयीं। इस अफवाह के चलते निवेशकों का पेटीएम के शेयर्स में रुझान दिखा और कंपनी का शेयर बुलिश हो गया। 

हालांकि कंपनी ने खुद ही बाद में इन अडाणी ग्रुप से जुड़ी इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। अब पेटीएम ने उन सभी खबरों को खारिज किया है, जिसमें यह कहा गया था कि अडाणी ग्रुप कंपनी में हिस्सेदारी लेने के लिए दिलचस्पी दिखा रहा है। इसको लेकर कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि ये सारी खबरें महज अटकलबाजी ही है, क्योंकि इन किसी भी तरह की चचार्ओं में शामिल ही नहीं है। 

पेटीएम और अडाणी ग्रुप को लेकर उड़ी थी अफवाह 

कंपनी ने अफवाहों पर बयान दिया कि हम हमेशा ही ही सेबी के लिस्टिंग आब्लिगेशन और डिसक्लोज रिक्वायरमेंट 2015 के नियमों का पालन करते रहे हैं। हमने ऐसी बातों को लेकर पहले भी नियमों का पालन करते रहे हैं। बता दें कि आज यह खबरें चल रही थीं कि अडाणी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडाणी ने पेटीएम में हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखा है, इन अटकलों के चलते ही शेयर बाजार में पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर में उछाल देखने को मिला। 

5 प्रतिशत का अपर सर्किट 

अडाणी ग्रुप से जुड़ी अटकलों के बीच पेटीएम के शेयरों में आज 5 प्रतिशत तक का अपर सर्किट देखने को मिला है। इसके चलते कंपनी का शेयर 359.45 तक पहुंच गया। बता दें कि इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर्स में करीब 44 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखी जा चुकी है। 

अफवाह की बात करें तो टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने वन 97 कम्युनिकेशंस में हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखायी थी, हालांकि कंपनी ने इसको लेकर सिरे से खारिज करने की बात कही है। दिलचस्प बात यह भी है कि रिपोर्ट में पेटीएम के फाउंडर और सीईओ विजय शेखर शर्मा की गौतम अडाणी से हुई 28 की अहमदाबाद वाली बात का उल्लेख किया गया था।

Published / 2024-05-29 21:53:45
जीत पक्की, पर सीट कितनी... इसी चिंता में गिरा जा रहा शेयर मार्केट

सर्वे में एक्सपर्ट्स ने 4 जून के लिए दी बड़ी सलाह 

शेयर बाजार 29 मई को लगातार चौथे दिन गिरा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे देश और शेयर बाजार के लिए एक बड़ा इवेंट है। इसके चलते लोगों में बेसब्री और बाजार में बेचैनी बढ़ती जा रही है। आज, बुधवार को वीकली एक्सपायरी से एक दिन पहले लगातार चौथे दिन गिरकर बंद हुआ। 

इस वजह से निवेशकों में असमंजस का माहौल है। लोगों के मन में सवाल है कि क्या शेयरों में हुआ मुनाफा बुक कर लेना चाहिए या फिर चुनावी नतीजों का इंतजार करना चाहिए। इस पर मार्केट एक्सपर्ट्स की अपनी-अपनी राय है। 

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 29 मई, 2024 को भी बिकवाली देखी गयी। निफ्टी 0.80 फीसदी टूटकर 22,704 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स इंट्राडे में 667 अंक गिरकर 74,502 के स्तर पर क्लोज हुआ। आइये एक्सपर्ट्स के नजरिये से जानते हैं आगे निफ्टी और सेंसेक्स में क्या लेवल अहम होंगे। 

लोकसभा चुनाव परिणाम से पहले घबराहट 

मार्केट एनालिस्ट ने बाजार में जारी इस उतार-चढ़ाव का कारण आगामी लोकसभा चुनाव परिणामों को बताया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पहले निवेशकों में घबराहट देखने को मिल रही है। हालांकि, मार्केट सत्तारूढ़ मोदी सरकार के फिर से सत्ता में लौटने को लेकर आश्वस्त है। 

लेकिन, डर इस बात का है कि जीत का कम अंतर सरकार को बड़े सुधारात्मक कदम उठाने करने से रोक सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स ने ब्लूमबर्ग न्यूज के सर्वे में कहा कि भारतीय शेयरों को अपनी रिकॉर्ड रैली बढ़ाने के लिए आम चुनाव में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी को 303 से अधिक सीटें जीतने की जरूरत है।

Published / 2024-05-28 20:47:30
ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स में कूदने की तैयारी में अदाणी ग्रुप

अडाणी ग्रुप अब भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में भी कूदने की तैयारी में है

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अदाणी ग्रुप अपने कारोबार को और भी बड़ा करने की सोच रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये ग्रुप अब भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में भी कूदने की तैयारी में है। ऐसा करके वो टाटा, गूगल और मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों से सीधी टक्कर लेना चाहता है। 

जानकारों के मुताबिक अदाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े सरकारी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, रूपे कार्ड की तरह काम करने वाले यूपीआई का लाइसेंस लेने के लिए बातचीत कर रहा है। साथ ही, पहले से ऐलान किये गये अदाणी क्रेडिट कार्ड को बैंकों के साथ मिलकर लाने की योजना को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

अदाणी ग्रुप अपने उपभोक्ता ऐप अदाणी वन में नये फीचर्स जोड़ सकता है। सिर्फ पेमेंट सेक्टर ही नहीं, बल्कि खबरों के अनुसार अदाणी ग्रुप सरकारी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स के जरिए आनलाइन शॉपिंग की सुविधा भी देने के लिए बातचीत कर रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अगर ये बातचीत सफल होती है, तो ये सारी सर्विसिज अदाणी ग्रुप के उपभोक्ता ऐप अदाणी वन पर मिलेंगी, जिसे 2022 के अंत में लॉन्च किया गया था। 

अदाणी ग्रुप सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले बाजारों में कदम रखने की अपनी योजना पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अदाणी ग्रुप की ई-कॉमर्स और पेमेंट सर्विस शुरुआत में उन्हीं लोगों को टारगेट करेंगी जो पहले से ही अदाणी ग्रुप की दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। जैसे गैस और बिजली के ग्राहक या अदाणी के हवाई अड्डों से यात्रा करने वाले लोग। 

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में शामिल कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में पहले से ही कई बड़ी कंपनियां मौजूद हैं, ऐसे में अदाणी ग्रुप के लिए सफल होना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, अदाणी ग्रुप के पास पहले से ही देशभर में फैला हुआ बड़ा बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स का नेटवर्क है। साथ ही, उनके पास पहले से ही कई ग्राहक भी जुड़े हुए हैं। ये सब मिलकर अदाणी ग्रुप को इन नये बाजारों में आगे बढ़ने का एक मजबूत आधार दे सकते हैं।

Published / 2024-05-28 18:28:29
मजबूत बुनियाद शेयर बाजार में तेजी की देन

शेयर बाजार की तेजी के पीछे मजबूत बुनियाद, दीर्घकालिक निवेश पर जोर : विशेषज्ञ

एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में मौजूदा तेजी मजबूत बुनियाद और कंपनियों की आय बढ़ने के कारण आयी है। शेयर विशेषज्ञों ने यह राय जाहिर करते हुए कहा कि खुदरा निवेशक खरीदारी के मौके का इस्तेमाल अच्छे शेयर जमा करने के लिए कर सकते हैं। 

प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स ने सोमवार को पहली बार 76,000 अंक का स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 23,110.80 अंक के नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह भी प्रमुख सूचकांक निफ्टी-50 और सेंसेक्स ने दो मौकों पर सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था।

विशेषज्ञों का कहना है कि कॉरपोरेट बही-खाते पांच साल पहले की तुलना में अब बहुत साफ-सुथरे हैं और क्षमता विस्तार की गुंजाइश है। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के बुनियादी अनुसंधान निवेश सेवाओं के प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि भारतीय बाजार में हालिया तेजी, जीडीपी वृद्धि और विनिर्माण पीएमआई (क्रय प्रबंधक सूचकांक) जैसे मजबूत घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों से समर्थित है। यहां तक कि मुद्रास्फीति भी काफी हद तक स्थिर है।  

संपत्ति प्रबंधन कंपनी द इन्फिनिटी ग्रुप के संस्थापक और निदेशक विनायक मेहता ने कहा कि पोर्टफोलियो में विविधता लाकर, मजबूत बुनियादी सिद्धांतों के साथ गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करके और और सट्टा व्यापार से बचकर जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक जून को चुनाव के अंतिम चरण तक अस्थिरता जारी रहने का अनुमान है। 

चुनाव नतीजों से पहले बाजार में बड़ी गिरावट की गुंजाइश नहीं है। कारोबारी मंच फायर्स के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तेजस खोडे ने कहा कि खुदरा निवेशकों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और जोखिमों को कम करने के लिए व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) और विविध पोर्टफोलियो पर विचार करना चाहिए।

Published / 2024-05-22 19:14:31
विदेशी निवेशकों में डर : निकाल लिये 18,000 करोड़

आम चुनाव शुरू होने के बाद हर दिन 18000 करोड़ की बिकवाली, 2004 से क्या है कनेक्शन? 

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में आम चुनाव की शुरुआत होने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक अब तक 37,700 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। बावजूद घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी बाजार में लगातार बनी हुई है। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 60,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। 

देश में 19 अप्रैल 2024 को आम चुनाव की शुरुआत होने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अब तक 37,700 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान विदेशी निवेशकों ने हर दिन औसतन 1800 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। 

दलाल स्ट्रीट में लोकसभा चुनाव परिणामों पर अनिश्चितता के कारण उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 67% की उछाल के साथ 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में मंगलवार को भी बिकवाली करते दिखे और शुद्ध रूप से 1,874.54 करोड़ रुपये की कीमत के शेयर बेचे। 

एफआईआई की बिकवाली की भरपाई कहां से हो रही

हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बावजूद घरेलू निवेशकों (डीआईआई) की दिलचस्पी बाजार में लगातार बनी हुई है। वे न केवल अपनी पूर्व की खरीदारी को बनाये रखे हुए हैं, बल्कि लगातार नयी खरीदारी भी कर रहे हैं। पिछले 21 कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 60,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। 

अप्रैल महीने के अंत तक म्यूचुअल फंड्स के पास करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये की बड़ी नकदी मौजूद थी, जिस कारण वे विदेशी निवेशकों की ओर से की जा रही बिकवाली के कारण पैदा हुए दबाव को काफी हद तक कम करने में सफल रहे हैं। मोजोपीएमएस के चीफ इन्वेस्टमेंट आफिसर सुनील दमानिया के अनुसार भारतीय इक्विटी बाजार लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहा है। 

5 ट्रिलियन डॉलर के करीब बाजार पूंजीकरण तक पहुंचने से भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है। इस उपलब्धि का श्रेय खुदरा निवेशकों को दिया जा सकता है, जिन्होंने हाल के वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद दृढ़ता से खरीदारी की है। साथ ही, सरकार के त्वरित सुधारों और भारतीय निगमों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने निरंतर निवेशकों की आय वृद्धि में योगदान दिया है।

जिससे निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार के प्रति उनका आकर्षण भी बढ़ा है। मौजूदा रैली आय वृद्धि और तरलता के संयोजन से प्रेरित है, जो अगले पांच वर्षों के भीतर भारत के बाजार पूंजीकरण को 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकती है। हालांकि, 5 ट्रिलियन डॉलर से 10 ट्रिलियन डॉलर के बीच की यात्रा में चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है और यह बहुत आसान यात्रा नहीं होगी।

Published / 2024-05-20 21:02:45
चीनी गुच्छी प्रभावित कर रही हिमाचल के पहाड़ी लोगों की आय

पहाड़ी लोगों की आय के प्रमुख स्त्रोत गुच्छी पर चीनी गुच्छी की सेंध

एबीएन बिजनेस डेस्क। दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार हिमाचल की गुच्छी चीन द्वारा तैयार की जा रही अपनी गुच्छी के आगे बौनी साबित हो गयी है। किसी समय 40 से 50 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली गुच्छी के दाम आज के दौर में अनाज मंडी शिमला में 5 हजार रुपये प्रति किलो भी नहीं मिल रहे हैं। 

चीन पिछले दो-तीन वर्षों से अपनी स्वयं की गुच्छी तैयार कर रहा है, जो हिमाचल की गुच्छी से देखने में भी बहुत अच्छी है और इसके दाम भी बहुत कम हैं। चीन इसका अन्य देशों में भी निर्यात कर रहा है जिससे हिमाचल की गुच्छी के दाम फीके पड़ गए हैं। 

किसी समय यह हिमाचल के पहाड़ी इलाकों के लोगों की आय का मुख्य स्त्रोत होती थी और बैसाख की संक्रांति से शुरू होने वाले लोकल त्यौहारों, पर्वों यानी बीशू के लिए कपड़े आदि की खरीद के लिए गुच्छी एकमात्र साधन मानी जाती थी लेकिन आज के दौर में गुच्छी का आलम यह है कि इसके 5 हजार रुपए प्रतिकिलो भी दाम नहीं मिल रहे हैं।

कई बीमारियों के लिए रामबाण मानी जाती है गुच्छी

डॉक्टरों के अनुसार गुच्छी चमत्कारी और औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसमें आयरन, विटामिन बी और सी के अलावा अमीनो एसिड और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इसमें लो फैट और हाई एंटी आॅक्सीडैंट्स फाइबर होते हैं। विशेषकर हृदय रोगियों के लिए गुच्छी मशरूम संजीवनी है।

Published / 2024-05-07 18:13:48
शेयर बाजार : नहीं बढ़ेगा ट्रेडिंग का समय

सेबी ने एनएसई के प्रस्ताव को किया खारिज

एबीएन बिजनेस डेस्क। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आॅफ इंडिया (सेबी) ने डेरिवेटिव सेगमेंट में शेयर बाजार में कारोबारी समय के विस्तार के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रस्ताव को वापस कर दिया है। ब्रोकर समुदाय के बीच आम सहमति की कमी के कारण सेबी ने ये फैसला लिया है। 

सेबी ने एक्सचेंजों की ओर से ट्रेडिंग समय बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। शेयर बाजार में कुछ समय से ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने के लिए कुछ वर्ग से मांग की जा रही थी जिस पर अब सेबी ने ये फैसला सुनाया है। 

एनएसई ने दायर की थी एप्लीकेशन 

एनएसई ने मार्केट रेगुलेटर के पास शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच डेरिवेटिव मार्केट को तीन अतिरिक्त घंटों के लिए खुला रखने के लिए एक एप्लीकेन दायर की थी। ये मांग इसलिए की गयी थी जिससे बाजार सहभागियों को शाम के समय ग्लोबल न्यूज फ्लो का आकलन करने और उस पर कार्रवाई करने में मदद मिल सके। हालांकि बढ़ने वाली एक्स्ट्रा कॉस्ट के कारण सभी स्टॉक ब्रोकर इसका समर्थन करने में आगे नहीं आये और इस मांग का सपोर्ट नहीं किया। 

फरवरी में भी चर्चा ने पकड़ा था जोर 

हालांकि इसी साल फरवरी के महीने में खबर आई थी कि इंडेक्स फ्यूचर्स में ट्रेडिंग समय बढ़ाने के लिए एसोसिएशन आॅफ नेशनल एक्सचेंज मेंम्बर्स आफ इंडिया (एएनएमआई) की ओर से जो प्रयास किए जा रहे थे उनके लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की बात सामने आई है। वहीं इसके बाद चर्चा थी कि ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम ने इस बारे में मार्केट रेगुलेटर सेबी को औपचारिक लेटर लिखने का फैसला किया है।

Published / 2024-05-07 12:26:24
अब सताने लगी आलू-प्याज की कीमतें

  • नींद उड़ा सकती है आलू-प्याज की कीमतें, बढ़ने लगे भाव

एबीएन बिजनेस डेस्क। आलू और प्याज की कीमतें अब आपकी नींद उड़ा सकती है। दरअसल, रिटेल मार्केट में पिछले एक महीने में आलू की कीमत में करीब 30 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है। वहीं दूसरी ओर प्याज का निर्यात ओपन होने के बाद कीमतों में इजाफे का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है। 

आलू के दाम में कितना इजाफा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीते एक महीने में आलू कीमतें 20 रुपए से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गयी है। इसका मतलब है कि आलू की कीमत में 10 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा देखने को मिल चुकाई है। 

अगर चिप्सोना आलू रिटेल मार्केट में 35 से 40 रुपए किलो के भाव पर मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर छोटे आलू के दाम 20 से 22 रुपए हो गए हैं, जोकि कुछ दिन पहले 14 रुपए प्रति किलोग्राम थे। ऐसे में आप अनुमान लगा सकते हैं कि आलू की कीमतें कितनी तेजी के साथ बढ़ रही हैं।

प्याज भी होगा महंगा?

एग्री कमोडिटी के विशेषज्ञ बताते हैं कि अब प्याज भी महंगा हो सकता है। सरकार ने प्याज के निर्यात पर अनुमति दे दी है। अब प्याज उत्पादक अपने प्याज को दुनिया के किसी भी कोने में भेज सकेंगे। 

ऐसे में आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है, जब भारत के प्याज के निर्यात पर रोक लगाई हुई थी तो दूसरे देशों में प्याज की कीमतें 100 रुपये से 150 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गयी थी। मौजूदा समय में भी एक्सपोर्ट मार्केट में अभी प्याज 100 रुपए प्रति किलोग्राम है, जिसकी वजह से घरेजू यूज में आने वाले प्याज कीद कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है।

क्या बढ़ सकती है महंगाई?

देश के रिटेल इंफ्लेशन में सब्जियों की महंगाई का वेटेज 7.4 फीसदी है जबकि फूड इंफ्लेशन में सब्जियों का वेटेज 15 फीसदी के आसपास है। मौजूदा समय में सब्जियों की महंगाई में इजाफा लगातार देखा जा रहा है। गर्मियों में हरी सब्जी डिमांड ज्यादा होती है जिनकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सब्जियों की महंगाई की वजह से कुल महंगाई दर डबल डिजिट में पहुंच सकती है।

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