एबीएन कैरियर डेस्क। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के उर्दू विषय का अंतिम परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों में असंतोष और नाराजगी का माहौल है। परीक्षार्थियों का आरोप है कि उर्दू विषय के कई विवादित प्रश्नों पर दर्ज करायी गयी आपत्तियों और प्रस्तुत किए गए प्रमाणों पर उचित विचार किये बिना ही आयोग ने परिणाम प्रकाशित कर दिया।
अभ्यर्थियों के अनुसार, प्रश्न पत्र के प्रश्न संख्या 01, 10, 15, 18, 28, 39, 41, 64, 75, 93, 94, 99, 109, 122, 123, 139 और 144 में गंभीर त्रुटियां थीं। उनका कहना है कि कुछ प्रश्नों में गलत विकल्प को सही उत्तर के रूप में स्वीकार किया गया, कुछ प्रश्नों के सभी विकल्प त्रुटिपूर्ण थे, जबकि कई प्रश्न अस्पष्ट अथवा अधूरे थे।
इस संबंध में अभ्यर्थियों ने विषय विशेषज्ञों की पुस्तकों और प्रमाणिक संदर्भ सामग्री के आधार पर आयोग के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराते हुए उत्तर-कुंजी में संशोधन की मांग की थी।
परीक्षार्थियों का आरोप है कि आयोग ने इन 17 प्रश्नों को लेकर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी नहीं किया और न ही उत्तर-कुंजी में अपेक्षित सुधार किया। इसके बावजूद अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया, जिससे कई उम्मीदवारों के चयन और मेरिट सूची पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि विवादित प्रश्नों को रद्द कर सभी परीक्षार्थियों को अंक दिये जाते अथवा सही उत्तरों को स्वीकार किया जाता, तो परिणाम में महत्वपूर्ण बदलाव संभव था। उन्होंने आयोग से विवादित प्रश्नों की पुन: समीक्षा, संशोधित उत्तर-कुंजी जारी करने तथा परिणाम पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मामले को लेकर अभ्यर्थियों में रोष बढ़ता जा रहा है। कई उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग द्वारा जल्द उचित कदम नहीं उठाया गया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। वहीं, इस विवाद के बाद आयोग की परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
एबीएन कैरियर डेस्क। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक मुं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति करने और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने एएनएम और जीएनएम के खाली पदों पर तत्काल बहाली प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और अन्य चिकित्सकों की नियुक्ति भी जल्द पूरी करने को कहा।
बैठक में एम्बुलेंस सेवा को लेकर मिल रही शिकायतों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं से जुड़ी परेशानियों की खबरें लगातार सामने आ रही है। उन्होंने ओला और उबर की तर्ज पर राज्यभर में एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की योजना तैयार करने को कहा। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने राज्य के रेफरल सिस्टम का आॅडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न निदेशालयों के पुनर्गठन की योजना भी तैयार करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य जरूरतें अलग-अलग हैं।
इसलिए दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कार्य योजनाएं तैयार की जाये। अस्पतालों की साफ-सफाई और रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। बैठक में पूरे राज्य में 4 से 5 दिन के नेत्र जांच शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने रांची सदर अस्पताल में स्थापित सेंट्रल रेडियोलॉजी हब की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य के सभी जिलों को जोड़ा गया है। आभा कार्ड को लेकर राज्यव्यापी अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अभियान चलाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नयी मेडिकल तकनीकों का अध्ययन कर भविष्य की योजना तैयार करने को कहा। साथ ही मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना के तहत सदर अस्पतालों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। बैठक में मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीटें बढ़ाने, ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित करने, ब्लड बैंक की लाइसेंस प्रक्रिया में तेजी लाने और ब्लड डोनेशन को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिये गेय।
इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों का आॅडिट कराने, पुराने सदर अस्पतालों में एयर कूलिंग व्यवस्था विकसित करने, मेडिकल कॉलेजों में रिहैब और थेरेपी सेंटर शुरू करने तथा निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का काम समय पर पूरा कराने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने अबुआ दवाखाना योजना को भी जल्द शुरू करने की दिशा में तेजी लाने का निर्देश दिया।
टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रतिनिधिमंडल ने रांची विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया से मुलाकात कर स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया अविलंब प्रारंभ करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम प्रकाशित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा में नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा उनमें असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ज्ञापन के माध्यम से आजसू ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोपरि रखते हुए स्नातक पाठ्यक्रमों की नामांकन प्रक्रिया जल्द से जल्द प्रारंभ की जाए, ताकि छात्र-छात्राएं समय पर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकें। साथ ही नामांकन संबंधी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश एवं कार्यक्रम भी शीघ्र जारी करने की मांग की गयी।
कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और नामांकन प्रक्रिया को लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आजसू ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन निरंतर सक्रिय है और विद्यार्थियों के अधिकारों एवं उनकी शैक्षणिक समस्याओं के समाधान के लिए संघर्षरत रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, प्रदेश सचिव रोशन नायक, राजेश सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, सौरभ यादव, अब्दुल खान, राहुल, यश सोनी, पंकज, अभित कुमार, हिमांशु सिंह, शुरदीप, अमित, निशांत इत्यादि उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रदेश अध्यक्ष अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के ओम वर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए वर्षों से लागू 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करने के निर्णय पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
यह निर्णय झारखंड के प्रतिभाशाली एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल है। आजसू का मानना है कि बीआईटी मेसरा झारखंड की धरती पर स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी स्थापना और विकास में राज्य की भूमि, संसाधनों एवं जनता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
ऐसे में राज्य के विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसरों में कटौती किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि होम स्टेट कोटा के माध्यम से झारखंड के छात्रों, विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता रहा है। इस व्यवस्था को समाप्त करने से राज्य के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा तथा उनके उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे।
आजसू की बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए पूर्व की भांति 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा तत्काल बहाल किया जाए। राज्य सरकार इस विषय में संस्थान प्रबंधन से अविलंब वार्ता कर झारखंडी छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
राज्य के विद्यार्थियों के लिए आरक्षण एवं विशेष अवसरों की व्यवस्था को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यदि झारखंड के छात्रों के हित में पूर्ववत व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो आजसू छात्र-युवा हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी।
आंदोलन के तहत ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, छात्र सम्मेलन तथा आवश्यकतानुसार व्यापक जनआंदोलन आयोजित किए जाएंगे। झारखंड के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, हुसैनाबाद, पलामू। अपने पूर्व निर्धारित समय को परिवर्तित करते हुए अवधेश कुमार सिंह डिग्री कॉलेज के कर्मियों द्वारा धरना दिया जाएगा।
इस आशय की जानकारी देते हुए कर्मी रमेश सिंह आदि ने प्रेस को विज्ञप्ति देकर जानकारी दिया हैं जिसमें कॉलेज परिसर में 30 मई से अनिश्चित काल शान्ति पूर्ण ढंग तरीके से धरना देने की बात कही है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के इंजीनियरिंग छात्रों के लिए इस बार एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सबसे चर्चित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिने जाने वाले बीआईटी मेसरा ने अब होम स्टेट कोटा खत्म करने का फैसला ले लिया है।
यानी अब झारखंड के छात्रों को पहले की तरह 50 प्रतिशत कोटा नहीं मिलेगा। सत्र 2026-27 से बीआईटी मेसरा की सभी सीटों पर सिर्फ ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर एडमिशन होगा। आसान भाषा में समझें तो अब झारखंड के छात्रों को भी देशभर के लाखों छात्रों के साथ सीधी प्रतियोगिता करनी पड़ेगी।
अब तक बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती थीं। इस व्यवस्था की वजह से राज्य के छात्रों को बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन का अच्छा मौका मिल जाता था।
बीटेक की लगभग 650 सीटों पर झारखंड के छात्रों का नामांकन होता था। इसके अलावा बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के छात्रों के लिए भी अलग आरक्षित सीटें थीं। लेकिन अब यह पूरा सिस्टम खत्म हो जाएगा। अब किसी छात्र को सिर्फ झारखंड का निवासी होने का फायदा नहीं मिलेगा। एडमिशन पूरी तरह रैंक और ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर होगा।
दरअसल, बीआईटी मेसरा और झारखंड सरकार के बीच हुआ समझौता यानी एमओयू दो साल पहले ही खत्म हो चुका था। संस्थान की तरफ से कई बार उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया, लेकिन समझौते का नवीकरण नहीं हो पाया।
बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से मिलने वाला आर्थिक सहयोग भी लंबे समय से बकाया है। ऐसे में संस्थान ने अब सभी सीटों पर ऑल इंडिया कोटे से एडमिशन लेने का फैसला कर लिया।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर झारखंड के छात्रों पर पड़ने वाला है। पहले जिन छात्रों की रैंक थोड़ी कम भी होती थी, उन्हें होम स्टेट कोटे का फायदा मिल जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
अब छात्रों को जेईई में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करना होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए चुनौती और बढ़ सकती है क्योंकि पहले उन्हें राज्य कोटे का सहारा मिल जाता था। बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के छात्रों को भी अब अलग से सीट आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा।
इस पूरे मामले पर झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की कानूनी समीक्षा कर रही है। मंत्री का कहना है कि अगर किसी संस्थान को झारखंड सरकार से रियायती दर पर जमीन मिली है, तो उसे राज्य के आरक्षण नियमों का पालन करना चाहिए।
एबीएन कैरियर डेस्क। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रस्तावित रिस्ट्रक्टिंग एंड क्लसटरिंग सिस्टम का कड़ा विरोध किया है।
आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि यह निर्णय उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला, छात्र-हित एवं शिक्षक-कर्मचारी हित के विरुद्ध तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
राज्य सरकार बिना व्यापक विमर्श, शिक्षाविदों की राय एवं छात्र संगठनों से संवाद किये इस व्यवस्था को थोपने का प्रयास कर रही है, जिससे विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार अविलंब इस प्रस्ताव को वापस नहीं लेती है, तो आजसू चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी। इसके तहत राज्यभर के विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी, धरना-प्रदर्शन एवं छात्र आंदोलन किया जायेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
आजसू ने सरकार से मांग की है कि उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले छात्र संगठनों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों एवं शिक्षाविदों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाये तथा छात्र-हित को सर्वोपरि रखा जाये।
अंत में ओम वर्मा ने कहा कि आजसू हमेशा गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा के पक्ष में रही है और किसी भी परिस्थिति में विश्वविद्यालयों की गरिमा एवं छात्र अधिकारों से समझौता नहीं किया जायेगा। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
एबीएन कैरियर डेस्क। रांची के युवा मार्शल आर्ट खिलाड़ी अरहान आलम ने महाराष्ट्र के लोनावाला में आयोजित छठी जीत कुने डो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
इस प्रतियोगिता का आयोजन जीत कुने डो मार्शल आर्ट एसोसिएशन आॅफ इंडिया एवं नेपाल जीत कुने डो मार्शल आर्ट, नेपाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। प्रतियोगिता में देश के 16 राज्यों से आये खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
अपने वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अरहान आलम ने गोल्ड मेडल जीतकर इंडो-नेपाल टूर्नामेंट में अपनी जगह पक्की की। इसके साथ ही उन्होंने इंडो-नेपाल स्ट्रीट डिफेंस फाइट प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर तापस घोष ने अरहान एवं उनके पिता तौहिद आलम को बधाई देते हुए कहा कि अरहान की इस उपलब्धि से न केवल उनके विद्यालय का नाम रोशन हुआ है, बल्कि पूरे झारखंड का गौरव भी बढ़ा है।
महज 13 वर्ष की उम्र में अरहान कई राष्ट्रीय स्तर के मेडल अपने नाम कर चुके हैं। अरहान आलम का सपना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल जीतना है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse