एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में रविवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी देवाशीष धर और उनके एक करीबी कारोबारी की पांच संपत्तियों पर छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कूचबिहार के पूर्व पुलिस अधीक्षक धर को पिछले साल के विधानसभा चुनावों के बाद निलंबित कर दिया गया था। चुनावों के दौरान जिले में केंद्रीय सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में चार लोग मारे गये थे। अधिकारियों ने बताया कि साल्ट लेक इलाके के मेट्रोपॉलिटन सोसाइटी और जोधपुर पार्क में धर और व्यवसायी सुदीप्तो रॉयचौधरी के आवास सहित पांच संपत्तियों पर छापेमारी की गई। उन्होंने बताया कि यह छापेमारी सीआईडी द्वारा धर और रॉयचौधरी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गयी थी। धर ने कहा कि वह सीआईडी की जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। रॉयचौधरी ने कहा कि उन्हें कानून के शासन पर पूरा भरोसा है। दोनों ने दावा किया कि उन्होंने कभी एक दूसरे के साथ कोई वित्तीय लेनदेन नहीं किया है।
टीम एबीएन, रांची। भाजपा नेत्री नुपुर शर्मा के विवादित बयान के खिलाफ रांची में हुए बवाल और हिंसा मामले को लेकर सीआईडी ने अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। रांची के मेन रोड में 10 जून को जुम्मा की नमाज के बाद हिंसा हुई थी। इस दौरान उपद्रवियों द्वार जमकर तोड़फोड़ की गई थी, वहीं इस हिंसा में करीब दर्जन भर पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। 10 जून को हुई हिंसा के मामले सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि जुमे की नमाज के बाद उपद्रव, पत्थरबाजी व गोलीबारी की गई थी। सीआईडी ने चार्जशीट में ये भी जिक्र किया है कि उपद्रवी सुनियोजित तरीके से इस हिंसा में शामिल हुए थे। उनके पास भरी मात्रा में पत्थर और हथियार भी थे। सुनियोजित तरीके की इस साजिश का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव भड़काने के साथ-साथ शहर को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने का था, वहीं जब उपद्रवियों को रोकने पुलिस पहुंची थी तो उपद्रवियों ने उन्हें भी अपना निशान बनाया। सीआईडी की जांच के ये बातें भी सामने आई है कि पुलिस अफसरों पर जानलेवा हमला करने से भी उपद्रवी नहीं चुके। सीआईडी की चार्जशीट में फिलहाल मोहम्मद अमजद, इरफान जुवेर आलम उर्फ इरफान अंसारी, मोहम्मद माज, अरमान हुसैन, सरफराज आलम, शहबाज, अफसर आलम व रमजान अली व तीन अन्य शामिल हैं। इनके अलावा चार्जशीट में उन दोनों मृतकों मुद्दस्सिर उर्फ कैफी व मोहम्मद साहिल के नाम का भी जिक्र है जिनकी उपद्रव के दौरान गोली लगने से मौत हुई थी। 10 जून को हुई हिंसा मामले में रांची के विभिन्न थानों में कुल 47 केस दर्ज हैं, जिनमें से एक केस जो डेली मार्केट थाने में टाउन सीओ के द्वारा दर्ज कराया गया था, उस केस को सीआईडी ने टेकओवर किया था। इस हिंसा मामले में बिहार और यूपी के कनेक्शन की भी बात सामने आई थी, वहीं इसके साथ हीं कई ऐसे मैसेजे भी मिले थे जिससे ये बातें पुख्ता हो रही थी कि इस हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश है। फिलहाल इसकी भी जांच की जा रही है कि आखिर वो कौन लोग थे जो दूसरे राज्यों से रांची पहुंच राजधानी का अमन-चैन छीनने की साजिश रचे थे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के बहुचर्चित कैश कांड में फंसे कांग्रेस के निलंबित विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट से 8 सप्ताह का समय मांगा है। झारखंड कांग्रेस से निलंबित तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी के दल बदल के मामले में बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के अधिवक्ता के साथ-साथ निलंबित विधायक भी आॅनलाइन जुड़े थे। कैश कांड में फंसे कांग्रेस के विधायकों के खिलाफ कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम की शिकायत पर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान निलंबित विधायकों के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष से 8 हफ्ते का समय मांगा है। उनका कहना था कि तीनों विधायक फिलहाल कोलकाता में हैं। सभी राज्य से बाहर हैं, इसलिए जवाब दाखिल करने के लिए तीनों का कोलकाता से बाहर झारखंड आना जरूरी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्हें समय दिया जाए। हालांकि आलमगीर आलम के अधिवक्ता उज्ज्वल आनंद ने इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि जिस मामले की सुनवाई 3 माह में पूरी होनी है, उस मामले में 8 सप्ताह का समय मांगना तर्क संगत नहीं है। इस पर निलंबित विधायक के अधिवक्ता ने कहा कि निर्णय अध्यक्ष महोदय को लेना है। उन्होंने अनुरोध किया है वो 8 सप्ताह का समय दे या जो अच्छा समझे। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्ष को सुनने का बाद फिलहाल सुनवाई स्थगित कर दी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अगली सुनवाई के बारे में जानकारी दी जाएगी। आपको बता दें कि पिछली सुनवाई में विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबित विधायकों को आवश्यक रूप से जुड़ने का आदेश दिया था। इस आदेश का असर भी दिखा और तीनों विधायक वर्चुअल कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई में जुड़े थे।
टीम एबीएन, देवघर/रांची। झारखंड के देवघर एयरपोर्ट की सुरक्षा चूक के मामले में गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, सांसद मनोज तिवारी समेत 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि एयरपोर्ट के डीएसपी सुमन आनन की शिकायत पर कुंडा पुलिस थाने में यह FIR दर्ज की गई है। FIR के मुताबिक, 31 अगस्त को गोड्डा से लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे, उनके बेटे कनिष्क कांत दुबे, माहिकांत दुबे, मुकेश पाठक, देवता पांडेय, पिंटू तिवारी, सांसद मनोज तिवारी समेत 9 लोग चार्टर्ड विमान से देवघर आए थे। वहीं वापसी के दौरान वे जबरन ATC रूम में घुस गए। FIR में उनपर आरोप लगाया है कि एयरपोर्ट के एटीसी में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जबरन एटीसी क्लीयरेंस लेकर प्रवेश किया। बता देंकि देवघर एयरपोर्ट में नाइट टेक ऑफ या लैंडिंग की सुविधा नहीं है। शिकायत के मुताबिक, नाइट ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध न होने के बावजूद एटीसी क्लीयरेंस के लिए दबाव बनाया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय राष्ट्रीय जांच सुरक्षा एजेंसी ने दाऊद इब्राहिम के सिर पर 25 लाख रुपये कैश इनाम घोषित किया है। इसके साथ अन्य लोगों पर भी अगल-अलग इनामों की घोषणा की गई है। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि इब्राहिम गैंग भारत में सभी तरह के गलत धंधों में शामिल है। यह गैंग हथियारों, विस्फोटकों, ड्रग्स और फर्जी नोटों की तस्करी के अलावा देश में पाकिस्तानी एजेंसी और आतंकी संगठनों के साथ मिलकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। अधिकारी ने अपना नाम ना बताए जाने की शर्त पर बताया कि एजेंसी ने इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम उर्फ हाजी अनीस, उसका खास जावेद पटेल उर्फ जावेद चिकना, शकील शेख उर्फ छोटा शकील और इब्राहिम मुस्ताक अब्दुल रज्जाक मेनन उर्फ टाइगर मेनन के सिरों पर भी इनाम घोषित किया है। एजेंसी ने जहां दाऊद पर 25 लाख का इनाम घोषित किया वहीं छोटा शकी पर 20 लाख का और बाकी अनीस, चिकना, मेनन पर 15 लाख का इनाम घोषित किया है। कराची पाकिस्तान में छिपा दाऊद भारत का मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड डॉन है। भारत को दाऊद की तलाश कई मामलों में है, जिसमें 1993 के मुंबई ब्लास्ट भी शामिल है। दाऊद पर पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2003 में 25 लाख डॉलर का इनाम घोषत कर रखा है। दाऊद के अलावा भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में लश्कर ए तैयबा चीफ हाफिज सईद, जैश ए मोहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर, हिजबुल मुजाहिदीन का फाउंडर सईद सलाहुद्दीन और उसका खास अब्दुल राऊफ असगर शामिल हैं। एनआईए ने इस साल मई में दाऊद के खिलाफ केस में 29 जगहों पर छापेमारी की थी, इसमें हाजी अली दरगाह और माहिम दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी से जुड़े लोग शामिल थे, जिनमें 1993 के ब्लास्ट में आरोपी समीर हिंगोरा, सलीम कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट, छोटा शकील का रिश्तेदार गुड्डू पठान, दाऊद के भाई का रिश्तेदार भिवाड़ी निवासी इकबाल कासकर और कय्यूम शेख शामिल हैं। भारतीय खूफिया एजेंसी के तैयार किए हुए के डोजियर में दाऊद के पाकिस्तान में 9 पते हैं, जिसमें कराची के क्लिफटन में स्थित व्हाइट हाऊस भी शामिल है। दाऊद के पास तीन पाकिस्तानी पासपोर्ट भी हैं जिनमें पहले रावलपिंडी में जारी किया गया है वहीं बाकी के दो कराची में जारी किये गये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो ऐसी स्थिति को बनाये रखने की अनुमति नहीं दे सकता जिसमें किसी व्यक्ति को बिना किसी सुनवाई के लंबे समय तक जेल में रखा जाता है। उच्चतम न्यायालय ने बातें पश्चिम बंगाल में एक आपराधिक मामले में चार साल से जेल में बंद दो आरोपियों को जमानत देते हुए कही। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 2018 में 414 किलोग्राम प्रतिबंधित गांजा को कथित रूप से जब्त किये जाने से संबंधित मामले में अभियोजन पक्ष के पहले गवाह से भी पूछताछ की जानी अभी बाकी है। अदालत ने हालांकि कहा कि अगर अपीलकर्ता मुकदमे में देरी करते हैं तो वह निचली अदालत को अपीलकर्ताओं को वापस जेल भेजने की अनुमति देती है। न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि एक आरोप पत्र दायर किया गया था और आरोप तय किए गये थे, लेकिन मामले में सुनवाई आगे नहीं बढ़ी। पीठ ने इस सप्ताह की शुरुआत में पारित किये गये अपने आदेश में कहा, हम ऐसी स्थिति को बनाये रखने की अनुमति नहीं दे सकते हैं जिसमें किसी व्यक्ति को बिना किसी सुनवाई के लंबे समय तक जेल में रखा जाता है। उच्चतम न्यायालय ने कहा, हमारा मानना है कि क्योंकि आरोपी जेल में लगभग चार वर्ष से बंद हैं और अभियोजन पक्ष के पहले गवाह से अभी पूछताछ होनी बाकी है, इसलिए अपीलकर्ता निचली अदालत द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों पर जमानत के हकदार हैं। न्यायालय ने कहा कि अपीलकर्ताओं को निचली अदालत द्वारा निर्धारित सभी तारीखों पर उपस्थित रहना होगा और उनके वकील अनावश्यक स्थगन का अनुरोध नहीं करेंगे। उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के नवंबर 2021 के उस आदेश के खिलाफ आरोपियों द्वारा दायर अपील पर यह आदेश दिया, जिसमें उन्हें स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए 2018 में दर्ज मामले के संबंध में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गूगल ने इस साल जनवरी से अबतक भारत के प्ले स्टोर से कर्ज की पेशकश करने वाली दो हजार से अधिक ऐप को हटा दिया है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शर्तों का उल्लंघन, जानकारी को गलत तरीके से पेश करने और संदिग्ध ऑफ़लाइन व्यवहार के लिए इन ऐप के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आने वाले हफ्तों में इस क्षेत्र में नीतियों को कड़ा करने की भी कोशिश कर रही हैं। गूगल के एशिया प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ निदेशक एवं ट्रस्ट और सुरक्षा प्रमुख सैकत मित्रा ने कहा कि कंपनी उन सभी क्षेत्रों में विनियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है जिनमें वह संचालन करती है। उन्होंने डिजिटल मंचों पर होने वाले ऑनलाइन नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास के सवाल पर कहा कि गूगल की प्राथमिकता और इसके मूल मूल्य हमेशा उपयोगकर्ता सुरक्षा के आसपास रहे हैं।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग का पत्र राज भवन पहुंच चुका है। आज दोपहर बाद राज्यपाल रमेश बैस दिल्ली से रांची पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि रांची पहुंचने के बाद वह कभी भी चुनाव आयोग की सिफारिश से राज्य की जनता को अवगत करा सकते। सूत्रों के मुताबिक सीएम हेमंत सोरेन की सदस्यता खत्म होने की चर्चा है। दोपहर बाद राज्यपाल के रांची पहुंचने पर इससे पर्दा उठा जायेगा। ईटीवी भारत को मिली जानकारी के मुताबिक हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की चुनाव आयोग ने सिफारिश की है। इससे पहले आज सुबह भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के ट्वीट से झारखंड की राजनीति में खलबली मच गई है। उन्होंने भी दावा किया है कि चुनाव आयोग का पत्र राज्यपाल तक पहुंच चुका है। उन्होंने लिखा है कि अगस्त पार नहीं होगा। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े खनन लीज मामले में चुनाव आयोग में 18 अगस्त को दलील पूरी हो चुकी थी। इस मामले को 10 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उठाया था। उन्होंने 11 फरवरी को राज्यपाल से मिलकर हेमंत सोरेन को विधायक पद से अयोग्य ठहराने की मांग की थी। बाद में इस मामले को राजभवन ने चुनाव आयोग को रेफर कर दिया था। उसी आधार पर सबसे पहले चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से वेरिफाइड डॉक्टूमेंट्स की मांग की थी। इसके बाद आयोग में दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गई थी। हेमंत सोरेन मामले में चुनाव आयोग ने राज्यपाल को सौंपी रिपोर्ट, जल्द आ सकता है फैसला : झारखंड के सियासत से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने झारखंड खनन में हेमंत मामले को लेकर राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब जल्द ही इस मामले में बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि केन्द्रीय चुनाव आयोग इस मामले पर कुछ साफ साफ नहीं बता रहा है। राजभवन से कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है।
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