एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर (Accenture) के रेवेन्यू अनुमान घटाने और उसका शेयर 19% टूटने के बाद घरेलू आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला।
इसके चलते Nifty IT इंडेक्स करीब 6% तक गिर गया। वहीं, दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) का शेयर 8.3% और टीसीएस (TCS) 6.5% से ज्यादा टूट गया। एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, विप्रो और अन्य आईटी स्टॉक्स भी 4% से 7% तक टूट गए। इससे निवेशकों की वेल्थ में 1.35 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Accenture की कमजोर टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग में सुस्ती की आशंका को बढ़ा दिया है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई उत्तरी अमेरिका से आती है, इसलिए इस सेक्टर पर सीधा असर पड़ा है।
यह गिरावट सिर्फ शेयर बाजार के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी और टेक सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के बीच नौकरी सुरक्षा, वेतन वृद्धि और बोनस को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। भारत के आईटी सेक्टर में 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सेंसेक्स और निफ्टी ने वीरवार को कमजोर शुरुआत की, हालांकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर सकारात्मक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते वे जल्द वापसी कर बढ़त में कारोबार करने लगे। बीएसई सेंसेक्स शुरूआती कारोबार में 111.23 अंक टूटकर 77,044.39 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 26.85 अंक फिसलकर 24,058.85 अंक पर पहुंच गया।
हालांकि बाद में दोनों सूचकांकों ने शुरूआती नुकसान की भरपाई कर ली और बढ़त में कारोबार करने लगे। बीएसई सेंसेक्स 108.95 अंक चढ़कर 77,264.57 अंक पर जबकि निफ्टी 44.25 अंक की बढ़त के साथ 24,132.60 अंक पर कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं ट्रेंट, भारत लेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर बढ़त में रहे। सेंसेक्स पिछले चार कारोबारी सत्रों में 3,323.07 अंक यानी 4.50 प्रतिशत जबकि निफ्टी 924.1 अंक यानी 3.98 प्रतिशत चढ़ा है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और जापान का निक्की 225 बढ़त में रहे जबकि चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78.23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 101.59 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। सेंसेक्स बुधवार को 347.14 अंक और निफ्टी 96.55 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 1300 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24000 के पार पहुंच गया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 736.38 अंक की तेजी के साथ 76,264.33 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 231 अंक की बढ़त रही, ये 23,853.90 पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से देश में खुदरा महंगाई दर बढ़कर मई महीने में 3.93% पर पहुंच गयी है। महंगाई में तेजी के बावजूद यह लगातार 16वें महीने में आरबीआई की सीमा 4% से नीचे बनी रही। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। देश में महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ाया है। मई महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 फीसदी हो गयी है।
यह पिछले महीने अप्रैल की 3.48 फीसदी से अधिक है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि इसका कारण बनी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खाद्य महंगाई मई में 4.78 फीसदी रही। अप्रैल में यह 4.2 फीसदी थी। यह वृद्धि सीधे तौर पर रसोई के बजट को प्रभावित कर रही है।
शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका अधिक असर दिख रहा है। महंगाई का यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है।
सरकार ने रिजर्व बैंक को महंगाई को चार फीसदी पर रखने का लक्ष्य दिया है। इसमें दो फीसदी ऊपर या नीचे का मार्जिन भी शामिल है। यह लक्ष्य अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ती महंगाई से आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कीमती धातु के आभूषण, टमाटर और अदरक उन पांच वस्तुओं में शामिल हैं। किशमिश और मुनक्का भी अधिक महंगाई वाली वस्तुओं की सूची में हैं। इन वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के खर्च को बढ़ा रहा है। विशेष रूप से टमाटर और अदरक जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की कीमतों में वृद्धि चिंताजनक है। इससे दैनिक जीवन की लागत बढ़ गयी है।
दूसरी ओर, कुछ वस्तुओं की कीमतों में कम वृद्धि देखी गयी। आलू, मटर, मोटर कार और जीप की महंगाई कम रही। जीरा और मोटरसाइकिल तथा स्कूटर भी कम महंगाई वाली शीर्ष पांच वस्तुओं में शामिल थे। यह आंकड़ा अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त रूप से दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि कुछ क्षेत्रों में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ल्यू जे-चोल ने कहा कि कंपनी भारत सहित तीन उच्च संभावनाओं वाले ग्लोबल साउथ बाजारों से अपना कुल राजस्व साल 2030 तक दोगुना करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत वृहद आर्थिक वृद्धि, ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की पसंद तथा रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी प्रमुख श्रेणियों में घरेलू उपकरणों की अपेक्षाकृत कम पहुंच के कारण बड़े अवसर मौजूद हैं।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ ने कहा कि भारत, सऊदी अरब और ब्राजील कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि की रणनीति के केंद्र में हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इन तीनों बाजारों से संयुक्त राजस्व को दोगुना करना है और इसके लिए वह इन उच्च संभावनाओं वाले बाजारों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है।
जे-चोल ने कहा, 2025 में इन क्षेत्रों से हमारा संयुक्त राजस्व 6.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह कंपनी की वैश्विक वृद्धि से दोगुना से भी अधिक है।
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का 2025 में एकीकृत राजस्व 89.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे प्रमुख उभरते बाजारों में तेज वृद्धि केवल कारोबार का विस्तार नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में कंपनी की मजबूत उपस्थिति के पूरक के रूप में संतुलित और मजबूत क्षेत्रीय पोर्टफोलियो तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी की ग्लोबल साउथ रणनीति के तहत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये उत्पाद नेतृत्व को मजबूत करने तथा सह-विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
कंपनी की मध्यम से दीर्घावधि की रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की निवेशक संबंध (आईआर) संचार टीम के प्रमुख एयरोन किम ने कहा कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिसमें घरेलू उपकरण, वाहन तथा मीडिया एवं मनोरंजन समाधान शामिल हैं।
भारत में योजनाओं के बारे में किम ने कहा कि कंपनी यहां अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी करेगी और अतिरिक्त क्षमता का उपयोग निर्यात बढ़ाने के लिए किया जायेगा। वर्तमान में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी छह से सात प्रतिशत है और कंपनी एशिया तथा अफ्रीका के बाजारों को सेवाएं दे रही है।
कंपनी दोहरे बाजार और दोहरे खंड वाले निर्यात मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत विकसित देशों को प्रीमियम उत्पाद तथा उभरते बाजारों को भारत में डिजाइन किये गये एसेंशियल सीरीज उत्पाद भेजे जायेंगे।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से मांग कमजोर पड़ने के बीच राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को सोना 4,300 रुपये टूटकर 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी 10,000 रुपये फिसलकर 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गयी।
स्थानीय सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 4,300 रुपये यानी करीब तीन प्रतिशत गिरकर 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,60,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमत भी 10,000 रुपये यानी करीब चार प्रतिशत लुढ़ककर 2,45,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गयी। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी का बंद भाव 2,55,700 रुपये प्रति किलोग्राम रहा था।
विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका एवं ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आई। पीएल वेल्थ के प्रमुख (उत्पाद एवं पारिवारिक कार्यालय) राजकुमार सुब्रमण्यन ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में उछाल से महंगाई के लंबे समय तक ऊपर बने रहने और ब्याज दरें ऊंची बनी रहने की आशंका बढ़ी है, जिससे सोने-चांदी को लेकर आकर्षण में कमी आयी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 90.53 डॉलर यानी 2.13 प्रतिशत गिरकर 4,168.99 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 2.24 प्रतिशत टूटकर 63.87 डॉलर प्रति औंस पर रही। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक गौरव गर्ग ने कहा कि डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी से कीमती धातुओं की मांग पर दबाव पड़ा है, जिससे वैश्विक बाजारों में इनकी कीमतों में गिरावट आयी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया। दिनभर लाल निशान पर कारोबार करते सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 719.08 अंक लुढ़क कर 73,524.26 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में भी 243.70 अंकों की गिरावट आयी, ये 23,123 के लेवल पर बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गये।
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान द्वारा इजरायल पर दागी गयी मिसाइलों और बदले में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस युद्ध जैसी स्थिति से वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है, जिस कारण निवेशक भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं।
युद्ध की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.29% उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, महंगे तेल का सीधा मतलब है, भारत का बढ़ता चालू खाता घाटा, सरकारी कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ और देश में महंगाई का बढ़ना है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
दक्षिण कोरिया का बाजार 9 फीसदी से अधिक लुढ़क गया जिसके बाद 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। जापान के निक्केई में 5 फीसदी और हॉन्ग कॉन्ग के हेंग सेंग में और चीन के शंघाई कंपोजिट में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आयी।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रुपया शुक्रवार को 81 पैसे के उछाल के साथ 94.93 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी पूंजी प्रवाह को समर्थन देने और विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत करने के लिए कदम उठाने के बाद घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान 94.89 के उच्च स्तर तक पहुंचा और अंततः 94.93 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद स्तर से 81 पैसे की मजबूती है। रुपया बृहस्पतिवार को दो पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.74 पर बंद हुआ था।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने का निर्णय लिया है।
कोटक सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख (जिंस एवं मुद्रा) अनिंद्य बनर्जी ने कहा, रेपो दर को तटस्थ रुख के साथ 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत करने से आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि दर नीति का उपयोग महंगाई नियंत्रण के लिए होगा और रुपए की रक्षा पूंजी खाते के माध्यम से की जाएगी।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.22 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 अंक पर जबकि निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 अंक पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 4,447.06 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
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