कानून व्यवस्था

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Published / 2025-11-13 18:38:42
15 से फास्टटैग नहीं रहने पर लगेगा दोगुना टोल टैक्स

15 नवंबर से टोल प्लाजा के नियमों में बड़ा बदलाव, बिना फास्ट टैग वालों को देना होगा दोगुना टोल, जानें पूरी डिटेल 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप अक्सर हाइवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 15 नवंबर 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के बाद अब टोल का भुगतान करने के तरीके के आधार पर शुल्क तय किया जायेगा यानी नकद भुगतान करने पर ज्यादा टोल, जबकि डिजिटल भुगतान करने पर राहत मिलेगी। 

नया नियम क्या कहता है? 

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में संशोधन किया है। इसके तहत अब अगर कोई वाहन चालक बिना वैध फास्टटैग के टोल प्लाजा में प्रवेश करता है, तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जायेगा। लेकिन अगर फास्टटैग फेल हो जाने पर चालक यूपीआई या किसी डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे केवल 1.25 गुना टोल शुल्क ही देना होगा। 

आसान उदाहरण से समझिये 

  • मान लीजिये किसी वाहन का सामान्य टोल 100 रुपये है, तो 
  • अगर फास्टटैग सही काम कर रहा है, तो ड्राइवर को सिर्फ 100 रुपये देने होंगे। 
  • अगर फास्टटैग फेल हो गया और ड्राइवर नकद भुगतान करता है, तो उसे 200 रुपये चुकाने होंगे। 
  • लेकिन अगर डिजिटल माध्यम (जैसे यूपीआई, कार्ड या नेटबैंकिंग) से भुगतान किया जाता है, तो केवल 125 रुपये देने होंगे। 
  • यानी अब डिजिटल भुगतान करने वालों को सीधी छूट मिलेगी, जबकि नकद लेनदेन पर भारी जुर्माना लगेगा। 

सरकार का मकसद क्या है? 

मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव टोल प्लाजा पर पारदर्शिता बढ़ाने, नकद लेनदेन कम करने और डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आयेगी और यात्रियों को तेज और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा। 

टोल प्रणाली को और आधुनिक बनाने की तैयारी 

सरकार आने वाले समय में टोल सिस्टम को पूरी तरह आटोमैटिक और जीपीएस आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत भविष्य में गाड़ी के सफर की दूरी के हिसाब से टोल काटा जा सकेगा।

Published / 2025-11-12 22:08:19
झारखंड : अब कुत्ते-बिल्लियों का आंकड़ा रखना जरूरी

झारखंड के शहरी क्षेत्रों में पालतू कुत्ते-बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन कंपलसरी, कितनी फीस, क्या लगेंगे डाक्यूमेंट? 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के शहरी क्षेत्रों में अब पालतू कुत्ते और बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान मामले में दिये गये आदेश के बाद शहरी निकायों ने सूचना जारी कर लोगों से आदेश का पालन करने के लिए कहा है। इसके तहत, लोगों को अपना पालतू कुत्ते और बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही गयी है। 

झारखंड में पालतू कुत्ते और बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया है। इसके तहत गढ़वा नगर परिषद ने आम सूचना जारी करते हुए लोगों से तय समय में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। राज्य के अन्य नगर निकाय भी इसी तरह की सूचना जारी करने की तैयारी में हैं। नगर निकायों ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण के पालतू जानवर रखने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 के तहत कार्रवाई की जायेगी। 

जानें क्या होगी रजिस्ट्रेशन फीस 

आम लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपये जबकि कमर्शियल और ब्रीडिंग के उद्देश्य से पालतू जानवर रखने वालों के लिए 1000 फीस रुपये निर्धारित किया गया है। रजिस्ट्रेशन के दौरान पहचान पत्र, टीकाकरण प्रमाण पत्र और पालतू पशु का फोटो अनिवार्य रूप से देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने राज्यों को आदेश दिया है कि इंस्टीट्यूशनल साइट्स से आवारा कुत्तों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए। 

रांची में 25 हजार पालतू कुत्ते 

कोर्ट ने इसकी रिपोर्ट मुख्य सचिव न्यायालय को सौंपने का आदेश दिया। रांची नगर निगम क्षेत्र में पालतू कुत्तों का पंजीकरण बेहद कम है। निगम के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 25 हजार पालतू कुत्ते हैं, लेकिन केवल एक हजार का ही पंजीकरण हुआ है। 2017 के सर्वे में क्षेत्र में करीब 1.25 लाख कुत्ते पाये गये थे, जबकि 2012 की गणना में यह संख्या 1 लाख 37 हजार से अधिक थी। निगम ने अगस्त 2025 तक 1।33 लाख आवारा कुत्तों की नसबंदी की। 

एनिमल बर्थ कंट्रोल एक्ट 

यह अभियान एनिमल बर्थ कंट्रोल एक्ट 2023 के तहत चलाया गया था। पिछले दो सालों में कुल 4166 डॉग्स को एंटी-रेबीज टीका लगाया गया है। पशुपालन विभाग और नगर निगम संयुक्त रूप से कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने और टीकाकरण सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं।

Published / 2025-11-12 19:38:37
अस्थायी नियुक्ति तिथि से ही सेवा और पेंशन लाभ मिलना संभव

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की सभी अपीलें की खारिज, एकलपीठ का फैसला बरकरार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क (जोधपुर)। राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की सभी विशेष अपीलों को खारिज करते हुए एकलपीठ के उस महत्वपूर्ण निर्णय को बरकरार रखा है, जिसमें अस्थायी नियुक्ति तिथि से ही सेवा एवं पेंशन लाभ देने के आदेश दिये गये थे। 

यह फैसला आयुर्वेद चिकित्सक डॉ बिजेंद्र सिंह त्यागी, पवन कुमार शर्मा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आया है, जिन्हें अब उनकी प्रारंभिक अस्थायी नियुक्ति तिथि से समस्त सेवा व पेंशन परिलाभ मिल सकेंगे। 

राज्य सरकार की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ का आदेश विधिसम्मत और यथोचित है। अत: इसे बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की सभी अपीलें निरस्त की जाती हैं। 

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर और अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 1990 से 1993 के बीच आयुर्वेद विभाग में अस्थायी रूप से नियुक्त चिकित्सकों को बाद में नियमित किया गया, लेकिन उनकी प्रारंभिक अस्थायी सेवा अवधि को कुल सेवा काल में नहीं जोड़ा गया और वसूली आदेश जारी कर दिये गये थे। 

एकलपीठ ने 12 जनवरी 2023 को इन वसूली आदेशों को रद्द करते हुए आरंभिक नियुक्ति तिथि से सेवा व पेंशन लाभ देने के निर्देश दिये थे। राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए विशेष अपीलें दाखिल कीं, जिन्हें अब खंडपीठ ने पूरी तरह खारिज कर दिया। इस निर्णय से प्रदेश के बड़ी संख्या में आयुर्वेद चिकित्सकों को महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई है।

Published / 2025-11-08 11:04:18
अनिल शर्मा की रिहाई पर हाइकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

  • चर्चित भोभा सिंह हत्याकांड में उम्र कैद की सजा काट रहा अपराधी अनिल शर्मा की रिहाई पर सरकार से जवाब तलब

टीम एबीएन, रांची। रांची के चर्चित भोमा सिंह हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी अनिल शर्मा की रिहाई के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। शुक्रवार को अनिल शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 29 वर्ष से जेल में रहने के बावजूद अब तक अनिल शर्मा को रिहा क्यों नहीं किया गया। अनिल शर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह उम्रकैद की सजा के तहत 14 वर्ष से अधिक की अवधि पूरी कर चुका है और अब तक 29 साल से जेल में बंद है। ऐसे में नियमों के अनुसार उसे रिहा किया जाना चाहिए। 

बता दें कि 22 जनवरी 1999 को रांची के बिरसा मुंडा जेल में बंद रहते हुए अनिल शर्मा ने बबलू श्रीवास्तव, निरंजन कुमार सिंह, सुशील श्रीवास्तव और मधु मियां के साथ मिलकर कुख्यात भोमा सिंह की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भोमा सिंह के चचेरे भाई के बयान पर सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था। ट्रायल के बाद कोर्ट ने अनिल शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

Published / 2025-11-06 20:47:21
क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन पर ईडी का शिकंजा

11.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क; अवैध सट्टेबाजी एप केस में कार्रवाई 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन की मुश्किलें बढ़ गयी हैं। गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सट्टेबाजी के केस में कार्रवाई करते हुए दोनों की 11.14 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली। सूत्र ने बताया कि आनलाइन सट्टेबाजी साइट 1 बीईटी के खिलाफ मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत धवन की 4.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और रैना के 6.64 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड को कुर्क करने का अनंतिम आदेश जारी किया गया है। 

करोड़ों की ठगी का आरोप 

पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना और शिखर धवन से हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ की थी। इस दौरान दोनों के बयान दर्ज किये गये थे। बता दें कि, ईडी इस समय कई ऐसे मामलों की जांच कर रही है, जो अवैध बेटिंग एप्स से जुड़े हैं। एजेंसी का मानना है कि इस तरह के बेटिंग एप्स न केवल अवैध हैं, बल्कि इनके जरिए बड़े पैमाने पर धन शोधन की गतिविधियां भी होती हैं।

इन एप्स पर आरोप है कि इन्होंने लाखों लोगों और निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है या फिर भारी मात्रा में टैक्स की चोरी की है। इस मामले में ईडी ने कार्रवाई तेज की है, खासकर उन विज्ञापनों पर जिनमें फिल्मी सितारे और क्रिकेटर शामिल हैं। इसी कड़ी में अब क्रिकेटरों और फिल्मी हस्तियों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ायी जा रही है।  

ईडी के रडार पर और कौन? 

ईडी की जांच में पाया गया है कि दोनों पूर्व क्रिकेटरों ने 1बीईटी और उसके प्रतिनिधियों के प्रचार के लिए विदेशी संस्थाओं के साथ जानबूझकर समर्थन समझौते किये। ईडी ने इस जांच के तहत इन दोनों के अलावा युवराज सिंह और रॉबिन उथप्पा जैसे अन्य पूर्व क्रिकेटरों, अभिनेता सोनू सूद, उर्वशी रौतेला, मिमी चक्रवर्ती (तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद) और अंकुश हाजरा (बंगाली अभिनेता) से भी पूछताछ की है।

Published / 2025-11-04 18:44:43
सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में फैसला सुरक्षित

सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता (सीजीएल)-2023 के तहत 21 व 22 सितंबर को ली गयी परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआइ जांच को लेकर दायर पीआइएल पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी का पक्ष सुना। 

मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। खंडपीठ ने सभी पक्षों को अपना लिखित बहस चार नवंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वहीं खंडपीठ ने सीजीएल परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशन पर पूर्व में लगायी गयी रोक (अंतरिम आदेश) को बरकरार रखा। 

इससे पहले वेरिफिकेशन में सफल अभ्यर्थियों दीपक उरांव व अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, वरीय अधिवक्ता वी मोहना व अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परीक्षा में पेपर लीक का आरोप आधारहीन है। ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित होता है कि पेपर लीक हुआ है। 

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बहस पूरी होने के बाद प्रार्थियों की ओर से भी पक्ष रखा गया। बताया गया कि राज्य सरकार ने कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए पूर्व की एसआइटी को खत्म कर दूसरी एसआइटी बना दी, जो गलत है। अनुसंधान सही दिशा में नहीं हो रहा है। सीआइडी जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रही है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सीबीआइ को हैंडओवर करना चाहिए, ताकि पेपर लीक की सच्चाई सामने आ सके। 

प्रार्थी प्रकाश कुमार व अन्य की ओर से पीआइएल दायर की गयी है। इसमें सीजीएल परीक्षा रद्द करने तथा पूरे मामले की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की गयी है। परीक्षा में पेपर लीक, पेपर का सील खुला होना और बड़ी संख्या में प्रश्नों को रिपीट करने जैसी गड़बड़ियों के आरोप लगाये गये हैं। सीजीएल परीक्षा-2023 में 3,04,769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। विभिन्न विभागों में 2025 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी है।

Published / 2025-10-29 18:09:29
संत आसाराम को छह महीने की मेडिकल जमानत

रेप केस में उम्रकैद काट रहे आसाराम को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट से 6 महीने की मेडिकल जमानत मंजूर 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेप केस में उम्रकैद की सजा भुगत रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी खराब सेहत को देखते हुए उन्हें 6 महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद जारी किया।

बीमारी का हवाला देकर मांगी थी जमानत

फिलहाल आसाराम का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने अपनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए कोर्ट में नियमित जमानत की अर्जी दी थी। हालांकि अदालत ने स्थायी राहत नहीं दी, बल्कि चिकित्सा कारणों से अंतरिम जमानत को मंजूरी दी है ताकि वे उपचार जारी रख सकें।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत

इससे पहले जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी आसाराम को मेडिकल ग्राउंड पर मार्च के अंत तक अंतरिम जमानत दी थी। शीर्ष अदालत ने उस समय कहा था कि आसाराम की उम्र अधिक है, उन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका है और कई गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं। 

आसाराम को अगस्त 2013 में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जोधपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। यह मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आया था, जब 16 वर्षीय लड़की ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी कि जोधपुर स्थित आश्रम में आसाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

Published / 2025-10-28 22:40:25
अब हर महीने 25,000 कमाने वालों का भी कट सकता है PF

  • हर महीने 25000 कमाने वालों का कट सकता है PF, EPFO कर सकता है नियमों में बड़ा बदलाव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि श्रम मंत्रालय के आंतरिक आकलन के अनुसार, वेतन सीमा में 10,000 रुपये प्रति माह की वृद्धि से 10 मिलियन से अधिक व्यक्तियों के लिए सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट अनिवार्य हो जाएगा। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ईपीएफओ किस प्रस्ताव पर विचार करने जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। 

आने वाले महीनों में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने की संभावना है। मौजूदा समय में, वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है। यह ईपीएफ और ईपीएस में अनिवार्य अंशदान की वैधानिक सीमा है – जिसका प्रबंधन ईपीएफओ द्वारा किया जाता है। 

जिन कर्मचारियों का मूल वेतन 15,000 रुपए प्रति माह से अधिक है, उनके पास इन दोनों ईपीएफओ योजनाओं से बाहर निकलने का विकल्प है। इंप्लॉर्या के पास ऐसे कर्मचारियों को ईपीएफ और ईपीएस के तहत रजिस्टर्ड करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ईपीएफओ का केंद्रीय न्यासी बोर्ड अपनी अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कर सकता है जो संभवतः दिसंबर या जनवरी में होगी जहां अंतिम मंजूरी दी जा सकती है।

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