एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दायर रिट पिटीशन पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तिथि निर्धारित की थी। जिसपर अब 18 सितंबर को सुनवाई होगी। न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस और न्यायाधीश बेला एम त्रिवेदी की पीठ में याचिका पर सुनवाई होगी।
बताते चलें कि हेमंत सोरेन की ओर से 15 सितंबर को होनेवाले रिट पिटीशन की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने इस बिंदु पर अभी कोई फैसला नहीं किया है।
मुख्यमंत्री की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि उनके वकील की तबीयत खराब है। इस कारण वह 15 सितंबर को निर्धारित सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। इसलिए अदालत सुनवाई की दूसरी तिथि निर्धारित करे।
एबीएन सोशल डेस्क। अब वह महिलाएं भी मिस यूनिवर्स बनने का सपना पूरा कर सकती हैं जो अपनी उम्र के कारण इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाती थी। पूरी दुनिया की एक से बढ़कर एक महिलाओं को एक मंच पर लेकर आने वाले वार्षिक इंटरनेशनल सौंदर्य प्रतियोगिता मिस यूनिवर्स में एक बार फिर बढ़ा बदलाव होने जा रहा है।
मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के इतिहास में पहली बार उम्र में कोई पाबंदी नहीं होगी। न्यूयॉर्क फैशन वीक में टान्नर फ्लेचर के ब्यूटी पेजेंट शो के दौरान मिस यूनिवर्स 2022 आर बोनी गेब्रियल ने यह ऐलान किया है।
मिस यूनिवर्स ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेने के लिए आयु सीमा हटा दी गई है। इससे पहले मिस यूनिवर्स उम्मीदवार की उम्र 18 से 27 वर्ष के बीच रखी गई थी। अब तक की सबसे उम्रदराज मिस यूनिवर्स का ताज पहनने वाली आर बोनी गेब्रियल खुद पिछले रिकॉर्ड को तोड़ चुकी हैं।
2022 की विजेता वर्तमान में 29 वर्ष की थी, इससे पहले उनसे कम उम्र की लड़कियों के सिर पर ही ये ताज सजा था। हालांकि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएंगी। मिस यूनिवर्स विजेता ने न्यूयॉर्क फैशन वीक में कहा- उम्र किसी महिला की प्रतिस्पर्धा करने और महानता हासिल करने की क्षमता में बाधा नहीं है।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर कार्रवाई की है। जिनमें
टीम एबीएन, रामगढ़/ रांची। झारखंड में स्थित सिद्धपीठ रजरप्पा मंदिर प्रसिद्ध स्थानों में एक है। यहां बड़े से बड़े नेता और अभिनेना अपना मत्था टेकने के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार से जुड़ा है।
अब झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से रजरप्पा मंदिर और टैगोर हिल का सौंदर्यीकरण करने का निर्देश दिया है। झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।
जिसमें पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मोरादाबादी क्षेत्र में 300 मीटर ऊंची पहाड़ी के ऊपर की संरचनाओं को प्राचीन स्मारक के रूप में स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का भी आदेश दिया।
एक अन्य जनहित याचिका में, अदालत ने सरकार को रामगढ़ जिले के रजरप्पा में 10 महाविद्याओं में से शुमार प्रतिष्ठित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के उचित रखरखाव का भी आदेश दिया।
सोसाइटी फॉर प्रिजर्वेशन आफ ट्राइबल कल्चर एंड नेचुरल ब्यूटी ने जनहित याचिका दायर कर हाईकोर्ट से एएसआई को टैगोर हिल पर संरचनाओं को प्राचीन स्मारकों के रूप में संरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
एएसआई ने यह कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया था कि संरचनाएं 100 साल से अधिक पुरानी नहीं हैं और प्राचीन स्मारक की श्रेणी में आने के योग्य नहीं हैं। रवींद्रनाथ के बड़े भाई ज्योतिरींद्रनाथ टैगोर लेखक, समाज सुधारक, संगीतकार और चित्रकार थे। उन्होंने बचपन में रवीन्द्रनाथ को उनके व्यक्तित्व को आकार देने के लिए कई तरह से प्रेरित किया।
ज्योतिरींद्रनाथ ने जगह खरीदी और एक घर तथा एक ब्रह्म मंदिर (ध्यान लगाने के लिए एक संरचना) का निर्माण किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि इसी घर में ज्योतिरिंद्रनाथ ने बाल गंगाधर तिलक की गीता रहस्य का मराठी से बंगाली में अनुवाद किया था और याचिकाकर्ता ने कहा कि बाद में इसके ऊपर बने शांति धाम नाम के घर का उद्घाटन 1910 में किया गया।
चार मार्च, 1925 को ज्योतिरींद्रनाथ का वहीं निधन हो गया। हाल में पारित आदेश में झारखंड हाईकोर्ट ने एएसआई को पहाड़ी के ऊपर की संरचनाओं को प्राचीन स्मारक के रूप में स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी है। मुख्यमंत्री ने इस कड़ी में प्रथम श्रेणी के पदाधिकारी मनोज कुमार विद्यार्थी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, चाईबासा के विरूद्ध पीई दर्ज करने की अनुमति दिये जाने के प्रस्ताव पर अनुमोदन दिया है।
मामले के सत्यापनकर्ता पुलिस निरीक्षक द्वारा समर्पित प्रगति प्रतिवेदन के अनुसार आरोपी मनोज कुमार विद्यार्थी की गिरफ्तारी के उपरांत उनके घर की तलाशी में बरामद 9,05,200 रुपये के संबंध में आरोपी के द्वारा रिश्वत लेने एवं रिश्वत की रकम को अपने किराये के मकान में रखने के आरोप को प्रथम द्दष्टया सत्य पाया गया। आरोपी एवं आरोपी की पत्नी के नाम से पटना, रांची एवं उनके पैतृक गांव में करोड़ों की अचल संपत्ति होने का उल्लेख किया गया है।
मामले में गुप्त रूप से सत्यापन के क्रम में यह बात प्रकाश में आयी है कि आरोपी मनोज कुमार विद्यार्थी ने ठेकेदारों द्वारा किये गये कार्यों के बिल भुगतान करने के एवज में प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत लिया करते थे।
टीम एबीएन, हजारीबाग। जिला व्यवहार न्यायालय के अपर जिला सत्र न्यायाधीश षष्टम कसिका एम प्रसाद की अदालत ने अपनी गर्भवती पत्नी और एक वर्षीय पुत्री की हत्या के दोषी पति आनंद कुमार दांगी को मौत की सजा सुनायी है।
दोषी आनंद कुमार दांगी ने वर्ष 2018 में अपनी पत्नी अंगिरा कुमारी (जो घटना के समय गर्भवती थी) और अपने एक वर्षीय पुत्री की धारदार हथियार से हत्या कर शव को कुएं में फेंककर फरार हो गया था।
घटना के बाद मृतक के पिता प्रीतम दांगी ने चौपारण थाना में मामला कांड संख्या 315-18 के तहत दर्ज कर अपने दामाद आनंद कुमार दांगी को आरोपी बनाया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने शव के साथ हथियार भी बरामद किया था।
पुलिस जांच से खुलासा हुआ था कि आनंद कुमार दांगी का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध था। वह अपनी पत्नी और पुत्री को रास्ते से हटाने के लिए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।
कोर्ट ने गवाहों और प्रदत साक्ष्य के आधार पर पति आनंद दांगी को दोषी पाते हुए धारा 302 में फांसी की सजा सुनायी। एक अन्य धारा में भी उसे दोषी पाया गया है। इस मामले में अभियोजन की ओर से पीपी भरत राम ने इस घटना को जघन्यतम अपराध की श्रेणी में रखते हुए कोर्ट से मौत की सजा देने की मांग की थी। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
टीम एबीएन, रांची। बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी (कांड संख्या आरसी 48एध्96 )को लेकर सीबीआइ की विशेष अदालत ने दोषियों की सजा पर फैसला सुना दिया है। शुक्रवार को कोर्ट ने 35 दोषियों को 4-4 साल की सजा और अधिकतम एक करोड़ राशि तक का जुर्माना भी लगाया है। यह सजा सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने दी है।
सबसे अधिक एक करोड़ का जुर्माना तत्कालीन जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ गौरी शंकर प्रसाद पर पर लगाया है। सभी दोषियों को उम्र और आरोप के हिसाब से जुर्माना लगाया गया है। इनमें सबसे कम जुमार्ना 75 हजार का लगाया गया है। डा गौरीशंकर प्रसाद के पुत्र आपूर्तिकर्ता शरद कुमार पर 40-40 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं देने पर नौ लोक सेवकों को डेढ़ साल एवं 26 आपूर्तिकर्ताओं को एक साल अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
विशेष न्यायाधीश विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान तीन अभियुक्त को छोड़ अन्य अभियुक्त व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। जो उपस्थित नहीं उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक रवि शंकर ने आरोप के अनुसार अधिकतम सजा की मांग की।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने स्वास्थ्य एवं उम्र को देखते हुए कम से कम सजा देने का अनुरोध किया। अदालत ने 35 अभियुक्तों को 28 अगस्त को दोषी पाकर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया था।
अदालत ने नौ लोक सेवकों को भादवि की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दोषी पाकर सजा सुनायी है। दोषी करार एक अभियुक्त सुरेश दुबे फरार है। गिरफ्तारी या सरेंडर के बाद सजा सुनायी जायेगी। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
लोकसेवकों : पशुपालन पदाधिकारी डॉ गौरी शंकर प्रसाद को एक करोड़ का जुर्माना। बजट एवं लेखा पदाधिकारी नित्यानंद कुमार सिंह पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक डॉ जुनूल भेंगराज, सहायक निदेशक डॉ कृष्ण मोहन प्रसाद, क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक डॉ राधा रमन सहाय को पांच-पांच लाख का जुर्माना। सुअर पालन विभाग के मैनेजर डॉ रवींद्र कुमार सिंह व विलेज आफिसर डॉ फणिंद्र कुमार त्रिपाठी को 75-75 हजार, कोषागार पदाधिकारी महेंद्र प्रसाद व देवेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव को तीन-तीन लाख जुर्माना लगाया गया है।
आपूर्तिकर्ता : शरद कुमार- 40.40 लाख, डॉ बिजयेश्वरी प्रसाद सिन्हा- 36.10 लाख, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद - 30 लाख, दयानंद प्रसाद कश्यप - 30 लाख , मोहिंद्र सिंह बेदी - 25 लाख, डॉ अजित कुमार वर्मा- 24.50 लाख, राम नंदन सिंह- 16 लाख, सत्येंद्र कुमार मेहरा - 16 लाख, अजय कुमार सिन्हा - 13.05 लाख, सुशील कुमार सिन्हा - 12 लाख, उमेश दुबे- 11 लाख, रामा शंकर सिंह -10 लाख, अरुण कुमार वर्मा-10 लाख, रवि नंदन कुमार सिन्हा उर्फ रवि कुमार सिन्हा -10 लाख , राजेंद्र कुमार हरित - 10 लाख, प्रदीन वशिष्ठ उर्फ प्रदीप कुमार - 6 लाख, श्याम नंदन सिंह - 5.50 लाख, संजय कुमार- 5.20 लाख , अनिल कुमार - 5 लाख, मो सईद व मो तौहिद-5- 5 लाख, राजन मेहता. 5 लाख, अशोक कुमार यादव- 4.40 लाख, जगमोहन लाल कक्कड़ - 4.40 लाख, मदन मोहन पाठक- 4 लाख, प्रदीप कुमार चौधरी - 3.80 लाख।
इस मुकदमे में 617 गवाहों को पेश किया गया है, जबकि 50 हजार से ज्यादा एविडेंस और डॉक्यूमेंट पेश किये गये। 28 अगस्त को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 35 लोगों को बरी किया था। वहीं, 53 लोगों को 3 साल से कम की सजा सुनायी थी।
टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने झारखंड में जमीन हड़पने और धोखाधड़ी के एक मामले से जुड़ी धनशोधन जांच के तहत 161 करोड़ रुपये से अधिक के 3 भूखंड कुर्क किये हैं। ईडी ने इस मामले में नया आरोपपत्र भी दायर किया है।
संघीय एजेंसी ने इस मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 2 बार पूछताछ के लिए बुलाया है, लेकिन वह उसके सामने पेश नहीं हुए और समझा जाता है कि उन्होंने ईडी की कार्रवाई के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की है।
समझा जा रहा है कि सोरेन को अगले सप्ताह पेश होने के लिए नये सिरे से समन भेजा गया है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रांची के चेशायर होम रोड, पुगरू और सिरम में स्थित इन तीन भूखंडों का व्यावसायिक मूल्य 161.64 करोड़ रुपये हैं।
ईडी ने एक बयान में बताया कि इन्हें धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। एजेंसी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें 2011 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी छवि रंजन शामिल हैं।
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