कानून व्यवस्था

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Published / 2022-09-28 07:08:33
मोदी सरकार ने पीएफआई पर लगाया 5 साल का बैन, 8 सहयोगी संगठनों पर भी प्रतिबंध

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने कथित रूप से आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर बैन लगा दिया है। केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को गैरकानूनी संगठन बताते हुए उस पर 5 साल का बैन लगाया है। साथ ही पीएफआई के सहयोगी संगठनों पर भी कार्रवाई हुई है। इन पर भी पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया है। गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना : केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मंगलवार रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि पीएफआई और उसके सहयोगी ऐसी विनाशकारी कृत्यों में शामिल रहे हैं, जिससे जन व्यवस्था प्रभावित हुई है, देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर किया जा रहा है और आतंक-आधारित शासन को प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा उसे लागू करने की कोशिश की जा रही है। अधिसूचना में कहा गया है कि संगठन देश के खिलाफ असंतोष उत्पन्न करने के इरादे से राष्ट्र विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने और समाज के एक विशेष वर्ग को कट्टरपंथी बनाने की लगातार कोशिश कर रहा है। गृह मंत्रालय ने कहा, उक्त कारणों के चलते केंद्र सरकार का दृढ़ता से यह मानना है कि पीएफआई की गतिविधियों को देखते हुए उसे और उसके सहयोगियों या मोर्चों को तत्काल प्रभाव से गैरकानूनी संगठन घोषित करना जरूरी है। पीएफआई के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन जैसे सहयोगी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। पीएफआई पर बैन के बाद अब ये देश में किसी प्रकार की गतिवधि को अंजाम नहीं दे सकता है। वह न तो आधिकारिक तौर पर कोई कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, न उसका कोई दफ्तर होगा, न ही वो कोई सदस्यता अभियान चला सकेगा और न ही फंडिंग आदि ले सकेगा। 15 राज्यों में एक्टिव है पीएफआई : पीएफआई अभी दिल्ली, आंध्र,प्रदेश, असम, बिहार, केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, मध्य प्रदेश में एक्टिव है। बता दें कि हाल में 22 सितंबर को ईडी और एनआईए ने छापेमारी में पीएफआई से जुड़े 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं मंगलवार (28 सितंबर) को दूसरे राउंड की छापेमारी में 247 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

Published / 2022-09-27 17:17:53
जेल में ही बीतेगी पूजा सिंघल की दुर्गा पूजा

टीम एबीएन, रांची। निलंबित आईएएस और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी पूजा सिंघल की जमानत याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अंबुज नाथ की अदालत में यह सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूजा सिंघल की याचिका पर अवकाश खत्म होने के बाद सुनवाई का निर्देश दिया गया। ईडी ने पूजा सिंघल की बेल पर जवाब दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही केस डायरी भी हाईकोर्ट में दाखिल कर दी गई है। गौरतलब है कि 11 मई से पूजा सिंघल न्यायिक हिरासत में हैं। पूजा सिघंल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में नियमित जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है। पूजा सिंघल पिछले 4 महीने से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं। ईडी की विशेष कोर्ट ने 3 अगस्त को पूजा की बेल पिटीशन खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत के लिए गुहार लगाई है। मालूम हो कि ईडी ने पांच मई को पूजा सिंघल के 25 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसके बाद ईडी ने पूजा सिंघल और सीए सुमन सिंह को गिरफ्तार किया था। दोनों से 14 दिनों की पुलिस हिरासत में पूछताछ की गई। इसमें ईडी को बेहिसाब पैसे और आवास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके अलावा कई जिले के डीएमओ के खिलाफ मिले सबूतों की जांच चल रही है।

Published / 2022-09-27 05:34:46
एक हफ्ते में 8 राज्यों में पीएफआई पर एनआईए का दूसरा छापा, कर्नाटक में 45 सदस्य हिरासत में

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एनआईए अन्य जांच एजेंसियां के साथ मिलकर पीएफआई पर हफ्ते भर के अंदर दूसरे दौर की छापेमारी कर रही है। एनआईए ने कट्टरपंथी संगठन पीएफआई पर पर अपनी कार्रवाई जारी रखी है। 8 राज्यों में पीएफआई पर छापेमारी की जा रही है। एनआईए के नेतृत्व में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां आठ राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। कर्नाटक में पीएफआई के 45 सदस्यों को हिरासत में भी लिया गया है। एनआईए सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पहले दौर की छापेमारी में पीएफआई नेताओं से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। असम के सात पीएफआई नेताओं को आज सुबह करीब 5 बजे राज्य पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें कामरूप जिले के नगरबेरा इलाके से गिरफ्तार किया गया। कर्नाटक में, 45 पीएफआई सदस्यों को हिरासत के तहत उठाया गया है। उन्हें स्थानीय तहसीलदार के सामने पेश किया जायेगा और न्यायिक हिरासत की मांग की जायेगी और उन्हें जेल भेजा जायेगा। इन पीएफआई सदस्यों ने या तो एनआईए कर्मियों को रोका था और पहले विरोध किया था या स्थानीय स्तर पर परेशानी पैदा की थी।

Published / 2022-09-26 17:41:16
राहुल के खिलाफ दर्ज मानहानि मामले में कोर्ट में पीड़क कार्रवाई पर रोक जारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के एक मामले में चाईबासा में दर्ज मानहानि मुकदमे मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस के द्विवेदी की कोर्ट ने राज्य सरकार एवं शिकायतकर्ता भाजपा नेता प्रताप कुमार के आग्रह पर प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए समय दिया। दरअसल पूर्व में कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ किसी भी पीड़क कार्रवाई पर रोक लगाई थी। दरअसल, इस 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में अपने संबोधन में कहा था कि कांग्रेस में कोई हत्यारा राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हो सकता है लेकिन भाजपा में यह संभव है।भाजपा के लोग ही हत्यारे को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकते हैं। भाजपा झूठे लोगों की पार्टी है। राहुल गांधी का इशारा भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह की ओर था। मानहानि के केस में गवाही के बाद निचली अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था और राहुल गांधी के खिलाफ 7 अप्रैल 2022 में जमानतीय।वारंट जारी किया था। इसके खिलाफ ही मानहानि के मुकदमे को निरस्त करने को लेकर राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिस पर आज सुनवाई हुई। इस मामले में राज्य सरकार और शिकायतकर्ता प्रताप कुमार ने समय की मांग की जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद साहू ने पैरवी की।

Published / 2022-09-26 16:56:06
गलत जानकारी देने वाले 10 यूट्यूब चैनल ब्लॉक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने घृणा फैलाने तथा सांप्रदायिक सछ्वाव बिगाड़ने वाले 45 यू ट्यूब वीडियो पर प्रतिबंध लगाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म यू ट्यूब से 10 यू ट्यूब चैनलों के 45 वीडियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश गत 23 सितम्बर से प्रभावी है। इन वीडियो को सवा करोड़ से अधिक लोगों ने देखा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर बताया कि सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 10 यूट्यूब चैनलों को देश के खिलाफ जहर उगलने वाले, भ्रामक खबरों के माध्यम से मित्र देशों के साथ सम्बंधों को खराब करने का प्रयास करने के लिए प्रतिबंध लगा कर उन्हें सस्पेंड कर दिया है। राष्ट्रहित में ये पहले भी किया है, आगे भी करेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि इन वीडियो में धार्मिक समुदायों के बीच घृणा फैलाने के उद्देश्य से फर्जी खबरें और ऐसी क्लिपिंग डाली गयी हैं जिनमें फेरबदल किया गया है। इनमें कई फर्जी दावे किये गये हैं जैसे सरकार कुछ समुदायों के धार्मिक अधिकारों को वापस ले रही है और देश में गृह युद्ध का ऐलान हो गया है। सरकार का कहना है कि इस तरह के वीडियो से सांप्रदायिक सद्भावना बिगड़ने और कानून व्यवस्था की स्थिति गड़बड़ाने की आशंका है। कुछ वीडियो में अग्निपथ योजना, सशस्त्र सेनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र और कश्मीर के बारे में गलत जानकारी फैलायी जा रही है। इनमें दी गयी विषय वस्तु झूठी और सुरक्षा तथा मित्र देशों के साथ संबंधों के मद्देनजर काफी संवेदशील है।

Published / 2022-09-26 10:20:30
भारत के इतिहास में पहली बार... सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की होगी लाइव स्ट्रीमिंग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जा रहा है। वहीं आज सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उसकी कार्यवाही के सीधे-प्रसारण (लाइव स्ट्रीमिंग) के लिए उसका अपना प्लेटफ़ॉर्म होगा और इस उद्देश्य के लिए यूट्यूब का उपयोग अस्थायी है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह बात उस समय कही जब भाजपा के पूर्व नेता के एन गोविंदाचार्य के वकील ने तर्क दिया कि शीर्ष अदालत की कार्यवाही का कॉपीराइट यूट्यूब जैसे निजी मंच को नहीं सौंपा जा सकता है। वकील विराग गुप्ता ने पीठ को बताया, यूट्यूब ने स्पष्ट रूप से वेबकास्ट के लिये कॉपीराइट की मांग की है। पीठ में न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल हैं। सीजेआई ने कहा, यह शुरुआती चरण है। निश्चित रूप से हमारा अपना मंच होगा... हम इसका (कॉपीराइट मुद्दे का) ध्यान रखेंगे। इसके साथ ही पीठ ने गोविंदाचार्य की अंतरिम याचिका पर सुनवाई के लिये 17 अक्टूबर की तारीख तय की। वकील ने 2018 के एक फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि यह माना गया था कि इस अदालत में दर्ज और प्रसारित सभी सामग्री पर कॉपीराइट केवल इस अदालत के पास होगा। उन्होंने यूट्यूब के उपयोग की शर्तों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस निजी मंच को भी कॉपी राइट प्राप्त है। सीजेआई की अध्यक्षता में हाल ही में पूर्ण अदालत की बैठक में लिये गये सर्वसम्मत निर्णय में, शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर से सभी संविधान पीठ की सुनवाई की कार्यवाही को सीधे प्रसारित करने का फैसला किया। यह फैसला इस संबंध में 2018 में एक फैसला सुनाए जाने के लगभग चार साल बाद आया। सूत्रों ने कहा था कि शीर्ष अदालत यूट्यूब के माध्यम से कार्यवाही का सीधा प्रसारण कर सकती है और बाद में उन्हें अपने सर्वर पर जारी कर सकती है। लोग उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही को अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और कंप्यूटर पर बिना किसी बाधा के देख सकते हैं। अपनी स्थापना के बाद पहली बार 26 अगस्त को न्यायालय ने एक वेबकास्ट पोर्टल के माध्यम से तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया। यह एक औपचारिक कार्यवाही थी क्योंकि उस दिन न्यायमूर्ति रमण सेवानिवृत्त हो रहे थे।

Published / 2022-09-25 09:59:02
कर्मचारियों को वेतन नहीं देने पर हाई कोर्ट ने लगाई परिवहन सचिव के वेतन पर रोक

टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए आईएएस अधिकारी और परिवहन सचिव केके सोन के वेतन पर रोक लगा दी। पूरा मामला परिवहन विभाग के कर्मचारियों के वेतन और अन्य भुगतान से जुड़ा हुआ है, जिसको लेकर झारखंड हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने तीन साल पहले ही इस संबंध में अपना आदेश जारी कर दिया था। सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन सचिव केके सोन से पूछा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को वेतन और अन्य भुगतान क्यों नहीं किया गया। जिस पर परिवहन सचिव केके सोन और राज्य सरकार के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत किया गया, लेकिन कोर्ट उनके जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया। हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान परिवहन सचिव खुद उपस्थित रहे। कोर्ट ने कहा कि जब तक विभाग के कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं किया जाता, तब तक विभागीय सचिव का वेतन भी रुका रहेगा। दरअसल, इस मामले में सिंगल बेंच ने तीन साल पहले ही विभागीय कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया था। लिहाजा शुक्रवार को इस मामले में जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट में कंटेंप्ट याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने इसे अवमानना माना और इस पर अपना कड़ा रुख दिखाया। जाहिर है कोर्ट के इस फैसले के बाद विभाग के कर्मचारियों को अपने वेतन और अन्य भुगतान को लेकर एक उम्मीद जगी है। इस मामले में कोर्ट में निहाल खान एवं अन्य की ओर से अवमाननावाद दायर की गई थी।

Published / 2022-09-23 11:38:56
सीएम हेमंत को चुनाव आयोग की खरी-खरी... नहीं दी जा सकती राजभवन को भेजे गये पत्र की कॉपी

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चुनाव आयोग से झटका लगा है। आयोग ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट से जुड़े मामले की कॉपी देने से इनकार कर दिया है। दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वकील वैभव तोमर ने 1 सितंबर और 15 सितंबर को चुनाव आयोग को पत्र भेजा था। उन्होंने सीएम से जुड़े ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में आयोग द्वारा राजभवन को भेजे गये मंतव्य की कॉपी मांगी थी। उसी पत्र का जवाब देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि संविधान की धारा 192 (2) के तहत यह दो संवैधानिक अथॉरिटी के बीच का मामला है। इसलिए इस मसले पर राजभवन का आदेश आने से पहले आयोग द्वारा राजभवन को भेजी गई अपने मंतव्य की कॉपी देना संविधान का उल्लंघन कहलायेगा। आयोग ने इसके लिए एक उदाहरण भी दिया है। डीडी थाइसी बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से जुड़े WPC NO.152/2021 मामले में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशनर ने चुनाव आयोग द्वारा मणिपुर के गवर्नर को भेजे गये मंतव्य की कॉपी मुहैया कराने की मांग की थी। इस पर आयोग ने दलील दी थी कि दो संवैधानिक ऑथरिटी के बीच हुए कम्युनिकेशन का खुलासा करना संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा। आयोग का पक्ष जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर 2021 को याचिकाकर्ता के पिटिशन को खारिज कर दिया था। आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वकील को साल 2016 के उस ऑर्डर की कॉपी भी मुहैया कराई है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि संविधान की धारा 103 (2) और 192 (2) से जुड़े मामलों की कॉपी राइट टू इनफार्मेशन एक्ट के सेक्शन 8 (1))(e) और 8(1)(h) तब तक नहीं दी जा सकती, जबतक उसपर राष्ट्रपति या गवर्नर का आदेश नहीं दी सकती है। इसको लेकर 2 अगस्त 2022 को भी आयोग की तरफ एक सर्कूलर जारी हो चुका है। इस सर्कुलर की कॉपी भी सीएम हेमंत सोरेन के वकील को मुहैया करायी गयी है। अधिवक्ता वैभव गौरव ने भाजपा बनाम हेमंत सोरेन से जुड़े केस नं. 3(G), 2022 का हवाला देते हुए 1 सितंबर को चुनाव आयोग को पत्र भेजा था। पत्र में उन्होंने जिक्र किया था कि आयोग को नोटिस पर 8 अगस्त और 12 अगस्त को दलील पेश की गई थी। इसके बाद आयोग ने 12 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 18 अगस्त को लिखित में पक्ष रखा गया था। हेमंत सोरेन के वकील ने अपने पत्र में लिखा था कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट से जानकारी मिली है कि आयोग ने इस मामले पर अपने मंतव्य राजभवन को प्रेषित कर दिया है। उन्होंने रिप्रजेंटेशन ऑफ पिपुल एक्ट, 1951 का धाराओं का हवाला देते हुए कॉपी मुहैया कराने की मांग की थी।

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