टीम एबीएन, रांची। खान विभाग के मंत्री रहते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा खुद एवं अपने रिश्तेदारों को लीज आवंटन करने से संबंधित आरटीआई कार्यकर्ता एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार महतो की जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई।
मामले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले के प्रतिवादियों जिनमें राज्य सरकार एवं निदेशालय (ईडी) शामिल है, को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 1 मई निर्धारित की। इससे पहले सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने इस जनहित याचिका के मेंटेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा गया यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
इसी तरह के समान मामले में शिव शंकर शर्मा एवं अन्य की जनहित याचिका में सीएम हेमंत सोरेन एवं अन्य के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट के खंडपीठ के द्वारा पारित आदेश को पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है।
टीम एबीएन, रांची। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के डिस्चार्ज पिटीशन पर ईडी की विशेष कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए पिटीशन को खारिज कर दिया है। डिस्चार्ज याचिका के खारिज होने से पूजा सिंघल को बड़ा झटका लगा है। अब अदालत पूजा सिंघल के खिलाफ आरोप गठन (चार्ज फ्रेम) की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
ईडी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा ने मनरेगा घोटाला मामले में पूजा सिंगल और ईडी के पक्ष को सुना था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पूजा सिंघल की तरफ से अधिवक्ता विश्वजीत मुखर्जी और विक्रांत सिन्हा ने रखा था। वहीं ईडी के तरफ से अधिवक्ता आतिश कुमार ने दलीलें पेश की थी।
टीम एबीएन, रांची। ईडी की गिरफ्त से फरार चल रहे संजय तिवारी की फर्जी कोविड रिपोर्ट तैयार करने के मामले में रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रिम्स के एक कर्मचारी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार प्रियरंजन और अमरदीप ने संजय तिवारी के लिए फर्जी कोविड पॉजिटिव होने की रिपोर्ट तैयार कर दी थी, उसी रिपोर्ट के आधार पर संजय तिवारी ने अदालत को झांसा दिया और फरार हो गया।
संजय तिवारी ने अदालत को गुमराह करने के लिए रिम्स से फर्जी कोविड रिपोर्ट बनवा ली थी। रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक की ओर से बरियातू थाने में दर्ज की गयी प्राथमिकी में संजय कुमार तिवारी पर रिम्स के नाम से फर्जी कोविड-19 रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद बरियातू पुलिस ने जब मामले तफ्तीश शुरू की। इसमें जानकारी मिली कि रिम्स में ही कार्यरत एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी प्रियरंजन ने संजय तिवारी के लिए किसी एतवा टोप्पो के व्यक्तिगत डाटा को आईसीएमआर के पोर्टल अपलोड कर उसे ही डाउनलोडेड कर रिपोर्ट बनायी गयी।
रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव होने की बनायी गयी ताकि संजय तिवारी को फायदा पहुंचाया जा सके। बरियातू पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद प्रियरंजन ने बताया कि उसे संजय तिवारी के यहां काम करने वाले अमरदीप जो उसका रिश्तेदार लगता है, उसी के कहने पर कोविड का फर्जी सर्टिफिकेट बनाया था। जिसके बाद पुलिस ने अमरदीप को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की पूछताछ में अमरदीप ने बताया है कि उसे फर्जी कोविड सर्टिफिकेट बनाने के लिए संजय तिवारी ने 7 हजार रुपये दिये थे। झारखंड सरकार के मिड डे मील के खाते से 100 करोड़ रुपये के फर्जी हस्तांतरण से जुड़े मनी लाउंड्रिंग मामले के आरोपी भानु कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोर्ट में 25 मार्च को सरेंडर करना था। लेकिन संजय तिवारी ने उस सरेंडर से बचने के लिए कोविड होने की गलत जानकारी रांची के पीएमएलए कोर्ट को दी।
पीएमएलए कोर्ट को दिएलये गये रिम्स के इलाज संबंधी कागजात और कोविड सर्टिफिकेट की जांच ईडी के रांची जोनल आफिस ने की, तब यह पता चला कि संजय तिवारी के द्वारा जो इलाज संबंधी कागजात और कोविड सर्टिफिकेट दिये गये हैं, वह गलत हैं। हालांकि इसी बीच संजय तिवारी फरार होने में कामयाब हो गया।
भानु कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी को सशर्त 40 दिन की अंतरिम जमानत दी गयी थी, लेकिन वह समय सीमा पर गबन के बकाया 16.35 करोड़ रुपये बैंक को वह वापस नहीं कर सका। इसके बाद उसने ईडी कोर्ट में सरेंडर किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों के दलीलें सुनने के बाद संजय तिवारी को दो दिनों के लिए एक बार अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
यह राहत लेन-देन को पूरा करने के उद्देश्य से था, ताकि राशि को उस बैंक खाते में लाया जा सके। लेकिन दोबारा जेल जाने से बचने के लिए संजय कुमार तिवारी ने कोविड का फर्जी सर्टिफिकेट बनावा लिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नये वित्त वर्ष यानी 2023-24 में प्रवेश करने के साथ ही आयकर समेत कई बदलाव आज से लागू हो गए हैं। इनकी सूची लंबी है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी-हमारी वित्तीय सेहत पर पड़ेगा। इसके अलावा, 2023-24 के आम बजट में कई नई घोषणाएं भी की गई हैं, जो आज से लागू होने जा रही हैं। वहीं, सोने की खरीदारी, म्यूचुअल फंड, रीट-इनविट, जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान संबंधी कई नियम भी बदल रहे हैं। आइये जानते हैं जरूरी बदलावों के बारे में...
नयी कर व्यवस्था : 7 लाख तक की कमाई पर अब छूट
अगर आप अगले वित्त वर्ष से आयकर रिटर्न भरने के लिए पुरानी या नयी कर व्यवस्था में से किसी एक का चयन नहीं करते हैं तो नयी व्यवस्था में डिफॉल्ट शामिल हो जायेंगे। 2023-24 के बजट में वित्त मंत्री ने इसे पेश किया था। नयी कर व्यवस्था में छूट की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गयी है। पुरानी कर व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की कमाई कर मुक्त है। ध्यान देने वाली बात है कि पुरानी कर व्यवस्था की तरह नई में आपको कई प्रकार की छूट का लाभ नहीं मिलेगा। अगर आप नई कर व्यवस्था का चुनाव करते हैं तो 7.27 लाख रुपये की सालाना कमाई पर 25,000 रुपये का कर देना होगा।
स्टैंडर्ड डिडक्शन : 50,000 रुपये का उठा सकते हैं लाभ
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन अब नयी कर व्यवस्था का हिस्सा होगा। इसके लिए करदाता 50,000 रुपये तक का दावा कर सकता है, जबकि 15.5 लाख रुपये या उससे अधिक की आय वाले प्रत्येक वेतनभोगी को स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में 52,500 रुपये का लाभ होता है। नये वित्त वर्ष से गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव एनकैशमैंट की सीमा 25 लाख रुपये कर दी गयी है। पहले यह तीन लाख ही थी। 2002 में इसे तीन लाख रुपये किया गया था।
महिला सम्मान बचत योजना पर मिलेगा 7.50 फीसदी ब्याज
महिला सम्मान बचत योजना को पहली बार शुरू किया गया है। इसके तहत महिलाओं या युवतियों के नाम पर अधिकतम दो लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। इस पर 7.50 फीसदी की दर से तय ब्याज मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से 2023-24 के बजट में पेश यह योजना केवल दो साल के लिए होगी। यानी महिला सम्मान बचत योजना मार्च, 2025 तक रहेगी। इस अवधि के दौरान दो लाख रुपये के निवेश पर कुल 30,000 रुपये का ब्याज मिलेगा। इसमें आंशिक निकासी की भी सुविधा दी गयी है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना में दोगुना निवेश
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और पोस्ट ऑफिस मासिक योजना (पीओएमआईएस) में निवेश दोगुना हो जायेगा। एससीएसएस में 15 लाख रुपये सालाना की सीमा अब 30 लाख रुपये हो जायेगी। यानी अगर कोई इसमें अधिकतम 15 लाख रुपये पहले निवेश करता था तो उसे 8 फीसदी ब्याज दर से 5 साल में 6 लाख रुपये का ब्याज मिलता था।
अधिकतम 30 लाख की निवेश सीमा पर 12 लाख का ब्याज
पोस्ट ऑफिस मासिक योजना में पहले व्यक्तिगत निवेश की सीमा 4.5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब 9 लाख रुपये कर दिया गया है। संयुक्त खाते के लिए इस निवेश सीमा को 9 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किया गया है।
ऑनलाइन गेमिंग पर लगेगा 30 फीसदी टैक्स
ऑनलाइन गेमिंग से कितनी भी कमाई हो, अब 30 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होगा। पहले 10 हजार रुपये या इससे ज्यादा की कमाई पर ही टैक्स लगता था। इसके अलावा, आयकर रिटर्न दाखिल करते समय अब ऑनलाइन गेमिंग के जरिये मिलने वाली रकम की जानकारी भी देनी होगी।
डेट म्यूचुअल फंड : नहीं मिलेगा एलटीसीजी लाभ
एक अप्रैल से डेट म्युचुअल फंड में निवेश के नियम बदल जायेंगे। इसके तहत, अब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (एलटीसीजी) की परिभाषा बदल गयी है। नये नियम उन डेट म्यूचुअल फंड पर लागू होंगे, जिन्होंने शेयर बाजार में 35 फीसदी से कम निवेश कर रखा है। इसके तहत निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा। इस कारण निवेशकों को पहले से ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा।
रीट-इनविट में कर्ज भुगतान पर लगेगा टैक्स
नये नियम के तहत रीट और इनविट में कर्ज भुगतान किया जाता है तो इस पर टैक्स लगेगा। इसके तहत कंपनियां यूनिट धारकों को कर्ज पुनर्भुगतान के रूप में रकम देती हैं। रीट ऐसी योजना है जो निवेशकों से पैसा जुटाकर उसे रियल एस्टेट में निवेश करती है। इसी तरह से इनविट ऐसी योजना है जिसके तहत कंपनियां पैसा जुटाकर इन्फ्रा में निवेश करती हैं।
महंगी होंगी गाड़ियां
देश में एक अप्रैल से नये उत्सर्जन मानक लागू हो जायेंगे। इससे वाहन निर्माता कंपनियां बीएस-6 के दूसरे चरण के कड़े उत्सर्जन नियम के अनुसार गाड़ियां बनाना या पुरानी गाड़ियों के इंजन अपडेट करना शुरू कर चुकी हैं। इससे कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यही वजह है कि मारुति, टाटा मोटर्स, होंडा, किआ और हीरो मोटोकॉर्प समेत कई कंपनियां वाहनों के दाम बढ़ाने वाली हैं।
बंद हो सकती हैं ऑल्टो समेत कई कारें
प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाने के लिए सरकार नए नियम ला रही है। एक अप्रैल से रियल टाइम ड्राइविंग एमिशन (आरडीई) और बीएस-6 का दूसरा चरण लागू हो जाएगा। नए नियमों का पालन नहीं करने वाली गाड़ियों की बिक्री नहीं होगी। इस कारण, मारुति ऑल्टो, होंडा कार्स की डब्ल्यूआरवी और ह्यूंडई आई20 डीजल समेत कई कारों की बिक्री बंद हो सकती है।
टोल टैक्स : सात फीसदी तक महंगा
देश में टोल टैक्स महंगा हो जायेगा। यूपी में यह 7 फीसदी तक महंगा हो जायेगा। नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर बढ़ी दरों से टोल की वसूली की जायेगी। वृद्धि एकल यात्रा से लेकर मासिक पास तक पर लागू होगी।
कबाड़ नीति : हटेंगे 15 साल पुराने वाहन
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने, गाड़ियों की ईंधन एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक अप्रैल से वाहन कबाड़ नीति लागू करने जा रही है। इसके तहत देश में 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने की तैयारी है। सरकार ने साफ किया है कि कौन सी गाड़ियां कबाड़ में जाने वाली हैं। कबाड़ में भेजी जाने वाली गाड़ियों को रिसाइकिल किया जायेगा। इससे धातु, रबड़, कांच आदि कई वस्तुएं प्राप्त होंगी, जिनका वाहन बनाने में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस नीति के तहत अगर कोई अपने वाहनों को कबाड़ में भेजता है और उसकी जगह नयी गाड़ी खरीदता है तो उस नयी गाड़ी पर 25 फीसदी तक रोड टैक्स में छूट दी जायेगी।
यूपी : 22 रुपये किलो बिकेंगे वाहन
यूपी में कबाड़ सेंटर में वाहन बेचने पर 22 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दाम मिलेगा। इसमें वाहन के कुल वजन का 65 फीसदी हिस्सा ही मूल वजन माना जाएगा और उस रकम का भी 90 फीसदी ही भुगतान होगा। राज्य सरकार ने दो लक्ष्य तय किये हैं। पहला, सभी सरकारी वाहनों को स्क्रैप करना है। दूसरा, निजी वाहन भी इस नीति के दायरे में आयेंगे, जिनके लिए स्वैच्छिक नीति तय की गयी है।
पेट्रोल-डीजल
एक अप्रैल से पेट्रोल-डीजल और गैस की नयी कीमतें जारी होंगी। ऐसे में उम्मीद है कि इनमें बढ़ोतरी या फिर कोई बदलाव न हो। हालांकि, पिछले महीने घरेलू गैस सिलिंडर में 50 रुपये का इजाफा किया गया था।
जीवन बीमा पॉलिसियों पर अब ज्यादा कर
एक अप्रैल से जारी होने वाली पांच लाख रुपये से अधिक के सालाना प्रीमियम की परंपरागत जीवन बीमा पॉलिसी से होने वाली कमाई पर टैक्स देना होगा। हालांकि, इसमें यूलिप (यूनिट लिंक्ड प्लान इंश्योरेंस) प्लान पर असर नहीं होगा। ऐसे में इस बदलाव का असर ज्यादा प्रीमियम देने वाले पॉलिसीधारक पर होगा।
सोना खरीदारी पर अब छह अंक वाले हॉलमार्क
उपभोक्ता मंत्रालय एक अप्रैल से सोने के आभूषणों की बिक्री के नियम बदल रहा है। नये नियम के अनुसार, 31 मार्च, 2023 के बाद चार अंकों के हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) वाले गहनों की बिक्री नहीं होगी। एक अप्रैल 2023 से सिर्फ छह अंकों वाले हॉलमार्क जूलरी की ही बिक्री की जायेगी। इससे जूलरी की शुद्धता और गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी। इससे तमाम जानकारी जुटाना आसान हो जायेगा।
भौतिक सोने को ई-गोल्ड में बदलने पर नहीं देना होगा कर
इलेक्ट्रॉनिक सोने की खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए अब भौतिक सोने से ई-गोल्ड में बदलाव पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। यानी अब निवेशक जूलरी बेचकर उसे ई-गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। ई-गोल्ड से भौतिक सोने के बदलाव में भी कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। अब तक सोने की खरीदारी के तीन साल के बाद इस पर 20 फीसदी का टैक्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 4 फीसदी उपकर लगता था। बजट में सरकार के उठाये गये कदम से भौतिक सोने को ई-गोल्ड में बदलने को बढ़ावा मिलेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने गूगल के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के फैसले को बरकरार रखा है। आयोग ने प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल पर एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों के मामले में प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर 1,337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
अपीलीय न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने गूगल को निर्देशों का पालन करने और जुर्माना राशि 30 दिन के भीतर जमा करने को कहा है। एनसीएलएटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य आलोक श्रीवास्तव की पीठ ने प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश में कुछ संशोधन भी किये हैं।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने गूगल की इस अपील को खारिज कर दिया कि प्रतिस्पर्धा आयोग ने जांच में प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया है। उल्लेखनीय है कि सीसीआई ने पिछले साल 20 अक्टूबर को गूगल पर एंड्रॉयड मोबाइल उपकरणों के मामले में गैर-प्रतिस्पर्धी गतिविधियों में शामिन होने को लेकर 1,337.6 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।
नियामक ने कंपनी ने विभिन्न अनुचित व्यापार गतिविधियों से बचने और दूर रहने को भी कहा। प्रतिस्पर्धा आयोग के इस आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी गयी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। माफिया अतीक अहमद उमेश पाल अपहरण कांड में दोषी करार दिया गया है। घटना 2006 की है। इसे लेकर मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ।
अतीक अहमद उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा सुनायी है। अतीक के साथ दोषी करार दिये गये दिनेश पासी और सौलत हनीफ को भी उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है। हालांकि, अतीक के भाई अशरफ समेत सात जीवित आरोपी मंगलवार को दोषमुक्त करार दिये गये हैं। माफिया अतीक पर आज से 44 साल पहले पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से अब तक उसके ऊपर सौ से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन पहली बार किसी मुकदमे में उसे दोषी ठहराया गया है।
आइये जानते हैं उस मामले में के बारे में जिसमें अतीक दोषी करार दिया गया। कैसे उमेश पाल ने 17 साल तक अतीक को सजा दिलाने के लिए संघर्ष किया। कैसे सजा मिलने से पहले उमेश की हत्या कर दी गयी।
किस मामले में दोषी करार दिया गया अतीक?
घटना 2006 की है। इसे लेकर मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ। लेकिन, कहानी 2005 से शुरू होती। दरअसल 25 जनवरी 2005 का दिन इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक राजू पाल पर जानलेवा हमला हुआ। शहर के पुराने इलाकों में शुमार सुलेमसराय में बदमाशों ने राजू पाल की गाड़ी पर गोलियों की बौछार कर दी थी। सैकड़ों राउंड फायरिंग से गाड़ी में सवार लोगों का पूरा शरीर छलनी हो गया।
बदमाशों ने फायरिंग रोकी तो समर्थक राजू पाल को एक टैंपो में लेकर अस्पताल ले जाने लगे। हमलावरों ने ये देखा तो उन्हें लगा राजू जिंदा हैं। तुरंत हमलावरों ने अपनी गाड़ी टैंपो के पीछे लगा ली और फिर फायरिंग शुरू कर दी। करीब पांच किलोमीटर तक वह टैंपो का पीछा करते गये। जबतक राजू पाल अस्पताल पहुंचे, उन्हें 19 गोलियां लग चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दस दिन पहले ही राजू की शादी पूजा पाल से हुई थी। राजू पाल के दोस्त उमेश पाल इस हत्याकांड के मुख्य गवाह थे।
हत्याकांड के बाद अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि उमेश केस से हट जायें नहीं तो उन्हें दुनिया से हटा दिया जायेगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। अतीक ने उनसे अपने पक्ष में हलफनामा लिखवा लिया। अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही भी दे दी। हालांकि वह समय बदलने का इंतजार कर रहे थे।
जब उमेश ने अतीक के पक्ष में हलफनामा दे दिया फिर अपहरण का मामला कैसे शुरू हुआ?
2007 में बसपा सरकार बनी। मायावती मुख्यमंत्री बनीं। 2007 के चुनाव में एक बार फिर शहर पश्चिमी सीट से अतीक के भाई अशरफ को राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने हरा दिया। इसके बाद अतीक पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। हालात बदले तो उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले की उमेश सालों पैरवी करते रहे। उमेश पाल ने अपने अपहरण के मामले को लगभग अंजाम तक पहुंचा दिया, लेकिन फैसले से एक महीने पहले उनकी हत्या कर दी गयी। अब इसी मामले में अतीक दोषी करार दिया गया। इसके साथ ही 44 साल तक अपने आतंक को कायम रखने वाले अतीक को जिदंगी में पहली बार सजा होने जा रही है।
अपहरण वाले दिन क्या हुआ था?
28 फरवरी 2006 को अतीक के लोगों ने उमेश को उठा लिया। रातभर उन्हें पीटा गया। उमेश को उस समय लगा था कि यह उसकी आखिरी रात है। अतीक ने उससे हलफनामा पर दस्तखत करा लिए। हलफनामे पर लिखा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। न ही उन्होंने किसी को वहां देखा था। अगले दिन यानी एक मार्च को अतीक ने अदालत में उमेश के हलफनामा को प्रस्तुत कर अदालत के सामने गवाही भी दिलवा दी। उस समय शासन प्रशासन में अतीक की तूती बोलती थी।
2007 में जब बसपा सरकार बनी तो स्थिति बदलने लगी। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गयी। पांच जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी। इनमें से एक की मौत हो चुकी है।
अतीक पर दर्ज हो चुके हैं 101 मुकदमे
अतीक के खिलाफ कुल 101 मुकदमे दर्ज हुए। वर्तमान में कोर्ट में 50 मामले चल रहे हैं, जिनमें एनएसए, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे हैं। उस पर पहला मुकदमा 1979 में दर्ज हुआ था। इसके बाद जुर्म की दुनिया में अतीक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हत्या, लूट, रंगदारी अपहरण के न जाने कितने मुकदमे उसके खिलाफ दर्ज होते रहे। मुकदमों के साथ ही उसका राजनीतिक रुतबा भी बढ़ता गया।
एक बार एनएसए भी लगाया जा चुका है
1989 में वह पहली बार विधायक हुआ तो जुर्म की दुनिया में उसका दखल कई जिलों तक हो गया। 1992 में पहली बार उसके गैंग को आईएस 227 के रूप में सूचीबद्ध करते हुए पुलिस ने अतीक को इस गिरोह का सरगना घोषित कर दिया। 1993 में लखनऊ में गेस्ट हाउस कांड ने अतीक को काफी कुख्यात किया। गैंगस्टर एक्ट के साथ ही उसके खिलाफ कई बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी की गयी। एक बार तो उसपर एनएसए भी लगाया जा चुका है।
कई मुकदमों में मुकर गये गवाह
जुर्म और राजनीति के साथ -साथ अतीक अब ठेकेदारी और जमीन के धंधे में भी कूद पड़ा। जमीन की खरीद-फरोख्त और रंगदारी से अतीक ने ही नहीं, बल्कि उसके गुर्गों ने भी अकूत संपत्ति जुटा ली। अतीक का खौफ इतना था कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करने की हिम्मत नहीं करता था। अगर कर भी दिया तो बाद में गवाह मुकर जाते। कई मामलों में वादी ने ही लिखकर दे दिया कि उसने अतीक के खिलाफ गलत मुकदमा दर्ज कराया था। यहां तक कि प्रदेश सरकार ने अतीक के खिलाफ कई गंभीर मुकदमों को वर्ष 2001, 2003 और 2004 में वापस ले लिया था। कई मामलों में तो पुलिस ने अतीक की नामजदगी को गलत बता एफआर लगा दी थी।
टीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। स्वास्थ्य विभाग में अब अगर कोई बायोमेट्रिक से हाजिरी नहीं बनाता है, तो उसका वेतन कट जायेगा। इस संबंध में आदेश का पत्र स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक को भेजा गया है।
एक अप्रैल से बायोमेट्रिक से हाजिरी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। एक अप्रैल से अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारियों को बायोमेट्रिक सिस्टम से हाजिरी बनानी होगी। डॉक्टरों की हाजिरी की निगरानी एनएमसी करेगा। अस्पताल परिसर में लगे खराब बायोमेट्रिक सिस्टम को ठीक कराया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जिन लोगों ने अभी तक पेन से आधार कार्ड को लिंक नहीं कराया है उनके लिए जरूरी खबर है। क्योंकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में पेन से आधार लिंक की डेट बढ़ा दी है। क्योंकि अभी तक करोड़ों लोग ऐसे थे जिन्होने पेन से आधार लिंक नहीं कराया था।
वहीं आधार से पेन लिंक के लिए जो शुल्क लगाया जा रहा है 1000 रुपये वही रहेगा। साथ ही जो लोग जून 2023 तक भी यह जरूरी काम नहीं करा पायेंगे। उनके लिए जुर्माने की राशि 1000 के स्थान पर 10,000 कर दिया गया है। इसलिए इस बार समय रहते आधार से अभी तक कुछ लोग इस असमंजस में फंसे हैं कि किन-किन लोगों को आधार से पेन लिंक कराना जरूरी है।
ऐसे लोगों के लिए बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139 एए के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जिसे 1 जुलाई, 2017 को एक स्थायी खाता संख्या (पैन) आवंटित किया गया है। सभी लोगों को आधार से पेन लिंक कराना अनिवार्य है। अभी तक 31 मार्च तक आधार पेन लिंक कराने की लास्ट डेट थी। जिसे अब बढ़ा दिया गया है। यदि आपका भी आधार अभी तक लिंक नहीं हुआ है तो लेट फीस जमा कराकर जरूरी काम निपटा लें।
बता दें कि जो लोग असम, जम्मू और कश्मीर और मेघालय में रहते हैं। साथ ही नॉन-रेजिडेंट हैं। पूर्व वर्ष के दौरान किसी भी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक की आयु के रहे हों, या भारत के नागरिक नहीं है ऐसे लोगों के आधार से पेन लिंक कराने की जरूरत नहीं है। यदि आप समय रहते यह जरूरी काम नहीं कराते हैं तो आपका पेन निष्क्रिय कर दिया जायेगा। साथ ही ऐसे लोग अपना आईटीआर भी फाइल भी नहीं कर पायेंगे। साथ ही यदि उसके बाद आप आधार से पेन लिंक करेंगे तो हाई जुर्माना भरना होगा।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse