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Published / 2026-02-03 18:15:59
जेपीएससी कार्यालय का घेराव कर उम्र सीमा में छूट मांगने की तैयारी

उम्र सीमा में छूट की मांग को लेकर छात्रों में रोष, जेपीएससी कार्यालय का करेंगे घेराव 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आगामी संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में उम्र सीमा में छूट नहीं दिये जाने से राज्य के हजारों अभ्यर्थियों में गहरा रोष व्याप्त है। इसे लेकर छात्र-युवाओं ने निर्णय लिया है कि वे जेपीएससी कार्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करेंगे। 

इस बार सरकार और आयोग दोनों मौन  

छात्र नेता सत्यनारायण शुक्ला ने प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 वर्षों में अब तक बहुत कम बार सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन हुआ है, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं। यह अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है। 

उन्होंने कहा कि पूर्व में आयोजित संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षाओं एवं बैकलॉग परीक्षाओं में अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी जाती रही है, लेकिन इस बार सरकार और आयोग दोनों मौन हैं। छात्र केवल न्यायसंगत उम्र सीमा में छूट की मांग कर रहे हैं, जो पूरी तरह वैध और संवैधानिक है। 

घेराव पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होगा 

श्री शुक्ला ने स्पष्ट किया कि यह घेराव पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जायेगा। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा का छात्र समर्थन नहीं करते। अगर सरकार और आयोग ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा।

जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। अंत में उन्होंने राज्य सरकार एवं जेपीएससी से अपील की कि छात्र-हित में अविलंब निर्णय लेते हुए आगामी जेपीएससी परीक्षा में उम्र सीमा में उचित छूट प्रदान की जाये।

Published / 2026-02-03 18:12:32
एसआर डीएवी पुंदाग की दिव्यांशी नाथ को हिंदी ओलंपियाड में राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतिभा सम्मान

एबीएन कैरियर डेस्क। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग की सप्तम कक्षा की छात्रा दिव्यांशी नाथ को हिंदी ओलंपियाड में राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतिभा सम्मान प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है। हिंदी विकास मंच ने उसे नयी दिल्ली के तीनमूर्ति भवन के प्रधानमंत्री संग्रहालय में  स्मृति चिह्न, स्वर्ण पदक तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

यह उपलब्धि स्कूल के लिए गौरव का विषय है। यह प्रतियोगिता राज भाषा हिंदी के प्रति रुचि जगाने तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित की जाती है, जिसमें देशभर के हजारों विद्यार्थी न भाग लेते हैं। यह सम्मान दिव्यांशी नाथ के कठिन परिश्रम  का यह शानदार परिणाम है।

प्राचार्य डॉ तापस घोष ने उसे बधाई तथा शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम अपनी छात्रा की इस उपलब्धि पर अत्यंत गर्वित हैं। यह न केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे स्कूल परिवार के लिए प्रेरणास्रोत है। हम आगे भी ऐसी प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद रखेंगे। उन्होंने दियांशी नाथ के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Published / 2026-02-02 21:21:51
कल से बीआईटी मेसरा में औरोरा 2026

टीम एबीएन, रांची। 3 फरवरी से बीआईटी मेसरा लालपुर के तत्वावधान में आयोजित होने जा रहा है औरोरा 2026 जिसमें खेलो बीआईटी खेलो के तहत रस्सा कस्सी की होगी खींचतान, जिसमें लड़कियों और लड़कों के बीच होगा मुकाबला कबड्डी का मुकाबले भी होंगे। 

दिनाँक 5 और 6 फरवरी को औरोरा के तहत विभिन्न प्रकार के आयोजन होने जा रहे हैं। कल से लगातार चार दिनों तक छात्र छात्राओं के बीच खेल से लेकर कलाकारी के कार्यक्रम की जोरदार तैयारी हो रही है।

Published / 2026-01-31 21:22:04
डीएवी कपिलदेव कडरू में मना शिक्षक वीके पाठक का अवकाश ग्रहण समारोह

एबीएन कैरियर डेस्क। डीएवी कपिल देव पब्लिक स्कूल कडरू रांची में आज भौतिक विज्ञान के शिक्षक विजय कुमार पाठक के अवकाश ग्रहण दिवस के अवसर पर  एक समारोह का आयोजन किया गया और उन्हें भावभीनी विदाई दी गयी। 

मौके पर विद्यालय के प्राचार्य सह डीएवी झारखंड जोन बी के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एमके सिन्हा ने कहा कि उम्र केवल एक संख्या है व्यक्ति को कार्य पूरी लगन और पूरे उत्साह से करना चाहिए।हर दिन को नया दिन समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठक जी को निरंतरता और कार्य कुशलता के लिए हमेशा याद किया जायेगा।  

मौके पर अवकाश प्राप्त कर रहे शिक्षक विजय कुमार पाठक ने विद्यालय में बिताए गए क्षणों को याद किया और सहयोग के लिए सबों को धन्यवाद अर्पित किया।

 मौके पर गौतम कुमार पाठक, पीके दास, एआई गुरु, बीबी बारीक, एके सिन्हा और अमित मिश्रा ने भी अवकाश ग्रहण कर रहे शिक्षक विजय कुमार पाठक के सम्मान में अपने विचार व्यक्त किये। मौके पर जूनियर और सीनियर विंग के शिक्षक मौजूद थे। सभा का संचालन प्रेम जीत सारंगी ने किया। उक्त जानकारी डीएवी कपिल देव पब्लिक स्कूल कडरू के आलोक इंद्र गुरु ने दी।

Published / 2026-01-29 20:46:03
झारखंड : तीन फरवरी से होनेवाला मैट्रिक-इंटर की परीक्षा में शामिल होंगे करीब 65 हजार विद्यार्थी

3 फरवरी से शुरू होंगी मैट्रिक-इंटरमीडिएट परीक्षाएं, 87 केंद्रों पर 64,966 परीक्षार्थी होंगे शामिल 

एबीएन कैरियर डेस्क। झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा आयोजित मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 को लेकर रांची जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस संबंध में समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार सहित सभी परीक्षा केंद्रों के अधीक्षक और संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। 

बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष, कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न करायी जाये। उन्होंने कहा कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनुशासनहीनता या अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारी या कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। 

जानकारी के अनुसार, मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 03 फरवरी से शुरू होकर 23 फरवरी 2026 तक आयोजित की जायेंगी। माध्यमिक परीक्षा प्रथम पाली में सुबह 09:45 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगी, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा द्वितीय पाली में अपराह्न 2 बजे से 05:15 बजे तक आयोजित की जायेगी। प्रश्न-पत्र वितरण के लिए 05 मिनट का अतिरिक्त समय निर्धारित किया गया है, वहीं प्रश्न-पत्र पढ़ने और समझने के लिए परीक्षार्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा। 

रांची में परीक्षा केंद्रों और परीक्षार्थियों की स्थिति 

रांची जिले में माध्यमिक परीक्षा के लिए कुल 87 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं, जहां 32,723 परीक्षार्थी शामिल होंगे। ये केंद्र जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय और विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों में स्थित हैं। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए जिले में 52 परीक्षा केंद्र निर्धारित किये गये हैं, जिनमें 32,243 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। ये केंद्र मुख्य रूप से जिला मुख्यालय, बुंडू अनुमंडल तथा खलारी और सिल्ली प्रखंडों में बनाये गये हैं। 

दिशा-निर्देशों के पालन की अपील 

उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों, स्कूल-कॉलेज प्रबंधन, केंद्राधीक्षकों और परीक्षार्थियों से परीक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से ही परीक्षा प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है।

Published / 2026-01-29 20:40:44
रैंक की दीवार टूटी : पिछले 7 वर्षों में आईआईटी, एनआईटी और आईआईटी में छात्राओं की निर्णायक और स्थायी बढ़त

विशेष लेख : शिक्षा, समाज और भविष्य 

भूमिका : एक बदली हुई कक्षा की तस्वीर 

प्रशांत झा 

एबीएन कैरियर डेस्क। लगभग 10-12 वर्ष पहले तक देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों की कक्षाओं में एक दृश्य बार-बार दिखाई देता था। 40 विद्यार्थियों की कक्षा में 1 या अधिकतम 2 छात्राएं। यह दृश्य सामान्य माना जाता था। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान लंबे समय तक पुरुष-प्रधान माने गये। तकनीकी शिक्षा को लेकर समाज में यह धारणा गहराई से बैठी थी कि यह क्षेत्र मुख्यत: लड़कों के लिए उपयुक्त है, जबकि लड़कियों के लिए इसे कठिन, असुरक्षित या अनुपयुक्त माना जाता रहा। 

लेकिन पिछले 7 वर्षों (2018 से 2025) में यह तस्वीर निर्णायक रूप से बदली है। आज वही कक्षाएं अधिक संतुलित दिखायी देती हैं। छात्राएं न केवल संख्या में बढ़ी हैं, बल्कि उन्होंने यह भी सिद्ध किया है कि वे मेधा, परिश्रम, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में किसी से कम नहीं हैं। वे शीर्ष रैंक ला रही हैं, संगणक विज्ञान जैसी कठिन शाखाओं को चुन रही हैं और संस्थानों से निकलकर उद्योग तथा अनुसंधान दोनों क्षेत्रों में मजबूत पहचान बना रही हैं।

यह लेख इसी परिवर्तन की कहानी कहता है- आंकड़ों के साथ, तर्क के साथ और सामाजिक संदर्भ के साथ 

खंड 1 : 7 वर्षों में बदली तस्वीर- आंकड़ों की जुबानी 

यदि 2018 से पहले की स्थिति देखें, तो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्राओं की हिस्सेदारी लगभग 8-10% के बीच थी। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अन्य सरकारी तकनीकी संस्थानों में यह प्रतिशत थोड़ा अधिक था, किंतु वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती थी। 2020 तक यह अनुपात बढ़कर लगभग 15-16% तक पहुंचा। 2023 से 2025 के बीच यह आंकड़ा और सुदृढ़ होकर 18-21% के बीच स्थिर हुआ। 

आज स्थिति यह है कि हर 5 विद्यार्थियों में लगभग 1 विद्यार्थी छात्रा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों और सरकारी सहायता प्राप्त तकनीकी संस्थानों में कई स्थानों पर यह अनुपात 22झ्र25% तक भी पहुंच चुका है। यह परिवर्तन केवल संख्या का नहीं है। यह भारतीय उच्च तकनीकी शिक्षा की सामाजिक संरचना में आया एक ऐतिहासिक बदलाव है। 

खंड 2 : परिवर्तन के पीछे कौन-से कारक रहे 

इस बदलाव के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई कारकों का संयुक्त प्रभाव रहा। 

  1. छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटों की नीति : छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु लागू की गई अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था सबसे निर्णायक कदम सिद्ध हुई। यह व्यवस्था किसी भी वर्ग की सीट कम किए बिना केवल छात्राओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराती है। 
  2. अभिभावकों की सोच में परिवर्तन : अब बेटियों की तकनीकी शिक्षा को जोखिम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के रूप में देखा जाने लगा है। 
  3. प्रवेश परीक्षाओं में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी : संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) में छात्राओं टॉगल सहभागिता। पहले: लगभग 20-22%, वर्तमान में: 30-33% 
  4. सफल छात्राओं की दृश्यता : लगातार कई वर्षों से टॉप 50 और टॉप 100 रैंक में छात्राओं की उपस्थिति ने समाज की सोच को बदला है। 

खंड 3 : अतिरिक्त सीटों को लेकर फैली भ्रांतियां 

आज भी समाज में यह धारणा प्रचलित है कि छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटें अन्य विद्यार्थियों के अवसर कम करती हैं। यह धारणा तथ्यात्मक रूप से असत्य है। अतिरिक्त सीटें- पहले से मौजूद सीटों के ऊपर जोड़ी जाती हैं। किसी भी वर्ग की सीट कम नहीं करतीं। केवल छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए होती हैं। 

उदाहरण के लिए यदि किसी शाखा में पहले 100 सीटें थीं और छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु 20 अतिरिक्त सीटें जोड़ी गयीं, तो कुल सीटें 120 हो जाती हैं। इन 20 सीटों पर केवल छात्राओं को प्रवेश मिलता है, जबकि छात्राएं पहले की 100 सीटों पर भी समान रूप से प्रतिस्पर्धा करती हैं। अर्थात अवसर बढ़ता है, घटता नहीं। 

खंड 4 : तकनीकी संस्थानों में सीटों का कुल स्वरूप 

प्रत्येक वर्ष देश में लगभग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान: 17,500-18,000 सीटें। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान: लगभग 24,000 सीटें। सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान: 8,000-9,000 सीटें। अन्य सरकारी तकनीकी संस्थान: कई हजार सीटें। 

कुल मिलाकर 60,000+ तकनीकी स्नातक सीटें हर वर्ष अतिरिक्त सीटों की नीति के कारण कुल प्रवेश क्षमता बढ़ी। अधिक विद्यार्थियों को अवसर मिला। छात्राओं की भागीदारी सुदृढ़ हुई। 

खंड 5 : प्रवेश परीक्षाओं में छात्राओं का वास्तविक प्रदर्शन 

यह धारणा कि छात्राएं केवल विशेष प्रावधानों से आती हैं, आंकड़ों के सामने टिक नहीं पाती। संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) में हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्राएं 99+ प्रतिशतांक प्राप्त कर रही हैं। संयुक्त प्रवेश परीक्षा (उन्नत) में चयनित छात्राएं पहले ही अत्यंत कठिन शैक्षणिक स्तर पार कर चुकी होती हैं। कई बार उनके अंक कुल सर्वोच्च रैंक के अत्यंत समीप होते हैं। यह स्पष्ट करता है कि छात्राएं केवल सीटें नहीं ले रहीं, वे प्रतिस्पर्धा जीत रही हैं। 

खंड 6 : आरक्षण व्यवस्था और छात्राओं की भूमिका 

छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटें सामाजिक आरक्षण व्यवस्था से अलग हैं। किन्तु योग्यता की शर्त सभी पर समान रूप से लागू होती है। कोई भी छात्रा बिना आवश्यक अंक, बिना परीक्षा उत्तीर्ण किये, प्रवेश प्राप्त नहीं कर सकती। यह व्यवस्था अवसर बढ़ाती है, मानक नहीं गिराती। 

खंड 7 : शाखा चयन में छात्राओं की परिपक्वता 

पिछले 7 वर्षों में छात्राओं द्वारा चुनी गई प्रमुख शाखाएं संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, इलेक्ट्रॉनिकी एवं संचार अभियांत्रिकी, विद्युत अभियांत्रिकी, आंकड़ा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता। इनका चयन रोजगार संभावनाओं, वैश्विक अवसरों, तकनीकी भविष्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। 

खंड 8 : नियोजन और वेतन में समानता 

शीर्ष तकनीकी संस्थानों के नियोजन आंकड़े बताते हैं चयन में लिंग नहीं, क्षमता निर्णायक है। वेतन और भूमिका कौशल पर आधारित होती है। संगणक और इलेक्ट्रॉनिकी शाखाओं में औसत वार्षिक वेतन 20-25 लाख रुपये तक छात्राओं को भी अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव। 

खंड 9 : शीर्ष छात्राओं की पसंद का सामाजिक संदेश 

शीर्ष रैंक प्राप्त छात्राओं द्वारा कठिनतम शाखाओं और प्रतिष्ठित संस्थानों का चयन यह स्पष्ट करता है कि छात्राएं किसी रियायत की नहीं, बल्कि समान प्रतिस्पर्धा की अपेक्षा रखती हैं। 

खंड 10 : संस्थान-वार स्थिति 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) लगभग 20% छात्राएं, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कई स्थानों पर 25% तक, सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) संगणक केंद्रित झुकाव, अन्य सरकारी संस्थान(जीएफटीआई) निरंतर वृद्धि। 

खंड 11 : शेष चुनौतियां 

उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव, मार्गदर्शन का अभाव , अब भी बाधा बने हुए हैं। नीति के साथ सामाजिक सहयोग भी अनिवार्य है। 

खंड 12 : आगे का मार्ग 

छात्राओं के लिए आत्मविश्वास, अवधारणात्मक अध्ययन, दीर्घकालिक लक्ष्य, अभिभावकों के लिए, विश्वास समर्थन, अवसर उपलब्ध कराना, विद्यालयों के लिए प्रतिभा पहचान, समान मार्गदर्शन, प्रेरणादायक वातावरण। 

निष्कर्ष : गरिमा के साथ बढ़त 

पिछले 7 वर्षों में छात्राओं ने भारतीय तकनीकी शिक्षा की दिशा बदल दी है। वे अब परिधि में नहीं, केंद्र में हैं। संख्या भले सीमित हो, परंतु मेधा, प्रभाव और आत्मविश्वास में वे किसी से कम नहीं। संदेश स्पष्ट है छात्राएं तकनीकी संस्थानों में अतिथि नहीं हैं। वे वहां अपने परिश्रम, योग्यता और आत्मसम्मान के बल पर उपस्थित हैं। (लेखक शिक्षा विषयों के स्वतंत्र विश्लेषक हैं।)

Published / 2026-01-28 20:48:00
छात्र आजसू की डोरंडा महाविद्यालय की बैठक प्रधान कार्यालय में संपन्न

एबीएन कैरियर डेस्क। आज दिनांक 28/1/2026 को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) बैठक प्रधान कार्यालय हरमू रांची में संपन्न हुई। बैठक में कमेटी का विस्तार किया गया जिसमें डोरंडा  महाविद्यालय कार्यकारी अध्यक्ष अभिषेक कुमार महतो को बनाया गया। 

हर्ष गुप्ता को वरीय उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष अंकित कुमार, प्राची कुमारी, सह सचिव काजल कुमारी, कोषाध्यक्ष राहुल कुमार, तौकीर  आयुष साहिल को कमेटी विस्तार किया गया। बैठक में कॉलेज की समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया और जल्द ही कॉलेज  प्रशासन एवं विश्वद्यालय प्रशासन का घेराव किया जायेगा।

बैठक में संगठन के मजबूती, आगामी कार्यक्रमों एवं नये सदस्य को संगठन से जोड़ने हेतु सदस्यता अभियान सभी महाविद्यालय में चलाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो, वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शहदेव, अमन साहू, प्रशांत महतो, योगेश महतो, नितेश शर्मा, मानस, लतेश, कॉलेज अध्यक्ष अविनाश कुमार, उदय महतो, जरीन परवीन, रौनक कुमार, प्रिया कुमारी, कृष्ण एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा  ने दी।

Published / 2026-01-27 21:29:11
एसआर डीएवी पुंदाग में गणतंत्र दिवस की धूम

टीम एबीएन, रांची। एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल, पुंदाग में 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। मुख्य अतिथि पूर्व डायरेक्टर जेनरल आॅफ पुलिस, झारखंड आरके मल्लिक ने प्राचार्य डॉ तापस घोष के साथ झंडोत्तोलन करके तिरंगे को सलामी दी। मौके पर विद्यालय के एनसीसी, गाइड एंड स्काउट, दयानंद, हंसराज, विवेकानंद तथा श्रद्धानंद हाउस के विद्यार्थियों ने शानदार परेड का प्रदर्शन किया। 

विद्यालय के प्राथमिक कक्षा के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत मोहक नृत्य प्रस्तुत देश के लिए मर- मिटने का संदेश दिया। वहीं कक्षा षष्ठ-सप्तम की छात्राओं ने वंदे मातरम नृत्य के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत का परिचय दिया। विद्यालय की संगीत मंडली ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। एकादश कक्षा की एशली तथा आदित्य राज ने अपने भाषण से सभा में जोश भर दिये।

कक्षा तृतीय से एकादश तक के विद्यार्थियों ने आपरेशन सिंदूर शीर्षक शानदार नृत्य नाटिका प्रस्तुत करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कक्षा षष्ठ से नवम तक के छात्रों द्वारा बनाये गये आकर्षक पिरामिड थे। सभी ने इनकी खूब सराहना की। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की सराहना की। 

अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भारत भले ही सन 1950 में गणतंत्र घोषित किया गया, पर गणतंत्र की संकल्पना भारत में सदियों पुरानी है। हम सबको अपने मौलिक अधिकारों के साथ- साथ अपने मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहना चाहिए इसी में गणतंत्र की सार्थकता है। 

प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र है और इसे उन्नति के पथ पर अग्रसर करने की जिम्मेदारी हमारी युवा पीढ़ी की है। इसकी एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाये रखना हम सबका पुनीत कर्तव्य है। 

उन्होंने देश के अमर शहीदों से प्रेरणा लेकर देश को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए विद्यार्थियों का आह्वान किया। शांतिपाठ के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। उक्त कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, छात्र, छात्राएं, शिक्षक तथा शिक्षिकाएं उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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