कानून व्यवस्था

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Published / 2022-03-24 09:16:01
गोलीकांड : पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी को 10-10 साल की सजा

टीम एबीएन, हजारीबाग। बड़कागांव गोलीकांड में कोर्ट का फैसला आ चुका है। कोर्ट ने मामले में दोनों दोषी पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी को 10-10 साल की सजा सुनाई है। इससे पहले 22 मार्च को दोनों को दोषी ठहराया गया था। क्या है मामला : पूरा मामला 2015 का है। बड़कागांव में एनटीपीसी प्लांट लगा रही थी। जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे थे और वे अपनी जमीन किसी कीमत पर एनटीपीसी को नहीं देना चाह रहे थे। इसी को लेकर झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक निर्मला देवी ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर 2015 में एनटीपीसी के खिलाफ बड़कागांव, हजारीबाग में कफन सत्याग्रह किया था। इस आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी कोशिश कर रही थी। लेकिन बातचीत बेनतीजा होने के बाद विधायक निर्मला देवी को गिरफ्तार कर लिया गया। निर्मला देवी की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण भड़क गए जिसके बाद पुलिस पर पथराव कर उन्हें पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया।

Published / 2022-03-22 17:55:49
बच्ची की हत्या के आरोपी को उम्रकैद की सजा

टीम एबीएन, रांची। शराब नहीं देने के प्रतिशोध में जगरनाथपुर थाना के चंदाघासी निवासी विमल तिर्की उर्फ रघु तिर्की ने अपने गांव के बबलू कच्छप की छह वर्षीय बच्ची की हत्या कर दिया था। पोक्सो के विशेष अदालत ने मंगलवार को दोषी करार अभियुक्त को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की रकम जमा नहीं करने पर उसे अतिरिक्त एक साल सजा काटनी होगी। पोक्सो के विशेष न्यायाधीश मो आसिफ इकबाल ने 15 मार्च को दोषी पाया था। अपर लोक अभियोजक मोहन रजक ने बताया कि बच्ची की हत्या पांच जुलाई 2017 को मुंह दबाकर कर दी गई थी। हत्या से पहले उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई थी। अभियुक्त 11 जुलाई 2017 से लगातार जेल में ही है। मामले के जांच अधिकारी विमल कुमार ने जांच के दौरान पाया की बच्ची की हत्या अप्राथमिकी अभियुक्त विमल तिर्की ने किया है। जबकि बच्ची के पिता ने अपने गोतिया के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। दाखिल चार्जशीट में कहा गया है कि अभियुक्त का मृतका का घर बराबर जाया करता था। एक दिन उसके घर जाकर दारू की मांग की। नहीं मिलने पर बच्ची की हत्या कर बदला लिया। घटना के दिन बच्ची शाम छह बजे दुकान से सामान लाने गई थी। उसी दुकाने पर अभियुक्त खड़ा था। सामान लेने के बाद बच्ची को अभियुक्त ने गोदी में उठाकर अपने साथ ले गया। जब बच्ची घर नहीं लौटी तो उसके घरवालों ने खोजबीन की। अगले दिन उसकी लाश खेत में मिली थी।

Published / 2022-03-22 17:39:25
बड़कागांव के पूर्व विधायक दम्पत्ति दोषी करार

टीम एबीएन, रांची। जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा समेत कई अन्य आरोपों में पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एवं उनकी पत्नी पूर्व विधायक निर्मला देवी (तत्कालीन विधायिका) को अदालत ने दोषी करार दिया है। जबकि पुत्र अंकित राज को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने मंगलवार को बड़कागांव कांड संख्या 228/2016 मामले में फैसला सुनाया। साथ ही सजा के बिन्दु पर सुनवाई के लिए 24 मार्च की तारीख निर्धारित की है। फैसले के समय मां-बेटा कोर्ट में उपस्थित थे। जबकि योगेंद्र साव को जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्य्म से अदालत में पेश किया गया था। दोषी पाए जाने के बाद निर्मला देवी को भी जेल भेज दिया गया। मालूम हो कि एक अक्तूबर 2016 को चिरूडीह खनन के रास्ते पर विधायक निर्मला देवी कफन सत्याग्रह कर रही थीं। एनटीपीसी के खनन क्षेत्र के दोनों मार्ग अवरूद्ध हो गए थे। विधि-व्यवस्था को ठीक करने के लिए निर्मला देवी को बड़कागांव कांड संख्या 226/16 मामले में गिरफ्तार किया गया। लेकिन उनके समर्थकों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला करते हुए उन्हें छुड़ा ले गए। जिसमें कई अधिकारी एवं पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हो गये थे। मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक परमानंद यादव ने गवाही कराई थी। मामले में हजारी कोर्ट में 15 गवाह एवं रांची कोर्ट में पांच गवाही दर्ज की गई थी। अदालत इसी आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया है। तत्कालीन एएसपी अभियान ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी : घटना में गंभीर रूप से जख्मी एएसपी अभियान कुलदीप कुमार के बयान पर बड़कागांव थाना में कांड संख्या 228/16 के तहत दो अक्तूबर 2016 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जख्मी होने के बाद उनको एयर लिफ्ट कर मेडिका रांची में भर्ती कराया गया था। मेडिका में ही घटना की पूरी जानकारी दी थी। घटना में बड़कागांव के तत्कालीन सीओ शैलेंद्र कुमार सिंह भी गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। मेडिका में उनका इलाज चला। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने के बाद उन्हें मेंदाता गुडगांव ले जाया गया था। जहां तीन दिनों तक आईसीयू में रहे। 10 अक्तूबर 2016 को अस्पताल से छूट्टी मिली थी। घटना की जांच अनुसंधान पदाधिकारी विजय शंकर ने की थी। योगेंद्र साव ने 15 अप्रैल 2019 को किया था सरेंडर : योगेंद्र साव एवं निर्मला देवी को शीर्ष अदालत ने सशर्त 15 दिसंबर 2017 को जमानत दी थी। जिसमें एक शर्त के रूप में भोपाल में रहने का निर्देश शामिल था। जहां जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने जमानत रद्द करते हुए चार अप्रैल 2019 को अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश पर वह रांची की निचली अदालत में 15 अप्रैल 2019 को सरेंडर किया। तब से इस मामले में जेल में हैं। बड़कागांव की घटना समेत 17 मुकदमे हजारीबाग से पहुंचा रांची : सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने के साथ ही हजारीबाग कोर्ट में चल रही सुनवाई के सभी मामलों को रांची कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। बड़कागांव समेत सभी 17 मामलों के केस रिकॉर्ड हजारीबाग से रांची अप्रैल 2019 को पहुंचा। मामले में सुनवाई प्रारंभ हुई। घटना में जो गंभीर रूप से जख्मी हुए : घटना में गंभीर रूप से जख्मी होनेवालों में बड़कागांव के तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार सिंह, एएसपी कुलदीप कुमार, एसडीपीओ प्रदीप पाल, डीआरडीए निदेशक श्रीनारायण विज्ञान प्रभाकर, एएसपी के अंगरक्षक अजय कुमार प्रमाणिक, चालक किशुन कुमार साव समेत अन्य शामिल है। पुलिस की गोली से चार की मौत : घटना में पुलिस की ओर से फायरिंग की गई थी। जिसमें पवन कुमार साव, मो महताब, रंजन कुमार दास एवं अभिषेक की मौत हो गई थी। फैक्ट फाइल : घटना - चिरूडीह खनन क्षेत्र बड़कागांव तारीख - 1 अक्तूबर 2016 की सुबह छह बजे प्राथमिकी - 2 अक्तूबर 2016 नामजद - योगेंद्र साव, निर्मला देवी एवं अंकित राज चार्जशीट - 3 दिसंबर 2016 आरोप तय - 19 अप्रैल 2018 रांची कोर्ट में गवाही - 26 अप्रैल 2019 से, अभियोजन साक्ष्य बंद - 23 नवंबर 2021, अभियोजन गवाह संखाय - 20, आरोपियों का बयान - 9 दिसंबर 2021, बचाव पक्ष की गवाही बंद - 9 फरवरी 2022, दोनों पक्षों की बहस पूरी - 8 मार्च 2022, फैसला - 22 मार्च 2022, सजा का ऐलान - 24 मार्च 2022 को होगा।

Published / 2022-03-22 17:24:32
माल्या, मोदी-चौकसी की 19,111.20 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने मंगलवार को कहा कि बैंकों का ऋण चुकाए बिना विदेश भाग जाने वाले कारोबारियों विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की 19,111.20 करोड़ रुपये की संपत्ति अब तक जब्त की गई है। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि तीनों कारोबारियों ने अपनी कंपनियों के माध्यम से सरकारी बैंकों से बेईमानी से निधियां निकालकर धोखाधड़ी की है, जिसके परिणाम स्वरूप सरकारी क्षेत्र के बैंकों को कुल 22585.83 करोड़ रुपये की हानि हुई है। उन्होंने कहा, 15 मार्च 2022 के अनुसार इनमें से 19111.20 मूल्य की आस्तियां धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जब्त की गई हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 15,113.91 करोड़ रुपये की आस्तियां सरकारी क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ 335.06 करोड रुपए मूल्य की आस्तियां जब्त कर भारत सरकार को दे दी गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिनांक 15 मार्च 2022 के अनुसार इन मामलों में धोखाधड़ी से निकाली गई कुल निधि में से 84.61 प्रतिशत जब्त कर ली गई है और बैंकों को हुई कुल हानि का 66.91 प्रतिशत बैंकों को वापस दे दिया गया है। उन्होंने कहा, यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के संघ ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें सौंपी गई यात्रियों को बेचकर 7975.27 करोड रुपये वसूल कर लिया है।

Published / 2022-03-17 07:38:25
डोरंडा मामले में ईडी ने लालू समेत अन्य आरोपियों पर दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। रांची के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और नया केस दर्ज किया है। इससे पहले भी ईडी ने दो मामलों में पीएमएलए एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। डोरंडा कोषागार से निकासी के मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सहित चारा घोटाले के अन्य सजायाफ्ता के खिलाफ ईडी ने नया केस दर्ज किया है। 139 करोड़ की डोरंडा ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद सहित अन्य आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए पांच साल जेल की सजा सुनाई है। सीबीआई कोर्ट के फैसले के आधार पर ईडी ने इस संबंध में प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की संगत धाराओं के तहत नया केस दर्ज किया है। सूत्रों ने बताया कि इस मामले में वैसे लोगों को भी जांच के दायरे में रखा गया है, जिनकी मृत्यु ट्रायल के दौरान हो गई थी। जिन आरोपियों की मौत ट्रायल के दौरान हो गई थी, उनके परिजनों की 1990 के बाद अर्जित संपत्ति और आय के स्रोतों की जानकारी ली जाएगी। पिछले माह ईडी ने चारा घोटाला के दो अन्य कांडों में मामला दर्ज किया था। दुमका कोषागार से निकासी के मामले मे लालू प्रसाद सहित 19 लोगों को ईडी ने आरोपी बनाया था। वहीं, दुमका कोषागार से ही निकासी के दूसरे मामले में आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था।

Published / 2022-03-16 07:58:48
हिजाब विवाद : होली की छुट्टी के बाद सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उच्चतम न्यायालय कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इनकार करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर होली के अवकाश के बाद सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह होली के बाद इस मामले में सुनवाई की तारीख तय करेगा। इसी के साथ कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े की तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया। हेगड़े की मांग थी कि, इस मामले की सुनवाई सोमवार को ही की जाए। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि वह होली की छुट्टियों के बाद सुनवाई से जुड़ी याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा। उच्चतम न्यायालय में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई : आपको बतां दे कि उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को एक याचिका दायर कर कक्षा के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति के लिए याचिकाओं को खारिज करने संबंधी कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है और उसने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए मुस्लिम छात्राओं की खाचिकाएं खारिज कर दी। अदालत ने इसके साथ ही राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध बरकरार रखा। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक मुस्लिम छात्रा ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाली उडुपी स्थित गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग की याचिकाएं मंगलवार को खारिज कर दीं। उच्च न्यायालय ने कहा कि स्कूल की वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से स्वीकृत है, जिस पर छात्राएं आपत्ति नहीं उठा सकतीं। उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में, याचिकाकर्ता ने कहा है कि उच्च न्यायालय ने धर्म और विवेक की स्वतंत्रता के बीच विभेद करके गलती की है और अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि जो एक धर्म का पालन करते हैं, उन्हें यह अधिकार नहीं है। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय इस तथ्य का संज्ञान लेने में विफल रहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हिजाब पहनना निजता के अधिकार के दायरे में आता है।

Published / 2022-03-15 17:50:52
हिजाब विवाद : कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिजाब विवाद के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद अब याचिकार्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, हिजाब बैन पर जारी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई है। अर्जी दायर करने वाली याचिकाकर्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि हिजाब इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका एक छात्रा निबा नाज ने दाखिल की है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में जरूरी धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने वाली मुस्लिम छात्राओं की याचिकाएं खारिज कर दी। अदालत ने इसके साथ ही राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखा। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल की वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से स्वीकृत है, जिस पर छात्राएं सवाल नहीं उठा सकतीं। कर्नाटक सरकार ने हर किसी से आदेश का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि एजुकेशन जरूरी है। कक्षा में हिजाब के साथ नहीं मिली थी एंट्री : गौरतलब है कि एक जनवरी को उडुपी में एक कॉलेज की छह छात्राएं कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुई थीं और उन्होंने हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश करने से रोकने पर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था। मुख्य न्यायाधीश ऋतु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जे एम खाजी की पीठ ने मंगलवार को आदेश का एक अंश पढ़ते हुए कहा, हमारी राय है कि मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। सरकारी आदेश को अवैध ठहराना गलत : पीठ ने यह भी कहा कि सरकार के पास पांच फरवरी 2022 के सरकारी आदेश को जारी करने का अधिकार है और इसे अवैध ठहराने का कोई मामला नहीं बनता है। इस आदेश में राज्य सरकार ने उन कपड़ों को पहनने पर रोक लगा दी है, जिससे स्कूल और कॉलेज में समानता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होती है। मुस्लिम लड़कियों ने इस आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

Published / 2022-03-13 17:48:10
यूक्रेन से शीघ्र अपना दूतावास हटाएगा भारत : विदेश मंत्रालय

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने अपने दूतावास को अस्थायी तौर पर यूक्रेन से पोलैंड स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला युद्धग्रस्त यूक्रेन में बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए लिया गया। हालिया दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य प्रमुख शहरों में रूसी हमले तेज होने के मद्देनजर भारत ने अपने दूतावास को पोलैंड ले जाने का फैसला किया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यूक्रेन के पश्चिमी हिस्सों में हमले समेत देश में बेहद तेजी से बिगड़ते हालात के मद्देनजर यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास को अस्थायी तौर पर पोलैंड स्थानांतरित करने का फैसला किया गया है। मंत्रालय ने कहा, आने वाले समय के घटनाक्रम के अनुसार दोबारा हालात की समीक्षा की जाएगी।

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