एबीएन कैरियर डेस्क। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल पुंदाग, रांची के एलडीसी केसी प्रमाणिक को भावभीनी विदाई दी गई। विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य डॉ तापस घोष ने उन्हें स्मृति चिह्न, उपहार तथा अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।उन्होंने सम्पूर्ण समर्पण और कर्त्तव्य निष्ठा के साथ अपने लगभग तीस वर्षों के सेवा काल को पूर्ण करके अवकाश प्राप्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य तथा उनके सहकर्मी गण ने उनके साथ के अपने कार्य काल के अनुभव साझा किए। उन्होंने भी इस शानदार विदाई के लिए विद्यालय परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
प्राचार्य डॉ तापस घोष ने उनको उज्ज्वल भविष्य की शुभ कामनाएं देते हुए कहा कि जिस कर्तव्यनिष्ठा के साथ उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया, वह अनुकरणीय है।
उन्होंने ऑफिस स्टाफ के समक्ष उनकी कार्यकुशलता को उदाहरण के रूप में रखा।उनके योगदान से विद्यालय ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।विदाई समारोह में पूरे विद्यालय परिवार ने उपस्थित रह कर के.सी.प्रमाणिक के आरोग्य ,सुख- शांति ,संपदा की कामना की।
टीम एबीएन, रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला रूट्स टू रेनैसांस: झारखंड में जनजातीय विरासत, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता का समन्वय का दूसरा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन बीआईटी मेसरा के प्रबंधन विभाग ने मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के सहयोग से किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्रों ने भाग लेकर जनजातीय विरासत, तकनीक और नवाचार के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आसिफ इकराम, निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग, गवर्नमेंट आॅफ झारखंड ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया और इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि झारखंड की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों और नवाचारी मंचों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय विरासत से जुड़े शोध और जागरूकता को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और बीआईटी मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के बीच सहयोग को और बढ़ाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कई विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाएं आयोजित की गयीं। डिजाइनर सुमंगल नाग ने वस्त्र और जनजातीय विरासत विषय पर सत्र का संचालन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से पारंपरिक जनजातीय वस्त्रों के डिजाइन और पैटर्न को नये रूप में विकसित कर अभिनव सांस्कृतिक उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं।
एक अन्य रोचक सत्र शैलेंद्र पाठक ने आयोजित किया, जिसमें उन्होंने शास्त्रीय संगीत, जनजातीय संगीत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार विभिन्न पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों को मिलाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से नये वाद्य संगीत के रूप तैयार किए जा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त हिमांशु कुमार ने जनजातीय लोककथाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर कार्यशाला आयोजित की। इस सत्र में उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक डिजिटल चित्रण तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से जनजातीय लोककथाओं, पारंपरिक कलाओं और दृश्य कथाओं को नये डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यह कार्यशाला डॉ. मृणाल पाठक के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में सुचारु रूप से संचालित की जा रही है।
कार्यक्रम का समापन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इसमें एक जनजातीय परिधान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें पारंपरिक परिधानों और हस्तशिल्प की सुंदर झलक प्रस्तुत की गयी। कार्यक्रम का अंत प्रसिद्ध पाइका नृत्य की ऊजार्वान प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में सामने रखा। इस कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय परंपराओं और आधुनिक तकनीकों के बीच संवाद और नवाचार को प्रोत्साहित करना था, ताकि छात्र, शोधकर्ता और उद्यमी सांस्कृतिक संरक्षण और डिजिटल उद्यमिता के क्षेत्र में नयी संभावनाओं का अन्वेषण कर सकें।
एबीएन कैरियर डेस्क। अनुज अग्निहोत्री ने 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इस परीक्षा के परिणाम शुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने घोषित किए। राजेश्वरी सुवे एम ने दूसरा स्थान और आकांश धुल ने तीसरा स्थान हासिल किया।
आयोग ने बताया कि कुल 958 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए हैं और उन्हें विभिन्न केंद्रीय सिविल सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया है। सिविल सेवा परीक्षा हर वर्ष तीन चरणों — प्रीलिमिनरी एग्जाम, मेन Exam and Interview — में आयोजित की जाती है। इसे UPSC द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित अन्य सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए आयोजित किया जाता है।
आयोग के अनुसार, अनुशंसित 348 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को अस्थायी (प्रोविजनल) रखा गया है। केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भरने के लिए कुल 1,087 रिक्तियों की जानकारी दी थी। UPSC के परिसर में परीक्षा हॉल के पास एक “फैसिलिटेशन काउंटर” भी है। उम्मीदवार कार्यदिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक व्यक्तिगत रूप से या फोन नंबर 23385271/23381125/23098543 पर अपनी परीक्षा/भर्ती से संबंधित किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए संपर्क कर सकते हैं।
रैंक रोल नंबर नाम
1 1131589 अनुज अग्निहोत्री
2 4000040 राजेश्वरी सुवे
3 3512521 आकांश धुल
4 0834732 राघव झुनझुनवाला
5 0409847 ईशान भटनागर
6 6410067 जीनिया अरोड़ा
7 0818306 ए आर राजा मोहद्दीन
8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी
9 0831647 आस्था जैन
10 1523945 उज्जवल प्रियांक
11 1512091 यशस्वी राज वर्धन
12 0840280 अक्षित भारद्वाज
13 7813999 आन्या शर्मा
14 5402316 सुरभि यादव
15 3507500 सिमरनदीप कौर
16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव
17 0829589 चितवन जैन
18 5604518 श्रुति आर
19 0105602 निशार डिशंत अमृतलाल
20 6630448 रवि राज
UPSC CSE परिणाम 2025 (जारी)
लाइव अपडेट: जानें मेरिट सूची कैसे डाउनलोड करें। उम्मीदवार UPSC CSE की अंतिम मेरिट सूची पीडीएफ देखने और डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं:
इस साल के परिणाम केवल पहले तीन स्थानों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि Top 10 में शामिल हर नाम एक प्रेरणादायक कहानी कहता है। इस खास सूची में राघव झुनझुनवाला और ईशान भटनागर ने भी अपनी जगह पक्की की है। इनके साथ ही जीनिया अरोड़ा और AR राजा मोहद्दीन ने अपनी बुद्धिमानी का परिचय देते हुए टॉप-10 में गौरवशाली स्थान पाया।
सफलता का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। पक्षल सेक्रेटरी, आस्था जैन और उज्जवल प्रियांक ने भी अपनी असाधारण मेहनत के दम पर इस प्रतिष्ठित सूची के आखिरी तीन पायदानों को सुशोभित किया। अब ये सभी नवनियुक्त अधिकारी देश की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे।
टीम एबीएन, रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (बीआईटी मेसरा) अपने मेसरा परिसर में कला, संस्कृति, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और सतत उद्यमिता पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। यह वर्कशॉप 6 मार्च से 8 मार्च तक होगी।
रूट्स टू रेनैसां: झारखंड की जनजातीय विरासत, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता का समन्वय शीर्षक से आयोजित यह कार्यक्रम प्रबंधन अध्ययन विभाग और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को झारखंड सरकार के पर्यटन, कला एवं संस्कृति निदेशालय का सहयोग प्राप्त है। तीन दिवसीय इस कार्यशाला में झारखंड की जनजातीय विरासत और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसमें विभिन्न विद्वान, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और उद्यमी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान यह चर्चा की जाएगी कि मौखिक कहानी कहने की परंपरा और हस्तशिल्प जैसी पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहरों को डिजिटल माध्यमों की सहायता से किस प्रकार दर्ज, डिजिटल रूप में सुरक्षित और संरक्षित किया जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना उपस्थित रहेंगे। झारखंड सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक आसिफ एकराम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में प्रबंधन अध्ययन विभाग के अध्यक्ष संजय कुमार झा भी अपना संबोधन देंगे। कार्यक्रम में झारखंड की जनजातीय विरासत पर केंद्रित सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी आयोजित किये जाएंगे।
सत्रों में यह बताया जाएगा कि डिजिटल उपकरणों की मदद से लोककथाओं, बोलियों और पारंपरिक संगीत का दस्तावेजीकरण कैसे किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने की कला का प्रदर्शन, मोटे अनाज आधारित पारंपरिक खाद्य प्रणालियों पर चर्चा तथा मौखिक इतिहास को सुरक्षित रखने पर कार्यशालाएँ भी आयोजित होंगी।
इसके साथ ही उद्यमिता प्रयोगशाला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जैसे छऊ नृत्य और पैका नृत्य, तथा विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। यह कार्यशाला झारखंड में सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत से जुड़े उद्यमों पर कार्य कर रहे शोधकर्ताओं, कारीगरों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की अपेक्षा रखती है।
टीम एबीएन, रांची। रांची से सटे चान्हो की अंकिता रानी ने CA की परीक्षा में टॉप किया है। उन्होंने रांची ज़िला में तीसरा स्थान लाया है।
अंकिता के पिता बिरजू साहू लोकल हाट में कपड़ा बेचते हैं। अंकिता की बड़ी बहन भी CA की टॉपर रही हैं फ़िलहाल वह टाटा स्टील में जॉब कर रही हैं।
टीम एबीएन, रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने दो वर्षीय अंतर्विषयी एमए लिबरल आर्ट्स कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। चार सेमेस्टर में संचालित यह कार्यक्रम मानविकी, सामाजिक विज्ञान, डिजिटल प्रणालियों तथा उभरती तकनीकों को एक ही स्नातकोत्तर संरचना के अंतर्गत एकीकृत करता है।
पाठ्यक्रम में सांस्कृतिक अध्ययन, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, सतत विकास अध्ययन, सूचना विज्ञान, मीडिया अध्ययन, डिजिटल मानविकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित अध्ययन शामिल किये गये हैं। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समकालीन सामाजिक एवं तकनीकी प्रश्नों का गहन शैक्षणिक समझ और स्पष्ट शोध पद्धति के साथ विश्लेषण करने के लिए तैयार करता है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी विषय में स्नातक उपाधि प्राप्त तथा न्यूनतम 55 प्रतिशत कुल अंक या समकक्ष ग्रेड/सीजीपीए रखने वाले विद्यार्थी इस कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पाठ्यक्रम की संरचना वर्तमान शैक्षणिक प्राथमिकताओं और उद्योग जगत की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है। यह विद्यार्थियों की आलोचनात्मक एवं रचनात्मक सोच को विकसित करते हुए मूल नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व प्रदान करती है। पात्रता, पाठ्यक्रम, तथा प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची के छठे दीक्षांत समारोह के अवसर पर उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
श्री गंगवार ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई जीवन-यात्रा का शुभारंभ है।
शिक्षा का उद्देश्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र एवं समाज के कल्याण में करें।
टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) पूर्व से ही झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, रांची में व्याप्त अनियमितताओं, अपारदर्शिता और संदिग्ध प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार आवाज उठाता रहा है तथा विश्वविद्यालय में पारदर्शी, जवाबदेह और नियमसम्मत व्यवस्था की मांग करता रहा है। संघ ने समय-समय पर नियुक्ति प्रक्रिया, टेंडर आवंटन, सामान खरीद, भवन निर्माण कार्य और मेस संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं में संभावित गड़बड़ियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन गंभीर आशंकाओं को छात्र हित में उठाया गया था, वे अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी के बाद और अधिक पुष्ट होती प्रतीत हो रही हैं।
समाचार माध्यमों में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार विश्वविद्यालय में निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, वित्तीय अनियमितता, नियुक्तियों में गड़बड़ी तथा निर्माण कार्यों में गंभीर प्रश्न उठे हैं। यह केवल प्रशासनिक त्रुटि का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस प्रकार के आरोप पूरे शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करते हैं और संस्थान की साख पर गहरा आघात पहुंचाते हैं।
आजसू छात्र संघ स्पष्ट रूप से मांग करता है कि उइक इस पूरे प्रकरण में त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करे तथा दोषियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करे। जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए, सभी संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाये और किसी भी स्तर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न होने दी जाए। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित प्रक्रियाओं पर प्रभावी रोक लगायी जानी चाहिए ताकि पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
आजसू छात्र संघ यह दोहराता है कि उसकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ है। झारखंड के छात्रों और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ लोकतांत्रिक तरीकों से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उक्त जानकारी आजसू छात्र संघ, झारखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
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