एबीएन न्यूज नेटवर्क, लातेहार। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार एवं झारखंड विधिक सेवा प्रधिकार के आदेषानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीष मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में व्यावहार न्यायालय लातेहार में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आॅनलाइन उद्धघाटन झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश यह झालसा के मुख्य संरक्षक तरलोक सिंह चैहान ने किया।
मौके पर उन्होंने राज्य भर में सैनिकों एंव उनके परिजनों के लिए सैनिक बोर्ड एवं डेडिकेटेड सेल काशुभारंभ किया। मौके पर मुख्य न्यायाधीश के साथ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सह झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यकारी अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद सहित उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश एवं मेजर जनरल सज्जान सिंह मान मौजूद रहे।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा किये जा रहे कल्याणकारी योजनओं के बारे में बात करते हुए इसकी सराहना की एवं सभी न्यायिक पदधिकारियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों को बढ़-चढ़ कर लोक अदालत में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल छह बेंच का गठन किया गया था। इसमें प्री-लीटिगेशन के लगभग 11 हजार 500 मामले एवं कोर्ट लंबित तीन हजार तीन सौ मामलों का निष्पादन किया गया। इसके साथ ही विभिन्न वादों में लगभग एक करोड़ 38 लाख रुपये का सेटलमेंट किया गया।
मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम दिनेश कुमार मिश्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार दूबे, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सुनील दत्ता द्विवेदी, सीजेएम विक्रम आनंद, एसीजेएम कुमारी जीव, सिविल जज तृतीय सह न्यायिक दंडाधिकारी मीनाक्षी मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्रधिकार के सचिव शिवम चैरसिया, एसडीजेएम प्रणव कुमार, प्रभारी न्यायाधीश सह प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जेजेबी उत्कर्ष जैन, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष पन्नालाल, कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष अजीत कुमार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लाल अरविंद नाथ शाहदेव, बार एसोसिएशन लातेहार के सदस्य, डेडिकेटेड सेल के अधिवक्ता निरंजन प्रकाश मल्लान, व्यवहार न्यायालय के कर्मचारीगण, पीएलवी, बैंक कर्मी सहित सैकड़ों की संख्या में वादकारी मौजूद रहे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। जिले के चिरकुंडा थाना क्षेत्र के कुमारधुबी स्टेशन रोड निवासी सरवर हुसैन को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक महिला से ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सरवर हुसैन अपने साथियों के साथ खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर चौबीस परगना जिले के बारासात थाना क्षेत्र स्थित एक महिला के घर पहुंचा।
उस समय महिला घर में अकेली थी। ठगों ने तलाशी लेने का नाटक किया और उसके कीमती आभूषण लेकर फरार हो गये। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाला, जिसमें से एक स्थानीय युवक पकड़ा गया। पूछताछ में उसने सरवर हुसैन का नाम बताया। इसके बाद मंगलवार की शाम पश्चिम बंगाल पुलिस चिरकुंडा थाना पहुंची और कुमारधुबी स्टेशन रोड के पास से सरवर हुसैन को हिरासत में ले लिया।
कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को पश्चिम बंगाल ले जाया गया। यह मामला दशार्ता है कि ठग अब लोगों को गुमराह करने के लिए नकली अधिकारी बनकर भी अपराध को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में आमजन को सतर्क रहने की जरूरत है।
टीम एबीएन, रांची। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले के आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मधु कोड़ा ने इस मामले में सीबीआई कोर्ट के आरोप गठन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कोड़ा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।
डिस्चार्ज के चरण में साक्ष्य की स्वीकार्यता या गुण-दोष से संबंधित मुद्दों पर विचार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद मधु कोड़ा के खिलाफ ट्रायल शुरू हो जायेगा। मधु कोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए हैदराबाद की बिजली कंपनी आईवीआरसीएल के डायरेक्टर डीके श्रीवास्तव से मुंबई में 11.40 करोड़ रुपये घूस ली थी।
साथ ही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उसे लातेहार, गढ़वा और पलामू सहित छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण करने का काम दिया गया। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले में मधु कोड़ा ढाई साल तक जेल में रहे थे। उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत मिली थी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन खरीदने के 15 साल पुराने मामले में राज्य के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का और रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात सहित नौ दोषियों को अदालत ने शनिवार को सजा सुनायी है।
सीबीआई के विशेष जज एसएन तिवारी की कोर्ट में शनिवार को वीडियों कांफ्रेंसिग के जरिये सजा की बिंदु पर सुनवाई हुई। सभी आरोपित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े थे। सीबीआई के लोक अभियोजक दविंद्र पाल सूद ने सीबीआई की ओर से पक्ष रखा।
टीम एबीएन, रांची। अब झारखंड में बिजली दर निर्धारण के नियमों में बदलाव होगा। इसके लिए झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। ड्राफ्ट के मुताबिक नये नियम 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक की अवधि के लिए लागू होंगे।
नये नियम का उद्देश्य झारखंड राज्य में वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा प्रतिस्पर्धा, दक्षता, संसाधनों के किफायती उपयोग, अच्छे प्रदर्शन और इष्टतम निवेश को प्रोत्साहित करना है।
लेखा विवरण का अर्थ प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए तैयार किये गये वित्तीय विवरणों से होगा। अन्य व्यवसाय से आय का अर्थ वितरण लाइसेंसधारी को टैरिफ के अलावा विनियमित व्यवसाय से संबंधित परिसंपत्तियों या जनशक्ति के उपयोग के लिए प्राप्त आय से होगा। नॉन-टैरिफ इनकम का मतलब विनियमित व्यवसाय से संबंधित शुद्ध आय से होगा, जिसमें अन्य व्यवसाय से कोई आय शामिल नहीं है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड शराब घोटाला मामले में 92 दिनों से जेल में बंद वरीय आईएएस अधिकारी विनय चौबे को बड़ी राहत मिली है। 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलके जमा करने के साथ एसीबी कोर्ट ने उन्हें बीएनएसएस की धारा 187(2) के तहत बुधवार को जमानत दे दी।
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि चौबे राज्य से बाहर जाने से पहले अदालत को सूचित करेंगे और ट्रायल के दौरान अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलेंगे। गौरतलब है कि चौबे की गिरफ्तारी को 92 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके कारण उन्हें जमानत का लाभ मिला।
अदालत में चौबे की ओर से अधिवक्ता देवेश आजमानी ने पैरवी की। चौबे झारखंड सरकार में वरीय पद पर कार्यरत थे और उन पर शराब घोटाले में संलिप्त होने का आरोप है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने मेसरा स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी) परिसर में पिछले साल हुई एक छात्र की हत्या के मामले में संस्थान पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुमार्ना छात्र के माता-पिता को दिया जायेगा। अदालत ने विद्यार्थियों के सामने आने वाली आपात चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों और विद्यालयों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश भी तैयार किये।
न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की पीठ ने कहा कि बीआईटी-मेसरा अपने संरक्षण में एक छात्र की सुरक्षा करने के अपने कर्तव्य में विफल रहा और संस्थागत विफलता के कारण एक व्यक्ति की जान चली गयी। अदालत ने 12 अगस्त को दिये आदेश में कहा कि झारखंड के सभी शैक्षणिक संस्थानों को एम्बुलेंस सुविधाओं वाले सरकारी और निजी अस्पतालों की एक सूची बनानी होगी।
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में एक डिस्पेंसरी या क्लिनिक होना चाहिए, जिसमें 500 से 1,000 विद्यार्थियों पर एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक हो और उनमें जीवन रक्षक दवाइयां व अन्य दवाएं उपलब्ध हों। आदेश के मुताबिक, कक्षाओं और संस्थान के प्रमुख स्थानों पर लगे सूचना पट्टों पर अस्पतालों और चिकित्सकों के नाम व उनके संपर्क नंबर भी प्रमुखता से प्रदर्शित किये जाने चाहिए।
अदालत ने कक्षाओं और छात्रावास के प्रवेश द्वारों के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इसके अलावा विद्यार्थियों और संस्थान के बीच संपर्क बनाये रखने के लिए एक अलग शिकायत प्रकोष्ठ और एक छात्र निगरानी दल का गठन किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायत निवारण के लिए संस्थान द्वारा एक पोर्टल या वेबसाइट भी बनाई जानी चाहिए। न्यायमूर्ति प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों मौसम कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, साहिल अंसारी और इरफान अंसारी की याचिकाएं खारिज कर दीं।
टीम एबीएन, रांची। भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली द्वारा सूचित किया गया है कि झारखंड के 5 राजनीतिक दलों यथा हजारीबाग के आपका हमारा पार्टी, गिरिडीह के बहुजन सदन मोर्चा, पूर्वी सिंहभूम के झारखंड दिशोम पार्टी, रांची के हम किसान पार्टी एवं झारखंड जनाधिकार पार्टी द्वारा पिछले 06 वर्षों से लोकसभा, विधानसभा के आम चुनाव, उप चुनाव में भाग नहीं लिया गया है।
राजनीतिक दलों के पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देशों में उल्लेख है कि यदि कोई दल लगातार 6 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता है, तो उस दल को पंजीकृत दलों की सूची से हटा दिया जायेगा। इसके अलावा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के अनुसार, दलों को उनके पंजीकरण के समय नाम, पता, पदाधिकारी आदि जैसे विवरण देने होते हैं और किसी भी बदलाव को बिना किसी देरी के आयोग को सूचित करना होता है।
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