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Published / 2024-01-10 21:15:27
सब पर भारी पड़ रही भारत ब्रांड की चना दाल

चार महीने में हासिल की एक-चौथाई बाजार हिस्सेदारी 

  • अक्टूबर में जारी की गयी भारत-ब्रांड चना दाल की कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि अन्य ब्रांड की दाल लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत ब्रांड के तहत खुदरा बाजार में बेची जा रही चना दाल घरेलू उपभोक्ताओं के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड बनकर उभरी है। इसने बाजार में उतारे जाने के चार महीनों में ही एक-चौथाई बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है। 

उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि किफायती होने के कारण इस दाल को उपभोक्ता काफी पसंद कर रहे हैं। अक्टूबर में जारी की गयी भारत-ब्रांड चना दाल की कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि अन्य ब्रांड की दाल लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

सिंह ने कहा कि ग्राहकों की प्रतिक्रिया इतनी अच्छी रही है कि देश में परिवारों के बीच सभी ब्रांड वाली चना दाल की 1.8 लाख टन मासिक खपत में से एक-चौथाई भारत ब्रांड वाली चना दाल है। उन्होंने कहा कि बाजार में उतारे जाने के बाद से लगभग 2.28 लाख टन भारत ब्रांड चना दाल बेची जा चुकी है। 

शुरुआत में इसकी बिक्री 100 खुदरा केंद्रों के जरिये की गयी और अब 21 राज्यों के 139 शहरों में मौजूद 13,000 केंद्रों से इसकी बिक्री की जा रही है। उपभोक्ता मामलों के सचिव ने इस कदम से दालों की मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलने का दावा करते हुए कहा- दालों की कीमतें एक समूह के रूप में व्यवहार करती हैं। 

चने की कीमतों को नीचे लाने के लिए बफर स्टॉक का उपयोग करने से अन्य दालों की कीमतों पर भी इसका पार्श्व प्रभाव पड़ता है। सरकार घरेलू उपलब्धता को बढ़ावा देने और कीमतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पिछले कुछ वर्षों से चने सहित विभिन्न प्रकार की दालों का बफर स्टॉक बनाकर रख रही है। 

फिलहाल 15 लाख टन चना सरकारी बफर स्टॉक में है। सरकार नेफेड, एनसीसीएफ, केंद्रीय भंडार और पांच राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से भारत ब्रांड के तहत चना दाल की खुदरा बिक्री कर रही है। सचिव ने बताया कि इन एजेंसियों को बफर स्टॉक से कच्चा चना 47.83 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर इस शर्त के साथ दिया जा रहा है कि उसकी खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम से कम नहीं होनी चाहिए। 

एजेंसियां सरकार से कच्चा चना खरीदती हैं, उसकी मिलिंग करती हैं और भारत ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री करने से पहले उसकी पॉलिश करती हैं। सरकार भारत ब्रांड के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का गेहूं का आटा भी बेच रही है। कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए वह भारत ब्रांड के तहत एफसीआई चावल की बिक्री पर भी विचार कर रही है।

Published / 2024-01-07 13:07:35
डीजल-पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं

एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम में आज कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर पर पड़े रहे।

तेल विपणन करने वाली प्रमुख कंपनी हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन की वेबसाइट पर जारी दरों के अनुसार, देश में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में इनकी कीमतों के यथावत रहने के साथ ही मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर पर रहा।

वैश्विक स्तर पर साप्ताहांत पर अमेरिकी क्रूड 2.44 प्रतिशत उबलकर 73.95 डॉलर प्रति बैरल और लंदन ब्रेंट क्रूड भी तेजी के साथ 78.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

Published / 2024-01-06 11:35:52
दिसंबर में खुले 41 लाख से ज्यादा डिमैट एकाउंट

शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में शेयर बाजार को लेकर लोगों का आकर्षण बढ़ता ही जा रहा है। साल 2023 के आखिरी महीने यानी दिसंबर में करीब 41.73 लाख डीमैट खाते खोले गये थे। निफ्टी के 21,000 के पार जाने और आईपीओ मार्केट में अच्छी तेजी के चलते लोगों ने जमकर डीमैट खाते खुलवाये। 

13.93 करोड़ पहुंच गई डीमैट खातों की संख्या

दिसंबर महीने में सभी सेक्टर्स में उछाल देखने को मिला था। साथ ही दिसंबर में 11 आईपीओ लॉन्च हुए थे। इससे बड़ी संख्या में निवेशकों ने शेयर मार्केट में एंट्री ली। दिंसबर तक भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या 139.3 मिलियन यानी 13.93 करोड़ पहुंच गयी थी। 

दिसंबर में करीब 40 लाख नये इन्वेस्टर अकाउंट्स सीडीएसएल में खोले गये। वहीं, करीब 5 लाख अकाउंट एनएसडीएल में खोले गये। इससे पहले नवंबर में कुल 28 लाख अकाउंट खोले गये थे। वहीं, अक्टूबर में 26 लाख अकाउंट्स खोले गये थे।  

FPI ने किया जमकर निवेश

दिसंबर महीने में अकेले ब्रॉडर मार्केट में 7 फीसदी से अधिक का उछाल दर्ज हुआ है। निफ्टी दिसंबर में 7 फीसदी बढ़ा था। जबकि निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमश: 6.5 फीसदी और 5.19 फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी थी। 

बीते महीने विदेशों से भी जमकर निवेश आया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने दिसंबर महीने में भारतीय शेयर बाजार में करीब 58,498 करोड़ रुपये निवेश किये।

कोविड के बाद खूब खुले खाते

हालांकि, अभी भी जनसंख्या की तुलना में निवेशकों के प्रतिशत के मामले में भारत काफी पीछे है। इस मामले में अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है। कोविड के बाद से भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है। 

मार्च 2020 में निफ्टी 7,511 अंक रह गया था। इसके बाद से यह बढ़ते-बढ़ते  21,700 तक पहुंच गया है। एक अप्रैल 2022 के बाद से अब तक भारत में करीब 9.84 करोड़ डीमैट खाते खोले गये हैं।

Published / 2023-12-23 23:50:27
खाद्य तेल के बाद मसूर दाल पर भी जारी रहेगी कस्टम ड्यूटी में छूट

  • खाद्य तेल के बाद दाल पर आयी अच्छी खबर, केंद्र सरकार ने लिया यह फैसला

एबीएन बिजनेस डेस्क। गरीबों की थाली भरी रहे, इसके लिए केंद्र सरकार ने दो बड़े फैसले लिये। पहले तो खाद्य तेलों के आयात पर कस्टम ड्यूटी में पांच फीसदी छूट के फैसले को एक साल के लिए और बढ़ा दिया। इसके बाद मसूर दाल के आयात पर भी कस्टम ड्यूटी को शून्य रखने के फैसले को एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया।

सरकार की कोशिश है कि लोगों की आवश्यक आवश्यकता की चीजें उचित कीमत पर मिलती रहे, भले ही उसके खजाने में कुछ कम पैसे आये। घरेलू बाजार में मसूर दाल की सप्लाई उचित कीमत पर बनी रहे, इसके लिए सरकार ने इस पर अभी आयात की शर्तों में राहत दी हुई है। 

सरकार ने मसूर दाल पर प्रभावी आयात शुल्क को शून्य किये हुए है। यह फैसला मार्च 2024 तक के लिए प्रभावी है। कल इस फैसले को लागू होने की अवधि को एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया। मतलब कि अब मार्च 2025 तक यह कमोडिटी जीरो कस्टम ड्यूटी पर इंपोर्ट होगा।

  • दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं हैं हम

यूं तो पिछले कुछ वर्षों में हमने दालों का उत्पादन बढ़ाया है। साल 2022-23 में हमने 278.10 लाख टन दलहन पैदा किया था, जो कि अब तक का सर्वाधिक है लेकिन हमारी खपत इससे भी ज्यादा की है। दुनिया भर में दाल उत्पादन में हमारी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी की है जबिक खपत में हिस्सेदारी 28 फीसदी की। 

इसी तीन फीसदी के गैप को भरने के लिए हमें हर साल करीब 25 से 27 लाख टन दाल का आयात करना होता है। हमारे कुल दाल के आयात में से 50 फीसदी हिस्सेदारी म्यांमार और कनाडा की है। हमारा अधिकतर मसूर दाल तो कनाडा से ही आता रहा है, साल में करीब पांच लाख टन। इसके अलावा अरहर, चना, उड़द और मूंग की दाल का भी आयात कनाडा से होता है।

  • खाद्य तेलों में क्या हुआ फैसला

केंद्र सरकार ने कल ही खाना पकाने के तेल की कीमतों पर अंकुश रखने के लिए खाद्य तेल के आयात पर लागू सीमा शुल्क में कटौती को एक साल के लिए बढ़ा दिया था। दरअसल, घरेलू बाजार में एडिबल ऑयल की बढ़ती कीमत को थामने के लिए केंद्र सरकार ने इसी साल जून में क्रूड पाम ऑयल, क्रूड सनफ्लावट ऑयल और क्रूड सोयाबीन तेल पर कस्टम ड्यूटी में पांच फीसदी की कटौती की थी। 

उस समय इन खाद्य तेलों पर 15.5 फीसदी की कस्टम ड्यूटी लगती थी। इसे घटा कर 12.5 फीसदी कर दिया गया था। यह फैसला मार्च 2024 तक के लिए लागू था। अब सरकार ने छूट की अवधि को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। मतलब कि 12.5 फीसदी का रेट मार्च 2025 तक लागू रहेगा।

  • खाद्य तेलों के लिए कुछ ज्यादा ही आयात पर निर्भरता

दाल तो हमे बाहर से काफी कम मंगाना पड़ता है लेकिन खाद्य तेलों के मामले में हम आयात पर कुछ ज्यादा ही निर्भर हैं। हम एडिबल ऑयल की अपनी 60 प्रतिशत आवश्यकता आयात से पूरी करते हैं। खाद्य तेलों के आयात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पाम ऑयल की ही है। हम साल भर में जितना खाद्य तेल आयात करते हैं, उनमें से करीब 60 फीसदी तो पाम ऑयल ही होता है। इसलिए यदि इस पर कस्टम ड्यूटी ज्यादा रहती है तो घरेलू बाजार में आयातित खाद्य तेल महंगे हो जाते हैं।

Published / 2023-12-22 22:01:04
टाटा मोटर्स में तीन दिन नहीं होगा कामकाज

अब सीधे 25 को खुलेगी कंपनी 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। टाटा मोटर्स में शुक्रवार 22 दिसंबर से तीन दिन कामकाज नहीं होगा। कंपनी प्रबंधन ने 22 व 23 दिसंबर को दो दिन का ब्लॉक क्लोजर लिया है। 24 दिसंबर रविवार को कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश है। 

ऐसे में कंपनी तीन दिन बाद 25 दिसंबर को खुलेगी। दिसंबर माह में दूसरी बार प्रबंधन ने 31 जुलाई 2017 के समझौता के तहत 22 और 23 दिसंबर को जमशेदपुर प्लांट में ब्लॉक क्लोजर का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्लांट हेड के आदेश से गुरुवार को सर्कुलर जारी किया गया।

Published / 2023-12-21 21:06:41
गुड न्यूज : शीर्ष 10 स्टील कंपनियों में सेल

दुनिया के टॉप 10 स्टील कंपनियों की सूची में शामिल होगा सेल

एबीएन बिजनेस डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र के देश के प्रतिष्ठित उपक्रम स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) को दुनिया के टॉप 10 स्टील कंपनियों की सूची में शामिल कराने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे। दरअसल, वर्तमान में सेल स्टील उत्पादक कंपनियों की विश्व स्तरीय सूची में 21वें स्थान पर है।

सेल के अध्यक्ष अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्टील की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सेल न केवल अपने उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनायेगा बल्कि उत्पादन को बढ़ाने के लिए आधुनिक तरीकों को अपनायेगा और इस दिशा में नये-नये अन्वेषण पर भी जोर देगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सेल के सभी प्लांटों को विशेष प्रयास करने के लिए निर्देश दिये गये हैं। 

श्री प्रकाश ने कहा कि सेल की वर्तमान उत्पादन क्षमता 20 मिलियन टन प्रतिवर्ष की है जिसे हम वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 35 मिलियन टन करना चाहते हैं। इस दिशा में कंपनी ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने बताया कि उत्पादन को विशेष रूप से बढ़ाने के लिए अध्ययन टीम गठित की गयी है, जो इसके लिए योजना तैयार कर रही है। 

अध्यक्ष ने बताया कि सेल स्टेटमेंट अगले साल जनवरी में प्रस्तुत किया जायेगा। इस विजन स्टेटमेंट में स्टील के क्षेत्र में नित नये हो रहे अभिनव प्रयोगों, अनुसंधानों, अन्वेषण और आवश्यकता के अनुरूप स्टील के उत्पादन पर जोर दिया जायेगा।

Published / 2023-12-16 20:32:56
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आयकर के पेंच

अजय दीप वाधवा

एबीएन बिजनेस डेस्क। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आयकर के मामले में अभी इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल, दिल्ली ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह निर्णय आय कर के कई निर्णय को प्रभावित कर सकता है। इस निर्णय को जानने के पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आय कर के संबंधित नियम को समझ लें। 

जब भी हम अपने मकान या जमीन आदि को बेचते हैं, तो इस पर कैपिटल गेन की गणना की जाती है। अगर यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होना है तो उस पर हमें रियायती दर से आय कर देना  होता है। जिस वित्तीय वर्ष में हमें यह लाभ होता है उस वित्तीय वर्ष के एक वर्ष पूर्व या उसके दो वर्षों के बाद तक अगर हम उस आय से कोई मकान या फ्लैट खरीदते हैं तो हमें उस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर आय कर नहीं देना होता है। 

अगर हम मकान खरीदने के स्थान पर उस आय से अगले तीन वर्षों तक कोई मकान का निर्माण करते हैं, तब भी उस आय पर हमें आय कर नहीं देना होता है। पर उपरोक्त लाभ को लेने की एक शर्त यह भी है कि हमें जिस वर्ष लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ है और अगर उस वित्तीय वर्ष के अंत तक अगर हम मकान खरीद या बना नहीं पाते हैं तो हमें उस आय की राशि को किसी बैंक की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के विशेष खाते में जमा कर देना पड़ता है। 

अब हम इस केस को देख लेते है जिसमें ट्रिब्यूनल का निर्णय आया है। इसमें कर दाता को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ, पर उस ने वित्तीय वर्ष के अंत तक इस राशि को विशेष बैंक अकाउंट में जमा नहीं किया। पर उस कर दाता ने इस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की राशि से अगले दो वर्ष के अंदर नया मकान खरीद लिया। 

आयकर विभाग ने पर इस कर दाता को विक्रय के लॉन्ग टर्म लाभ पर छूट देने से मना कर दिया क्योंकि कर दाता ने लाभ राशि को वित्तीय वर्ष के अन्त तक विशेष खाते में जमा नहीं किया था। 

कर दाता ने अपनी भूल को स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल में अपील दायर की। ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कर दाता को राहत देते हुए निर्णय दिया कि चूंकि कर दाता ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की राशि से दो वर्षों के अंदर नया घर खरीद लिया था, तो उसे इस लाभ पर आय कर नहीं लगने का लाभ मिलना चाहिए।

भले ही उसने इस राशि को संबंधित वित्तीय वर्ष के अंत तक किसी बैंक के विशेष खाते में जमा नहीं किया था। ट्रिब्यूनल का यह निर्णय आने वाले समय में कई आय कर दाताओं को राहत दे सकता है और साथ ही ऐसे निवेश के निर्णय को भी प्रभावित कर सकता है। (लेखक झारखंड की राजधानी रांची के प्रख्यात कर विशेषज्ञ हैं।)

Published / 2023-12-08 21:09:21
एमपीसी ने रेपो रेट 6.5% पर बरकरार

आरबीआई गवर्नर ने की मौद्रिक नीति की घोषणा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आरबीआई एमपीसी ने एक बार फिर रेपो रेटो को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। बैंकों के बैलेंस शीट में मजबूती दिखी है। 

केंद्रीय बैंक की एमपीसी ने रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है।आरबीआई गवर्नर के अनुसार इसके फलस्वरूप स्थायी जमा सुविधा दर 6.25% और सीमांत स्थायी सुविधा दर तथा बैंक दर 6.75% पर बनी हुई है। आरबीआई गवर्नर ने ऋ24 में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। 

एमपीसी की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी जारी है। लागत खर्च में कमी से विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती आई है। 

सरकारी खर्चे से निवेश के रफ्तार में आई तेजी है। एग्रो क्रेडिट में ग्रोथ से रिकवरी बेहतर होने का अनुमान है। एमपीसी के छह में पांच स्थर अकोमोडेटिव रुख वापस लेने के पक्ष में। सभी सदस्यों ने रेपो रेट को स्थिर रखने पर सहमति जतायी।

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