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Published / 2025-05-27 21:54:15
निर्यातित उत्पादों पर टैक्स छूट 1 जून से लागू

भारत सरकार का बड़ा फैसला 

एबीएन बिजनेस डेस्क। निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जून 2025 से देश के निर्यातकों को टैक्स में बड़ी राहत मिलने जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इस फैसले से विशेष आर्थिक क्षेत्रों, निर्यात-उन्मुख इकाइयों और एए धारकों को सीधा लाभ मिलेगा। 

निर्यातकों के लिए खुशखबरी, छूट फिर से लागू 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा घोषित इस निर्णय के तहत, निर्यात उत्पादों पर मिलने वाली कर छूट की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया गया है। इससे पहले यह लाभ 5 फरवरी 2025 तक सीमित था, लेकिन अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर एक्सपोर्टर्स को राहत दी गई है। इस नीति के लागू होने से हर स्तर के निर्यातकों को बराबरी का मौका मिलेगा। 

योजना फिर से बनी गेमचेंजर 

सरकार की योजना, जो जनवरी 2021 में शुरू की गई थी, इस फैसले का आधार है। यह योजना खासतौर पर कोविड-19 के बाद व्यापारिक घाटों की भरपाई और एक्सपोर्ट को रफ्तार देने के लिए बनायी गयी थी। फडऊळएढ योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है। 

2025-26 के लिए 18,233 करोड़ का बजट आवंटन 

सरकार ने आने वाले वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 18,233 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। यह सहायता 10,780 घरेलू टैरिफ लाइनें और 10,795 स्पेशल कैटेगरी एचएस लाइनें कवर करेगी। इससे यह तय किया जा सकेगा कि विविध प्रकार के निर्यातकों को योजना का लाभ मिले। 

भारत के लिए निर्यात का सुनहरा मौका 

एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन नए सिरे से बन रही है, और भारत के पास इस समय निर्यात बढ़ाने का जबरदस्त अवसर है। भारत की मिड-टेक, लेबर-इंटेंसिव और कंज्यूमर फोकस्ड इंडस्ट्रीज इस प्रोत्साहन से सीधा लाभ उठा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब केवल घरेलू मांग पर आधारित नहीं, बल्कि एक तेजी से उभरती हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

Published / 2025-05-24 22:01:08
आरबीआई केंद्र सरकार को देगा 2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड

आरबीआई रचने जा रहा इतिहास, मोदी सरकार को देगा 2.69 लाख करोड़ का सबसे बड़ा डिविडेंड 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड देने की घोषणा की है। यह अब तक का सबसे बड़ा सरप्लस ट्रांसफर है जो सरकार को किसी भी साल मिला है। इससे पहले 2023-24 में फइक ने 2.1 लाख करोड़ और 2022-23 में 87,420 करोड़ सरकार को ट्रांसफर किये थे। 

इतना पैसा क्यों मिला सरकार को 

आरबीआई को विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से इस बार अच्छी कमाई हुई है। इसके अलावा वीआरआर आपरेशन्स और फॉरेन एक्सचेंज सेल से भी बैंक को बड़ा मुनाफा हुआ है। यही नहीं, बीते वित्त वर्ष में ब्याज दरों में जो उतार-चढ़ाव रहा, उसने भी रिजर्व बैंक की कमाई में इजाफा किया। 

सरकार को क्या फायदा 

सरकार ने इस साल आरबीआई, पब्लिक सेक्टर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 2.56 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन आरबीआई से ही 2.69 लाख करोड़ मिल जाना सरकार के लिए बोनस जैसा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सरकार को अतिरिक्त 50,000 से 60,000 करोड़ की मदद मिल सकती है। हालांकि इससे फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटे में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आयेगा। अनुमान है कि घाटा 4.4 फीसदी से थोड़ा घटकर 4.3 फीसदी तक जा सकता है। 

क्या होता है सीआरबी और क्यों बढ़ाया गया 

आरबीआई की बैलेंस शीट को सुरक्षित रखने के लिए एक कॉन्टिजेंट रिस्क बफर (सीआरबी) बनाया जाता है। इसे एक तरह का सुरक्षा कवच समझिए जो किसी भी आर्थिक संकट से निपटने में मदद करता है। पहले यह 6.5 फीसदी पर था, लेकिन अब इसे 7.5 फीसदी कर दिया गया है। यानी आरबीआई ने अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करने के लिए ज्यादा पूंजी सुरक्षित रखी है। यह कदम भविष्य के संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

आगे क्या होगा 

अगर आरबीआई के पास 7.5 फीसदी से ज्यादा एक्विटी होगी, तो अतिरिक्त पैसा सरकार को ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन अगर यह तय सीमा से नीचे होगा, तो सरकार को कोई डिविडेंड नहीं मिलेगा जब तक वह न्यूनतम पूंजी स्तर दोबारा ना हासिल कर ले।

Published / 2025-05-24 19:35:09
अमेरिकी उथल-पुथल से बढ़ी सोने की महंगाई

अचानक महंगा हुआ सोना, जानिये अमेरिका से क्या है इसका कनेक्शन 

एबीएन बिजनेस डेस्क। लगातार गिरावट के बाद एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है। इसकी प्रमुख वजह है अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता और डॉलर में कमजोरी, जिसके चलते वैश्विक निवेशक एक बार फिर सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं। हाल के हफ्तों में इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। 

अमेरिका की वजह से क्यों चढ़ रहे सोने के दाम 

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दामों में उछाल का सीधा संबंध अमेरिका की आर्थिक स्थिति और डॉलर की मजबूती या कमजोरी से है। जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा मंडराता है जैसे जीडीपी ग्रोथ में गिरावट, बेरोजगारी में इजाफा या ब्याज दरों में अनिश्चितता, तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे माध्यमों से पैसा निकालकर सोने-चांदी में निवेश करना पसंद करते हैं। 

इसके साथ ही चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, इसलिए जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और कीमतें चढ़ जाती हैं। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स (डी) में गिरावट देखने को मिली है, जिससे सोने की चमक और तेज हो गयी है। 

एक साल में सोना 30 फीसदी तक चढ़ा 

अगर निवेश के नजरिये से देखा जाये, तो सोने ने पिछले एक साल में लगभग 30 फीसदी रिटर्न दिया है। लंबे समय की बात करें तो साल 2001 से अब तक सोने ने औसतन 15 फीसदी सीएजीआर रिटर्न दिया है। 1995 से अब तक सोना महंगाई से भी हर साल 2-4 फीसदी ज्यादा रिटर्न देता आ रहा है। चांदी की बात करें तो इसने भी निवेशकों को खूब फायदा पहुंचाया है। अक्षय तृतीया 2024 से 2025 के बीच चांदी के दाम 15.62 फीसदी तक बढ़े हैं। खास तौर पर 2021 में चांदी ने 69.04 फीसदी का जबरदस्त उछाल दर्ज किया था। 2020 से अब तक चांदी की औसतन 20 फीसदी सीएजीआर ग्रोथ रही है।

क्या है सोने का रेट

विभिन्न आंकड़ों के मुताबिक, 24 मई की सुबह सोना 96,400 प्रति 10 ग्राम और चांदी 97,935 प्रति किलो रही। वहीं 24 कैरेट सोना 96,850 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 88,779 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं चांदी (999 फाइन) आज 98,230 प्रति किलो रही।

Published / 2025-05-22 21:53:37
अब लीजिये... सुधा दूध भी हुआ दो रुपये महंगा

सुधा दूध भी हुआ महंगा, प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड मिल्क फेडरेशन के बाद अब कॉम्फेड ने अपने ब्रांड सुधा दूध की कीमत में प्रति लीटर 02 रुपये की बढ़ोतरी की है। वहीं 12 मई को झारखंड मिल्क फेडरेशन ने मेधा दूध की कीमत प्रति लीटर 2 रुपये बढ़ा दी थी। 

सुधा ब्रांड की दूध की कीमतों में आज से हुई बढ़ोतरी पर कॉम्फेड बिहार के रांची डेयरी के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि बिहार मिल्क फेडरेशन ने सबसे बाद में दूध की कीमतों में मामूली वृद्धि की है, ताकि पशुपालकों को हम दूध की उचित कीमत दे सकें। 

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों और लोअर इंकम ग्रुप वाले लोगों का ध्यान रखते हुए 200 मिली डबल टोंड मिल्क की कीमत नहीं बढ़ायी गयी है। महंगाई के इस दौर में अमूल, मेधा के बाद अब सुधा दूध की कीमत में हुई बढ़ोत्तरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। 

आज भी राज्य में खपत के लिहाज से प्रति दिन सबसे ज्यादा बिक्री सुधा दूध की ही होती है। राज्य में प्रतिदिन 2.30 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है तो सुधा दूध की बिक्री 2.73 लाख लीटर प्रतिदिन है। राकेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद सुधा दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, इसलिए अब हमें दूध की कीमत बढ़ानी पड़ी है। 

सुधा ब्रांड की किस दूध की कितनी हो गयी कीमत 

सुधा दूध में प्रति लीटर दो रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब आधा लीटर सुधा हेल्दी के लिए उपभोक्ता को 27 रुपये और एक लीटर के लिए 53 रुपये देने होंगे। इसी तरह सुधा शक्ति का आधा लीटर वाले पैकेट के लिए 30 रुपये और एक लीटर वाले पैकेट की कीमत 60 रुपये हो गयी है। 

वहीं सुधा गोल्ड का आधा लीटर दूध 33 रुपये और एक लीटर 65 रुपये का हो गया है। इसी तरह छह लीटर वाले सुधा हेल्दी की कीमत बढ़कर अब 312 रुपये हो गयी है। छह लीटर वाला सुधा शक्ति के लिए अब 348 रुपये लगेंगे। वहीं आधा लीटर वाले सुधा स्मार्ट के लिए 25 रुपये देने होंगे।

Published / 2025-05-21 22:14:07
शेयर मार्केट की शानदार वापसी, झूम उठे निवेशक

शेयर बाजार का शानदार कमबैक, खुशी से झूमे निवेशक, हुआ प्रॉफिट 

एबीएन बिजनेस डेस्क। बुधवार (21 मई) को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार कमबैक किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी ने करीब 250 अंकों की तेजी दिखायी। इस तेजी ने निवेशकों के चेहरे खिला दिये। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब मंगलवार को दो दिन की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली से गिरावट दर्ज हुई थी। 

तेजी से झूमे निवेशक, 4 लाख करोड़ का फायदा 

सुबह 10:43 बजे सेंसेक्स 814 अंकों की मजबूती के साथ 82,000 के करीब कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 240 अंकों की तेजी के साथ 24,924 के स्तर पर पहुंच गया। इस मजबूती की वजह से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया। 

तेजी के पीछे क्या हैं वजहें 

  1. शॉर्ट कवरिंग से बढ़त : विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में आयी गिरावट के बाद निवेशकों ने शॉर्ट पोजिशन कवर की, जिससे तेजी को बल मिला। तीन दिनों में सेंसेक्स करीब 2% टूटा था, जिससे लो-लेवल पर हैवीवेट स्टॉक्स में खरीदारी देखी गयी। 
  2. डॉलर में कमजोरी : अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा। डॉलर इंडेक्स आधा प्रतिशत गिरकर 99.30 पर पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों में कैपिटल फ्लो बढ़ने की उम्मीद जगी है। 
  3. एफआईआई की भारी बिकवाली के बाद रुकावट : हालांकि मंगलवार को विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने 10,016 करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली की थी, लेकिन बुधवार को बिकवाली में ब्रेक लगने से बाजार को राहत मिली।

Published / 2025-05-21 21:01:28
बिना गारंटी के आपको भी मिल सकता है 20 लाख तक का लोन

  • आप भी शुरू कर सकते हैं अपना बिजनेस, जानें क्या है पूरा प्रोसेस 
  • इस योजना ने लाखों लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया है। आप अगर अपना खुद का बिजनेस करना चाहते हैं तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है। 

ऋषभ राज 

एबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप छोटा-मोटा ही सही लेकिन अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपके पास शानदार मौका है। मान लीजिए कि आपके पास कोई तगड़ा बिजनेस आइडिया है, लेकिन पैसे की कमी आड़े आ रही है, तो इसके सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। 

इस योजना के तहत सरकार 10 लाख रुपये तक का लोन दे रही है, वो भी बिना किसी गारंटी के। हाल ही में इसकी लिमिट को बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक कर दिया गया है, जिससे और ज्यादा लोग अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं। आइये, इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं कि ये क्या है, कैसे काम करती है, और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं। 

क्या है मुद्रा योजना 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को 8 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। इसका मकसद उन छोटे कारोबारियों को आर्थिक मदद देना है, जो नॉन-कॉरपोरेट और नॉन-फार्म सेक्टर में काम करते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप कोई छोटा-मोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, जैसे कि किराने की दुकान, सिलाई का काम, या कोई छोटा स्टार्टअप, तो ये योजना आपके लिए है। इस योजना के तहत आपको बिना किसी सिक्योरिटी या गारंटी के लोन मिल सकता है। 

इस योजना को माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी चलाती है। मुद्रा का मतलब है छोटे कारोबारों को बढ़ावा देना और उनकी जरूरतों को पूरा करना। ये लोन बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के जरिए दिये जाते हैं। 

मुद्रा योजना के तहत लोन को चार कैटेगरी में बांटा गया है, ताकि हर तरह के कारोबारी को उसकी जरूरत के हिसाब से मदद मिल सके। ये कैटेगरी हैं: 

  1. शिशु: इसमें 50,000 रुपये तक का लोन मिलता है। ये उन लोगों के लिए है जो बिल्कुल शुरूआती स्तर पर बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। 
  2. किशोर: अगर आपको 50,000 से ज्यादा लेकिन 5 लाख रुपये तक की जरूरत है, तो ये कैटेगरी आपके लिए है। 
  3. तरुण: इसमें 5 लाख से 10 लाख रुपये तक का लोन मिलता है। ये उन कारोबारियों के लिए है जिनका बिजनेस थोड़ा बड़ा है। 
  4. तरुण प्लस: हाल ही में सरकार ने इस नई कैटेगरी को जोड़ा है, जिसमें 10 लाख से 20 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। लेकिन ये लोन सिर्फ उन लोगों को मिलेगा, जिन्होंने पहले तरुण कैटेगरी में लोन लिया और उसे समय पर चुका दिया है। 
  5. नई तरुण प्लस कैटेगरी को जुलाई 2024 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषित किया था। इसका मकसद उन उद्यमियों को और सपोर्ट करना है जो अपने बिजनेस को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं। 

कौन ले सकता है लोन? 

मुद्रा योजना का फायदा कोई भी भारतीय नागरिक उठा सकता है, जो छोटा-मोटा बिजनेस शुरू करना चाहता है या अपने मौजूदा कारोबार को बढ़ाना चाहता है। इसके लिए आपको बस ये साबित करना होगा कि आपका बिजनेस गैर-कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। जैसे कि अगर आप टेलरिंग, ब्यूटी पार्लर, छोटी दुकान, या कोई सर्विस-बेस्ड बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो आप इस योजना के लिए योग्य हैं। 

इस योजना ने खासकर महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को बहुत फायदा पहुंचाया है। 70% से ज्यादा लोन लेने वाली महिलाएं हैं, और 50% से ज्यादा लोन एसटी, एससी, और ओबीसी समुदाय के लोगों को मिले हैं। इससे साफ है कि ये योजना न सिर्फ बिजनेस को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सामाजिक समावेश को भी मजबूत कर रही है। 

कैसे मिलता है लोन 

इसके तहत लोन पाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। सबसे पहले आपको अपने नजदीकी बैंक या माइक्रोफाइनेंस संस्थान में जाना होगा। आप चाहें तो मुद्रा की आफिशियल वेबसाइट  www.mudra.org.in पर भी जाकर पूरी जानकारी ले सकते हैं। वहां आपको हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग आप्शन मिलेंगे। 

सबसे पहले आपको एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें आप अपने बिजनेस का आइडिया और उसकी जरूरतें बताएंगे। इसके साथ कुछ बेसिक डॉक्यूमेंट्स चाहिए होंगे, जैसे: 

  • आधार कार्ड, पैन कार्ड, या कोई दूसरा पहचान पत्र 
  • बिजनेस का प्रूफ (अगर पहले से बिजनेस चल रहा है) 

बैंक अकाउंट डिटेल्स 

हालांकि, मुद्रा लोन की ब्याज दर फिक्स नहीं है। ये आपके बिजनेस के प्रकार और उसमें जोखिम के आधार पर बदलती रहती है। सामान्य तौर पर ब्याज दर 9-12% प्रति साल होती है। अच्छी बात ये है कि ये लोन बिना किसी कोलैटरल (गारंटी) के मिलता है, यानी आपको अपनी प्रॉपर्टी या कोई और चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं है। 

लोन चुकाने का समय भी आपके बिजनेस और लोन की कैटेगरी पर निर्भर करता है। आमतौर पर शिशु लोन को चुकाने के लिए 3-5 साल का समय मिलता है, जबकि तरुण और तरुण प्लस के लिए ये समय ज्यादा हो सकता है। 

अब तक कितना बांटा जा चुका है लोन 

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, दस साल पहले शुरू हुई इस योजना ने अब तक 52 करोड़ से ज्यादा लोन बांटे जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य 32 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ महीने पहले बताया था कि इसके तहत 33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कोलैटरल-फ्री लोन दिये जा चुके हैं। 

ये लोन न सिर्फ बिजनेस शुरू करने में मदद करते हैं, बल्कि लोगों को नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित करते हैं। 
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी 2025 तक, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत तमिलनाडु ने सबसे ज्यादा 3,23,647.76 करोड़ रुपये का लोन वितरण किया है।

उत्तर प्रदेश 3,14,360.86 करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है और कर्नाटक 3,02,146.41 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है। पश्चिम बंगाल और बिहार में भी क्रमश: 2,82,322.94 करोड़ रुपये और 2,81,943.31 करोड़ रुपये का बड़ा वितरण हुआ है। महाराष्ट्र 2,74,402.02 करोड़ रुपये के साथ छठे स्थान पर है। यह दशार्ता है कि पिछले दस सालों में इस योजना का प्रमुख राज्यों में व्यापक असर और पहुंच रही है। 

लेकिन इसे लेने के लिए ठगी से बचें 

इस योजना ने लाखों लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका दिया है। आप अगर अपना खुद का बिजनेस करना चाहते हैं तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है। लेकिन मुद्रा योजना के नाम पर कुछ लोग ठगी भी करते हैं। न्यूज वेबसाइट मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई बार लोग फर्जी वादे करके प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे वसूलते हैं। इसलिए हमेशा आफिशियल वेबसाइट या अपने बैंक से ही जानकारी लें। अगर कोई आपसे प्रोसेसिंग फीस के लिए ज्यादा पैसे मांगता है, तो सतर्क हो जायें।

Published / 2025-05-12 20:37:11
सीजफायर ने शेयर बाजार को दी ताकत

शेयर बाजार की दहाड़, सेंसेक्स 2975 अंक उछल कर 82,429 पर बंद 

एबीएन बिजनेस डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 3012 अंकों से ज्यादा उछलकर 82,466 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,942 के उच्चतम स्तर पर दिखा। 

इस जोरदार तेजी से निवेशकों को करीब 15 लाख करोड़ का लाभ हुआ- जो पिछले चार वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी कमाई मानी जा रही है। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2975 अंकों की बढ़त के साथ 82,429 के स्तर पर और निफ्टी 916 अंक उछल कर 24,924 के लेवल पर बंद हुआ। 

तेजी की प्रमुख वजहें 

  • भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा ने भू-राजनीतिक तनाव घटाया। 
  • अमेरिका-चीन ट्रेड डील से वैश्विक अनिश्चितता में कमी आयी। 
  • भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार ने निवेशकों को भरोसा दिया। 
  • कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता से आयात घाटा नियंत्रित रहने की उम्मीद। 
  • बड़ी भारतीय कंपनियों के शेयरों में उछाल ने बाजार को सपोर्ट किया। 

मिड-स्मॉल कैप इंडेक्स में करीब 4% की तेज 

  • एनएसई के इंटरनेशनल एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला गिफ्ट निफ्टी 3.10% ऊपर 24,800 पर है। 
  • बीएसई का स्मॉल-कैप इंडेक्स 1,680 अंक (3.60%) ऊपर 48,420 पर कारोबार कर रहा है। 
  • मिड-कैप इंडेक्स 1,170 अंक (2.80%) ऊपर है, ये 43,280 के स्तर पर पहुंच गया है।

Published / 2025-05-12 20:35:57
झारखंड : दो रुपये महंगा हुआ मेधा दूध

महंगा हुआ दूध, झारखंड मिल्क फेडरेशन ने 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये दाम 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड मिल्क फेडरेशन ने आज 12 मई से अपने मेधा ब्रांड के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। महंगाई के इस दौर में मेधा दूध के दाम में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। 

झारखंड मिल्क फेडरेशन के एमडी जयदेव विश्वास ने मेधा दूध के दाम में बढ़ोतरी को सामान्य बढ़ोतरी बताते हुए कहा कि लंबे समय से मेधा दूध के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, इसलिए झारखंड मिल्क फेडरेशन को अपने लिक्विड आइटम (दूध) के दाम में बढ़ोतरी करनी पड़ी है। 

झारखंड मिल्क फेडरेशन से मिली जानकारी के मुताबिक मेधा ब्रांड के अलग-अलग दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद एक लीटर मेधा डबल टोंड दूध 46 में और आधा लीटर का पैकेट अब 23 रुपये में मिलेगा। वहीं, एक लीटर मेधा टोंड दूध (ताजा) के लिए उपभोक्ता को 53 रुपये और आधा लीटर के लिए 27 रुपये चुकाने होंगे। 

एक लीटर मेधा स्टैंडर्ड (शक्ति) की कीमत बढ़कर 59 रुपये और आधा लीटर पैकेट की कीमत 30 रुपये हो गई है। इसी तरह, दूध की कीमत में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद एक लीटर मेधा स्टैंडर्ड दूध (शक्ति स्पेशल) की कीमत 60 रुपये और आधा लीटर की कीमत 31 रुपये हो गयी है। 

आधा लीटर के पैक में आने वाला मेधा गाय का दूध, इसकी कीमत अब 28 रुपये हो गयी है। 6 लीटर के पैक में आने वाले मेधा स्टैंडर्ड दूध (शक्ति- खोवा दूध) की कीमत अब 348 रुपये और मेधा टोंड दूध (ताजा- छेना दूध) के छह लीटर के पैकेट की कीमत अब 312 रुपये हो गयी है। 

झारखंड मिल्क फेडरेशन के प्रबंध निदेशक जयदेव विश्वास ने बताया कि वर्तमान में झारखंड में प्रतिदिन दो लाख 50 हजार लीटर दूध का संग्रह होता है, जबकि प्रतिदिन दो लाख 30 हजार लीटर दूध की बिक्री मेधा के विभिन्न मिल्क पार्लरों के माध्यम से होती है। उन्होंने बताया कि मेधा के अन्य उत्पादों जैसे पनीर, गुलाब-जामुन, घी और रबड़ी के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गयी है।

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