टीम एबीएन, रांची।झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा 9 वर्षों से लंबित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) के शीघ्र आयोजन की मांग को लेकर माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार के नाम प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने अवगत कराया कि राज्य के लाखों प्रशिक्षित शिक्षक अभ्यर्थी पिछले लगभग 9 वर्षों से जेटेट परीक्षा के आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लंबे समय से परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है तथा राज्य में शिक्षकों की कमी भी लगातार बनी हुई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मौके पर संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंदन कुमार सहित रवींद्र पासवान, बिमल कुमार, सुधीर चौधरी, क्षितिज कुमार, मनीष चंद्रा, हरिकेश महतो, राकेश रजक, संजय रजक, संतोष कुमार, दुर्गेश चंद्रवंशी, आलोक कुमार, वेद प्रकाश, कमलेश चौधरी, बिपिन कुमार चंद्रवंशी, राधे कुमार, नीरज कुमार एवं राहुल यादव ने कहा कि यदि जल्द ही परीक्षा आयोजन को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अभ्यर्थी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
अंत में संघ ने राज्य सरकार से अभ्यर्थियों के भविष्य एवं राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। उक्त जानकारी झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंदन कुमार (8825155985) ने दी।
टीम एबीएन, रांची। सोमवार को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुवे कहा कि जेटेट परीक्षा अविलंब आयोजित करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रूप से ज्ञापन सौंपने के दौरान निर्दोष और आंदोलनरत छात्र नेता बबलू महतो सहित सभी छात्रों पर लाठी चार्ज किया गया है जो अति दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है आजसू इसका पुरजोर विरोध करती है।
राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा लाठी चार्ज कर छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। छात्र विरोधी राज्य सरकार लाठीचार्ज कर अपनी छात्रों विरोधी सरकार का प्रमाण दे रही है।
आजसू इसका पुरजोर विरोध करती है और राज्य सरकार से अविलंब मांग करती है जिस अधिकारी के आदेश पर ये लाठी चार्ज किया गया है उनपर एफआईआर किया जाय और कानूनी कार्रवाई अभिलम्ब किया जाये। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा ने अपने प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव बीटोत्सव 2026 की आधिकारिक थीम की घोषणा की। यह कार्यक्रम 19 मार्च से 22 मार्च 2026 तक आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और विद्यार्थियों द्वारा संचालित कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
इस अवसर पर संस्थान के कई वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें डीन आफ स्टूडेंट अफेयर्स डॉ प्रवीण श्रीवास्तव, एसोसिएट डीन आफ स्टूडेंट अफेयर्स डॉ दिलीप कुमार उपाध्याय और डॉ गौतम शांडिल्य शामिल थे। इसके साथ ही बीटोत्सव 2026 के फैकल्टी कोआर्डिनेटर डॉ सुमित श्रीवास्तव और डॉ ओपी पांडेय भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्य और परिसर के विभिन्न विभागों के छात्र भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन टीम ने अतिथियों को सम्मान स्वरूप पौधे भेंट किये।
कार्यक्रम के दौरान बीटोत्सव 2026 की थीम गाथा : द हिस्ट्री इन एनैक्डोट्स का अनावरण किया गया। इसी अवसर पर बीटोत्सव 2026 की आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की गयी, जहां उत्सव से जुड़ी जानकारी और पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम में थीम से एक डीजे प्रस्तुति भी आयोजित की गयी।
बीटोत्सव, बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा का वार्षिक सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव है। यह उत्सव देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाता है, जहां वे प्रतियोगिताओं, प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह कार्यक्रम संस्थान के मेसरा परिसर, रांची में आयोजित किया जाता है।
टीम एबीएन, रांची। शनिवार को संस्कृत विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची एवं पूर्ववर्ती छात्र संघ ने दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी का समापन समारोह सरला बिरला विश्वविद्यालय के योग एवं नैचुरोपैथी और आर्ट, कल्चर एंड स्पोर्ट संकाय की अध्यक्ष प्रो. नीलिमा पाठक की अध्यक्षता में दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया गया। उन्होंने ज्ञान विज्ञान की परंपरागत विद्या को शिक्षक के माध्यम से शिष्य को देने की बात कही न कि औपचारिक रूप से।
पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ मधुलिका वर्मा ने वैदिक श्लोक के माध्यम से स्वागत संबोधन किया। जिसमें मुख्य अतिथि स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती, (चिन्मय मिशन) ने वेद-वेदाङ्ग में भारतीय ज्ञान परंपरा के वास्तविक स्वरूप को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत को रोजगार मात्र तक सीमित न कर दिया जाए। विशिष्टातिथि कुलसचिव डॉ गुरुचरण साहू ने भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान को इस प्रकार के सेमिनार के द्वारा जन-जन तक पहुंचने के प्रयास को सराहा।
सम्मान्यतिथि छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष, रांची वि. वि., रांची प्रो. सुदेश कुमार साहू ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के नौजवान छात्रों को लुप्त हुई भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के उद्धार हेतु लोगों के समक्ष लाना होगा। मंच संचालन मारवाड़ी कालेज के डॉ. राहुल कुमार ने करते हुए कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करते हुए संपन्न किया।
राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी में द्वितीय दिन तक कुल 120 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। कुल शोध पत्रों में से तीन सर्वश्रेष्ठ पत्रों को प्रो. अयोध्या प्रसाद सिंह स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मौके पर डॉ रजनी गोस्वामी, डॉ पारंगत खलखो एवं डॉ जीतेश पासवान, उदय कर्मकार और डॉ भारती द्विवेदी ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रकट किया।
संगोष्ठी में डॉ मीना शुक्ल, अरुण बसंत, डॉ मीरा सिंह, डॉ जानकी देवी, डॉ शैलेश मिश्र, डॉ श्रीप्रकाश सिंह, डॉ सविता उरांव, डॉ धीरेंद्र दुबे, डॉ एसके घोषाल, डॉ जगदम्बा प्रसाद, डॉ लक्ष्मी कुमारी, शोधार्थी गण व अन्य उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) रांची इकाई के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो राजीव मनोहर से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें बुके एवं झारखंड की पारंपरिक छऊ नृत्य का मुखौटा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर छात्र संघ की ओर से विभिन्न महत्वपूर्ण मांगों एवं समस्याओं के समाधान के संबंध में एक मांग-पत्र भी सौंपा गया।
आजसू छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष तक विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति नहीं होने के कारण कई शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समस्याओं का समाधान लंबित रहा। अब नये कुलपति के पदभार ग्रहण करने से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं में एक नई उम्मीद जगी है कि विश्वविद्यालय की समस्याओं का समाधान होगा तथा विश्वविद्यालय को नयी दिशा और दशा मिलेगी।
मौके पर आजसू छात्र संघ ने कुलपति के समक्ष विश्वविद्यालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को रखा। छात्र संघ ने मांग की कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पठन-पाठन को नियमित और सुचारू रूप से संचालित किया जाये। साथ ही नॉन-टीचिंग स्टाफ कर्मियों के साथ सकारात्मक पहल करते हुए उनकी समस्याओं का समाधान किया जाये, ताकि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य छात्रहित में बेहतर ढंग से चल सकें।
इसके अतिरिक्त छात्र संघ ने विश्वविद्यालय के सभी प्रोफेशनल कोर्स को अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से अनुमोदित कराने की मांग भी उठाई। साथ ही सत्र 2020-23, 2021-24 एवं 2022-25 के स्नातक छात्र-छात्राओं के लिए स्पेशल परीक्षा आयोजित करने की मांग की गयी, क्योंकि इस संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
आजसू छात्र संघ ने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालय में कई शिक्षक एक से अधिक प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रहे हैं, जबकि राजभवन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार एक शिक्षक एक से अधिक पदों पर सेवा नहीं दे सकते। इसलिए इस निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाये।
इसके अलावा छात्र संघ ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित छात्र संघ चुनाव को शीघ्र कराने की मांग भी उठायी। छात्र नेताओं ने बताया कि पिछले लगभग छह वर्षों से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव नहीं हुआ है। हाल ही में फरवरी 2026 में विश्वविद्यालय द्वारा इलेक्टोरल रोल भी जारी किया गया है, लेकिन अब तक चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
आजसू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि कुलपति इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगे, जिससे विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा और शैक्षणिक वातावरण और अधिक बेहतर होगा। इस मौके पर विश्वविद्यालय संयोजक रवि रोशन, प्रशांत महतो, खुशबू यादव, रोशन नायक, विनायक, मानस कुमार, बीटू वर्मा, आशीष एवं योगेश महतो सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, रांची। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन आज बी आई टी मेसरा लालपुर यूनिट के राष्ट्रीय सेवा योजना NSS के तत्वावधान में कार्यक्रम नजरिया नाम से आयोजित किया गया, जिसमें संस्थान के छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी रही।
इस कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक डॉ विजय कुमार झा के द्वारा उद्बोधन में महिलाओं के शक्ति की बातें बोलते हुए कहा कि आज विष्व की कोई भी देश महिलाओं की भागीदारी के बगैर विकसित हो ही नहीं सकती आप किसी भी क्षेत्रों की बात करे महिला अपनी लोहा मनवाया हैं। उन्होंने संस्थान की विकास में शामिल सभी महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनके सम्मान में पाँच पेड़ लगाने की बात कह छात्रों का हौसला बढ़ाया।
डॉ अमृता प्रियम ने महिला दिवस के इस आयोजन के लिए NSS के सदस्यों को साधुवाद देते हुए कहा कि आज महिलाओं को आप हर क्षेत्र में आगे देख सकते है अब तो हमने महिला विष्व कप जीत कर पूरे देश में महिलाओं का मान बढ़ाया हैं। कार्यक्रम संयोजक डॉ अभय रंजन श्रीवास्तव ने इस प्रकार के आयोजनों में शामिल होने वाले सभी का अभिवादन किया और महिला के प्रति सम्मान करने का आह्वान छात्रों से की।
आज के कार्यक्रम में डॉ श्रावणी , डॉ मिली दत्ता, डॉ अमृता सरकार, श्रीमती मिनि दुबे, एलिश प्रीति, अनामिका, सरिता , डॉ आशुतोष मिश्र, डॉ सौमित्रो, खालिद असरफ, डॉ उमेश प्रशाद, सोनी कुमारी, वोनीमा तिग्गा, डॉ महुवा बनर्जी सहित सैकड़ों संख्या में छात्र उपस्थित हुए आयोजन में प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें पेंटिंग, भाषण और कविता महिलाओं से संबंधित विषयों पर आयोजित किया गया।
टीम एबीएन, रांची। दिनांक 13/02/ 2026 को संस्कृत विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची एवम पूर्ववर्ती छात्र संघ के द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रिय शोध-संगोष्ठी का प्रो. चंद्रकांत शुक्ल के अध्यक्षता में दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया गया।
संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो अर्चना कुमारी दुबे के द्वारा वैदिक श्लोक के माध्यम से स्वागत संबोधन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि ओड़िआ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शत्रुघ्न पाणिग्रही ने वेद-वेदाङ्ग में भारतीय ज्ञान परंपरा के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए वेद-वेदाङ्गो का ज्ञान नितान्त आवश्यक है।
सृष्टि उत्पत्ति के ज्ञान हेतु ऋग्वेद के नासदीय सूक्त, पुरुष सूक्त, हिरण्यगर्भ सूक्तों का पठन-पाठन आवश्यक हो जाता है। अग्नि के अनेकों प्रकार हो सकते हैं पर सबके मूल में अग्निदेव ही हैं।
विशिष्टातिथि पूर्व कुलपति प्रो. कामिनी कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को हजारों वर्षों से चली आ रही एक समृद्ध परंपरा कही। यह आधुनिक युग में भौतिकता एवं आध्यात्मिकता के बीच समन्वय रखना सिखाती है।
अध्यक्षीय भाषण में प्रो चंद्रकांत शुक्ल ने वेद एवं वेदाङ्ग के बारे में विस्तृत जानकारी दी जो आज के दौर में छात्र अपने शैक्षणिक कार्यकाल में अध्ययन कर रहे है। पूर्ववर्ती छात्र संघ के अध्यक्ष डॉ मीना शुक्ल ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
मंच संचालन प्राध्यापक डॉ. शैलेश मिश्र ने करते हुए आयुर्वेद में निहित दैनिक दिनचर्या को विस्तृत रूप से बताया जो आधुनिक जीवन के सर्वांगीण विकास के अत्यंत आवश्यक है। द्वितीय सत्र के राष्ट्रिय शोध-संगोष्ठी में प्रथम दिन 70 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। अंत में पूर्ववर्ती छात्र संघ की बैठक करते हुए प्रथम दिवस की कार्यक्रम को समाप्त किया गया।
संगोष्ठी में डॉ ताराकांत शुक्ल, डॉ मोहन गोप, डॉ ब्रजेश मिश्र, डॉ जानकी देवी, डॉ मधुलिका वर्मा, डॉ श्रीप्रकाश सिंह, डॉ भारती द्विवेदी,डॉ धीरेंद्र दुबे, डॉ. एस. के. घोषाल, डॉ. राहुल कुमार, डा.जगदम्बा प्रसाद, डा.लक्ष्मी कुमारी, डॉ पारंगत आर्य, डॉ जीतेश पासवान, शोधार्थी गण व अन्य उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। गुरुवार को संस्कृत विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची में पूर्ववर्ती छात्र संघ की बैठक हुई, जिसमें दो दिवसीय राष्ट्रिय शोध-संगोष्ठी को अंतिम रूप दिया गया। वेद-वेदाङ्ग में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस विषय पर दिनांक 13 एवं 14 मार्च, 2026 को राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी का आयोजन किया जायेगा।
विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में उपर्युक्त विषय पर राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी में 150 से ज्यादा शोध पत्र वाचन किया जायेगा, जिनका रजिस्ट्रेशन अब किया जा चुका है।
बैठक में प्रो चंद्रकांत शुक्ल, डॉ मीना शुक्ला, प्रो अर्चना कुमारी दुबे, डॉ मधुलिका वर्मा, डॉ श्रीप्रकाश सिंह, डॉ भारती द्विवेदी, डॉ शैलेश कुमार मिश्र, डॉ धीरेंद्र दुबे, डॉ. एसके घोषाल, डॉ राहुल कुमार, डॉ जगदम्बा प्रसाद, डॉ लक्ष्मी कुमारी, शोधार्थी गण व अन्य उपस्थित थे।
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