टीम एबीएन, रांची। झारखंड में चारा घोटाला मामले में डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में 28 अगस्त को 124 अभियुक्तों पर रांची सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया, जिसमें 35 आरोपियों को बरी किया गया।
वहीं 53 आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन साल से कम और तीन साल तक की सजा हुई है। इसके साथ ही 36 आरोपियों को कोर्ट ने 3 साल से अधिक की सजा सुनायी है।
उनकी सजा की बिंदुओं पर कोर्ट शुक्रवार 1 सितंबर को अपना फैसला सुनायेगी। अब देखने वाली बात ये होगी कि 36 दोषियों में से सबसे ज्यादा सजा किसे होगी।
अविभाजित झारखंड और बिहार में बहुचर्चित चारा घोटाला हुआ था। संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हुआ करते थे। उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान डोरंडा कोषागार से 36 करोड़ 59 लाख रुपये की अवैध तरीके से निकासी हुई थी।
यह निकासी साल 1990 से 1995 के दौरान हुई थी। इस मामले में सीबीआई की विशेष न्यायधीश विशाल श्रीवास्तव की अदालत में बहस पूरी हो चुकी है और अब उसपर फैसला आयेगा।
डोरंडा कोषागार मामले में 27 साल चली सुनवाई के दौरान कुल 617 गवाहों का बयान दर्ज कराया गया, जबकि 50 हजार से ज्यादा डॉक्यूमेंट और एविडेंस पेश किये गये।124 आरोपियों में से 38 लोक सेवक रहे हैं, जिनमें से आठ कोषागार पदाधिकारी हैं। 86 आपूर्तिकर्ता मामले में आरोपी हैं।
इन आरोपियों में 16 महिलाएं भी हैं। वहीं तीन साल से ज्यादा सजा पाने वाले में कई ऐसे आरोपी हैं। जिनकी उम्र 80 से 90 साल है। बिहार से अलग होने के बाद चारा घोटाला मामले में कुल 53 मुकदमे दर्ज किये गये।
जिसमें डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले पर जजमेंट होने के बाद चारा घोटाला से संबंधित सभी मुकदमों पर फैसला आ चुका है। शुक्रवार को 36 आरोपियों के सजा बिंदु पर फैसला सुनाये जाने के बाद इस मुकदमे का अंतिम केस होगा।
टीम एबीएन, साहिबगंज। करोड़ों के खनन घोटाले व ईडी के गवाह नींबू पहाड़ प्रधान विजय हांसदा को बरगलाने सहित अन्य मामले की करने जांच पड़ताल करने गुरुवार सुबह वनांचल एक्सप्रेस से सीबीआई की 7 सदस्यीय टीम साहिबगंज पहुंची है। सीबीआई इस आगमन पर होने वाले पूछताछ मे शहर कई नामचीन पत्थर व्यवसायी व कुछ अफसरों से सीबीआई कई मामले में पुछताछ कर सकती है।
गौरतलब है कि 1000 करोड़ अवैध खनन घोटाले के मामले में ईडी के गवाह के रूप मे विजय हांसदा का नाम आने के बाद जांच में एक अलग मोड़ आया है। इसके पूर्व ईडी की टीम बीते 2 दिसंबर को मंडलकारा पहुंच विजय हांसदा से घंटों पूछताछ की थी।
जहां उनका कहना था कि कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी मे सादा पेपर पर उनसे हस्ताक्षर कराये गये थे। जबकि रिकॉर्ड के हिसाब से अगर देखा जाये तो शपथ पत्र के माध्यम से उन्होंने अपनी बात रखी थी, जिनका अधिवक्ता द्वारा सत्यापन किया गया था।
टीम एबीएन, रांची। ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 24 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया है। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से अबतक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है कि वह इडी कार्यालय पूछताछ के लिए जायेंगे या फिर दोबारा समय लेंगे। प्रोजेक्ट भवन में जब मीडिया ने उनसे पूछा कि कल क्या होगा।
तो उन्होंने इतना ही कहा : आप सब के साथ ही रहेंगे। इधर, सूत्रों ने बताया कि सीएम लगातार विधि-विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर राय ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के भी बड़े अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं। हालांकि अभी तक सीएम की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
टीम एबीएन, रांची। देवघर में भी योगेंद्र तिवारी और उसके सहयोगियों के कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है।
देवघर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष मुन्नम संजय और पंडित बीएन झा पथ स्थित अभिषेक आनंद झा के आवास पर भी ईडी की रेड चल रही है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कई शहरों में ईडी ने एक बार फिर से दबिश दी है। ईडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रांची के हरमू के साथ-साथ दुमका और देवघर में भी एक साथ छापेमारी की जा रही है।
मिली सूचना के अनुसार छापेमारी शराब घोटाले को लेकर की गयी है। रांची में मंत्री रामेश्वर उरांव, तिवारी ब्रदर्स सहित कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार बुधवार अहले सुबह ईडी की एक दर्जन से ज्यादा टीम रेड के लिए निकली है।
ईडी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड के 32 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है। मंत्री रामेश्वर उरांव के रांची स्थित आवास पर भी छापेमारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि रांची में कुल सात जगहों पर ईडी रेड कर रही है। जामताड़ा में भी छापेमारी चल रही है।
वहीं देवघर में कुल आठ जगहों पर छापेमारी की सूचना है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ वाले सिंडिकेट को लेकर ही झारखंड में छापेमारी चल रही है। दुमका में शराब व्यवसायी योगेंद्र तिवारी के कार्यालय, उनके करीबियों और उनके परिजनों के ठिकाने पर छापेमारी हुई है।
बता दें कि दुमका शहर में अलग-अलग पांच जगहों पर ईडी की छापेमारी चल रही है, जिसमें टाटा शोरूम चौक स्थित तनिष्क शोरूम, तिवारी ऑटोमोबाइल, कुम्हारपाड़ा स्थित पप्पू शर्मा और कुम्हार पाड़ा स्थित ठेका बाबा मंदिर के नजदीक अनिल सिंह के घर पर ईडी की कार्रवाई चल रही है।
तनिष्क शोरूम और तिवारी ऑटोमोबाइल शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी के करीबी का बताया जा रहा है, जबकि शेष दोनों पप्पू शर्मा और अनिल सिंह शराब कारोबारी के कर्मी हैं।
इसके अतिरिक्त गिलान पाड़ा स्थित कार्यालय में भी छापेमारी की सूचना है। ईडी की रेड के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी है। इसे देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं। वहीं मिली जानकारी के अनुसार कोलकाता में छापेमारी की जा रही है।
वहीं देवघर में भी ईडी की छापेमारी चल रही है। देवघर में संयुक्त बिहार के मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस नेता के आवास सहित कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी चल रही है। बता दें कि देवघर में कांग्रेस के नेता और 20 सूत्री उपाध्यक्ष मुन्नम संजय के आवास पर ईडी की कार्रवाई चल रही है।
जमीन कारोबारी अभिषेक झा के आवास पर भी ईडी की टीम पहुंची है और छापेमारी कर रही है। अभिषेक झा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित विनोदनंद झा के पोते हैं। पूर्व में मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट से वो चुनाव भी लड़ चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के करीबी और उनकी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष के घर पर छापेमारी की है। ईडी ने शनिवार को कहा कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामले में एनसीपी के पूर्व कोषाध्यक्ष ईश्वरलाल जैन, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों के परिसरों पर छापेमारी की है।
इस दौरान तलाशी में 1.1 करोड़ रुपये नकद और करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य के 39 किलोग्राम सोने-हीरे के आभूषण जब्त किये हैं। ईडी सूत्रों ने बताया कि ये छापेमारी महाराष्ट्र के जलगांव, नासिक और ठाणे में जैन के 13 ठिकानों पर की गयी।
इस दौरान ईडी अधिकारियों ने मोबाइल फोन से ऐसे दस्तावेज बरामद किए हैं जो जैन के बेटे मनीष द्वारा नियंत्रित रियल्टी फर्म में लक्जमबर्ग इकाई से 50 मिलियन यूरो के एफडीआई प्रस्ताव का संकेत देते हैं। ईडी अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी में जलगांव में 2 बेनामी संपत्तियों के अलावा, राजमल लखीचंद समूह से संबंधित 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 60 संपत्तियों का विवरण भी इकट्ठा किया गया है।
ईडी के अधिकारियों ने कहा कि जैन द्वारा नियंत्रित 3 ज्वेलरी फर्मों के खातों की जांच के दौरान, उन्हें पता चला कि राजमल लखीचंद समूह से जुड़ी पार्टियों के माध्यम से फर्जी खरीद-बिक्री सौदों के जटिल जाल के माध्यम से ऋण दिये गये और प्रमोटरों ने उस पैसे को अचल संपत्तियों में निवेश किया है।
बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीबीआई की दिल्ली इकाई ने राजमल लखीचंद ज्वैलर्स, आरएल गोल्ड और मनराज ज्वैलर्स और इसके प्रमोटरों- ईश्वरलाल जैन, मनीष जैन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ तीन बैंक धोखाधड़ी के केस दर्ज की थीं।
आरोप है कि जैन ने कथित तौर पर भारतीय स्टेट बैंक से 353 करोड़ रुपये का ऋण लिया और उसका भुगतान नहीं किया। इन्हीं प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पॉस्को कानून के तहत लागू किये जाने वाले नियमों और प्रावधानों पर अमल और इनकी निगरानी के वास्ते दिशा-निर्देश तय करने के लिए सभी हितधारकों की एक समिति बनाने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जे अरविंद कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश उत्तर प्रदेश के ललितपुर में 13 साल की नाबालिग से सामूहिक बलात्कार के घिनौने मामले में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की ओर से अगस्त 2022 में दायर की गई समादेश याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को सभी सहायक व्यक्तियों (सपोर्ट पर्संस), उनकी शैक्षणिक योग्यता और अब तक कितने मामलों में उनकी नियुक्ति हुई है, की सूची तैयार करने के आदेश भी दिये। शीर्ष अदालत ने सहायक व्यक्तियों की योग्यता के मानदंड तय करने की रूपरेखा बनाने और उनके नियमित अंतराल पर प्रशिक्षण पर भी जोर दिया।
साथ ही उसने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि सहायक व्यक्तियों के वेतन-भत्ते तय करते समय वह उनके कौशल और अनुभव को भी ध्यान में रखे। खंडपीठ ने जिला बाल सुरक्षा इकाइयों से बाल सुरक्षा संगठनों से जुड़े सहायक व्यक्तियों के नाम साझा करने को भी कहा है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नियम 12 के तहत बाल कल्याण समितियों द्वारा पॉक्सो के मामलों की रिपोर्टिंग के मानदंडों पर समुचित अमल सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनायी जाये।
साथ ही शीर्ष अदालत ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय को चार अक्तूबर से पहले सहायक व्यक्तियों की ड्यूटी और सेवाशर्तों से जुड़ी चीजें तय करने के लिए राष्ट्रव्यापी दिशानिर्देश तैयार करने को कहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्लूसीडी) जैसे सभी हितधारकों को पॉक्सो अधिनियम के खंड 39 के तहत सभी प्रासंगिक नियमों व प्रावधानों पर सख्ती से अमल सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सभी सहायक व्यक्तियों को कुशल मजदूर मानते हुए उन्हें न्यूनतम वेतन कानून, 1948 के नियमों के अनुसार भुगतान करने को कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि सहायक व्यक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना सिर्फ एक सलाह या निर्देशिका नहीं बल्कि पीड़ित का कानूनी अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि यौन शोषण के शिकार बच्चों की सहायता के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत तैयार किया गया नियमों -कानूनों का यह ढांचा प्रशंसनीय है लेकिन आवश्यकता कागज पर मिले इन कानूनी अधिकारों और इन पर अमल की जमीनी हकीकत के फासले को पाटने की है।
इसके लिए सरकारों को अग्रसक्रिय तरीके से ढांचागत तंत्र को मजबूत करने और मानव संसाधनों को इसके हिसाब से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि बच्चों के कोमल मन को यौन शोषण और उत्पीड़न से पहुंचा सदमा अपने आप में भयावह तो है ही, इस घाव को भरने के लिए किसी तरह की सहायता और सुरक्षा नहीं मिल पाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।
इस तरह के अपराधों में मुजरिम को कानून के तहत कड़े से कड़ा दंड मिल जाने भर से बच्चे को न्याय नहीं मिल जाता बल्कि सरकारी मशीनरी द्वारा जांच व मुकदमे की पूरी प्रक्रिया के दौरान उसकी सहायता, देखभाल और उसकी सुरक्षा का विश्वास दिलाने से मिलता है। बच्चे के साथ सचमुच में न्याय हुआ है, यह तभी माना जा सकता है जब उसका अपना गरिमा बोध वापस मिल जाए, वह समाज की मुख्य धारा में लौट आए, खुद को सुरक्षित महसूस करे और भविष्य के प्रति एक उम्मीद जाग जाये।
बीबीए ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों -कानूनों पर अमल में राज्य सरकारों की घोर विफलता, यौन शोषण के शिकार बच्चों को उनके कानूनी हक दिलाने में लापरवाही और उनकी सुरक्षा से समझौतों को उजागर करते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 2022 में यह समादेश याचिका दायर की थी।
याचिका में शीर्ष अदालत को उत्तर प्रदेश के ललितपुर में सामूहिक बलात्कार की शिकार उस दलित लड़की के साथ हुई भयावह घटना से भी अवगत कराया गया जिसमें पांच महीने तक कोई एफआईआर तक नहीं दर्ज की गयी। पांच महीने तक भटकने के बाद पीड़ित बच्ची शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची। लेकिन न्याय में कोई मदद तो दूर थाना प्रभारी ने थाने में ही उसके साथ बलात्कार किया।
ऐसे में पहले से ही सदमे की शिकार बच्ची की क्या हालत हुई होगी, यह अकल्पनीय है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और जाने-माने बाल अधिकार कार्यकर्ता भुवन ऋभु ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2021 के आंकड़ों के अनुसार पॉक्सो अदालतों में सिर्फ दो फीसद मामलों में ही अपराधियों को सजा मिल पाती है।
इस संदर्भ में देखें तो यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। एक व्यक्ति जो सदमे के शिकार बच्चों को ढाढस बंधाये, इलाज कराने और क्षतिपूर्ति दिलाने में उसकी मदद करे और इससे भी कहीं ज्यादा बच्चे व उसके परिवार को जटिल कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करे, ऐसे सहायक व्यक्ति की उपलब्धता पूरी आपराधिक न्याय प्रक्रिया के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी। अब जरूरत सिर्फ इस पर पूरी ईमानदारी से अमल करने की है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना/ रांची। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने के लिए अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गया है। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 25 अगस्त को सुनवाई होगी।
वहीं इस मामले पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना है, ...हम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। वे हमें कितना भी परेशान करें, कुछ नहीं होगा। हमें स्पष्ट है कि हमें क्या करना है। कोई भी उनसे डरने वाला नहीं है। ...हम लड़ेंगे और जीतेंगे।
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